Month: February 2024

  • एक्सिस बैंक में बीमा की आड़ में ठगी का खेल

    एक्सिस बैंक में बीमा की आड़ में ठगी का खेल


    पचास लाख रुपए की एफडी करने के बजाए राशि को बीमा में लाक कर दिया


    भोपाल,19 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) भारत के मुद्रा बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एक्सिस बैंक ने इन दिनों आम निवेशकों को लूटने का अभियान चला रखा है। अपना संचालन खर्च घटाने के लिए बैंक ने ऐसे नए युवाओं को फील्ड में उतार दिया है जो निवेशकों के भरोसे से खिलवाड़ करके उन्हें ठगने का काम कर रहे हैं। हाल ही में बैंक की बिलासपुर शाखा में ऐॅसी ही ठगी की शिकार प्रोफेसर ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। उसके साथ पचास लाख रुपए की धोखाघड़ी की गई है।


    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रसायन शास्त्र की एक प्राध्यापिका ने अपनी बेटी का भविष्य सुरक्षित करने के लिए एक्सिस बैंक बिलासपुर में राजकिशोर नगर शाखा में पचास लाख रुपए जमा किए थे। बैंक के अधिकारियों का कहना था कि शाखा के आला अधिकारी इस राशि को कहीं निवेश कराने के लिए दबाव बना रहे हैं। इस पर प्राध्यापिका ने एफडी कराने के लिए सहमति दे दी। इस पर बैंक मैनेजर चेतन श्रीवास ने अपने कर्मचारी रोहिणी वल्लभ साहू को भेजकर प्रोफेसर से कहलवाया कि वे बैंक का एप डाऊनलोड करवा लें तो ओटीपी के माध्यम से एफडी की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। बैंक कर्मचारी ने प्रोफेसर का मोबाईल लिया और कहा कि वह इस पर बैंक का एप डाऊनलोड कर रहा है। इस बीच उसने मैक्स लाईफ की पालिसी की सहमति के लिए ओटीपी बुला लिया और ओके करके मोबाईल वापस प्रोफेसर को लौटा दिया। प्रोफेसर को लगा कि उनकी रकम बैंक के कर्मचारी ने एफडी में लगा दी है।उन्हों इस बीमे के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।


    कुछ हफ्तों बाद जब प्रोफेसर के घर के पते पर पालिसी डिलीवर हुई तो उन्हें पता चला कि उनकी रकम बैंक ने बीमा कंपनी में निवेश कर दी है। उन्होंने पता किया तो बैंक के कर्मचारी ने बताया कि मैक्स लाईफ इंश्योरेंस एक तरह से एक्सिस बैंक की ही सहयोगी फर्म है। उनका पैसा भले ही बीमे में रखा है लेकिन उन्हें ब्याज भी मिलेगा और जब चाहेंगी रकम मात्र पाच हजार रुपए का शुल्क चुकाकर वापस मिल जाएगी। इसके बाजवूद प्रोफेसर बैंक गई और कहा कि उन्होंने रकम एक्सिस बैंक की एफडी में निवेश की है मैक्स लाईफ में नहीं। इस पर बैंक मैनेजर ने कहा कि दोनों ही सहयोगी कंपनियां हैं इसलिए उनकी रकम पर एफडी की ही तरह ब्याज मिलता रहेगा।


    प्रोफेसर ने बैंक मैनेजर से कहा कि मुझे अपनी रकम बीमा में निवेश नहीं करनी, मैं तो अपनी आय पर पूरा कर देती हूं मुझे किसी प्रकार की छूट नहीं चाहिए। मैं तो ये रकम अपनी बेटी की शादी के लिए बचाकर रखना चाहती हूं। बैंक के अधिकारियों ने उन्हें कहा कि उन्हें अपना टारगेट पूरा करना पड़ता है। इसलिए हम खाते को बीमा राशि दिखाकर वापस ले लेते हैं। अब जबकि प्रोफेसर को अपनी बेटी की शादी की तैयारी के लिए रकम की जरूरत पड़ी तो उन्होंने बैंक से संपर्क किया। उन्हें बताया गया कि उनकी रकम लाक हो गई है और समय अवधि पूरा होने पर ही वापस मिलेगी। इस पर प्रोफेसर हतप्रभ रह गईं और उनकी मनःस्थिति गड़बड़ा गई। उन्हें लगा कि अब बेटी की पढ़ाई, रोजगार और शादी के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ेगा।


    प्रोफेसर ने अपने साथ हुई इस धोखाघड़ी की शिकायत बैंक मैनेजर के अलावा पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर को भी की है। उन्होने पुलिस से निवेदन किया है कि मुझे अंधेरे में रखकर बैंक के कर्मचारियों ने धोखाघड़ी की है। लोगों ने बताया कि इस तरह की धोखाघड़ी बैंक के लोग अपने सैकड़ों ग्राहकों से कर चुके हैं । पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद जांच शुरु कर दी है। बैंक के अधिकारी अब कह रहे हैं कि वे बीमा कंपनी से बात कर रहे हैं ताकि प्रोफेसर की रकम वापस दिला सकें। बीमा कंपनी का कहना है कि उन्होंने बीमा राशि को बाजार में निवेश कर दिया है। इस संबंध में वह बैंक को उसका कमीशन भी दे चुके हैं,इसलिए पूरी राशि वापस करने के लिए हेड आफिस से अनुमति लेनी होगी।


    मैक्स लाईफ बीमा कंपनी के भोपाल रीजन के मैनेजर ललित कुदेसिया का कहना है कि ये मामला एक्सिस बैंक की शाखा में घटित हुआ है। हमारी कंपनी ने इसमें कोई कार्रवाई नहीं की है। बैंक ने कहा तो हमने बीमा कर दिया। इस संबंध में किसी भी कार्रवाई के लिए आपको बैंक से ही संपर्क करना चाहिए। इधर एक्सिस बैंक भोपाल के मैनेजर विपिन तिवारी का कहना है कि बैंक की बिलासपुर शाखा ने ये बीमा किया है। उसे एफडी करना थी या बीमा इस संबंध में केवल वहीं के मैनेजर कुछ बता सकते हैं। आपने हमें सूचना दी है तो हम अपने मुंबई मुख्यालय को सूचना भेज देंगे। जब उनसे पूछा गया कि एक्सिस बैंक में इस तरह की धोखाघड़ी क्यों की जा रही है तो उन्होंने साफ इंकार करते हुए कहा कि हमारी ब्रांच में इस तरह की धोखाघड़ी नहीं होती। जब उनसे इस ब्रांच में इसी तरह के एक प्रकरण के बारे में पूछा गया तो वे बगलें झांकने लगे।दरअसल एक्सिस बैंक प्रबंधन ने ही अपने कर्मचारियों और अधिकारियों को बीमा बेचने का टारगेट दे रखा है जिसे पूरा करने के लिए वे ग्राहकों को गुमराह करके उनकी पूंजी बीमा योजना में जमा करवा देते हैं।

    सूत्र बताते हैं कि एक्सिस बैंक अपनी जमा राशियों को टैक्स से बचाने के लिए और आय न दिखाने के लिए मैक्स लाईफ के अलावा अन्य बीमा कंपनियों में भी निवेश दिखाता है। इससे उसे टैक्स में छूट भी मिल जाती है और कम ब्याज पर रकम भी मिल जाती है।सेबी ने हालांकि इस तरह की धोखाघड़ी रोकने के लिए सख्त दिशा निर्देश जारी किए हैं। इस तरह की धोखाघड़ी को संज्ञान में लेते हुए रिजर्व बैंक ने भी गाईडलाईन जारी की हैं। जानकारी के अभाव में आम उपभोक्ता इस तरह की घोखाघड़ी के शिकार हो रहे हैं। यह प्रकरण सेबी और बैंकिंग लोकपाल की निगाह में भी लाया जा रहा है। देखना है कि धोखाघड़ी के इस साफ प्रकरण में पुलिस क्या कार्रवाई करती है और पीड़िता को न्याय कैसे दिलाएगी।

  • रमनवीर अरोरा की हवेली पर छापे में गुर्गा गिरफ्तार

    रमनवीर अरोरा की हवेली पर छापे में गुर्गा गिरफ्तार


    भोपाल, 19 फरवरी ( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश पुलिस ने फर्जी कंपनियां बनाकर राज्य के खजाने से ठगी करने वाले गिरोह के सदस्यों की धरपकड़ शुरु कर दी है। ऐसे ही एक गिरोह के सरगना की कारगुजारियां जब पुलिस के सामने उजागर हो गईं तो पुलिस ने कुख्यात ठग और रमनवीर इंपोरियम के कथित संचालक रमनवीर अरोरा की हवेली पर छापा मारा जहां उसका गुर्गा पुलिस के हत्थे चढ़ गया।जिसने अपने मालिक के कहने पर अपराध करना स्वीकार कर लिया है। मुख्य आरोपी अभी भी फरार बताया जा रहा है।


    सैडमेप भोपाल की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर महिला अधिकारी ने पुलिस थाना क्राईम ब्रांच में शिकायत की थी कि किसी व्यक्ति ने उनके और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी के बीच फर्जी बातचीत का कथित स्क्रीन शाट वायरल किया था जिसमें आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करके उन्हें बदनाम करने की कोशिश की गई थी. पुलिस ने इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए ऐसी चैट बरामद की और पाया कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, सेक्रेट्री एवं कमिश्नर ,एमएसएमई सेक्रेटरी , स्पोर्ट्र्स सेक्रेटरी आदि के बीच असत्य, मनगढ़ंत, और काल्पनिक आपत्तिजनक चैट बनाकर उसका स्क्रीन शाट सोशल मीडिया पर वायरल किया था। इस चैट का मकसद इन अधिकारियों को बदनाम करना था। ये सब साजिशें केवल इसलिए की जा रहीं थीं क्योंकि सैडमेप से सिक्यूरिटी के नाम पर लूट कर रहे फर्जी ठेकों को निरस्त कर दिया गया था। फर्जी तरीकों से नौकरियां करने वाले कई निठल्ले अधिकारियों को भी निकाल बाहर किया गया था।


    पुलिस ने पाया कि मुख्य अभियुक्त ब्लैक लिस्टेड रतन इंपोरियम का रमनवीर अरोरा इस षड़यंत्र का मुख्य साजिश कर्ता है। वह एक समाचार पत्र प्रकाशित करता है और पुलिस पर रौब जमाकर बच निकलता रहा है। इसने टाईम्स आफ इंडिया समूहब का एक पुरस्कार भी खरीदा था जिसे दिखाकर वह खुद को बड़ा समाजसेवी बताता रहता है। पुलिस आयुक्त नगरीय पुलिस भोपाल ने अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अपराध मुख्यालय, और पुलिस उपायुक्त अपराध को अज्ञात आरोपी को खोजकर गिरफ्तार करने और वैधानिक कार्रवाई करने के आदेश दिये थे।


    निर्देश प्राप्त होने पर पुलिस उपायुक्त अपराध द्वारा अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अपराध के नेतृत्व एवं सहायक पुलिस आयुक्त अपराध के मार्ग दर्शन में थाना क्राइम ब्रांच की टीम गठित कर तत्काल सक्रिय किया गया जिनके द्वारा आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकि साधनो/संसाधनों के आधार पर पता लगाया कि इंदौर के रहने वाले जावेद मोहम्मद पिता शफी मोहम्मद खान ने अपने सेठ रमनवीर सिंह अरोरा के कहने पर उक्त फर्जी कूटरचित स्क्रीन शॉट, एप के माध्यम से बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया था जिसे क्राइम ब्रांच भोपाल की टीम द्वारा कडी मशक्कत के बाद गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है,मामले में अनुसंधान एवं फरार मुख्य आरोपी रमनवीर सिंह अरोरा की सरगर्मी से तलाश की जा रही है।राजधानी से एक दोपहर में प्रकाशित समाचारपत्र का मालिक इस गिरोह का संरक्षक बताया जा रहा है।


    पुलिस ने बताया कि उसने जावेद मोहम्मद पिता सफी मोहम्मद खान उम्र 35 साल निवासी म.न 17 राजा मार्ग,धार हाल पता, म.न 249 सिल्वर नगर,मोहम्मद इसरार का मकान, गली नं 2 थाना खजराना इंदौर कक्षा -5 वीं अप.क्र.28/24 धारा 469,500 भादवि इजाफा धारा 201,204,471,120 बी भादवि के अंतर्गत गिरफ्तार किया है। वह अनपढ़ महिलाओं को कुछ पैसे देकर उनके नाम पर सिम खरीद लेता था और उसी के माध्यम से दुष्प्रचार करता था।