Month: January 2023

  • अक्षय पात्र फाऊंडेशन खाने लगी बच्चों का भोजन

    अक्षय पात्र फाऊंडेशन खाने लगी बच्चों का भोजन


    भोपाल,30 जनवरी,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। स्कूली बच्चों के लिए चलाई जा रही मध्यान्ह भोजन योजना(मिड डे मील) पूरे प्रदेश में अव्यवस्था की शिकार हो गई है। राजधानी भोपाल और इसके आसपास के इलाकों में भोजन सप्लाई का काम जिस अक्षयपात्र फाऊंडेशन को दिया गया है वह बच्चों को उनकी संख्या से बहुत कम भोजन सप्लाई कर रही है जिसकी वजह से बच्चों को भूखा ही घर लौटना पड़ रहा है। विगत 25 जनवरी से शुरु हुई ये व्यवस्था अधिकारियों की मानीटरिंग में भी अव्यस्थित है लेकिन इसके बावजूद किन्हीं ऊंची पहुंच वाले लोगों के निजी हितों के मद्देनजर वे कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।
    राजधानी के शहरी और आसपास के ग्रामीण इलाकों से लेकर रायसेन तक मध्यान्ह भोजन योजना सप्लाई करने का ठेका अक्षयपात्र फाऊंडेशन को दे दिया गया है। ये तर्क दिया गया था कि बच्चों को अच्छी गुणवत्ता का भोजन अत्याधुनिक प्लांट में बनवाकर सप्लाई किया जाएगा। महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से की जाने वाली इस कथित सप्लाई ने पूरी व्यवस्था इस तरह बिगाड़ दी है कि बच्चों को भोजन मिलना भी दूभर हो गया है।

    खाली कंटेनर सप्लाई घोटाले की कहानी बयां कर रहे हैं।


    बताया जा रहा है कि इस फाऊंडेशन को कई बड़ी कंपनियों ने अपनी सीएसआर राशि का हिस्सा दिया है। मंडीदीप स्थित एचईजी कंपनी ने भी अपनी सीएसआर राशि इस फाऊंडेशन को मिड डे मील सप्लाई करने के लिए दी है। बताते हैं कि संस्था ने कंपनियों से बड़ी राशि डकार ली है इसके बाद भी बच्चों को घटिया भोजन वह भी सिर्फ खाना पूरी के अंदाज में सप्लाई किया जा रहा है।
    बताते हैं कि ज्वाईंट डायरेक्टर नकीजा कुरैशी ने मध्यान्ह भोजन योजना सप्लाई का काम कई स्थानीय संस्थाओं को दिया था और उनसे कथित तौर पर वादा भी किया गया था कि भोजन उनके माध्यम से ही सप्लाई कराया जाएगा। अब उन्होंने इस अक्षयपात्र फाऊंडेशन को सप्लाई का ठेका दिलवा दिया है जिससे स्थानीय संस्थाओं के संचालक खासे नाराज बताए जा रहे हैं।
    स्थानीय संस्थाओं से जुड़े सूत्रों ने बताया कि विश्वकर्मा नगर, अयोध्यानगर, प्राथमिक शाला पिपलिया पेंदे खां,
    नरेला हनुमंत, दामखेड़ा, दौलतपुर,टीआरटी, जीवन ज्योति गैस राहत कालोनी, बंजारी ,बागमुगलिया नई बस्ती,प्राथमिक शाला अरेरा कालोनी, अमरावद खुर्द ,पिपलिया केशव बीडीए कालोनी में भी खाना जरूरत से बहुत कम आ रहा है। जिसकी वजह से बच्चों के बीच छीना झपटी की स्थितियां देखी जा रहीं हैं। बतातें हैं कि किसी मदरसे में भी खाना सप्लाई नहीं किया जा रहा है। बैरागढ़ चीचली, रतनपुर स़ड़क,बिलखिरिया खुर्द बरखेड़ी खुर्द में भी पूरी सब्जी केवल नाममात्र के लिए ही सप्लाई की जा रही है।

  • नानाजी देशमुख विश्विद्य़ालय ने विकास की सोच को कुशासन से रौंदा

    नानाजी देशमुख विश्विद्य़ालय ने विकास की सोच को कुशासन से रौंदा

    प्रदेश के एकमात्र मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय के शिक्षकों को पांच महीनों से नहीं मिला वेतन

    भोपाल,20 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश की अफसरशाही जब सुशासन की शाबासी लूटने के लिए आईएएस सर्विस मीट का उत्सव मना रही है तब जबलपुर के मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय के शिक्षक पांच महीनों से वेतन न मिलने की वजह से दर दर की ठोकरें खा रहे हैं। देश के मत्स्य कारोबार में प्रशिक्षित उद्यमियों को खड़ा करने वाला ये संस्थान नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलपति एसपी तिवारी के उस कुशासन की सजा भुगत रहा है जो उन्होंने नौकरियां बांटने की वाहवाही लूटने की वजह से थोपी है। प्रदेश में मछुआ कल्याण तथा मत्स्य पालन विभाग होते हुए इस कॉलेज को पशुपालन विभाग के हवाले सौंपने की नादानी इसी नौकरशाही ने की है जो आज पूरे देश में सुशासन का मॉडल बनी हुई है।

         चुनाव की देहलीज पर बैठी शिवराज सिंह चौहान सरकार ने अपने सभी विभागों को टारगेट दिया है कि वह अधिकाधिक भर्तियां करके युवाओं में बढ़ रही निराशा की भावना को दूर करे। इसका लाभ लेते हुए नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति ने लगभग सौ भर्तियां कर डाली हैं।कथित तौर पर भारी कमीशनखोरी में की गई इन भर्तियों ने न केवल विश्विद्यालय के बजट का भट्टा बिठाल दिया बल्कि अपने अधीन आने वाले मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय का बजट भी स्वाहा कर दिया है। लगभग ग्यारह करोड़ बजट दिए जाने के बावजूद विश्विद्यालय ने केवल सात करोड़ बीस लाख रुपए महाविद्यालय को दिए और बाकी बजट कहां लुटा दिया इसकी कोई जानकारी नहीं दी है। बजट की इस राशि का उपयोग अन्यत्र कर लिए जाने से महाविद्यालय को वेतन बांटने के लाले पड़ गए हैं।

            इस संबंध में कुलपति एसपी तिवारी का कहना है कि सरकार ने सातवें वेतन आयोग की अनुशंसाएं लागू कर दीं हैं इसलिए बजट कम पड़ गया है। नई भर्तियों से नौकरी में आए युवाओं को तो वेतन दिया जा रहा है पर पुराने शिक्षकों के वेतन के लिए सरकार से और राशि मिलने का इंतजार है। वे भर्तियों में भर्राशाही के आरोपों से इंकार करते हुए कहते हैं कि हमने पारदर्शी तरीके से नौकरियां बांटी हैं। उनसे जब पूछा गया कि जब बजट नहीं था तो नई भर्तियां क्यों कर लीं तो उनका कहना था कि हम सभी के वेतन की व्यवस्था कर रहे हैं।

           प्रदेश के एकमात्र मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के वैज्ञानिकों ने मछली के कारोबार की संभावनाओं को देखते हुए स्थापित कराया था। तबसे इसे इंडियन काऊंसिल आफ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च की मान्यता के आधार पर ही चलाया जाता है। इस कॉलेज से पढ़कर निकले हजारों छात्र आज समुद्र तटीय इलाकों में कारोबार करने वाली इंटरनेशनल कंपनियों में कार्य कर रहे हैं। राज्य के तालाबों में किए जा रहे मत्स्यपालन कारोबार को विकसित करके इन विद्यार्थियों ने प्रदेश और देश के लिए विदेशी आय का खजाना खोल दिया है। राज्य के मछुआरों और निषाद जाति समुदाय के युवाओं के लिए जीवनरेखा बन चुके इस महाविद्यालय के विकास की संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने अधिक ग्रांट देकर इसे संबल दिया था। इसके बावजूद कुलपति एसपी तिवारी ने महाविद्यालय में केवल चार नई भर्तियां की हैं और पुराने अधिकारियों कर्मचारियों और प्रोफेसरों का वेतन रोककर कालेज का माहौल विषाक्त बना दिया है।

            नानाजी देशमुख का नाम आत्मनिर्भर विकास के फार्मूलों के लिए जाना जाता है। जबकि उनके नाम पर बना विश्वविद्यालय आज विकास की संभावनाओं में पलीता लगाने में जुटा हुआ है। सरकार से अधिक बजट की मांग करके ये स्वशासी संस्थान एक पंगु व्यवस्था का जन्मदाता बन गया है। इन हालात से ऐसा नहीं कि राज्य सरकार या उसकी प्रशासनिक मशीनरी वाकिफ नहीं है। महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने कई बार आंदोलन करके सरकार को अपनी व्यथा से अवगत कराया है। मत्स्यपालन के व्यवसाय से जुड़े राज्य के बड़े मतदाता वर्ग ने भी बार बार सरकार को अपने समुदाय की दुर्दशा की जानकारी दी है। इसके बावजूद नौकरियां बेचने में जुटे कई चमचे भाजपा सरकार को गुमराह कर रहे हैं।

            मछुआ कल्याण एवं मत्स्यपालन मंत्री तुलसी सिलावट ने भी कई बार प्रशासन को निर्देश देकर इस महाविद्यालय को अपने विभाग में शामिल करने की सलाह दी है। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने मत्स्य कारोबार की संभावनाओं का दोहन करने में कोई रुचि नहीं दिखाई है। मछुआ कल्याण एवं मत्स्य पालन विभाग की प्रमुख सचिव कल्पना श्रीवास्तव से इस संबंध में मुलाकात करने का प्रयास किया गया पर वे आईएएस सर्विस मीट में व्यस्त होने की वजह से उपलब्ध नहीं हो सकीं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हर मंच से दावा करते रहते हैं कि उनकी प्रशासनिक मशीनरी ने प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य बना दिया है लेकिन इस राज्य में कई विभाग ऐसे हैं जहां शिक्षकों और अधिकारियों को वेतन के लिए दर दर की ठोकरें खानी पड़ रहीं हैं।

  • इ कुबेेर प्रणाली ने हितग्राही को रिजर्व बैंक से जोड़ा

    इ कुबेेर प्रणाली ने हितग्राही को रिजर्व बैंक से जोड़ा

    भोपाल, 16 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।वित्त विभाग के आई.एफ.एम.आई.एस. सॉफ्टवेयर में ई-कुबेर प्रणाली विकसित की गई है। इस प्रणाली से कोषालय अधिकारियों द्वारा लाभांवितों के बैंक खातों में सीधे आर.बी.आई के माध्यम से राशि हस्तांतरित की जा सकेगी। महापौर श्रीमती मालती राय ने वल्लभ भवन कोषालय में सोमवार को प्रणाली का शुभारंभ किया। इस दौरान महापौर ने प्रणाली से लाभांवितों को भुगतान भी किया। आयुक्त कोष एवं लेखा श्री ज्ञानेश्वर पाटिल, संचालक कोष एवं लेखा डॉ. राजीव सक्सेना, संभागीय संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा श्री आर.आर. अहिरवार उपस्थित रहे।

    वरिष्ठ कोषालय अधिकारी श्री प्रदीप ओमकार ने बताया कि पूर्व में कोषालय अधिकारी ई-फाईल भारतीय स्टेट बैंक की वेबसाईट पर अपलोड करते थे। इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक द्वारा लाभांवितों को भुगतान किया जाता था, जिससे कई बार एक-दो दिन का समय भी लग जाता था। अब ई-कुबेर प्रणाली से तत्काल भुगतान हो सकेगा और समय भी कम लगेगा।

    आयुक्त कोष एवं लेखा श्री पाटिल द्वारा आई.एफ.एम.आई.एस. सॉफ्टवेयर को अत्याधुनिक बनाने के लिये अनेक सुधार किए गए हैं। गत दिसंबर माह में आधार आधारित भुगतान प्रणाली से भुगतान प्रारंभ करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य बना। इसके बाद अब ई-कुबेर की नई सुविधा विकसित कर संबंधितों को सीधे आर.बी.आई से भुगतान की प्रक्रिया शुरू की गई है।

  • एमपी के उद्योगों में रुपया लगाकर धन उलीचने की होड़

    एमपी के उद्योगों में रुपया लगाकर धन उलीचने की होड़


    भोपाल, 09 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।सभी प्रकार के उद्योगों को फलने फूलने लायक माहौल बनाए जाने के बाद से देश विदेश के निवेशकों का रुझान मध्यप्रदेश की ओर तेजी से बढ़ता जा रहा है। यहां कोई भी कारोबार शुरु करना हो तो सरकारी अनुमतियों से लेकर उद्योग चलाने लायक सभी सुविधाएं एवं कच्चा माल आसानी से उपलब्ध हो जाता है। यही वजह है कि आज एमपी में औद्योगिक निवेश करके मुनाफा कमाने के लिए मध्यप्रदेश पूरे देश में अव्वल राज्य बन गया है।
    भारत के बीचों बीच हृदय स्थान पर यह राज्य क्षेत्रफल की दृष्टि से दूसरा सबसे बड़ा प्रदेश है ।शांतिपूर्ण माहौल की वजह से आज ये विकास के पथ- पर तेजी से बढ़ रहा है। राज्य प्राकृतिक संसाधनों और खनिजों से संपन्न है। राज्य में 95 से अधिक औद्योगिक क्षेत्र, 7 स्मार्ट सिटी और बेहतरीन यातायात व्यवस्था है।
    राज्य में खेती एवं प्रोसेसिंग क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है, जिससे औद्योगिक निवेश के लिए माहौल बन रहा है। इसके साथ ही फार्मास्यूटिकल ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग, टेक्सटाईल, लॉजिस्टिक, आईटी, अक्षय ऊर्जा, पर्यटन, शहरी विकास ऐसे क्षेत्र हैं, जहाँ निवेश की अपार संभावनाएँ हैं।
    कुशल मानव संसाधन और उचित मूल्य पर भूमि की उपलब्धता, राज्य में औद्योगिक वातावरण को तैयार करती है। सरकार की नीति और प्रशासन का सहयोग इस दिशा में मददगार साबित हो रहा है। मध्य प्रदेश में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए वह सभी कुछ है, जो निवेश के लिए आवश्यक है।
    देश के केंद्र में स्थित होने के कारण मध्यप्रदेश की सीमा देश के 5 राज्यों से लगती है और यह देश की तकरीबन 50 प्रतिशत आबादी को प्रवेश देता है। यह देश के किसी भी उपभोक्ता बाजार से अधिकतम 15 घंटे की दूरी पर स्थित है। भोपाल, इन्दौर, ग्वालियर, जबलपुर, खजुराहो में कुल 5 व्यावसायिक हवाई अड्डे हैं। 20 से अधिक रेल जंक्शन और राज्य में 550 से अधिक ट्रेनें संचालित होती है। मालनपुर, मंडीदीप, पवारखेड़ा, रतलाम, तिही, धन्नद में 6 इनलैंड कंटेनर डिपो हैं।
    मध्यप्रदेश देश के कई बड़े प्रोजेक्टस से जुड़ा हुआ है। दिल्ली-मुम्बई औद्योगिक कॉरिडोर के तहत मध्य प्रदेश के हिस्से में औद्योगिक क्षेत्र विक्रम उद्योगपुरी, उज्जैन आया है। नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के लिए साथ विकसित दिल्ली- नागपुर कॉरिडोर से आर्थिक गतिविधियों में आश्चर्यजनक रूप से उछाल आएगा। ग्वालियर से होकर जाने वाले ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (एन.एच.27) को उत्तर भारत में प्रवेश करने के लिए मध्यप्रदेश का गेटवे कहा जाता है। दिल्ली-मुम्बई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के प्रदेश से गुजरने के कारण प्रदेश की कनेक्टिविटी बढ़ गई है और औद्योगिक क्षेत्र में विकास हुआ है। रतलाम- दिल्ली-मुम्बई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का केंद्र है।
    मध्य प्रदेश सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण सेक्टर्स का चुनाव किया है, जो सरकार की 550 बिलियन अमरीकी डॉलर अर्थ-व्यवस्था की सोच को साकार करने में सहयोग करेंगे।
    ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग के क्षेत्र में 10 से अधिक उपकरण निर्माता और 200 से अधिक ऑटो कंपोनेंट निर्माता प्रदेश में कार्यरत हैं। इन्दौर और भोपाल में भारत के अग्रणी ऑटो क्लस्टर्स हैं। पीथमपुर में 4500 हेक्टेयर में विकसित औद्योगिक क्लस्टर 25 हजार से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा है। इंदौर में एशिया का सबसे लंबे और तेज गति के टेस्टिंग ट्रेक नेट्रेक्स की स्थापना की गई है।
    मध्यप्रदेश को भारत का फूड बास्केट कहा जाता है। यहाँ 45 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि योग्य भूमि है, जो 10 प्रमुख नदियों से जुड़ी है। इस वजह से जिसके कारण राज्य में उत्तम सिंचाई व्यवस्था है। प्रदेश उद्यनिकी फसलों, मसालों, संतरा, अदरक, लहसुन आदि के उत्पादन में अग्रणी है। मध्यप्रदेश दलहन, तिलहन एवं डेयरी उत्पाद में भी अग्रणी है। राज्य में 8 सरकारी फूड पार्क और 2 निजी मेगा फूड पार्क है। इन्दौर, ग्वालियर, जबलपुर में सरकारी कृषि कॉलेज संचालित हैं। प्रदेश को 7 बार भारत सरकार से कृषि क्षेत्र का प्रतिष्ठित “कृषि कर्मण” पुरस्कार मिलना प्रदेश की उन्नत कृषि का संकेत है।
    मध्यप्रदेश में टेक्सटाईल एवं गारमेंट सेक्टर में भी सतत् प्रगति हो रही है। राज्य 43 प्रतिशत भारतीय और 24 प्रतिशत वैश्विक जैविक रूई का उत्पादक है। यहाँ 60 से अधिक टेक्सटाईल यूनिट में 4 हजार से अधिक लूम्स और 2.5 मिलियन स्पिंडल्स संचालित हैं। राज्य के टेक्सटाईल सेक्टर में स्पिनिंग से लेकर बुनाई, गारमेंटिंग की सभी प्रक्रिया रूप से संचालित हैं। भारत सरकार की पीएलआई योजना में राज्य के टेक्सटाईल सेक्टर को 3513 करोड़ रुपए का निवेश प्राप्त हुआ है। गारमेंट यूनिट के प्लांट एवं मशीनरी में निवेश का 200 प्रतिशत तक का पॉलिसी इंसेंटिव दिया जाता है। प्रदेश में 200 से अधिक रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर एवं इन्दौर में अपैरल डिजाइनिंग सेंटर स्थित है। एनआईएफटी, एनआईडी भोपाल और आईआईआईटीडीएम जबलपुर जैसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर के फैशन डिजाइनिंग इंस्टीट्यूट मध्यप्रदेश के टेक्सटाईल उद्योग की रीढ़ हैं।
    फार्मास्यूटिकल सेक्टर में भी राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। कोरोना काल में यहाँ की दवाइयाँ विदेशों में निर्यात की गईं। इन्दौर, देवास, भोपाल, मंडीदीप, मालनपुर और पीथमपुर स्पेशल इकोनॉमिक जोन में फार्मा क्लस्टर है। यहाँ 300 फार्मा एवं मेडिकल यूनिट से 1 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। विक्रम उद्योगपुरी, उज्जैन में मेडिकल डिवाइस पार्क की स्थापना की गई है। साल 2021 में राज्य से 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक का फार्मा निर्यात किया गया। अमेरीका, ब्रिटेन, रूस, जर्मनी, ब्राजील, हॉलैंड सहित विश्व के 160 से अधिक देशों में राज्य में बनने वाली दवाइयाँ निर्यात की जा रही हैं। राज्य को एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त 73 फार्मेसी इंस्टीट्यूट से 9 हजार से अधिक स्किल्ड प्रोफेशनल प्रतिवर्ष प्राप्त हो रहे हैं। फार्मा सेक्टर के विकास और क्षमता को देखते हुए प्रदेश में फार्मा औद्योगिक पार्क की स्थापना का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।
    मध्यप्रदेश में लॉजिस्टिक एवं वेयरहाउसिंग के लिए आदर्श सड़कें एवं रेल कनेक्टिविटी है। देश के केंद्र में स्थित होने के कारण लॉजिस्टिक का खर्च बेहद कम है। देश की 50 प्रतिशत आबादी मध्यप्रदेश से जुड़ी हुई है। इससे विशाल उपभोक्ता बाजार पर नियंत्रण किया जा सकता है। प्रदेश में 40 एमएमटी की वेयरहाउसिंग और 13.2 एमएमटी की कोल्ड स्टोरेज क्षमता है। भारत सरकार के सहयोग से इंदौर और भोपाल में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क का निर्माण प्रस्तावित है। प्रदेश स्टील साइलो निर्माण के क्षेत्र में भी अग्रणी है। प्रदेश में लॉजिस्टिक एवं वेयरहाउसिंग इकाई / पार्क के लिए आकर्षक इंसेंटिव पॉलिसी है।
    मध्यप्रदेश अक्षय ऊर्जा के सृजन लिए आवश्यक प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। राज्य की अक्षय ऊर्जा की क्षमता साल 2012 की तुलना में 11 गुना बढ़ गई है। सर्वाधिक सोलर रेडिएशन के कारण राज्य सोलर पॉवर प्लांट स्थापित करने के लिए आदर्श स्थान है। तकनीकी रूप से मजबूत अक्षय ऊर्जा पॉलिसी बनाकर अक्षय ऊर्जा उपकरण निर्माण और इनोवेशन करने वाला पहला राज्य है। अक्षय ऊर्जा का मध्य प्रदेश की ऊर्जा क्षमता में 20 प्रतिशत का योगदान है। साँची को राज्य की पहली सोलर सिटी के रूप में विकसित किया गया है। विश्व का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पार्क (600 मेगावाट) ओंकारेश्वर में प्रस्तावित है। रीवा सोलर पॉवर प्रोजेक्ट को वर्ल्ड बैंक ग्रुप प्रेसीडेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
    मध्यप्रदेश रक्षा उपकरण निर्माण के लिए आदर्श राज्य है। यहाँ रेअर अर्थ मेटल प्रोसेसिंग, अनुसंधान एवं विकास ट्रेनिंग के लिए भोपाल में रेयर अर्थ एंड टाइटेनियम थीम प्रस्तावित है। राज्य में 4 पीएसयू जबलपुर और 1-1 पीएसयू कटनी और इटारसी में है। प्रदेश में भारत की पहली निजी क्षेत्र की लघु हथियार निर्माण यूनिट स्थापित की गई है। 5 कॉमर्शियल हवाई अड्डे तथा भोपाल और इंदौर के हवाई अड्डे एमआरओ गतिविधियों के लिए उपयुक्त हैं। यहाँ इंडस्ट्री एवं सिविल हवाई सेवा के लिए 26 एयर स्ट्रिप हैं। मेगा इन्वेस्टमेंट रीजन के साथ इंदौर के समीप ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रस्तावित है।
    राज्य में 150 से अधिक ईएसडीएम यूनिट और 220 से अधिक आईटी/आईटीईएस यूनिट मौजूद हैं। राज्य में 4 स्पेशल आईटी इकोनॉमिक जोन, 10 आईटी पार्क, 2 मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर मौजूद हैं। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर में हर तरह की सुविधाओं से युक्त बुनियादी ढाँचा है। राज्य में आईआईटी, आईआईएम, आईआईएसईआर, आईआईटीएम जैसे 330 से अधिक तकनीकी इंस्टीट्यूट स्किल्ड प्रोफेशनल को तैयार कर रहे हैं। राज्य में जीवन जीने के लिए बेहतरीन माहौल उपलब्ध है। इन्दौर और भोपाल देश के 10 सबसे स्वच्छ शहरों में शामिल हैं। उचित दर पर 24X7 निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुविधा है। यहाँ लो रिस्क सीस्मिक जोन के कारण डाटा सेंटर स्थापित करने के लिए आदर्श स्थिति है।
    मध्यप्रदेश की स्टार्ट अप पॉलिसी 2022 के तहत राज्य में स्टार्ट अप्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। उत्पाद आधारित स्टार्ट अप को विशेष सहायता दी जा रही है। हर तरह के आर्थिक सहयोग और जानकारी के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है। राज्य में 2500 से अधिक डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्ट अप्स और 45 से अधिक इनक्यूबेटर सेंटर स्थित है। महिला उद्यमियों द्वारा 1100 से अधिक स्टार्ट अप संचालित किये जा रहे हैं। राज्य में 26 लाख से अधिक एमएसएमई इकाईयाँ हैं जिनका राज्य की जीडीपी में 25.68 प्रतिशत योगदान है।

  • टेक्सटाईल एवं गारमेण्ट में नये क्षितिज पर पहुंचा मध्यप्रदेश बोले राजवर्धन दत्तीगांव

    टेक्सटाईल एवं गारमेण्ट में नये क्षितिज पर पहुंचा मध्यप्रदेश बोले राजवर्धन दत्तीगांव

    भोपाल, 08 जनवरी(बबीता मिश्रा) टेक्सटाईल एवं गारमेण्ट सेक्टर में मध्यप्रदेश नये कीर्तिमान रच रहा है। मध्यप्रदेश की समृद्ध प्रिंटिंग कला ने इसे नये आयाम दिये हैं। मध्यप्रदेश की बाघ, नंदना एवं बाटिक प्रिन्ट विश्व प्रसिद्ध हैं। इसमें ट्रेडिशनल के साथ मार्डन एवं फैशनेबल वस्त्र बनाये जा रहे हैं। यह बात औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री श्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने 17वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन के पहले दिन टेक्सटाईल एवं गारमेण्ट सत्र में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि महेश्वरी एवं चंदेरी मध्यप्रदेश की विश्व प्रसिद्ध साड़ियाँ हैं। प्रदेश में अनुकूल सरकारी नीति और सहायक प्रशासन के साथ कुशल संसाधनों की उपलब्धता, प्रतिस्पर्धी दरों पर प्रचुर भूमि की उपलब्धता व्यवसायों को राज्य में फलने-फूलने में मदद करेगा। सत्र में उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री भारत सिंह कुशवाह भी उपस्थित थे।

    मंत्री श्री दत्तीगांव ने कहा कि मध्यप्रदेश अद्वितीय मुद्रण तकनीकों का घर है, जिनमें ज्यादातर प्राकृतिक रंगों का उपयोग करके हाथ से ब्लॉक प्रिंटिंग, बाटिक प्रिंटिंग, बांधने और रंगाई की तकनीक शामिल हैं, जिन्हें बंधिनी के रूप में जाना जाता है। चंदेरी और महेश्वरी, रेशमी और सूती कपड़े मध्य प्रदेश की बुनाई की विशेषताएँ हैं।

    श्री दत्तीगांव ने कहा कि मध्यप्रदेश टेक्सटाईल और गारमेंट्स के क्षेत्र में देश के लिए ग्रोथ सेंटर है। कपड़ा और परिधान उद्योग दशकों से प्रदेश में महत्वपूर्ण महत्व रखता है। यह तेजी से फैलता और बढ़ता बाजार है और इसमें रोजगार की अतुलनीय संभावनाएँ हैं।

    मंत्री श्री दत्तीगांव ने बताया कि मध्यप्रदेश में जैविक कपास उत्पादन भारत का 43% और विश्व का 24% हिस्सा है। प्रदेश ने पिछले 3 वर्ष में जैविक कपास उत्पादन में 60% सीएजीआर देखा है। साठ से अधिक बड़ी कपड़ा मिलों, 4 हजार से अधिक करघों और 2.5 मिलियन स्पिंडल की उपस्थिति इस क्षेत्र में प्रदेश की ताकत को प्रदर्शित करती है। इंदौर, भोपाल, उज्जैन, धार, देवास, ग्वालियर, छिंदवाड़ा और जबलपुर प्रमुख कपड़ा हब के रूप में उभरे हैं। इंदौर में रेडीमेड गारमेण्ट उद्योग समूह में 1,200 से अधिक इकाइयाँ हैं। इंदौर एसईजेड में एक परिधान डिजाइनिंग केंद्र भी है। सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना में सबसे ज्यादा निवेश मध्यप्रदेश को मिला है।

    मंत्री श्री दत्तीगांव ने कहा कि राज्य में टेक्सटाईल और गारमेण्ट फोकस क्षेत्रों में से एक है और ये युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर प्रदान करते हैं। राज्य सरकार, कपड़ा और परिधान क्षेत्र के उद्योगों के लिए पूरी तरह से अनुकूल प्रोत्साहन पैकेज लेकर आई है। उद्योगों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता, संयंत्र और मशीनरी (पी एंड एम) में किए गए निवेश की मात्रा के समानुपाती होती है।

    ट्राइडेंट ग्रुप, रेमंड, आदित्य बिड़ला, बेस्ट कॉर्प, गोकलदास एक्सपोर्ट्स, प्रतिभा सिंटेक्स, एवीजीओएल, इंडोरामा, सागर ग्रुप, भास्कर, नाहर ग्रुप और वर्धमान ग्रुप कुछ ऐसे बड़े नाम हैं, जिन्होंने प्रदेश में निवेश किया है और अपनी इकाई स्थापित की है। राज्य सरकार की अनुकूल नीति, आसानी से उपलब्ध कुशल जनशक्ति और कम मानव-दिवस हानि की वजह से वे राज्य में बार-बार निवेश कर रहे हैं।

    अपर मुख्य सचिव कुटीर, ग्रामोद्योग, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार श्री मनु श्रीवास्तव ने कहा कि बहुत कम समय में ही प्रदेश ने तेजी से प्रगति की है। टेक्सटाईल एवं गारमेण्ट सेक्टर नई ऊँचाइयों को छू रहा है। सत्र में अपर मुख्य सचिव श्री अशोक वर्णवाल और प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विकास श्री गुलशन बामरा उपस्थित थे।

    एमएसएमई सचिव श्री पी. नरहरि ने टेक्सटाईल एवं गारमेण्ट क्षेत्र में प्रदेश की क्षमताओं एवं औद्योगिक नीति के संबंध में पॉवर प्वाइंट प्रेजेन्टेशन दिया। टेक्सटाईल एवं गारमेण्ट सेक्टर सत्र के पेनल में प्रतिभा सिन्टेक्स लि. के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री श्रेयस्कर चौधरी, नागल गारमेण्ट इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री प्रदीप अग्रवाल, एम.पी. टेक्सटाईल मिल एसोसिएशन एवं भास्कर इंडस्ट्रीज प्रा.लि. के एमडी श्री अखिलेश राठी, आई टोकरी के को-फाउंडर श्री नितिन पमनानी और उमंग श्रीधर डिजाइन्स की फाउंडर सुश्री उमंग श्रीधर ने अपने-अपने उद्योग की विकास गाथा को साझा किया एवं मध्यप्रदेश की इन्वेस्टर्स फ्रेण्डली नीति एवं क्षमताओं को सराहा। सत्र के अंत में पेनलिस्ट ने प्रवासी भारतीयों के सवालों का जवाब दिया।

  • सम्मान से शुरु हुआ सहकारिता के उप अंकेक्षकों का नया साल

    सम्मान से शुरु हुआ सहकारिता के उप अंकेक्षकों का नया साल


    भोपाल,7 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सहकारिता विभाग के प्रदेश भर से आए अंकेक्षकों ने आज राजधानी में नव वर्ष मिलन समारोह 2023 मनाया । श्यामला हिल्स स्थित होटल विंड एंड वेव्वज में आयोजित इस कार्यक्रम में विभाग के वरिष्ठ अफसरों ने भी शिरकत की और प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाईयां देने के लिए अंकेक्षकों को प्रोत्साहित किया। अफसरों ने कहा कि जनता की वित्तीय संस्थाओं को साफसुथरा बनाकर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाईयों तक पहुंचाया जा सकता है। इसके लिए अंकेक्षक बिना डरे जिस मुस्तैदी से कार्य कर रहे हैं वह सराहनीय है । उनका काम सरल बनाने के लिए सरकार की मंशा के अनुरूप सभी उपाय किए जाएंगे।
    मुख्य अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में शामिल सहकारिता विभाग के संयुक्त आयुक्त अभय खरे ने कहा कि आमतौर पर सरकारी बैठकों में अनौपचारिक वार्तालाप नहीं हो पाता है। गंभीर दायित्वों का निर्वहन करने वाले आडिटरों को चुनौतियों का सामना अकेले करना पड़ता है। इस तरह के सामाजिक कार्यक्रम अफसरों और कर्मचारियों में उमंग का संचार करते हैं जिसका लाभ प्रदेश के आम आदमी को मिलता है। आडिटरों को जो स्मृति चिन्ह दिए गए वे दैनंदिनी कामकाज के बीच उन्हें प्रकाश स्तंभ की तरह प्रोत्साहित करते रहेंगे।
    कार्यक्रम के मुख्य आयोजक उप अंकेक्षक मुकंद राव भैंसारे ने कहा कि प्रदेश भर की सहकारी संस्थाओं की लेखा पुस्तिकाओं की शुद्धता और सत्यता का परीक्षण करने का काम दुरूह होता है। अशुद्धियों और कपट का परीक्षण करना और उनकी रोकथाम के उपाय करने से आडिटरों को नाराजगी का सामना भी करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें शासन की ओर से प्रोत्साहन और संबल मिलता रहे तो सहकारिता आंदोलन को सफल बनाया जा सकता है। भारत सरकार की ओर से सहकारिता के क्षेत्र में जो तकनीकी सुधार किए गए हैं उनसे वित्तीय गड़बड़ियों को रोकना सरल होता जा रहा है।
    नववर्ष मिलन समारोह में अंकेक्षकों ने गीत संगीत की रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। कविता पाठ और चुटकुलों से उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच संवाद की नई कड़ी का सूत्रपात किया गया। महिला उप अंकेक्षकों ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी अधिकारियों को संवाद के नए धरातल पर ला दिया। कई अधिकारियों ने कहा कि वे रिटारमेंट की आयु तक पहुंच गए लेकिन कभी विभाग की ओर से उनकी पीठ नहीं थपथपाई गई। पहली बार स्मृति चिन्ह पाकर उन्हें अपनी जीविका सार्थक महसूस हो रही है।


    कार्यक्रम में संयुक्त आयुक्त सहकारिता बीएस शुक्ला,प्रबंध संचालक अपेक्स एवं संयुक्त आयुक्त पीएस तिवारी,सहकारिता विभाग के सचिव मनोज सिन्हा, संयुक्त आयुक्त अनिल वर्मा, उपायुक्त सहकारिता एवं सचिव मार्कफेड यतीश त्रिपाठी, उपायुक्त शिवेन्द्र पांडेय, उपायुक्त आरएस विश्वकर्मा, उपायुक्त श्रीमती अनिता उइके, श्रीमती श्वेता रावत, सहायक आयुक्त संजय सिंह, मप्र कार्यपालिक तृतीय वर्ग सहकारिता विभाग कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष संजय सिंह, शोधकर्ता अविनाश सिंह समेत पूरे प्रदेश के आए उप अंकेक्षकों ने आयोजन में हिस्सा लिया। उप अंकेक्षक वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। श्री भैंसारे ने आयोजन को सफल बनाने वाली टीम के सदस्यों श्री रामचंद अहिरवार, श्री विनोद जैन, एवं अन्य अंकेक्षकों व उप अंकेक्षकों के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन बार बार होंगे और राज्य के विकास में अपना योगदान देने वाले उप अंकेक्षकों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।