
मोदी सरकार को जनता तीसरी बार सत्ता में भेजने जा रही है। अब तक पांच चरणों के चुनाव में साफ हो गया है कि भाजपा और एनडीए गठबंधन भारी जनसमर्थन से सरकार में पहुंच रहा है। ये जनादेश देश के विकास का जनादेश होगा। पहली बार न तो कोई सहानुभूित की लहर है और न ही जाति धर्म के दलालों की जोड़ तोड़। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सीधे जनता से संवाद कर रहे हैं और कारगर संवाद के माध्यम से अपनी सरकार के कार्यकलापों का उल्लेख करके कार्यकाल का जनादेश जुटा रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी.नड्डा और अमित शाह के मार्गदर्शन में चल रहे इस महाभियान में दुनिया की सबसे विशाल लोकतांत्रिक पार्टी एक स्वर में चुनाव लड़ रही है। अंग्रेजों ने जब भारत के टुकड़े करके यहां धर्म आधारित फूट के बीज बोए थे तब उन्हें भी एहसास नहीं था कि कभी उनके तमाम प्रयासों को भारत का सनातन धता बता देगा। सनातन ने हमेशा से सभी धर्मों का सम्मान करना सिखाया है। वसुधैव कुटुंबकम का विचार पूरी दुनिया को परिवार मानने का संदेश देता है इसके बावजूद अंग्रेजों के प्रश्रय से पनपी कांग्रेस ने सतर सालों तक जाति ,धर्म,भाषा का ऐसा वैमनस्य बोया कि जनता सिर फुटौव्वल में ही लगी रही। सबको एक करने का विचार लिए जनसंघ हो या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इनके करोड़ों कार्यकर्ताओं की पीढ़ियां खप गईं। गरीबी दूर करने का स्वप्न दिखाकर नेहरू गांधी परिवार ने लगातार सत्तर सालों तक बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लूट का साझीदार बनाए रखा। बाबा रामदेव के पातंजलि आर्युवेद जैसे सैकड़ों प्रकल्पों ने देश को पहली बार बताया कि अहिंसात्मक चिकित्सा ही समाज को बेहतर जीवन दे सकती है। इसके पहले तो एलोपैथी के माध्यम से समाज को स्वास्थ्य प्रदान करने का ऐसा अभियान चलाया गया था कि लोगों को लगता था यदि उन्हें दवा नहीं मिली तो उनका जीवन नष्ट हो जाएगा। स्वयंसेवकों ने इतने विशाल देश को जीवन संयम की डोर में बांधकर जैसा पुनर्जागरण चलाया उन्हें समझाया कि सर्जरी जैसी उपचार विधि आपातकाल में जरूरी होती है स्वस्थ्य रहने के लिए तो जीवनशैली में बदलाव लाना होंगे। आज भी देश की बड़ी आबादी जीवनशैली जनित बीमारियों से ग्रस्त है। उन्हें नहीं मालूम कि बहुत छोेटे उपाय उनका जीवन खुशहाल बना सकते हैं। नरेन्द्र मोदी अपने चुनाव प्रचार अभियान को लोकतंत्र का उत्सव बताते हैं। इसके विपरीत शैतान पर कंकर फेंकने की सोच से भरे कांग्रेस के राहुल गांधी बदतमीजी की भाषा में प्रधानमंत्री को गाली देते फिरते हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बैनर्जी मुस्लिमों को उकसाकर दंगे करवाकर सत्ता में बने रहने का प्रयास कर रहीं हैं। अखिलेश यादव ,की समाजवादी पार्टी हो या केरल के वामपंथी सभी लड़ने मारने पर उतारू हैं।इसके विपरीत भाजपा के प्रचारक अपनी वोटर सूची का पन्ना संभाले लोगों से मतदान की अपील कर रहे हैं। चुनाव अभियान का असर ये है कि कांग्रेस का निराश मतदाता तो पोलिंग बूथ तक भी नहीं पहुंच रहा है। उसे लगता है कि इंडी गठबंधन की विचारधारा समय के साथ पिछड़ गई है। धारा 370 हो या राममंदिर निर्माण जैसे तमाम मुद्दों पर इस गठबंधन की पहले ही करारी हार हो चुकी है।आज वह खलनायक बनकर समाज के बीच खड़ा है ऐसे में आम जनता उससे दूरी बनाकर रखने में ही अपनी भलाई समझ रही है। जाहिर है इसका सीधा लाभ एनडीए गठबंधन को ही मिलना है। भाजपा की राज्य इकाईयां भले ही अब तक विकास की मुख्यधारा को आत्मसात नहीं कर पाईं हों लेकिन जिस तरह चुनाव प्रचार अभियान में हर बिंदु पर प्रवक्ता की तरह प्रकाश डाला गया उससे संगठन को बड़ा सहारा मिला है। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की पूर्ववर्ती सरकार आत्मनिर्भरता के मुद्दे पर बहुत कुछ नहीं कर पाई थी। ऐसे में जनता के बीच असंतोष भी बढ़ गया था लेकिन चुनाव अभियान ने जनता से जिस तरह संवाद किया उससे वो नाराजगी दूर हो गई। डॉ.मोहन यादव की सरकार अभी तक अपना काम शुरु नहीं कर पाई है वह भी चुनाव अभियान की जिम्मेदारी उठाए हुए है। भाजपा का केन्द्रीय प्रचार अभियान इतना सफल जन शिक्षण कर रहा है कि उससे आम नागरिक तक को अपना लक्ष्य साफ नजर आने लगा है। मध्यप्रदेश की डॉ.मोहन यादव सरकार से देश को भारी अपेक्षाएं हैं। देखना है कि विकास की जो समझ देश के बीच विकसित हुई है उसकी कसौटी पर वर्तमान सरकार किस हद तक सफल होती है. फिलहाल मतदान के दो चरण बाकी हैं और बहुत सारी प्रमुख सीटों पर मतदान होना है । प्रचार की लय इतनी सुरीली है कि देश टकटकी लगाए उसे सुन रहा है। वोट कर रहा है। जाहिर है कि सकारात्मक अभियान अपने बड़े लक्ष्य को भी आसानी से वेध लेगा। एनडीए लगभग चार सौ सीटों पर पहले ही काबिज है अब वह चार सौ पार की ओर बढ़ रहा है।
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