Category: सरकार

  • जनता स्वस्थ रहे इसलिए ज्यादा डाक्टर बना रहेःराजेन्द्र शुक्ला

    जनता स्वस्थ रहे इसलिए ज्यादा डाक्टर बना रहेःराजेन्द्र शुक्ला

    भोपाल, 26 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजेन्द्र शुक्ला ने आज विधानसभा में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि आमजन को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ उपचार उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता के लिए व्यापक कार्ययोजना पर अमल किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि प्रदेश में डाक्टरों की कमी दूर करने के लिए एमबीबीएस में 1000 औ पोस्ट ग्रेजुएट विशेषज्ञता के लिए आठ सौ सीटें बढ़ाई गईं हैं। भारत सरकार हर लोकसभा क्षेत्र में एक मेडीकल कालेज खोलना सुनिश्चित कर रही है। इससे आने वाले समय में लोगों को डाक्टरी सुविधाएं सुलभ हो जाएंगी।

    विधानसभा में अपने वक्तव्य के दौरान मंत्री ने बताया कि जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाओं के उन्नयन का कार्य तेज गति से चल रहा है। कई अस्पतालों में आईसीयू और मातृ-शिशु वार्डों का विस्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी दूर करने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाया जा रहा है, जिससे दूरस्थ अंचलों के मरीजों को भी बेहतर उपचार मिल सके।

    मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के दायरे को बढ़ाया गया है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को निशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि दवाओं और जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु अस्पतालों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।

    विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए श्री शुक्ला ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है। टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार कर विशेषज्ञ चिकित्सकों को ग्रामीण क्षेत्रों से जोड़ा जा रहा है।

    अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार के समन्वित प्रयासों से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होगा और आम नागरिकों को बेहतर एवं त्वरित चिकित्सा सेवाएं प्राप्त होंगी।

  • लोक कल्याण के लिए सख्त कार्रवाई बोले पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह

    लोक कल्याण के लिए सख्त कार्रवाई बोले पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह

    भोपाल, 25 फरवरी (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में लोक निर्माण विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने विभागीय कार्यों, गुणवत्ता नियंत्रण और पारदर्शिता पर विस्तृत वक्तव्य दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सड़क और पुल निर्माण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हमने लोक निर्माण से लोक कल्याण का जो लक्ष्य तय किया है उसे सार्थक करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

    मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि पिछले 13 महीनों में विभाग द्वारा 875 से अधिक औचक निरीक्षण किए गए। इन निरीक्षणों के आधार पर चार इंजीनियरों को निलंबित किया गया और 25 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। उन्होंने बताया कि गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट प्रणाली को और सुदृढ़ किया जा रहा है तथा प्रत्येक बड़े कार्य के लिए चरणबद्ध तकनीकी परीक्षण अनिवार्य किए गए हैं। निर्माण कार्यों में मानक सामग्री के उपयोग और समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर मॉनिटरिंग तंत्र सक्रिय किया गया है।

    भोपाल में चर्चित तथाकथित “90 डिग्री पुल” के संदर्भ में मंत्री ने कहा कि पुल का वास्तविक कोण 119 डिग्री है और इसे स्वीकृत डिजाइन के अनुरूप बनाया गया है। तकनीकी पेचीगदियों के बीच इस पुल को इसी प्रकार बना पाना संभव हुआ है। उन्होंने बताया कि मामले की तकनीकी जांच कराई गई है और यदि कहीं प्रक्रिया में त्रुटि पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी जोड़ा कि भविष्य में डिजाइन स्वीकृति और साइट सुपरविजन के बीच बेहतर समन्वय के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं।

    विपक्ष की ओर से सड़क निर्माण की गुणवत्ता, गड्ढों की समस्या और अधूरी परियोजनाओं को लेकर प्रश्न उठाए गए। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने इंदौर-भोपाल क्षेत्र की परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए जवाब मांगा। इस पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि मेट्रो परियोजना लोक निर्माण विभाग के अधीन नहीं आती, जबकि विभागीय सड़कों और पुलों पर निर्धारित भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) मानकों के अनुसार कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने रखरखाव मद में अतिरिक्त प्रावधान का प्रस्ताव रखा है, ताकि गड्ढा-मुक्त सड़कों का लक्ष्य समयबद्ध तरीके से हासिल किया जा सके।

    चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे की टिप्पणी पर मंत्री ने कहा कि सदन में गंभीर विषयों पर रचनात्मक बहस होनी चाहिए। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि विकास कार्यों को राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाए। मंत्री ने यह भी बताया कि लोक शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए ‘लोकपथ’ एप को अपग्रेड किया गया है, जिससे नागरिक सीधे फोटो और लोकेशन टैग के साथ शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त विभाग ‘पीएम गति शक्ति’ प्लेटफॉर्म पर परियोजनाओं का डेटा एकीकृत कर रहा है, ताकि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़े और दोहराव से बचा जा सके।

    मंत्री राकेश सिंह ने यह जानकारी भी दी कि ग्रामीण संपर्क सड़कों के उन्नयन के लिए चरणबद्ध योजना तैयार की गई है, जिसके तहत दूरस्थ और आदिवासी अंचलों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली सड़कों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में हजारों किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण और मजबूतीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे परिवहन लागत घटेगी और कृषि-उद्योग गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर सुधारात्मक कार्य किए जा रहे हैं।

    सदन में सड़कों पर आवारा पशुओं से दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं का मुद्दा भी उठा। मंत्री ने कहा कि यह विषय बहु-विभागीय है और स्थानीय निकायों व पशुपालन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर समाधान की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रमुख राजमार्गों पर चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर और प्रकाश व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं।

    विधानसभा में दिए गए इस विस्तृत वक्तव्य के माध्यम से मंत्री राकेश सिंह ने जहां विभाग की उपलब्धियों को रेखांकित किया, वहीं कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने का भरोसा भी दिलाया। बजट सत्र में लोक निर्माण विभाग पर हुई यह चर्चा प्रदेश में अधोसंरचना विकास की दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करती है।

  • भागीरथपुरा मुद्दे पर सदन में चर्चा नहीं हो सकतीःविधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर

    भागीरथपुरा मुद्दे पर सदन में चर्चा नहीं हो सकतीःविधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर

    भोपाल, 20 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश विधानसभा का आज का सत्र हंगामेदार रहा।विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि कि नियमों के अनुसार जो मुद्दा चर्चा में एक बार आ चुका है उसे स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा में दोबारा नहीं लाया जा सकता है।  प्रश्नकाल से लेकर शून्यकाल और ध्यानाकर्षण तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सदन की कार्यवाही निर्धारित समय पर शुरू हुई, लेकिन कुछ ही देर में विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया, जिससे माहौल गरमा गया।

    विधानसभा में भागीरथपुरा पर आए स्थगन प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने नियमों का हवाला देते हुए खारिज कर दिया है।  विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा की मांग पर व्यवस्था देते हुए कहा कि विधानसभा की नियमावली के नियम 55 के उपखंड 5 के अनुसार सत्र में लाए गए स्थगन प्रस्ताव में  उस विषय की चर्चा नहीं हो सकती है जिस पर  सदन के उसी सत्र में चर्चा हो चुकी है। उन्होंने व्यवस्था देते हुए कहा कि  19 फरवरी 2026 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का प्रश्न इसी विषय पर चर्चा में था जिस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं उत्तर दिया था। इसके अलावा अन्य सदस्य भी इस विषय पर प्रश्न कर चुके हैं। इन सभी के उत्तर सदन में पटल पर हैं। उन्होंने कहा कि उपखंड 7 के अनुसार सदन में  उस विषय पर भी चर्चा नहीं हो सकती है जो किसी जांच आयोग के समक्ष है या न्यायालय में विचारधीन है।  उन्होंने कहा कि इस घटना पर स्वयं न्यायालय ने संज्ञान लिया है। न्यायालय ने इस पर आयोग बनाया है। आयोग को सिविल कोर्ट के अधिकार दिए गए हैं। आयोग ने अपनी सुनवाई शुरु कर दी है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए भागीरथपुरा के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा नहीं हो सकती है।

    प्रश्नकाल के दौरान कृषि, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रश्नों पर विपक्षी सदस्यों ने सरकार से जवाब तलब किया। कांग्रेस विधायकों ने प्रदेश में समर्थन मूल्य पर खरीदी, खाद की उपलब्धता और युवाओं के लिए सरकारी भर्तियों की स्थिति पर विस्तार से जानकारी मांगी। जवाब में संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों और युवाओं के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है तथा लंबित भर्तियों की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। इस दौरान कुछ पूरक प्रश्नों को लेकर तीखी बहस हुई और अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा।

    शून्यकाल में बिजली दरों में संभावित वृद्धि और नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के दावों के बावजूद आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ डाल रही है। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि राज्य में बुनियादी ढांचे पर ऐतिहासिक निवेश हो रहा है और बिजली आपूर्ति की स्थिति पहले से बेहतर हुई है।

    सदन में सबसे अधिक विवाद तब हुआ जब हाल ही में सामने आए एक कथित जमीन आवंटन प्रकरण पर चर्चा की मांग की गई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस मामले में पारदर्शिता नहीं बरती गई और उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है। इस पर सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष मुद्दों को राजनीतिक रंग देकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। कुछ समय के लिए विपक्षी सदस्य आसन के समीप आ गए और नारेबाजी की, जिसके चलते अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    स्थगन के बाद कार्यवाही पुनः शुरू हुई तो ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चर्चा हुई। ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और दवाओं की उपलब्धता को लेकर विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। स्वास्थ्य मंत्री ने जवाब देते हुए बताया कि नए पद सृजित किए गए हैं और टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ करने के लिए विशेष अभियान चला रही है।

    वित्तीय अनुशासन और बजट प्रावधानों को लेकर भी बहस हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि घोषणाएं अधिक और क्रियान्वयन कम है। सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि प्रदेश की विकास दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर है और निवेश प्रस्तावों में निरंतर वृद्धि हो रही है। इस दौरान कुछ सदस्यों के बीच तीखी टिप्पणियां भी हुईं, जिन्हें कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए गए।

    दिन के अंत में अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन संवाद और शालीनता के साथ ही जनता के मुद्दों का समाधान संभव है।

    कुल मिलाकर, आज की कार्यवाही में प्रदेश के कृषि, रोजगार, स्वास्थ्य और वित्तीय प्रबंधन जैसे प्रमुख मुद्दे केंद्र में रहे, वहीं जमीन आवंटन और बिजली दरों से जुड़े विवादों ने राजनीतिक तापमान बढ़ाए रखा। सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की, हालांकि हंगामे के कारण निर्धारित कार्यसूची का कुछ हिस्सा पूरा नहीं हो सका।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी दिनों में भी सदन में इन मुद्दों पर बहस जारी रहेगी और सरकार को विपक्ष के सवालों का विस्तृत जवाब देना होगा। फिलहाल, आज का दिन तीखी बहस और राजनीतिक टकराव के नाम रहा, जिसने विधानसभा के सत्र को फिर से सुर्खियों में ला दिया।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विपक्ष पर पलटवार, विकास के एजेंडे को बताया सरकार की प्राथमिकता

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विपक्ष पर पलटवार, विकास के एजेंडे को बताया सरकार की प्राथमिकता

    राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव:

    भोपाल, 19 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को सरकार की उपलब्धियों और आगामी प्राथमिकताओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। सदन में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने विपक्ष के आरोपों का तीखा प्रतिवाद करते हुए कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की नीतियों और संकल्पों का दस्तावेज है, जिसे राजनीतिक पूर्वाग्रह से नहीं बल्कि सकारात्मक दृष्टि से देखा जाना चाहिए।

    विधानसभा में बजट सत्र के दौरान राज्यपाल मंगूभाई पटेल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी। सत्ता पक्ष की ओर से प्रस्ताव रखे जाने के बाद विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कानून व्यवस्था, किसानों की समस्याओं, बेरोजगारी और पेयजल संकट जैसे विषय उठाते हुए कहा कि अभिभाषण में जमीनी हकीकत का समुचित उल्लेख नहीं है।

    इन आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले एक वर्ष में बुनियादी ढांचे के विकास, निवेश आकर्षित करने, किसानों को राहत देने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को औद्योगिक निवेश के लिए आकर्षक राज्य बनाने के प्रयास जारी हैं और कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने निवेश की रुचि दिखाई है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ा है और समर्थन मूल्य पर खरीद की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया गया है।

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष के हंगामे पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान व्यवधान डालना परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष के सुझावों का स्वागत करती है।

    चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष के बीच हुई बहस से सदन का माहौल कुछ देर के लिए गर्मा गया। हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हुई और कार्यवाही आगे बढ़ी।

    मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में सामाजिक योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं, गरीबों और युवाओं के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं का दायरा बढ़ाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में अधोसंरचना विकास, सड़क निर्माण, सिंचाई परियोजनाओं और शहरी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सुधार को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा कि नए मेडिकल कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों की स्थापना पर कार्य चल रहा है।

    अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण में प्रदेश के सर्वांगीण विकास की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत की गई है और सरकार उस पर प्रतिबद्धता के साथ अमल करेगी। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वह रचनात्मक सहयोग दे ताकि मध्यप्रदेश को विकास के नए आयामों तक पहुंचाया जा सके।

    सदन में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा जारी है और आगामी दिनों में इस पर मतदान की संभावना है। बजट सत्र के दौरान विभिन्न विभागों की मांगों और नीतिगत मुद्दों पर भी व्यापक बहस होने की उम्मीद है।

  • राज्य के विकास काआधार बनेगा केन्द्रीय बजटःडॉ.मोहन यादव

    राज्य के विकास काआधार बनेगा केन्द्रीय बजटःडॉ.मोहन यादव

    भोपाल, 03 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक  हेमंत खण्डेलवाल ने केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार भोपाल में पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। पत्रकार-वार्ता में पार्टी के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह एवं मध्यप्रदेश शासन के उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पत्रकार-वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में और वित मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत के संकल्पों को सिद्ध करने वाला है। केंद्रीय बजट मध्यप्रदेश के आर्थिक-औद्योगिक और सामाजिक विकास का ऐतिहासिक अवसर सिद्ध होगा। पूंजीगत व्यय में वृद्धि, शहरों के विकास व लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम का विकास प्रदेश के लिए वरदान बनेगा। यह बजट सतत आर्थिक विकास के साथ जनअपेक्षाओं को पूरा करने वाला है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने समय-समय पर अपने निर्णयों से देश को सशक्त बनाने के साथ दुनिया को भारत की ताकत का अहसास कराया है। इस बजट के माध्यम से उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार के अनेक अवसर पैदा होंगे। यह केंद्रीय बजट सभी वर्गों की आशा-आकांक्षाओं को पूरा करने के साथ उन्हें सशक्त बनाने में निर्णायक सिद्ध होगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की बताई चार जातियों गरीब, युवा, नारी शक्ति और अन्नदाता के साथ मध्यम वर्ग, उद्यमियों और हर वर्ग के कल्याण व शक्तिकरण के लिए प्रावधान किए गए हैं। केंद्रीय बजट सिर्फ बजट नहीं है, यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत का विजन डॉक्यूमेंट है। यह आने वाले वर्षों में भारत की दिशा तय करने वाला बजट सिद्ध होगा। यह सर्वस्पर्शी, सर्वव्यापी और सर्वसमावेशी बजट है। बजट में तीन कर्तव्यों-आर्थिक विकास, जन-आकांक्षाओं की पूर्ति और ‘सबका साथ, सबका विकास’ की परिकल्पना को साकार किया गया है। बजट में रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। केन्द्रीय बजट में राजकोषीय घाटा को 4.5 प्रतिशत से घटाकर 4.3 प्रतिशत तक लाने का रोडमैप तैयार किया है। देश के कुल कर्ज को जीडीपी के 56 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत तक लाने की भी योजना है। बजट में 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर्स के निर्माण और 12.2 लाख करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर का प्रावधान किया गया है। सेमीकंडक्टर मिशन के लिए निवेश राशि को 22,500 करोड़ से बढ़ाकर 40,000 करोड़ करने का प्रस्ताव है।उन्होंने कहा कि इस बजट से मध्यप्रदेश को भी व्यापक लाभ होगा और यह बजट वर्ष 2047 के विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा।

    मध्यप्रदेश को सुदृढ़ वित्तीय आधार प्राप्त होगा, निवेशकों का विश्वास और बढ़ेगा- डॉ. मोहन यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह बजट युवा शक्ति प्रेरित बजट है। इस बजट का मूल उद्देश्य तेज एवं सतत आर्थिक वृद्धि, जन आकांक्षाओं की पूर्ति, क्षमता निर्माण तथा सभी परिवारों, क्षेत्रों और सेक्टरों को समान अवसर उपलब्ध कराना है। बजट में आत्मनिर्भरता को मार्गदर्शक सिद्धांत बनाकर उच्च विकास दर बनाए रखने के स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। यह बजट मध्यप्रदेश को सुदृढ़ वित्तीय आधार प्रदान करेगा। साथ ही निवेशकों का विश्वास और बढ़ेगा, जिससे मध्यप्रदेश के विकास की रफ्तार और तेज होगी और हमारा प्रदेश आत्मनिर्भर बनेगा। बजट में वैश्विक बाजारों से जुड़ाव, निर्यात विस्तार तथा दीर्घकालिक निवेश आकर्षण की रणनीति है, जिसका बहुत फायदा आने वाले सालों में मध्यप्रदेश को मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल वित्तीय प्रावधानों का संकलन नहीं है, बल्कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस आधारित आर्थिक विकास का संरचित रोडमैप है। यह बजट मध्यप्रदेश को सतत विकासशील राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक भूमिका अदा करेगा। बजट के प्रावधानों से मध्यप्रदेश में निवेश, उद्योग स्थापना, रोजगार सृजन, उत्पादन क्षमता, निर्यात उन्मुख विनिर्माण का बेहतर वातावरण तैयार होगा।

    मध्यप्रदेश स्वास्थ्य और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में तेजी से आगे बढ़ेगा

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बायोफार्म शक्ति योजना से बायोटेक्नोलॉजी, बायो फार्मा, फार्मास्यूटिकल अनुसंधान और हेल्थ इंडस्ट्री आधारित स्टार्ट अप्स को बढ़ावा मिलेगा। मध्यप्रदेश ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रसर होगा, जिससे उच्च मूल्य रोजगार सृजित होंगे। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और एआई आधारित तकनीकों के विकास से मध्यप्रदेश में हाई टेक उद्योग, डिजिटल निवेश और नवाचार आधारित उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। बजट के प्रावधान मध्यप्रदेश के पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगा। ग्रामीण और स्थानीय अर्थव्यवस्था रोजगार तथा औद्योगिक पुनर्जीवन को नई गति प्रदान करेंगे। 200 लेगेसी इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स के पुनर्जीवन से मध्यप्रदेश के पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों में अधोसंरचना सुधार, निवेश पुनर्स्थापन, उत्पादन विस्तार और स्थानीय रोजगार को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट मध्यप्रदेश के एमएसएमई सेक्टर के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। राज्य में उद्यमिता, स्वरोजगार तथा औद्योगिक विस्तार को मजबूती मिलेगी। मध्यप्रदेश के लघु एवं मध्यम उद्योग अधिक प्रतिस्पर्धी, आत्मनिर्भर और विस्तार उन्मुख बनेंगे। मध्यप्रदेश को आईटी, पर्यटन, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में यह बजट महती भूमिका निभाएगा।

    ग्रामीण क्षेत्र के साथ नारी शक्ति को आर्थिक सशक्तिकरण देगा बजट

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बजट में वर्ष 2047 तक भारत को वैश्विक सेवा क्षेत्र में नेतृत्व दिलाने की दृष्टि से सेवा क्षेत्र को विकास का प्रमुख चालक बनाया गया है। यह बजट मध्यप्रदेश को आईटी, हेल्थ, एजुकेशन, टूरिज्म और प्रोफेशनल सर्विसेज के केंद्र के रूप में विकसित होने में सहायक सिद्ध होने के सथ भारत को सेवा क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व भी दिलाएगा। बजट में 10 हजार करोड़ की लागत से देश के प्रत्येक जिलों में महिला छात्रावास स्थापना का के साथ नारी शक्ति के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने 1.5 लाख सेवा प्रदाताओं और एक लाख स्वास्थ्य पेशेवरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। लखपति दीदी योजना पर आधारित सामुदायिक स्व-सहायता समूह उद्यम स्थापित करने का प्रावधान है, इससे महिलाओं को क्रेडिट लिंक्ड आजीविका से उद्यम स्वामित्व की ओर जाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट के इन प्रावधनों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी ही, साथ ही यह बजट नारी शक्ति को आर्थिक सशक्तिकरण देने वाला होगा। सिटी ईकोनॉमिक रीजन के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में नियोजित आर्थिक विकास, औद्योगिक व्यावसायिक क्लस्टरिंग और आधुनिक अधोसंरचना का निर्माण होगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश के प्रमुख शहर संगठित आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित होंगे, जिससे  निवेश अनुकूल शहरी अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा।

    बजट मध्यप्रदेश के आर्थिक विकास के नए द्वार खोलता है

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह बजट मध्यप्रदेश के लिए आर्थिक विकास के नए द्वार खोलता है, जहां उद्योगों को सरल प्रक्रियाएं, निवेशकों को भरोसेमंद वातावरण, युवाओं को रोजगार के अवसर, महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण, एमएसएमई को संस्थागत समर्थन और नागरिकों को बेहतर सेवाए प्राप्त होंगी। यह बजट मध्य प्रदेश के सर्वांगीण विकास, समावेशी प्रगति और दीर्घकालिक आर्थिक समृद्धि का एक मजबूत आधार बनेगा। साथ ही एक निवेश-आकर्षक, विकासोन्मुख और भविष्य-उन्मुख अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा। यह बजट मध्यप्रदेश के लिए तेज विकास, संरचनात्मक परिवर्तन और सतत समृद्धि की एक सशक्त विकास यात्रा का प्रारंभ बिंदु सिद्ध होगा, जो राज्य के सामाजिक आर्थिक भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अत्यंत सहायक एवं परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगा।

    प्रदेश की प्रतिभाओं के बलबूते फार्मा सहित सभी क्षेत्रों में लगाएंगे छलांग

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य्रदेश अपनी प्रतिभाओं के बलबूते पर फार्मा सहित सभी क्षेत्रों में लंबी छलांग लगाएगा। सेमीकंडक्टर बड़ा सेक्टर है। मैं सेमीकंडक्टर को लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री से कल ही बात करके आया हूं। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 भारतीय तकनीक है, जिसके आधार पर मध्यप्रदेश में अत्याधुनिक उद्योग, डिजिटल निवेश के साथ देश के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। हमारे प्रदेश में जो उद्योग चल रहे हैं, वह अधिकांश परंपरागत आधारित हैं। आगे बढ़ने के लिए रिनोवेशन के साथ और अधिक प्रभावी कार्य किया जाएगा। मध्यप्रदेश में पहले कॉटन इंडस्ट्री चलती थी, लेकिन रिनोवेशन नहीं होने से वह डूब गई थी। प्रधानमंत्री मोदी जी ने धार में पीएम मित्र पार्क की सौगात दी है, जिसके आधार पर हमारी सरकार मध्यप्रदेश वस्त्र उद्योग को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि नए उद्योग लगाना अच्छी बात है, लेकिन जो चल रहे हैं उनका संवर्धन करना भी एक बड़ा कार्य है। हमारी सरकार इस क्षेत्र में भी कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए भी पर्याप्त धनराशि दी गई है। मध्यप्रदेश में प्रमुख शहर संगठित और आर्थिक रूप से समृद्ध होंगे और संरचना निवेश मॉडल मध्य प्रदेश के लिए अत्यंत लाभकारी होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदृष्टि आर्थिक विकास के नए राह दिखा रही है। मैं प्रधानमंत्री जी को बधाई देता हूं कि उन्होंने देश के आर्थिक विकास के लिए कई निर्णय लिए हैं। पाकिस्तान हमारे साथ आजाद हुआ। वहां की आर्थिक स्थिति दुनिया में किसी से छिपी नहीं है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश को सशक्त बनाने के साथ दुनिया को भारत की ताकत का अहसास कराया है।भारत को आत्मनिर्भर बनाने, देशवासियों के कल्याण और मध्यम वर्ग को राहत देने वाले इस क्रांतिकारी बजट के लिए यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी का मध्यप्रदेशवासियों की ओर से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

    केंद्रीय बजट सशक्त भारत की नींव को और मजबूती प्रदान करेगा – श्री हेमंत खण्डेलवाल

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित व आत्मनिर्भर भारत के विजन का सशक्त दस्तावेज़ है। गरीब, युवा, नारी शक्ति, अन्नदाता के साथ मध्यम वर्ग और उद्यमियों के कल्याण व सशक्तिकरण के प्रावधान बजट में किए गए हैं। यह सर्वस्पर्शी, सर्वसमावेशी बजट रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म की भावना को दर्शाता है, जो मध्यप्रदेश सहित देश को 2047 के विकसित भारत की ओर मजबूती से ले जाएगा। केंद्रीय बजट को राजनीति के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की नजर से देखना आवश्यक है। देश के कुल कर्ज को जीडीपी के 56 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत तक लाने की भी योजना है। बजट में 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर्स के निर्माण और 12.2 लाख करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर का प्रावधान किया गया है। सेमीकंडक्टर मिशन के लिए निवेश राशि को 22,500 करोड़ से बढ़ाकर 40,000 करोड़ करने का प्रस्ताव है।उन्होंने कहा कि इस बजट से मध्यप्रदेश को भी व्यापक लाभ होगा और यह बजट वर्ष 2047 के विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा। यह बजट भारत को आने वाले वर्षों में विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश तेजी से सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, और बजट 2026 उसी भरोसे और दूरदृष्टि का प्रमाण है। यह केंद्रीय बजट देश के आर्थिक विकास के साथ “रिफॉर्म एक्सप्रेस” की रफ्तार को भी दिखा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में प्रस्तुत केंद्रीय बजट तात्कालिक प्रभाव से अधिक अगले 10-20 वर्षों में भारत की दिशा तय करने वाला है। यह बजट सशक्त भारत की नींव को और मजबूती प्रदान करेगा।

    स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा बजट

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि केन्द्रीय बजट में फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) को 4.5 प्रतिशत से घटाकर 4.3 प्रतिशत तक लाने का रोडमैप तैयार किया है। साथ ही देश के कुल कर्ज को जीडीपी के 56 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत तक लाने की भी योजना है। रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में बड़े निवेश की योजना बनाई गई है, जिससे इस क्षेत्र में चीन की निर्भरता कम होगी। सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा केमिकल पार्क और नए इकोनॉमिक जोन स्थापित करने की भी घोषणा हुई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की 17 दवाइयों पर कस्टम ड्यूटी शून्य कर दी गई है। एक लाख हेल्थ प्रोफेशनल्स की नियुक्ति, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान और हेल्थ टूरिज्म को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। जिला अस्पतालों का उन्नयन कर उनमें ट्रामा सेंटर स्थापित करने संबंधी प्रावधान स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार लाएंगे। महिलाओं के लिए हर जिले में हॉस्टल, डेढ़ लाख केयर वर्कर्स और पेंशनर्स को सुविधाएं देने का भी प्रावधान है। यह महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण के लिए बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि ‘लखपति दीदी’ योजना, पशुपालन में पूंजी सब्सिडी, पशु चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने तथा अमृत सरोवर योजना के माध्यम से रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह निर्णय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे।

    युवाओं को रोजगार दिलाने में महती भूमिका निभाएगी कंटेंट क्रिएटर लैब

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि केंद्रीय बजट में 15 हजार माध्यमिक शालाओं में कंटेंट क्रिएटर लैब की स्थापना, आईआईएम के सहयोग से 10 हजार टूरिस्ट गाइड तैयार करने और ‘खेलो इंडिया’ के माध्यम से खेलों को प्रोत्साहन देने की घोषणाएं की गई हैं। क्रिएटर लैब युवाओं को रोजगार दिलाने में महती भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी देश को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रहे हैं। रक्षा बजट में 15 प्रतिशत की वृद्धि से देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को और बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि बजट में महात्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज की परिकल्पना का पालन करते हुए खादी, हथकरघा, हस्तशिल्प और एक जिला एक उत्पाद को बढ़ावा देने वाला है। रक्षा बजट में 15 फीसदी की बढ़ोतरी देश की सुरक्षा की प्रधानमंत्री जी की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। पूर्वोत्तर राज्यों में बौद्ध स्थलों के संरक्षण, बुनियादी ढांचे के विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का निर्णय प्रधानमंत्री जी की विरासत के विकास के मंत्र को साकार कर रहा है। कैंसर की 17 जीवनरक्षक दवाओं पर कस्टम ड्यूटी शून्य या न्यूनतम कर गरीबों को संबल देने का कार्य किया गया है। यह बजट महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने वाला है। बजट में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक बनाने पर स्पष्ट फोकस किया गया है। पशुपालन और मत्स्य पालन को मजबूती, पूंजी सब्सिडी से पशु चिकित्सकों की संख्या बढ़ेगी और जलाशयों, अमृत सरोवरों के निर्माण से ग्रामीण रोजगार को प्राथमिकता दी गई है।

    पत्रकार-वार्ता के दौरान पार्टी के प्रदेश महामंत्री श्री राहुल कोठारी, प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री आशीष उषा अग्रवाल एवं जिला अध्यक्ष श्री रविन्द्र यति मंचासीन रहे।

  • साईबर तहसील से समय सीमा में होने लगे नामांतरणःकरण सिंह वर्मा

    साईबर तहसील से समय सीमा में होने लगे नामांतरणःकरण सिंह वर्मा

    भोपाल 24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पिछले दो वर्षों में राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, त्वरित और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं।राजस्व विभाग द्वारा चलाए गए अभियानों और तकनीकी नवाचारों से नागरिकों को बड़ी राहत मिली है तथा लंबे समय से लंबित मामलों का तेजी से निराकरण संभव हुआ है।राजस्व मंत्री श्री वर्मा बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों एवं नवाचारों पर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। इस दौरान प्रमुख सचिव राजस्व श्री विवेक पोरवाल, आयुक्त राजस्व श्रीमती अनुभा श्रीवास्तव सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि राजस्व विभाग ने प्रकरणों के त्वरित समाधान के लिए वर्ष 2024-25 में ‘’राजस्व महाअभियान” के तीन चरण संचालित किए,जिनमें एक करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया गया।उन्होंने कहा कि प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए राजस्व न्यायालयों में न्यायिक एवं गैर-न्यायिक कार्यों के लिए पृथक-पृथक अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है 24 जिलों में जिसने राजस्व न्यायालयों के लिए समर्पित अधिकारियों की नियुक्ति कर त्वरित एवं नियमित न्यायिक कार्यवाही सुनिश्चित की है।


    मंत्री श्री वर्मा ने “सायबर तहसील” को विभाग की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि 29 फरवरी 2024 से नामांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस और फेसलेस कर दी गई है। अब 20 दिनों के भीतर नामांतरण पूरा कर आदेश व्हाट्सएप एवं ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है। सायबर तहसील के माध्यम से अब तक 6 लाख 26 हजार से अधिक नामांतरण प्रकरणों का निराकरण किया गया है, जिसके लिए इसे प्रधानमंत्री उत्कृष्टता प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुआ है। आंशिक खसरा प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 8 लाख नागरिक लाभान्वित होंगे तथा विवादित प्रकरणों का आपसी सहमति से त्वरित समाधान संभव होगा।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी में निवासरत नागरिकों को भू-अधिकार पत्र प्रदान किए गए हैं। अब तक 39 लाख 60 हजार से अधिक लोगों को स्वामित्व अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। इस तरह प्रदेश में योजना का 94 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहाँ ड्रोन एवं जियो फेंस तकनीक का उपयोग कर त्रुटिरहित फसल गिरदावरी कराई जा रही है। इससे किसानों को वास्तविक नुकसान का लाभ समय पर मिल सकेगा। वर्ष 2025-26 में अब तक बाढ़ एवं अतिवृष्टि से प्रभावित नागरिकों को 2 हजार 68 करोड़ 99 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है।


    भू-अर्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए आरसीएमएस पोर्टल पर एलएएमएस मॉड्यूल विकसित किया गया है।आरसीएमएस के माध्यम से पिछले दो वर्षों में 41.68 लाख प्रकरणों में से 94% से अधिक प्रकरणों का समय सीमा में निराकरण किया गया। राजस्व संग्रहण में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2024-25 में 700 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 1048 करोड़ रुपये का संग्रहण किया गया है, जबकि वर्ष 2025-26 में 1000 करोड़ रुपये का संग्रहण संभावित है।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि प्रदेश में राजस्व प्रशासन को मजबूत करने के लिए 1974 करोड़ रुपये की लागत से 324 कार्यालय भवन पूर्ण किए जा चुके हैं तथा 114 भवन प्रगतिरत हैं। इसके अतिरिक्त 261 आवासीय भवनों को भी स्वीकृति दी गई है। विभाग को सुदृढ़ करने के लिए 5281 पटवारियों एवं 136 नायब तहसीलदारों की भर्ती की गई है।
    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि भू अभिलेख पोर्टल का नवीन संस्करण 2.0 पूरे प्रदेश में लागू किया गया है, जिससे नागरिक अपनी भूमि का अभिलेख, डिजिटल नक्शा एवं प्रमाणित प्रतिलिपि मोबाइल एप के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।साथ ही भूमि अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का बड़ा अभियान प्रारंभ किया गया है जिसके अंतर्गत 15 करोड़ पुराने अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित किया जाएगा। अब तक 1.59 करोड़ स्कैनिंग पूर्ण की जा चुकी है
    मंत्री श्री वर्मा ने आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना की जानकारी देते हुए कहा कि विभाग द्वारा विश्वास आधारित डायवर्जन प्रक्रिया लागू करने की योजना है। प्रदेश के नक्शाविहीन ग्रामों का नक्शा तैयार किया जायेगा एवं भू-अर्जन प्रकरणों में संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जायेगा।

  • चुनाव नहीं हुए पर सहकारी आंदोलन सफल,विश्वास सारंग का दावा

    चुनाव नहीं हुए पर सहकारी आंदोलन सफल,विश्वास सारंग का दावा

    भोपाल,24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सहकारी पैक्स समितियों तक के चुनाव न कराए जाने से सहकारिता आंदोलन में आम किसानों की सहभागिता समाप्त हो गई है। इसके बावजूद राज्य के सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग का दावा है कि सहकारी आंदोलन सफल हो रहा है।राजधानी के अपेक्स बैंक सभागार में पहले तो उन्होंने खेलों में पदक जीतने वाले युवाओं की सफलता को अपनी कुशलता बताया बाद में सहकारिता के क्षेत्र में केन्द्रीय सहयोग का हवाला देकर अपनी पीठ थपथपाई।


    सरकार के दो साल पूरे होने पर शाबासी लेने पहुंचे मंत्री से जब पूछा गया कि धारा 11 के मापदंडों के अनुसार बैंक पूंजी विहीन हो गए हैं इस पर सरकार क्या कर रही है तो उन्होंने कहा कि हमने बैंकों को पूंजी मुहैया कराई है । उन्होंने कहा कि संस्थाओं के चुनाव कानूनी तौर पर करा लिये जाते हैं इससे हमें कामकाज चलाने लायक वैधानिक अधिकार मिल जाते हैं। सहकारी समितियों ने किसानों को कर्ज भी मुहैया कराया है और वसूली की बिगड़ी चाल भी सुधारी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में हम किसानों को घर घर खाद पहुंचाने की व्यवस्था कर रहे हैं जो देश में अनूठी मिसाल के रूप में गिनी जाएगी।


    कंपनी के तौर पर चलाई जा रही सहकारी योजनाओं के आरोप से असहमति जताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डबल इंजन सरकार की परिकल्पना जहाँ केंद्र और राज्य एक साझा लक्ष्य, साझा गति और साझा परिणाम के साथ काम करते हैं, आज मध्यप्रदेश में ज़मीन पर साकार रूप ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सक्षम नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने बीते दो वर्षों में सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं।


    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी आज राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पदक अर्जित कर देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। वर्ष 2024 में पेरिस (फ्रांस) में आयोजित ओलम्पिक व पैरा ओलम्पिक 2024 में प्रदेश के खिलाड़ियों ने प्रतिभागिता कर पदक अर्जित किये। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी मध्यप्रदेश ने खेलों में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, तमिलनाडु में भी प्रदेश के खिलाड़ियों ने 29 पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसी प्रकार 38वें नेशनल गेम्स, उत्तराखण्ड में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने 67 पदक अर्जित कर राज्यों में तीसरा स्थान प्राप्त किया।


    वर्ष 2024-25 की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री श्री सारंग ने बताया कि प्रदेश के खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कुल 57 पदक तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 391 पदक अर्जित किए। हॉकी एशिया कप 2025, 16वीं एशियन शूटिंग चैंपियनशिप कजाकिस्तान, खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल श्रीनगर एवं एशियन केनो स्लालम चैंपियनशिप चीन में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर प्रदेश को शीर्ष राज्यों की श्रेणी में स्थापित किया है।


    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि किसानों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने हेतु ऑनलाइन केसीसी आवेदन, एकीकृत साख सीमा तथा नकद-वस्तु ऋण की बाध्यता समाप्त करने जैसे सुधार प्रस्तावित हैं। सभी PACS में ई-PACS के माध्यम से ऑनलाइन सेवाएं और SMS सूचना अनिवार्य की जाएगी। उन्होने बताया कि कमजोर जिला सहकारी बैंकों को आर्थिक सहायता देकर 0% ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। डिफॉल्टर किसानों को मुख्यधारा में लाने हेतु एकमुश्त समझौता योजना तथा आर्थिक अनियमितताओं से प्रभावित किसानों को जांच अवधि में राहत देने की व्यवस्था हेतु न्याय योजना प्रस्तावित है।


    मंत्री श्री सारंग ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 के अनुरूप राज्य की सहकारिता नीति में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। जनवरी 2026 में IBPS के माध्यम से 2000 से अधिक पदों पर भर्ती एवं सतत प्रशिक्षण की योजना है। उन्होंने कहा कि CPPP मॉडल के विस्तार से सहकारिता में निजी निवेश और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 अंतर्गत उत्कृष्ट संस्थाओं को पुरस्कृत किया जाएगा तथा जिला सहकारी बैंकों में NEFT/RTGS, QR कोड एवं इंटरनेट बैंकिंग जैसी आधुनिक तकनीकी सुविधाएं लागू की जाएंगी।

  • कर्ज लेकर खरीदा अनाज न बेचा न घोटाला रोक पाया खाद्य विभाग

    कर्ज लेकर खरीदा अनाज न बेचा न घोटाला रोक पाया खाद्य विभाग


    मंत्री गोविंद राजपूत ने माना सरकार पर उधार है खाली गोदामों का किराया


    भोपाल, 24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत आज जब सरकार की दो सालों की उपलब्धियां सुनाने पहुंचे तो पत्रकारों ने उन्हें विभागीय अव्यवस्थाओं को लेकर घेर लिया। पत्रकारों ने पूछा कि जिन ट्रकों से खाद्य विभाग के सील लगे अनाज से भरे बोरे पकड़े गए उनके खिलाफ अब तक आपराधिक प्रकरण क्यों नही दर्ज करवाए गए हैं। इस पर मंत्रीजी निरुत्तर हो गए।


    पत्रकारों ने पूछा कि सरकार कर्ज लेकर खरीदा गया अनाज नहीं बेच पा रही है, अपनी नाकामी छुपाने के लिए वह केन्द्र पर खरीदी करने का दबाव बना रही है। ऐसे में सरकार के दो साल कैसे सफल कहे जा सकते हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि हम आगामी सिंहस्थ को देखते हुए अनाज का भंडारण कर रहे हैं। सिंहस्थ के दौरान हमें करोड़ों लोगों को भोजन कराना पड़ेगा। अनाज खरीदी के लिए हमें बैंकों से कर्ज लेना पड़ता है। सरकार पर ब्याज चुकाने का बोझ बढ़ता जा रहा है ऐसे में हमें केन्द्र से अनुरोध करना पड़ता है। उन्होंने माना कि किसानों ने बड़ी तादाद में भंडारगृह बना लिए हैं ऐसे में सरकार पर किराए की उधारी बढ़ती जा रही है। हम चाहते हैं कि ये गोदाम खाली हों ताकि सरकार को बेवजह किराया न भुगतना पड़े।


    उन्होंने पहले से रटी रटाई कहानी सुनाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने विगत दो वर्षों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, उपभोक्ता संरक्षण, किसान हित तथा गैस आपूर्ति के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। विभाग की ओर से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत प्रदेश के 5 करोड़ 25 लाख से अधिक हितग्राहियों को लगभग 22 हजार 800 करोड़ रुपये मूल्य का नि:शुल्क खाद्यान्न वितरित किया गया। राशन वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम लागू किया गया, जिसके तहत हितग्राहियों को एसएमएस के माध्यम से राशन आगमन एवं वितरण की जानकारी दी जा रही है। इसके अतिरिक्त 26 जनवरी एवं 2 अक्टूबर को ग्राम सभाओं में पात्र हितग्राहियों की सूची का वाचन किया जा रहा है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि विभाग द्वारा ई-केवाईसी प्रक्रिया में उल्लेखनीय प्रगति की गई है। प्रदेश में दो वर्ष में लगभग 1 करोड़ 70 लाख से अधिक हितग्राहियों का ई-केवाईसी सत्यापन पूर्ण किया जा चुका है। अब तक 4 करोड़ 97 लाख हितग्राहियों के ई-केवाईसी कराये जा चुके हैं। इस तरह से अब तक लगभग 93 प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण हो चुके हैं। बायोमेट्रिक के साथ-साथ फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से भी ई-केवाईसी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों, 80 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धों एवं दिव्यांगजनों सहित लगभग 15 लाख हितग्राहियों को ई-केवाईसी से छूट प्रदान की गई है। साथ ही 14 लाख नए पात्र हितग्राहियों को जोड़कर पात्रता पर्ची जारी की गई है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि वन नेशन–वन राशन कार्ड योजना के अंतर्गत प्रतिमाह औसतन 39 हजार परिवार अन्य राज्यों में तथा लगभग 6 हजार परिवार अन्य राज्यों से मध्यप्रदेश में नि:शुल्क राशन प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा लगभग 16 लाख परिवार प्रतिमाह अंतर-जिला पोर्टेबिलिटी का लाभ ले रहे हैं। वहीं जनजाति एवं पहुंचविहीन 89 गांवों में “आपका राशन आपके द्वार” योजना के माध्यम से घर-घर राशन पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री अन्नदूत योजना के अंतर्गत वाहनों में जीपीएस प्रणाली स्थापित कर राज्य स्तरीय कंट्रोल कमांड सेंटर से निगरानी की जा रही है। एलपीजी आपूर्ति के क्षेत्र में उज्ज्वला एवं गैर-उज्ज्वला योजनाओं के अंतर्गत प्रदेश की बहनों की 6 करोड़ 17 लाख गैस रिफिल कराई गईं, जिसमें 911 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। शहरी क्षेत्रों में घर-घर पाइप के माध्यम से गैस पहुंचाने के लिए शहरी गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि वेयरहाउसिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा नमी मापक, फ्यूमिगेशन एवं निरीक्षण से संबंधित तीन मोबाइल ऐप विकसित किए गए हैं, जिससे अनाज भंडारण की रियल टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है। किसान हित में विभाग द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं एवं धान की खरीदी की गई। लगभग 28 लाख किसानों से फसल खरीदी कर 51 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। गेहूं की खरीदी में 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देकर 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया गया।


    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि नाप-तौल विभाग द्वारा विगत दो वर्षों में सत्यापन एवं निरीक्षण के माध्यम से 49 करोड़ 14 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है। निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर 11 हजार 700 प्रकरण पंजीबद्ध कर लगभग 4 करोड़ 50 लाख रुपये की दंड राशि वसूल की गई। उपभोक्ता विवादों के त्वरित निराकरण के लिए उपभोक्ता आयोगों का कंप्यूटरीकरण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप दो वर्षों में 3 लाख 7 हजार से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया। विभाग द्वारा आगामी अवधि में राशन दुकानों को मुख्यमंत्री पोषण मार्ट के रूप में विकसित करने, सॉफ्टवेयर सिस्टम के एकीकरण, उन्नत तकनीक से राशन वितरण तथा सिंहस्थ 2028 के लिए मेला क्षेत्र में राशन एवं गैस आपूर्ति की विस्तृत व्यवस्था किए जाने की कार्य योजना भी तैयार की गई है।

  • राज्य की खेती अब सोलर ऊर्जा से होगी बोले मंत्री राकेश शुक्ल

    राज्य की खेती अब सोलर ऊर्जा से होगी बोले मंत्री राकेश शुक्ल


    नवीन और नवकरणीय ऊर्जा विभाग की उपब्धियों पर मंत्री राकेश शुक्ला ने प्रकाश डाला


    भोपाल23 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश आज ऊर्जा सरप्लस राज्य बनकर सामने आया है। हमने ताप ऊर्जा, जल ऊर्जा, पन बिजली परियोजनाओं के साथ साथ सोलर बिजली बनाने में भी रिकार्ड सफलता पाई है। हमारा प्रयास है कि जल्दी ही राज्य की खेती की जरूरतें हम सोलर ऊर्जा से पूरी कर सकें। इसके लिए हमने इस साल पचास हजार किसानों को सब्सिडी आधारित सोलर पंप देने का फैसला किया है। लगभग चौदह हजार किसानों ने अपनी राशि भी जमा कर दी है ।जिन्हें सब्सिडी आधारित सोलर पंप और पूरा सैटअप दिया जा रहा है।


    विभागीय मंत्री राकेश शुक्ला के साथ ,प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव(आईएएस) और मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (MPUVNL) के प्रबंध संचालक (MD) अमनवीर सिंह बैंस (Amanbir Singh Bains) भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


    श्री बैंस ने बताया कि नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत नवरत्न सीपीएसयू, सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसईसीआई) ने सीपीएसयू योजना के अंतर्गत धार में 200 मेगावाट की सौर परियोजना तथा राज्य में 1000 मेगावाट क्षमता की बैटरी स्टोरेज परियोजना स्थापित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये प्रोजेक्ट राज्य की गैर पारंपरिक ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में मील का पत्थर साबित होगा।


    उल्लेखनीय है कि समझौता ज्ञापन पर शिवकुमार वी वेपाकोम्मा, निदेशक (विद्युत प्रणाली) एसईसीआई और मनु श्रीवास्तव, आईएएस, अतिरिक्त मुख्य सचिव (एनआरई) ने मध्य प्रदेश के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला और आर पी गुप्ता, आईएएस (सेवानिवृत्त) अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एसईसीआई की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए थे।


    200 मेगावाट की सौर परियोजना 500 मेगावाट के उस समझौते का हिस्सा है जिसे 2023 में एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) के साथ 25 साल की अवधि के लिए निष्पादित किया गया था जिसके तहत एसईसीआई राज्य को बिजली की आपूर्ति करेगी। एसईसीआई ने मध्य प्रदेश राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और विकास के लिए 2500 करोड़ रुपये का चरणबद्ध पूंजीगत व्यय प्रस्तावित किया है।

  • हृदय प्रदेश की संस्कृति दुनिया के आकर्षण का केन्द्र बनीःपर्यटन मंत्री सिंह लोधी

    हृदय प्रदेश की संस्कृति दुनिया के आकर्षण का केन्द्र बनीःपर्यटन मंत्री सिंह लोधी


    भोपाल23 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। दुनिया के नक्शे पर मध्यप्रदेश आज भारत की नई सांस्कृतिक पहचान के साथ उभर रहा है। यहां के आतिथ्य संस्कार से आकर्षित होकर प्रदेश में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। राज्य सरकार इसे देखते हुए प्रदेश के तमाम धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों पर ठहरने की आवासीय सुविधाएं बढ़ाने का प्रयास कर रही है। हमारा प्रयास है कि दुनिया भर के पर्यटक मध्यप्रदेश आएं और यहां की विकास यात्रा के सहभागी बनें।


    राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कंवेशन सेंटर में आयोजित पत्रकार वार्ता में संस्कृति मंत्री ने कहा कि भारत के विभिन्न राज्यों की संस्कृति देश के हृदय प्रदेश के कला संसार में साफ तौर पर देखी जा सकती है। हमारे प्रदेश के कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता से दुनिया भर में प्रेम का संदेश दिया है। यही वजह है कि इस साल दुनिया भर से लगभग 14 लाख पर्यटक मध्यप्रदेश आए हैं। हमने अपने धार्मिक शहरों और पर्यटन स्थलों को आपस में जोड़ दिया है। इससे यहां आने वाले पर्यटक एक साथ सभी लक्ष्य पूरे कर लेते हैं।


    उन्होंने पिछले दो सालों में पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभागों की सफलताओं का लेखा जोखा प्रेस के माध्यम से जनता के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के माध्यम से हमें जनता के जो सुझाव मिल रहे हैं हम उनके अनुसार अपने कार्यक्रमों में फेरबदल कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि वैश्विक संवाद के इस महा अभियान में आम जनता की सीधी भागीदारी हो। उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों को लेकर भी उन्होंने कई जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि हम चारों दिशाओं में फोरलेन सड़कों के साथ ठहरने के सुविधायुक्त आवास भी बढ़ा रहे हैं। इससे दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं को एक आत्मिक संतुष्टि मिल पाएगी।

  • गाय अब निबंध नहीं जीवन का अंग बनेगीःराव उदय प्रताप सिंह

    गाय अब निबंध नहीं जीवन का अंग बनेगीःराव उदय प्रताप सिंह

    भोपाल 22 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग प्रायोगिक रूप से राजगढ़ और नरसिंहपुर में आदिशंकराचार्य गुरुकुलम शुरू करने जा रहा है। इन गुरुकुलों में वेद, योग, संस्कृत के साथ गाय को लेकर भी पाठ्यक्रम शामिल रहेंगे।उन्होंने कहा कि अब तक बच्चों को स्कूलों में गाय पर निबंध लिखना सिखाया जाता था पर अब हम उसे दैनंदिनी जीवन का हिस्सा बनाने जा रहे हैं।


    स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने स्कूल शिक्षा विभाग और परिवहन विभाग का दो साल का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए बताया कि हम गाय के बारे में बच्चों को पढ़ाएंगे ताकि नई पीढ़ी गाय के महत्व को आसानी से समझ पाए। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तौर पर ये बात साबित हो चुकी है कि गाय से हमें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। गाय से निरोग रहने के लिए वातावरण मिलता है. गाय को लेकर दूसरे देशों में भी रिसर्च किए जा रहे हैं।


    राव उदय प्रताप सिंह ने बताया “मध्य प्रदेश में 30 हजार से ज्यादा शिक्षकों के खाली पद भरे जाएंगे. इसके अलावा पहली बार ये भी हुआ है कि पात्र शिक्षकों को प्रमोट किया गया है. पहली बार ही 20 हजार से अधिक अतिशेष शिक्षकों का तबादला ऐसे विद्यालयों में किया गया है जहां टीचर्स की कमी है. अब स्कूलों में हाईटेक अटेंडेंस हो रही है, जिसमें करीब 80 प्रतिशत नियमित और 96 फीसदी अतिथि शिक्षकों की जियो टैग एप से हाजिरी दर्ज की जा रही है।


    मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा “राइट टू एजुकेशन के तहत सबसे महत्वपूर्ण काम है कि बच्चों को समय से सिलेबस मिले और सरकार उन्हें किताबें उपलब्ध कराए. किताबें अगर समय पर नहीं मिलती तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है. पिछले वर्ष हमने 100 फीसदी जिन बच्चों को मुफ्त में मिलना चाहिए, हम स्कूल में भेजने में कामयाब रहे. इस साल हम एक कदम और आगे जा रहे हैं. हम विकास खंड स्तर पर बुक फेयर लगाएंगे. बच्चे शासन स्तर पर न्यूनतम दरों पर पुस्तकें खरीद सकते हैं.”


    स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बताया “मध्य प्रदेश में 8 वीं कक्षा तक 86 प्रतिशत बच्चे स्कूलिंग नियमित रख पा रहे हैं. 10वीं तक के बच्चों के प्रतिशत में थोड़ी गिरावट के साथ ये आंकड़ा 54 फीसदी है. वहीं 12वीं तक पहुंच पाने वाले छात्रों की संख्या घटकर 32 प्रतिशत ही रह जाती है. बीते 3 वर्षों में सभी कक्षाओं में ड्रॉपआउट दर में कमी आई है. वर्ष 2024-25 में प्रथामिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 6.8 प्रतिशत से घटकर शून्य हो गई है.”


    स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बताया “पहली कक्षा में पिछले साल के मुकाबले में 19 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है. इसी तरह से नौवीं से 12वीं में इनरोलमेंट करीब 4 फीसदी बढ़ा है. समग्र आईडी के जरिए 90 फीसदी बच्चों की ट्रैकिंग पूर्ण कर ली गई है. जिसमें 6-14 वर्ष के विद्यालय से बाहर के बच्चों को विद्यालय में प्रवेश दिया जा रहा है.”


    एक सवाल के जवाब में मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बताया “मौजूदा स्थिति में प्रदेश के 3367 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा दी जा रही है. जिनमें 17 ट्रेड और 42 जॉब रोल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. बीते दो वर्षों से 690 विद्यालयों में कृषि ट्रेड भी शुरू किया गया है.”
    मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग में कई चुनौतियां हैं, लेकिन बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। हर साल अप्रैल में प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है, जिससे स्कूलों में नामांकन बढ़ा है। इस साल 100 फीसदी किताबें समय पर स्कूलों तक पहुंचाई गईं।


    उन्होंने बताया कि कक्षा 1 में नामांकन पिछले साल की तुलना में 19.6 फीसदी बढ़ा है, जबकि सरकारी स्कूलों में यह बढ़ोतरी 32.4 फीसदी रही। कक्षा 9 से 12 तक के नामांकन में भी 4 फीसदी की वृद्धि हुई है। पिछले तीन सालों में सभी कक्षाओं में ड्रॉपआउट कम हुआ है और साल 2024–25 में ड्रॉपआउट दर घटकर शून्य हो गई।


    मंत्री ने बताया कि अब हर विकासखंड में बुक फेयर लगाया जाएगा। इसमें सरकारी और निजी स्कूलों के बच्चे कम कीमत पर किताबें खरीद सकेंगे। प्रदेश में 30,281 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। 275 संदीपनी और 799 पीएमश्री स्कूलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। डिजिटल शिक्षा पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है। 3,367 स्कूलों में व्यवसायिक शिक्षा शुरू की जा चुकी है। आने वाले तीन सालों में स्कूलों में सीटें बढ़ाने, स्कूल का समय कम करने और आईसीटी लैब स्थापित करने की योजना है।


    राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मालवी, बुंदेलखंडी और निमाड़ी जैसी स्थानीय भाषाओं में किताबें बच्चों को उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा राजगढ़ और नरसिंहपुर में आदि शंकराचार्य गुरुकुल बनाया जाएगा, जहां वेद और योग की शिक्षा दी जाएगी। भोपाल में शिक्षा विभाग की एक बहुमंजिला इमारत भी बनाई जाएगी।


    मंत्री ने बताया कि कक्षा 1 से 8 तक 86 फीसदी, कक्षा 1 से 10 तक 54 फीसदी और कक्षा 1 से 12 तक 32 फीसदी बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं। ड्रॉपआउट रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
    इस मौके पर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय गोयल, परिवहन विभाग के सचिव श्री मनीष सिंह, परिवहन आयुक्त श्री विवेक शर्मा, संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र श्री हरजिंदर सिंह एवं विभागीय अधिकारी भी मौजूद थे।

  • ट्रांसपोर्टरों से वसूला चंदा बांटते तो आलोचना न होतीःराव उदय प्रताप सिंह

    ट्रांसपोर्टरों से वसूला चंदा बांटते तो आलोचना न होतीःराव उदय प्रताप सिंह


    राव उदयप्रताप सिंह ने गिनाई परिवहन विभाग की दो साल की उपलब्धियां


    भोपाल 22 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने भरी पत्रकार वार्ता में स्वीकार किया कि यदि परिवहन माफिया की अवैध वसूली की राशि हम बांटते रहते तो हमारे विभाग की आलोचना नहीं हो रही होती। हमने परिवहन नाके बंद करके जो जांच चौकियां स्थापित की हैं उनसे टैक्स चोरी का गैरकानूनी माल ढोने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। अच्छा कारोबार करने वाले ट्रांसपोर्टरों को परेशान करने वाले अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई है। परिवहन सुधार के कई अन्य कार्यक्रम भी लगातार जारी रहेंगे।


    कुशाभाऊ ठाकरे सभागृह में आयोजित इस पत्रकार वार्ता में प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को लेकर कई तीखे सवाल किए गए । इन सवालों से बचने के लिए मंत्रीजी ने शिक्षा विभाग के कार्यकलापों पर अधिक समय दिया और ट्रांसपोर्ट विभाग की बखिया उधेड़े जाने से बचने का पूरा जतन किया। परिवहन विभाग को लेकर मंत्री ने कहा कि जनवरी से आम जनता को सार्वजनिक परिवहन सेवा का लाभ मिलेगा। वाहन और सारथी पोर्टल पर कई सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। ई-ड्राइविंग लाइसेंस की सुविधा शुरू की गई है और एमपी ऑनलाइन सेंटरों को सुविधा केंद्र के रूप में मान्यता दी गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स पूरी तरह माफ किया गया है और पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने पर टैक्स में छूट दी जा रही है। ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, सतना, सिंगरौली, उज्जैन और देवास में ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं।


    मंत्री ने बताया कि 1 जुलाई 2024 से चेकपोस्ट बंद हैं और चलित व्यवस्था के तहत काम हो रहा है। डेढ़ साल में करीब 6 फीसदी कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। आरटीओ दलालों को लेकर उन्होंने कहा कि सभी सेवाएं ऑनलाइन हैं, जनता को दलालों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए।

  • उपभोक्ताओं से मनमाना शुल्क वसूलने पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की कान खिंचाई

    उपभोक्ताओं से मनमाना शुल्क वसूलने पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की कान खिंचाई


    भोपाल, 21 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर आज सरकार के दो साल पूरे होने पर उपलब्धियां गिनाने पहुंचे तो पत्रकारों ने बिजली बिलों में वसूले जाने वाले अनाप शनाप अधिभारों को लेकर उनकी खिंचाई कर दी। पत्रकारों ने उनसे पूछा कि बिजली सुधारों के नाम पर जब ऊर्जा विभाग ने हजारों करोड़ रुपयों का कर्ज लिया है तो फिर उपभोक्ताओं से ये अतिरिक्त शुल्क की वसूली क्यों की जा रही है। बिजली मंत्री ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि बिजली की मांग बढ़ती जा रही है पर बिजली कंपनियां बिना कटौती बिजली सप्लाई करके देश में मिसाल कायम कर रहीं हैं। स्मार्टमीटर, सब्सिडी और कर्मचारियों की भर्ती करके व्यवस्था में सुधार किया गया है।


    मध्य प्रदेश सरकार में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि अभी 12 दिसंबर को 19,113 मेगावाट की बिजली मांग भी हमने बिना किसी कटौती के पूरी की है। इसके लिए सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में लगातार सुधार किए हैं और बिजली प्रबंधन मजबूत किया है।खेती के लिए अनियमित बिजली सप्लाई के मुद्दे पर श्री तोमर कोई स्पष्टीकरण नहीं दे पाए।


    उन्होंने बताया कि हम 25,081 मेगावाट बिजली खरीदने का अनुबंध करके बिजली की सप्लाई लगातार बनाए हुए हैं। यही वजह है कि मध्यप्रदेश सरप्लस बिजली वाला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 के बाद बिजली कंपनियों में नियमित भर्तियां नहीं हो रहीं हैं इससे हमें अपनी सेवाओं को किराए पर लेना पड़ता है। उन्होंने बताया कि अक्षमता की शिकायतें मिलने के बाद मंत्री परिषद ने बिजली कंपनियों में 50 हजार से अधिक नियमित पदों पर भर्ती को मंजूरी दी है।


    प्रद्युम्न सिंह तोमर ने स्मार्ट मीटर को उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि इनके माध्यम से समय पर और सही बिल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वितरण केन्द्रों के प्रभारी अधिकारी प्रतिदिन पांच उपभोक्ताओं से फोन पर सीधे संवाद कर रहे हैं। स्मार्ट मीटर के जरिए सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक मिलने वाली सस्ती बिजली का लाभ उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है। इस अवधि में की गई खपत पर 20 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है।


    ऊर्जा मंत्री ने दावा किया कि सरकार अलग अलग श्रेणियों के उपभोक्ताओं को बड़ी मात्रा में बिजली सब्सिडी दे रही है। हर माह करीब एक करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं से पहले 100 यूनिट बिजली के लिए केवल 100 रुपये लिए जा रहे हैं। किसानों को देय राशि का मात्र 7 प्रतिशत भुगतान दो किस्तों में करना होता है. अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के एक हेक्टेयर तक भूमि वाले और पांच एचपी पंपधारक किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही है। उनसे जब पूछा गया कि पांच हार्स पावर के पंप धारकों से आठ हार्स पावर का बिल क्यों वसूला जा रहा है तो उन्होंने कहा कि ऐसे मामले सामने आने पर हम कार्रवाई करेंगे।


    उन्होंने बताया कि घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को हर साल करीब 26 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। उद्योगों को भी रियायती दरों पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। इससे सरकार को हर साल लगभग 2,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग और कई सरकारी प्रतिष्ठान तक समय पर बिजली का भुगतान नहीं करते इसलिए हमारी उधारी बढ़कर ग्यारह हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गई है। इसकी भरपाई ऊर्जा विभाग को ही करनी पड़ती है।


    इस मौके पर विभाग के सचिव विशेष गढ़पाले, वित्तीय सलाहकार रंजीत सिंह चौहान,और अन्य प्रमुख अधिकारी भी उपस्थित थे।

  • अब गांवों में जी राम जी से आएगी खुशहालीःप्रह्लाद पटेल

    अब गांवों में जी राम जी से आएगी खुशहालीःप्रह्लाद पटेल


    भोपाल, 19 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री श्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने आज पत्रकारों को बताया कि भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की पहल पर ‘विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025’ या VB-G RAM G (Viksit Bharat – Guarantee For Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin)) के नाम से जो योजना शुरु की गई है वह बेरोजगारी दूर करने में मील का पत्थर साबित होगी।

    इसी तरह प्रधानमंत्री जनमन योजना अब दूर दराज की बस्तियों को भी मुख्य धारा से जोड़ने का कारगर उपाय बनने जा रही है। राजधानी के मिंटो हाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों से मीडिया को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की है। मध्य प्रदेश में श्रमिकों के हित में भी अनेक उल्लेखनीय कार्य हुए हैं।भारत सरकार ने श्रमिकों को रोजगार दिलाने के लिए जो जी राम जी योजना लागू की है वह अब गांवों में खुशहाली लाने का प्रवेश द्वार साबित होगी।


    प्रसन्नता का विषय है कि भारत की संसद ने विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 (विकसित भारत- जी राम जी विधेयक, 2025) को पारित किया है। यह विधेयक मनरेगा में व्यापक वैधानिक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, जो ग्रामीण रोज़गार को विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक विजन के साथ संयोजित करेगा तथा जवाबदेही, बुनियादी ढांचे के परिणामों और आय सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा।गांव के विकास के बिना प्रदेश और राष्ट्र के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। हमारा सौभाग्य है कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में ग्राम विकास है। उनकी भावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश सरकार के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ग्रामीण क्षेत्र के विकास हेतु सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम विभाग का उत्तरदायित्व मिला है। हमारी सरकार ने विगत दो वर्षों में जो कार्य किए हैं उनकी जानकारी इस प्रकार है :-
    विशेष उल्लेखनीय बिंदु
    तीनों स्तर की पंचायतों के कार्यालय भवनों हेतु स्वीकृतियां प्रदान कीं तथा उनकी डिजाइन में परिवर्तन भी किया ताकि भविष्य में उनके ऊपरी मंजिलों का भी निर्माण किया जा सके।
    2472 अटल ग्राम सेवा सदनों (ग्राम पंचायत भवनों) के निर्माण हेतु 922.20 करोड़ की राशि स्वीकृत की।
    106 अटल सुशासन भवनों (जनपद पंचायत भवनों) के निर्माण हेतु 557.08 करोड़ की राशि स्वीकृत की।
    05 अटल जिला सुशासन भवनों (जिला पंचायत भवनों) के निर्माण हेतु 49.98 करोड़ की राशि स्वीकृत की।
    जीवनदायिनी माँ नर्मदा के परिक्रमा पथ को सुगम बनाना हमारी सरकार की प्राथमिकता में है। इस हेतु आश्रय स्थलों के निर्माण हेतु 231 स्थल चिन्हित किए गए हैं। इन स्थलों पर प्रथम चरण में पौधारोपण कार्य हेतु फेंसिंग के लिए 4.13 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। 19 स्थलों पर आश्रय स्थलों एवं यात्री प्रतिक्षालय के निर्माण हेतु 10.5 करोड रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इन आश्रय स्थलों का निर्माण पर्यटन विकास विभाग के माध्यम से प्रारंभ भी हो चुका है।
    नदियों एवं जलवायु का संरक्षण हम सभी की सामूहिक चिंता का विषय है। मैंने प्रदेश की 106 नदियों के उद्गम स्थलों तक की यात्रा की है। हमारी सरकार इन उद्गम स्थलों को संरक्षित एवं संवर्धित करने का प्रयास कर रही है। हमने 89 नदियों के उद्गम स्थलों पर पौधरोपण कार्य हेतु फेंसिंग के लिए 2.92 करोड रुपए की राशि स्वीकृत की है।
    प्रदेश के पुराऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण भी हमारी सरकार की प्राथमिकता में है। हमने तामिया एवं भीमबेटिका क्षेत्र के विकास हेतु मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम को 2 करोड रुपए की राशि स्वीकृत की है।
    प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशान घाटों को सुव्यवस्थित करने का निर्णय हमारी सरकार ने लिया है। इसके लिए दिसंबर, 2026 तक की समय सीमा भी तय की है। इस अवधि में सभी श्मशान घाटों को अतिक्रमण मुक्त करवाकर फेंसिंग उपरांत उनमें पौधरोपण करना तथा उन्हें मुख्य सड़क से एप्रोच रोड बनाकर जोड़ने का कार्य इस अवधि में किया जाएगा।
    प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में प्रदेश ने उल्लेखनीय कार्य किया है इसके प्रथम चरण में 72975 किलोमीटर लंबाई की 18948 सड़कों का निर्माण किया गया द्वितीय चरण में 4891 किलोमीटर की 373 सड़कों का निर्माण हुआ तथा तीसरे चरण में 11886 किलोमीटर की 984 सड़कों का निर्माण किया गया। विगत दो वर्षों में इन तीनों चरणों में 913 किलोमीटर लंबाई की सड़क तथा 305 फूलों का निर्माण किया गया है।
    आरसीपीएलडब्ल्यूईए अंतर्गत 18 अप्रैल 107 किलोमीटर लंबाई की सड़कों का निर्माण हुआ है।
    प्रधानमंत्री जनमन योजना अंतर्गत 1033 संपर्क विहीन बस्तियों हेतु 2218 किलोमीटर सड़क स्वीकृत की गई हैं।
    प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण हेतु 10602 बस हटे चिन्ह अंकित की गई है जिनके लिए 1849 किलोमीटर की स्वीकृति प्रक्रियाधीन है।
    रोजगार गांरटी योजना :-
    कार्यों के स्थल चयन हेतु वैज्ञानिक आधार पर करने हेतु SIPRI सॉफ्टवेयर विकसित
    जल गंगा संवर्धन अभियान 2025 में SIPRI सॉफ्टवेयर से समस्त कार्यों (जैसे खेत तालाब, कूप रिचार्ज, अमृत सरोवर इत्यादि) के उपयुक्त स्थल का चयन
    वर्ष 2025-26 में कुल स्वीकृत लेबर बजट (मानव दिवस) : 1500 लाख, कुल सृजित : 1404 लाख (94%)
    वर्ष 2024-25 में कुल स्वीकृत लेबर बजट (मानव दिवस) : 2000 लाख, कुल सृजित : 1897 लाख (95%)
    राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जनजाति परिवारों को रोजगार देने में मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर
    कैच द रेन अभियान (जल संचय, जन भागीदारी- अप्रैल 2024 से मई 2025) – देश में मध्यप्रदेश को चतुर्थ स्थान एवं खंडवा जिले को प्रथम पुरुस्कार प्राप्त
    एक बगिया माँ के नाम परियोजना अंतर्गत रु 750 करोड़ की लागत से 31,142 कार्य लिए गए।
    माँ नर्मदा परिक्रमा पथ पर चिन्हित आश्रय स्थल के में 138 परिसरों में पौधरोपण कार्य।
    जल गंगा संवर्धन अभियान 2025 अंतर्गत, रु 3000 करोड़ के कार्य लिए गए
    खेत तालाब – 86,360 लागत रु 2048 करोड़
    कूप रिचार्ज – 1,05,203 लागत रु 263 करोड़
    अमृत सरोवर – 536, लागत रु 138 करोड़
    पूर्व वर्षों के प्रगतिरत 24,358 कार्यों की पूर्णता
    जल गंगा संवर्धन अभियान 2024 अंतर्गत रु. 1368 करोड़ के 60,428 कार्य कराये गए।
    राज्‍य ग्रामीण आजीविका मिशन
    लखपति दीदी- Digital Ajeevika register के अनुसार SHG के ऐसे सदस्य जिनके परिवार की मासिक आय ₹10,000 या उससे अधिक है, की श्रेणी में 11,27,037 परिवार पिछले 2 वर्षों में बने।
    135 FPO का टर्नओवर ₹1,608 करोड़। (306 करोड़ रूपये की बढ़ोत्‍तरी)
    प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण
    कुल 11.72 लाख लक्ष्‍य में से 11.46 लाख आवास स्‍वीकृत देश में प्रथम स्‍थान
    PM-JANMAN
    लक्ष्‍य- 1.85 लाख
    स्‍वीकृत- 1.84 लाख
    पूर्ण- 1.29 लाख देश में प्रथम स्‍थान
    स्‍वच्‍छ भारत मिशन
    खुले में शौच मुक्ति के स्थायित्व हेतु 2,87,279 पारिवारिक व्यक्तिगत शौचालय (IHHL) एवं 1,417 सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण।
    16,056 ग्रामों (अब तक कुल 99.35%) ग्राम ठोस अपशिष्ट प्रबंधित (SWM) घोषित।
    4,318 ग्रामों (अब तक कुल 99.46%) ग्राम तरल अपशिष्ट प्रबंधित (LWM) घोषित।
    गोबरधन योजना अंतर्गत 73 बायो गैस सयंत्रों का निर्माण ।
    नवाचार
    सभी ग्राम पंचायतो में CSC ई-गवर्नेंस सर्विस इंडिया लिमिटेड के माध्यम से गैर वित्तीय आधार पर अटल ई-सेवा केन्द्रों का संचालन। 30 नवम्बर तक 1084 पंचायतों में अटल ई-सेवा केंद्र प्रारंभ हो चुके है।
    मुख्यमंत्री वृन्दावन ग्राम योजना 2025 प्रकाशित हो चुकी है। ग्रामों के चयन की गतिविधियां अंतिम चरण में है।
    श्मशान घाटों का सुव्यवस्थित विकास 5वां राज्य वित्त आयोग की अनुदान राशि से किया जाना एवं इस हेतु इस वित्तीय वर्ष की द्वितीय किश्त जारी।
    23,011 ग्राम पंचायतों की वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने हेतु प्लानर सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है।
    विकेंद्रीकृत कौशल प्रशिक्षण – आदिवासी बाहुल्य /नक्सल प्रभावित जिलों में विशेषकर जनजाति समूहों की परंपरागत कला और ज्ञान को संरक्षित, प्रोत्साहित, और व्यवसायिक बनाने के उद्देश्य से कार्यक्रम प्रारंभ।
    नवाचार -स्वच्छता साथी Wash on Wheels सेवा
    ODF के निरंतरता के लिए मोबाइल ऐप द्वारा ऑनलाइन बुकिंग सेवा जिसके अंतर्गत घरेलू एवं संस्थागत शौचालयों की आधुनिक मशीनों एवं उपकरणों के माध्यम से साफ़-सफ़ाई
    प्रशिक्षित स्वच्छता साथियों के द्वारा दो-पहिया वाहन के माध्यम से त्वरित साफ़-सफ़ाई
    सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जाने हेतु पूर्णत: व्यावसायिक मॉडल
    वर्तमान में प्रगति-
    37,499 ग्राम मैप
    1,577 क्लस्टर निर्माण पूर्ण
    1,484 स्वच्छता साथी का पोर्टल पर पंजीकरण पूर्ण
    आगामी 03 वर्षों की कार्य योजना
    नर्मदा परिक्रमा पथ पर चयनित स्‍थलों पर 20 से 25 कि.मी की पारस्‍परिक दूरी पर नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रध्‍दालुओं के लिये सर्वसुविधायुक्‍त आश्रय स्‍थल/यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण।
    सभी पंचायत भवनों में अटल ई-सेवा केन्द्रों का संचालन सुनिश्चित किया जायेगा।
    पंचायत सचिवो एवं अन्य विभागीय रिक्त पदों पर भर्ती सुनिश्चित की जाएगी।
    प्रदेश के समस्त ग्रामीण क्षेत्र के श्मशान घाटों का सुव्यवस्थित विकास एवं निर्बाध पहुंच मार्ग सुनिश्चित किया जाना
    अर्ध शहरी एवं बड़ी ग्राम पंचायतो के व्यवस्थित्त विकास हेतु मध्य प्रदेश ग्राम पंचायत (कॉलोनी विकास) नियमों का युक्तियुक्तकरण करते हुए व्यवस्थित विकास कराया जायेगा|
    ग्रामीण क्षेत्रो में कॉलोनियो के रजिस्ट्रेशन एवं विकास इत्यादि की अनुमति केंद्रीकृत ऑनलाइन व्यवस्था तथा EWS हितग्राहियों संबंधी समस्त जानकारियों का पंचायत दर्पण पोर्टल पर प्रदर्शन|
    पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से पंचायतो का वित्तीय प्रबंधन सुनिश्चित करना|
    पंचायत दर्पण पोर्टल को वस्तु एवं सेवा कर (GST) के पोर्टल से इन्टीग्रेट कर अनिवार्य TDS कटोत्रा सुनिश्चित करना|
    पंचायतो की सशक्त करने के दृष्टिकोण से तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृतियां ऑनलाइन जारी किया जाना |
    मानव संसाधन के बेहतर एवं प्रभावी प्रबंधन हेतु HRMS पोर्टल का प्रभावी उपयोग।
    दोहरी संपर्कता हेतु प्रस्तावित मुख्यमंत्री सुगम संपर्कता परियोजना
    अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों को राष्‍ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना,मुख्‍य जिला सड़क, अन्‍य जिला सड़क इत्‍यादि से जोड़ा जा चुका है।
    कई स्‍थानों पर 02 ग्रामों/पंचायतों/मजरे-टोलों को एक-दूसरे से जोड़ने हेतु व संदीपनी विद्यालय तक संपर्कता की मांग, जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणजनों से प्राप्‍त होती है।
    दो गांव/पंचायत/मजरे-टोले को दोहरी संपर्कता उपलब्‍ध कराए जाने हेतु प्रदेश में मनरेगा अंतर्गत “मुख्‍यमंत्री सुगम सम्‍पर्कता परियोजना” लागू की जा रही है
    प्रदेश में लगभग रु. 1000 करोड़ के कार्य लिए जा सकेंगे (3 करोड़ प्रति जनपद पंचायत)
    कार्य स्थल चयन तथा DPR तैयार करने हेतु RIMS पोर्टल विकसित।
    3300 ग्राम पंचायतों में ग्राम रोजगार सहायक के रिक्त पदों पर नियुक्ति की कार्यवाही
    एक बगिया माँ के नाम अंतर्गत लिए गए 30,000 से अधिक कार्यों को पूर्ण करना तथा कार्बन क्रेडिट से जोड़ना ।
    किचिनशेड के निर्धारित राशि रू. 2.24 – 3.25 लाख में कुल 3000 किचिनशेड में मनरेगा कंवरजेंस से 10 लाख तक के उन्‍नत किचनशेड का निर्माण किया जाना प्रस्‍तावित है। माननीय मुख्‍यमंत्री जी से नामकरण हेतु अनुरोध है।
    पीएम पोषण पोर्टल, निरीक्षण, ऑडिट, AMS, MIS से संबंधित समस्‍त पोर्टल का एक डेशबोर्ड तैयार करना।
    शतप्रतिशत लक्षित शालाओं में नवीन बर्तनों की उपलब्‍धता सुनिश्चित करना।
    शाजापुर की तर्ज में आगामी वर्ष में प्रदेश के समस्‍त सांदीपनी शालाओं में SHG के माध्‍यम से मेकेनाईज्‍ड किचिन शेड का प्रशिक्षण दिया जा कर किचिन शेड का संचालन किया जाएगा।

  • विश्व स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य पूरा करेंगे शहरी निकायःकैलाश विजय वर्गीय

    विश्व स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य पूरा करेंगे शहरी निकायःकैलाश विजय वर्गीय

    भोपाल, 18 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2047 में मध्यप्रदेश की कुल आबादी का लगभग 50 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। इस बात को ध्यान रखते हुए शहरी क्षेत्रों में अधोसंरचना कार्यों की योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में देश में विशिष्ठ स्थान बनाया है। हमारे विभाग की कोशिश होगी कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों का एयर क्वालिटी इंडेक्स अच्छा हो। इस वजह से शहरी क्षेत्रों में बगीचों के विकास के साथ-साथ नगरवन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्री श्री विजयवर्गीय भोपाल में राज्य सरकार के विकास और सेवा के दो वर्ष पूरा होने पर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।
    मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश के जो शहर नर्मदा नदी के किनारे में आते है, वहां शहरों का दूषित पानी नदीं में न मिलें। इस पर विभाग लगातार काम कर रहा है। मेट्रोपॉलिटन सिटी की चर्चा करते हुए मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग ने इंदौर-उज्जैन और भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास का कार्य शुरू कर दिया है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी में भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया है। इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम और धार जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया गया है। प्रदेश की 2 मेट्रोपॉलिटन सिटी इस तरह विकसित की जाएंगी। जहां शहरी आबादी को सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। मेट्रोपॉलिटन सिटी में निवेश और रोजगार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
    मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग की कोशिश है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की अधिक से अधिक सेवाओं का डिजिटलीकरण ऑनलाइन हों। इसको ध्यान में रखते हुए हमने ई-नगरपालिका विकसित की है। प्रदेश के शहरों को ग्रीन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। नगरीय सेवाओं में सोलर एनर्जी का अधिक से अधिक उपयोग किया जाएं। इसको सुनिश्चित किया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि नगरीय निकाय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो। इसके लिये शहरी क्षेत्रों की सम्पत्तियों का जीआई मेपिंग किया जा रहा है।
    प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में एक लाख 60 हजार से अधिक आवासों का निर्माण पूरा। प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश को बेस्ट परफॉर्मिंग अवार्ड की श्रेणी में दूसरा स्थान।
    उल्लेखनीय बिंदु-
    अमृत 2.0 में 300 परियोजनाओं का कार्य पूर्ण।
    जल गंगा संवर्द्धन अभियान में 3 हजार 323 जल संरचनाओं का, 74 जल संग्रहण संरचनाओं का लोकार्पण।
    स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में 8 शहरों का राष्ट्रीय पुरस्कार। साथ ही इंदौर ने देश के नम्बर वन शहर का सम्मान लगातार 8 साल बनायें रखा।
    कार्बन क्रेडिट से राशि अर्जित करने वाले इंदौर देश का प्रथम शहर
    दीनदयाल रसोई योजना में संचालित 56 केन्द्रों को बढ़कर इन्हें 191 केन्द्र किया गया।
    पीएम स्वनिधि योजना अंतर्गत 9 लाख से अधिक रहणी पटरी वालों को 14 लाख से अधिक ऋण प्रकरण मबजूत। मध्यप्रदेश को नवाचार और सर्वोत्तम अभ्यास की श्रेणी में पहला स्थान,
    आजीविकास मिशन में 3 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिलाया गया। 1 लाख 70 हजार युवाओं को स्व-रोजगार से जोड़ा गया।
    प्रदेश में 65 हजार स्व सहायता समूह का गठन। 6 लाख से अधिक परिवारों को स्व-सहायता समूह में जोड़ा गया।
    इंदौर में मेट्रो परिचालन शुरू भोपाल में दिसम्बर 2025 में ही शुरू होगा मेट्रो।
    हाउसिंग बोर्ड द्वारा एमपी ऑनलाईन के माध्यम से 532 करोड़ की सम्पत्तियों का विक्रय।
    गीता भवन स्थापना योजना 5 महीनों के लिये स्वीकृत।
    प्रदेश में इंटीग्रटेड टाउनशिप पॉलिसी-2025 मंजूर। प्रदेश में इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को भी मंजूरी।

  • सीएस बोले विधानसभा तक पहुंचाएं सरकार के कामकाज

    सीएस बोले विधानसभा तक पहुंचाएं सरकार के कामकाज

    भोपाल, 17 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि सरकार के तमाम कामकाज की रिपोर्ट विधानसभा तक पहुंचाएं ताकि आगामी विधानसभा सत्र में उन कार्यों पर सदन में सफल चर्चा हो सके।उनकी अध्यक्षता में विधानसभा के आगामी सत्र की तैयारी और लंबित कार्यों की समीक्षा में उन्होंने प्रश्नों की जानकारियां जल्दी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बैठक में शून्यकाल, अपूर्ण उत्तर, आश्वासन, लोकलेखा समिति की सिफारिशें, विधानसभा में विभागों के प्रशासनिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने पर चर्चा की गयी। मुख्य सचिव श्री जैन ने निर्देश दिए कि सभी विभाग प्रमुख अपने काम समय-सीमा में करें। कार्य की साप्ताहिक समीक्षा भी की जाये।

    मुख्य सचिव श्री जैन ने बैठक में 5 वीं राष्ट्रीय मुख्य सचिव कांफ्रेंस की तैयारियों के भी निर्देश दिये। उन्होंने अतिरिक्त कोर्ट केस, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण, मानवाधिकार आयोग, अनुसूचित जाति/ जनजाति आयोग के प्रकरणों में राज्य शासन की ओर से समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिये।

    बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, श्री जे.एन. कंसोटिया, श्री अशोक वर्णवाल, श्री संजय शुक्ल, श्री मनु श्रीवास्तव, श्रीमती रश्मि अरूण शमी, प्रमुख सचिव श्री विवेक पोरवाल, श्री संदीप यादव सहित विभागों के सचिव, अपर सचिव एवं उप सचिव उपस्थित थे।

  • टोल पर अब ट्रोल नहीं होंगे गडकरी

    टोल पर अब ट्रोल नहीं होंगे गडकरी

    नई दिल्ली,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि जल्दी ही हम ऐसी स्कीम जारी करने जा रहे हैं, जिससे टोल को लेकर लोगों की कोई तकरार नहीं होगी. जो भी हम ऐलान करेंगे, उससे लोगों की दिक्कत दूर हो जाएगी.
    कहीं घूमने जा रहे हो या ऑफिस विजिट का प्लान हो, हर 20-25 किलोमीटर के दायरे में आने वाला टोल और उसकी महंगी फीस हर किसी का दम निकाल देते हैं. हालांकि, अब इस टोल सिस्टम में बड़ा बदलाव होने की उम्मीद है. इसका ऐलान खुद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक टीवी न्यूज चैनल पर किया. उनका कहना है कि सिर्फ तीन दिन में टोल को लेकर बड़ा फैसला होने वाला है. इसके बाद कोई भी उन्हें टोल मंत्री कहकर ट्रोल नहीं कर पाएगा. टोल सिस्टम में क्या बदलाव होगा? क्या नया सिस्टम आ सकता है? अभी किस हिसाब से लगती है फीस? आइए जानते हैं इसके बारे में सबकुछ.

    https://x.com/nitin_gadkari/status/19352715177992032: टोल पर अब ट्रोल नहीं होंगे गडकरी


    गौरतलब है कि एक नेशनल न्यूज चैनल पर नितिन गडकरी ने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया. टीवी एंकर ने उनसे पूछा कि आपके काम की जितनी तारीफ होती है तो टोल मंत्री के रूप में भी आपके काफी ज्यादा मीम्स बनते हैं. मौजूदा वक्त में अगर किसी के सबसे ज्यादा मीम्स बनते हैं तो वह आप हैं. पब्लिक जानना चाहती है कि टोल पर इतने पैसे क्यों वसूले जाते हैं? इस पर नितिन गडकरी ने कहा, ‘पूरी तैयारी हो चुकी है. आज ही मैं आया हूं. दो-चार दिन में हम ऐलान कर देंगे. टोल के बारे में कोई तकलीफ नहीं होगी. मैं ऐसी योजना जाहिर कर रहा हूं, जिससे लोगों को राहत मिलेगी. इससे ज्यादा मैं तीन दिन के बाद खुलासा करूंगा. तब तक नोटिफिकेशन आएगा, उस पर मैं साइन करूंगा और ऐलान कर दूंगा.’

    टीवी एंकर ने पूछा कि क्या मैं अपने करोड़ों दर्शकों को यह बता दूं कि टोल फ्री होने वाला है? या टोल पर कितने फीसदी की छूट मिलने वाली है? इस पर नितिन गडकरी ने कहा कि मैं ऐसा कोई ऐलान नहीं कर रहा हूं. मैं बस इतना कह रहा हूं कि तीन दिन के अंदर हम ऐसी स्कीम जारी करने जा रहे हैं, जिससे टोल को लेकर लोगों की कोई तकरार नहीं होगी. जो भी हम ऐलान करेंगे, उससे लोगों की दिक्कत दूर हो जाएगी. तीन दिन के बाद कोई मुझे ट्रोल ही नहीं करेगा.
    नितिन गडकरी के इस बयान के बाद टोल फीस को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि अब वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर लाइन में नहीं लगना होगा. अब आप अपनी गाड़ी से जितना सफर करेंगे, उतना टोल अपनेआप बैंक खाते से कट जाएगा. कहा जा रहा है कि यह पूरा सिस्टम डिजिटली ऑपरेट होगा. इसके लिए किसी को भी टोल प्लाजा पर जाम में फंसकर वक्त बर्बाद नहीं करना होगा.
    यह भी कहा जा रहा है कि सरकार जल्द ही लाइफटाइम टोल पास लाने को लेकर प्लानिंग कर रही है. इसके लिए प्राइवेट कार यूजर्स को कार की उम्र यानी 15 साल के लिए लाइफटाइम टोल पास बनवाने का विकल्प मिल जाएगा, जिसकी कीमत करीब 30 हजार रुपये मानी जा रही है. इसके बाद उन्हें हर तरह के टोल प्लाजा पर कोई फीस नहीं चुकानी होगी. अब टोल पर सरकार का क्या प्लान है, इसका खुलासा तीन दिन बाद होने की उम्मीद है.
    फिलहाल, देश में हाईवे पर करीब 20 से 30 किलोमीटर के दायरे में टोल प्लाजा बने हुए हैं. एक्सप्रेसवे पर यह दूरी ज्यादा है, लेकिन थोड़ा सफर करने के बाद टोल फीस देनी पड़ती है, जिसका भुगतान फास्टैग से लिया जाता है. टोल प्लाजा का सर्वर डाउन होने या भीड़ ज्यादा होने पर लोगों को जाम में फंसना पड़ता है. माना जा रहा है कि सरकार का नया कदम लोगों को राहत दे सकता है.

  • सामाजिक दायित्व भी निभायगा लोनिवि बोले केबिनेट मंत्री राकेश सिंह

    सामाजिक दायित्व भी निभायगा लोनिवि बोले केबिनेट मंत्री राकेश सिंह

    लोकनिर्माण विभाग द्वारा ‘पर्यावरण से समन्वय’ विषय पर कार्यशाला आयोजित

    भोपाल 5 जून (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के मुख्यालय में आयोजित कार्यशाला में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि उनका विभाग अब अपने सामाजिक दायित्वों का भी निर्वहन मुस्तैदी से करने जा रहा है। विभाग के पर्यावरण हितैषी नवाचार एवं ग्रीन टेक्नोलॉजीस पर केंद्रित कार्यशाला ‘पर्यावरण से समन्वय’ के आयोजन में उन्होंने कहा कि केवल आंकड़ों का जाल बिछाकर हम जनता की कसौटी पर खरे नहीं उतर सकते।

    , भोपाल में आयोजित इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने कहा कि लोक निर्माण विभाग अब केवल भौतिक निर्माणों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल संरक्षण, हरित तकनीकों के उपयोग और पारिस्थितिकी संतुलन को अपनी कार्यप्रणाली में प्राथमिकता के रूप में शामिल करेगा। उन्होंने विभाग की पर्यावरणीय सोच और भविष्य की कार्यनीतियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण में समरसता ही सतत विकास का मार्ग है।

    कार्यशाला में सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री भरत यादव एवं तकनीकी सलाहकार श्री आर के मेहरा, प्रमुख अभियंता श्री केपीएस राणा, प्रमुख अभियंता श्री एस आर बघेल, भवन विकास निगम के प्रमुख अभियंता श्री अनिल श्रीवास्तव, सभी मुख्य अभियंता और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से परिक्षेत्र स्तर पर सभी विभागीय इंजीनियर उपस्थित थे। इस प्रकार कार्यशाला में कुल 1141 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

    मंत्री श्री सिंह ने कहा कि “लोक निर्माण से लोक कल्याण” केवल एक नारा नहीं बल्कि विभाग की बुनियादी कार्यनीति है, जिसमें अब पर्यावरणीय संतुलन भी स्वाभाविक रूप से शामिल है। उन्होंने कहा कि विकास की गति के साथ-साथ प्रकृति का संरक्षण अब हर अभियंता की जिम्मेदारी है। मंत्री श्री सिंह ने विभाग के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग औपनिवेशिक काल से ही जल संरक्षण और संचयन के कार्यों में अग्रणी रहा है और वर्तमान में भी यह परंपरा नैतिक जिम्मेदारी रूप में आगे बढ़ रही है।

    भूजल स्तर में गिरावट को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए मंत्री श्री सिंह ने कहा कि जल संरक्षण की दिशा में विभाग द्वारा कई ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि विभाग सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली मिट्टी का युक्तियुक्त उपयोग कर ‘लोक कल्याण सरोवर’ का निर्माण कर रहा है। इस पहल के अंतर्गत सरोवरों की डिजाइनिंग, सौंदर्यीकरण, वृक्षारोपण, सूचना पटल और जियो-टैगिंग की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि 500 लोक कल्याण सरोवरों के निर्माण का लक्ष्य है।

    इंदौर जिले की मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि पीएम गतिशक्ति पोर्टल के माध्यम से 2 किलोमीटर रेडियस में सरकारी जमीन और निचले क्षेत्र चिन्हित कर 200 से अधिक स्थानों की पहचान की गई। शीघ्र ही गांधीनगर स्थित भास्कराचार्य संस्थान के सहयोग से पीएम गतिशक्ति पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जाएगा। मंत्री श्री सिंह ने यह भी बताया कि वे स्वयं 20 सरोवरों का निरीक्षण करेंगे और सभी प्रमुख अभियंता 10-10 सरोवरों का निरीक्षण करेंगे।

    मंत्री श्री सिंह ने बताया कि विभाग अब सड़क किनारे रिचार्ज बोर का निर्माण कर रहा है, जिससे वर्षा जल को भूगर्भ में पहुंचाकर ग्राउंड वाटर रिचार्ज किया जा सकेगा। जबलपुर एलिवेटेड कॉरिडोर पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग का प्रावधान किया गया है। वर्तमान और निर्माणाधीन फ्लाईओवर एवं आरओबी में रैनवाटर हार्वेस्टिंग के लिये जरूरी प्रावधान करने के निर्देश जारी कर दिए गए है। 

    मंत्री श्री सिंह ने जानकारी दी कि विभाग ने ट्री-शिफ्टिंग कार्य को SOR में शामिल किया है, जिससे निर्माण के साथ-साथ पेड़ों का संरक्षण भी संभव हो रहा है। भोजपुर-बंगरसिया मार्ग के 4 लेन चौड़ीकरण कार्य में प्रभावित 450 से अधिक पेड़ों को शिफ्ट किया जाएगा। और इसी प्रकार अब अन्‍य मार्गों पर भी पेड़ो को काटने के बजाय उन्‍हें शिफ्ट करने पर जोर दिया जाएगा।

    मंत्री श्री सिंह ने प्रधानमंत्री जी द्वारा शुरू किए गए “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि लोक निर्माण विभाग 1 जुलाई 2025 को एक लाख पौधे लगाएगा। यह अभियान स्कूलों में चल रहे ‘एक पेड़ माँ के नाम 2.0’ से भी समन्वित होगा। उन्होंने इंजीनियरों से आग्रह किया कि वृक्षारोपण स्थलों की पहचान करें, प्रजातियों का चयन करें, जिम्मेदारियाँ तय करें और परिवार के साथ वृक्षारोपण कर सोशल मीडिया पर फोटो साझा करें। ठेकेदारों को भी इस अभियान में शामिल कर प्रोत्साहित किया जाएगा।

    विभाग द्वारा हरित भवन निर्माण की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि ऊर्जा दक्ष डिज़ाइन, पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री और नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग विभागीय भवनों में अनिवार्य किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लंबी अवधि में परिचालन लागत भी घटेगी।

    मंत्री श्री सिंह ने आगामी मानसून को दृष्टिगत रखते हुए 8 से 10 जून तक राज्यव्यापी सड़क निरीक्षण अभियान चलाने की घोषणा की। इसमें सभी अभियंता सड़कों की स्थिति, जलभराव, गड्ढों और रखरखाव की जरूरतों का आंकलन करेंगे। रिपोर्ट 11 जून तक ऑनलाइन पोर्टल पर प्रस्तुत की जाएगी और आवश्यक मरम्मत कार्य 20 जून तक पूर्ण कर लिए जाएंगे। 

    लोकपथ मोबाइल एप पर प्राप्त शिकायतों के निराकरण की समय सीमा वर्तमान में 7 दिवस निर्धारित की गई है, जो कि विशेष रूप से कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तय की गई है। हालांकि, सामान्य परिस्थितियों में मरम्मत कार्य अधिकतम 3 दिवस (72 घंटे) में पूरा किया जाना अपेक्षित है। उन्होंने कहा कि सड़कें गड्ढामुक्त रहें और मानसून के दौरान परिवहन में कोई बाधा न आए, यह विभाग की प्राथमिकता है।

    कार्यशाला के अंत में मंत्री श्री राकेश सिंह ने स्पष्ट किया कि पर्यावरणीय संरक्षण अब विभाग के हर कार्य की अनिवार्य शर्त बन चुका है। उन्होंने जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण को लेकर विभाग के लिए पांच प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए— 

    – प्रदेश में 500 लोक कल्याण सरोवरों का निर्माण, 

    – 01 जुलाई 2025 को एक अभियान के रूप में एक लाख वृक्षारोपण, 

    – सड़क किनारे दस हजार ‘रिचार्ज बोर’ निर्मित करने 

    – सभी फ्लाई ओवर एवं एलीवेटेड कॉरिडोर्स पर रैन वाटर हार्वेस्टिंग और

    – भोजपुर-बंगरसिया मार्ग के 4 लें चौड़ीकरण कार्य में प्रभावित 450 से अधिक पेड़ों की शिफ्टिंग 

    उन्होंने कहा कि ये आंकड़े मात्र लक्ष्य नहीं, बल्कि “लोक निर्माण से लोक कल्याण” के संकल्प की मूर्त अभिव्यक्ति हैं। आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के  ‘कैच द रेन’ अभियान और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी के ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ में लोक निर्माण विभाग भी अपनी सहभागिता दर्ज करने का संकल्प ले रहा है।

    मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक भरत यादव ने कहा कि निर्माण कार्यों को अब केवल भौतिक अधोसंरचना तक सीमित न रखते हुए पर्यावरण संरक्षण को उसका अनिवार्य अंग बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में लोक कल्याण सरोवरों का निर्माण, पौधारोपण, जल संरक्षण, ग्रीन बिल्डिंग एवं रेन वॉटर हार्वेस्टिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई । उन्होंने यह भी कहा कि इन कार्यों में समाज की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

    एमडी श्री यादव ने जानकारी दी कि इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं में सौर ऊर्जा और पौधारोपण के प्रावधान शामिल किए गए हैं। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्यों की नियमित निरीक्षण प्रणाली में अब पर्यावरणीय बिंदुओं को भी सम्मिलित किया जाएगा ताकि निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण कर सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

    सड़क विकास निगम की तकनीकी सलाहकार श्री आर के मेहरा ने अपने प्रस्तुतीकरण में सड़क किनारे वृक्षारोपण के संबंध में इंडियन रोड कांग्रेस के नियम एवं ट्री शिफ्टिंग प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। 

    प्रमुख अभियंता श्री के.पी.एस. राणा द्वारा पर्यावरणीय दृष्टिकोण से सड़क निर्माण के महत्व पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने सतत विकास की दिशा में सड़क किनारे हरियाली और रिसाइक्लिंग के प्रयासों को रेखांकित किया।

    प्रमुख श्री जी.पी. वर्मा द्वारा “एलीवेटेड फ्लाईओवर एवं रेनवॉटर हार्वेस्टिंग” पर प्रस्तुतीकरण किया गया। साथ ही आरएसटीआई के तकनीकी सलाहकार श्री आर.के. मेहरा द्वारा पोथोल्स अभियानों और टी शिफ्टिंग पर विस्तार से जानकारी दी गई।

    भवन निर्माण में ग्रीन टेक्नोलॉजी पर प्रमुख अभियंता श्री एस.आर. बघेल, वहीं पूर्व सड़क निरीक्षण अभियानों की कार्ययोजना पर श्री डी.वी. बोरासी ने प्रस्तुति दी।

  • मुख्यमंत्री से बोले अन्नू कपूर एम पी सबसे प्यारा

    मुख्यमंत्री से बोले अन्नू कपूर एम पी सबसे प्यारा

    भोपाल,11 फरवरी( प्रेस इन्फॉर्मेशन सेंटर),।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आज समत्व भवन मुख्यमंत्री निवास में अभिनेता श्री अन्नू कपूर ने सौजन्य भेंट की। श्री अन्नू कपूर ने कहा कि वे मध्यप्रदेश से हैं और यहां आकर उन्हें आनंद का अनुभव होता है। विशेष रूप से मालवा अंचल की संस्कृति से वे बहुत प्रभावित हैं। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से उनका आत्मीय लगाव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मालवा, मध्यप्रदेश के साथ ही राष्ट्र के गौरव हैं।
    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने श्री अन्नू कपूर द्वारा भारतीय सिने जगत और दूरदर्शन पर अंताक्षरी के माध्यम से राष्ट्र भाषा हिन्दी की सुदीर्घ सेवा के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्री अन्नू कपूर ने शिव तांडव स्रोत एवं अन्य संस्कृत भाषा की रचनाओं की सैकड़ों मंचों पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी है। भारतीय संस्कृति की प्राचीनतम देव भाषा कई भाषाओं की जननी है। इस नाते श्री अन्नू कपूर का योगदान महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आग्रह पर अभिनेता श्री कपूर ने संस्कृत के कुछ श्लोक भी सुनाए। इस अवसर पर श्री अन्नू कपूर ने अपनी कला यात्रा और मध्यप्रदेश के नगरों -कस्बों से उनके संबंध के बारे में भी जानकारी दी। प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री अन्नू कपूर एवं उनके साथी श्री देव कुमार का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया।

  • खनिज नीलामी से एमपी ने कमाए दस हजार करोड़ रुपए

    खनिज नीलामी से एमपी ने कमाए दस हजार करोड़ रुपए

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नवाचारों से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार माइनिंग में नवाचार कर रही है। प्रदेश में सबसे पहले क्रिटिकल मिनरल के 2 ब्लॉक्स को नीलामी में रखा गया है। सबसे अधिक खनिज ब्लॉक्स की नीलामी कर मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर आ गया है। प्रदेश की समृद्ध खनिज सम्पदा और नई खनन नीतियों से राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। खनिज संसाधनों के उपयोग से न केवल राजस्व में बढ़ोत्तरी होगी, बल्कि रोजगार के नये अवसर भी पैदा होंगे। प्रदेश में कोयला, चूना पत्थर, डोलोमाइट और बॉक्साइट जैसे खनिजों का विशाल भण्डार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश खनन के क्षेत्र में अधिक राजस्व प्राप्त कर नई ऊँचाइयाँ छू रहा है।
    प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2023-24 के मुकाबले खनिज राजस्व संग्रह में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई, प्रदेश में पहली बार खनिज राजस्व संग्रह 5 अंकों में पहुंच गया। जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 में इस अवधि में 4 हजार 958 करोड़ 98 लाख रुपये प्राप्त हुए थे। जबकि वर्ष 2024-25 में यह प्राप्ति 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त किया गया है
    मध्यप्रदेश मुख्य खनिज ब्लॉकों की सर्वाधिक संख्या में नीलामी करने में देश में प्रथम स्थान पर है। भारत सरकार द्वारा वर्तमान में स्ट्रैटेजिक एवं क्रिटिकल मिनरल पर देश की आत्म-निर्भरता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे इन खनिजों की आयात पर निर्भरता कम हो सके। प्रदेश द्वारा इस खनिज समूह के अंतर्गत अभी तक ग्रेफाइट के 8 खनिज ब्लॉक, रॉक-फॉस्फेट खनिज के 6 ब्लॉक सफलतापूर्वक नीलाम किये गये हैं। मुख्य खनिज के 20 ब्लॉकों की नीलामी के लिये विभाग द्वारा 9 अगस्त, 2024 को निविदा आमंत्रण सूचना-पत्र (NIT) जारी की गयी है, जिसकी कार्यवाही प्रचलन में है। इसके अतिरिक्त महत्वपूर्ण खनिज गोल्ड के 4 ब्लॉक, मैग्नीज खनिज के 16 ब्लॉक एवं कॉपर का एक ब्लॉक अभी तक सफलतापूर्वक नीलाम किये गये हैं। भारत सरकार द्वारा जनवरी-2024 में एक्सप्लोरेशन नीति प्रभावशील की गयी। इस नीति के तहत मध्यप्रदेश राज्य द्वारा क्रिटिकल मिनरल के 2 ब्लॉक नीलामी में रखे गये हैं। मध्यप्रदेश केंद्र सरकार की इस नीति का क्रियान्वयन करने वाला पहला राज्य बन गया है। खनिज अन्वेषण के क्षेत्र में भी प्रदेश प्रथम स्थान पर है। प्रदेश में स्ट्रेटेजिक एवं क्रिटिकल मिनरल, मुख्यत: रॉक-फास्फेट, ग्रेफाइट, ग्लूकोनाइट, प्लेटिनम एवं दुर्लभ धातु (आरईई) के लिये कार्य किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 11 क्षेत्रों पर अन्वेषण कार्य किया गया।
    प्रदेश में जिला खनिज विभाग के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्य, जिसमें पेयजल, चिकित्सा, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, स्वच्छता, कौशल विकास और वृद्ध, विकलांग कल्याण के लिये 16 हजार 452 परियोजनाएँ स्वीकृत की गयी हैं, जिनकी लागत 4406 करोड़ रुपये है। इनमें से 7 हजार 583 परियोजना लागत 1810 करोड़ रुपये का कार्य पूर्ण हो गया है।
    प्रदेश में खनिज के अवैध परिवहन रोकने के लिये एआई आधारित 41 ई-चेकगेट स्थापित किए जा रहे हैं। ई-चेकगेट पर वेरीफोकल कैमरा, आरएफआईडी रीडर और ऑटोमेटिक नम्बर प्लेट रीडर की सहायता से खनिज परिवहन में संलग्न वाहन की जाँच की जा सकेगी। परियोजना में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में खनिज परिवहन के लिये महत्वपूर्ण 4 स्थानों पर ई-चेकगेट स्थापित कर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। अवैध परिवहन की निगरानी के लिये राज्य स्तर पर भोपाल में कमाण्ड एवं कंट्रोल सेंटर तथा जिला भोपाल एवं रायसेन में जिला कमाण्ड सेंटर स्थापित किया गया है। इस वर्ष तक सभी 41 ई-चेकगेट की स्थापना किये जाने का लक्ष्य है।
    अवैध खनन की रोकथाम के लिये उपग्रह और ड्रोन आधारित परियोजना प्रारंभ की गयी है। इस परियोजना के माध्यम से 7 हजार खदानों को जियो टैग देकर खदान क्षेत्र का सीमांकन किया गया है। यह परियोजना पूर्ण रूप से लागू होने पर अवैध खनन को चिन्हित कर प्रभावी कार्यवाही हो सकेगी। परियोजना के लागू होने पर स्वीकृत खदान के अंदर 3-डी इमेजिंग तथा वॉल्यूमेट्रिक एनालिसिस कर उत्खनित खनिज की मात्रा का सटीक आँकलन किया जा सकेगा। माइनिंग में नवाचारों से प्रदेश की आर्थिक प्रगति सुनिश्चित होगी, साथ ही इससे मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर खनिज उत्पादक राज्य के रूप में नई पहचान मिलेगी।
    मध्यप्रदेश सरकार निजी क्षेत्र को प्रदेश के प्रचुर खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिये प्रोत्साहित कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में हाल ही में भोपाल में आयोजित माइनिंग कॉन्क्लेव में कई बड़ी कम्पनियों ने माइनिंग सेक्टर में निवेश की इच्छा जताई है। कॉन्क्लेव में 20 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार ने खनिज क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिये कई सुधार किये हैं। इनमें पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया, पर्यावरण-अनुकूल खनन और स्थानीय समुदायों को मुनाफे में भागीदारी देने जैसे कदम शामिल हैं।
    प्रदेश के पन्ना जिले में देश का एकमात्र हीरे का भण्डार है। हीरा खदान से प्रतिवर्ष एक लाख कैरेट हीरे का उत्पादन होता है। मलाजखण्ड कॉपर खदान भारत की सबसे बड़ी ताम्बा खदान है। इस खदान से प्रतिदिन 5 से 10 हजार ताम्बा निकाला जाता है। भारत के कुल ताम्बा भण्डार का 70 प्रतिशत ताम्बा मध्यप्रदेश में है। राज्य में स्थित सासन कोयला खदान भी अपने विशाल खनन उपकरणों के लिये प्रसिद्ध है। मध्यप्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य है। प्रदेश में लाइम-स्टोन, डायमण्ड और पाइरोफ्लाइट जैसे खनिज संसाधन हैं।
    मध्यप्रदेश के जिलों में खनिज के भण्डार हैं, जिसमें सतना, रीवा और सीधी में लाइम-स्टोन, बॉक्साइट, ग्रेफाइट, गोल्ड और ग्रेनाइट, सिंगरौली में कोयला, गोल्ड और आयरन, शहडोल, अनूपपुर और उमरिया में कोयला, कोल बेड, मिथेन और बॉक्साइट, छतरपुर, सागर और पन्ना में डायमण्ड, रॉक फास्फेट, आयरन, ग्रेनाइट, लाइम, डायस्पोर और पाइरोफ्लाइट, जबलपुर और कटनी में बॉक्साइट, डोलोमाइट, आयरन, लाइम-स्टोन, मैग्नीज, गोल्ड और मार्बल, नीमच और धार में लाइम-स्टोन, बैतूल में कोयला, ग्रेफाइट, ग्रेनाइट, लीड और जिंक, छिंदवाड़ा में कोयला, मैग्नीज और डोलोमाइट, बालाघाट में कॉपर, मैग्नीज, डोलोमाइट, लाइम-स्टोन और बॉक्साइट, मण्डला और डिण्डोरी में डोलोमाइट और बॉक्साइट, ग्वालियर और शिवपुरी में आयरन, फ्लेग-स्टोन और क्वार्ट्ज, झाबुआ और अलीराजपुर में रॉक फस्फेट, डोलोमाइट, लाइम-स्टोन, मैग्नीज और ग्रेफाइट के भण्डार हैं।
    के.के. जोशी (लेखक जनसंपर्क विभाग में उप संचालक है।)