
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के लोगों को इससे सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि यह गठबंधन भारत की संस्कृति और भारत को मिटाना चाहता है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि गांधी जी से लेकर स्वामी विवेकानंद तक और माता अहिल्या बाई होलकर से लेकर मीराबाई तक हजारों हजार साल तक यह सनातन धर्म, सनातन संस्कृति हर किसी को प्रेरित करती रही है.उन्होंने कहा कि यह सनातन संस्कृति है जो संत रविदास, संत कबीरदास को संत शिरोमणि कहती है. प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी सनातन संस्कृति को समाप्त करने की कोशिश ‘इंडी’ गठबंधन के लोगों ने की है.पूरे देश के लोगों को इनसे बहुत सतर्क रहना है क्योंकि ये भारत की हजारों साल की संस्कृति को मिटाना चाहते हैं, ये भारत को मिटाना चाहते हैं.उन्होंने कहा कि इन लोगों ने मिलकर एक ‘इंडी’ गठबंधन बनाया है जिसे कुछ लोग घमंडिया गठबंधन भी कहते हैं, लेकिन ‘इंडी’ गठबंधन ने तय किया है कि वह भारत की सनातन संस्कृति को समाप्त करके रहेगा. पीएम मोदी ने कहा, “सनातन संस्कृति वह है जिसमें भगवान राम शबरी को मां कहकर उनके झूठे बेरों को खाने का आनंद लेते हैं. सनातन संस्कृति वह है, जहां राम वनवासियों को, निषाद राज को अपने भाई से भी बढ़कर बताते हैं. सनातन संस्कृति वह है जहां राम नाव चलाने वाले केवट को गले लगाते हैं. सनातन संस्कृति वह है जो किसी परिवार में जन्म को नहीं, व्यक्ति के कर्म को प्रधानता देती है.”
विकास की अपील और आर्थिक सुधारों की आंधी से उत्साहित भारत का प्रगतिशील समुदाय इन दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस आवाज को गौर से सुन रहा है। वे देश भर में घूम घूमकर विपक्ष को ललकार रहे हैं। सरकारी कार्यक्रमों में भी वे अपनी बात इतने सधे अंदाज में बोलते हैं कि उनके जवाब की प्रासंगिकता खुद ब खुद प्रमाणित हो जाती है। केन्द्र की भाजपा सरकार ने किसान सम्मान निधि जैसी सार्थक योजना से देश को एकसूत्र में बांधने का भगीरथ किया है। वहीं राज्यों की शिवराज सिंह चौहान जैसी सरकारें लाड़ली बहना योजना लाकर जन जन तक अपनी पैठ बना रहीं हैं। मुफ्त योजनाओं की तुलना में नकद भुगतान की योजनाएं भाजपा सरकार की समाधान देने की अपील को कारगर बना रहीं हैं। ऐसे में विपक्ष हताश है। वह जाति, संप्रदाय और परिवारवाद के मुद्दों पर देश के सामने उतरा है। विपक्ष की वैमनस्य से भरी राजनीतिक चालें भी भाजपा की डायरेक्ट भुगतान वाली शैली के सामने चिचिया रहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने भाषणों में जनधन खातों, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं की जानकारी देते हैं। वहीं शिवराज सिंह चौहान जैसी राज्य सरकारों लाड़ली बहना योजना जैसी तमाम हितग्राही मूलक योजनाओं का हवाला देकर खुद को जनता का असली सेवक बताने में जुटी हैं। ऐसे में विपक्षकी तमाम जाति संप्रदाय आधारित राजनीति अप्रासंगिक नजर आ रही है। आदिवासियों को बरगलाने का जो प्रयास मध्यप्रदेश में पिछले चुनावों में कांग्रेस ने किया था उसके जवाब में भाजपा ने अपनी हितग्राही मूलक योजनाओं का रेला ठेल दिया है। ऐसे में देश विकास के नए जोश से भरता जा रहा है। जाहिर है जन जन में बढ़ रहा ये उत्साह भारत को विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में बढ़ चला है। ऐसे में कथित घमंडिया गठबंधन की फूट डालो राज करो की नीति कब तक अपना असर बचा सकेगी नहीं कहा जा सकता।उसकी राजनीति विकास का खलनायक बनकर रह गई है।
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