भोपाल,19 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) समाजवादी पार्टी मप्र युवजन सभा प्रदेश अध्यक्ष यश भारतीय ने आरोप लगाया है, भाजपा की केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर शासकीय स्वास्थ्य व्यवस्था चौपट करते हुए निजी और महंगी स्वास्थ्य सेवाओं को फायदा पहुंचाया है । भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल(बीएमएचआरसी) को पूरी तरह से बर्बाद किया, एम्स में भी व्यवस्था चौपट है ,राज्य चिकित्सालय के हालत ये है की मुख्यमंत्री एवं उनके मंत्री , बड़े अधिकारी सभी निजी स्वास्थ्य व्यवस्था पर ही विश्वास दिखाते है ।
पूर्व में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री रहते दौरा कर चुके है एम्स का, जिसमे तमाम कमियां विधार्थियो ने बताई थी लेकिन वह आज भी वैसे की वैसे ही बनी हुई है, नए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मंडाविया जी के आने के बाद भी । एम्स में आज भी पूरी फैकल्टी नही है, न ही मरीजों को पूरा इलाज मिल रहा है और न ही विधार्थियो को सही चिकित्सा शिक्षा प्राप्त हो रही है ऐसे में बीएमएचआरसी को मेडिकल कॉलेज बनाने जैसी बातें साफ तौर पर बेमानी है ।
राज्य चिकत्सा मंत्री विश्वास सारंग जी भोपाल में रहते हुए इतने लापरवाह है की हमीदिया अस्पताल,जय प्रकाश नारायण अस्पताल, काटजू अस्पताल की व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित नही करवा पा रहे है । प्रदेश और राजधानी वासियों को अभी भी बच्चों के वार्ड में लगी आग का मंजर अभी भी भूले नहीं भूलता जिसमें न मुख्यमंत्री सक्रिय थे और न ही उनके मंत्री ।
भाजपा के लोग केवल झूठे बयान,झ्ठे वादों से जनता को भ्रमित कर रहे है, आमजन की धार्मिक भावना उकसा कर सत्ता पर काबिज है। अब जनता इनसे इनकी ही योजना का हिसाब मांग रही है, वो चाहे कृषि कानून हो या अग्निवीर । भाजपा के लोग अपनी योजनाओं को ही सही तरीके से जनता को नही बता पाते क्योंकि तानाशाही तरीके से जनता के ऊपर निर्णय थोप दिए जा रहे है बिना किसी तैयारी के ,बिना किसी विरोधी दलों से चर्चा करते हुए ।
भोपाल,9 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब लाल किले से स्वच्छता का संदेश दिया था तब किसी ने नहीं सोचा था कि हिंदुस्तान के शहर और गांव इस दिशा में नई करवट लेने जा रहे हैं। आज देश के कई शहरों में स्वच्छता को लेकर जो जंग छिड़ी है उसने सड़कों और गलियों की तस्वीर बदलकर रख दी है। राजधानी भोपाल में स्वच्छता को लेकर जो बदलाव हुए हैं उसके लिए किसी तंत्र को बदले बगैर जनता बढ़ चढ़कर भागीदारी कर रही है। शहर की भारत नगर गृह निर्माण सहकारी समिति के प्रशासक मुकुंद राव भैसारे ने जब कालोनी की मूलभूत समस्यायों का समाधान शुरु किया तो लोगों ने आगे आकर स्वच्छता अभियान में अपना योगदान देना आरंभ कर दिया। आज यह गृह निर्माण सहकारी समिति मूलभूत समस्याओं का निराकरण करके पुरस्कार जीत रही है इसके साथ संस्था के खाते में बचत की राशि भी बढ़ती जा रही है।
यह संस्था कभी बुरे हालात से भी गुजरती रही है। घरों में पानी नहीं आता था,सीवेज की लाईनें चोक थीं, सड़कें बदहाल थीं और जगह जगह कचरे के ढेर नजर आते थे। समिति का प्रबंधन संभालने वालों की सक्रियता न होने की वजह से मनमानी का आलम था और लोग कहीं भी कबाड़ा जमा करते रहते थे। गृह निर्माण समिति के संधारण का शुल्क लोग इसलिए नहीं जमा करते थे क्योंकि आए दिन घोटालों की कहानियां सुनने मिलती थीं। रहवासियों ने जगह जगह शिकायतें कीं लेकिन कोई समाधान नजर नहीं आता था। सहकारिता विभाग के आयुक्त ने कड़ा फैसला लिया और समिति को भंग करके प्रशासक की नियुक्ति कर दी। ये जवाबदारी विभाग के उप अंकेक्षक मुकुंद भैसारे को दी गई।
सहकारिता विभाग के आयुक्त संजय गुप्ता ने अपने नवाचारों से शुरु किया सहकारिता आंदोलन का नया दौर.
जब शासन ने मुकुंद भैसारे को भेजा तब रहवासी बहुत परेशान थे और शिकायतें लेकर दर दर भटक रहे थे। 20 जनवरी 2021 को संस्था भंग हो चुकी थी और लोगों को लगता था कि अब उनकी समस्याएं लालफीताशाही के बीच उलझकर रह जाएंगी। श्री भैसारे ने पानी, सफाई, बिजली सप्लाई जैसे मुद्दों को सुलझाने के लिए अपनी प्रशासनिक दक्षता का प्रयोग किया और धीरे धीरे शिकायतें सुलझने लगीं। हर विभाग से जुड़े प्रभारी अधिकारियों को प्रेरित करके उन्होंने कालोनी की काया बदलना शुरु कर दी। समिति के पास केवल एक सफाई कर्मचारी था लेकिन जन सहयोग और भोपाल नगर पालिक निगम की टीम को साथ लेकर उन्होंने सफाई का महासंग्राम शुरु कर दिया। लोगों ने जब अपने गली मोहल्ले में ये सक्रियता देखी तो महिलाओं समेत कई नागरिकों ने इस अभियान में सहयोग शुरु कर दिया। बच्चों की टोलियां काम में हाथ बंटाने लगीं। महिलाओं का समूह सफाई कर्मचारियों की प्रेरणा बन गया।
श्री भैसारे ने गृह निर्माण समिति के दफ्तर की भी काया पलट कर डाली। पुराने पड़े पाईपों को वेल्डिंग करवाकर उन्होंने तिरंगा फहराने के लिए झंडा स्थल का निर्माण करवाया। समिति के आय व्यय पत्रकों को सिलसिलेबार संजोया। लोगों को प्रेरित किया कि वे यदि लंबित सहयोग राशि का भुगतान कर देते हैं तो कई सुविधाएं बढाई जा सकती हैं। चोक पड़ी पाईपलाईनों को चालू करवाते ही लोगों के घरों में पेयजल की सप्लाई शुरु हो गई। इस पानी ने लोगों में जो उत्साह का संचार किया कि वे आगे बढ़कर अपनी सहयोग राशि जमा करने लगे। जनसहयोग की भागीदारी से श्री भैसारे ने नगर पालिक निगम की योजनाओं को लागू करवाना शुरु कर दिया। जगह जगह कचरे के डिब्बे रखवाए गए। सार्वजनिक लाईनों का बिजली भुगतान होते ही कालोनी की सड़कें रात में जगमग होने लगीं।
भारत नगर सहकारी समिति को स्वच्छता का पुरस्कार देकर प्रसन्न हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान.
ये ऐसा अवसर था जब देश भर में स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर नगरीय निकाय बढ़ चढ़कर भागीदारी दिखा रहे थे। कोरोना की वजह से लाक डाऊन था और सफाई अमला पूरी तरह मुस्तैद था। इसी समय का लाभ लेकर श्री भैसारे ने गृह निर्माण समिति के कामकाज में जान फूंक दी। नगर पालिक निगम ने स्वच्छता के जो मापदंड तय किए थे उन पर श्री भैसारे ने सिलसिलेबार ढंग से अमल शुरु कर दिया। वर्ष 21-22 के स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत 11 जनवरी 2022 को रहवासी समितियों ने प्रथम द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्राप्त किए। संपूर्ण भोपाल जिले में भारत गृह निर्माण सहकारी समिति को तृतीय पुरस्कार मिल गया।जब भोपाल नगर पालिक निगम के कमिश्नर ने ये पुरस्कार दिया तो कालोनी में हर्ष की लहर फैल गई। लोगों ने बढ़ चढ़कर सहयोग देना शुरु कर दिया।
इसी श्रंखला में भारत सरकार ने स्मार्ट सिटी जैसी नई प्रोत्साहन योजना शुरु की। मध्यप्रदेश सरकार ने अपनी अन्य कालोनियों की तस्वीर बदलने के लिए अप्रैल 2022 में दुबारा जोन वार पुरस्कार देने की घोषणा की। भोपाल की 38 रहवासी वेलफेयर समितियों के सामने पुरुस्कार पाने का लक्ष्य था। इसके तहत प्रथम पुरस्कार के रूप में पांच लाख रुपए के निर्माण कार्य कराए जाने थे। द्वितीय पुरस्कार के रूप में तीन लाख रुपए के कार्य कराने की घोषणा की गई थी। इसके लिए सर्वेक्षण हुआ और जोन 15 की भारत गृह निर्माण सहकारी समिति को दूसरे पुरुस्कार के रूप में चुना गया। समिति का काम इतना सिलसिलेबार और लयबद्ध था कि प्रशासन ने एक ही वर्ष में उसे दो बार पुरस्कृत किया। इसका सारा श्रेय सहकारिता विभाग की ओर से प्रशासक के रूप में नियुक्त श्री भैसारे को ही जाता है।
श्री भैसारे ने समिति की आर्थिक स्थिति सुधारी,और सुधारों को जमीन पर क्रियान्वित किया। इससे सहकारिता के माध्यम से रहवासियों की समस्यायों का समाधान करने का नया उदाहरण सामने आया है। ये पहला अवसर है जब किसी सहकारी समिति के प्रशासक ने जन सहयोग से किसी रहवासी क्षेत्र की समस्याओं का समाधान कर दिखाया हो। कई बड़े बिल्डर हजारों रुपए की सहयोग राशि जुटाने के बावजूद ये चमत्कार नहीं दिखा पा रहे थे जबकि श्री भैसारे ने मात्र 350 रुपए की सहयोग राशि के बलबूते कालोनी की तस्वीर बदलकर रख दी।
भोपाल नगर पालिक निगम ने स्वच्छता पुरस्कार देकर रहवासियों के सफल मॉडल को रेखांकित किया..
सहकारिता के क्षेत्र में इस बडी उपलब्धि से श्री भैसारे उत्साहित हैं। स्थानीय नागरिकों ने समिति के सफल संचालन के लिए कई बदलाव भी किए हैं। सहकारी समिति ने कालोनी में सड़कें रोशन करने के लिए सोलर लाईटें,बगीचों में पाथ वे का निर्माण और कैमरे लगाने के लिए भी प्रस्ताव तैयार किए हैं। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए हर रहवासी की ओर से मिलने वाली सहयोग राशि 500 रुपए कर दी गई है और जल्दी ही जरूरतें भी पूरी हो जाएंगी । इससे स्ट्रीट लाईट का हर महीने आने वाला बिजली का बिल भी शून्य हो जाएगा। साथ ही साथ अतिरिक्त बिजली बेचकर समिति अपने रखरखाव के लिए अतिरिक्त आय कर सकेगी। कैमरों से अपराध नियंत्रण में सहयोग मिलेगा। इस तरह के कई अभियानों के लिए भी लोग मशविरा कर रहे हैं।
एक रचनात्मक व्यक्ति की उपस्थिति से स्थितियां किस तरह बदल जाती हैं ये भी श्री भैसारे ने साबित कर दिया है। जो लोग लोकतांत्रिक व्यवस्था को कोसते फिरते थे वे आज सहकारिता की शक्ति का अहसास कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में सहकारी आंदोलन को पलीता लगाने की तो कई कहानियां सुनी और सुनाई जाती हैं लेकिन सहकारिता की ये बुलंद तस्वीर केवल भोपाल से निकलकर सामने आई है। इसके लिए श्री भैसारे जैसे अधिकारियों की पहचान और उन्हें जवाबदारी देने की पहल अब सरकार को करनी होगी।
भोपाल,5 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजस्थान के झालावाड़ में मारा गया भोपाल का डॉन मुख्तयार मलिक मध्यप्रदेश में इसलिए सुरक्षित रहा क्योंकि यहां के कई राजनेताओं का उसे संरक्षण मिलता रहा। इस सीमा से बाहर कारोबार फैलाने की ख्वाहिश उसकी मौत की वजह बनी। झालावाड़ के असनावर थाना क्षेत्र के कासखेडली गांव के नजदीक स्थित उजाड़ नदी और भीमसागर डैम अपस्ट्रीम में अब्दुल बंटी गेंग से उसकी झड़प हुई थी। पहली गोली मलिक ने चलाई थी लेकिन स्थानीय लोगों ने पथराव और गोलीबारी करके मुख्तयार के सहयोगियों को भागने पर मजबूर कर दिया था। इस घटनाक्रम के दौरान मुख्तयार के साथ 11 शूटर थे लेकिन उसका रसूख कोई काम नहीं आया और पानी के लिए तड़प तड़पकर उसे मरने को मजबूर होना पड़ा। मुख्तयार पर दर्ज अपराधों की सूची बहुत बड़ी है, उस पर विभिन्न धाराओं के 58 मामले दर्ज हैं। सैकड़ों अन्य मामले ऐसे भी हैं जिनकी जानकारी तो खुली पर वे पुलिस रिकार्ड तक नहीं पहुंचे। कई मामले उसने आपसी रजामंदी से बंद करा दिए। कई मामले उसके राजनैतिक आकाओं की वजह से दर्ज नहीं हो सके। पहली बार 21 साल की उम्र में बलात्कार के अपराध में वह जेल पहुंचा था। उसके बाद उसकी अपराध की दुनिया का साम्राज्य शुरु हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा को धमकाने की वजह से 1990 में वह चर्चा में आया था। इसकी वजह थी कि पटवा हमेशा से अर्जुनसिंह के चहेते रहे और बाद में मध्यप्रदेश की राजनीति में दो बार उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका भी मिला। तब भी मध्यप्रदेश पुलिस ने मुख्तयार को नहीं निपटाया क्योंकि राजनेताओं ने उसे पटवा से माफी मंगवा दी थी। फिरौती वसूलने के लिए उसने रायसेन के तीन बच्चों का अपहरण किया था तब पुलिस ने मुठभेड़ में बच्चों को सकुशल बचा लिया लेकिन तब भी मुख्तयार नहीं मारा गया। पुलिस के जांबाज अफसर सलीम ने जब उसे घसीटकर सड़कों से गुजारा तो भय के कारण उसने पेंट गीला कर दिया था। ये सारे घटनाक्रम होते रहे लेकिन मध्यप्रदेश उसकी शरण स्थली बना रहा।एक बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास पर उसकी मौजूदगी भी अखबारों की सुर्खियां बनीं लेकिन फिर सीएम आवास में उसका प्रवेश निरुद्ध कर दिया गया। गैस कांड के मुआवजे की सुनवाई करने वाली अदालतें भी उस पर काफी मेहरबान रहीं। वह जिस व्यक्ति को अदालत में पेश कर देता उसका अवार्ड पारित हो जाता। यह रकम सीधे मुख्तयार के पास पहुंच जाती थी। इस तरह उसने गैस कांड के मुआवजे में से करोड़ों रुपए जुटाए। उसे पनाह देने वाले अंकल जज राजीव भटजीवाले की रकम जब ब्याज पर चलाने वाले एमपीनगर के एक व्यापारी ने गड़प ली तो मुख्तयार ने उसकी दूकान पर जाकर कट्टा तानकर धमकाया था। उस व्यापारी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके मुख्तयार का शूटआऊट कराने की तैयारी कर ली थी। बाद में व्यापारी की गवाही पर राजीव भटजीवाले का भ्रष्टाचार प्रमाणित हो गया और राजीव भटजीवाले को बर्खास्त कर दिया गया,लेकिन मुख्तयार मलिक साफ बच निकला। हालिया मामले में उसे भीमसागर डैम से करोड़ों रुपए के मुनाफे का लालच दिया गया था। प्रस्ताव लाने वाला विक्की वाहिद उसका बहुत खास था। मुख्तयार उसे बेटे के समान मानता था। घटाक्रम के दौरान मलिक ने वाहिद का ही साथ लिया था लेकिन वाहिद उसे छोड़कर फरार हो गया। झालावाड़ के असनावर थाना क्षेत्र के कासखेडली गांव के नजदीक स्थित उजाड़ नदी और भीमसागर डैम अपस्ट्रीम में ये गैंगवार हुई थी। मंगलवार रात दो बजे कांस खेडली के अब्दुल बंटी गैंग और मुख्तार मलिक गैंग के बीच गोलियां चली। इसमें एक की मौत हुई। मुख्तार मलिक गुट के भोपाल निवासी कमलकिशोर की गैंगवार में मौत हुई थी। जिसका शव पुलिस ने बुधवार रात को ही पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा था। संघर्ष में लापता हुए गैंगस्टर मुख्तार मलिक और विक्की का गुरुवार रात को भी कोई पता नहीं चला। लेकिन विक्की के भोपाल पहुंचने की सूचना लगी। विक्की भी गैंगस्टर बताया जा रहा है। उजाड़ नदी के भीमसागर डैम क्षेत्र में मछली पकडने का ठेका दिल्ली के ईरशाद के पास था। 31 मई को उसने भोपाल के मुख्तार मलिक को ठेका बेच दिया। सौदा दिन में हुआ और घटना रात में नाव लेने को लेकर हो गई। समाचार पत्रों में छपी कहानी के अनुसार मुख्तार को जब भीम सागर डैम में उसकी बोट नहीं दिखी तो वह अपने गुर्गे विक्की वाहिद के साथ कालीसिंध के भंवरासा डैम से भीम सागर में बोट तलाशने निकला। पता चला कि उसकी नाव को गैंगस्टर बंटी अब्दुल लेकर चला गया। बंटी का पूर्व मछली ठेकेदार इरशाद से लेनदेन को लेकर विवाद था। इसकी जानकारी होने पर मलिक वापस भंवरासा डैम आया। एक मिनी ट्रक में अपनी दूसरी नाव रखी, विक्की की फॉर्च्यूनर और अपनी ब्लैक पजेरो में गुर्गों के साथ वापस भीम सागर आया। बंटी अब्दुल की गैंग से नाव वापस लेने के लिए मुख्तार समेत 11 लोग कांसखेडली गांव के लिए रवाना हुए। मलिक की नाव में साथ बैठा गुर्गा शकील (निवासी रीछवा, झालावाड़) उसके हर मूवमेंट की जानकारी बंटी गैंग को फोन से देता रहा। इससे बंटी गैंग पूरी तरह अलर्ट हो चुकी थी। बंटी ने अपने चार गुर्गे झालावाड़ से भी बुला लिए थे। विक्की शराब के नशे में था। वह नाव में भी शराब पी रहा था। रात डेढ़ बजे कांसखेडली गांव में डैम के बैकवॉटर के किनारे पहुंचकर विक्की ने बंटी को ललकारा। पहले से हमले की ताक में बैठी बंटी गैंग ने पथराव शुरू कर दिया। यह देख मुख्तार ने 32 बोर की रिवॉल्वर से फायर करने शुरू कर दिए। जवाब में बंटी गैंग ने भी फायरिंग शुरू कर दी। पथराव और गोलीबारी से बचने के लिए मुख्तार के साथ नाव में बैठे उसके गुर्गे पानी में कूदने लगे। डिसबैलेंस होने से नाव पानी में समा गई। इसी दौरान भोपाल निवासी कमल मीणा के नाक के पास गोली लगी। वो पानी में गिर गया और डूबने से उसकी मौत हो गई। शकील के बांह में गोली लगी। आठ गुर्गे जंगल में भाग गए, जो अलग-अलग ग्रुप में सुबह सारोला थाना इलाके की तरफ से जंगल से बाहर निकले। मुख्तार, विक्की, कमल का पता नहीं चला। कमल की लाश बाद में बरामद की गई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गैंगवार की रात बोट में उसके साथ 11 लोग थे,इनमें खुद मुख्तार मलिक, भोपाल, विक्की वाहिद, शफीक मोहम्मद, रीछवा, थाना बकानी, शकील मोहम्मद, रीछवा, थाना बकानी, सलमान, रीछवा, थाना बकानी, शोएब हुसैन, गागरोन थाना मंडावर, विजय कुमार, रीछवा, थाना बकानी, बृजराज, रीछवा थाना बकानी, अखलाक खां विराट नगर उज्जैन, आरिफ, खिलचीपुर, राजगढ़, कमल किशोर मीणा, भोपाल । राजधानी भोपाल की जिला अदालत में मुन्ने पेंटर गैंग के बीच हुए गैंगवार में मुख्तार को 2006-07 में हाईकोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में वह बरी हो गया था। मामलों में वह समर्पण करके पुलिस से बचता था और अदालतों में दबाव से समझौता करके मामले रफा दफा करवा लेता था।
भोपाल,1 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भोपाल विलीनीकरण दिवस एक जून के अवसर पर विलीनीकरण शहीद स्मृति द्वार पर कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। राज्य सभा सांसद श्री जे.पी. नड्डा विशेष रूप से उपस्थित थे। चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास सारंग, सांसद श्री वी.डी. शर्मा, पूर्व महापौर श्री आलोक शर्मा तथा विलीनीकरण आंदोलन के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजन सम्मिलित हुए।
मुख्यमंत्री श्री चौहान तथा सांसद श्री नड्डा ने शहीद स्मृति द्वार पर स्थापित रानी कमलापति की प्रतिमा पर नमन किया। साथ ही भोपाल विलीनीकरण आंदोलन के स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में पुष्पांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानियों के परिजन का सम्मान भी किया गया। भोपाल की स्वतंत्रता की 73 वीं वर्षगांठ हर्ष और उल्लास के साथ मनाई गई।