Month: February 2026

  • जनता स्वस्थ रहे इसलिए ज्यादा डाक्टर बना रहेःराजेन्द्र शुक्ला

    जनता स्वस्थ रहे इसलिए ज्यादा डाक्टर बना रहेःराजेन्द्र शुक्ला

    भोपाल, 26 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजेन्द्र शुक्ला ने आज विधानसभा में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि आमजन को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ उपचार उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता के लिए व्यापक कार्ययोजना पर अमल किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि प्रदेश में डाक्टरों की कमी दूर करने के लिए एमबीबीएस में 1000 औ पोस्ट ग्रेजुएट विशेषज्ञता के लिए आठ सौ सीटें बढ़ाई गईं हैं। भारत सरकार हर लोकसभा क्षेत्र में एक मेडीकल कालेज खोलना सुनिश्चित कर रही है। इससे आने वाले समय में लोगों को डाक्टरी सुविधाएं सुलभ हो जाएंगी।

    विधानसभा में अपने वक्तव्य के दौरान मंत्री ने बताया कि जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाओं के उन्नयन का कार्य तेज गति से चल रहा है। कई अस्पतालों में आईसीयू और मातृ-शिशु वार्डों का विस्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी दूर करने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाया जा रहा है, जिससे दूरस्थ अंचलों के मरीजों को भी बेहतर उपचार मिल सके।

    मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के दायरे को बढ़ाया गया है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को निशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि दवाओं और जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु अस्पतालों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।

    विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए श्री शुक्ला ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है। टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार कर विशेषज्ञ चिकित्सकों को ग्रामीण क्षेत्रों से जोड़ा जा रहा है।

    अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार के समन्वित प्रयासों से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होगा और आम नागरिकों को बेहतर एवं त्वरित चिकित्सा सेवाएं प्राप्त होंगी।

  • लोक कल्याण के लिए सख्त कार्रवाई बोले पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह

    लोक कल्याण के लिए सख्त कार्रवाई बोले पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह

    भोपाल, 25 फरवरी (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में लोक निर्माण विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने विभागीय कार्यों, गुणवत्ता नियंत्रण और पारदर्शिता पर विस्तृत वक्तव्य दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सड़क और पुल निर्माण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हमने लोक निर्माण से लोक कल्याण का जो लक्ष्य तय किया है उसे सार्थक करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

    मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि पिछले 13 महीनों में विभाग द्वारा 875 से अधिक औचक निरीक्षण किए गए। इन निरीक्षणों के आधार पर चार इंजीनियरों को निलंबित किया गया और 25 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। उन्होंने बताया कि गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट प्रणाली को और सुदृढ़ किया जा रहा है तथा प्रत्येक बड़े कार्य के लिए चरणबद्ध तकनीकी परीक्षण अनिवार्य किए गए हैं। निर्माण कार्यों में मानक सामग्री के उपयोग और समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर मॉनिटरिंग तंत्र सक्रिय किया गया है।

    भोपाल में चर्चित तथाकथित “90 डिग्री पुल” के संदर्भ में मंत्री ने कहा कि पुल का वास्तविक कोण 119 डिग्री है और इसे स्वीकृत डिजाइन के अनुरूप बनाया गया है। तकनीकी पेचीगदियों के बीच इस पुल को इसी प्रकार बना पाना संभव हुआ है। उन्होंने बताया कि मामले की तकनीकी जांच कराई गई है और यदि कहीं प्रक्रिया में त्रुटि पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी जोड़ा कि भविष्य में डिजाइन स्वीकृति और साइट सुपरविजन के बीच बेहतर समन्वय के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं।

    विपक्ष की ओर से सड़क निर्माण की गुणवत्ता, गड्ढों की समस्या और अधूरी परियोजनाओं को लेकर प्रश्न उठाए गए। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने इंदौर-भोपाल क्षेत्र की परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए जवाब मांगा। इस पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि मेट्रो परियोजना लोक निर्माण विभाग के अधीन नहीं आती, जबकि विभागीय सड़कों और पुलों पर निर्धारित भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) मानकों के अनुसार कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने रखरखाव मद में अतिरिक्त प्रावधान का प्रस्ताव रखा है, ताकि गड्ढा-मुक्त सड़कों का लक्ष्य समयबद्ध तरीके से हासिल किया जा सके।

    चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे की टिप्पणी पर मंत्री ने कहा कि सदन में गंभीर विषयों पर रचनात्मक बहस होनी चाहिए। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि विकास कार्यों को राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाए। मंत्री ने यह भी बताया कि लोक शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए ‘लोकपथ’ एप को अपग्रेड किया गया है, जिससे नागरिक सीधे फोटो और लोकेशन टैग के साथ शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त विभाग ‘पीएम गति शक्ति’ प्लेटफॉर्म पर परियोजनाओं का डेटा एकीकृत कर रहा है, ताकि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़े और दोहराव से बचा जा सके।

    मंत्री राकेश सिंह ने यह जानकारी भी दी कि ग्रामीण संपर्क सड़कों के उन्नयन के लिए चरणबद्ध योजना तैयार की गई है, जिसके तहत दूरस्थ और आदिवासी अंचलों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली सड़कों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में हजारों किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण और मजबूतीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे परिवहन लागत घटेगी और कृषि-उद्योग गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर सुधारात्मक कार्य किए जा रहे हैं।

    सदन में सड़कों पर आवारा पशुओं से दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं का मुद्दा भी उठा। मंत्री ने कहा कि यह विषय बहु-विभागीय है और स्थानीय निकायों व पशुपालन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर समाधान की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रमुख राजमार्गों पर चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर और प्रकाश व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं।

    विधानसभा में दिए गए इस विस्तृत वक्तव्य के माध्यम से मंत्री राकेश सिंह ने जहां विभाग की उपलब्धियों को रेखांकित किया, वहीं कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने का भरोसा भी दिलाया। बजट सत्र में लोक निर्माण विभाग पर हुई यह चर्चा प्रदेश में अधोसंरचना विकास की दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करती है।

  • राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान पर माफिया का शिकंजाः यशभारतीय

    राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान पर माफिया का शिकंजाः यशभारतीय


    भोपाल,23 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता यश भारतीय ने राज्यसभा सदस्य एवं संसद की शिक्षा समिति (भारत सरकार) के अध्यक्ष, दिग्विजय सिंह से भेंट करके कहा है कि राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस), से जुड़े शिक्षा माफिया ने यहां डिग्रियां बेचने का गोरखधंधा चला रखा है। इससे मेहनती विद्यार्थियों के अवसर छिन रहे हैं।
    उन्होंने ज्ञापन में कहा कि NIOS सीधे शिक्षा मंत्रालय (MHRD) के अधीन कार्य करता है, इसके बावजूद 2017 में सीहोर, रतलाम और उमरिया में 1,200 अनुपस्थित छात्रों को पास घोषित करने जैसा बड़ा घोटाला हुआ। CBI चार्जशीट के अनुसार, साक्ष्य मिटाने के लिए उत्तर पुस्तिकाएं तक जला दी गईं। ज्ञापन में कहा गया है कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में बाहरी राज्यों के छात्रों से 25,000 से 30,000 रुपये लेकर “गारंटी पास” का खेल चल रहा है।
    शिक्षा मंत्रालय के इस संस्थान का क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल में होने के बावजूद, कोविड के बाद से यहाँ ‘ऑन डिमांड एग्जाम’ (ODES) केंद्र बंद कर दिया गया है। इसे पुनः प्रारंभ न करना छात्रों के साथ अन्याय है ।उनका कहना है कि NIOS के अध्ययन केंद्रों का वर्षों से भुगतान लंबित है। ये केंद्र ही ड्रॉप-आउट छात्रों की काउंसलिंग और नियमित कक्षाओं का आधार हैं। भुगतान न होने से गरीब और पिछड़े छात्रों की शिक्षा बाधित हो रही है।
    उनके मुताबिक NIOS ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया था कि अध्ययन केंद्रों के माध्यम से नियमित कक्षाएं और प्रायोगिक कार्य कराए जाते हैं, इसी आधार पर इसके सर्टिफिकेट फार्मेसी और नर्सिंग काउंसिल में मान्य हैं। लेकिन वर्तमान अव्यवस्था इस साख को खत्म कर रही है।
    संसद की शिक्षा समिति के अध्यक्ष के रूप में दिग्विजय सिंह जी से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा गया है कि मध्य प्रदेश में पिछले 5 वर्षों के NIOS परिणामों का निष्पक्ष ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’ कराया जाए। शिक्षा मंत्रालय के स्तर पर उन अधिकारियों को चिन्हित किया जाए जो भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे हैं। भोपाल में ‘ऑन डिमांड एग्जाम’ केंद्र तत्काल प्रभाव से पुनः प्रारंभ किया जाए। अध्ययन केंद्रों का बकाया भुगतान तुरंत जारी कर शिक्षा व्यवस्था सुचारू की जाए।

  • नशा माफिया पर मध्यप्रदेश पुलिस का कारगर प्रहार

    नशा माफिया पर मध्यप्रदेश पुलिस का कारगर प्रहार

    भोपाल,22 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश में बीते दो वर्षों में नशा तस्करी के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाई ने एक संगठित और निरंतर अभियान का रूप ले लिया है। राज्य सरकार के निर्देश पर मध्यप्रदेश पुलिस ने न केवल मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान चलाए, बल्कि ड्रग माफिया की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए भी सख्त कदम उठाए। यह संघर्ष केवल कानून-व्यवस्था का प्रश्न नहीं, बल्कि सामाजिक और पीढ़ीगत सुरक्षा से जुड़ा विषय बन चुका है।

    वर्ष 2024 और 2025 के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों—इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और सीमावर्ती इलाकों—में पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर करोड़ों रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए। पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार, इन दो वर्षों में एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत हजारों प्रकरण दर्ज हुए और बड़ी संख्या में आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। जब्त सामग्री में गांजा, अफीम, डोडाचूरा, ब्राउन शुगर, हेरोइन और प्रतिबंधित नशीली गोलियां शामिल रहीं।

    विशेष रूप से अंतरराज्यीय तस्करी के नेटवर्क पर प्रहार करते हुए पुलिस ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से जुड़े गिरोहों का भंडाफोड़ किया। कई मामलों में ट्रांजिट रिमांड लेकर अन्य राज्यों से जुड़े सरगनाओं को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने ड्रग्स की खेप के साथ-साथ परिवहन में प्रयुक्त वाहन, मोबाइल फोन, बैंक खाते और संपत्तियां भी जब्त कीं, जिससे तस्करों के आर्थिक तंत्र पर चोट पहुंची।

    बीते वर्षों में ड्रग माफिया ने तस्करी के तौर-तरीकों में भी बदलाव किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि अब पारंपरिक ढंग से बड़े ट्रकों या बसों के जरिए खेप भेजने के बजाय छोटे-छोटे पैकेटों में कुरियर सेवाओं, निजी वाहनों और यहां तक कि ऑनलाइन डिलीवरी नेटवर्क का उपयोग किया जा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से ग्राहकों तक संपर्क साधा जाता है। भुगतान के लिए डिजिटल वॉलेट और फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे लेन-देन का पता लगाना कठिन हो जाता है।

    कुछ मामलों में युवाओं और छात्रों को “कैरियर” के रूप में इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति भी सामने आई है। उन्हें कम जोखिम और अधिक कमाई का लालच देकर नेटवर्क का हिस्सा बनाया जाता है। सीमावर्ती जिलों में खेतों और सुनसान इलाकों का उपयोग अस्थायी गोदाम के रूप में किया जाता है, जहां से स्थानीय सप्लायर छोटे स्तर पर वितरण करते हैं।

    इन चुनौतियों से निपटने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस ने तकनीकी निगरानी और साइबर विश्लेषण को प्राथमिकता दी है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण से कई बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ। ड्रोन कैमरों और विशेष निगरानी टीमों की मदद से संवेदनशील क्षेत्रों में छापेमारी की गई।

    राज्य स्तर पर नारकोटिक्स प्रकोष्ठ को सक्रिय कर जिला पुलिस के साथ समन्वय बढ़ाया गया। स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया गया। “नशा मुक्त मध्यप्रदेश” अभियान के तहत पुलिस, प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने मिलकर परामर्श शिविरों और जनसंवाद कार्यक्रमों का आयोजन किया।

    पुलिस ने केवल गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि ड्रग माफिया की अवैध संपत्तियों को चिह्नित कर कुर्क करने की प्रक्रिया भी शुरू की। एनडीपीएस एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं के तहत करोड़ों रुपये मूल्य की चल-अचल संपत्तियां अटैच की गईं। इससे स्पष्ट संदेश गया कि नशे के कारोबार से अर्जित संपत्ति सुरक्षित नहीं रहेगी।

    हालांकि कार्रवाई के आंकड़े उत्साहजनक हैं, परंतु चुनौती पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। अंतरराज्यीय सीमाएं, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और संगठित अपराध का नेटवर्क लगातार नए रास्ते खोज रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, पुनर्वास केंद्रों की मजबूती और पारिवारिक स्तर पर संवाद भी आवश्यक है।

    बीते दो वर्षों में मध्यप्रदेश पुलिस की कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि राज्य नशा तस्करी के विरुद्ध कठोर रुख अपनाए हुए है। बड़ी जब्तियां, अंतरराज्यीय गिरोहों का पर्दाफाश और आर्थिक कुर्की की कार्यवाही इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। फिर भी यह लड़ाई लंबी है। जब तक समाज, प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियां एकजुट होकर निरंतर प्रयास नहीं करेंगी, तब तक ड्रग माफिया नए रूप में उभरते रहेंगे।

    मध्यप्रदेश में चल रही यह मुहिम केवल अपराध के विरुद्ध नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा का संकल्प है—और यही इसे एक निर्णायक सामाजिक आंदोलन का स्वरूप देता है।

  • कांग्रेसियों की औकात से बहुत बड़ा है कार्पोरेट का योगदान

    कांग्रेसियों की औकात से बहुत बड़ा है कार्पोरेट का योगदान


    -आलोक सिंघई-
    मध्यप्रदेश की सत्तारूढ़ भाजपा और प्रमुख विपक्षी कांग्रेस के बीच इन दिनों तनातनी का दौर चल रहा है। कई शहरों में आपसी गुत्थमगुत्थी आज की ताजा खबर है। इंदौर में कांग्रेसियों ने हमला किया तो भोपाल में भाजपाईयों ने कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में कोहराम मचा दिया। ये सारा मामला उस मुद्दे पर जोर पकड़ा जिसमें अडानी का नाम आने पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को औकात में रहने की नसीहत दे दी थी। कहा ये गया कि दिल्ली की ए आई समिट में कांग्रेस के अर्ध नग्न प्रदर्शन का विरोध है।कैलाश पिछले कुछ दिनों से इंदौर के भागीरथपुरा में गंदा पेयजल सप्लाई होने से होने वाली पैंतीस से चालीस मौतों के बाद से निशाने पर चल रहे हैं। भाजपा की अंदरूनी राजनीति भी कैलाश के अनुकूल नहीं है। ऐसे में उनके तैश में दिए बयान को उनकी दंभोक्ति माना गया। सदन में हंगामे के बाद उन्होंने अपने कथन पर दुख व्यक्त किया और मुख्यमंत्री ने भी माफी मांगी। जाने अन जाने में हुए इस संवाद ने न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश को सोचने पर मजबूर किया है कि कांग्रेसियों की मुफ्तखोरी और भिखारी सोच को आखिर कैसे बदला जा सकता है। अनुत्पादक सरकारी सेक्टर और डिफाल्टरों का कर्जा माफ करने वाली फोकटिया सोच को कुचलकर उत्पादकता बढ़ाने वाली सोच को कैसे विकसित किया जा सकता है।

    कांग्रेस के राजपुत्र राहुल गांधी को देश के लोग यदि पप्पू कहते हैं तो कांग्रेसी इसे भाजपाईयों का दुष्प्रचार कहकर आगे बढ़ जाते हैं। जवाहर लाल नेहरू के बाद श्रीमती इंदिरा गांधी ने जिस सरकारीकरण की नींव रखी थी उसकी वजह से देश की विकास दर बहुत धीमी गति से बढ़ सकी है। आज 357.14 लाख करोड़ रुपये (GDP USD 4.18 ट्रिलियन) अर्थव्यवस्था वाला हिंदुस्तान तब सामने आया है जब उसने 2026 की शुरुआत तक कुल सार्वजनिक ऋण (आंतरिक और बाहरी) लगभग 197-200 लाख करोड़ रुपये के बीच ले रखा है। हमें सोचने पर मजबूर होना ही पड़ेगा कि कथित आजादी के लगभग 78 सालों बात तक हम करते क्या रहे हैं। लगभग 147 करोड़ आबादी वाले जिस देश में लगभग सौ करोड़ कार्यबल मौजूद हो उसका उपयोग अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में क्यों नहीं किया जा सका इस मुद्दे पर हमें विचार अवश्य करना होगा। आजादी के बाद यदि हमने केवल डेढ़ सौ लाख करोड़ रुपयों का योगदान किया तो इसकी वजह क्या रही होगी हमें इस पर अवश्य विचार करना होगा।

    भारत सरकार ने देश के लगभग पचास लाख लोगों को नौकरी दे ऱखी है। जबकि इसके विपरीत कार्पोरेट सेक्टर और निजी क्षेत्र मिलकर शेष लगभग सत्तर लाख परिवारों का जीवन रोशन कर रहा है । टाटा समूह में 7,50,000 कर्मचारी हैं। एल एंड टी में 3,38,000 लोग कार्यरत हैं। इंफोसिस में 2,60,000 कर्मचारी हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा के 2,60,000 कर्मचारी हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज के 2,36,000 लोग हैं। विप्रो में 2,10,000 कर्मचारी हैं। एचसीएल में 1,67,000 कर्मचारी हैं। एचडीएफसी बैंक में 1,20,000 कर्मचारी हैं। आईसीआईसीआई बैंक में 97,000 कर्मचारी हैं। टीवीएस समूह में 60,000 कर्मचारी हैं। मात्र ये दस कंपनियां मिलकर लगभग 25 लाख भारतीयों को रोजगार देती हैं वो भी सम्मानजनक वेतन के साथ।

    ये केवल वो आँकड़े हैं जो इनके डायरेक्ट पेरोल पर हैं। इनके अलावा ऑफ रोल्स, ऐसोशिएट्स, डीलर्स, एजेंट्स, इनके प्रोडक्ट्स से जुड़े सहायक प्रोडक्ट्स की कंपनियां। इनके सहारे जन्मी पैकेजिंग कंपनियां, ट्रांसपोर्ट सेक्टर। लिस्ट बहुत लंबी है। किसी कंपनी के अगर डायरेक्ट 1 लाख कर्मचारी हैं तो मान के चलिए कि कम से कम चार लाख ऐसे हैं जिनका चूल्हा उसी कम्पनी के कारण चलता है। यहां बात मात्र 10 बड़ी कंपनियों की हो रही है। हजारों ऐसी प्राइवेट कंपनियां हैं जो देश में रोजगार पैदा कर रही हैं। ये 25 लाख कॉर्पोरेट नौकरियां भारत में पिछले 78 वर्षों में सृजित कुल केंद्र सरकार की नौकरियों (48.34 लाख) के आधे से अधिक हैं।

    राहुल गांधी जिस तरह अडानी अंबानी की सरकार कहकर मोदी सरकार पर कीचड़ उछालते फिरते हैं इनमें से अधिकतर घराने तो कभी कांग्रेसियों की काली कमाई और संरक्षण से ही शुरु हुए थे। सरकारी खजाने से चुराया धन कार्पोरेट घरानों में लगाकर ब्याज खाने की आदत के कारण ही नेहरू गांधी परिवार आज एक अभेद्य विरासत वाला राजघराना बन सका है। बार बार उन्हें समझाया जाता है कि निजी क्षेत्र का सम्मान करें, उन्हें गालियों से मत नवाजें। अपने राजनैतिक एजेंडे और पसंद नापसंद के कारण उन लोगों का मजाक ना उड़ायें जो देश के विकास में बहुत बड़े सहभागी हैं। नौकरी देने वालों के लिए जयकार जयकार भले ना करें लेकिन उन्हें इज़्ज़त देना तो सीखिए।वे लाखों भारतीयों के लिए आजीविका पैदा कर रहे हैं।

    भारत के आर्थिक इतिहास पर दृष्टि डालें तो स्वतंत्रता के बाद सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत करने की नीति अपनाई गई थी। बाद के दशकों में उदारीकरण और निजीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसने अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी। आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकारी और निजी—दोनों क्षेत्रों की ताकतों का संतुलित उपयोग हो।

    मध्यप्रदेश की हालिया राजनीतिक तनातनी इसी व्यापक राष्ट्रीय बहस का एक स्थानीय प्रतिबिंब है। व्यक्तिगत कटाक्ष और टकराव से न तो विकास का रास्ता निकलेगा और न ही लोकतांत्रिक गरिमा की रक्षा होगी। राज्य और देश, दोनों के हित में यही होगा कि राजनीतिक दल विचारधारात्मक मतभेदों को शालीन संवाद के माध्यम से सामने रखें और आर्थिक नीति पर ठोस, तथ्याधारित चर्चा करें।

    आखिरकार भारत जैसे 147 करोड़ से अधिक आबादी वाले देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती है—रोजगार, उत्पादकता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा। यदि आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध भविष्य का निर्माण करना है, तो सरकार और निजी क्षेत्र को परस्पर विरोधी ध्रुवों की तरह नहीं, बल्कि सहयोगी साझेदारों की तरह देखना होगा। राजनीति की गर्मी के बीच यही संतुलित दृष्टिकोण देश को आगे ले जा सकता है।

  • समृद्धि की वैश्विक दौड़ में भारत का बजट बना ग्रोथ का इंजन

    समृद्धि की वैश्विक दौड़ में भारत का बजट बना ग्रोथ का इंजन

     “स्पीड, स्केल और संकल्प का केंद्रीय बजट”  – सीए अखिलेश जैन

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ना तो छोटा सोचते हैं, ना छोटा करते हैं। स्पीड और स्केल अपने आप में भिन्न होती है। कार्यों के परिणाम भी भिन्न होते हैं। प्रधानमंत्री जी के लक्ष्य भी भिन्न होते हैं। प्रधानमंत्री जी कार्य शुरू करके उसको 100% तक पूरा करने का प्रयास करते हैं। यह बात बिल्कुल सही है प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 2014 में जब से देश की सत्ता संभाली है, देश के स्थापित लक्ष्यों को पीछे छोड़ते हुए जिस स्पीड और स्केल से कार्य किया है, रात दिन एक करके बिना विश्राम लिए, वह किसी भी विश्लेषक को आश्चर्यचकित करने के लिए पर्याप्त है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की अगुवाई वाली सरकार ने हमेशा निर्णायक रूप से, अस्पष्टता की जगह काम को, बातों की जगह सुधार को और लोक-लुभावन नीतियों की जगह लोगों को प्राथमिकता दी है।

    सन् 2014 में प्रति व्यक्ति की आय 86647 रुपए सालाना थी,  2023 में बढ़कर 172000 रुपए सालाना हो गई, 2026 में लगभग 2.5 लाख से 2.72 लाख रुपए सालाना के बीच तक पहुंचने का अनुमान है, इस बीच में कोरोना जैसी वैश्विक महामारी का भी देश ने सामना किया। कोरोना के बावजूद 2022-23 में प्रति व्यक्ति आय 172000 रुपए सालाना, मतलब लगभग 9 वर्षों में प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करने में, प्रधानमंत्री जी वैश्विक अनिश्चिताओं, वैश्विक उथल-पुथल, वैश्विक महामारी के बाद भी 172000 रुपए सालाना आय के लक्ष्य प्राप्त करने में सफल रहे। यही प्रति व्यक्ति आय 2024 – 2025 में 235000 रुपए सालाना तक पहुंच गई। यही प्रधानमंत्री जी की अर्थनीति, स्पीड और स्केल है, यही मोदी जी का 13 वर्षों का बजट है।

    2014-15 में प्रति व्यक्ति जीडीपी 98405 रुपए सालाना के लगभग थी, 2024 – 2025 में प्रति व्यक्ति जीडीपी 234859 रुपए सालाना तक पहुंच गई। यही मोदी जी का 13 वर्षों का बजट है।

    भारत का कुल निर्यात 2013-14 के दौरान 465 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर था जो 2024 – 2025 में भारत का कुल निर्यात 825.3 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंच गया। अर्थात् 11 वर्षों में भारत का निर्यात 177.5 % की दर से सकारात्मक वृद्धि दर को प्राप्त किया। यही मोदी जी का 13 वर्षों का बजट है।

    मंदी के दौरान भी भारत ने पर्याप्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया है। मोदी सरकार के लगातार सुधारों एवं प्रयासों के परिणाम स्वरूप एफडीआई 2013-14 में लगभग 36 अरब अमेरिकी डॉलर था। 2024-25 में 80 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया, 222.23 % की दर से सकारात्मक वृद्धि दर को प्राप्त किया। जो निवेशकों के निरंतर विश्वास और सेवा, डिजिटल, विनिर्माण एवं बुनियादी अवसंरचनात्मक क्षेत्रों में निवेश की तेज गति को दर्शाता है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की अर्थनीति और 13 वर्षों बजट है।

    2014 में हाई- स्पीड कॉरिडोर की लंबाई 550 किलोमीटर थी, वित्त वर्ष 2025- 2026 में दिसंबर तक 5,364 किलोमीटर हो गई है। लगभग दस गुना बढ़ गई है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की स्पीड और स्केल है।

    हवाई अड्डों की संख्या 2014 में 74 थी, 2025 में 164 हो गई है। भारत घरेलू विमानन के क्षेत्र में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की अर्थनीति है।

    नवकरणीय ऊर्जा तथा संस्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत मार्च 2014 में 76.38 गीगावॉट पर था, नवंबर 2025 तक 253.96 गीगावाट हो गई, वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है और स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता में चौथे स्थान पर है। कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता पिछले दशक में तीन गुना से अधिक बढ़ गई है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की अर्थनीति है।

    2014 में उच्च गति क्षमता वाली पटरियों की लंबाई 31,445 किमी थी, 2025 तक लगभग दोगुनी से भी ज्यादा होकर होकर 84,244 किमी हो गई है, जिससे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क के लगभग 80% हिस्से पर 110 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से परिचालन संभव हो पा रहा है।

    उद्योग को समर्थन देना उद्योग को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है। इसलिए उच्च स्तरीय उच्च गति की रेल कॉरिडोर का विकास औद्योगिक क्षेत्र के लिए विशेष सहायक होगा।
    प्रधानमंत्री मोदी जी ने सभी महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र को हाई स्पीड रोड से जोड़ने का प्रयास किया है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की स्पीड और स्केल है।

    रक्षा बजट 2013-14 में 2.53 लाख करोड़ रुपये था, वर्ष 2026-27 में 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है, अर्थात इसमें लगभग 5.32 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है, जो लगभग तीन गुना वृद्धि को दर्शाता है। इस बढ़े हुए प्रावधान के माध्यम से, सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में रणनीतिक बदलाव के साथ सशस्त्र बलों और उनकी क्षमताओं को दुनिया के उच्चतम मानकों में बदलने के अपने संकल्प की पुष्टि की है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में रुकावट और विदेशी विक्रेताओं की तुलना में घरेलू आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने ने आयात प्रतिस्थापन की आवश्यकता पर फिर से जोर दिया है और न केवल निर्वाह के लिए बल्कि भविष्य के आधुनिकीकरण के लिए स्वदेशीकरण की ओर बढ़ रहा है। यही मोदी जी का बजट है।

    13 सालों के बजट की चर्चा इसलिए भी आवश्यक है कि आज देश जिस स्थिति में खड़ा है उस स्थिति को प्राप्त करने में कोई एक बजट महत्वपूर्ण नहीं है, आज की स्थिति जो भारत ने प्राप्त की है इस स्थिति को प्राप्त करने के लिए मोदी जी को विरासत में मिला भारत और विरासत को मोदी जी के द्वारा सजाया संवारा गया है। इन दोनों चीजों का परिणाम आज का वर्तमान भारत है और भविष्य का भारत आज के भारत से आगे के भारत के लिए की गई तैयारी का परिणाम होगा।

    मोदी जी भारत को तेज गति से आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। तेज गति को प्राप्त करने के लिए आवश्यक सुधारों पर बल दिया गया है। सरकार के प्राथमिकताओं में परिवर्तन किया गया है। सरकार ने युवा शक्ति को भविष्य का भारत बनाने के लिए तैयार करने डेवलप करने और नेतृत्व करने के लिए रचनात्मक प्रयास किए हैं। राजकोषीय अनुशासन, सतत् विकास, मुद्रास्फीति की दर को कम करने का शानदार प्रयास किया है। मोदी सरकार ने आत्मनिर्भरता को लक्ष्य मान करके घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने का प्रयास किया है। ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास किया है। मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों को चला करके आयात पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया है। सरकार की पूरी अर्थनीति का अगर विश्लेषण करेंगे तो उसके केंद्र बिंदुओं में सरकार का लक्ष्य आत्मनिर्भरता, रोजगारसृजन, कृषि उत्पादन क्षमता का विकास, नागरिकों की क्रय शक्ति का बढ़ना, नागरिकों के जीवन स्थान में सुधार लाना अपनाया गया है। सरकार ने 7% उच्च वृद्धि दर को सुनिश्चित करके गरीबी घटाने और नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के प्रयासों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।

    जो देश कृषि उत्पादों को आयात करता था, अनाज की कमी से जुझता था, आज वही देश ढाई लाख करोड़ रुपए से अधिक के कृषि उत्पादों को निर्यात करता है, कितना फर्क है,

    सरकार की अर्थ नीति कर्तव्य नीति ज्यादा दिखाई देती है। जिसके चलते सरकार ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकलने में सफलता प्राप्त की है।

    इसलिए मोदी सरकार के बजट में, मोदी सरकार की अर्थनीति में, स्पीड और स्केल में, हर क्षेत्र की तरफ, नभ, जल और आकाश सभी तरफ नए कीर्तिमान स्थापित होते दिखते हैं। क्योंकि हमारे पूर्व की क्षमताओं से हम एक नए स्तर पर आ गए हैं। मोदी सरकार का लक्ष्य तो इससे कहीं ऊपर है। देश को वापस अपना खोया हुआ गौरव हासिल करना है। देश को विश्व की अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है। इसीलिए भारत विश्व का ग्लोबल ग्रोथ इंजन है। कोई भी इस विकास की दौड़ में पीछे ना छूटे, कोई भी विकास की भागीदारी में रह ना जाए, समग्र विकास के साथ-साथ समग्र दृष्टिकोण केवल भाजपा सरकार, प्रधानमंत्री मोदी जी ही कर सकते हैं।

    (लेखक- अखिलेश जैन सीए व भाजपा मप्र के प्रदेश कोषाध्यक्ष हैं)

  • भागीरथपुरा मुद्दे पर सदन में चर्चा नहीं हो सकतीःविधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर

    भागीरथपुरा मुद्दे पर सदन में चर्चा नहीं हो सकतीःविधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर

    भोपाल, 20 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश विधानसभा का आज का सत्र हंगामेदार रहा।विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि कि नियमों के अनुसार जो मुद्दा चर्चा में एक बार आ चुका है उसे स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा में दोबारा नहीं लाया जा सकता है।  प्रश्नकाल से लेकर शून्यकाल और ध्यानाकर्षण तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सदन की कार्यवाही निर्धारित समय पर शुरू हुई, लेकिन कुछ ही देर में विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया, जिससे माहौल गरमा गया।

    विधानसभा में भागीरथपुरा पर आए स्थगन प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने नियमों का हवाला देते हुए खारिज कर दिया है।  विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा की मांग पर व्यवस्था देते हुए कहा कि विधानसभा की नियमावली के नियम 55 के उपखंड 5 के अनुसार सत्र में लाए गए स्थगन प्रस्ताव में  उस विषय की चर्चा नहीं हो सकती है जिस पर  सदन के उसी सत्र में चर्चा हो चुकी है। उन्होंने व्यवस्था देते हुए कहा कि  19 फरवरी 2026 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का प्रश्न इसी विषय पर चर्चा में था जिस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं उत्तर दिया था। इसके अलावा अन्य सदस्य भी इस विषय पर प्रश्न कर चुके हैं। इन सभी के उत्तर सदन में पटल पर हैं। उन्होंने कहा कि उपखंड 7 के अनुसार सदन में  उस विषय पर भी चर्चा नहीं हो सकती है जो किसी जांच आयोग के समक्ष है या न्यायालय में विचारधीन है।  उन्होंने कहा कि इस घटना पर स्वयं न्यायालय ने संज्ञान लिया है। न्यायालय ने इस पर आयोग बनाया है। आयोग को सिविल कोर्ट के अधिकार दिए गए हैं। आयोग ने अपनी सुनवाई शुरु कर दी है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए भागीरथपुरा के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा नहीं हो सकती है।

    प्रश्नकाल के दौरान कृषि, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रश्नों पर विपक्षी सदस्यों ने सरकार से जवाब तलब किया। कांग्रेस विधायकों ने प्रदेश में समर्थन मूल्य पर खरीदी, खाद की उपलब्धता और युवाओं के लिए सरकारी भर्तियों की स्थिति पर विस्तार से जानकारी मांगी। जवाब में संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों और युवाओं के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है तथा लंबित भर्तियों की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। इस दौरान कुछ पूरक प्रश्नों को लेकर तीखी बहस हुई और अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा।

    शून्यकाल में बिजली दरों में संभावित वृद्धि और नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के दावों के बावजूद आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ डाल रही है। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि राज्य में बुनियादी ढांचे पर ऐतिहासिक निवेश हो रहा है और बिजली आपूर्ति की स्थिति पहले से बेहतर हुई है।

    सदन में सबसे अधिक विवाद तब हुआ जब हाल ही में सामने आए एक कथित जमीन आवंटन प्रकरण पर चर्चा की मांग की गई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस मामले में पारदर्शिता नहीं बरती गई और उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है। इस पर सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष मुद्दों को राजनीतिक रंग देकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। कुछ समय के लिए विपक्षी सदस्य आसन के समीप आ गए और नारेबाजी की, जिसके चलते अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    स्थगन के बाद कार्यवाही पुनः शुरू हुई तो ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चर्चा हुई। ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और दवाओं की उपलब्धता को लेकर विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। स्वास्थ्य मंत्री ने जवाब देते हुए बताया कि नए पद सृजित किए गए हैं और टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ करने के लिए विशेष अभियान चला रही है।

    वित्तीय अनुशासन और बजट प्रावधानों को लेकर भी बहस हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि घोषणाएं अधिक और क्रियान्वयन कम है। सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि प्रदेश की विकास दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर है और निवेश प्रस्तावों में निरंतर वृद्धि हो रही है। इस दौरान कुछ सदस्यों के बीच तीखी टिप्पणियां भी हुईं, जिन्हें कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए गए।

    दिन के अंत में अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन संवाद और शालीनता के साथ ही जनता के मुद्दों का समाधान संभव है।

    कुल मिलाकर, आज की कार्यवाही में प्रदेश के कृषि, रोजगार, स्वास्थ्य और वित्तीय प्रबंधन जैसे प्रमुख मुद्दे केंद्र में रहे, वहीं जमीन आवंटन और बिजली दरों से जुड़े विवादों ने राजनीतिक तापमान बढ़ाए रखा। सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की, हालांकि हंगामे के कारण निर्धारित कार्यसूची का कुछ हिस्सा पूरा नहीं हो सका।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी दिनों में भी सदन में इन मुद्दों पर बहस जारी रहेगी और सरकार को विपक्ष के सवालों का विस्तृत जवाब देना होगा। फिलहाल, आज का दिन तीखी बहस और राजनीतिक टकराव के नाम रहा, जिसने विधानसभा के सत्र को फिर से सुर्खियों में ला दिया।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विपक्ष पर पलटवार, विकास के एजेंडे को बताया सरकार की प्राथमिकता

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विपक्ष पर पलटवार, विकास के एजेंडे को बताया सरकार की प्राथमिकता

    राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव:

    भोपाल, 19 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को सरकार की उपलब्धियों और आगामी प्राथमिकताओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। सदन में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने विपक्ष के आरोपों का तीखा प्रतिवाद करते हुए कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की नीतियों और संकल्पों का दस्तावेज है, जिसे राजनीतिक पूर्वाग्रह से नहीं बल्कि सकारात्मक दृष्टि से देखा जाना चाहिए।

    विधानसभा में बजट सत्र के दौरान राज्यपाल मंगूभाई पटेल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी। सत्ता पक्ष की ओर से प्रस्ताव रखे जाने के बाद विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कानून व्यवस्था, किसानों की समस्याओं, बेरोजगारी और पेयजल संकट जैसे विषय उठाते हुए कहा कि अभिभाषण में जमीनी हकीकत का समुचित उल्लेख नहीं है।

    इन आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले एक वर्ष में बुनियादी ढांचे के विकास, निवेश आकर्षित करने, किसानों को राहत देने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को औद्योगिक निवेश के लिए आकर्षक राज्य बनाने के प्रयास जारी हैं और कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने निवेश की रुचि दिखाई है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ा है और समर्थन मूल्य पर खरीद की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया गया है।

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष के हंगामे पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान व्यवधान डालना परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष के सुझावों का स्वागत करती है।

    चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष के बीच हुई बहस से सदन का माहौल कुछ देर के लिए गर्मा गया। हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हुई और कार्यवाही आगे बढ़ी।

    मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में सामाजिक योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं, गरीबों और युवाओं के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं का दायरा बढ़ाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में अधोसंरचना विकास, सड़क निर्माण, सिंचाई परियोजनाओं और शहरी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सुधार को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा कि नए मेडिकल कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों की स्थापना पर कार्य चल रहा है।

    अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण में प्रदेश के सर्वांगीण विकास की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत की गई है और सरकार उस पर प्रतिबद्धता के साथ अमल करेगी। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वह रचनात्मक सहयोग दे ताकि मध्यप्रदेश को विकास के नए आयामों तक पहुंचाया जा सके।

    सदन में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा जारी है और आगामी दिनों में इस पर मतदान की संभावना है। बजट सत्र के दौरान विभिन्न विभागों की मांगों और नीतिगत मुद्दों पर भी व्यापक बहस होने की उम्मीद है।

  • जगदीश देवड़ा ने बजट में बताया कैसे सफल होगा विकास

    जगदीश देवड़ा ने बजट में बताया कैसे सफल होगा विकास


    मध्यप्रदेश की राजनीति में इस वर्ष के बजट को कई नजरियों से देखा जा रहा है। मध्यप्रदेश विधानसभा में वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने जो बजट प्रस्तुत किया उसे उन्होंने विकास की निरंतरता और सामाजिक प्रतिबद्धता का दस्तावेज बताया है। बजट भाषण के दौरान हस्तक्षेप करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहना शुरु कर दिया कि ये प्रस्ताव जमीनी सच्चाइयों से कटे हुए हैं। और केवल आंकड़ों की कलाकारी हैं। सत्ता और विपक्ष के इन परस्पर विरोधी दावों के बीच यह आवश्यक हो जाता है कि बजट की वास्तविक प्रकृति और उसके संभावित प्रभावों को विस्तार से समझा जाए।

    सरकार का कहना है कि यह बजट राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों को भी केंद्र में रखता है। पूंजीगत व्यय में वृद्धि को इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता बताया जा रहा है। अधोसंरचना के लिए बड़े प्रावधान—सड़क निर्माण, पुल-पुलियों, ग्रामीण संपर्क मार्गों और सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार—को राज्य की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि का आधार माना जा रहा है। सरकार का तर्क है कि बेहतर कनेक्टिविटी और सिंचाई सुविधाएं न केवल कृषि उत्पादकता बढ़ाएंगी बल्कि औद्योगिक निवेश के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करेंगी। औद्योगिक क्षेत्रों के विकास, एमएसएमई को प्रोत्साहन और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन देने की घोषणाएं भी इसी सोच का हिस्सा हैं।सबसे बड़ी बात तो ये कि इन कार्यों से बड़ी संख्या में रोजगारों का भी सृजन होगा।

    कृषि क्षेत्र के मामले में देखा जाए तो बजट में समर्थन मूल्य व्यवस्था के क्रियान्वयन, भंडारण क्षमता में वृद्धि और कृषि आधारित प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने जैसे प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे किसानों की आय में स्थिरता आएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और उद्यानिकी को प्रोत्साहन देने की योजनाएं भी जोड़ी गई हैं, ताकि कृषि आय के स्रोतों में विविधता लाई जा सके।सरकार कृषि ढांचे को मजबूत बनाने के लिए भी व्यापक इंतजाम कर रही है।

    सामाजिक क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाने की घोषणा को भी बजट का महत्वपूर्ण पक्ष माना जा रहा है। स्कूलों के उन्नयन, डिजिटल शिक्षण सुविधाओं और चिकित्सा अधोसंरचना के विस्तार के लिए आवंटन बढ़ाने की बात कही गई है। महिलाओं और बालिकाओं के लिए संचालित योजनाओं का विस्तार तथा युवाओं के कौशल विकास कार्यक्रमों पर जोर यह संकेत देता है कि सरकार जनसांख्यिकीय लाभांश को साधने की दिशा में प्रयासरत है। सरकार का तर्क है कि कल्याणकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन बनाकर ही समावेशी विकास संभव है।

    हालांकि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बजट पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उनका आरोप है कि बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर स्पष्ट रणनीति का अभाव है। वे कहते हैं कि रोजगार सृजन के आंकड़े आश्वस्त करने वाले नहीं हैं और युवाओं के लिए घोषित कार्यक्रमों में ठोस वित्तीय प्रावधानों की कमी दिखाई देती है। इसके अतिरिक्त उन्होंने राज्य पर बढ़ते ऋण बोझ और राजकोषीय घाटे की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि यदि कर्ज का स्तर लगातार बढ़ता रहा तो भविष्य में सामाजिक योजनाओं के लिए संसाधनों का संकट उत्पन्न हो सकता है।उनकी अधिकतर आपत्तियां कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों की ओर से अपनाई गई सफेद कालर की नौकरियों को लेकर थीं।

    वस्तुस्थिति पर विचार करें तो यह सच है कि राज्य का ऋण अनुपात पिछले वर्षों में बढ़ा है, किंतु यह प्रवृत्ति केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है। अधोसंरचना निवेश और कल्याणकारी व्यय को बनाए रखने के लिए अधिकांश राज्य उधारी का सहारा ले रहे हैं। महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि यह उधारी किस प्रकार के व्यय में परिवर्तित हो रही है। यदि कर्ज से निर्मित परिसंपत्तियां उत्पादक सिद्ध होती हैं—जैसे सिंचाई परियोजनाएं, औद्योगिक कॉरिडोर या स्वास्थ्य अधोसंरचना—तो दीर्घकाल में राजस्व सृजन और आर्थिक गतिविधि के माध्यम से यह बोझ संतुलित किया जा सकता है। परंतु यदि व्यय का बड़ा हिस्सा केवल उपभोग आधारित योजनाओं में सिमट जाए और अपेक्षित आर्थिक परिणाम न मिलें, तो वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।

    एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू क्रियान्वयन की क्षमता है। मध्यप्रदेश जैसे बड़े और विविधतापूर्ण राज्य में बजट घोषणाओं को जमीन पर उतारना प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता पर निर्भर करता है। विपक्ष की यह चिंता कि कई योजनाएं घोषणा स्तर से आगे नहीं बढ़ पातीं, पूरी तरह निराधार नहीं कही जा सकती। अतः बजट की सफलता का वास्तविक आकलन तभी संभव होगा जब आगामी वित्तीय वर्ष में परियोजनाओं की प्रगति और लाभार्थियों तक पहुंच का ठोस मूल्यांकन सामने आए।

    समग्र रूप से यह बजट विकास, अधोसंरचना विस्तार और सामाजिक प्रतिबद्धता के बीच संतुलन साधने का प्रयास प्रतीत होता है। सरकार इसे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाला दस्तावेज बता रही है, जबकि विपक्ष वित्तीय जोखिमों और जमीनी चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित कर रहा है। लोकतांत्रिक विमर्श का यही सार है कि बजट केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा न रहकर सार्वजनिक उत्तरदायित्व का माध्यम बने।डाक्टर मोहन यादव यदि अपने मंत्रियों और प्रशासनिक मशीनरी के सफल संचालन से योजनाओं को जमीन पर उतार पाएंगे तभी बजट के ये प्रावधान भी सफल कहे जाएंगे। जब तक सरकार जनता की कसौटी पर खरी साबित नहीं होती तब तक मोहन सरकार वाहवाही नहीं बटोर पाएगी।

  • बीना में पचास हजार करोड़ रुपयों की एथिलीन क्रेकर परियोजना का काम शुरु

    बीना में पचास हजार करोड़ रुपयों की एथिलीन क्रेकर परियोजना का काम शुरु


    भोपाल,12 फरवरी (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 सितंबर 2023 को बीना में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली जिस एथिलीन क्रैकर परियोजना की आधारशिला रखी थी उसके लिए नए केन्द्रीय बजट में आवश्यक प्रावधान कर दिया गया है। इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की कंसल्टेंसी में प्रोजेक्ट का काम यहां जोरों शोरों से चालू है। राज्य सरकार इस परियोजना को सफल बनाने के लिए आवश्यक सुविधाएं जुटाने का प्रयास भी कर रही है।


    बीना रिफायनरी के सहयोगी प्रतिष्ठान के रूप में ये प्रोजेक्ट देश को दुनिया के पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में प्रमुख स्थान दिलाएगा। केन्द्रीय बजट में बीना पेट्रोलियम क्रेकर्स परियोजना को लगभग पचास हजार करोड़ रुपए जुटाने की मंजूरी मिल गई है। भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड BPCL की सागर जिले स्थित बीना रिफाइनरी (Bina Refinery) के विस्तार और वहां ₹49,000 करोड़ से अधिक की लागत से एक विश्वस्तरीय पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स स्थापित करने का काम चल रहा है । यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत भारत को तैयार पेट्रोकेमिकल प्रोडेक्ट का आयात कम करने और निर्यात बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाएगी।


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब इस परियोजना की आधारशिला रखी थी तब किसी को ये अनुमान नहीं था कि इतनी जल्दी ये परियोजना आकार ले लेगी। प्रदेश के कुछ सांसदों और विधायकों ने इस परियोजना को अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की लाबिंग भी की थी। शासन के कुछ अधिकारियों ने इसके लिए तमाम तर्क दिए थे,लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि इस परियोजना का कच्चा माल नेप्था बीना रिफायनरी से ही प्राप्त होता है। यहां स्थित टाऊनशिप भी काफी सुविधाजनक है। जमीन उपलब्ध है। सरकार का अमला मुआवजे आदि की प्रक्रियाएं भी पूरी कर चुका है। ऐसे में परियोजना को जल्दी पूरा करने के अलावा कोई सोच विचार नहीं किया जा सकता।


    बीना पेट्रोकेमिकल परियोजना की मुख्य बातें:
    परियोजना लागत: लगभग ₹49,000 करोड़ (लगभग ₹52,000 करोड़ तक अनुमानित) के निवेश से 1.2 MTPA एथिलीन क्रैकर यूनिट स्थापित की जा रही है।
    क्षमता विस्तार: परियोजना में रिफाइनरी की क्षमता 7.8 MTPA से बढ़ाकर 11 MTPA करने का प्रावधान शामिल है।
    उत्पादन: यह परियोजना Linear Low-density Polyethylene (LLDPE), High-density Polyethylene (HDPE), Polypropylene (PP) और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन करेगी।
    रोजगार: निर्माण चरण में 15,000 से अधिक और चालू होने के बाद 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।


    इस परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र को औद्योगिक केंद्र बनाना और आयात पर निर्भरता कम करना है। परियोजना के लिए भारत सरकार (SBI के नेतृत्व में) और मध्य प्रदेश सरकार (औद्योगिक प्रोत्साहन के माध्यम से) वित्तीय सहायता व बुनियादी ढांचा प्रदान कर रही हैं। यह परियोजना 2028 तक चालू होने की उम्मीद है।

  • अब दुनिया भर में फैल रही एकात्म मानवतावाद की खुशबू

    अब दुनिया भर में फैल रही एकात्म मानवतावाद की खुशबू

    • डॉ. मोहन यादव

    व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र निर्माण का मार्ग दिखाने वाले , विलक्षण व्यक्तित्व के धनी , एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय के प्रणेता पं . दीनदयाल उपाध्याय जी के चरणों में कोटिशः नमन।

    पं . दीनदयाल जी का जीवन भारत राष्ट्र को दिशा देने वाला प्रकाश स्तंभ है। वे एक ऐसे ऋषि राजनेता थे जो समाज, संस्कृति और राष्ट्र के समग्र उत्थान के लिए समर्पित रहे। उन्होंने राजनीति को राष्ट्रधर्म की साधना का माध्यम माना। उनका स्पष्ट मत था कि स्वतंत्र भारत की यात्रा भारतीय दर्शन , संस्कृति और परंपरा के अनुरूप होनी चाहिए।

    पं . दीनदयाल जी ने राजनीतिक चिंतन को भारतीय मूल्यों से जोड़ते हुए एकात्म मानव दर्शन का सूत्र दिया। इसमें व्यक्ति , समाज , राष्ट्र और सृष्टि के बीच समन्वय और संतुलन समाहित है। यह जीवन और संपूर्ण सृष्टि को एक सूत्र में पिरोता है। यही दर्शन व्यष्टि से समष्टि की रचना करता है। इसमें श्रीकृष्ण के वसुधैव कुटुम्बकम के भाव से लेकर आज के वैश्विक परिदृश्य का समावेश है।

    पं . दीनदयाल जी भारत के भविष्य की कल्पना चतुर्पुरुषार्थ -धर्म , अर्थ , काम और मोक्ष के आधार पर की। उनका विश्वास था कि इन चारों का संतुलन ही व्यक्ति और समाज को पूर्णता की ओर ले जा सकता है। यदि व्यक्ति और समाज को विकास के समान अवसर दिए जाएँ , तो स्वावलंबी और समर्थ समाज का निर्माण संभव है। पं . दीनदयाल जी का मानना था कि राजनीति का अंतिम लक्ष्य सशक्त , समरस और स्वाभिमानी राष्ट्र का निर्माण है। उनका विकास मॉडल केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं था , बल्कि उसमें सांस्कृतिक चेतना , सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक संतुलन का समावेश था। वे चाहते थे कि विकास का लाभ अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे , तभी वह सच्चा विकास कहलाएगा। यही अंत्योदय का भाव है।

    हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत जिस विकास पथ पर अग्रसर है , उसके मूल में पं . दीनदयाल जी का चिंतन है। विरासत से विकास , आत्मनिर्भर भारत , वोकल फॉर लोकल और सबका साथ – सबका विकास , यह सभी एकात्म मानव दर्शन के आधुनिक रूप हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी जी का संकल्प है कि वर्ष 2047 , स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत को विश्व की सर्वोच्च शक्ति के रूप में स्थापित किया जाए। यह संकल्प पं . दीनदयाल जी के स्वप्निल भारत की ही साकार अभिव्यक्ति है।

    मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के आत्मनिर्भर और विकसित भारत निर्माण की परिकल्पना को मूर्तरूप देने की दिशा में प्रदेश के प्रत्येक अंचल को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश के हर क्षेत्र की क्षमता , मेधा और दक्षता को अवसर प्रदान करने के लिए जहां रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का नवाचार किया गया, वहीं भोपाल में संपन्न हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से स्थानीय उद्योगों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। निवेश के लिये हमने यूके , जर्मनी , जापान और दावोस आदि यात्राएं कीं और हैदराबाद , कोयंबटूर सहित मुंबई में रोड-शो के माध्यम से उद्योगपतियों को आमंत्रित किया। यह क्षेत्रीय से वैश्विक स्तर तक उद्योग को जोड़ने का पहला सशक्त प्रयास है।

    मुझे यह बताते हुए संतोष है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में पं . दीनदयाल उपाध्याय जी के चिंतन को व्यवहार में उतारने का प्रयत्न किया जा रहा है। समरस, संवेदनशील और उत्तरदायी शासन के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक योजनाएं और विकास के लक्ष्य धरातल पर पहुंच रहे हैं। प्रदेश में गरीब कल्याण, किसान कल्याण, युवा शक्ति और नारी सशक्तिकरण को केन्द्र में रखकर 4 मिशन के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। इससे समाज के सभी वर्गों के कल्याण का लक्ष्य पूर्ण होगा।

    पं . दीनदयाल जी ने आर्थिक विकास के लिए कृषि , उद्योग , परिवहन , व्यापार समाज , सुरक्षा एवं सेवा का एक स्पष्ट और व्यावहारिक क्रम बताया। इस क्रम में कृषि प्रधान देश भारत में खेती को प्रथम स्थान देने की आवश्यकता व्यक्त की। उनका मानना था यदि देश में कृषि सुदृढ़ होगी , तो किसानों की आय बढ़ेगी , ग्रामीण जीवन में स्थिरता आएगी और उद्योगों को कच्चा माल एवं श्रम दोनों सहज रूप से उपलब्ध होगा। इससे किसान, उपभोक्ता और समाज तीनों का संतुलन बना रहेगा। पं . दीनदयाल जी खेती की मजबूती और किसानों की समृद्धि को समग्र विकास का आधार मानते थे। मुझे यह बताते हुए संतोष है कि मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के मार्गदर्शन में किसानों के स्वाभिमान, सुरक्षित जीवन और आत्मनिर्भरता को केन्द्र में रखकर वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें आधुनिक तकनीक , उन्नत बीज , सिंचाई , भंडारण और बाजार तक बेहतर पहुंच के माध्यम से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जाएगा। कृषि आजीविका के साधन के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कृषि क्षेत्र के सशक्तिकरण में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

    मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने वर्ष 2025-26 किसानों के कल्याण के लिए समर्पित किया है। मध्यप्रदेश में पार्वती-कालीसिंध-चंबल तथा केन-बेतवा नदी लिंक राष्ट्रीय परियोजना सहित ताप्ती ग्राउंड वॉटर रिचार्ज मेगा परियोजना से प्रदेश के 25 जिलों में 16 लाख हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त कृषि रकबा सिंचित होगा। प्रदेश के किसानों के समग्र कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठाया जायेगा।

    प्रदेश में श्रीअन्न , सरसों और चना अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जा रही है। इससे श्रीअन्न का उत्पादन और पोषण सुरक्षा को नई ऊंचाई मिलेगी। इन केंद्रों के जरिए फसलों की गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाने पर विशेष बल दिया जाएगा। प्रदेश के 30 लाख से अधिक किसानों को अगले तीन साल में सोलर पॉवर पम्प दिये जायेंगे। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 65 लाख हैक्टेयर से बढ़ाकर 1 00 लाख हैक्टेयर किये जाने का लक्ष्य है।

    पं . दीनदयाल उपाध्याय जी ने स्वाभिमानी, स्वावलंबी और विश्व कल्याण में अग्रणी भारत की कल्पना की थी। माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के नेतृत्व में देश इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनका जीवन और दर्शन हम सबको राष्ट्रधर्म के पथ पर निरंतर अग्रसर करता रहेगा।

    राष्ट्र निर्माण के अमर साधक पं . दीनदयाल जी की पुण्यतिथि पर पुनः कोटिशः वंदन।

    (लेखक, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं)

  • ई आफिस प्रणाली से फाईलें तेज चलाएं और बजट का पूरा उपयोग करें बोले मुख्य सचिव

    ई आफिस प्रणाली से फाईलें तेज चलाएं और बजट का पूरा उपयोग करें बोले मुख्य सचिव


    भोपाल,09 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने विभाग अध्यक्षों सहित अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव से अपेक्षा की है कि वे केंद्रीय बजट के प्रावधानों के अनुरूप परियोजनाएं और योजनाएं तैयार कर भारत सरकार को भेजें इससे मध्यप्रदेश की जरूरी योजनाओं को जल्दी मंजूरी मिल सकेंगी । मंत्रालय में सोमवार को बैठक में उन्होंने मध्यप्रदेश विधान सभा के बजट सत्र की तैयारियों, वर्तमान वित्तीय वर्ष के लक्ष्यों की पूर्ति, सुशासन के बिंदुओं सहित मंत्रि-परिषद के निर्णयों के पालन की समीक्षा की। मुख्य सचिव श्री जैन ने अधिकारियों से कहा कि उनके कार्यालय के सभी कार्य ई- आफिस प्रणाली पर ही हों, यह सुनिश्चित किया जाए। भौतिक रूप से फाइलों का संचालन नहीं होना चाहिए।

    मुख्य सचिव श्री जैन ने मध्यप्रदेश विधानसभा के आगामी बजट सत्र की तैयारियों की समीक्षा कर निर्देश दिए हैं कि पिछले सत्रों में शून्यकाल सूचनाओं सहित अपूर्ण उत्तर वाले प्रश्न, आश्वासन और लोक लेखा समिति की अनुशंसाओं के लंबित मामले यथाशीघ्र पूर्ण करें। उन्होंने विभागीय परामर्शदात्री समितियों की बैठक करने के साथ ही विधानसभा को विभागीय प्रशासकीय प्रतिवेदन उपलब्ध करवाने के लिए कहा है।

    मुख्य सचिव श्री जैन ने कहा कि आर्थिक वृद्धि दर में ढांचागत विकास पर किए जाने वाले पूंजीगत खर्चों का अहम योगदान होता है। अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी ने बताया कि अन्य वर्षों की तुलना में इस वित्त वर्ष में हमने पूंजीगत खर्चों के अपने वार्षिक लक्ष्य ज्यादा हासिल किए हैं। मुख्य सचिव श्री जैन ने कहा कि जिन विभागों में अभी राशि बची हुई है वे इस वित्त वर्ष की शेष अवधि में साप्ताहिक योजना बनाकर बजट का उपयोग करें।

    मुख्य सचिव श्री जैन ने निर्देशित किया कि हाल में आए केंद्र सरकार के बजट के प्रावधानों के अनुसार मध्यप्रदेश में सिटी इकोनॉमिक रीजन, डेडीकेटेड केमिकल और पेट्रोकेमिकल पार्क और मेगा टेक्सटाइल पार्क सहित अन्य परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार करे। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने जो दिशा निर्देशों तय किए हैं उन्हीं के अनुसार प्रस्ताव तैयार करके भिजवाए जाएं। मुख्य सचिव श्री जैन ने आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के लिए प्रस्ताव भेजने पर आयुष विभाग की सराहना भी की।

    मुख्य सचिव श्री जैन ने बताया कि नॉलेज और एजुकेशन सिटी, मेडिकल हब, नाइपर, फार्मास्युटिकल रिसर्च सेंटर, स्कूल और कॉलेजों के लैब, सी मार्ट, हॉस्टल, स्किल डेवलपमेंट, पशुपालन और एमएसएमई ग्रोथ फंड जैसे अनेक क्षेत्रों में केंद्र सरकार ने बजट में प्रावधान किए हैं। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों से कहा कि वे अपने तैयार प्रस्ताव यथाशीघ्र भारत सरकार को भेजें। मुख्य सचिव श्री जैन ने सलाह दी कि अधिकारी माह में कम से कम एक बार केंद्र में उनके विभाग से संबंधित ज्वाइंट सेकेट्री से बात अवश्य करें। उन्होंने कहा कि जो योजनाएं इस साल में पूरी होनी हैं उनके लक्ष्य को जल्दी से जल्दी पूरा किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि भारत सरकार से संबंधित ऐसी लंबित परियोजनाओं और योजनाओं को उनके संज्ञान में लाएं जिनमें समन्वय की आवश्यकता है। मुख्य सचिव श्री जैन भारत सरकार को भेजे जाने वाले पत्रों को शत प्रतिशत आवासीय आयुक्त को भी भेजने के निर्देश दिए।
    अविवादित नामांतरण समय सीमा में करें
    मुख्य सचिव श्री जैन ने कहा कि आमजन की सेवाओं और सुविधाएं राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्री के बाद और अविवादित नामांतरण समय सीमा में होना ही चाहिए। मुख्य सचिव श्री जैन लोकसेवा गारंटी अधिनियम में अधिसूचित सेवाओं में नागरिकों के आवेदन समय सीमा में निराकृत करने के निर्देश दिए। उन्होंने साप्ताहिक समीक्षा में इसे सर्वोच्च प्राथमिकता में रखने के लिए कहा है। मुख्य सचिव श्री जैन ने अधिसूचित 735 में से 135 अन्य सेवाओं को भी ऑनलाइन करने और जो सेवाएं अब प्रचलन में नहीं हैं,उन्हें पृथक करने की जरूरत बताई। उन्होंने सी.एम हेल्प लाइन के प्रकरणों के निराकरण में भी सर्वोच्च प्राथमिकता रखने के लिए कहा है।

    मुख्य सचिव श्री जैन ने पीएम प्रगति पोर्टल पर मध्यप्रदेश के बेहतर प्रदर्शन की जानकारी देते हुए अधिकारियों को धन्यवाद दिया।उन्होंने इसी तरह की कार्य प्रणाली सीएम मॉनिटरिंग में अपनाने की अपेक्षा की है।

    मुख्य सचिव श्री जैन ने अधिकारियों से कहा कि उनके कार्यालय के सभी कार्य ई- आफिस प्रणाली पर ही हों, यह सुनिश्चित किया जाए। भौतिक रूप से फाइलों का संचालन नहीं होना चाहिए। उन्होंने मंत्रि-परिषद की विभिन्न बैठकों में लिए गए निर्णयों के पालन की समीक्षा भी की। मुख्य सचिव श्री जैन गत एक वर्ष में नई नीतियों के लागू होने,क्रियान्वयन की स्थिति और लाभ के आंकलन और अध्ययन के निर्देश भी दिए। मुख्य सचिव श्री जैन ने सभी विभागाध्यक्ष से कहा कि वे उनके विभागों के निगम,मंडल और बोर्ड की समीक्षा करने के साथ ही वित्त आयोग की अनुशंसाओं की समीक्षा भी करें।

  • व्यापारियों से क्यों डर रही गुजरे कल के बनियों की भाजपा

    व्यापारियों से क्यों डर रही गुजरे कल के बनियों की भाजपा


    भोपाल चेंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के चुनावों में जिस तरह कार्पोरेट जगत से जुड़े धन्नासेठों का बोलबाला दिखा और पच्चीस हजार व्यापारियों के बीच महज बाईस सौ व्यापारियों के बीच ये चुनाव कराए गए उसे देखकर कहा जा सकता है कि एक छोटी सी संस्था को भोपाल के व्यापार जगत की शीर्ष संस्था बनाने की कोशिश की जा रही है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से जुड़े व्यापारियों ने अपना कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा था। प्रगतिशील पैनल के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी तेजकुल पाल सिंह पाली हों या उनके प्रतिद्वंदी उन्नति पैनल के गोविंद गोयल दोनों पूर्व में कांग्रेस से जुड़कर राजनीति करते रहे हैं। ये बात अलग है कि चुनाव जीतने के बाद गोविंद गोयल अपने समर्थकों के साथ भाजपा कार्यालय पहुंचे और मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल से भेंट करके शुभकामनाएं प्राप्त कीं। दरअसल ये जताने की कोशिश है कि भोपाल के व्यापारी सरकार के साथ खड़े हैं।प्रगतिशील पैनल के उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचित कमल पंजवानी बरसों से गोविंद गोयल के ही साथी रहे हैं। व्यापारियों की आवाज ने उन्हें प्रगतिशील पैनल में भेज दिया। अब चेंबर में जो नया नेतृत्व उभरा है वह मौजूदा समस्याओं पर लगभग एकराय है। जो भाजपा के लिए खतरे की घंटी बनने जा रहा है।

    कमल पंजवानीःप्रगतिशील पैनल के व्यापारियों की विचार प्रक्रिया को आगे ले जाने का दारोमदार


    भोपाल में लगभग पच्चीस हजार व्यापारी हैं जिनके कारोबार को बड़ा कहा जा सकता है और जो जीएसटी भी जमा करते हैं।जबकि चुनाव में मत डालने पहुंचे ज्यादातर छोटे व्यापारी थे और उनमें भी जीएसटी भरने वालों की संख्या तो बहुत कम है।जिस तरह व्यापार जगत में इन दिनों आनलाईन कारोबार ने दस्तक दी है और स्थानीय कारोबारी परेशानी महसूस कर रहे हैं उन हालात में व्यापारी यदि कांग्रेस से दूरी रखते हैं तो वे भाजपा मे भी बैचेनी ही महसूस कर रहे हैं। भाजपा ने व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किए हैं। जीएसटी और अन्य तरह की दस्तावेजी जरूरतों ने व्यापार करना बहुत कठिन बना दिया है. जाहिर है कि ये स्थिति भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के एक चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके भीतर भारतीय राजनीति, व्यापारिक वर्ग और बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के बीच के जटिल संबंध छिपे हैं। लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी को ‘बनियों की पार्टी’ या व्यापार-उद्योग समर्थक दल के रूप में देखा जाता रहा है। ऐसे में भोपाल जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्र में चेंबर के अध्यक्ष पद पर भाजपा से जुड़े किसी भी प्रत्याशी का न होना कई तरह के सवाल खड़े करता है।

    सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि चेंबर ऑफ कॉमर्स जैसे संगठनों के चुनाव औपचारिक रूप से गैर-राजनीतिक माने जाते हैं, लेकिन व्यवहार में उनका सीधा रिश्ता सत्ता, नीतियों और राजनीतिक दलों से रहता है। व्यापारिक समुदाय अक्सर उसी दल या विचारधारा के करीब खड़ा दिखता है, जिसे वह अपने हितों के लिए अधिक अनुकूल मानता है। भाजपा को दशकों तक यही लाभ मिलता रहा। उदारीकरण के बाद, जीएसटी, कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती, इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर जैसी नीतियों ने इस धारणा को और मजबूत किया कि भाजपा व्यापार के स्वाभाविक साथी के रूप में खड़ी है। ऐसे में भोपाल चेंबर के चुनावों में भाजपा पृष्ठभूमि वाले किसी चेहरे का आगे न आना या न उभर पाना एक सामान्य घटना नहीं कही जा सकती।

    यह स्थिति व्यापार जगत में हो रहे उन बदलावों की ओर इशारा करती है, जिन पर शायद भाजपा का सीधा संवाद कमजोर पड़ा है। छोटे और मध्यम व्यापारियों का एक बड़ा वर्ग बीते कुछ वर्षों में असहजता महसूस करता रहा है—चाहे वह जीएसटी की जटिलताएं हों, अनुपालन का बोझ हो, ऑनलाइन और कॉर्पोरेट व्यापार से बढ़ती प्रतिस्पर्धा हो या फिर नोटबंदी के बाद नकदी आधारित कारोबार पर पड़े दीर्घकालिक प्रभाव। बड़े उद्योग समूहों और कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए नीतियां अपेक्षाकृत अनुकूल रहीं, लेकिन परंपरागत व्यापारिक वर्ग, जिसे कभी भाजपा का सबसे पक्का आधार माना जाता था, स्वयं को हाशिये पर महसूस करने लगा है। भोपाल चेंबर का चुनाव इसी असंतोष का एक स्थानीय प्रतिबिंब भी हो सकता है।

    दूसरी ओर, वैश्विक बाजार में चल रही उथल-पुथल—चीन-अमेरिका तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव, युद्धों और भू-राजनीतिक संघर्षों का असर, तकनीकी परिवर्तन—भारतीय व्यापार जगत की मानसिकता को भी बदल रहा है। आज व्यापारी केवल स्थानीय या राष्ट्रीय नीतियों तक सीमित नहीं सोच रहा, वह वैश्विक प्रतिस्पर्धा, निर्यात-आयात, डिजिटल अर्थव्यवस्था और नई पीढ़ी के उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति बना रहा है। ऐसे में राजनीतिक दलों से उसकी अपेक्षाएं भी बदली हैं। वह केवल कर रियायत या संरक्षण नहीं, बल्कि स्पष्ट दीर्घकालिक दृष्टि, सरल नियम और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम वातावरण चाहता है।

    यहां सवाल उठता है कि क्या भाजपा के भीतर इन बदलावों को लेकर पर्याप्त चिंतन चल रहा है, या पार्टी अब भी पुराने ‘व्यापार समर्थक’ टैग पर ही संतुष्ट है। पार्टी की नीति-निर्माण प्रक्रिया में अर्थशास्त्री, कॉर्पोरेट सलाहकार और बड़े उद्योग समूहों की आवाज तो सुनाई देती है, लेकिन जमीनी व्यापारिक संगठनों, मंडियों, छोटे उद्योगों और चेंबरों की बदलती सोच को समझने का प्रयास अपेक्षाकृत कमजोर दिखता है। भोपाल चेंबर का चुनाव इस दूरी को उजागर करता है—जहां व्यापारिक समुदाय ने संभवतः किसी राजनीतिक पहचान से अलग हटकर अपने आंतरिक समीकरणों और प्राथमिकताओं के आधार पर नेतृत्व चुना।

    यह मौन भी गौर करने लायक है। भाजपा या उसके स्थानीय नेतृत्व की ओर से इस तरह के संकेतों पर सार्वजनिक आत्ममंथन कम ही दिखाई देता है। जबकि एक ऐसे दौर में, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता से घिरी हो, राजनीतिक दलों का व्यापारिक वर्ग से संवाद और भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि भाजपा सचमुच स्वयं को व्यापार और उद्योग की पार्टी मानती है, तो उसे केवल नीतिगत घोषणाओं से आगे बढ़कर व्यापारिक संगठनों के भीतर उभर रहे नए नेतृत्व, नई चिंताओं और नई अपेक्षाओं को समझना होगा।

    अंततः, भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चुनाव में भाजपा से जुड़ा कोई अध्यक्ष प्रत्याशी न होना एक घटना भर नहीं, बल्कि एक संकेत है। यह संकेत है कि व्यापार जगत एक संक्रमण के दौर से गुजर रहा है और उसकी राजनीति से अपेक्षाएं बदल रही हैं। यदि भाजपा इन बदलावों को समय रहते पढ़ने और उन पर गंभीर मंथन करने में सफल होती है, तो वह अपने पुराने आधार को नए संदर्भ में फिर से जोड़ सकती है। अन्यथा, ‘बनियों की पार्टी’ की छवि केवल एक पुरानी राजनीतिक स्मृति बनकर रह जाने का खतरा भी नकारा नहीं जा सकता।

  • राज्य के विकास काआधार बनेगा केन्द्रीय बजटःडॉ.मोहन यादव

    राज्य के विकास काआधार बनेगा केन्द्रीय बजटःडॉ.मोहन यादव

    भोपाल, 03 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक  हेमंत खण्डेलवाल ने केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार भोपाल में पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। पत्रकार-वार्ता में पार्टी के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह एवं मध्यप्रदेश शासन के उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पत्रकार-वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में और वित मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत के संकल्पों को सिद्ध करने वाला है। केंद्रीय बजट मध्यप्रदेश के आर्थिक-औद्योगिक और सामाजिक विकास का ऐतिहासिक अवसर सिद्ध होगा। पूंजीगत व्यय में वृद्धि, शहरों के विकास व लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम का विकास प्रदेश के लिए वरदान बनेगा। यह बजट सतत आर्थिक विकास के साथ जनअपेक्षाओं को पूरा करने वाला है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने समय-समय पर अपने निर्णयों से देश को सशक्त बनाने के साथ दुनिया को भारत की ताकत का अहसास कराया है। इस बजट के माध्यम से उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार के अनेक अवसर पैदा होंगे। यह केंद्रीय बजट सभी वर्गों की आशा-आकांक्षाओं को पूरा करने के साथ उन्हें सशक्त बनाने में निर्णायक सिद्ध होगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की बताई चार जातियों गरीब, युवा, नारी शक्ति और अन्नदाता के साथ मध्यम वर्ग, उद्यमियों और हर वर्ग के कल्याण व शक्तिकरण के लिए प्रावधान किए गए हैं। केंद्रीय बजट सिर्फ बजट नहीं है, यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत का विजन डॉक्यूमेंट है। यह आने वाले वर्षों में भारत की दिशा तय करने वाला बजट सिद्ध होगा। यह सर्वस्पर्शी, सर्वव्यापी और सर्वसमावेशी बजट है। बजट में तीन कर्तव्यों-आर्थिक विकास, जन-आकांक्षाओं की पूर्ति और ‘सबका साथ, सबका विकास’ की परिकल्पना को साकार किया गया है। बजट में रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। केन्द्रीय बजट में राजकोषीय घाटा को 4.5 प्रतिशत से घटाकर 4.3 प्रतिशत तक लाने का रोडमैप तैयार किया है। देश के कुल कर्ज को जीडीपी के 56 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत तक लाने की भी योजना है। बजट में 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर्स के निर्माण और 12.2 लाख करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर का प्रावधान किया गया है। सेमीकंडक्टर मिशन के लिए निवेश राशि को 22,500 करोड़ से बढ़ाकर 40,000 करोड़ करने का प्रस्ताव है।उन्होंने कहा कि इस बजट से मध्यप्रदेश को भी व्यापक लाभ होगा और यह बजट वर्ष 2047 के विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा।

    मध्यप्रदेश को सुदृढ़ वित्तीय आधार प्राप्त होगा, निवेशकों का विश्वास और बढ़ेगा- डॉ. मोहन यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह बजट युवा शक्ति प्रेरित बजट है। इस बजट का मूल उद्देश्य तेज एवं सतत आर्थिक वृद्धि, जन आकांक्षाओं की पूर्ति, क्षमता निर्माण तथा सभी परिवारों, क्षेत्रों और सेक्टरों को समान अवसर उपलब्ध कराना है। बजट में आत्मनिर्भरता को मार्गदर्शक सिद्धांत बनाकर उच्च विकास दर बनाए रखने के स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। यह बजट मध्यप्रदेश को सुदृढ़ वित्तीय आधार प्रदान करेगा। साथ ही निवेशकों का विश्वास और बढ़ेगा, जिससे मध्यप्रदेश के विकास की रफ्तार और तेज होगी और हमारा प्रदेश आत्मनिर्भर बनेगा। बजट में वैश्विक बाजारों से जुड़ाव, निर्यात विस्तार तथा दीर्घकालिक निवेश आकर्षण की रणनीति है, जिसका बहुत फायदा आने वाले सालों में मध्यप्रदेश को मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल वित्तीय प्रावधानों का संकलन नहीं है, बल्कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस आधारित आर्थिक विकास का संरचित रोडमैप है। यह बजट मध्यप्रदेश को सतत विकासशील राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक भूमिका अदा करेगा। बजट के प्रावधानों से मध्यप्रदेश में निवेश, उद्योग स्थापना, रोजगार सृजन, उत्पादन क्षमता, निर्यात उन्मुख विनिर्माण का बेहतर वातावरण तैयार होगा।

    मध्यप्रदेश स्वास्थ्य और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में तेजी से आगे बढ़ेगा

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बायोफार्म शक्ति योजना से बायोटेक्नोलॉजी, बायो फार्मा, फार्मास्यूटिकल अनुसंधान और हेल्थ इंडस्ट्री आधारित स्टार्ट अप्स को बढ़ावा मिलेगा। मध्यप्रदेश ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रसर होगा, जिससे उच्च मूल्य रोजगार सृजित होंगे। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और एआई आधारित तकनीकों के विकास से मध्यप्रदेश में हाई टेक उद्योग, डिजिटल निवेश और नवाचार आधारित उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। बजट के प्रावधान मध्यप्रदेश के पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगा। ग्रामीण और स्थानीय अर्थव्यवस्था रोजगार तथा औद्योगिक पुनर्जीवन को नई गति प्रदान करेंगे। 200 लेगेसी इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स के पुनर्जीवन से मध्यप्रदेश के पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों में अधोसंरचना सुधार, निवेश पुनर्स्थापन, उत्पादन विस्तार और स्थानीय रोजगार को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट मध्यप्रदेश के एमएसएमई सेक्टर के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। राज्य में उद्यमिता, स्वरोजगार तथा औद्योगिक विस्तार को मजबूती मिलेगी। मध्यप्रदेश के लघु एवं मध्यम उद्योग अधिक प्रतिस्पर्धी, आत्मनिर्भर और विस्तार उन्मुख बनेंगे। मध्यप्रदेश को आईटी, पर्यटन, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में यह बजट महती भूमिका निभाएगा।

    ग्रामीण क्षेत्र के साथ नारी शक्ति को आर्थिक सशक्तिकरण देगा बजट

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बजट में वर्ष 2047 तक भारत को वैश्विक सेवा क्षेत्र में नेतृत्व दिलाने की दृष्टि से सेवा क्षेत्र को विकास का प्रमुख चालक बनाया गया है। यह बजट मध्यप्रदेश को आईटी, हेल्थ, एजुकेशन, टूरिज्म और प्रोफेशनल सर्विसेज के केंद्र के रूप में विकसित होने में सहायक सिद्ध होने के सथ भारत को सेवा क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व भी दिलाएगा। बजट में 10 हजार करोड़ की लागत से देश के प्रत्येक जिलों में महिला छात्रावास स्थापना का के साथ नारी शक्ति के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने 1.5 लाख सेवा प्रदाताओं और एक लाख स्वास्थ्य पेशेवरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। लखपति दीदी योजना पर आधारित सामुदायिक स्व-सहायता समूह उद्यम स्थापित करने का प्रावधान है, इससे महिलाओं को क्रेडिट लिंक्ड आजीविका से उद्यम स्वामित्व की ओर जाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट के इन प्रावधनों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी ही, साथ ही यह बजट नारी शक्ति को आर्थिक सशक्तिकरण देने वाला होगा। सिटी ईकोनॉमिक रीजन के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में नियोजित आर्थिक विकास, औद्योगिक व्यावसायिक क्लस्टरिंग और आधुनिक अधोसंरचना का निर्माण होगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश के प्रमुख शहर संगठित आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित होंगे, जिससे  निवेश अनुकूल शहरी अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा।

    बजट मध्यप्रदेश के आर्थिक विकास के नए द्वार खोलता है

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह बजट मध्यप्रदेश के लिए आर्थिक विकास के नए द्वार खोलता है, जहां उद्योगों को सरल प्रक्रियाएं, निवेशकों को भरोसेमंद वातावरण, युवाओं को रोजगार के अवसर, महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण, एमएसएमई को संस्थागत समर्थन और नागरिकों को बेहतर सेवाए प्राप्त होंगी। यह बजट मध्य प्रदेश के सर्वांगीण विकास, समावेशी प्रगति और दीर्घकालिक आर्थिक समृद्धि का एक मजबूत आधार बनेगा। साथ ही एक निवेश-आकर्षक, विकासोन्मुख और भविष्य-उन्मुख अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा। यह बजट मध्यप्रदेश के लिए तेज विकास, संरचनात्मक परिवर्तन और सतत समृद्धि की एक सशक्त विकास यात्रा का प्रारंभ बिंदु सिद्ध होगा, जो राज्य के सामाजिक आर्थिक भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अत्यंत सहायक एवं परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगा।

    प्रदेश की प्रतिभाओं के बलबूते फार्मा सहित सभी क्षेत्रों में लगाएंगे छलांग

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य्रदेश अपनी प्रतिभाओं के बलबूते पर फार्मा सहित सभी क्षेत्रों में लंबी छलांग लगाएगा। सेमीकंडक्टर बड़ा सेक्टर है। मैं सेमीकंडक्टर को लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री से कल ही बात करके आया हूं। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 भारतीय तकनीक है, जिसके आधार पर मध्यप्रदेश में अत्याधुनिक उद्योग, डिजिटल निवेश के साथ देश के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। हमारे प्रदेश में जो उद्योग चल रहे हैं, वह अधिकांश परंपरागत आधारित हैं। आगे बढ़ने के लिए रिनोवेशन के साथ और अधिक प्रभावी कार्य किया जाएगा। मध्यप्रदेश में पहले कॉटन इंडस्ट्री चलती थी, लेकिन रिनोवेशन नहीं होने से वह डूब गई थी। प्रधानमंत्री मोदी जी ने धार में पीएम मित्र पार्क की सौगात दी है, जिसके आधार पर हमारी सरकार मध्यप्रदेश वस्त्र उद्योग को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि नए उद्योग लगाना अच्छी बात है, लेकिन जो चल रहे हैं उनका संवर्धन करना भी एक बड़ा कार्य है। हमारी सरकार इस क्षेत्र में भी कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए भी पर्याप्त धनराशि दी गई है। मध्यप्रदेश में प्रमुख शहर संगठित और आर्थिक रूप से समृद्ध होंगे और संरचना निवेश मॉडल मध्य प्रदेश के लिए अत्यंत लाभकारी होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदृष्टि आर्थिक विकास के नए राह दिखा रही है। मैं प्रधानमंत्री जी को बधाई देता हूं कि उन्होंने देश के आर्थिक विकास के लिए कई निर्णय लिए हैं। पाकिस्तान हमारे साथ आजाद हुआ। वहां की आर्थिक स्थिति दुनिया में किसी से छिपी नहीं है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश को सशक्त बनाने के साथ दुनिया को भारत की ताकत का अहसास कराया है।भारत को आत्मनिर्भर बनाने, देशवासियों के कल्याण और मध्यम वर्ग को राहत देने वाले इस क्रांतिकारी बजट के लिए यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी का मध्यप्रदेशवासियों की ओर से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

    केंद्रीय बजट सशक्त भारत की नींव को और मजबूती प्रदान करेगा – श्री हेमंत खण्डेलवाल

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित व आत्मनिर्भर भारत के विजन का सशक्त दस्तावेज़ है। गरीब, युवा, नारी शक्ति, अन्नदाता के साथ मध्यम वर्ग और उद्यमियों के कल्याण व सशक्तिकरण के प्रावधान बजट में किए गए हैं। यह सर्वस्पर्शी, सर्वसमावेशी बजट रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म की भावना को दर्शाता है, जो मध्यप्रदेश सहित देश को 2047 के विकसित भारत की ओर मजबूती से ले जाएगा। केंद्रीय बजट को राजनीति के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की नजर से देखना आवश्यक है। देश के कुल कर्ज को जीडीपी के 56 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत तक लाने की भी योजना है। बजट में 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर्स के निर्माण और 12.2 लाख करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर का प्रावधान किया गया है। सेमीकंडक्टर मिशन के लिए निवेश राशि को 22,500 करोड़ से बढ़ाकर 40,000 करोड़ करने का प्रस्ताव है।उन्होंने कहा कि इस बजट से मध्यप्रदेश को भी व्यापक लाभ होगा और यह बजट वर्ष 2047 के विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा। यह बजट भारत को आने वाले वर्षों में विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश तेजी से सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, और बजट 2026 उसी भरोसे और दूरदृष्टि का प्रमाण है। यह केंद्रीय बजट देश के आर्थिक विकास के साथ “रिफॉर्म एक्सप्रेस” की रफ्तार को भी दिखा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में प्रस्तुत केंद्रीय बजट तात्कालिक प्रभाव से अधिक अगले 10-20 वर्षों में भारत की दिशा तय करने वाला है। यह बजट सशक्त भारत की नींव को और मजबूती प्रदान करेगा।

    स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा बजट

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि केन्द्रीय बजट में फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) को 4.5 प्रतिशत से घटाकर 4.3 प्रतिशत तक लाने का रोडमैप तैयार किया है। साथ ही देश के कुल कर्ज को जीडीपी के 56 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत तक लाने की भी योजना है। रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में बड़े निवेश की योजना बनाई गई है, जिससे इस क्षेत्र में चीन की निर्भरता कम होगी। सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा केमिकल पार्क और नए इकोनॉमिक जोन स्थापित करने की भी घोषणा हुई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की 17 दवाइयों पर कस्टम ड्यूटी शून्य कर दी गई है। एक लाख हेल्थ प्रोफेशनल्स की नियुक्ति, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान और हेल्थ टूरिज्म को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। जिला अस्पतालों का उन्नयन कर उनमें ट्रामा सेंटर स्थापित करने संबंधी प्रावधान स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार लाएंगे। महिलाओं के लिए हर जिले में हॉस्टल, डेढ़ लाख केयर वर्कर्स और पेंशनर्स को सुविधाएं देने का भी प्रावधान है। यह महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण के लिए बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि ‘लखपति दीदी’ योजना, पशुपालन में पूंजी सब्सिडी, पशु चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने तथा अमृत सरोवर योजना के माध्यम से रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह निर्णय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे।

    युवाओं को रोजगार दिलाने में महती भूमिका निभाएगी कंटेंट क्रिएटर लैब

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि केंद्रीय बजट में 15 हजार माध्यमिक शालाओं में कंटेंट क्रिएटर लैब की स्थापना, आईआईएम के सहयोग से 10 हजार टूरिस्ट गाइड तैयार करने और ‘खेलो इंडिया’ के माध्यम से खेलों को प्रोत्साहन देने की घोषणाएं की गई हैं। क्रिएटर लैब युवाओं को रोजगार दिलाने में महती भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी देश को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रहे हैं। रक्षा बजट में 15 प्रतिशत की वृद्धि से देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को और बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि बजट में महात्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज की परिकल्पना का पालन करते हुए खादी, हथकरघा, हस्तशिल्प और एक जिला एक उत्पाद को बढ़ावा देने वाला है। रक्षा बजट में 15 फीसदी की बढ़ोतरी देश की सुरक्षा की प्रधानमंत्री जी की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। पूर्वोत्तर राज्यों में बौद्ध स्थलों के संरक्षण, बुनियादी ढांचे के विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का निर्णय प्रधानमंत्री जी की विरासत के विकास के मंत्र को साकार कर रहा है। कैंसर की 17 जीवनरक्षक दवाओं पर कस्टम ड्यूटी शून्य या न्यूनतम कर गरीबों को संबल देने का कार्य किया गया है। यह बजट महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने वाला है। बजट में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक बनाने पर स्पष्ट फोकस किया गया है। पशुपालन और मत्स्य पालन को मजबूती, पूंजी सब्सिडी से पशु चिकित्सकों की संख्या बढ़ेगी और जलाशयों, अमृत सरोवरों के निर्माण से ग्रामीण रोजगार को प्राथमिकता दी गई है।

    पत्रकार-वार्ता के दौरान पार्टी के प्रदेश महामंत्री श्री राहुल कोठारी, प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री आशीष उषा अग्रवाल एवं जिला अध्यक्ष श्री रविन्द्र यति मंचासीन रहे।

  • ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संजय जैन को डाक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया

    ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संजय जैन को डाक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया


    भोपाल,03 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। फार्मेसी और मेडीकल साईंस के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन को डाक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया है। मध्यांचल प्रोफेशनल विश्वविद्यालय भोपाल के प्रथम दीक्षांत समारोह में उन्होंने कहा कि दुनिया के दवा बाजार में भारत की भागीदारी बढ़ाने के लिए हमारे युवा और फार्मासिस्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने श्री संजय जैन को डाक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किए जाने पर बधाई भी दी।


    इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की चांसलर प्रीति पटेल. वाइस चांसलर श्री राय . राजीव गांधी विश्वविद्यालय के कुल गुरु डॉक्टर एस.सी. चौबे. कवि एवं साहित्यकार शैलेश लोढ़ा एवं डॉ प्रदीप कुमार जोशी पूर्व अध्यक्ष यूपीएससी भारत सरकार उपस्थित थे। कार्यक्रम में लगभग 500 छात्र-छात्राओं को भी उपाधि देकर सम्मानित किया गया।


    कार्यक्रम के समापन पर विश्वविद्यालय से संबंधित समिति के अध्यक्ष श्री अजीत पटेल ने अतिथियों का आभार प्रदर्शित किया।