Category: सुनहरा पर्दा

  • बिहारियों से एलर्जी है तो एंटी हिस्टामाईन दवा खाएंः अनुराधाशंकर सिंह

    बिहारियों से एलर्जी है तो एंटी हिस्टामाईन दवा खाएंः अनुराधाशंकर सिंह


    भोपाल, 23 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।भारत के कई राज्यों में बिहारियों को निशाना बनाया गया लेकिन धीरे धीरे लोगों ने उनकी भूमिका का मह्त्व स्वीकार कर लिया। बिहारियों से जिन्हें एलर्जी है उनके लिए तो हम केवल यही कह सकते हैं कि वे एंटी एलर्जी दवाई खाकर अपना काम चलाएं। आज का बिहार तेज गति से आगे बढ़ रहा है और वह अपना परम वैभव पाकर ही रहेगा। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी मर्मभेदी रचनाओं से भारत के गौरव का गान किया और तरुणायी को जाग्रत किया था । बिहार फाऊंडेशन के भोपाल चेप्टर ने बिहारियों के योगदान को रेखांकित करने के लिए कवि दिनकर की रचनाओं के साथ जो अनुष्ठान प्रारंभ किया है वो सार्थक नतीजे लेकर सामने आएगा।
    भोपाल के कवि दुष्यंत संग्रहालय सभागृह में आयोजित राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जयंती समारोह में सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक अनुराधा शंकर ने कहा कि बिहारी शब्द विहार से निकला है। हंगरी में भी एक बिहार प्रांत है। बिहारी होने का अर्थ घूमंतु होना है। मौर्य वंश, मगध साम्राज्य, गुप्त वंश, भगवान बुद्ध, जैनियों के 23 तीर्थंकरों ,अष्टावक्र,वाचस्पति, मंडन मिश्र,चंपारन सत्याग्रह जैसे अनेकानेक कारणों की वजह से बिहार हमेशा से भारत की अभिन्न पहचान रहा है। जिस तरह बिहार फाऊंडेशन ने यहां एक समृद्ध विरासत का गरिमावंदन शुरु किया है वह सराहनीय है।
    उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर के विश्व प्रसिद्ध हिंदी कविता अनुवाद सीपी और शंख की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे प्रकृति की महिमा गाते हुए कहते हैं कि ..मत छुओ इस झील को, कंकड़ी मारो नहीं, पत्तियां डारो नहीं, फूल मत बोरो,और कागज की तरी इसमें नहीं छोड़ो। खेल खेल में तुमको पुलक उन्मेष होता है, लहर बनने में सलिल को क्लेश होता है। बिहार के मौजूदा हालात में दिनकर की इन पंक्तियों का महत्व समझा जा सकता है।
    आयोजन की अध्यक्षता कर रहे पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि चंपारन सत्याग्रह से बिहार ने कर्मवीर गांधी को महात्मा गांधी बना दिया था। जयप्रकाश आंदोलन तक कांग्रेस ने देश पर एकछत्र राज्य किया लेकिन इसके बाद उसकी सत्ता डोल गई। तब राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने लिखा था कि
    हुंकारों से महलों की नींव उखड़ जाती,
    सांसों के बल से ताज हवा में उड़ता है,
    जनता की रोके राह,समय में ताव कहां?
    वह जिधर चाहती,काल उधर ही मुड़ता है।
    दो राह,समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
    सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।
    उन्होंने कहा कि राजनेताओं को बिहार से उपजे उस जनांदोलन से सबक सीखना चाहिए। यदि व्यापार ही सत्ता का लक्ष्य हो जाएगा तो मानवता नष्ट होने लगेगी। तब सरकारों को जनता के कोप का सामना भी करना पड़ेगा।
    तकनीकी शिक्षा विभाग में अपर संचालक संजय कुमार ने कहा कि छायावादी कविताओं के बाद दिनकर की ओज और राष्ट्रीयता भरी कविताओं ने देश की दिशा बदल दी थी। उन्होंने जिस तरह कर्ण के त्याग को रेखांकित किया उससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है और वे जान पाते हैं कि प्रतिभाएं कष्ट में रहकर ही उभरती हैं।
    प्रसिद्ध साहित्यकार प्रियदर्शी खैरा, एचएन मिश्रा एवं अन्य लोगों ने भी राष्ट्रकवि दिनकर की कविताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वे आज भी देश के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
    बिहार फाऊंडेशन के भोपाल चेप्टर के अध्यक्ष राधा मोहन प्रताप सिंह ने देश को गढ़ने में बिहारी साहित्यकारों के योगदान को रेखांकित किया। सेंट्रल स्कूल से सेवा निवृत्त साहित्यकार श्रीमती रागिनी सिंह ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कवि दिनकर की कविताओं के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान के लिए सभी आगंतुकों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

  • जब सेना हस्तक्षेप नहीं करती तो सवाल क्यों- कर्नल डॉ गिरिजेश सक्सेना

    जब सेना हस्तक्षेप नहीं करती तो सवाल क्यों- कर्नल डॉ गिरिजेश सक्सेना


    भोपाल,14 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारतीय लोकतंत्र ने सेना को जो दायित्व सौंपा है उसे वह पूरी जिम्मेदारी से निभा रही है। सेना किसी भी आंतरिक मामले में बगैर बुलाए हस्तक्षेप नहीं करती है। ऐसे में सेना के आपरेशंस पर सवाल खड़े करके हमें अपनी रणनीति उजागर करने पर मजबूर क्यों किया जाता है। सेना के पूर्व अफसरों एयर वाइस मार्शल डॉ प्रमोद श्रीवास्तव, कर्नल राजीव सूद, बिग्रेडियर आर विनायक,और कैप्टन नेवी विनोद बक्शी ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए ये बैचेनी व्यक्त की। इस कार्यक्रम का संयोजन कर्नल डॉ.गिरिजेश सक्सेना ने किया था। आयोजन की संकल्पना दुष्यन्त कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय की निदेशक करुणा राजुरकर की थी।संचालन डॉ विशाखा राजुरकर ने किया एवं आभार दुष्यन्त कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय के अध्यक्ष रामराव वामनकर ने व्यक्त किया।
    कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए डॉ गिरिजेश ने अपने बीज वक्तव्य में कहा। मानव जीवन की शुरुआत ही युद्ध से हुई और उसका पहला युद्ध भोजन के लिये था। जैसे – जैसे सभ्यताओं का विकास और विस्तार हुआ युद्ध के स्वरूप बदलते गये पर युद्ध सदैव ही स्वार्थ की सिद्धि के लिये हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद सेना को जो भी मिशन दिया गया उसने बखूबी पूरा किया और कभी कोई सवाल नहीं किया । इसके बावजूद बालाकोट स्ट्राइक,पुलवामा और पहलगाम हमले के बाद विपक्ष ने सेना से जो सवाल किये उससे सेना का मनोबल तोड़ने की कोशिश हुई है । अच्छी बात यह कि वर्तमान केन्द्र सरकार ने पहलगाम घटना के बाद सेना को स्वतंत्र रूप से काम करने का मौका दिया । यही वजह थी कि देश की तीनों सेनाओं ने तैयारी के साथ ऑपरेशन सिन्दूर को अंजाम दिया।
    इस अवसर पर कर्नल राजीव सूद ने कहा कि ऑपरेशन सिन्दूर का उद्देश्य पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करना था। पाकिस्तान से लड़ना या पीओ के लेना इसका उद्देश्य नहीं था। उन्होंने बताया मध्य रात्रि में ये अभियान शुरू हुआ और मात्र 25 मिनट में सेना ने अपना टारगेट भेद दिया । बाद में पाकिस्तान ने हम पर ड्रोन हमले करने की कोशिश की जिन्हें सेना ने आसमान में ही नष्ट कर दिया । इस आपरेशन की सफलता में हमारे वैज्ञानिकों ने बड़ी भूमिका निभाई थी।
    बिग्रेडियर आर विनायक ने अपने 36 साल के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि भारतीय सेना कभी हारी नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटिश सेना की ओर से पांच लाख सैनिक लड़े और द्वितीय विश्व युद्ध में हमारे साठ हजार सैनिकों में से छब्बीस हजार शहीद हुए। उन्होंने बासठ,पैंसठ, इकहत्तर के युद्ध कारगिल और आपरेशन सिन्दूर के संदर्भ में भारतीय सैनिकों के साहस और पराक्रम का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हम कभी भी हमलावर नहीं रहे केवल बचाव की कार्रवाई की ,इसकी हमें बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ी।
    इस अवसर पर समुद्री सुरंग विशेषज्ञ कैप्टन विनोद बख्शी ने बताया सेना में शामिल होने के बाद संविधान की रक्षा की शपथ लेनी होती है। उन्होंने बताया कि नेवी की सेवा में चार- चार महीने दिन – रात का पता नहीं चलता।परिवार से भी कोई सम्पर्क नहीं रहता। उन्होंने 1983 में बागमति नदी में डूबीं ट्रेन का जिक्र करते हुए बताया कि जब मैंअस्सी फीट की गहराई में डूबे ट्रेन के डिब्बे से लाश निकालता था तो मेरी रूह कांप जाती थी।
    कार्यक्रम के अंत में एयर वाइस मार्शल डॉ प्रमोद श्रीवास्तव ने अनेक सवाल भी उठाये । उन्होंने कहा कि सेना में सेवा देने के बाद जब हम सेवानिवृत होते हैं तो अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है । छोटे – छोटे कामों के लिये रिश्वत देनी पड़ती है तो हमें शर्म आती है। उन्होंने कहा कि फौजी में जुनून होता है और उसे कोई लालच नहीं होता ।
    इस अवसर पर प्रश्नकाल का दौर भी हुआ जिसमें श्रोताओं की जिज्ञासाओं का समाधान भी मंच ने किया गया।

  • शोमैन सुभाष घई को अपने सपनों में रंग भरने में सहयोगी ड्राईवर से भी लगाव

    शोमैन सुभाष घई को अपने सपनों में रंग भरने में सहयोगी ड्राईवर से भी लगाव

    शोमैन सुभाष घई के लिए बीवी से ज़्यादा बढ़कर उनका ड्राइवर, 40 साल से बॉलीवुड इंडस्ट्री “स्टार ड्राइवर” के नाम से जाना जाता है

    ब्लॉकबस्टर हिट देने वाले डायरेक्टर सुभाष घई ने बयान किया अपना दुःख जब बिछड़ रहे थे अपने “स्टार ड्राइवर” और बताया की कक्यों है वो उनके लिए अपनी बीवी से भी बढ़कर |

    नेशनल हिंदी फिल्मों के महान फिल्मकार और अभिनेता राज कपूर के बाद अगर शोमैन किसी और को कहा जाता है तो वह हैं फिल्मकार सुभाष घई। इसका कारण तो बिल्कुल साफ है।उन्होंने अपने पूरे फिल्मी करियर में गिनी चुनी फिल्मों का ही निर्देशन किया है और उनकी शुरुआती लगभग सभी फिल्में सुपरहिट साबित हुईं। यह भी को हम नज़र अंदाज़ भी नहीं कर सकते कि कि सुभाष घई बॉलीवुड में हीरो बनने आए थे लेकिन जब उनका सिक्का वहां नहीं चला तो उन्होंने कैमरे के पीछे काम करने का फैसला किया था

    आज उन्ही ने अपनी ज़िन्दगी के कुछ ऐसे पर्दो से अपने फैन्स को रूबरू करवाया है जिसमें एक उनका ड्राइवर है जो न सिर्फ एक ड्राइवर है बल्कि उनकी बीवी मुक्त से बढ़कर भी है |

    क्या है पूरी कहानी
    सुभाष घई के साथ 40 साल काम करने वाले उनके ड्राइवर बाबू इम्तियाज़ शैख़ है जो उनका न सिर्फ ड्राइवर से बढ़कर है | एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जहाँ सुभाष घई अपने ड्राइवर बाबू इम्तियाज़ शैख़ के बारे में बताते हैं की वो उनके साथ 1982 में उनके प्रोडक्शन में बन रही फिल्म “विधाता” से उनके साथ है | उस वक़्त शूटिंग के समय सुभाष घई को न सिर्फ दिन में बल्कि रात में भी काम करना पड़ता और उनका एहि ड्राइवर दिन रात उनके साथ रहता था| इसी के साथ सुभाष घई को अपने स्टार ड्राइवर का ही साथ चाहिए था उनको और कोई ड्राइवर पसंद नहीं आता था |

    वीडियो में सुभाष घई ने ये भी बताया है इन 40 सालों में बाबू न सिर्फ एक ड्राइवर रहा उसने उनकी कई फिल्मों में प्रोडक्शन बॉय और लाइट बॉय का काम भी सीखा और मेरी साथ कई बड़ी हिट फिल्मों में काम भी किया है | और आज 40 साल हो गए है कि पूरा बॉलीवुड उसको “स्टार ड्राइवर” के नाम से जनता है फिर चाहिए अनिल कपूर हो या फिर सलमान खान |

  • ऐसा भी क्या दिया अनिल कपूर ने कि अनुपम खेर को लेने में लगा इतना डर!!!!

    ऐसा भी क्या दिया अनिल कपूर ने कि अनुपम खेर को लेने में लगा इतना डर!!!!

    मुंबई.7 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। तमाम रिश्तों से परे अपना वजूद सबसे ऊपर रखती है, इस बात के हजारों उदाहरण हमें आए दिन देखने को मिल जाते हैं। व्यक्ति गरीब हो या अमीर, दोस्ती के मायने हमेशा अमीर होते हैं। उस पर यदि दोस्त से कुछ खास-सा तोहफा मिल जाए, तो क्या बात हो….

    सोशल माइक्रोब्लॉगिंग ऐप, कू के माध्यम से हाल ही में दोस्ती की एक ऐसी ही परिभाषा देखने को मिली है। इसमें रंग भरते कोई और नहीं, बल्कि बॉलीवुड के दो दिग्गज अभिनेता, अनुपम खेर और अनिल कपूर दिखाई दे रहे हैं।

    दरअसल अनिल कपूर लंदन से खास तौर पर अपने बरसों पुराने दोस्त अनुपम खेर के लिए एक तोहफा लेकर आए हैं। यह सब तो ठीक है, लेकिन अनुपम इसे खोलने के दौरान कुछ इस तरह डर रहे हैं, जैसे कि उन्हें तोहफे में बम रखकर दिया गया हो। पोस्ट के साथ शेयर किए गए वीडियो में उनके डर को साफ तौर पर देखा जा सकता है।

    इस पोस्ट के माध्यम से अनुपम खेर कहते हैं:

    “मेरे प्यारे दोस्त श्री @AnilKapoor जी मेरे लिए लंदन से एक डिज़ाइनर चश्मा लेकर आए है। चश्मा कितना महँगा है इसका ज़िक्र उन्होंने 2 तीन बार किया। लेकिन मैंने बुरा नहीं माना। क्योंकि उनकी इस उदारता में एक अच्छी दोस्ती का अच्छा उदाहरण है। प्रभु ऐसा दोस्त सबको दे! धन्यवाद अनिल जी।”

    वीडियो में अनुपम को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि कुछ समय पहले उन्होंने अनिल के चश्मे की तारीफ की थी, और साथ ही उनसे ठीक ऐसा ही चश्मा लाकर देने की बात कही थी। इस पर अनिल ने सचमुच उन्हें लंदन से यह तोहफा लाकर दिया, जिसे लेते हुए अनुपम के चेहरे की खुशी और बेचैनी वीडियो में साफ-साफ देखी जा सकती है।

    इसके साथ ही वे दोनों दोस्तों की तरह एक-दूसरे की खिंचाई करते नज़र आ रहे हैं। अनिल ने दो बार ऐसा कहा कि यह बहुत महँगा है और उन्होंने इतना महँगा तोहफा कभी किसी को नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि आप पर यह चश्मा बिल्कुल सूट नहीं कर रहा है, जिस पर हँसते हुए अनुपम ने अपने पुराने चश्मे को गरीब और अनिल द्वारा दिए गए नए चश्मे को अमीर चश्मे की उपाधि दी।

    यह अनुपम का बड़प्पन ही तो है कि उन्होंने अनिल की किसी भी बात का बुरा नहीं माना और दोस्ती को इन बातों से भी ऊपर रखा। इस दोस्ती को सलाम!! दोस्तों की प्यार भरी नोंक-झोंक को कू ऐप पर इस वीडियो के माध्यम से देखा जा सका है।

  • वर्जनाओं से मुक्त परिवार की कहानी हीकप्स एंड हुकअप्स

    वर्जनाओं से मुक्त परिवार की कहानी हीकप्स एंड हुकअप्स

    भारतीय स्क्रीन पर प्रदर्शित होने के लिए तैयार सबसे साहसी और निडर परिवार की कहानी ‘हीकप्स एंड हुकअप्स’ से राव की झलक; ट्रेलर हुआ रिलीज़

    एक भाई स्वेच्छा से डेटिंग ऐप पर अपनी बड़ी बहन की प्रोफाइल बनाता हुआ और बड़ी बहन अपने छोटे भाई के साथ अपने सेक्स-कैपेड्स पर चर्चा करती नज़र आ रही है। ‘हीकप्स एंड हुकअप्स’ का ट्रेलर जो कि हाल ही में रिलीज़ हुआ है, स्पष्ट रूप परिवार की गतिशीलता को एक नया रुख प्रदान करता नज़र आ रहा है। हालाँकि, कहानी नए ज़माने के विचारों का बखान करती है। तो, जीवन के हीकप्स तथा हुकअप्स के माध्यम से उनकी यात्रा का हिस्सा बनने के लिए तैयार हो जाइए।
    लॉयंसगेट प्ले का नया शो वसुधा, अखिल और कावन्या के जीवन पर बिना वर्जित धारणा के बोल्ड और अंतरंग कहानी बताता है, जो एक ही छत के नीचे रहते हैं और एक-दूसरे का हर स्थिति में साथ देते हैं। हालाँकि, जब जीवन जीने की बात आती है, तो ये पहाड़ को सिर पर उठाने में भी पीछे नहीं हटते हैं।
    लारा दत्ता द्वारा अभिनीत किरदार वसुधा, 40 साल की उम्र में अलगाव के बाद के जीवन को फिर से खोज रही है। इस उम्र में एक महिला के रूप में डेटिंग की कठिन राहों से गुजरते हुए, वह अपने जीवन में पहली बार सेक्स एडवेंचरस होने की कोशिश कर रही है। अपने किरदार के बारे में बात करते हुए लारा ने खुलासा किया, “वसुधा का किरदार अद्भुत है। 40 साल की उम्र में मुख्य भूमिका निभाना एक सशक्त एहसास है। तथ्य यह है कि लॉयंसगेट प्ले ने एक 40 वर्षीय महिला की कहानी बताने और उन विषयों को उजागर करने के लिए चुना, जो वर्जित हैं या जिन पर कोई बात नहीं करता है। इसलिए ऐसी कहानी पर काम करना मेरे लिए रोमांचक था। वसुधा के किरदार में कई परतें हैं, जो कई तरह की स्थितियों और परिदृश्यों में खुद को पाती है। मैं यह देखने के लिए उत्सुक हूँ कि दर्शक हमारे शो पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।”
    एक डेटिंग ऐप के सीईओ, अखिल की भूमिका निभाने वाले प्रतीक बब्बर बेहद कूल हैं। वह डेट करने के लिए तैयार है, लेकिन बंधे होने के कारण कर नहीं पाता है। वह युवा है और कूल होने के बावजूद नेक दिल आदमी है। जब उसकी बहन और भांजी की बात आती है, तो वह हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा रहता है। उसका एकमात्र संघर्ष भावनाओं के साथ है। प्रतीक कहते हैं, “अखिल का किरदार बेहद दिलचस्प है। वह एक आंत्रप्रेन्योर है, जिसने अपने स्टार्ट-अप के साथ अपना लोहा मनवाया है और ऐसे रिश्तों में जुड़ना चाहता है जो स्थायीता के साथ बंधे नहीं होते हैं।”

    शो में लारा की बेटी की भूमिका निभाने वाली शिनोवा एक नियमित लड़की है, जो कि एक टीनेजर है। वह अपनी शर्तों पर जीने में विश्वास करती है। अपने माता-पिता के ब्रेक अप के मामले में वह उनके साथ अपने समीकरण को समझ रही है और उसका आकलन कर रही है, जबकि मौजूदा समय में वह सेक्स को समझने और वयस्क होने के दौरान भोलेपन को पीछे छोड़ने की पूरी कठोरता से गुजरती है।
    ‘हीकप्स एंड हुकअप्स’ तीन परिवारों की कहानी है और उनके मॉडर्न दोस्त कुछ बातों पर विश्वास नहीं करते हैं, और उनकी बातचीत को दबा देते हैं। इस परिवार में कोई फिल्टर नहीं है। कैजुअल सेक्स, समान सेक्स से प्यार, ओपन रिलेशनशिप्स और यहाँ तक कि ऑर्गीज़, कुछ भी गलत नहीं है, के इर्द-गिर्द इसकी कहानी घूमती है। यह शो भाई-बहन के एक ताज़ा और गैर-आदरणीय रिश्ते पर भी प्रकाश डालता है। अपनी सीट बेल्ट कस लें, क्योंकि राव आपको जीवन के हीकप्स तथा हुकअप्स के माध्यम से अपनी रोमांचक यात्रा पर ले जाने वाले हैं।
    कुणाल कोहली द्वारा निर्देशित और लारा दत्ता और प्रतीक बब्बर अभिनीत ‘हीकप्स एंड हुकअप्स’ 26 नवंबर से लॉयंसगेट प्ले पर स्ट्रीम होगी।

  • देश की सांस्कृतिक पहचान बनेगा मध्यप्रदेशःडॉ.साधौ

    देश की सांस्कृतिक पहचान बनेगा मध्यप्रदेशःडॉ.साधौ

    संस्कृति मंत्री डाक्टर विजय लक्ष्मी साधौ से मिलने मंत्रालय पहुंचे प्रहलाद सिंह टिपानिया जनकवि कबीर के भजन गायक हैं। प्रह्लाद जी पहले शिक्षक थे। वर्ष2011 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था।

    मध्यप्रदेश की साझी विरासत को संवारेगा संस्कृति विभाग
    भोपाल,12 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। देश का हृदय प्रदेश कई संस्कृतियों का संगम स्थल है। यहां देश दुनिया की कई विचारधाराएं सामाजिक समरसता स्थापित करती हैं। पिछली सरकार धार्मिक कट्टरता के आधार पर प्रदेश को चलाने का प्रयास करती रही। इसकी वजह से कुछ लोगों ने सरकारी व्यवस्था पर कब्जा जमा लिया था। नई सरकार सभी संस्कृतियों का सम्मान करती है, हम प्रदेश की पहचान भी इसी तरह कायम करेंगे। मैं स्वयं कबीरपंथी हूं,सरकार ने मुझे संस्कृति विभाग का जिम्मा दिया है। पहले भी संस्कृति मंत्री रहते हुए मैं बेहतरीन आयोजनों से प्रदेश का गौरव बढ़ा चुकी हूं। इस बार संस्कृति विभाग जन जन की अपेक्षाओं पर खरा उतरेगा। ये विचार कमलनाथ सरकार की संस्कृति मंत्री डाक्टर विजय लक्ष्मी साधो ने कार्यभार संभालने के बाद विशेष मुलाकात में कही।

    मध्यप्रदेश की संस्कृति, चिकित्सा शिक्षा और आयुष विभाग की मंत्री डाक्टर विजय लक्ष्मी साधौ ने कार्यभार संभालने के बाद विभाग की समीक्षा शुरु की है। संबंधित अधिकारियों से पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान किए गए सांस्कृतिक आयोजनों का ब्यौरा मांगा है। चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि अब तक जो जानकारियां सामने आई हैं उनके आधार पर कहा जा सकता है कि प्रदेश की संस्कृति को संवारने के नाम पर चंद लोगों ने पूरे बजट पर कब्जा कर रखा था। उन्हीं के परिजनों को आयोजनों से जुड़ी जवाबदारियां दी जाती रहीं हैं। हम किसी पंथ परंपरा को थोपे जाने के पक्षधर नहीं हैं। हमारी कोशिश होगी कि मध्यप्रदेश की साझी विरासत को उभारें ताकि देश दुनिया में प्रदेश की पहचान समृद्ध विरासत वाले प्रदेश के रूप में स्थापित हो।

    डाक्टर विजय लक्ष्मी साधौ ने बताया कि पूर्ववर्ती दिग्विजय सिंह की जिस सरकार में उन्हें संस्कृति विभाग की जवाबदारी दी गई थी तब मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों एक ही राज्य हुआ करते थे। तब हमने बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को उभारने वाले कई आयोजन किए थे। खजुराहो उत्सव, नदी किनारे होने वाले महेश्वर उत्सव से प्रदेश का मान बढ़ाया था। हमारे दौर में सिंधी, उर्दू अकादमी फल फूल रहीं थीं। विभिन्न संस्कृतियों के बीच मेलजोल बढ़ाने के लिए हम श्रीलंका के कलाकारों को भी आमंत्रित करते थे। अभी सांची के बौद्ध विश्विद्यालय को जानने का अवसर मिला वहां चंद लोगों ने पूरी व्यवस्था को अपने हाथों में कैद कर रखा है। ऐसे माहौल में हमें विभाग को ज्यादा जनोन्मुखी बनाने की जरूरत है।

    उन्होंने कहा कि स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी की प्रेरणा से भोपाल में स्थापित भारत भवन का उद्देश्य कला और संस्कृति पर अनुसंधान करके भारत की संस्कृति को समृद्ध बनाना रहा है। उसमें कई अलग अलग विचारधाराओं का हस्तक्षेप भी होता था इसके बावजूद कई मानदंड स्थापित किए गए। आज उसका स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। नई सरकार मध्यप्रदेश की साझी संस्कृतियों का जो गुलदस्ता प्रस्तुत करेगी उससे देश दुनिया में प्रदेश का मान बढ़ेगा।

  • आनलाईन लीक हुई सुल्तान

    आनलाईन लीक हुई सुल्तान

    salman-sultan मुंबई(फिल्मसिटी न्यूज)।खबरें आ रही हैं कि ताजा रिलीज हुई सलमान खान की ‘सुल्तान’ ऑनलाइन लीक हो गई। कहा जा रहा है कि सुल्तान रिलीज से ठीक एक दिन पहले ही लीक हुई है। साइबर क्राइम एक्सपर्ट दीप शंकर के मुताबिक फिल्म की कॉपी डार्कनेट पर मौजूद है और जल्द ही यह टॉरेंट पर भी उपलब्ध होगी। (more…)