
भोपाल, 24 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। नगरीय विकास और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नगरीय विकास संचालनालय का निरीक्षण किया तो उन्हें स्थानीय शासन की ढेरों गड़बड़ियों से सामना करना पड़ा। उन्होंने साफ निर्देश दिए हैं कि नगरीय निकाय अपनी कराधान व्यवस्था सुधारें और बिजली के बिल स्वयं भरें । शासन से मिलने वाली राशि में होने वाली कटौती से बचने के लिए स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनना होगा। मंत्री के आश्वासन के बाद वित्त विभाग ने नगरीय निकायों को दी जाने वाली लगभग तीन सौ तीस करोड़ रुपयों की धनराशि जारी कर दी है।
विभागीय सूत्रों ने बताया कि शासन के वित्त विभाग ने कड़ा वित्तीय अनुशासन लागू करते हुए नगरीय निकायों को दी जाने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति एवं अन्य राशि जारी करने पर रोक लगा रखी थी। नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारी इसे लेकर हो हल्ला मचा रहे थे। श्री विजय वर्गीय ने स्वयं पहुंचकर मामले का जायजा लिया तो नगरीय प्रशासन के कुशासन की पोल खुल गई। उनके साथ वित्त सचिव ज्ञानेश्वर पाटिल और नगरीय विकास आयुक्त भरत यादव भी मौजूद थे।
वित्त विभाग ने कड़े वित्तीय अनुशासन के अंतर्गत नगरीय विकास विभाग पर अपनी उधारी चुकाने के लिए दबाव बनाया था। नगरीय निकायों की लापरवाही और उधार लेकर घी पीने की शैली के चलते मध्यप्रदेश का वित्तीय प्रबंधन प्रभावित हो रहा था। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के निर्देश के बाद वित्त विभाग ने इस बार पूरी राशि जारी कर दी है। आमतौर पर वित्त विभाग लगभग ढाई सौ करोड़ रुपए जारी करता है। बाकी राशि वह प्रोजेक्ट उदय योजना की शर्तों के कारण काट लेता है। नगरीय प्रशासन विभाग ने आश्वासन दिया है कि वह नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए टैक्स की वसूली समय पर कराने का प्रयास कर रहा है।
विभागीय मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि मूलभूत राज्य वित्त आयोग, सड़क अनुरक्षण और मुद्रांक शुल्क की राशि, जो करीब एक हजार करोड़ रुपए के पास है, को जल्दी जारी किया जाए। उन्होंने यूआईडीएफ के अंतर्गत नगरीय निकायों को अमृत योजना की पूर्ति के लिए 500 करोड़ रुपए शीघ्र जारी करने की मांग की है। वित्त सचिव ने बताया कि इस संबंध में अधिकारिक रूप से एक हफ्ते के अंदर कार्रवाई की जाएगी। मंत्री विजयवर्गीय की मौजूदगी में हुई बैठक में यह भी तय हुआ कि मेट्रो रेल के संबंध में 350 करोड़ रुपए की स्वीकृत राशि के लिए राज्य का अंश शीघ्र जारी किया जाए। बैठक में तय हुआ कि पूंजीगत मदों की योजनाओं को नगरीय निकायों द्वारा लागू करने के संबंध में मानक प्रक्रिया तय कर सभी नगरीय निकायों को जारी की जाए। नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री शहरी अधो संरचना चतुर्थ चरण के अंतर्गत ऋण लिए जाने के संबंध में एमपीयूडीसी को अधिकृत किए जाने की स्वीकृति जल्द जारी किये जाने का आग्रह किया है। 552 ई-बसें छह शहरों में विजयवर्गीय ने प्रदेश के 6 प्रमुख नगरों में नगर परिवहन सेवा को मजबूत करने के लिए नगरीय विकास विभाग ने 552 ई-बसें लागू करने का प्रस्ताव वित्त विभाग को दिया है। नगरीय विकास मंत्री विजय वर्गीय ने कहा कि इस योजना में अन्य राज्यों ने गारंटी दी है, जिसे प्रदेश में भी वित्त विभाग द्वारा दी जाएगी।
बैठक में वित्त विभाग ने बताया कि नगरीय निकायों की विभिन्न शासकीय विभागों पर अधिरोपित सेवा कर राशि की सूची उपलब्ध कराई जाए। इसके आधार पर वित्त विभाग द्वारा उक्त राशि शीघ्र दिलाए जाने के प्रयास किए जाएंगे। बैठक में मंत्री ने कहा कि नगरीय निकायों को देय चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि से राज्य स्तर पर कटौती नहीं की जाना चाहिए। ऐसी व्यवस्था हो कि नगरीय निकाय बिजली बिल की राशि खुद बिजली कंपनियों को जमा कराएं। बैठक में नगरीय विकास मंत्री ने न्यू पेंशन स्कीम के कर्मचारियों को ग्रेच्युटी दिए जाने के संबंध में विभागीय प्रस्ताव को वित्त विभाग द्वारा एक सप्ताह में निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले कैलाश विजयवर्गीय ने शिवाजी नगर पालिका भवन स्थित संचालनालय का निरीक्षण कर अधिकारियों को पेंशन, प्रशिक्षण जैसे मुद्दों पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
इस मौके पर अमृत योजना, मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों की भी विस्तार से समीक्षा कर कार्य समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। नगरीय क्षेत्रों में निर्मित हो चुके संजीवनी क्लीनिक को प्रारंभ कराने को भी कहा है। विजयवर्गीय ने कहा कि हमारा ध्येय है कि हर नागरिक तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे और समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति तक विकास की पहुंच सुनिश्चित हो। इस अवसर पर केश शिल्पी बोर्ड के अध्यक्ष श्री नंदकिशोर वर्मा जी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।विभाग के अपर आयुक्त शिवम वर्मा, कैलाश वानखेडे व प्रमुख अभियंता सुरेश सेजकर भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
श्री विजयवर्गीय ने 450 वर्गफिट तक के भवन निर्माण पर 24 घंटे के भीतर भवन अनुज्ञा की अनुमति देने पर विचार करने के लिए भी अधिकारियों को निर्देषित किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इसके लिए नियम निर्माण से संबंधित वर्कशॉप आयोजित की जाये। विभागीय मंत्री ने आपदा प्रबंधन कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि वर्षा पूर्व नालों की साफ सफाई करवायी जाये व अतिक्रमण हटाऐं जायें।
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