Month: December 2025

  • साइबर ठगी रोकेगी जीरो एफआईआर:अमित शाह

    साइबर ठगी रोकेगी जीरो एफआईआर:अमित शाह

    01 लाख से अधिक राशि की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर लागू होगी ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR)

    भोपाल 25दिसंबर(प्रेस इंफॉर्मेशन सेंटर)। ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘साइबर सुरक्षित भारत’ के दृष्टिकोण और अक्टूबर 2024 में उनके ‘मन की बात’ संबोधन के अनुरूप है। 

         केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देश में साइबर अपराध से निपटने हेतु ऐतिहासिक और तकनीक-आधारित कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्म दिवस को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाए जाने की परंपरा के अनुरूप, मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रशासनिक सुशासन को सुदृढ़ करने हेतु एक नवीन अभिनव पहल के रूप में  ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR) व्‍यवस्‍था का शुभारंभ किया गया। जिसका उद्घाटन ग्वालियर में आयोजित अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट के दौरान माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा किया गया। इस अवसर पर ई-जीरो एफआईआर की पहली प्रति माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंपी गई। इसके साथ ही मध्यप्रदेश, दिल्ली के बाद देश का दूसरा राज्य बन गया है, जहाँ ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को लागू किया गया है। यह पहल पुलिस को अपराधियों से एक कदम आगे रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

             इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास), उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, अध्यक्ष मध्यप्रदेश विधानसभा श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, मंत्री जल संसाधन एवं प्रभारी मंत्री ग्वालियर श्री तुलसीराम सिलावट तथा मंत्री सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग श्री चेतन्य काश्यप की विशिष्ट उपस्थिति रही।

           मध्यप्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों की चुनौतियों को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तकनीक का दुरुपयोग कर जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री जी का मानना है कि जैसे हमने स्वच्छता को अपनी संस्कृति बनाया है, वैसे ही हमें साइबर स्वच्छता को भी अपनी संस्कृति बनाना होगा।

    प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था का संचालन पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री ए. साईं मनोहर के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। जिसका उद्देश्य पुलिस को अपराधियों से अधिक तेज, तकनीक-सक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाना है।

    साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पुलिस के समक्ष एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। अक्सर पीड़ित की जीवनभर की कमाई कुछ ही पलों में अपराधियों के हाथों चली जाती है, जिससे वह स्वयं को असहाय महसूस करता है। इसी पीड़ा को समझते हुए, गृह मंत्रालय द्वारा ई-जीरो एफआईआर की अवधारणा को लागू किया गया है, ताकि तकनीक को अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी हथियार बनाया जा सके।

     2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानून—भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)—नागरिक-केंद्रित हैं और इनका मूल उद्देश्य ‘दंड नहीं, बल्कि न्याय’ प्रदान करना है।

    BNSS की धारा 173 के अंतर्गत जीरो एफआईआर को कानूनी मान्यता दी गई है, जिससे नागरिक देश में कहीं से भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं, चाहे अपराध किसी भी क्षेत्राधिकार में घटित हुआ हो।

    -जीरो एफआईआर एक क्रांतिकारी व्यवस्था है जो साइबर वित्तीय धोखाधड़ी (विशेष रूप से 1 लाख से अधिक की हानि) के मामलों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को तेज करती है। इसका मुख्‍य उद्देश्‍य क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) की बाधाओं को समाप्त कर जांच की प्रक्रिया को तुरंत प्रारंभ करना है। यह प्रणाली तीन प्रमुख डिजिटल मंचों को एकीकृत करती है, जिसमें नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), I4C – भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र एवं CCTNS – अपराध एवं आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम सम्मिलित है। 

    ई-जीरो एफआईआई पंजीकरण की प्रक्रिया पांच चरणों में संपन्‍न होती है। इसके अंतर्गत प्रथम चरण में शिकायत दर्ज कराना होती है, जिसमें पीड़ित 1930 हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज करता है। 1 लाख रूपए से अधिक की धोखाधड़ी होने पर डेटा सीधे भोपाल स्थित केन्‍द्रीय साइबर पुलिस हब को भेजा जाता है। दूसरे चरण में ऑटोमेटिक जनरेशन के अंतर्गत CCTNS सर्वर के माध्यम से शिकायत स्वतः ई-जीरो एफआईआर में बदल जाती है। तीसरे चरण में स्‍वीकृति (Acknowledgement) के अंतर्गत पीड़ित को तुरंत ई-जीरो एफआईआर नंबर उपलब्ध कराया जाता है। चौथे चरण में समीक्षा एवं हस्‍तांतरण के अंतर्गत राज्य स्तरीय साइबर पुलिस स्टेशन द्वारा समीक्षा कर प्रकरण संबंधित क्षेत्रीय पुलिस थाने भेजा जाता है। पांचवे एवं अंतिम चरण में नियमित एफआईआर दर्ज की जाती है, जिसमें  शिकायतकर्ता को 3 दिवस के भीतर अपने नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में ई-जीरो एफआईआर को नियमित एफआईआर में परिवर्तित कराने की प्रक्रिया पूर्ण करनी होती है।

    साइबर अपराध में ‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व

    साइबर अपराध में धोखाधड़ी के बाद के पहले 2 घंटे को “गोल्डन ऑवर” माना जाता है। जिसमें यदि पीड़ित तुरंत 1930 पर संपर्क करता है, तो I4C बैंकों के सहयोग से अपराधी के खाते में पहुंचने से पहले ही राशि को फ्रीज (रोक) किया जा सकता है। ई-जीरो एफआईआर के माध्यम से आईपी लॉग, ट्रांजैक्शन आईडी जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य कानूनी रूप से तत्काल सुरक्षित किए जाते हैं।

    देश में कहीं से भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा से क्षेत्राधिकार से मुक्ति मिलती है। डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से केस की स्थिति ऑनलाइन देखने की सुविधा प्राप्‍त होती है। एफआईआर जल्दी दर्ज होने से बैंकिंग चैनल सक्रिय हो जाते हैं, जिससे पैसा वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। पीड़ित सीधे पोर्टल पर स्क्रीनशॉट और रसीदें अपलोड कर सकते हैं। 

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा इस प्रणाली के लागू होने से यह स्‍पष्‍ट है कि तकनीक के माध्यम से न्याय को न केवल तेज, बल्कि आम नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाया गया है।

  • साईबर तहसील से समय सीमा में होने लगे नामांतरणःकरण सिंह वर्मा

    साईबर तहसील से समय सीमा में होने लगे नामांतरणःकरण सिंह वर्मा

    भोपाल 24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पिछले दो वर्षों में राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, त्वरित और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं।राजस्व विभाग द्वारा चलाए गए अभियानों और तकनीकी नवाचारों से नागरिकों को बड़ी राहत मिली है तथा लंबे समय से लंबित मामलों का तेजी से निराकरण संभव हुआ है।राजस्व मंत्री श्री वर्मा बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों एवं नवाचारों पर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। इस दौरान प्रमुख सचिव राजस्व श्री विवेक पोरवाल, आयुक्त राजस्व श्रीमती अनुभा श्रीवास्तव सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि राजस्व विभाग ने प्रकरणों के त्वरित समाधान के लिए वर्ष 2024-25 में ‘’राजस्व महाअभियान” के तीन चरण संचालित किए,जिनमें एक करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया गया।उन्होंने कहा कि प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए राजस्व न्यायालयों में न्यायिक एवं गैर-न्यायिक कार्यों के लिए पृथक-पृथक अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है 24 जिलों में जिसने राजस्व न्यायालयों के लिए समर्पित अधिकारियों की नियुक्ति कर त्वरित एवं नियमित न्यायिक कार्यवाही सुनिश्चित की है।


    मंत्री श्री वर्मा ने “सायबर तहसील” को विभाग की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि 29 फरवरी 2024 से नामांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस और फेसलेस कर दी गई है। अब 20 दिनों के भीतर नामांतरण पूरा कर आदेश व्हाट्सएप एवं ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है। सायबर तहसील के माध्यम से अब तक 6 लाख 26 हजार से अधिक नामांतरण प्रकरणों का निराकरण किया गया है, जिसके लिए इसे प्रधानमंत्री उत्कृष्टता प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुआ है। आंशिक खसरा प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 8 लाख नागरिक लाभान्वित होंगे तथा विवादित प्रकरणों का आपसी सहमति से त्वरित समाधान संभव होगा।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी में निवासरत नागरिकों को भू-अधिकार पत्र प्रदान किए गए हैं। अब तक 39 लाख 60 हजार से अधिक लोगों को स्वामित्व अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। इस तरह प्रदेश में योजना का 94 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहाँ ड्रोन एवं जियो फेंस तकनीक का उपयोग कर त्रुटिरहित फसल गिरदावरी कराई जा रही है। इससे किसानों को वास्तविक नुकसान का लाभ समय पर मिल सकेगा। वर्ष 2025-26 में अब तक बाढ़ एवं अतिवृष्टि से प्रभावित नागरिकों को 2 हजार 68 करोड़ 99 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है।


    भू-अर्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए आरसीएमएस पोर्टल पर एलएएमएस मॉड्यूल विकसित किया गया है।आरसीएमएस के माध्यम से पिछले दो वर्षों में 41.68 लाख प्रकरणों में से 94% से अधिक प्रकरणों का समय सीमा में निराकरण किया गया। राजस्व संग्रहण में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2024-25 में 700 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 1048 करोड़ रुपये का संग्रहण किया गया है, जबकि वर्ष 2025-26 में 1000 करोड़ रुपये का संग्रहण संभावित है।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि प्रदेश में राजस्व प्रशासन को मजबूत करने के लिए 1974 करोड़ रुपये की लागत से 324 कार्यालय भवन पूर्ण किए जा चुके हैं तथा 114 भवन प्रगतिरत हैं। इसके अतिरिक्त 261 आवासीय भवनों को भी स्वीकृति दी गई है। विभाग को सुदृढ़ करने के लिए 5281 पटवारियों एवं 136 नायब तहसीलदारों की भर्ती की गई है।
    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि भू अभिलेख पोर्टल का नवीन संस्करण 2.0 पूरे प्रदेश में लागू किया गया है, जिससे नागरिक अपनी भूमि का अभिलेख, डिजिटल नक्शा एवं प्रमाणित प्रतिलिपि मोबाइल एप के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।साथ ही भूमि अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का बड़ा अभियान प्रारंभ किया गया है जिसके अंतर्गत 15 करोड़ पुराने अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित किया जाएगा। अब तक 1.59 करोड़ स्कैनिंग पूर्ण की जा चुकी है
    मंत्री श्री वर्मा ने आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना की जानकारी देते हुए कहा कि विभाग द्वारा विश्वास आधारित डायवर्जन प्रक्रिया लागू करने की योजना है। प्रदेश के नक्शाविहीन ग्रामों का नक्शा तैयार किया जायेगा एवं भू-अर्जन प्रकरणों में संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जायेगा।

  • चुनाव नहीं हुए पर सहकारी आंदोलन सफल,विश्वास सारंग का दावा

    चुनाव नहीं हुए पर सहकारी आंदोलन सफल,विश्वास सारंग का दावा

    भोपाल,24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सहकारी पैक्स समितियों तक के चुनाव न कराए जाने से सहकारिता आंदोलन में आम किसानों की सहभागिता समाप्त हो गई है। इसके बावजूद राज्य के सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग का दावा है कि सहकारी आंदोलन सफल हो रहा है।राजधानी के अपेक्स बैंक सभागार में पहले तो उन्होंने खेलों में पदक जीतने वाले युवाओं की सफलता को अपनी कुशलता बताया बाद में सहकारिता के क्षेत्र में केन्द्रीय सहयोग का हवाला देकर अपनी पीठ थपथपाई।


    सरकार के दो साल पूरे होने पर शाबासी लेने पहुंचे मंत्री से जब पूछा गया कि धारा 11 के मापदंडों के अनुसार बैंक पूंजी विहीन हो गए हैं इस पर सरकार क्या कर रही है तो उन्होंने कहा कि हमने बैंकों को पूंजी मुहैया कराई है । उन्होंने कहा कि संस्थाओं के चुनाव कानूनी तौर पर करा लिये जाते हैं इससे हमें कामकाज चलाने लायक वैधानिक अधिकार मिल जाते हैं। सहकारी समितियों ने किसानों को कर्ज भी मुहैया कराया है और वसूली की बिगड़ी चाल भी सुधारी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में हम किसानों को घर घर खाद पहुंचाने की व्यवस्था कर रहे हैं जो देश में अनूठी मिसाल के रूप में गिनी जाएगी।


    कंपनी के तौर पर चलाई जा रही सहकारी योजनाओं के आरोप से असहमति जताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डबल इंजन सरकार की परिकल्पना जहाँ केंद्र और राज्य एक साझा लक्ष्य, साझा गति और साझा परिणाम के साथ काम करते हैं, आज मध्यप्रदेश में ज़मीन पर साकार रूप ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सक्षम नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने बीते दो वर्षों में सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं।


    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी आज राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पदक अर्जित कर देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। वर्ष 2024 में पेरिस (फ्रांस) में आयोजित ओलम्पिक व पैरा ओलम्पिक 2024 में प्रदेश के खिलाड़ियों ने प्रतिभागिता कर पदक अर्जित किये। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी मध्यप्रदेश ने खेलों में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, तमिलनाडु में भी प्रदेश के खिलाड़ियों ने 29 पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसी प्रकार 38वें नेशनल गेम्स, उत्तराखण्ड में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने 67 पदक अर्जित कर राज्यों में तीसरा स्थान प्राप्त किया।


    वर्ष 2024-25 की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री श्री सारंग ने बताया कि प्रदेश के खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कुल 57 पदक तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 391 पदक अर्जित किए। हॉकी एशिया कप 2025, 16वीं एशियन शूटिंग चैंपियनशिप कजाकिस्तान, खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल श्रीनगर एवं एशियन केनो स्लालम चैंपियनशिप चीन में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर प्रदेश को शीर्ष राज्यों की श्रेणी में स्थापित किया है।


    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि किसानों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने हेतु ऑनलाइन केसीसी आवेदन, एकीकृत साख सीमा तथा नकद-वस्तु ऋण की बाध्यता समाप्त करने जैसे सुधार प्रस्तावित हैं। सभी PACS में ई-PACS के माध्यम से ऑनलाइन सेवाएं और SMS सूचना अनिवार्य की जाएगी। उन्होने बताया कि कमजोर जिला सहकारी बैंकों को आर्थिक सहायता देकर 0% ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। डिफॉल्टर किसानों को मुख्यधारा में लाने हेतु एकमुश्त समझौता योजना तथा आर्थिक अनियमितताओं से प्रभावित किसानों को जांच अवधि में राहत देने की व्यवस्था हेतु न्याय योजना प्रस्तावित है।


    मंत्री श्री सारंग ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 के अनुरूप राज्य की सहकारिता नीति में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। जनवरी 2026 में IBPS के माध्यम से 2000 से अधिक पदों पर भर्ती एवं सतत प्रशिक्षण की योजना है। उन्होंने कहा कि CPPP मॉडल के विस्तार से सहकारिता में निजी निवेश और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 अंतर्गत उत्कृष्ट संस्थाओं को पुरस्कृत किया जाएगा तथा जिला सहकारी बैंकों में NEFT/RTGS, QR कोड एवं इंटरनेट बैंकिंग जैसी आधुनिक तकनीकी सुविधाएं लागू की जाएंगी।

  • कर्ज लेकर खरीदा अनाज न बेचा न घोटाला रोक पाया खाद्य विभाग

    कर्ज लेकर खरीदा अनाज न बेचा न घोटाला रोक पाया खाद्य विभाग


    मंत्री गोविंद राजपूत ने माना सरकार पर उधार है खाली गोदामों का किराया


    भोपाल, 24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत आज जब सरकार की दो सालों की उपलब्धियां सुनाने पहुंचे तो पत्रकारों ने उन्हें विभागीय अव्यवस्थाओं को लेकर घेर लिया। पत्रकारों ने पूछा कि जिन ट्रकों से खाद्य विभाग के सील लगे अनाज से भरे बोरे पकड़े गए उनके खिलाफ अब तक आपराधिक प्रकरण क्यों नही दर्ज करवाए गए हैं। इस पर मंत्रीजी निरुत्तर हो गए।


    पत्रकारों ने पूछा कि सरकार कर्ज लेकर खरीदा गया अनाज नहीं बेच पा रही है, अपनी नाकामी छुपाने के लिए वह केन्द्र पर खरीदी करने का दबाव बना रही है। ऐसे में सरकार के दो साल कैसे सफल कहे जा सकते हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि हम आगामी सिंहस्थ को देखते हुए अनाज का भंडारण कर रहे हैं। सिंहस्थ के दौरान हमें करोड़ों लोगों को भोजन कराना पड़ेगा। अनाज खरीदी के लिए हमें बैंकों से कर्ज लेना पड़ता है। सरकार पर ब्याज चुकाने का बोझ बढ़ता जा रहा है ऐसे में हमें केन्द्र से अनुरोध करना पड़ता है। उन्होंने माना कि किसानों ने बड़ी तादाद में भंडारगृह बना लिए हैं ऐसे में सरकार पर किराए की उधारी बढ़ती जा रही है। हम चाहते हैं कि ये गोदाम खाली हों ताकि सरकार को बेवजह किराया न भुगतना पड़े।


    उन्होंने पहले से रटी रटाई कहानी सुनाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने विगत दो वर्षों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, उपभोक्ता संरक्षण, किसान हित तथा गैस आपूर्ति के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। विभाग की ओर से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत प्रदेश के 5 करोड़ 25 लाख से अधिक हितग्राहियों को लगभग 22 हजार 800 करोड़ रुपये मूल्य का नि:शुल्क खाद्यान्न वितरित किया गया। राशन वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम लागू किया गया, जिसके तहत हितग्राहियों को एसएमएस के माध्यम से राशन आगमन एवं वितरण की जानकारी दी जा रही है। इसके अतिरिक्त 26 जनवरी एवं 2 अक्टूबर को ग्राम सभाओं में पात्र हितग्राहियों की सूची का वाचन किया जा रहा है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि विभाग द्वारा ई-केवाईसी प्रक्रिया में उल्लेखनीय प्रगति की गई है। प्रदेश में दो वर्ष में लगभग 1 करोड़ 70 लाख से अधिक हितग्राहियों का ई-केवाईसी सत्यापन पूर्ण किया जा चुका है। अब तक 4 करोड़ 97 लाख हितग्राहियों के ई-केवाईसी कराये जा चुके हैं। इस तरह से अब तक लगभग 93 प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण हो चुके हैं। बायोमेट्रिक के साथ-साथ फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से भी ई-केवाईसी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों, 80 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धों एवं दिव्यांगजनों सहित लगभग 15 लाख हितग्राहियों को ई-केवाईसी से छूट प्रदान की गई है। साथ ही 14 लाख नए पात्र हितग्राहियों को जोड़कर पात्रता पर्ची जारी की गई है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि वन नेशन–वन राशन कार्ड योजना के अंतर्गत प्रतिमाह औसतन 39 हजार परिवार अन्य राज्यों में तथा लगभग 6 हजार परिवार अन्य राज्यों से मध्यप्रदेश में नि:शुल्क राशन प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा लगभग 16 लाख परिवार प्रतिमाह अंतर-जिला पोर्टेबिलिटी का लाभ ले रहे हैं। वहीं जनजाति एवं पहुंचविहीन 89 गांवों में “आपका राशन आपके द्वार” योजना के माध्यम से घर-घर राशन पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री अन्नदूत योजना के अंतर्गत वाहनों में जीपीएस प्रणाली स्थापित कर राज्य स्तरीय कंट्रोल कमांड सेंटर से निगरानी की जा रही है। एलपीजी आपूर्ति के क्षेत्र में उज्ज्वला एवं गैर-उज्ज्वला योजनाओं के अंतर्गत प्रदेश की बहनों की 6 करोड़ 17 लाख गैस रिफिल कराई गईं, जिसमें 911 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। शहरी क्षेत्रों में घर-घर पाइप के माध्यम से गैस पहुंचाने के लिए शहरी गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि वेयरहाउसिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा नमी मापक, फ्यूमिगेशन एवं निरीक्षण से संबंधित तीन मोबाइल ऐप विकसित किए गए हैं, जिससे अनाज भंडारण की रियल टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है। किसान हित में विभाग द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं एवं धान की खरीदी की गई। लगभग 28 लाख किसानों से फसल खरीदी कर 51 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। गेहूं की खरीदी में 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देकर 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया गया।


    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि नाप-तौल विभाग द्वारा विगत दो वर्षों में सत्यापन एवं निरीक्षण के माध्यम से 49 करोड़ 14 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है। निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर 11 हजार 700 प्रकरण पंजीबद्ध कर लगभग 4 करोड़ 50 लाख रुपये की दंड राशि वसूल की गई। उपभोक्ता विवादों के त्वरित निराकरण के लिए उपभोक्ता आयोगों का कंप्यूटरीकरण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप दो वर्षों में 3 लाख 7 हजार से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया। विभाग द्वारा आगामी अवधि में राशन दुकानों को मुख्यमंत्री पोषण मार्ट के रूप में विकसित करने, सॉफ्टवेयर सिस्टम के एकीकरण, उन्नत तकनीक से राशन वितरण तथा सिंहस्थ 2028 के लिए मेला क्षेत्र में राशन एवं गैस आपूर्ति की विस्तृत व्यवस्था किए जाने की कार्य योजना भी तैयार की गई है।

  • राज्य की खेती अब सोलर ऊर्जा से होगी बोले मंत्री राकेश शुक्ल

    राज्य की खेती अब सोलर ऊर्जा से होगी बोले मंत्री राकेश शुक्ल


    नवीन और नवकरणीय ऊर्जा विभाग की उपब्धियों पर मंत्री राकेश शुक्ला ने प्रकाश डाला


    भोपाल23 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश आज ऊर्जा सरप्लस राज्य बनकर सामने आया है। हमने ताप ऊर्जा, जल ऊर्जा, पन बिजली परियोजनाओं के साथ साथ सोलर बिजली बनाने में भी रिकार्ड सफलता पाई है। हमारा प्रयास है कि जल्दी ही राज्य की खेती की जरूरतें हम सोलर ऊर्जा से पूरी कर सकें। इसके लिए हमने इस साल पचास हजार किसानों को सब्सिडी आधारित सोलर पंप देने का फैसला किया है। लगभग चौदह हजार किसानों ने अपनी राशि भी जमा कर दी है ।जिन्हें सब्सिडी आधारित सोलर पंप और पूरा सैटअप दिया जा रहा है।


    विभागीय मंत्री राकेश शुक्ला के साथ ,प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव(आईएएस) और मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (MPUVNL) के प्रबंध संचालक (MD) अमनवीर सिंह बैंस (Amanbir Singh Bains) भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


    श्री बैंस ने बताया कि नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत नवरत्न सीपीएसयू, सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसईसीआई) ने सीपीएसयू योजना के अंतर्गत धार में 200 मेगावाट की सौर परियोजना तथा राज्य में 1000 मेगावाट क्षमता की बैटरी स्टोरेज परियोजना स्थापित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये प्रोजेक्ट राज्य की गैर पारंपरिक ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में मील का पत्थर साबित होगा।


    उल्लेखनीय है कि समझौता ज्ञापन पर शिवकुमार वी वेपाकोम्मा, निदेशक (विद्युत प्रणाली) एसईसीआई और मनु श्रीवास्तव, आईएएस, अतिरिक्त मुख्य सचिव (एनआरई) ने मध्य प्रदेश के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला और आर पी गुप्ता, आईएएस (सेवानिवृत्त) अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एसईसीआई की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए थे।


    200 मेगावाट की सौर परियोजना 500 मेगावाट के उस समझौते का हिस्सा है जिसे 2023 में एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) के साथ 25 साल की अवधि के लिए निष्पादित किया गया था जिसके तहत एसईसीआई राज्य को बिजली की आपूर्ति करेगी। एसईसीआई ने मध्य प्रदेश राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और विकास के लिए 2500 करोड़ रुपये का चरणबद्ध पूंजीगत व्यय प्रस्तावित किया है।

  • ट्रांसपोर्टरों से वसूला चंदा बांटते तो आलोचना न होतीःराव उदय प्रताप सिंह

    ट्रांसपोर्टरों से वसूला चंदा बांटते तो आलोचना न होतीःराव उदय प्रताप सिंह


    राव उदयप्रताप सिंह ने गिनाई परिवहन विभाग की दो साल की उपलब्धियां


    भोपाल 22 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने भरी पत्रकार वार्ता में स्वीकार किया कि यदि परिवहन माफिया की अवैध वसूली की राशि हम बांटते रहते तो हमारे विभाग की आलोचना नहीं हो रही होती। हमने परिवहन नाके बंद करके जो जांच चौकियां स्थापित की हैं उनसे टैक्स चोरी का गैरकानूनी माल ढोने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। अच्छा कारोबार करने वाले ट्रांसपोर्टरों को परेशान करने वाले अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई है। परिवहन सुधार के कई अन्य कार्यक्रम भी लगातार जारी रहेंगे।


    कुशाभाऊ ठाकरे सभागृह में आयोजित इस पत्रकार वार्ता में प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को लेकर कई तीखे सवाल किए गए । इन सवालों से बचने के लिए मंत्रीजी ने शिक्षा विभाग के कार्यकलापों पर अधिक समय दिया और ट्रांसपोर्ट विभाग की बखिया उधेड़े जाने से बचने का पूरा जतन किया। परिवहन विभाग को लेकर मंत्री ने कहा कि जनवरी से आम जनता को सार्वजनिक परिवहन सेवा का लाभ मिलेगा। वाहन और सारथी पोर्टल पर कई सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। ई-ड्राइविंग लाइसेंस की सुविधा शुरू की गई है और एमपी ऑनलाइन सेंटरों को सुविधा केंद्र के रूप में मान्यता दी गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स पूरी तरह माफ किया गया है और पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने पर टैक्स में छूट दी जा रही है। ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, सतना, सिंगरौली, उज्जैन और देवास में ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं।


    मंत्री ने बताया कि 1 जुलाई 2024 से चेकपोस्ट बंद हैं और चलित व्यवस्था के तहत काम हो रहा है। डेढ़ साल में करीब 6 फीसदी कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। आरटीओ दलालों को लेकर उन्होंने कहा कि सभी सेवाएं ऑनलाइन हैं, जनता को दलालों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए।

  • नीतिश के हिजाब उठाने पर हंगामा क्यों

    नीतिश के हिजाब उठाने पर हंगामा क्यों


    बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने जब यूनानी चिकित्सा की डॉक्टर नुसरत परवीन का हिजाब उठाकर उसकी आंखों की चमक देखने का प्रयास किया तो कट्टर पंथियोंऔर नीतिश विरोधियों ने अपनी ओछी राजनीति शुरु कर दी। इस घटनाक्रम को नीतिश विरोधियों ने महिला और इस्लाम का अपमान बताना शुरु कर दिया । इस शोरगुल से घबराई नुसरत अब सरकारी नौकरी ज्वाईन करने को तैयार हो गई है। नीतिश ने कभी नरक बन चुके बिहार को तेजी से विकसित और आत्मनिर्भर हो रहे प्रांत में बदलने का भगीरथ किया है। दंगे,लूट और अराजकता के दौर में जा चुके बिहार की गाड़ी को पटरी पर लाना कभी लगभग असंभव माना जाता रहा है। ऐसे में बिहार की तरुणाई की आंखों में विकास को लेकर जो संकल्प और दृढ़ विश्वास पनपा है वह अद्भुत है। युवाओं के मुस्कुराते चेहरे आज बिहार के नव सूर्योदय की झलक दिखाते हैं। कोई शिल्पकार अनगढ़ पत्थर को तराशकर उसमें मूर्ति का सौंदर्य उभारता है तो वह बार बार हर कोण से उसकी मुस्कान को उभारने का प्रयास करता है । नीतिश कुमार भी कुछ इसी तरह बिहार के नागरिकों के चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास कर रहे हैं। उम्र के 74 वें पड़ाव पर वे आश्वस्त होना चाहते हैं कि बिहार के युवाओं की आंखों में आगे बढ़ने के कैसे स्वप्न पल रहे है।उनकी राजनीतिक पारी का लंबा इतिहास रहा है। उस यात्रा में नुसरत जैसी न जाने कितनी नारियां उनके साथ कदम मिलाकर चलती रहीं हैं। इतने लंबे इतिहास में कभी नीतिश कुमार को अय्याश या चरित्र हीन व्यक्ति नहीं माना गया है। वे एक संवेदनशील राजनेता हैं जो अपने राज्य की बेहतरी के लिए दुर्दांत माफिया से भी टकराता रहा है। बिहार के आपराधिक गिरोह जिस तरह संसाधनों को लूटते रहे हैं और वहां की तरुणाई मजबूर होकर अन्य राज्यों व दूर देशों में काम करने को मजबूर की जाती रही हो वहां एक युवती वो भी मुस्लिम समाज के बीच से निकलकर डाक्टर बनने जा रही हो ये सुखद आश्चर्य से कम नहीं है। उसकी आंखों की चमक देखने का प्रयास करने वाले नीतिश कुमार अकेले व्यक्ति नहीं हैं । जिन चयनकर्ताओं ने उसे एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी के लिए चुना वे भी उसकी योग्यता और सामाजिक समर्पण के कायल थे तभी तो उन्होंने उसे नौकरी के लिए चुना। ये नियुक्ति नीतिश कुमार के निर्देश पर नहीं हुई थी। जाहिर है कि उस क्षण को जिसे नीतिश कुमार भाव विभोर होकर देखने का प्रयास कर रहे थे उसे पूरी दुनिया में रह रहे बिहारी भी प्रसन्न भाव से देख रहे हैं। केवल कुछ कट्टरपंथी और विरोधी इस पर बखेड़ा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। जिन्होंने इतिहास पढ़ा है उन्होंने अंग्रेजों, मुगलों, जमींदारों, छुटभैये राजाओं की वे कहानियां खूब पढ़ी हैं जिनमें वे राज्य की नवयुवतियों को अपनी सेज पर ले जाने का कुकर्म करते देखे गए थे। इन्हीं बैचैनियों से निकलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था ने जन्म लिया। आज कोई भी शासक या राजा ऐसी जुर्रत भी नहीं कर सकता है। नुसरत की उम्र तो उनके नाती पोतियों के बराबर है।वे सार्वजनिक स्थल पर उसके साथ अश्लील व्यवहार करने की सोच भी कैसे सकते हैं। वे जिस प्रशंसा भरे भाव से नुसरत को देख रहे थे वह दृश्य न केवल बिहार की आगे बढ़ती एक लड़की की कहानी सुनाता है बल्कि भारत के मुसलमानों की आगे बढ़ती नई पीढ़ी का दृष्टांत भी देता है। मुस्लिम वोटरों के जो ठेकेदार बरसों से भाजपा और उसके सहयोगी गैर कांग्रेसी राजनीतिक दलों को मुस्लिम विरोधी बताते रहे हैं वे इस घटनाक्रम से जरूर बैचेन घूम रहे हैं। उन्हें भय है कि यदि भारत के मुसलमानों की नई पीढ़ी के बीच से हिंदुत्व वादी राजनीति को मुस्लिम विरोधी बताने वाला नेरेटिव टूट गया तो वे कभी सत्ता का ख्वाब भी नहीं देख पाएंगे। जिस तरह हिंदू मुस्लिम और जातिगत व भाषाई राजनीति करके उन्होंने भारतीय समाज में फूट के बीज बोए थे वह षड़यंत्र धराशायी हो जाएगा। इसीलिए वे तरह तरह के दुष्प्रचार करके समाज को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। ये अच्छा है कि नुसरत ने उनके बहकावे में न आकर अपने पैरों पर खड़े होकर चिकित्सा के माध्यम से समाजसेवा का निर्णय लिया है वह प्रशंसनीय है और स्वागत करने योग्य है। नुसरत के समान देश के सभी युवाओं को संकरे पैमानों से बाहर आकर विकास यात्रा का सहयात्री बनना है,तभी हम एक नए भारत का स्वप्न साकार कर पाएंगे।

  • विश्व स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य पूरा करेंगे शहरी निकायःकैलाश विजय वर्गीय

    विश्व स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य पूरा करेंगे शहरी निकायःकैलाश विजय वर्गीय

    भोपाल, 18 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2047 में मध्यप्रदेश की कुल आबादी का लगभग 50 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। इस बात को ध्यान रखते हुए शहरी क्षेत्रों में अधोसंरचना कार्यों की योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में देश में विशिष्ठ स्थान बनाया है। हमारे विभाग की कोशिश होगी कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों का एयर क्वालिटी इंडेक्स अच्छा हो। इस वजह से शहरी क्षेत्रों में बगीचों के विकास के साथ-साथ नगरवन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्री श्री विजयवर्गीय भोपाल में राज्य सरकार के विकास और सेवा के दो वर्ष पूरा होने पर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।
    मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश के जो शहर नर्मदा नदी के किनारे में आते है, वहां शहरों का दूषित पानी नदीं में न मिलें। इस पर विभाग लगातार काम कर रहा है। मेट्रोपॉलिटन सिटी की चर्चा करते हुए मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग ने इंदौर-उज्जैन और भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास का कार्य शुरू कर दिया है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी में भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया है। इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम और धार जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया गया है। प्रदेश की 2 मेट्रोपॉलिटन सिटी इस तरह विकसित की जाएंगी। जहां शहरी आबादी को सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। मेट्रोपॉलिटन सिटी में निवेश और रोजगार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
    मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग की कोशिश है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की अधिक से अधिक सेवाओं का डिजिटलीकरण ऑनलाइन हों। इसको ध्यान में रखते हुए हमने ई-नगरपालिका विकसित की है। प्रदेश के शहरों को ग्रीन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। नगरीय सेवाओं में सोलर एनर्जी का अधिक से अधिक उपयोग किया जाएं। इसको सुनिश्चित किया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि नगरीय निकाय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो। इसके लिये शहरी क्षेत्रों की सम्पत्तियों का जीआई मेपिंग किया जा रहा है।
    प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में एक लाख 60 हजार से अधिक आवासों का निर्माण पूरा। प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश को बेस्ट परफॉर्मिंग अवार्ड की श्रेणी में दूसरा स्थान।
    उल्लेखनीय बिंदु-
    अमृत 2.0 में 300 परियोजनाओं का कार्य पूर्ण।
    जल गंगा संवर्द्धन अभियान में 3 हजार 323 जल संरचनाओं का, 74 जल संग्रहण संरचनाओं का लोकार्पण।
    स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में 8 शहरों का राष्ट्रीय पुरस्कार। साथ ही इंदौर ने देश के नम्बर वन शहर का सम्मान लगातार 8 साल बनायें रखा।
    कार्बन क्रेडिट से राशि अर्जित करने वाले इंदौर देश का प्रथम शहर
    दीनदयाल रसोई योजना में संचालित 56 केन्द्रों को बढ़कर इन्हें 191 केन्द्र किया गया।
    पीएम स्वनिधि योजना अंतर्गत 9 लाख से अधिक रहणी पटरी वालों को 14 लाख से अधिक ऋण प्रकरण मबजूत। मध्यप्रदेश को नवाचार और सर्वोत्तम अभ्यास की श्रेणी में पहला स्थान,
    आजीविकास मिशन में 3 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिलाया गया। 1 लाख 70 हजार युवाओं को स्व-रोजगार से जोड़ा गया।
    प्रदेश में 65 हजार स्व सहायता समूह का गठन। 6 लाख से अधिक परिवारों को स्व-सहायता समूह में जोड़ा गया।
    इंदौर में मेट्रो परिचालन शुरू भोपाल में दिसम्बर 2025 में ही शुरू होगा मेट्रो।
    हाउसिंग बोर्ड द्वारा एमपी ऑनलाईन के माध्यम से 532 करोड़ की सम्पत्तियों का विक्रय।
    गीता भवन स्थापना योजना 5 महीनों के लिये स्वीकृत।
    प्रदेश में इंटीग्रटेड टाउनशिप पॉलिसी-2025 मंजूर। प्रदेश में इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को भी मंजूरी।

  • हमारा टारगेट, प्रतिव्यक्ति आय साढ़े बाईस लाख करने का,बोले मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव

    हमारा टारगेट, प्रतिव्यक्ति आय साढ़े बाईस लाख करने का,बोले मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव


    भोपाल,18 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने राज्य की प्रति व्यक्ति आय बढ़ाकर बाईस लाख पचास हजार रुपए करने का रोडमैप प्रस्तुत किया है। विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में धारा प्रवाह उद्बोधन के बीच उन्होंने अपने आंकड़ों से कर्ज के लिए आलोचना करने वाले विपक्ष के आरोपों का तथ्यात्मक जवाब भी दिया।उन्होंने कहा कि हम सभी प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बन सकें इसके लिए ही विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के प्रयासों से ये विशेष सत्र आहूत किया गया है। उन्होंने प्रदेश के हर नागरिक से इस यात्रा में बढ़ चढ़कर भागीदारी करने का आव्हान भी किया।
    विकास यात्रा की इस मैराथन चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने सदन में कहा कि जब हम आपसे विजन डॉक्‍यूमेंट 2047 की बात कर रहे हैं तो यह विजन डॉक्‍यूमेंट कोई कागज का टुकड़ा नहीं है ,यह हमारा व्‍यक्तिगत संकल्‍प भी है। ये मानकर चलिए 2047 तक मध्‍यप्रदेश का युवा, महिला सभी वर्गों का इस प्रकार का माहौल बनेगा कि हमारे युवा और महिला नेतृत्‍व नौकरी देने वाले बनें । उन्हें नौकरी मांगने की जरूरत न पड़े। हम इस प्रकार के संकल्‍प से आगे बढ़ रहे हैं। मध्‍यप्रदेश 2047 का विजन डॉक्‍यूमेंट्स राज्‍य को आर्थिक रूप से सशक्‍त, सांस्‍कृतिक रूप से समृद्ध और नागरिक जीवन की गुणवत्‍ता को उच्‍चतम स्‍तर तक ले जाने के लिए संकल्‍पबद्ध हैं। यह हमारा सबका संकल्‍प है।
    उन्होंने कहा कि हम अपनी इस सरकार के गठन से 2 वर्षों में लगभग 14-15 परसेंट की ग्रोथ रेट से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर कर्ज को लेकर चिंता व्यक्त करते रहते हैं। कहते हैं कि सरकार ने फिर कर्जा ले लिया, कर्जा हो गया, बजट से ज्‍यादा कर्जा हो गया। आंकडों पर हिसाब लगाएं तो एक साल के अंदर लगभग हमने 82 हजार करोड़ लिया है । हमारा बजट 4 लाख, 21 हजार करोड़ का था । कर्ज में वो राशि भी शामिल है जो पिछली सरकारों ने विकास पर खर्च की है। हमें तो उसका ब्याज और मूलधन भी चुकाना है। सरकारें तो बनती बिगड़ती हैं पर हमारी लायबिलिटी तो हमें चुकाना पड़ेगी। हमारे कर्ज में से हमने तीस हजार करोड़ तो मूलधन दिया है। अगर 4 लाख, 21 हजार में से 82 हजार घटा दें तो यह बचा हुआ साढ़े तीन लाख करोड़ कहां से आया। जाहिर है ये हमारी कमाई है। यह हमारी सरकार की नेक नियत है,हमारा कर्ज हमारी तीन प्रतिशत की सीमा के अंदर ही है। हमें इस गणित को दिमाग में रखना होगा। उसको समझकर ही ये बात जनता के बीच में लाएं।
    उन्होंने कहा कि बड़े से बड़े उद्योगपति तीन प्रतिशत की लिमिट में ही कारोबार करते हैं। अगर कोई उद्यमी बैंक में अपना कोई ऋण नहीं बताएगा तो आने वाले समय में उसकी ग्रोथ रुक जाएगी. स्‍वाभाविक रूप से बैलेंस शीट तो हमारे लिए कागज लिखने का तरीका है । यदि हमने बिजली,सड़क और पानी जैसी मूलभूत जरूरतों का ढांचा विकसित किया है तो ये हमारी सफलता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002-03 तक केवल 20 हजार करोड़ रुपये का बजट होता था आज हमारा बजट 4 लाख, 21 हजार करोड़ का है।
    पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने चर्चा के दौरान कहा कि सरकार ने इस बार हमारा बजट सोलह हजार करोड़ रुपए बढ़ाया है। आंकड़ों के अनुसार यह 36 प्रतिशत होता है। इस तरह हम विकास के पैमाने पर आगे बढ़ रहे हैं।
    कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जब मैं 2003 में पीडब्‍ल्‍यूडी मिनिस्‍टर था तब सरकार का बजट सिर्फ 900 करोड़ रुपये का था और उसके बाद हमने उसको 10 हजार करोड़ का किया था. यह हमारी सरकार की उपलब्धि थी और लगातार डेवलपमेंट के मामले में मध्‍यप्रदेश की सरकार आगे बढ़ती जा रही है. यह हम सबके लिए बहुत गर्व की बात है.
    मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने कहा कि 2047 तक लगभग सवा तीन लाख करोड़ का बजट हम हर पांच साल में दोगुना करेंगे। इसका मतलब है कि 2028 तक यह लगभग 7 लाख करोड़ के आसपास पहुंचेगा. फिर 5 साल बाद हमारी सरकार बनेगी तो यह 7 का 14 होगा. फिर 5 साल बाद हमारी सरकार बनेगी तो यह 14 का 28 होगा. फिर 5 साल बाद सरकार बनेगी तो 28 का 56 होगा. फिर 5 साल बाद सरकार बनेगी तो सीधा 100 होगा। इसीलिए तो हमने कहा कि 2047 तक 2.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थ व्‍यवस्‍था हमारे राज्‍य की होगी ।
    प्रति व्‍यक्ति सालाना आय का आंकड़ा देखें तो वर्ष 2002-03 तक 11 हजार रुपये प्रति व्‍यक्ति थी । वर्ष 1956 में मध्‍यप्रदेश बना. 55 साल में ये आय सिर्फ 11 हजार थी। मुझे गर्व है कि आज 1 लाख, 56 हजार रुपये प्रति व्‍यक्ति आय है। यह हमारी ग्रोथ रेट है और अब वर्ष 2047 तक प्रति व्यक्ति आय 22 लाख 50 हजार करने का संकल्प हम आपके माध्यम से कर रहे हैं। इसमें हम विपक्षी सदस्यों का भी सहयोग चाहेंगे। जब हम राज्य की बेहतरी की बात करेंगे तो गरीब आदमी के सपने भी पूरे क्यों नहीं होना चाहिए । वो आर्थिक रुप से संपन्न क्यों नहीं होना चाहिए। धीरे-धीरे कृषि बढ़ रही है. परमात्मा चाहेगा तो औसत आयु, साक्षरता दर, जिस प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं और बाकी चीजें हम बढ़ा रहे हैं इनमें हम लगातार ग्रोथ देखेंगे । साक्षरता तो 100 प्रतिशत बढ़ाने का संकल्प आप सभी के माध्यम से चाहेंगे।
    उन्होंने विपक्षी सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि आप बताइए कहां-कहां पर स्कूल खोलें, स्कूल के अंदर कौन-कौन सी सौगात दें. कमियां बताएं बहुत अच्छी बात है लेकिन समाधान भी बताईए । हम और आप मिलकर उसका रास्ता निकालें. हमारे मन में कोई भेदभाव नहीं है. हम सबको साथ लेकर चलने को तैयार हैं. इस मामले में हमारा बहुत खुला दृष्टिकोण है. कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, उद्योग आधारित अर्थव्यवस्था, सेवा आधारित कामों को, राज्य को आत्म निर्भर और विकसित बनाने के लिए विस्तृत प्लान हम बना रहे हैं। वर्ष 2047 तक दलों से ऊपर उठकर प्रदेश की बेहतरी के लिए हम संकल्प करके आगे बढ़ रहे हैं। क्योंकि मध्यप्रदेश के भविष्य के लिए हम और आप सब मिलकर एक हैं. इसी भावना के साथ हम चल रहे हैं. हमारी और आपकी सामूहिक जवाबदारी है.

  • मुख्यसचिव ने कहा परीक्षा को देखते तय करें गणना की तारीख

    मुख्यसचिव ने कहा परीक्षा को देखते तय करें गणना की तारीख


    भोपाल 10 दिसंबर(प्रेस इंफॉर्मेशन सेंटर)मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी विभाग अध्यक्षों को निर्देश दिये है कि आगामी जनगणना 2027 के दृष्टिगत प्रशासनिक इकाइयों में जो भी परिवर्तन किये जाने हैं वे 31 दिसम्बर 2025 तक अनिवार्यतः कर लिये जांए। मुख्य सचिव श्री जैन की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय में भारत की जनगणना 2027 के दृष्टिगत राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की बैठक संपन्न हुई।

    उल्लेखनीय है कि जनगणना के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 01 अप्रैल से 30 सितम्बर 2026 के दौरान 30 दिवस की अवधि में किया जायेगा। मुख्य सचिव ने सम्बंधित विभागों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि स्कूली बच्चों की पढ़ाई, मानसून इत्यादि को ध्यान में रखते हुए उक्त 30 दिवस की अवधि निर्धारित की जायें।


    बैठक में बताया गया कि जनगणना के द्वितीय चरण में जनसंख्या की गणना का कार्य पूरे देश में एक साथ फ़रवरी 2027 में किया जायेगा। मुख्य सचिव श्री जैन ने स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया कि वे जनगणना के द्वितीय चरण को ध्यान में रखकर वर्ष 2026-27 का शैक्षणिक कैलेंडर तैयार करें। उन्होंने परीक्षाओं की समय-सारणी इस तरह तैयार करने के निर्देश दिये है जिससे विद्यार्थीयों को कोई असुविधा नहीं हो। साथ ही सम्बंधित विभागों को यह भी निर्देश दिये गये कि वे आपस में समन्वय करते हुए जनगणना 2027 के लिए मानव संसाधन की उपलब्धता के लिए योजना तैयार करें जिससे जनगणना का कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो सके।


    मुख्य सचिव श्री जैन ने आगामी जनगणना डिजिटल होने के मद्देनजर सर्वसम्बन्धितों को उचित समय पर युक्तियुक्त प्रशिक्षण दिए जाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिये। श्री जैन ने जनगणना के दौरान स्व-गणना (Self-Enumeration) किये जाने के प्रावधान की सराहना की। उन्होंने सभी सम्बंधित विभागों को यह भी निर्देश दिये कि वे जनगणना 2027 के कार्य के समन्वय के लिए अपने अपने विभागों में एक नोडल अधिकारी नामित करें। जनसंपर्क विभाग को जन सामान्य में जनगणना के प्रति जागरूकता लाने एवं भ्रांतियों को दूर करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिये गये ।


    मुख्य सचिव श्री जैन ने स्पष्ट रूप से कहा कि आम जन को यह बताया जाना आवश्यक होगा कि जनगणना 2027 पहली बार देश में डिजिटल होगी, जिसमें मोबाईल एप के माध्यम से आंकड़ों का संकलन एवं वेब पोर्टल के माध्यम से मैनेंजमेंट एवं मॉनिटरिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बात का प्रचार होना चाहिए कि जनगणना अधिनियम की धारा 15 के तहत जनगणना में संकलित व्यक्तिगत जानकारियां गोपनीय होती है साथ ही इन्हें कहीं पर भी साक्ष्य के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता।


    राज्य-स्तरीय जनगणना समन्वय समिति (SLCCC) की इस पहली बैठक में अपर मुख्य सचिव, गृह, अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन, अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास, सचिव, गृह एवं राज्य नोडल अधिकारी (जनगणना), निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय मध्यप्रदेश,राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी, एन.आई.सी. और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
    अपर मुख्य सचिव, गृह श्री शिव शेखर शुक्ल ने बताया कि मध्यप्रदेश में गृह विभाग जनगणना के लिए नोडल विभाग है जो भारत सरकार, जनगणना निदेशालय एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय स्थापित करते हुए जनगणना सम्पादन में अपनी भूमिका का निर्वहन करेगा । प्रारंभ में निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय द्वारा पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जनगणना 2027 की रूपरेखा, प्रारम्भिक तैयारियां, डिजिटल रोडमैप और संगठनात्मकढांचा इत्यादि के बारे में विस्तृत रूप से अवगत कराया। उन्होंने यह बताया कि इस बार की जनगणना में स्व-गणना (Self-Enumeration)का प्रावधान भी किया जायेगा जिससे कि आम नागरिक अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे।


    निदेशक, जनगणना द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय महत्त्व के इस वृहद कार्य में लगभग 1 लाख 75 हजार प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों के अतिरिक्त अन्य प्रशासनिक अमले की भी आवश्यकता होगी। निदेशक जनगणना द्वारा अवगत कराया गया कि जनगणना के प्रथम चरण के पूर्व परीक्षण का कार्य प्रदेश में जिला रतलाम की रतलाम तहसील, जिला सिवनी की कुरई तहसील के कुछ चयनित ग्रामों में तथा ग्वालियर जिले के नगर निगम ग्वालियर के चयनित वार्डों में नवम्बर 2025 में कराया गया। पूर्व परीक्षण कार्य को राज्य शासन एवं सम्बंधित जिला प्रशासन के सहयोग से सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है।

  • मोहन ने लगाया छन्ना तो उखड़ पड़े खैराती नगर सेठ

    मोहन ने लगाया छन्ना तो उखड़ पड़े खैराती नगर सेठ

    भले ही भारत की अर्थव्यवस्था वृद्धि दर के लिहाज़ से मजबूत मानी जा रही है, लेकिन देश पर बढ़ते कर्ज को कई विदेशी ताकतें भाजपा सरकारों की असफलता ठहराने का प्रयास कर रहीं हैं। केंद्र और राज्यों दोनों का कर्ज लगातार बढ़ रहा है और इसका प्रत्यक्ष असर राज्यीय अर्थव्यवस्थाओं पर भी दिख रहा है। मध्यप्रदेश भी इससे अछूता नहीं है। यहाँ सरकार लगातार बड़े बजट और जनकल्याण योजनाओं के साथ आर्थिक गतिविधियों को तेज़ करने का प्रयास कर रही है, लेकिन इन पहलों का वित्तीय भार राज्य की ऋण-प्रणाली को चुनौती देता बताया जा रहा है।ये सारा शोर कमोबेश वही लोग मचा रहे हैं जो अब तक शिवराज सिंह चौहान की सरकार के दौरान मलाई छानते रहे हैं।


    भारत में पिछले कुछ वर्षों में सरकारी एवं घरेलू—दोनों स्तरों पर कर्ज तेज़ी से बढ़ा है। कोविड के बाद पुनरुद्धार पैकेज, बुनियादी ढाँचे में निवेश, सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता ने सरकारी उधारी पर निर्भरता बढ़ाई है। राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते ऋण का सीधा असर राज्यों की उधारी सीमा, बाजार ब्याज दरों और उधार की लागत पर पड़ता है। केंद्र की उधारी बढ़ने से बाजार में बांडों की मांग प्रभावित होती है और राज्यों को ऊँचे ब्याज पर ऋण लेना पड़ता है। यही स्थिति आज मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों के सामने है।


    विधानसभा के हालिया सत्र में अनुपूरक बजट प्रस्तावों पर चर्चा करते हुए प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डाक्टर राजेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार पर कर्ज का बोझ लगभग चार लाख अस्सी हजार करोड़ से ज्यादा हो गया है। ये राज्य के कुल बजट से भी ज्यादा है। राज्य पर ब्याज का बोझ भी बढ़ता जा रहा है और सरकार की विकास योजनाएं प्रभावित हो रहीं हैं। मध्यप्रदेश का वार्षिक बजट जहाँ लगातार बढ़ा है, वहीं राज्य का कर्ज उससे भी तेज़ी से ऊपर गया है। 2025 तक उपलब्ध सरकारी आँकड़ों के अनुसार, राज्य पर बकाया ऋण लगभग 4.4–4.6 लाख करोड़ रुपयों तक पहुँच चुका है—जो राज्य के वार्षिक बजट (लगभग 4.21 लाख करोड़) से भी अधिक है।
    इसके अलावा, वर्ष 2025 के भीतर सरकार ने कई बार तात्कालिक उधारी (short-term borrowing) ली—जो यह संकेत देती है कि योजनाओं और भुगतान दायित्वों को पूरा रखने के लिए सरकार को बाजार से बार-बार धन जुटाना पड़ रहा है। राज्य की ऋण-से-GSDP अनुपात (Debt-to-GSDP Ratio) भी बढ़कर 31% के आसपास पहुँच गया है, जो आदर्श वित्तीय सीमा से अधिक माना जाता है।


    ऐसा कहा जा रहा है कि लाड़ली बहना योजना की वजह से सरकार झमेले में पड़ रही है। हालांकि ये योजना डाक्टर मोहन यादव को विरासत में मिली थी।वर्तमान सरकार ने महिलाओं को आर्थिक आधार देने के लिए ‘लाडली बहना’ योजना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्हें दी जाने वाली रकम भी बढ़ाई है। योजना की मासिक किश्तें और लगातार बढ़ती पात्रता संख्या के कारण राज्य को हर माह बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। यह योजना सामाजिक रूप से अत्यंत प्रभावी है, लेकिन इसके लिए आवश्यक बजट का एक बड़ा हिस्सा उधार पर निर्भर है।


    सरकारी कर्मचारियों के वेतन-संशोधन, महंगाई भत्ते और पेंशन दायित्व बढ़े हैं, जिससे सरकार का नियमित राजस्व व्यय लगातार ऊपर जा रहा है। मेडिकल कॉलेज, नदी-लिंक, पर्यटन अवसंरचना और औद्योगिक इकाइयों पर बड़े निवेश की पहल की गई है। ये प्रोजेक्ट दीर्घकाल में लाभ देंगे, लेकिन शुरुआती वर्षों में इन पर भारी पूंजी खर्च की आवश्यकता होती है—जो उधारी के सहारे पूरी की जा रही है। सरकार ने मई से अक्टूबर 2025 के बीच कई बार 3,000–5,000 करोड़ रुपये के कर्ज लिए। यह नकदी-अभाव और बढ़ते भुगतान दायित्वों की ओर संकेत बताया जा रहा है। जबकि वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि ये रकम देश की अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ाने में प्रयुक्त हो रही है इसलिए इस पर ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है।


    डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार की प्राथमिकता जनकल्याण, महिलाओं का सशक्तिकरण, बड़े बुनियादी प्रोजेक्ट पर कार्य, औद्योगिक विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य पर नए निवेश के रूप में जारी है। इन सभी पहलों को जनता का समर्थन भी प्राप्त है। परंतु यह भी सच है कि इतनी व्यापक योजनाओं के लिए राज्य को सशक्त राजस्व आय की आवश्यकता है,जो अभी सीमित है। यही कारण है कि सरकार को बार-बार उधार लेकर नीतियों को गति देनी पड़ रही है। राजनीतिक दृष्टि से ये योजनाएँ मजबूत आधार बनाती हैं, लेकिन आर्थिक दृष्टि से ऋण-पोषित कल्याण मॉडल लंबे समय में चुनौती बन सकता है।


    वित्तीय तरलता घटने से कई कार्यक्रम गड़बड़ा जाते हैं। जब कर्ज बढ़ता है, तो बजट का बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान में जाता है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे में निवेश कम पड़ने का खतरा होता है। उच्च ऋण/GSDP अनुपात से राज्य की क्रेडिट रेटिंग प्रभावित होती है, और आने वाले वर्षों में उधार लेना महंगा हो सकता है। कर्ज जितना बढ़ता जाएगा, नीति-निर्माताओं के पास नई योजनाओं के लिए वित्तीय गुंजाइश उतनी ही कम होती जाएगी।
    मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने आय बढ़ाने वाले विभागों पर तेजी से कार्य करने का फैसला लिया है। उसका प्रयास है कि राजस्व आय बढ़े,उद्योग और पर्यटन पर निवेश बढ़ाने की नई नीतियां लाई जाएं। जीएसटी की प्रक्रिया मजबूत हो और कर संग्रहण की स्थितियों में सुधार हो। राज्य के संसाधनों और संपत्तियों का इस तरह से पुर्ननियोजन किया जाए कि उनसे आय बढ़ाई जा सके और बर्बादी रोकी जा सके। कल्याण योजनाओं के लिए लाभार्थियों की नियमित समीक्षा कर खर्च की दक्षता बेहतर की जा सकती है। सरकारी खरीद और प्रशासनिक खर्च में कटौती कर कर्ज निर्भरता को कम किया जा सकता है। ऐसे प्रोजेक्ट जिनसे सीधे राजस्व आय बढ़ती है — कृषि वैल्यू चेन, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाएँ, स्टार्टअप इकॉनमी — इन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए।


    मध्यप्रदेश आज दो राहे पर खड़ा है उसे अपनी जन हितकारी योजनाएं जारी रखनी हैं लेकिन उसे अपने कर्ज के निवेश से आय के नए संसाधन भी विकसित करने हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नीतियाँ सकारात्मक सामाजिक बदलाव ला रही हैं, किंतु इन नीतियों की वित्तीय स्थिरता तभी सुनिश्चित हो पाएगी जब राज्य कर्ज-निर्भरता से निकलकर मजबूत राजस्व-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ेगा। राज्य के लिए चुनौती यह नहीं कि योजनाएँ जारी रहें या नहीं—बल्कि यह है कि उन्हें वित्तीय दृष्टि से टिकाऊ कैसे बनाया जाए। यही वह बिंदु है जो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश की आर्थिक सेहत और विकास गति दोनों तय करेगा।

  • महिलाओं ने लिख दिया कई राज्यों का भाग्यःहेमंत खंडेलवाल

    महिलाओं ने लिख दिया कई राज्यों का भाग्यःहेमंत खंडेलवाल


    महिला मोर्चा की नई अध्यक्ष अश्विनी परांजपे ने कहा मतदाताओं की गणना का कार्य भारत माता की आराधना


    भोपाल,06 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने शनिवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती अश्विनी परांजपे को पदभार ग्रहण कराकर संबोधित किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने महिलाओं को संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लेकर राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का कार्य किया है। महिलाएं अब जागरूक हैं, वह अच्छी तरह से समझती हैं कि लोकतंत्र किस दिशा में जाना चाहिए। महिलाएं अब किसे वोट देना है, यह स्वयं निर्णय करती हैं। वर्ष 2023 में मध्यप्रदेश में हुए विधानसभा और इसके बाद लोकसभा चुनाव के साथ हाल ही में बिहार में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में महिलाओं ने भाजपा की जीत को आसान बना दिया। महिला मोर्चे की प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी परांजपे ने कहा कि चुनावों के लिए मतदाताओं की गणना का अभियान वास्तव में राष्ट्र की आराधना है।


    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि महिला मोर्चा की कार्यकर्ता पार्टी की सभी संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने का कार्य कर रही हैं। महिला मोर्चा का अस्तित्व तो जनसंघ के समय से रहा है, लेकिन महिलाओं की राजनीति में बहुत कम भागीदारी रहती थी। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने स्थानीय चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाकर उन्हें नेतृत्व करने के अधिकार देने का कार्य किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने तो देश की संसद और राज्य की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून बनाकर राजनीति में देश की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व बढ़ाने का ऐतिहासिक कार्य किया है। आजादी के बाद महिलाएं मतदान किसे करना है, यह निर्णय स्वयं बहुत कम कर पाती थी। अब महिलाएं यह अच्छी तरह से जानती हैं कि लोकतंत्र को किस दिशा में लेकर जाना है। मध्यप्रदेश के विधानसभा और लोकसभा के साथ हाल ही में बिहार में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत को बहनों ने ही आसान बनाया है, क्योंकि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश भर की महिलाएं भाजपा पर विश्वास करती हैं।


    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि इस समय मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य कार्य चल रहा है। यह कार्य चुनाव आयोग 20-25 वर्ष में करता रहता है। एसआईआर के कार्यों में आप सभी कार्यकर्ता जितना अधिक सहयोग और कार्य करेंगे, आगामी चुनाव में पार्टी की जीत उतनी ही आसान हो जाएगी। एसआईआर की प्रक्रिया में एक भी सही मतदाता छूटने न पाए, इसका भी सभी कार्यकर्ताओं को ध्यान रखना है। पारदर्शी चुनाव कराने के लिए मतदाता सूची का पूरी तरह से सही होना चाहिए। एसआईआर मतदाता सूची को सही करने का ही कार्य है। एसआईआर में सहयोग इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि कोई भी फर्जी मतदाता बचना नहीं चाहिए। कई ऐसे लोग भी मतदाता बन जाते हैं, जो बांग्लादेश से आकर यहां चोरी छिपे बस गए हैं। ऐसे मतदाताओं की कोई विचारधारा नहीं होती, वह सिर्फ चुनाव परिणामों को प्रभावित करते हैं।


    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि आप सभी महिला कार्यकर्ता पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए कार्य करें। पार्टी संगठन सभी को समय-समय पर दायित्व देता रहता है। पार्टी में सभी कार्यकर्ता समान होते हैं, सिर्फ दायित्व अलग-अलग होते हैं। आप सभी कार्यकर्ताओं को संगठन की मजबूती के लिए और हर घर तक भाजपा की पहुंच हो, इसके लिए कार्य करना है। आप सभी बहनें अपनी चिंता छोडकऱ पार्टी की विचारधारा को घर-घर तक पहुंचाने के लिए कार्य करें। संगठन आप सभी बहनों के सम्मान की चिंता स्वयं कर रहा है। मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार के नेतृत्व में आज महिलाएं सरपंच, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्यों से लेकर महापौर, विधायक और सांसद तक हैं। श्रीमती अश्विनी परांजपे को पार्टी संगठन से महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपा है। भाजपा एक परिवार है। यहां सभी कार्यकर्ता समान हैं। जिसे जो दायित्व मिला है, वह पूरी निष्ठा से अपने दायित्व का निर्वहन कर पार्टी संगठन को बुलंदियों तक पहुंचाने में जुटे रहें।


    भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्रीमती माया नारोलिया ने कहा कि महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती अश्विनी परांजपे मां नर्मदा की बेटी हैं। वह महिला मोर्चा में प्रदेश महामंत्री के दायित्व का निर्वहन कर चुकी हैं। मोर्चा के कार्यों को पूरी तरह समझती हैं। श्रीमती अश्विनी परांजपे के नेतृत्व में मध्यप्रदेश का महिला मोर्चा अपने संगठनात्मक कार्यों में इतिहास रचेगा। भाजपा महिलाओं की समाज और राजनीति में भागीदारी बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने संगठन में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का कार्य किया है। भाजपा महिलाओं के सम्मान के लिए लगातार कार्य कर रही है।


    भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती अश्विनी परांजपे ने पदभार संभालने के बाद अपने संबोधन में कहा कि एसआईआर का कार्य भारत माता की पूजा की तरह है। मध्यप्रदेश में इस समय एसआईआर का कार्य चल रहा है। महिला मोर्चा की सभी कार्यकर्ता एसआईआर के कार्य में सहयोग करें, ताकि एक भी सही मतदाता वंचित न रहने पाए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा ने महिलाओं को सम्मान देने के साथ नेतृत्व करने के भी अवसर दिए हैं। प्रधानमंत्री जी ने महिला आरक्षण कानून बनाकर सभी महिलाओं को बहुत बड़ा अवसर दिया है। हम सभी महिला मोर्चा की कार्यकर्ता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत को विश्व गुरू बनाने के कार्य में अपना सहयोग देने के लिए हमेशा तैयार रहना है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और संगठन ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाना और संगठन को बुलंदियों तक पहुंचाने का कार्य हम सभी कार्यकर्ता को मिलकर करना है। मंच का संचालन श्रीमती माया पटेल ने किया एवं आभार श्रीमती शशि यादव ने माना।


    इस दौरान मंच पर पार्टी की प्रदेश मंत्री सुश्री राजो मालवीय, मोर्चा प्रभारी श्री मनोरंजन मिश्रा, महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक श्रीमती रीति पाठक, जिलाध्यक्ष श्री रविन्द्र यति, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष श्रीमती वंदना जाचक, श्रीमती शशि पटेल, श्रीमती उमा सिंह, श्रीमती श्वेता त्यागी, श्रीमती अजोध्या गोधरा, श्रीमती अर्पणा सिंह, सुश्री नेहा बग्गा, श्रीमती कविता डाबी, श्रीमती माधुरी सावले, सुश्री प्रियांशा उरमलिया उपस्थित रहीं।

  • विधानसभा ने पारित किया साढ़े तेरह हजार करोड़ रुपयों का अनुपूरक बजट

    विधानसभा ने पारित किया साढ़े तेरह हजार करोड़ रुपयों का अनुपूरक बजट

    भोपाल 5 दिसंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के स्वप्न को विकसित मध्य प्रदेश बनाकर साकार करेंगे। हमारे प्रयास निरंतर जारी रहेंगे। विकसित भारत बनाना केवल एक मिशन नहीं हमारा धर्म भी है।

    मुख्यमंत्री डॉ.यादव शुक्रवार को मध्य प्रदेश विधानसभा के सत्र के समापन अवसर पर सदन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि विधानसभा प्रजातंत्र का मंदिर है।अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर जी ने कुशलता के साथ सदन का संचालन किया है, जो अभिनंदन है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष प्रजातंत्र की धुरी है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने नेता प्रतिपक्ष को भी धन्यवाद दिया कि उनके नेतृत्व में विपक्ष ने पूरे सत्र में सकारात्मक चर्चा की और अपने प्रश्नों एवं उद्बोधनों से लाभान्वित किया।

    द्वितीय अनुपूरक के संबंध में मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि 13,476.94 करोड़ का प्रावधान किया गया है जिसमें अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित होगी। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लिए 4000 करोड़, उपार्जन संस्थाओं को ऋण देने के लिए 2000 करोड़, लाडली बहना योजना के लिए 1794 करोड़, पंचायत विभाग के अंतर्गत 15वें वित्त आयोग के दिए 1,633 करोड़ और उद्योग ,कृषि और अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लिए सदन ने राशि स्वीकृत की है।

    अनूपूरक बजट की विशेषताएं

    · द्वितीय अनुपूरक अनुमान में कुल ₹ 13476.94 करोड़ का प्रावधान

    · विकास के लिए बजट की कोई कमी नहीं

    · जरूरतमंद को आवास देना प्रदेश सरकार की पहली प्राथमिकता

    · प्रधानमंत्री आवास योजना में 4000 करोड़ का प्रावधान. आगे और भी करने का प्लान

    · बहनों को आर्थिक रूप से और ज्यादा सक्षम बनाने के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में 1794 करोड़ का प्रावधान

    · मध्य प्रदेश का परफॉर्मेंस देखते हुए 15वें वित्त आयोग का विशेष सहयोग

    · मूलभूत जन सुविधाओं के लिये स्थानीय निकायों को 1633 करोड़ का प्रावधान

    · मध्यप्रदेश पूंजीगत व्यय में सदैव अग्रणी

    · अधोसंरचना विकास के लिए बजट में कोई कमी नही

    · पूंजीगत मद में ₹ 5028.37 करोड़ का प्रावधान

    · मुख्य बजट 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपये का बजट था. यह अब तक का सबसे बड़ा बजट.

    · गरीब, महिला, किसान और युवा सभी वर्गों की बेहतरी के लिए सरकार आगे बढ़ रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि इन स्वीकृतियों से मध्य प्रदेश विकास के पथ पर तेज गति से अग्रसर होगा। इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण विधेयक मध्य प्रदेश नगर पालिका संशोधन विधायक 2025 प्रस्तुत हुआ, जिसमें नगर पालिकाओं और नगर पंचायत में अध्यक्ष का निर्वाचन प्रत्यक्ष प्रणाली से करने का प्रावधान किया गया है। निश्चित रूप से इससे वर्तमान में निकायों में कार्य करने में आ रही समस्याओं में काफी कमी आएगी और ये निकाय स्वतंत्र रूप से ओर भी तेज गति से कार्य कर सकेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्यों को धन्यवाद दिया जिसके कारण यह सत्र गरिमामय ढंग से संचालित हुआ। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश विधानसभा का स्वर्णिम इतिहास रहा है। इस सत्र से इसमें एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं के प्रति सदन में हम उपस्थित हैं और केवल निवेश की बात नहीं कर रहे ,मध्य प्रदेश के भाग्य और भविष्य की नींव रख रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चरैवेति चरैवेति के मंत्र के अनुसार राज्य सरकार द्वारा जनकल्याण के लिए निरंतर कार्य करने के संकल्प को व्यक्त किया।

  • शिवराज का गोदी मीडिया अपने पाप छुपाने में जुटा

    शिवराज का गोदी मीडिया अपने पाप छुपाने में जुटा

    भोपाल,04 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने जबसे मध्यप्रदेश सरकार को पाखंडी परिपाटियों से बाहर निकालने की मुहिम चलाई है तबसे तंत्र की आड़ में बैठकर आम नागरिकों का खून चूसने वाले दलालों में हड़कंप मचा हुआ है।   पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान जिस गोदी मीडिया को पालने पोसने के लिए सरकारी खजाने से लगभग हजार करोड़ रुपए खर्च कर रहे थे वह तो लगभग बौखला गया है । उसने सरकारी फरमान को हाईकोर्ट का भय दिखाकर पापों का पिटारा छुपाने की कोशिश शुरू कर दी है।

    जनता से सीधा संवाद स्थापित करने के लिए शासन ने नर्मदापुरम संभाग में उपायुक्त राजस्व 2012 बैच के गणेश कुमार जायसवाल को जनसंपर्क विभाग में अपर संचालक के पद पर पदस्थ करने का आदेश जारी कियाथा। जैसे ही ये आदेश जारी हुआ तो जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों ने ये कहकर शासन के आदेश को मानने से इंकार कर दिया कि ये अधिकारी तो जूनियर है। हमारे तो उपसंचालक भी इससे वरिष्ठ हैं। सरकार किसी बाहिरी अफसर को हमारे विभागीय कैडर में कैसे पदस्थ कर सकती है। इससे पहले शिवराज सिंह सरकार ने जिस आईपीएस अधिकारी को संचालक बनाकर भेजा था वह सीनियर था लेकिन ये तो बहुत जूनियर है। हम इसके अधीन कैसे काम कर सकते हैं। इस एक दिवसीय कलमबंद हड़ताल की कमर तब टूट गई जब उन्हें समझाया गया कि शासन के आदेश का विरोध सड़कों पर करना अनुशासन हीनता होगी।

    विभाग के अधिकारियों का कहना था कि वे सरकार का प्रचार कार्य संभालते हैं। यदि सरकार उनकी बात नहीं मानेगी तो वे सरकार का जनसंवाद ढप कर देंगे । उन्होंने अपना विरोध मुखरता पूर्वक दर्ज कराने के लिए कर्मचारी संगठनों को भी साथ खड़ा कर लिया था। जैसे ही इस प्रदेशव्यापी हड़ताल की खबर मंत्रालय तक पहुंची तो आला अधिकारियों ने विभाग को निर्देश दिए कि वे अपनी हड़ताल समाप्त करें ,हम इन स्थितियों को  संवाद से समझेंगे। कमिश्नर जनसंपर्क आईएएस दीपक सक्सेना ने अधिकारियों को समझाया कि वे हड़ताल समाप्त करें हम आपकी मांगों पर सदाशयता पूर्वक विचार करके कोई रास्ता निकालेंगे।

    अधिकारियों ने मौके की नजाकत को भांपकर हड़ताल तो वापस ले ली लेकिन अपने दांव पेंच जारी रखे। जिन पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के नाम पर बजट की बड़ी राशि खर्च की जाती थी उन्हें अपने पक्ष में लामबंद करके अधिकारियों ने उनके कंधे से अपनी बंदूक चलानी शुरु कर दी। विभिन्न पत्रकार संगठनों और मीडिया संस्थानों ने भी अधिकारियों की नाराजगी से हामी भरते हुए सरकारी फरमान की मुखालिफत शुरु कर दी। अब जबकि सरकारी खजाने से भजकलदारम करने वाले इस गोदी मीडिया को समझ में आ गया है कि शासन अपने जनसंवाद को बगैर किसी दलाली झोल के जारी करना चाहता है तो उन्होंने सरकारी फरमान को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर शुरु कर दी है।

    इस संबंध में आज एक पत्रकार की जनहित याचिका की प्रति सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई है । इस पत्रकार का कहना है कि विभाग के अधिकारी सीधे सरकार से पंगा नहीं ले सकते इसलिए उनके कहने पर ही मैं हाईकोर्ट जा रहा हूं। जब उसे बताया गया कि वह पीड़ित पक्ष नहीं है। वह विभाग में अधिकारी नहीं है । इस सरकारी आदेश से जनता को कोई नुक्सान नहीं हो रहा है इसलिए वह पीड़ित पक्ष बनकर यदि अदालत जाएगा तो उसे स्टे मिलने के बजाए दंड भी भुगतना पड़ सकता है। यदि अधिकारियों के हक छीने जा रहे हैं तो वे स्वयं अदालत जा सकते हैं।

    गोदी मीडिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को भय है कि यदि बाहिरी अधिकारी विभाग में आ गया तो वह यहां बरसों से चल रहे गोरखधंधे की पोल खोल देगा। इससे उन्हें प्रमोशन की जगह जेल यात्रा तक भुगतना पड़ सकती है। ऐसे में सरकारी फरमान का विरोध करना उनकी मजबूरी है। हालांकि अभी सरकार ने नव आगंतुक को फिलहाल अपनी पुरानी पदस्थापना पर ही बने रहने को कहा है। उसे कहा गया है कि जब विभागीय अधिकारियों की नाराजगी दूर हो जाएगी तब आपको भेजा जाएगा।

    भाजपा संगठन से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये डाक्टर मोहन यादव की सरकार है। सरकार यदि कोई फैसला करती है तो उसे सख्ती से लागू भी करती है। यदि जनसंपर्क विभाग के अफसर इसी तरह विरोध करते रहेंगे तो उनका ये कदम विभाग के पैरों पर मारी गई कुल्हाड़ी साबित होगा।

  • मध्यप्रदेश की विरासत को मिला जीआई टैग

    मध्यप्रदेश की विरासत को मिला जीआई टैग

    भोपाल 3 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।भारत का दिल कहे जाने वाले मध्यप्रदेश की 5 बहुत ही प्राचीन शिल्प कला को जीआई टैग के द्वारा भारत की बौद्धिक संपदा अधिकार में शुमार होने का गौरव प्राप्त हुआ है। एमएसएमई मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने मध्यप्रदेश की विरासत को मिली इस ऐतिहासिक पहचान के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हुए विभागीय अधिकारियों को बधाई दी है। इस उपलब्धि को जीआई मैन ऑफ इंडिया के नाम से प्रख्यात पद्मश्री डॉ. रजनी कांत ने अत्यंत गर्व का पल बताया है।

    जीआई रजिस्ट्री चेन्नई के वेबसाइट पर इन उत्पादों के सामने रजिस्टर्ड का स्टेटस आते ही संबंधित शिल्पियों में खुशी की लहर दौड़ गई और मध्यप्रदेश के लिए यह पहल करने वाले सूक्ष्म,लघु,मध्यम उद्यम विभाग सहित अन्य विभागों में भी नई चेतना आ गईं है।

    लगभग एक वर्ष पूर्व ही इन सभी के लिए जीआई का आवेदन खजुराहो स्टोन क्रॉफ्ट, बैतूल भरेवा मेटल क्रॉफ्ट, ग्वालियर पत्थर शिल्प और ग्वालियर पेपर मैशे के लिए नाबार्ड, मध्यप्रदेश ने और छतरपुर फर्नीचर के लिए सिडबी मध्यप्रदेश ने वित्तीय सहयोग प्रदान किया था। एमएसएमई विभाग मध्यप्रदेश के प्रयास से स्थानीय शिल्पियों की संबंधित संस्थाओं द्वारा यह सभी जीआई एप्लिकेशन पद्मश्री डॉ. रजनीकांत के तकनीकी सहयोग से भेजे गए थे।

    नवम्बर माह में ही पन्ना डायमंड को जीआई टैग प्राप्त हुआ है और लगभग 25 उत्पादों की जीआई मिलने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है।

  • भाजपा के प्रदेश कार्यालय में सजा  मंत्रियों का जनता दरबार

    भाजपा के प्रदेश कार्यालय में सजा मंत्रियों का जनता दरबार


    मध्य प्रदेश में, भाजपा ने निर्णय लिया है कि अब राज्य के मंत्रियों को हफ्ते में पांच दिन दोपहर 1 से 3 बजे तक पार्टी (प्रदेश) कार्यालय में बैठना होगा, ताकि कार्यकर्ता और आम लोग सीधे उनसे अपनी समस्याएँ या सुझाव रख सकें। इस व्यवस्था के तहत सोमवार से शुक्रवार हर दिन दो-दो मंत्री लगाए जाएँगे। शनिवार–रविवार इस सूची में नहीं होंगे। इस पहल की शुरुआत राज्य के उपमुख्यमंत्री और अन्य राज्य मंत्रियों से की गई है।
    राजस्थान के भाजपा कार्यालय में “वर्कर हियरिंग” (कार्यकर्ता सुनवाई) का ये मॉडल लागू किया गया है, जहाँ मंत्री प्रति हफ्ते तय दिन कार्यालय में बैठेंगे।इस व्यवस्था से जमीनी स्तर पर कार्य करने वाला कार्यकर्ता सीधे सरकार के शीर्ष व्यक्ति से सीधे संवाद कर पाएगा।ये कामकाजी व्यवस्था कार्यकर्ताओं व आम लोगों को सीधे अपने प्रतिनिधियों (मंत्रियों) तक पहुँचने का अवसर देती है। इससे संगठन और सरकार में “नीचे से ऊपर” (bottom-up) संवाद की संभावना बढ़ती है।
    सरकारी ढांचे के कार्य करने का जो माडल आजादी के बाद से बना हुआ था उसमें भाजपा की सरकारों ने मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात का माडल विकसित किया था। इसके पहले की कांग्रेसी सरकारों के मंत्री अपने बंगलों पर जनता से मुलाकात करते रहे हैं। वहां मंत्री के स्टाफ का एक काकस स्थापित हो जाता था और तबादलों, पोस्टिंग के अलावा कई अन्य जन शिकायतों का निवारण किया जाता था।इस व्यवस्था में अक्सर शिकायतकर्ता (worker / आम नागरिक) को लम्बा इंतजार करना पड़ता था, या मंत्री तक पहुँचने में दिक्कत होती थी। अब तय समय होने से, मुद्दों को सुनने व समाधान का असली मौका मिलेगा।इससे प्रशासन में जवाबदेही (accountability) और प्रतिसाद (responsiveness) की छवि मजबूत हो सकती है। पार्टी कार्यकर्ता महसूस कर सकते हैं कि “उनकी आवाज सुनी जाती है” — इससे संगठन में भरोसा और जुड़ाव (motivation) बनेगा। विशेष रूप से, ऐसे कार्यकर्ताओं जिन्हें पहले अनदेखा महसूस होता था, वे अब सक्रिय और जागरूक महसूस करेंगे।
    सीधे जनता से संवाद होने से क्षेत्र की विशिष्ट समस्याएं, लोक-विकास की मांगें, समझौतों की जरूरत आदि सामने आएँगी।इससे सरकार को नीतिगत फैसलों में grassroots का इनपुट मिलेगा, जो विकास व प्रशासन में सुधार ला सकता है। भक्त या समर्थक नहीं बस, आम नागरिक या कार्यकर्ता भी अपनी बात रख सकते हैं — इससे राजनीतिक जीवन थोड़ा “लोक-केंद्रित” बनेगा।
    केवल दो घंटे प्रतिदिन और सिर्फ दो मंत्री से बहुत सारे कार्यकर्ता या आम लोग अपनी बातें पूरी तरह नहीं रख पाएँगे। केवल सुनना पर्याप्त नहीं है; समस्या हल करना अलग है। संसाधन, अधिकार, बजट, प्रशासनिक बाधाएं आदि हो सकते हैं।यदि केवल पार्टी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी गई आम नागरिकों या निवासियों को नहीं तो लोकतंत्र से समाधान के मूल लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकेगा। वे ही लोग आगे आएंगे जिनके पास पहुंच होगी; इससे “नज़रअंदाज़” वर्ग फिर पीछे रह सकते हैं।
    जब मंत्री नियमित रूप से संगठन कार्यालय में बैठेंगे, तो सरकार तथा पार्टी की भूमिका और दायित्व में कई भ्रम भी फैल सकते हैं। कार्यकर्ता-मुद्दों पर सरकारी फैसले लेंगे या सिर्फ उनके प्रश्नों का जवाब देकर अपना ज्ञान पेलेंगे। यह कदम संभवतः 2027 के लिए तैयारियों की दिशा में है पार्टी संगठन को मजबूत करना, grassroots कार्यकर्ताओं को जोड़ना, सुनने की संस्कृति बनाना। यह जनता (या कार्यकर्ता) के दृष्टिकोण से भाजपा की “खुली” और “जवाबदेह” छवि पेश करता है, जिससे विपक्षी आलोचना कम हो सकती है।
    क्षेत्रीय और स्थानीय स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत होगी जिससे मतदाताओं से जुड़ाव आसान होगा। लेकिन अगर यह सिर्फ एक दिखावा (symbolic gesture) बना रह गया , जहाँ सुनने का समय है, लेकिन समाधान नहीं — तो आलोचना और असंतोष भी बढ़ सकता है।ये कहा जा सकता है कि यह व्यवस्था सही दिशा में एक सकारात्मक पहल है, बशर्ते इसे सिर्फ “प्रोटोकॉल” न समझा जाए, बल्कि “सशक्त लोकतांत्रिक संवाद” के रूप में सक्रिय रूप से लागू किया जाए। अगर मंत्रियों ने वास्तव में जनता व कार्यकर्ताओं की सुनवाई की, उनकी समस्याओं पर संवेदनशीलता दिखायी, और त्वरित समाधान व असर दिखाया तो इससे पार्टी-सरकार दोनों को ही लाभ होगा। लेकिन सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह व्यवस्था कितनी नियमित, पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह साबित होती है।

  • पीड़िता पर दबाव बनाकर सजा से बचने का प्रयास कर रहा पास्को आरोपी प्रकाश गुप्ता

    पीड़िता पर दबाव बनाकर सजा से बचने का प्रयास कर रहा पास्को आरोपी प्रकाश गुप्ता


    भोपाल, 01 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सैकड़ों लोगों से ठगी और महिलाओं के विरुद्ध यौन अपराध करने वाला कंप्यूटर व्यवसायी प्रकाश चंद्र गुप्ता इन दिनों जेल की सजा से बचने के लिए तरह तरह के कानूनी दांवपेंचों का इस्तेमाल कर रहा है। उसने अपने वकील के माध्यम से पीडि़ता पर दबाव बनाकर पास्को एक्ट की कड़ी सजा से बचने का जाल बिछाया है। वह अदालत के सामने पुलिस कार्रवाई के विरुद्ध भी शिकायतें करके खुद को निर्दोष बताने का प्रयास कर रहा है।


    बताया जाता है कि राजधानी के एमपीनगर में बूटकॉम सिस्टम नामक दूकान चलाने वाला गुप्ता अपने ग्राहकों को झांसा देकर ठगने के लिए कुख्यात रहा है। उसके विरुद्ध कई व्यापारियों और ग्राहकों ने भी ठगी की शिकायतें दर्ज कराई हैं। जब इस बार उसके विरुद्ध एक नाबालिग बालिका ने यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने सख्त जांच करके उसे अदालत के माध्यम से जेल पहुंचा दिया । तभी से वह अपने बचाव में कई तरह के षड़यंत्र कर रहा है।ये आदतन अपराधी अब तो सजा से बचने के लिए पुलिस और अदालतों के विरुद्ध भी तरह तरह की झूठी शिकायतें कर रहा है।


    पीड़िता की ओर से पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत की गई है कि आरोपी गुप्ता स्वयं एवं अपने वकील के माध्यम से मनगढ़ंत लिफाफे भेज रहा है जिन पर लीगल नोटिस लिखा है। वह पहले से अन्य प्रकरणों में भी इस तरह के लिफाफे भेजकर अदालत को गुमराह करने का प्रयास करता रहा है। पूर्व में वरिष्ठ अधिवक्ता विजय चौधरी ने ऐसे ही लिफाफे भेजने के कारण गुप्ता के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी। तब उन लिफाफों में ऊटपटांग चित्र और रद्दी कागज भेजे गए थे। श्री चौधरी ने लिखा था कि उनके पक्षकार मनीष बाधवानी को इस तरह की चिठ्ठियां भेजना बंद करें। इस प्रकार के षड़यंत्र करना न्याय के लिए घातक है। ये दस्तावेज पक्षकार की ओर से अदालत को भी दिए गए हैं।


    ज्ञात हुआ है कि विगत में एक लड़की अनन्या पाराशर ने एमपीनगर पुलिस थाने को शिकायत की थी कि जब गुप्ता ने उसे कबाड़ा कंप्यूटर बेचा और वह शिकायत करने पहुंची तो गुप्ता ने अपनी ही दूकान में बंदूक तानकर गाली देते हुए जान से मारने की धमकी दी। लड़की की शिकायत पर एमपीनगर पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 0210 । 2022 दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया था। बाद में शिकायत कर्ता लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।


    महिलाओं को जाल में फंसाने के लिए कुख्यात प्रकाश गुप्ता ने केनरा बैंक कोहेफिजा शाखा की मैनेजर सुधा दर्शिका से दो करोड़ इक्कीस लाख रुपयों की ठगी के आरोप में जेल की हवा खाना पड़ी थी। इससे बचने के लिए गुप्ता ने सुधा दर्शिका के विरुद्ध भोपाल जिला न्यायालय में एक झूठा प्रकरण दर्ज कराने का प्रयास किया । बाद में केनरा बैंक और सुधा दर्शिका को भी वह इसी तरह के फर्जी लिफाफे भेजने लगा। केनरा बैंक ने आम जनता को सावधान करने के लिए राजधानी के एक अखबार में आम सूचना प्रकाशित करवाई थी कि बैंक की ओर से गुप्ता से ये रकम वसूली जानी है। वह कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है ।


    कमलानगर पुलिस ने भी महिलाओं की शिकायत पर प्रकाश गुप्ता के विरुद्द चार करोड़ सत्ताईस लाख रुपए की धोखाधड़ी की शिकायत की थी। पुलिस ने अपराध दर्ज करके गुप्ता को गिरफ्तार किया था तब न्यायालय ने उसे जेल भेज दिया था। यह प्रकरण क्रमांक आरटी 4137 । 20 अभी अदालत में विचाराधीन है।


    गुप्ता की ओर से न्यायाधीशों पर दबाव बनाने के लिए हाईकोर्ट तक में झूठी शिकायतें की जाती रहीं हैं। अपर सत्र न्यायाधीश विशाल अखंड और मुख्य न्यायायिक मजिस्ट्रेट विनोद पाटीदार की झूठी शिकायतें हाईकोर्ट के सतर्कता विभाग ने जांच के बाद झूठी पाए जाने पर खारिज कर दीं थीं।