Month: August 2022

  • जैविक खेती की ऊंचाईयां छू रहे मध्यप्रदेश के किसान

    जैविक खेती की ऊंचाईयां छू रहे मध्यप्रदेश के किसान

    अवनीश सोमकुंवर
    भोपाल,31 अगस्त (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।जैविक खेती से स्वस्थ भारत बनाने का मिशन लेकर चल रहे खंडवा जिले के 500 छोटे किसानों ने पूरे देश का ध्यान आकृष्ट किया है। ये किसान 918 हेक्टेयर में जैविक उत्पाद ले रहे हैं। इनके उत्पादों का “जैविक परिवार” ब्रांड हर घर पहुँच रहा है। सतपुड़ा जैविक प्रोडयूसर कंपनी से जुड़े किसान चाहते हैं कि देश के नागरिकों को शुद्ध अनाज, फल-सब्जी मिले। वे दवाओं से दूर रहे और हमारी धरती विषमुक्त रहे।

    कंपनी से जुड़े झिरन्या तहसील के बोदरानिया गाँव के दारा सिंह धार्वे मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की सोच से पूरी तरह सहमत हैं कि जैविक खेती धरती और मनुष्य को बचाने का सबसे ठोस उपाय है। दारा सिंह धार्वे को जैविक गेहूँ के अच्छे दाम मिल रहे हैं। इस साल 2500 रूपये प्रति क्विंटल तक मिल जायेंगे। वे कहते हैं – “जैविक खेती से अब ज्यादा से ज्यादा किसान जुड़ना चाहते हैं। रासायनिक खाद से खेती की लागत भी बढ़ जाती है और स्वास्थ्य को भी नुकसान होता है।

    कंपनी के सीईओ श्री विशाल शुक्ला बताते हैं कि कंपनी को बने तीसरा साल चल रहा है। इतने कम समय में कंपनी के जैविक उत्पादों ने मार्केट में अच्छी पहचान बना ली है। “जैविक परिवार” ब्रांड के कारण खेत और उपभोक्ता के बीज मजबूत संबंध बन गया है। वे बताते हैं कि अगले तीन सालों में 65 शहरों में सवा 3 लाख जैविक उत्पादों के उपभोक्ता जुड़ जायेंगे। जोमेटो, स्वीगी, निंबस, ई-कार्ट, मीशो, गाट इट जैसे डिलीवरी पार्टनर्स हमसे जुड़ गये हैं और इंदौर में काम भी शुरू कर दिया गया है। इस प्रकार आधुनिक मार्केटिंग और टेक्नालाजी की मदद से जैविक उत्पादों की पहुँच बढ़ाने की कोशिशें जारी है। “जैविक परिवार” को वितरक मिल रहे हैं। इसलिये ग्राहक सेवा विभाग हमने खोला है और उनके संपर्क में सेल्स टीम रहती है।

    श्री शुक्ला कहते हैं कि – “किसान उत्पाद संगठनों को एक साथ लाकर खेती के क्षेत्र में आर्थिक उद्यमिता की शुरूआत करने का जो सपना मुख्यमंत्री जी ने देखा है उसे साकार करने में हम हमेशा आगे रहेंगे।” वे कहते हैं – “कि मुख्यमंत्री की सोच प्रगतिशील है। वे दूरदृष्टा की तरह सोचते हैं।”

    सतपुड़ा जैविक प्रोड्यूसर कंपनी अस्तित्व में आने के संबंध में श्री शुक्ला बताते हैं कि- “शुरूआत गाँव-गाँव जाकर चौपाल बैठकें करने से हुई। छोटी-छोटी खेती करने वाले किसानों को एकजुट करना जरूरी था। एक साथ मिल कर खेती करने और मार्केटिंग करने के फायदों पर चर्चाओं के दौर शुरू हुए। शुरूआत दस किसानों से हुई। शुरूआत में गेहूँ, सोयाबीन और प्याज के लिए आपस में समूह बनाये। इन समूहों से मिलकर समितियाँ बनीं और इस तरह धीरे-धीरे किसान जुड़ते गये और यह सिलसिला जारी है। इसी बीच कोरोना काल आ गया लेकिन किसानों को परेशानी नहीं हुई। गेहूँ की खरीदी जारी रही। उनका जैविक उत्पाद सब्जी सीधे ग्राहकों के घर पहुँचने लगा।

    कंपनी से जुड़ने का कारण बताते हुए सिंगोट गांव के किसान श्री राजेश टिरोले कहते हैं कि – “एक साथ मिलकर एक ब्रांड के नाम से उत्पाद मार्केट में आने से दाम बढ़ते हैं और सभी किसानों को फायदा होता है।” श्री राजेश दो हेक्टेयर के छोटे किसान हैं। वे गेहूँ और सब्जियाँ लगाते हैं। शुद्ध रूप से जैविक खाद का उपयोग करते हैं। वे बताते हैं कि – “कंपनी में जुड़ने से जैविक सब्जियों के अच्छे दाम मिलने लगे हैं। पहले बहुत कम दाम में सब्जियाँ बिकती थी। अब जैविक परिवार ब्रांड के माध्यम से अच्छे दाम घर बैठे मिल रहे हैं। कंपनी के कारण हमारा सीधे ग्राहक से वास्ता पड़ा है। हमें अपना रेट तय करने की छूट है। कंपनी के जरिए पूरा माल बिक जाता है और हमें अपनी मेहनत का दाम मिल जाता है।”

    पुनासा तहसील के राजपुरागांव में श्री मनोज पांडे तीन एकड़ में जैविक पद्धति से गेहूँ और सब्जियाँ उगा रहे हैं। वे बताते हैं कि – “जैविक उत्पादों का बाजार अब बढ़ रहा है। हमारा जैविक गेहूँ भी अच्छे दाम पर बिक रहा है। जैविक सब्जियाँ भी पसंद की जा रही हैं। अकेले खेती करने में और कंपनी के साथ मिलकर खेती करने में मुनाफा होने के साथ ही मार्केट तक भी सीधी पहुँच बढ़ गई है। उनके अनुसार यह कंपनी एक ऐसा प्लेटफार्म है जो एक मिशन के साथ जैविक उत्पादों को आगे बढ़ा रहा है। उपभोक्ताओं और उत्पादक किसानों के बीच सेतु का काम कर रहा है। उपभोक्ताओं को शुद्ध जैविक अनाज और सब्जियाँ मिलते हैं और हमें अपनी कीमत। श्री पांडे कहते हैं कि जहर मुक्त खेती और दवा मुक्त दिनचर्या ही हमारा मिशन है। रसायन मिले खाने से न तो शरीर स्वस्थ होगा और न ही मन को खुशी मिलेगी।”

    जैविक परिवार ब्रांड की चुनौतियों के बारे में चिंता जाहिर करते हुए श्री पांडे कहते हैं कि – “जानकारी और ज्ञान के अभाव में असली-नकली की पहचान नहीं हो पाती। इसलिए नकली माल बिक जाता है और असली की पहचान नहीं हो पाती। इसका समाधन बताते हुए वे कहते हैं कि जैविक उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ाना ही एक मात्र उपाय है।”

    श्री शुक्ला बताते हैं कि – “कंपनी ने अपनी गुणवत्ता के मानदण्ड बनाये हैं। हम गुणवत्ता की नीति पर काम करते हैं। कृषि विशेषज्ञों को इसमें शामिल किया है। राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम में तय किये गये गुणवत्ता मानदंडों का पूरा ख्याल रखा जाता है।”

    “जैविक परिवार” अपने से जुड़े किसान सदस्यों का पूरा ध्यान रखता है। उन्हें उम्दा किस्म के बीज देता है। जैविक कीट नियंत्रण से लेकर कोल्ड स्टोरेज की सुविधा भी दी जाती है। खेत से बाजार और ग्राहकों तक उत्पाद पहुँचाने की सुविधा भी उपलब्ध है। कंपनी को खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने और छोटे किसानों की जिंदगी में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिये नाबार्ड ने सम्मानित भी किया है।

  • जीवन को अपडेट और रीसेट करने का महापर्व पर्यूषण

    जीवन को अपडेट और रीसेट करने का महापर्व पर्यूषण

    -डॉ. सुनील जैन संचय

    पर्यूषण यानि दसलक्षण पर्व का जैनधर्म में बहुत ही महत्व है। यह पर्व हमारे जीवन को परिवर्तित करने का कारण बन सकता है। यह ऐसा पर्व है जो हमारी आत्मा की कालिमा को धोने का काम करता है। दिगम्बर एवं श्वेतांबर जैन दोनों में यह पर्व भारी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।वास्तव में ये वह अभ्यास पाठशाला है जिसमें हम अपने विचारों को आधुनिक जीवन के साथ अपडेट और मूल जीवनचर्या के साथ रीसेट कर सकते हैं।

    दिगम्बर, श्वेताम्बर दोनों सम्प्रदाय इसे एक समान तौर पर स्वीकार करते हैं और पूरी वैचारिकता के साथ मनाते हैं।विशेष यह है कि श्वेताम्बर समाज भाद्रपद कृष्णा त्रयोदशी से भाद्रपद शुक्ला पंचमी तक सिर्फ 8 दिन का मनाते हैं। जबकि दिगम्बर समाज में 10 दिन का प्रचलन है। यह एक मात्र आत्मशुद्धि और आत्म जागरण का पर्व है।इस वर्ष यह महापर्व श्वेतांबर परंपरा में 24 से 31 अगस्त एवं दिगम्बर जैन परंपरा में 31 अगस्त से 9 सितम्बर 2022 तक विधि विधान, त्याग-तपस्या, साधना के साथ मनाया जा रहा है।

    आत्मा के दस मूलभूत गुणों की आराधना :
    इस पर्व में आत्मा के दस मूलभूत गुणों की आराधना की जाती है। इनका सीधा सम्बंध आत्मा के कोमल परिणामों से है। इस पर्व का वैशिष्ट्य है कि इसका सम्बन्ध किसी व्यक्ति विशेष से न होकर आत्मा के गुणों से है। इन गुणों में से एक गुण की भी परिपूर्णता हो जाय तो मोक्ष तत्व की उपलब्धि होने में किंचित् भी संदेह नहीं रह जाता है।
    जैन धर्म में अहिंसा एवं आत्‍मा की शुद्धि को सबसे महत्‍वपूर्ण स्‍थान दिया जाता है। प्रत्‍येक समय हमारे द्वारा किये गये अच्‍छे या बुरे कार्यों से कर्म बंध होता है, जिनका फल हमें अवश्‍य भोगना पड़ता है। शुभ कर्म जीवन व आत्‍मा को उच्‍च स्‍थान तक ले जाता है, वही अशुभ कर्मों से हमारी आत्‍मा मलिन होती जाती है।इसलिए जीवन को सार्थक बनाने में ये सभी दस गुण बहुत कारगर साबित होते हैं।

    दस दिन तक प्रत्येक दिन एक एक धर्म की आराधना :
    पर्युषण पर्व के दौरान विभिन्‍न धार्मिक क्रियाओं से आत्‍मशुद्धि की जाती व मोक्षमार्ग को प्रशस्त करने का प्रयास किया जाता है, ताकि जनम-मरण के चक्र से मुक्ति पायी जा सके। जब तक अशुभ कर्मों का बंधन नहीं छुटेगा, तब तक आत्मा के सच्‍चे स्‍वरूप को हम नहीं पा सकते हैं।

    इस पर्व के दौरान दस धर्मों- उत्‍तम क्षमा, उत्‍तम मार्दव, उत्‍तम आर्जव, उत्‍तम शौच, उत्‍तम सत्‍य, उत्‍तम संयम, उत्‍तम तप, उत्‍तम त्‍याग, उत्‍तम आकिंचन एवं उत्‍तम ब्रह्मचर्य को धारण किया जाता है। समाज के सभी पुरूष, महिलाएं एवं बच्‍चे पर्युषण पर्व को पूर्ण निष्‍ठा के साथ मनाते है। यह पर्व जीवन में नया परिवर्तन लाता है। दस दिवसीय यह पावन पर्व पापों और कषायों को रग -रग से विसर्जन करने का संदेश देता है।

    आत्म जागरण का संदेश :
    संपूर्ण संसार में यही एक ऐसा उत्सव या पर्व है जिसमें आत्मरत होकर व्यक्ति आत्मार्थी बनता है व अलौकिक, आध्यात्मिक आनंद के शिखर पर आरोहण करता हुआ मोक्षगामी होने का सद्प्रयास करता है। पर्युषण आत्म जागरण का संदेश देता है और हमारी सोई हुई आत्मा को जगाता है। इस जाग्रत अवस्था से हमें आत्मा को पहचानने की शक्ति देता है।

    यह पर्व जीवमात्र को क्रोध, मान,माया,लोभ, ईर्ष्या, द्वेष, असंयम आदि विकारी भावों से मुक्त होने की प्रेरणा देता है। हमारे विकार या खोटे भाव ही हमारे दु:ख का कारण हैं और ये भाव वाह्य पदार्थों या व्यक्तियों के संसर्ग के निमित्त से उत्पन्न होते हैं। आसक्ति—रहित आत्मावलोकन करने वाला प्राणी ही इनसे बच पाता है। इस पर्व में इसी आत्म दर्शन की साधना की जाती है। यह एक ऐसा अभिनव पर्व है कि जिसमें अपने ही भीतर छिपे सद्गुणों को विकसित करने का पुरुषार्थ किया जाता है। अपने व्यक्तित्व को समुन्नत बनाने का यह पर्व एक सर्वोत्तम माध्यम है।

    इस दौरान व्यक्ति की संपूर्ण शक्तियां जग जाती हैं। पर्युषण का अर्थ है – ‘ परि ‘ यानी चारों ओर से , ‘ उषण ‘ यानी धर्म की आराधना। वर्ष भर के सांसारिक क्रिया – कलापों के कारण उसमें जो दोष चिपक गया है , उसे दूर करने का प्रयास इस दौरान किया जाता है। शरीर के पोषण में तो हम पूरा वर्ष व्यतीत कर देते हैं। पर पर्व के इन दिनों में आत्म के पोषण के लिए व्रत, नियम, त्याग, संयम को अपनाया जाता है।

    विकृति का विनाश और विशुद्धि का विकास :
    सांसारिक मोह-माया से दूर मंदिरों में भगवान की पूजा-अर्चना, अभिषेक, आरती, जाप एवं गुरूओं के समागम में अधिक से अधिक समय को व्‍यतीत किया जाता है एवं अपनी इंद्रियों को वश में कर विजय प्राप्‍त करने का प्रयास करते हैं।
    दसलक्षण धर्म (पर्यूषण पर्व) के फल के बारे में आचार्य कार्तिकेय स्वामी ने लिखा है-

    एदे दहप्पयारा पाव कम्मस्स णासिया भणिया।
    पुण्णस्स संजणाया पर पुण्णत्थं ण कायव्वा।।

    यह धर्म के दशभेद पाप कर्म को नाश करने वाले और पुण्य का प्रार्दुभाव करने वाले हैं। इसे इस रूप में भी कहा जा सकता है कि यह धर्म पुण्य के पालक और पाप के प्रक्षालक हैें।

    इस पर्व में सभी अपने को अधिक से अधिक शुद्ध एवं पवित्र करने का प्रयास करते है। प्रेम, क्षमा और सच्ची मैत्री के व्यवहार का संकल्प लिया जाता है। खान-पान की शुद्धि एवं आचार-व्यवहार की शालीनता को जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाये रखने के लिये मन को मजबूत किया जाता है। विकृति का विनाश और विशुद्धि का विकास करना ही इस पर्व का ध्येय है। पर्व पापों और कषायों को रग -रग से विसर्जन करने का संदेश देता है।

  • खेती का नया सहकारी मॉडल लागू होगाःअमित शाह

    खेती का नया सहकारी मॉडल लागू होगाःअमित शाह

    भोपाल,22 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि भारत में शीघ्र ही कॉरपोरेट खेती के स्थान पर कोऑपरेटिव खेती होगी। केन्द्र सरकार शीघ्र ही नई सहकारिता नीति ला रही है। देश में सहकारिता विश्वविद्यालय खोला जायेगा। पैक्स (प्राथमिक कृषि सहकारी समिति) को बहुउद्देशीय बनाया जायेगा। मार्केटिंग के क्षेत्र में भारत सरकार आगामी एक माह में एक्सपोर्ट हाउस बनाने जा रही है। अमूल कुछ ही समय में देश में मिट्टी का परीक्षण एवं किसानों के उत्पाद का परीक्षण कर उन्हें जैविक प्रमाण-पत्र ‘अमूल’ के नाम से देगा। इससे किसानों को अपनी फसलों का अधिक मूल्य मिलेगा और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा।
    केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज भोपाल के होटल ताज में नाफेड द्वारा आयोजित “कृषि विपणन में सहकारी संस्थाओं की भूमिका” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल हुए। उन्होंने “एक जिला-एक उत्पाद योजना” में मध्यप्रदेश के 11 जिलों के 11 उत्पादों के साथ देश के 6 अन्य राज्यों के उत्पादों का भी प्रमोशन किया। श्री शाह ने “सहकार से समृद्धि-51 कहानियाँ” पुस्तक एवं “सहकारी पुस्तक परिपत्र भाग-1 एवं 2” का विमोचन भी किया।
    केन्द्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को बहुउद्देशीय बनाने के उद्देश्य से एक माह में मॉडल एक्ट लेकर आयेंगे, जो इन्हें मजबूत एवं बहुआयामी बनायेगा। हर पैक्स को एफपीओ बनने की योग्यता प्राप्त हो जायेगी। वे मार्केटिंग के साथ ही भण्डारण, परिवहन सहित 22 प्रकार की गतिविधियाँ कर सकेंगी। पैक्स से अपेक्स तक मजबूत मार्केटिंग व्यवस्था होगी।
    केन्द्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में किसानों की आय को दोगुना करने के सराहनीय प्रयास हुए हैं। भारत दलहन एवं तिलहन को छोड़ कर अन्य उत्पादों में आत्म-निर्भर हो चुका है। किसानों को अच्छा एमएसपी मूल्य दिलवाया जा रहा है। ई-नाम पोर्टल से 2 करोड़ रूपये से अधिक का व्यापार हो चुका है। हमारा कृषि निर्यात 50 विलियन डालर को पार कर चुका है। अब सहकारी संस्थाएँ जेम पोर्टल से न केवल खरीदी कर सकेंगी, बल्कि उत्पादों को बेच भी सकेंगी।
    केन्द्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि नाफेड किसान और सरकार के बीच में मजबूत कड़ी है, जो सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने का सशक्त माध्यम है। यह विपणन का शीर्ष संगठन है। नाफेड अपने कार्य को विस्तृत करे। ऐसी व्यवस्था हो कि निजी कम्पनियाँ भी नाफेड से उत्पाद खरीदें। मार्केटिंग की व्यवस्था से नाफेड आत्म-निर्भर बने।
    मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “सबको साख-सबका विकास” मध्यप्रदेश में सहकारिता का मूल मंत्र है। इस दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। सहकारिता भारत की मिट्टी एवं जड़ों में है। सर्वे भवन्तु सुखिन:, वसुधैव कुटुम्बकम यह सभी हमारे मंत्र है, जो सहकार की भावना को व्यक्त करते हैं। भारत सहकारिता के इतिहास में 6 जुलाई का दिन स्वर्ण अक्षर में लिखा जायेगा। इस दिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में पृथक सहकारिता मंत्रालय बनाया और श्री अमित शाह को इसकी बागडोर सौंपी। श्री अमित शाह ने सहकारिता को भारत में नई दिशा एवं गति दी है। उनके शब्दा कोष में असंभव शब्द नहीं है।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में सहकारिता का इतिहास 118 वर्ष पुराना है। वर्ष 2012-13 से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण दिया जा रहा है। श्री अमित शाह ने फैसला किया है कि शीघ्र ही 3 लाख रूपये तक अल्पावधि फसल ऋण पर डेढ़ प्रतिशत अधिक ब्याज अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए हम उनके आभारी हैं। सरकार नई सहकारिता नीति बनाने जा रही है। प्रदेश में सहकारिता को स्व-रोजगार दिलाने का साधन बनाया जा रहा है। परम्परागत कारीगरों को सहकारी समिति के रूप में संगठित कर उनका कौशल संवर्धन किया जा रहा है। सहकारिता कानूनों में बदलाव एवं सरलीकरण किया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के भारत को 5 ट्रिलियन डालर की अर्थ-व्यवस्था बनाने के संकल्प को पूरा करने में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है।
    केंद्रीय कृषि और किसान-कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि भारत के संस्कार में सहकार शामिल है। जितना सहकार बढ़ेगा उतनी ही देश प्रगति करेगा औरदेश की ताकत बढ़ेगी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत में सहकारिता को नए आयाम दिए हैं। उन्होंने भारत में पृथक सहकारिता मंत्रालय का गठन किया औरनाफेड को कर्ज से बाहर निकाला। इफको एवं अमूल दुनिया के सबसे बड़े सहकारिता संगठन है। सहकारिता से जुड़ कर हम स्वयं एवं भारत को आत्म-निर्भर बनाये।
    केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि और किसान-कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने दीप जला कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। नाफेड के अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह ने स्वागत भाषण दिया। केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा, म.प्र. केकृषि मंत्री कमल पटेल, सहकारिता मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया, इफको के अध्यक्ष दिलीप सिंघानी, अध्यक्ष कृभको डॉ. चंद्रपाल सिंह सहित जन-प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में सहकारिता से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे।

  • सहकारिता से सफल हो रही जैविक खेतीःहेमलता तिवारी

    सहकारिता से सफल हो रही जैविक खेतीःहेमलता तिवारी

    राष्ट्रीय उत्कृष्टता नवाचार समिट में हेमलता तिवारी को मिला साहित्य श्री सम्मान

    देहरादून,19 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। उत्तराखंड के पर्यटन स्थल देहरादून की अभ्युदय वातस्ल्यम संस्था की ओर से आयोजित समागम 2022 में देश भर से आए विद्वानों ने भारत को विश्वगुरु बनाने के सूत्र बताए हैं। संस्था की ओर से इन विद्वानों को सम्मान देकर अलंकृत भी किया गया है। छत्तीसगढ़ के रायपुर की विदुषी डॉ.हेमलता तिवारी को संस्था की ओर से साहित्य श्री सम्मान से अलंकृत किया गया।
    स्वाधीनता दिवस की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित अखिल भारतीय शैक्षिक नवाचार, प्राकृतिक-जैविक कृषि, शिल्प उद्यमी, पर्यावरणीय पर्यटन, आध्यात्मिक विज्ञान समागम 2022 में अभ्युदय वात्सल्यम की अध्यक्ष और निदेशक डॉ.श्रीमती गार्गी मिश्रा ने बताया कि उनकी संस्था ने देश भर में नवाचारों के लिए योग्य प्रतिभागियों को चयनित किया है। संस्था की ओर से भारतीय संस्कृति में रचे बसे सामाजिक अनुसंधान कर्ताओं को प्रोत्साहित किया जाता है।
    उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय उत्कृष्ट नवाचार समिट में डॉ.हेमलता तिवारी को उत्कृष्ट साहित्य रचना काऊंसिलिंग, वोकेशनल ट्रेनर एवं व्यक्तित्व विकास के माध्यम से समाज का मार्गदर्शन करने के अनुकरणीय नवाचारी योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। उन्होंने बताया कि विश्व कल्याण के लिए संकल्पित अभ्युदय वात्सल्यम परिवार वसुधैव कुटुंबकम की भावना से समाज में शिक्षा, सामाजिक, सांस्कृतिक, लोक कल्याण, एवं पर्यावरण आदि विषयों पर सिर्फ चिंतन ही नहीं कुछ प्रायोगिक कार्य भी कर रहे व्यक्तियों को सम्मानित करके गौरव महसूस कर रहा है। हम आशा करते हैं कि हमारी संस्था की ओर से चयनित ये विशेष व्यक्तित्व के धनी लोग भारतीय समाज को नए आयाम प्रदान करते रहेंगे। इन प्रतिभाशाली व्यक्तित्वों की ओर से किए जा रहे विशिष्ट कार्यऔर कर्तव्य के प्रति लगन शीलता देखकर देश की नई पीढ़ी प्रेरणा पाएगी और अनुकरण करके देश को बुलंदियों पर ले जाएगी।


    संस्था की ओर से डॉ.हेमलता तिवारी को अभ्युदय श्री सम्मान और प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया गया। डॉ.तिवारी ने इस अवसर पर प्रेस से चर्चा करते हुए कहा कि भारत सरकार ने कृषि को सफल बनाने के लिए जो सुधार कार्य किए हैं वे सराहनीय हैं। मध्यप्रदेश के कई किसान अब बिखरी हुई कृषि परिस्थितियों पर विजय पाने के लिए सहकारिता के माध्यम से सामूहिक खेती कर रहे हैं। उनकी खेती संसाधनों और तकनीक के आधुनिक प्रयोग से सरल होती जा रही है। उन्होंने बताया कि छोटी जोत वाले किसानों के लिए कृषि का मशीनीकरण केवल ख्वाब रहता है। इस सपने को साकार करने के लिए किसानों ने कंपनी बनाकर खेती को संयुक्त करना शुरु कर दिया है। इससे उन्हें वे सभी संसाधन आसानी से मिलने लगे हैं जिन्हें छोटे किसानों के लिए दुरूह समझा जाता था।


    उन्होंने बताया कि ठेका खेती की अवधारणा से डरे किसानों ने अब आपस में गठबंधन करके कंपनियां बनाई हैं। येकंपनियां किसानों को बीज खाद, पानी,ट्रेक्टर एवं अन्य मशीनें मुहैया कराने के साथ साथ अनाज की मार्केटिंग में भी मदद कर रहीं हैं। देश भर में इसी तरह से खेती के स्वरूप को बदलकर खाद्यान्न की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं। यही नहीं जैविक खेती से उपजे खाद्यान्न से लोगों को कई बीमारियों से भी बचाया जा सकेगा। एक नए हिंदुस्तान की दिशा में इन प्रयासों का विस्तार जरूरी हो गया है।

  • स्वच्छता में अव्वल भारत नगर के लोगों ने उल्लास से मनाया स्वाधीनता दिवस

    स्वच्छता में अव्वल भारत नगर के लोगों ने उल्लास से मनाया स्वाधीनता दिवस


    भोपाल,15 अगस्त( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान में बढ़ चढ़कर भागीदारी निभाने वाले राजधानी के भारत नगर के वासियों ने स्वाधीनता दिवस उल्लास के साथ मनाया । स्वाधीनता के अमृत महोत्सव पर 13 अगस्त 15 अगस्त तक विभिन्न कार्यक्रमों की श्रंखला चलाई गई। तिरंगा अभियान से ही ये उत्साह परवान चढ़ने लगा था और भारी वर्षा के बीच झंडावंदन करके रहवासियों ने विकसित भारत के लक्ष्य के प्रति अपना संकल्प दुहराया।
    स्वच्छता के मापदंडों पर खरा उतरने वाले भारत नगर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। भोपाल नगर पालिक निगम क्षेत्र में अव्वल आने वाली ये एकमात्र रहवासी समिति है जिसका संचालन राज्य का सहकारिता विभाग कर रहा है। विभाग की ओर से नियुक्त प्रशासक मुकुंद राव भैंसारे के आव्हान पर रहवासियों ने विभिन्न चरणों में स्वाधीनता दिवस के आयोजन किए थे। इस अवसर पर श्री भैंसारे ने ध्वजारोहण करके मुख्य समारोह का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन श्री एम.के.सचदेव ने किया। आजादी की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित रंगारंग कार्यक्रम में अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सभी वक्ताओं ने भारत को प्रगति की नई ऊंचाईयों तक ले जाने का संकल्प दुहराया।

    स्वाधीनता के अमृत महोत्सव में भागीदारी निभाने वाले युवाओं ने झंडावंदन के साथ सांस्कृतिक आयोजन में भी भाग लिया।


    ध्वजारोहण समारोह में भारत नगर के सभी गणमान्य नागरिकों ने भारी वर्षा के बावजूद अपनी भागीदारी निभाई। सर्वश्री सुदर्शन राजपूत, के.सी.शर्मा, श्री नामदेव,श्री जेपी सिंह,श्री शेडगै जी,सुश्री दिव्या अत्री ,सुश्री पल्लवी शर्मा,सुश्री सुनीता विश्वकर्मा, सुश्री सुषमा चौकसे, सुश्री अल्पना ,सुश्री अनुजा मजूमदार,श्री महेन्द्र कोकाटे,श्री गोपेश तारे, श्री अनिल त्यागी, श्री शैलेन्द्र गुजरावत, श्री एस.के.चौकसे, समेत बड़ी संख्या में बच्चे और युवाजन भी उपस्थित थे।

    भारत नगर की मातृशक्ति ने स्वाधीनता दिवस समारोह को सतरंगी आभा से सराबोर कर दिया।


    स्मरण रहे कि भरत नगर सोसायटी को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वच्छता के पैमाने पर द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया है। एक साल में दो बार इस सोसायटी को स्वच्छता की दिशा में उल्लेखनीय योगदान के लिए पुरस्कृत किया गया है।राजधानी में 475 हाउसिंग गृह निर्माण समितियां और 125 रहवासी समितियां हैं। इनके बीच भारत नगर की गृह निर्माण समिति का संचालन कुशलता पूर्वक किया जा रहा है।समिति की ओर से स्वाधीनता दिवस समारोह में लगभग 45 रहवासियों को स्वच्छता प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। समारोह में शामिल युवाओं और बच्चों को मिठाई का वितरण भी किया गया।

  • …..और कांग्रेस ने विभाजन स्वीकारा

    …..और कांग्रेस ने विभाजन स्वीकारा

    विभाजन की चुभन / 3

    • प्रशांत पोळ

    अपने देश में चालीस का दशक अत्यंत उथल-पुथल वाला रहा. दूसरा विश्व युध्द चल रहा था. ब्रिटिश सरकार के विरोध में जनमत तीव्र हो रहा था. विश्व युध्द समाप्त होने के पश्चात् भारत को स्वतंत्रता दी जाएगी ऐसी ब्रिटिश सरकार ने घोषणा भी की थी. किन्तु आजादी जब सामने दिखने लगी, तो मुस्लिम लीग ने अपने आक्रमण तेज कर दिए. देश में अनेक स्थानों पर दंगे भड़के. दंगों के माध्यम से खौफ निर्माण करने का काम मुस्लिम लीग कर रही थी.

    मुस्लिम लीग पाकिस्तान की मांग कर रही थी. प्रारंभ में तो कांग्रेस भी बंटवारे के विरोध में थी. गांधीजी ने ऐतिहासिक भाषण दिया था, जिसमे उन्होने कहा था की, ‘पहले मेरे शरीर के टुकडे होंगे, फिर इस देश का विभाजन होगा..!’

    इस देश के करोड़ो लोगों ने गांधीजी को अपना नेता माना था. ‘महात्मा’ की पदवी से नवाजा था. उन्हें पूरा विश्वास था गांधीजी पर. लेकिन ४ जून १९४७ को, दिल्ली की प्रार्थना सभा में गांधीजी ने यह विश्वास तोड़ दिया. उन्होंने, कांग्रेस पार्टी विभाजन का समर्थन क्यों कर रही हैं, इसलिए तर्क दिए… गांधीजी ने बंटवारे का समर्थन किया..!

    विभाजन नहीं होगा, ऐसा मानने वाले करोडो लोग इस घटना से टूट गए. विशेषतः सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर यह बहुत बड़ा आघात था. वे विभाजन के लिए तैयार नहीं थे. उन्होंने विस्थापन के बारे में सोचा ही नहीं था. गांधीजी फिर भी कह रहे थे की, ‘प्रस्तावित पाकिस्तान से हिन्दुओं को विस्थापित होने की कोई आवश्यकता नहीं हैं..’

    लेकिन डॉ. बाबासाहब आंबेडकर ज्यादा व्यावहारिक थे. गाधीजी, नेहरु और जीना की नीतियों का उन्होंने पूरजोर विरोध किया था. अपने पुस्तक ‘थॉट ऑन पाकिस्तान’ में उन्होंने लिखा हैं – “श्री गांधी अस्पृश्यों को तो कोई भी राजनीतिक लाभ देने का विरोध करते हैं, लेकिन मुसलमानों के पक्ष में एक कोरे चेक पर हस्ताक्षर करने तैयार बैठे हैं.” आंबेडकर जी की मूल चिंता थी की ‘आखिर कांग्रेस द्वारा इतना पालने पोसने के बाद भी मुसलमान अलग देश की मांग क्यों कर रहे हैं..?’

    बाबासाहब आंबेडकर मूलतः अखंड भारत के समर्थक थे. उन्होंने लिखा हैं, ‘प्रकृति ने ही भारत को अखंड बनाया हैं.’ लेकिन वास्तविक धरातल पर उन्होंने द्विराष्ट्र वाद का समर्थन किया. उन्होंने कहा की मुसलमानों का हिन्दुओं के साथ सह-अस्तित्व संभव ही नहीं हैं. इसलिए उन्हें अलग राष्ट्र देना ही ठीक रहेगा. लेकिन एक शर्त पर – हिंदुस्तान के सारे मुसलमान प्रस्तावित पाकिस्तान में जायेंगे और वहां के सारे हिन्दू हिंदुस्तान में आयेंगे..! उनके शब्द हैं, “When partition took place, I felt that God was willing to lift his curse and let India be one great and prosperous” (जब विभाजन हुआ तो मुझे लगा मानो ईश्वर ने हमे दिया हुआ अभिशाप (श्राप) हटा लिया हैं और अब भारत एक महान और समृध्द राष्ट्र बनेगा). – डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर : राइटिंग अँड स्पीचेस, पहला खंड, पृष्ठ 146.

    दुर्भाग्य से कांग्रेस ने भारत विभाजन का प्रस्ताव तो स्वीकार किया, किन्तु जनसंख्या के अदलाबदली को सिरे से नकारा… इसका नतीजा रहा, इतिहास के सबसे दर्दनाक दंगे. लाखों लोगों की मृत्यु. करोडो लोगों का बिना किसी योजना के बलात विस्थापन..!

    पंधरा अगस्त जैसे जैसे निकट आ रहा था, वैसे वैसे बंगाल, पंजाब और सिंध में दंगे बढ़ रहे थे. हिन्दुओं को घर-बार छोड़ने के लिए विवश किया जा रहा था…

    ऐसे समय हमारा नेतृत्व क्या कर रहा था..?

    अगस्त, १९४७ के पहले और दुसरे सप्ताह में नेहरु व्यस्त थे, सत्तांतरण के कार्यक्रम की तैयारी में. उनकी बहन कृष्णा हाथिसिंग लिखती हैं – Jawahar was concerned about his wardrobe. १४ अगस्त के रात वाले समारोह में पहनने के लिए नेहरु ने अचकन और जाकिट पेरिस से मंगवाए थे. सीमा पर हो रहे दंगों की चिंता करने के बजाय, उन कपड़ों की चिंता नेहरु को थी. लॉर्ड माउंटबेटन को नेहरू आश्वस्त कर रहे थे की स्वतंत्रता के बाद भी भारत की सरकारी इमारतों पर, ब्रिटेन के शासकीय महत्व के दिनों में, यूनियन जैक फहराया जाएगा..!

    लेकिन जब पंजाब और सिंध जल रहा था, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सरसंघचालक श्री गुरूजी ५ अगस्त से ८ अगस्त तक सिंध के दंगा पीड़ित क्षेत्रों में (जो अब पाकिस्तान में हैं) थे. कराची के हवाईअड्डे पर श्री गुरूजी को लेने के लिए जिस भारी मात्रा में स्वयंसेवक आये थे, उसके एक चौथाई भी लीगी कार्यकर्ता, जीना को लेने नहीं आए थे…!

    श्री गुरूजी ने धधकते वातावरण में कराची और हैदराबाद (सिंध) में स्वयंसेवकों की बैठके ली. साधु वासवानी जी के साथ सार्वजनिक सभा को संबोधित किया. लोगों को ढाढस बंधाया.

    श्री गुरूजी के पश्चात् १३ अगस्त को राष्ट्र सेविका समिति की तत्कालीन प्रमुख संचालिका वन्दनीय मौसी केलकर भी कराची पहुची. १४ अगस्त को, अर्थात जिस दिन पाकिस्तान का निर्माण हो रहा था, ठीक उसी दिन, उसी कराची शहर में मौसी केलकर जी ने समिति की बहनों की एक विशाल बैठक ली. साहस और समर्पण इसे कहते हैं !

    उस अशांत परिस्थिति में जब संघ, समिति और आर्य समाज के अधिकारी और कार्यकर्ता, लोगों में ढाढस बंधा रहे थे, उनके सुरक्षित भारत लौटने के प्रबंध कर रहे थे, तब देश का कांग्रेसी नेतृत्व दिल्ली में राज्यारोहण की खुशिया मनाने में व्यस्त था…! (क्रमशः)

    • प्रशांत पोळ

    विभाजन #भारत_विभाजन #Partition

  • बैंकों ने दस लाख करोड़ का कर्ज बैलेंस शीट से हटाया

    बैंकों ने दस लाख करोड़ का कर्ज बैलेंस शीट से हटाया


    नईदिल्ली,05 अगस्त,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। देश के कई व्यापारिक बैंको ने पिछले 5 वित्त वर्ष के अंदर लगभग 10 लाख करोड़ रुपये के लोन को बट्टे खाते (Loan Write Off) में डाल दिया है. वित्त राज्यमंत्री भागवत के कराड (Minister of State for Finance Bhagwat Karad) ने राज्यसभा (RajyaSabha) में लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी है.
    वित्त राज्यमंत्री कराड ने बताया कि Financial Year 2021-22 में बैंको ने बट्टेखाते में डाली जाने वाली राशि पिछले वित्तवर्ष के 2,02,781 करोड़ रुपये की तुलना में घटकर 1,57,096 करोड़ रुपये रह गई. वर्ष 2019-20 में, यह राशि 2,34,170 करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2018-19 में 2,36,265 करोड़ रुपये के 5 साल के रिकॉर्ड स्तर से कम थी. मंत्री कराड ने कहा कि वर्ष 2017-18 के दौरान, बैंकों ने बट्टे खाते में 1,61,328 करोड़ रुपये डाली थी. कुल मिलाकर पिछले 5 वित्त वर्ष (2017-18 से 2021-22) में 9,91,640 करोड़ रुपये का बैंक ऋण बट्टे खाते में डाला गया है.
    मंत्री कराड का कहना है कि, Scheduled Commercial बैंक (SCB) और सभी भारतीय वित्तीय संस्थान रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India Financial Institutions) को बड़े लोन पर Central Repository of Information on Large Credits (CRILC) के तहत 5 करोड़ रुपये और उससे अधिक के कुल लोन लेने वाले सभी उधारकर्ताओं के बारे में जानकारी जुटाई जाती हैं.
    भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के अनुसार, पिछले 4 साल में लोन चुकाने में जानबूझकर चूक करने वालों की कुल संख्या 10,306 थी. सबसे अधिक संख्या वर्ष 2020-21 में 2,840 रही थी. अगले वर्ष यह संख्या 2,700 रही थी. मार्च 2019 के अंत में ऐसे चूककर्ताओं की संख्या 2,207 थी जो वर्ष 2019-20 में बढ़कर 2,469 हो गई.
    मार्च 2022 तक शीर्ष 25 चूककर्ताओं का विवरण साझा करते हुए कराड ने कहा कि गीतांजलि जेम्स लिमिटेड (Geetanjali Gems Limited) इस सूची में सबसे ऊपर है. इसके बाद एरा इंफ्रा इंजीनियरिंग (Era Infra Engineering), कॉनकास्ट स्टील एंड पावर (Concast Steel & Power), आरईआई एग्रो लिमिटेड (REI Agro Limited) और एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड (ABG Shipyard Limited) का स्थान है. फरार हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी (Mehul Choksi) की कंपनी गीतांजलि जेम्स पर बैंकों का 7,110 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि एरा इंफ्रा इंजीनियरिंग पर 5,879 करोड़ रुपये और कॉनकास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड पर 4,107 करोड़ रुपये बकाया है.
    आरईआई एग्रो लिमिटेड (REI Agro Limited) और एबीजी शिपयार्ड (ABG Shipyard) ने बैंकों से क्रमश: 3,984 करोड़ रुपये और 3,708 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है. इसके अलावा फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड (Frost International Limited) पर 3,108 करोड़ रुपये, विनसम डायमंड्स एंड ज्वैलरी (Winsome Diamonds And Jewelery) पर 2,671 करोड़ रुपये, रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड (Rotomac Global Private Limited) पर 2,481 करोड़ रुपये, कोस्टल प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (Coastal Projects Limited) पर 2,311 करोड़ रुपये और कुडोस केमी (Kudos Cami) पर 2,082 करोड़ रुपये बकाया हैं.
    बैंक जब अपने ग्राहकों से कर्ज की वसूली नहीं कर पाते तो वह राशि Non Performing Assets (NPA) में चली जाती है. जिन बैंकों का NPA काफी बढ़ जाता है तो वे एनपीए की राशि को बट्टे खाते में डाल देते हैं यानी अर्थात राइट ऑफ (Right Fff) कर देते हैं. इसके बाद बैंक 4 साल पुराने फंसे कर्ज को बैलेंस सीट से हटा देती हैं. जिससे उसकी बैलेंस शीट अच्छी बनी रहे. इसे ही राइट ऑफ या बट्टे खाते में डालना कहा जाता है. बट्टे खाते में डाले जाने के बाद भी कर्ज की वसूली जारी रहती है.