Month: December 2025

  • भाजपा के प्रदेश कार्यालय में सजा  मंत्रियों का जनता दरबार

    भाजपा के प्रदेश कार्यालय में सजा मंत्रियों का जनता दरबार


    मध्य प्रदेश में, भाजपा ने निर्णय लिया है कि अब राज्य के मंत्रियों को हफ्ते में पांच दिन दोपहर 1 से 3 बजे तक पार्टी (प्रदेश) कार्यालय में बैठना होगा, ताकि कार्यकर्ता और आम लोग सीधे उनसे अपनी समस्याएँ या सुझाव रख सकें। इस व्यवस्था के तहत सोमवार से शुक्रवार हर दिन दो-दो मंत्री लगाए जाएँगे। शनिवार–रविवार इस सूची में नहीं होंगे। इस पहल की शुरुआत राज्य के उपमुख्यमंत्री और अन्य राज्य मंत्रियों से की गई है।
    राजस्थान के भाजपा कार्यालय में “वर्कर हियरिंग” (कार्यकर्ता सुनवाई) का ये मॉडल लागू किया गया है, जहाँ मंत्री प्रति हफ्ते तय दिन कार्यालय में बैठेंगे।इस व्यवस्था से जमीनी स्तर पर कार्य करने वाला कार्यकर्ता सीधे सरकार के शीर्ष व्यक्ति से सीधे संवाद कर पाएगा।ये कामकाजी व्यवस्था कार्यकर्ताओं व आम लोगों को सीधे अपने प्रतिनिधियों (मंत्रियों) तक पहुँचने का अवसर देती है। इससे संगठन और सरकार में “नीचे से ऊपर” (bottom-up) संवाद की संभावना बढ़ती है।
    सरकारी ढांचे के कार्य करने का जो माडल आजादी के बाद से बना हुआ था उसमें भाजपा की सरकारों ने मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात का माडल विकसित किया था। इसके पहले की कांग्रेसी सरकारों के मंत्री अपने बंगलों पर जनता से मुलाकात करते रहे हैं। वहां मंत्री के स्टाफ का एक काकस स्थापित हो जाता था और तबादलों, पोस्टिंग के अलावा कई अन्य जन शिकायतों का निवारण किया जाता था।इस व्यवस्था में अक्सर शिकायतकर्ता (worker / आम नागरिक) को लम्बा इंतजार करना पड़ता था, या मंत्री तक पहुँचने में दिक्कत होती थी। अब तय समय होने से, मुद्दों को सुनने व समाधान का असली मौका मिलेगा।इससे प्रशासन में जवाबदेही (accountability) और प्रतिसाद (responsiveness) की छवि मजबूत हो सकती है। पार्टी कार्यकर्ता महसूस कर सकते हैं कि “उनकी आवाज सुनी जाती है” — इससे संगठन में भरोसा और जुड़ाव (motivation) बनेगा। विशेष रूप से, ऐसे कार्यकर्ताओं जिन्हें पहले अनदेखा महसूस होता था, वे अब सक्रिय और जागरूक महसूस करेंगे।
    सीधे जनता से संवाद होने से क्षेत्र की विशिष्ट समस्याएं, लोक-विकास की मांगें, समझौतों की जरूरत आदि सामने आएँगी।इससे सरकार को नीतिगत फैसलों में grassroots का इनपुट मिलेगा, जो विकास व प्रशासन में सुधार ला सकता है। भक्त या समर्थक नहीं बस, आम नागरिक या कार्यकर्ता भी अपनी बात रख सकते हैं — इससे राजनीतिक जीवन थोड़ा “लोक-केंद्रित” बनेगा।
    केवल दो घंटे प्रतिदिन और सिर्फ दो मंत्री से बहुत सारे कार्यकर्ता या आम लोग अपनी बातें पूरी तरह नहीं रख पाएँगे। केवल सुनना पर्याप्त नहीं है; समस्या हल करना अलग है। संसाधन, अधिकार, बजट, प्रशासनिक बाधाएं आदि हो सकते हैं।यदि केवल पार्टी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी गई आम नागरिकों या निवासियों को नहीं तो लोकतंत्र से समाधान के मूल लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकेगा। वे ही लोग आगे आएंगे जिनके पास पहुंच होगी; इससे “नज़रअंदाज़” वर्ग फिर पीछे रह सकते हैं।
    जब मंत्री नियमित रूप से संगठन कार्यालय में बैठेंगे, तो सरकार तथा पार्टी की भूमिका और दायित्व में कई भ्रम भी फैल सकते हैं। कार्यकर्ता-मुद्दों पर सरकारी फैसले लेंगे या सिर्फ उनके प्रश्नों का जवाब देकर अपना ज्ञान पेलेंगे। यह कदम संभवतः 2027 के लिए तैयारियों की दिशा में है पार्टी संगठन को मजबूत करना, grassroots कार्यकर्ताओं को जोड़ना, सुनने की संस्कृति बनाना। यह जनता (या कार्यकर्ता) के दृष्टिकोण से भाजपा की “खुली” और “जवाबदेह” छवि पेश करता है, जिससे विपक्षी आलोचना कम हो सकती है।
    क्षेत्रीय और स्थानीय स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत होगी जिससे मतदाताओं से जुड़ाव आसान होगा। लेकिन अगर यह सिर्फ एक दिखावा (symbolic gesture) बना रह गया , जहाँ सुनने का समय है, लेकिन समाधान नहीं — तो आलोचना और असंतोष भी बढ़ सकता है।ये कहा जा सकता है कि यह व्यवस्था सही दिशा में एक सकारात्मक पहल है, बशर्ते इसे सिर्फ “प्रोटोकॉल” न समझा जाए, बल्कि “सशक्त लोकतांत्रिक संवाद” के रूप में सक्रिय रूप से लागू किया जाए। अगर मंत्रियों ने वास्तव में जनता व कार्यकर्ताओं की सुनवाई की, उनकी समस्याओं पर संवेदनशीलता दिखायी, और त्वरित समाधान व असर दिखाया तो इससे पार्टी-सरकार दोनों को ही लाभ होगा। लेकिन सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह व्यवस्था कितनी नियमित, पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह साबित होती है।

  • पीड़िता पर दबाव बनाकर सजा से बचने का प्रयास कर रहा पास्को आरोपी प्रकाश गुप्ता

    पीड़िता पर दबाव बनाकर सजा से बचने का प्रयास कर रहा पास्को आरोपी प्रकाश गुप्ता


    भोपाल, 01 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सैकड़ों लोगों से ठगी और महिलाओं के विरुद्ध यौन अपराध करने वाला कंप्यूटर व्यवसायी प्रकाश चंद्र गुप्ता इन दिनों जेल की सजा से बचने के लिए तरह तरह के कानूनी दांवपेंचों का इस्तेमाल कर रहा है। उसने अपने वकील के माध्यम से पीडि़ता पर दबाव बनाकर पास्को एक्ट की कड़ी सजा से बचने का जाल बिछाया है। वह अदालत के सामने पुलिस कार्रवाई के विरुद्ध भी शिकायतें करके खुद को निर्दोष बताने का प्रयास कर रहा है।


    बताया जाता है कि राजधानी के एमपीनगर में बूटकॉम सिस्टम नामक दूकान चलाने वाला गुप्ता अपने ग्राहकों को झांसा देकर ठगने के लिए कुख्यात रहा है। उसके विरुद्ध कई व्यापारियों और ग्राहकों ने भी ठगी की शिकायतें दर्ज कराई हैं। जब इस बार उसके विरुद्ध एक नाबालिग बालिका ने यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने सख्त जांच करके उसे अदालत के माध्यम से जेल पहुंचा दिया । तभी से वह अपने बचाव में कई तरह के षड़यंत्र कर रहा है।ये आदतन अपराधी अब तो सजा से बचने के लिए पुलिस और अदालतों के विरुद्ध भी तरह तरह की झूठी शिकायतें कर रहा है।


    पीड़िता की ओर से पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत की गई है कि आरोपी गुप्ता स्वयं एवं अपने वकील के माध्यम से मनगढ़ंत लिफाफे भेज रहा है जिन पर लीगल नोटिस लिखा है। वह पहले से अन्य प्रकरणों में भी इस तरह के लिफाफे भेजकर अदालत को गुमराह करने का प्रयास करता रहा है। पूर्व में वरिष्ठ अधिवक्ता विजय चौधरी ने ऐसे ही लिफाफे भेजने के कारण गुप्ता के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी। तब उन लिफाफों में ऊटपटांग चित्र और रद्दी कागज भेजे गए थे। श्री चौधरी ने लिखा था कि उनके पक्षकार मनीष बाधवानी को इस तरह की चिठ्ठियां भेजना बंद करें। इस प्रकार के षड़यंत्र करना न्याय के लिए घातक है। ये दस्तावेज पक्षकार की ओर से अदालत को भी दिए गए हैं।


    ज्ञात हुआ है कि विगत में एक लड़की अनन्या पाराशर ने एमपीनगर पुलिस थाने को शिकायत की थी कि जब गुप्ता ने उसे कबाड़ा कंप्यूटर बेचा और वह शिकायत करने पहुंची तो गुप्ता ने अपनी ही दूकान में बंदूक तानकर गाली देते हुए जान से मारने की धमकी दी। लड़की की शिकायत पर एमपीनगर पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 0210 । 2022 दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया था। बाद में शिकायत कर्ता लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।


    महिलाओं को जाल में फंसाने के लिए कुख्यात प्रकाश गुप्ता ने केनरा बैंक कोहेफिजा शाखा की मैनेजर सुधा दर्शिका से दो करोड़ इक्कीस लाख रुपयों की ठगी के आरोप में जेल की हवा खाना पड़ी थी। इससे बचने के लिए गुप्ता ने सुधा दर्शिका के विरुद्ध भोपाल जिला न्यायालय में एक झूठा प्रकरण दर्ज कराने का प्रयास किया । बाद में केनरा बैंक और सुधा दर्शिका को भी वह इसी तरह के फर्जी लिफाफे भेजने लगा। केनरा बैंक ने आम जनता को सावधान करने के लिए राजधानी के एक अखबार में आम सूचना प्रकाशित करवाई थी कि बैंक की ओर से गुप्ता से ये रकम वसूली जानी है। वह कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है ।


    कमलानगर पुलिस ने भी महिलाओं की शिकायत पर प्रकाश गुप्ता के विरुद्द चार करोड़ सत्ताईस लाख रुपए की धोखाधड़ी की शिकायत की थी। पुलिस ने अपराध दर्ज करके गुप्ता को गिरफ्तार किया था तब न्यायालय ने उसे जेल भेज दिया था। यह प्रकरण क्रमांक आरटी 4137 । 20 अभी अदालत में विचाराधीन है।


    गुप्ता की ओर से न्यायाधीशों पर दबाव बनाने के लिए हाईकोर्ट तक में झूठी शिकायतें की जाती रहीं हैं। अपर सत्र न्यायाधीश विशाल अखंड और मुख्य न्यायायिक मजिस्ट्रेट विनोद पाटीदार की झूठी शिकायतें हाईकोर्ट के सतर्कता विभाग ने जांच के बाद झूठी पाए जाने पर खारिज कर दीं थीं।