Month: February 2020

  • नई आबकारी नीति से शराब निर्माताओं में हड़कंप

    नई आबकारी नीति से शराब निर्माताओं में हड़कंप

    भोपाल,29 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)।प्रदेश में वर्ष 2020-21 की आबकारी नीति में देशी/विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानों के बड़े समूह बनाये जाने से मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि सीमावर्ती प्रांतों के मदिरा लायसेंसधारियों में जिज्ञासा देखी गई है जबकि मदिरा के निर्माताओं में हड़कंप मच गया है। डिस्टिलरियों के मालिकों का कहना है कि सरकार ने किसी बड़े निवेशक को एकमुश्त शराब सप्लाई के ठेके देने की तैयारी की है। इससे बड़े व्यापारी अधिक मुनाफा कमाने के लिए शराब की खरीद कम दामों पर करेंगे जबकि बाजार में मंहगी कीमत में बेचेंगे।

    आबकारी विभाग के सूत्रों के अनुसार बड़े मदिरा समूहों के निर्माण से मदिरा के अवैध व्यापार पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकेगा। इससे अस्वस्थ व्यवसायी प्रतिस्पर्धा समाप्त होगी और मदिरा उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता की वैध मदिरा उचित मूल्य पर उपलब्ध हो सकेगी। वर्ष 2020-21 के लिये घोषित आबकारी नीति से राज्य के राजस्व संवर्धन में नया प्रतिमान स्थापित होने की संभावना है। आबकारी आयुक्त श्री राजेश बहुगुणा ने इस सिलसिले में प्रदेश के और सीमावर्ती प्रांतों के मदिरा अनुज्ञप्तिधारियों से दूरभाष पर चर्चा की है।

    सरकारी सूत्रों का दावा है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 की आबकारी नीति में बड़े, मध्यम और छोटे मदिरा अनुज्ञप्तिधारियों की व्यावसायिक क्षमताओं का पूरा ध्यान रखा गया है। साथ ही नवीनीकरण/ई-टेण्डर/ई-बिडिंग जैसी पारदर्शी व्यवस्थाओं को अपनाया गया है। प्रदेश के जिन 16 जिलों की समस्त मदिरा दुकानें दो अथवा एक समूह में नीलाम होनी है, वहाँ एकाधिकारी व्यवसाय की चाह में उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा तथा दिल्ली जैसे प्रदेशों के ठेकेदारों में अत्यधिक रूचि नजर आ रही है। ये ठेकेदार विभिन्न माध्यमों से ठेकों के बारे में जानकारी हासिल कर रहे हैं। जिन जिलों में नवीनीकरण, लॉटरी या एक समूहों में मदिरा दुकानों की नीलामी होना है, उनसे संबंधित ठेकेदारों को विभाग द्वारा समन्वय कर जानकारी मुहैया कराई जा रही है।

    आबकारी व्यवस्था वर्ष 2020-21 के लिये मध्यप्रदेश के 36 जिलों में मौजूदा वर्ष के देशी/विदेशी मदिरा के फुटकर व्यवसायियों को उनके पक्ष में स्वीकृत अनुज्ञप्तियों को वर्ष 2020-21 की अवधि के लिये नवीनीकृत करने का अवसर दिया गया है। नवीनीकरण की कार्यवाही के लिये 29 फरवरी को गुना और अशोकनगर की सम्पूर्ण देशी/विदेशी फुटकर मदिरा दुकानों के लिये नवीनीकृत आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। प्रदेश के शेष जिलों में भी नवीनीकरण प्रक्रिया को लेकर मदिरा अनुज्ञप्तिधारियों ने सकारात्मक रूझान दिखाया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के शेष जिलों में पहले दिन ही 55 से भी अधिक मदिरा समूहों के लिये नवीनीकरण आवेदन क्रय किये जा चुके हैं। नवीनीकरण संबंधी प्रक्रिया 5 मार्च, 2020 तक जारी रहेगी।

  • फॉर्मास्युटिकल हब बनेगा एमपी बोले कमलनाथ

    फॉर्मास्युटिकल हब बनेगा एमपी बोले कमलनाथ

    इंदौर,28 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)।मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि मध्यप्रदेश को फॉर्मास्युटिकल हब बनाया जाएगा। श्री कमल नाथ ने इससे जुड़ी औद्योगिक इकाइयों से आग्रह किया कि वे मध्यप्रदेश आएं और निवेश करें। मुख्यमंत्री इंदौर में पीथमपुर औद्योगिक संगठन के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि मध्यप्रदेश में फॉर्मास्युटिकल के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएँ है। इससे जहाँ एक ओर इससे जुड़ी कंपनियों को जरूरत के संसाधन उपलब्ध होंगे, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के लोगों को रोजगार मिलेगा। श्री कमल नाथ ने बताया कि सन फार्मा कंपनी ने रिसर्च का काम शुरू कर दिया है। प्रदेश में उपलब्ध जड़ी-बूटियों की मदद से कैंसर के ईलाज की दवा का 70 प्रतिशत अनुसंधान कार्य पूरा कर लिया गया है।

    मुख्यमंत्री ने सभी औद्योगिक इकाइयों से कहा कि वे अपने संस्थान में सोलर प्लांट लगवाएं। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में कई नई तकनीक भी आई हैं, जिसमें सोलर से उत्पादित बिजली को स्टोर करने की तकनीक भी शामिल है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन इसके लिए अनुदान भी दे रही है। मुख्यमंत्री ने पीथमपुर औद्योगिक संगठन के प्रतिनिधियों से चर्चा कर उनकी अपेक्षाओं और जरूरतों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

    इस मौके पर गृह मंत्री बाला बच्चन, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तुलसीराम सिलावट एवं पीथमपुर औद्योगिक संगठन के गौतम कोठारी तथा अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    इंदौर में कनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) के 125वें वार्षिक अधिवेशन में ‘बिजनेस एण्ड बियोन्ड’ विषय पर श्री कमलनाथ ने कहा कि समाज के गरीब और पिछड़े वर्गों को सशक्त बनाकर ही सामाजिक संतुलन स्थापित किया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि आज संपन्नता के अस्तित्व के लिए प्रयास करने की बजाए हमें समाज के गरीब, पिछड़े लोगों को हर स्तर पर आगे लाने की आवश्यकता है। इससे देश और समाज स्वत: शक्तिशाली बन जाएगा। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन में सुधार लाने के साथ-साथ व्यवहार में भी सुधार लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश-दुनिया में निरंतर परिवर्तन हो रहा है। जरूरतों के साथ लोगों की अपेक्षाएँ भी बढ़ रही हैं। सीआईआई बदलती हुई दुनिया के साथ इंडस्ट्री प्रेरक होने की भूमिका निभाए। इस दिशा में काम करना चाहिए। श्री कमल नाथ ने कहा कि मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए यह जरूरी है। उद्योग-व्यवसाय से जुड़े और स्टार्टअप उद्यमी अपनी कार्य-प्रणाली को आदर्श बनाएं, जिससे मध्यप्रदेश की देश और दुनिया में एक आदर्श औद्योगिक क्षेत्र की छवि स्थापित हो सके।

  • सीएनएन के पत्रकार अगोस्टा से ट्रंप की तीखी तकरार

    सीएनएन के पत्रकार अगोस्टा से ट्रंप की तीखी तकरार

    नई दिल्ली, 26 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संवाददाता सम्मेलन में उनके और सीएनएन के पत्रकार जिम अकोस्टा के बीच तीखी बहस सामने आई। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस टीवी नेटवर्क की ईमानदारी पर सवाल खड़े किए थे।पलटवार करते हुए रिपोर्टर ने कहा कि मुझे लगता है कि हमारा सच बताने का रिकॉर्ड आपके रिकॉर्ड से काफी बेहतर है।अकोस्टा ने ट्रंप से पूछा कि क्या वह आगामी राष्ट्रपति चुनाव में किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को नकारने का संकल्प लेंगे। सीएनएन पत्रकार ने नए कार्यवाहक राष्ट्रीय खुफिया निदेशक की नियुक्ति के फैसले पर भी सवाल उठाया उनका कहना था कि जिन्हें ये जवाबदारी दी गई है उन्हें किसी भी किस्म का खुफिया अनुभव नहीं है।

    जवाब में ट्रंप ने कहा कि वह किसी देश से कोई मदद नहीं चाहते और उन्हें किसी देश से मदद नहीं मिली है। ट्रंप ने सीएनएन द्वारा पिछले दिनों एक गलत सूचना जारी करने पर खेद जताए जाने का भी जिक्र किया।जिसके आधार पर उन्होंने सीएनएन की विश्वसनीयता को ही कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया था।

    Jim Acosta Journalist CNN

    अकोस्टा ने इस पर कहा, ‘राष्ट्रपति महोदय, मुझे लगता है कि हमारा सच बताने का रिकॉर्ड आपके रिकॉर्ड से काफी बेहतर है।’ बहस बढ़ने लगी और ट्रंप ने कहा, ‘मैं आपको आपके रिकॉर्ड के बारे में बताता हूं। आपका रिकॉर्ड इतना खराब है कि आपको उस पर शर्म आनी चाहिए।’

    अकोस्टा ने कहा, ‘मुझे किसी बात पर शर्म नहीं आती और हमारा संस्थान भी शर्मिंदा नहीं है।’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने सीएनएन पर प्रसारण के मामले में सबसे खराब रिकॉर्ड होने का भी आरोप लगाया। अकोस्टा और ट्रंप के बीच पहले भी कई बार कहासुनी हो चुकी है।

    पहले भी ट्रंप और अकोस्टा की हो चुकी है भिड़ंत
    बता दें कि व्हाइट हाउस ने 2018 में एक संवाददाता सम्मेलन में हुई बहस के बाद अकोस्टा के प्रेस पास को निलंबित कर दिया था। उनके व्हाइट हाउस में प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। ट्रंप प्रशासन ने प्रेस पास पर पाबंदी जारी रखी, लेकिन टीवी नेटवर्क ने इस मामले में व्हाइट हाउस पर मुकदमा दर्ज किया जिसके बाद एक न्यायाधीश ने उनके पास को बहाल कर दिया था।

  • कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्ति दिलाएगा आयुर्वेद

    कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्ति दिलाएगा आयुर्वेद

    भोपाल,28 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। कोरोना वायरस(Corona Virus) ने चीन में जिस तरह का कोहराम मचा रखा है उससे पूरी दुनिया दहशत में आ गई है। विश्व के कई देशों में कोरोना वायरस से निपटने की तैयारियां चल रहीं हैं। वे देश खासे दहशत में हैं जहां मांसाहार को बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है। यही वजह है कि कई देशों में शाकाहार अपनाने की मुहिम चल पड़ी है। इस बीच भारत में कोरोना वायरस का इलाज आयुर्वेदिक तरीकों से करने के दावे किए जाने लगे हैं। कमोबेश यही दावे एड्स जैसी बीमारी को नियंत्रित करने के भी किए जाते रहे हैं।

    दरअसल में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति जीवन दर्शन की वो शैली है जो इंसान को रोगों की गिरफ्त में ही नहीं आने देती। यदि भूल वश स्वस्थ इंसान का शरीर बीमार भी हो जाए तो आयुर्वेद में वात पित्त और कफ को संतुलित करके स्वस्थ बनाने की विधि मौजूद है। नाड़ी विज्ञान से शरीर की दशा को समझा जाता है फिर आयुर्वेदिक दवाओं से नाड़ी को संतुलित किया जाता है। इसी विधि से जटिल से जटिल रोगों का उपचार हो जाता है। यह उपचार पूरे प्राकृतिक तरीकों से किया जाता है।

    कोरोना वायरस के प्रकोप को लेकर मध्यप्रदेश के वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य कहते हैं कि आयुर्वेदिक दवाओं के संतुलित इस्तेमाल से कोरोना वायरस से मुक्ति पाई जा सकती है। जो फार्मूला सुझाया गया है उसके मुताबिक हरिद्राखंड, संशमणि बटी, और त्रिकटु चूर्ण के युक्तियुक्त प्रयोग से कोरोना वायरस आसानी से परास्त हो सकता है। तुलसी और गिलोय का काढ़ा जिसमें सात काली मिर्च डालकर उबाला गया हो वह कोरोना वायरस के संक्रमण को समाप्त कर सकता है। भारत में फेंफड़ों के रोगों और सर्दी जुकाम में इन दवाओं का इस्तेमाल सदियों से किया जाता रहा है। ये दवाएं सभी प्रमुख आयुर्वेदिक दवा फार्मेसियां बनाती हैं।

    हरसिंगार के पांच पत्तों की चाय बनाकर पीने से भी गंभीर संक्रमण को रोकने में मदद मिलती है।

  • कमलनाथ की कलाकारी की इकानामी और कटौती का रुदन

    कमलनाथ की कलाकारी की इकानामी और कटौती का रुदन

    मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने जनता से जुड़ी योजनाओं में कटौती करके बाजार में सूनापन ला दिया है। बजट की तैयारी में जुटे वित्तमंत्री तरुण भनोट भी कह रहे हैं कि केन्द्र की भाजपा सरकार ने फरवरी 2019 में जारी बजट अनुमान में मध्यप्रदेश को 63,750.81 करोड़ राशि आवंटित की थी। वर्ष 2020 के फरवरी माह के पुनरीक्षित अनुमान में यह राशि घटाकर 49,517.61 करोड़ कर दी गई। जोकि 14,233 करोड़ रुपए कम है।देश भर में कांग्रेस से जुड़े औद्योगिक घराने हों या व्यापारिक प्रतिष्ठान सभी बेरोजगारी के आंकड़े बढ़ाने का अभियान चलाए हुए हैं। वे ये जताने की कोशिश कर रहे हैं कि मोदी सरकार ने समानांतर अर्थव्यवस्था को खत्म करने का जो अभियान नोटबंदी से चलाया था वह असफल हो गया है। इसकी वजह से कंपनियां बंद हो रहीं हैं और रोजगार के साधन छिन गए हैं। राज्यों से मिलने वाली राशि का हिस्सा केन्द्र ने घटा दिया है जिससे राज्यों में वित्तीय संकट आ गया है। इस जैसी कई कहानियों से कमलनाथ सरकार अपनी असफलताओं पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है। जनता को बरगलाने वाले उनके धूर्त पहरुए भी यही डमरू बजा रहे हैं। हकीकत इससे बिल्कुल विपरीत है।

    हाल ही में पूर्व केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा राजधानी आए और उन्होंने केंद्रीय बजट में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी कम किए जाने के आरोप का जवाब देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कमल नाथ का कटौती वाला बयान पूरी तरह राजनीतिक है।वास्तव में राज्य सरकार केंद्र की योजनाओं के पैसे का न तो उपयोग कर रही है, न ही उपयोगिता प्रमाणपत्र दे रही है. केंद्र की कोई भी योजना हो, उसका पैसा इसलिए उपलब्ध है क्योंकि केन्द्र ने उनके लिए स्पष्ट प्रावधान किए हैं,जबकि राज्य की सरकार योजनाओं का काम ही आगे नहीं बढ़ा रही है.”

    जयंत सिन्हा ने कहा कि केंद्र सरकार हर कदम पर मध्यप्रदेश के लोगों के साथ खड़ी है और मौजूदा बजट में भी प्रदेश के किसानों के लिए, सिंचाई सुविधाओं के लिए, नेशनल हाइवे और एयरपोर्ट के विकास के लिए कई प्रावधान किए गए हैं।उन्होंने केंद्रीय बजट की प्रशंसा करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने जो बजट प्रस्तुत किया , उसमें देश के, समाज के हर वर्ग को लाभ मिल रहा है, इसलिए यह जन-जन का बजट है. समाज के गरीब तबके को पक्का घर देने के बाद केंद्र सरकार ने अब हर नल में जल पहुंचाने की व्यवस्था की है, तो गृहिणियों को महंगाई से राहत देने, कुकिंग गैस उपलब्ध कराने और उनके खाते खोलने की व्यवस्था की गई है. उद्योगपतियों को कार्पोरेट टैक्स का फायदा है, तो मध्यम वर्ग को आयकर में राहत मिली है. युवाओं के लिए स्वरोजगार और स्किल डेवलपमेंट के प्रावधान हैं, तो इस बजट के माध्यम से निवेशकों की भी मदद की गई है.

    सिन्हा ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य तय किया है और हम उसी तरफ बढ़ रहे हैं. केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट इसी लक्ष्य को हासिल करने का पॉलिसी रोडमैप है.”उन्होंने कहा कि बजट 2020-21 में उपभोग, निवेश और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन दिया गया है. इसका लाभ तो सभी को मिलेगा ही, यह अर्थव्यवस्था के विकास और विस्तार को भी गति देगा. सरकार ने अर्थव्यवस्था के विकास को गति देने के लिए बजट में जो प्रावधान किए हैं, उससे विकास दर तेजी से बढ़ेगी और जल्द ही उसके 7.5 प्रतिशत पर पहुंच जाने की आशा है. केंद्र सरकार ने राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखने के सफल उपाय किए हैं।

    दरअसल कांग्रेस की कमलनाथ सरकार पुरानी दो खातों वाली अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रही है जिससे काला धन बनाया जाता रहा है। देश के सार्वजनिक बैंकों की 85 फीसदी से अधिक पूंजी चंद औद्योगिक घरानों के हाथों में थमाकर जो फर्जी विकास के प्रतिष्ठान खड़े किए गए थे उन पर एनपीए की राशि वसूली के अभियान और सरफेसी एक्ट के चलते तालेबंदी होने लगी है। इसके विपरीत रोजगार बढ़ाने के लिए जो राशि सीधे नव उद्यमियों को आबंटित की जा रही है उससे देश भारी पूंजीकरण हुआ है। कुप्रचार में भले ही बार बार बेरोजगारी की बात कही जा रही हो लेकिन हकीकत में जो राशि बाजार में पहुंची है उसने न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं बल्कि उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता भी बढ़ाई है। बैंकों के खजाने भर गए हैं और वे सस्ती दरों पर कर्ज देने के लिए उद्यमियों के चक्कर काट रहे हैं। जाहिर है कि नए स्टार्टअप कारोबार बढ़ाने में सहयोगी साबित हो रहे हैं।

    वित्त मंत्री तरुण भनोत का कहना है कि केन्द्रीय योजनाओं में राज्यों की हिस्सेदारी यूपीए सरकार के समय 25 प्रतिशत थी जिसे वर्तमान एनडीए सरकार ने बढ़ाकर 40 और कुछ योजनाओं में 50 प्रतिशत तक कर दिया था। इस प्रकार राज्य के अंशदान में 60 से 100 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। ये सब कहते हुए वे केन्द्र पर ज्यादा पूंजी जुटाने का आरोप लगा रहे हैं। हकीकत ये है कि केन्द्र की योजनाओं का लाभ मध्यप्रदेश समेत देश के तमाम राज्यों को मिल रहा है। पूंजी के बढ़े उत्पादन का लाभ भी सीधे राज्यों को ही तो मिल रहा है।

    पूंजी के बढ़ते संसाधनों के बावजूद उद्योगपति कहे जाने वाले कमलनाथ और रेत के कारोबारों में भागीदारी करने वाले वित्तमंत्री तरुण भनोत जनता को तरसाकर वित्तीय संकट का रोना रो रहे हैं। वे ये समझने भी तैयार नहीं हैं कि उनके घटिया वित्तीय प्रबंधन से प्रदेश की तो विकास दर प्रभावित हो ही रही है साथ में देश की विकास दर भी अपेक्षाकृत तौर पर गति नहीं पकड़ पा रही है। कल्याणकारी योजनाओं में सीधी कटौती करके कमलनाथ सरकार जो तीन हजार करोड़ रुपए बचाने का दावा कर रही है उससे अधिक राशि वह उन फर्जी योजनाओं पर खर्च कर चुकी है जिनसे भारी तादाद में काला धन बन रहा है। इस काले धन के निवेश से चंद औद्योगिक घरानों को बुलाकर कमलनाथ ये जताने का प्रयास कर रहे हैं कि देश का उद्योग जगत उनके इशारे पर चलता है। हालांकि ये उद्योग वे ही हैं जो भारी तादाद में रोजगार छीनने के लिए जाने जाते रहे हैं। आईटीसी ने जिस अगरबत्ती और बीड़ी उद्योग पर कब्जा जमाकर करोड़ों मजदूरों का रोजगार छीना है उसे रोजगार प्रदाता बताने की कोशिश से कमलनाथ की नीतियों की पोल सरे बाजार खुल रही है।

    भारतीय जनता पार्टी के राज्यस्तरीय तमाम नेता पिछले पंद्रह सालों से कांग्रेस की उसी सरकारीकरण और चोर बाजार वाली अर्थव्यवस्था की पैरवी करते रहे हैं जिसकी वजह से भारतीय रुपए की साख नहीं बढ़ सकी थी। आज वे भारत सरकार की श्वेत इकानामी का रहस्य भी नहीं समझ पा रहे हैं। यही वजह है कि भाजपा के नेता कमलनाथ सरकार की नीतियों का खुला विरोध नहीं कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की वजह से भाजपा ने कई राज्यों की सत्ताएं गंवा दी हैं। जबकि हकीकत में उनकी नासमझी भरी पिछलग्गू नीतियों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था तेजी नहीं पकड़ सकी थी। पूर्व प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह जिस इंस्पेक्टर राज के कभी न लौटने की बात कहते थे उनकी ही पार्टी की कमलनाथ सरकार आज इंस्पेक्टर राज की सहायता से भारी तादाद में काला धन जुटा रही है। तबादलों और पोस्टिंग से मौजूदा सरकार ने जितना काला धन जुटाया है वही अपने आप में एक रिकार्ड है। इसके बावजूद ये काला धन स्थानीय उद्योग और रोजगार बढ़ाने में उपयोगी साबित नहीं हो पा रहा है। आज देश में जो वित्तीय टूल विकसित हो गए हैं उनकी वजह से काले कारोबारियों की धरपकड़ सरल हो गई है। ये बात जरूर है कि अमले की कमी की वजह से सभी पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है लेकिन ये भी तय है कि आज नहीं तो कल वे जरूर धरे जाएंगे तब उन्हें कमलनाथ के छिंदवाड़ा माडल के छेद स्पष्ट नजर आने लगेंगे। जीएसटी और आयकर विभाग की क्षमता यदि नहीं बढ़ाई गई तो आर्थिक संकट का रोना रोते कांग्रेसी नेतागण देश को रूस जैसे पतन की राह पर ढकेलते रहेंगे।

  • वोट की तिजारत के दौर में कितना सुना जाएगा विष्णु का संघनाद

    वोट की तिजारत के दौर में कितना सुना जाएगा विष्णु का संघनाद

    भारतीय लोकतंत्र अब सिर्फ पूंजीवाद की ओर पींगें बढ़ा रहा है. इसका असर इतना व्यापक हो चला है कि चुनावी वादों के शोर में मूल्यों की राजनीति अप्रासंगिक हो चली है। वोट का अब राजनीतिक मूल्यों से नाता टूटता जा रहा है और वह मुफ्त सौगातों के ऊपर लिपटा रंग बिरंगा रैपर बन गया है। हालिया दिल्ली विधानसभा के चुनावों में ये असर इतना स्पष्ट नजर आया कि उसने भारत की राजनीति की तस्वीर साफ कर दी है। इसके पहले पांच राज्यों के चुनाव में भी कमोबेश यही तस्वीर उभरी थी लेकिन तब इसका शोर इतना तीखा नहीं था। इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने कई राज्य हाथ से गंवाने के बाद मध्यप्रदेश में अपने सांसद विष्णुदत्त शर्मा को प्रदेश की कमान थमा दी है। वे संघ की तपोनिष्ट सेवा भावना से प्रेरित होकर राजनीति में आए हैं। यही वजह है कि उनकी सफलता को लेकर तरह तरह के संशय और आशंकाएं व्यक्त की जाने लगीं हैं। राजनीति के दीवानों का कहना है कि एक ओर जब देश में अरविंद केजरीवाल की गिफ्ट वाली राजनीति का बोलबाला है तब विष्णुदत्त शर्मा का देशराग कहां टिक सकता है।

    मध्यप्रदेश का राजनीतिक परिदृष्य दिल्ली से अलहदा नहीं है। यहां की राजनीति भी गिव एंड टेक के नए नए प्रतिमानों के बीच झूलती रही है। पहले जो राजनीति गरीबों के इर्दगिर्द घूमती रही थी वह आज निम्न मध्यम वर्ग को भी अपने आगोश में ले चुकी है। पिछले पंद्रह सालों में भारतीय जनता पार्टी ने किसानों के साथ साथ प्रदेश के बड़े हिस्से तक सत्ता का लाभ पहुंचाया था। विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं ने शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता में चार चांद लगा दिए। सरकारी नौकरियां खरीदकर वेतन भत्तों के हकदार बने एक छोटे तबके को तो शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने नए वेतनमानों का लाभ दिया ही इसके साथ आम नागरिकों के बड़े तबके तक भी सत्ता का लाभांश पहुंचाने का प्रयोग किया। सैकड़ों योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के बड़े हिस्से तक सरकारी आय और कर्ज से जुटाए गए संसाधनों का लाभ पहुंचाया। शिवराज की सबसे बड़ी उपलब्धि यही रही कि उन्होंने प्रदेश के एक बड़े तबके को सत्ता में सीधे भागीदार बनाया। किसानों के खातों में लाभांश और मुआवजे की राशि पहुंचाने का इतना सफल प्रयोग इसके पहले देश की राजनीति में भी नहीं किया गया था। यही कारण था कि शिवराज को अजेय कहा जाने लगा था।

    भाजपा की राजनीति में सेंध लगाना कांग्रेस के लिए कठिन नहीं रहा। संगठन और सिद्धांतों के बगैर कांग्रेस ने प्रदेश में पल रहे असंतोष की कड़ियां जोड़ लीं और भाजपा को सत्ता गंवानी पड़ी। कमलनाथ के नेतृत्व में कुशल व्यूहरचना करके कांग्रेस के रणनीतिकारों ने भाजपा को चौखाने चित्त कर दिया। जयस के नेतृत्व में आदिवासियों के आंदोलन से उभारा गया असंतोष भाजपा के पतन की सबसे बड़ी वजह बना। किसान कर्ज माफी और बेरोजगारों को भत्ता देने जैसे लुभावने वादों ने मतदाताओं को बरगलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके विपरीत भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस को सत्ता में आने का मार्ग सुगम कर दिया। शिवराज सिंह चौहान के गलत टिकिट वितरण ने कांग्रेस को सुरक्षित गुप्त मार्ग उपलब्ध कराया और कांग्रेस ने फोटो फिनिश मात देकर सत्ता अपनी झोली में डाल ली।

    शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा के संगठन को जिस तरह अपने एकाधिकार से पंगु बनाया उससे भाजपा ने अपनी संघर्ष क्षमता गंवा दी। भाजपा के तमाम पदाधिकारी सत्ता की मलाई छानने में जुट गए और संगठन को उन्होंने हितग्राही मूलक योजनाओं के दरवाजे पटक दिया। यही वजह थी कि भाजपा का कैडर हितग्राही मूलक योजनाओं के सहारे सिसकता रहा और सत्ता के खिलाड़ी बड़े कारोबार से अपनी पीढ़ियां सुरक्षित करने में जुट गए। इस कवायद का सबसे बड़ा पहलू ये भी था कि उनके साथ कांग्रेस के वे तमाम सत्ता के दलाल भी सहयोगी के रूप में शामिल थे जिन्होंने मध्यप्रदेश की स्थापना के बाद से सत्ता की लूट में महारथ हासिल की थी। यही वजह थी कि कांग्रेस के लूटतंत्र की जड़ें पंद्रह सालों में और भी गहरी हो गई। आज कमलनाथ जिस माफिया राज को गरियाते फिरते हैं वह वास्तव में कांग्रेस की कथित गरीब परस्ती से ही उपजा था। पूर्व प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह जिस इंसपेक्टर राज को लानत भेजते हुए कहते थे कि वह अब कभी नहीं लौटेगा उसे कमलनाथ ने आते ही एक बार फिरसे जिंदा कर दिया।

    शुद्ध के लिए युद्ध हो, तबादलों का बेशर्म कारोबार हो या फिर माफिया के विरुद्ध संग्राम का उद्घोष हो सभी के पीछे सत्ता की आड़ में लूट ही प्रमुख धुरी रहा है। कमलनाथ और उनकी ब्रिगेड ने सत्ता की आड़ में करोड़ों रुपयों का जो खेल किया है उसका सीधा असर प्रदेश की जनता पर पड़ रहा है। मंहगाई और अराजकता ने अपराध का आंकड़ा बढ़ा दिया है। सरेआम लूट, हत्याएं और मारपीट की घटनाएं बढ़ गईं हैं। जिस डकैती समस्या को कभी समाप्त घोषित कर दिया गया था वह अब अपहरण उद्योग के रूप में एक बार फिर सिर उठाने लगी है। जीएसटी को असफल बनाने के लिए राज्य प्रायोजित जो टैक्स चोरी की मुहिम चलाई जा रही है उसने केन्द्रीय करों में मिलने वाले हिस्से को अप्रत्याशित रूप से घटा दिया है। कमलनाथ जिस बेशर्मी से खजाना खाली है का राग अलाप रहे हैं उससे भी साफ हो गया है कि मौजूदा सरकार के पास प्रदेश को सफल बनाने का कोई रोड मैप नहीं है।

    अब इन हालात में भाजपा ने विष्णुदत्त शर्मा को प्रदेश की कमान थमाकर फैला रायता समेटने की जो कवायद शुरु की है उसका कितना असर जमीन पर होगा उसका आकलन करना निश्चित ही बहुत जटिल हो गया है। विष्णुदत्त शर्मा संघ की जोड़ने वाली राजनीति की गोद में पले बढ़े हैं। वे सभी वर्गों और तबकों के बीच संबंधों की फेविकाल बिछाते रहे हैं। बेशक वे इस कार्य में निपुण हैं। बरसों से वे समाज को जगाने वाले प्रचारकों की भूमिका में रहे हैं। इसके बावजूद आज दौर बदल गया है। अब समाज को जगाने के बजाए उसे मुफ्तखोरी के नशे में डुबाने का दौर शुरु हो गया है। साम्यवाद जहां सख्ती से नियंत्रण करता रहा है वहीं पूंजीवाद सुर संगीत में डूबे प्रलोभनों की लोरियां सुना रहा है। ऩिश्चित रूप से ऐसे दौर में भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनकर विष्णुदत्त शर्मा को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। ये चुनौतियां उनकी अब तक की राजनीतिक विरासत से बिल्कुल अलग हैं। यही वजह है कि भाजपा और संघ के स्वयंसेवकों के सामने तरह तरह के सवाल उठ रहे हैं जिनका शमन सिर्फ उन्हें ही करना है। देखना है वे राजनीति के इस व्यूह को कैसे भेद पाते हैं।

  • भाजपा ने संगठन गढ़ने बीडी शर्मा को बनाया प्रदेश अध्यक्ष

    भाजपा ने संगठन गढ़ने बीडी शर्मा को बनाया प्रदेश अध्यक्ष

    भोपाल,15 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री एवं सांसद विष्णुदत्त (व्हीडी) शर्मा को राष्ट्रीय नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। श्री विष्णुदत्त शर्मा ने अपने सामाजिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की थी। इसके बाद वे कई वर्षों तक परिषद में पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते रहे। वर्तमान में वे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री, मध्यप्रदेश ओलपिंक एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष के साथ ही खजुराहो लोकसभा सीट से सांसद हैं।

    श्री विष्णुदत्त शर्मा का लंबा कार्यकाल विद्यार्थी परिषद में कड़े परिश्रम और संघर्षों के साथ कार्य करते हुए व्यतीत हुआ है। उन्होंने अपने सामाजिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1986 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की। वे वर्ष 1994 तक विद्यार्थी परिषद में विभिन्न पदों पर रहे। वर्ष 1995 से परिषद में पूर्णकालिक के रूप में कार्य करते हुए विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। यह सफर वर्ष 2013 तक सतत जारी रहा। वर्ष 2013 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश किया तथा विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया।

    श्री विष्णुदत्त शर्मा का जन्म 01 अक्टूबर 1970 को मुरैना जिले के ग्राम सुरजनपुर में हुआ। उनके पिता श्री अमर सिंह शर्मा हैं। श्री विष्णुदत्त शर्मा ने एमएससी (एग्रीकल्चर एग्रोनामी) से की। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गृहग्राम सुरजनपुर के सरकारी स्कूल में हुई। इसके बाद कक्षा नवमी से 12वीं तक की पढ़ाई मुरैना से की। शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मुरैना से बीएससी प्रथम वर्ष की पढ़ाई की। आगे की पढ़ाई के लिए ग्वालियर के कृषि महाविद्यालय में एडमिशन लिया। इसके बाद एमएससी की पढ़ाई के लिए सीहोर के कृषि महाविद्यालय में प्रवेश लिया। बचपन से ही उनकी सामाजिक कार्यो में रूचि थी। यही कारण रहा कि छात्र जीवन से ही उन्होंने सार्वजनिक राजनीति की शुरूआत कर दी। वे वर्ष 2001 से 2005 तक राष्ट्रीय मंत्री, वर्ष 2007 से 2009 तक परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री एवं तत्पश्चात वर्ष 2013 तक क्षेत्रीय संगठन मंत्री मध्यक्षेत्र (मप्र-छग) रहे। वर्ष 2001 से वर्ष 2005 तक प्रदेश संगठन मंत्री महाकौशल का दायित्व भी संभाला। इससे पहले वर्ष 1993 में मध्यभारत के प्रदेश मंत्री रहे। उज्जैन के विभाग संगठन मंत्री एवं ग्वालियर के विभाग प्रमुख का दायित्व भी उन्होंने बखूबी निभाया।

    श्री विष्णुदत्त शर्मा ने वर्ष 2013 में भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश किया तो यहां भी उन्हें कई दायित्व मिले। पार्टी ने उन्हें वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में झारखंड के संथाल क्षेत्र की 6 लोकसभा सीटों के चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी। यहां के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें संथाल क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया। इसके अलावा दिल्ली, बिहार, असम, मध्यप्रदेश सहित कई अन्य प्रदेशों में विधानसभा चुनाव में कार्य संचालन एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी भी सौंपी गईं। वे मार्च 2014 से दिसंबर 2016 तक नेहरू युवा केंद्र संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे। 14 अगस्त 2016 से भाजपा के प्रदेश महामंत्री का दायित्व निभा रहे हैं।

    श्री विष्णुदत्त शर्मा ने राजनीति के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी कई उपलब्धियां हासिल की हैं। इनमें बेस्ट जोन इंटर यूनिवर्सिटी बॉलीवाल प्रतियोगिता में जवाहरलाल नेहरू कृषि विशवविद्यालय का प्रतिनिधित्व, कबड्डी और बॉलीवाल प्रतियोगिताओं में महाविद्यालयीन टीम के कप्तान, विभिन्न प्रतियोगिताओं में कृषि महाविद्यालय ग्वालियर का प्रतिनिधित्व, एथलेटिक्स प्रतियोगिता में महाविद्यालय स्तर पर चैंपियन भी रहे। इसके अलावा एनसीसी का सी सर्टिफिकेट प्राप्त किया एवं अखिल भारतीय ट्रेकिंग शिविर गंगोत्री-गौमुख में सहभागिता एवं एनसीसी का बी सर्टिफिकेट प्राप्त किया।

    श्री विष्णुदत्त शर्मा ने देश में बढ़ते भष्टाचार के खिलाफ भी अभियान चलाया। इसके लिए उन्होंने वर्ष 2012 में यूथ अगेंस्ट करप्शन के तहत कार्य किया। उन्होंने मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक के रूप में देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर भष्टाचार के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाया, साथ ही कई स्थानों पर आंदोलन एवं प्रदर्शन का नेतृत्व किया। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल द्वारा दिल्ली एयरपोर्ट के भूमि घोटाले के विरूद्ध वर्ष 2012 में बालाघाट से गोदिंया (महाराष्ट्र) तक पदयात्रा की। देश भर में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं तत्कालीन केंद्र सरकार के खिलाफ मार्च 2012 में दिल्ली में संसद का घेराव किया। अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री रहते हुए देश भर में प्रवास किया एवं शिक्षा के व्याप्त व्यापारीकरण एवं अव्यवस्थाओं के खिलाफ जन आंदोलन खड़ा करते हुए सड़क से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक संघर्ष किया। मध्यप्रदेश में निजी मेडिकल कॉलेजों में गरीब बच्चों के प्रवेश में आने वाली कठिनाइयों के लिए कड़ा संघर्ष किया। इसके अलावा नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए मां नर्मदा अध्ययन दल का गठन कर नर्मदा अध्ययन यात्रा की। श्री विष्णुदत्त शर्मा ने विद्यार्थी कल्याण न्यास संस्था की स्थापना भी की। यह संस्था गरीब एवं पिछड़े वर्गों के सामाजिक उत्थान के लिए कार्य करती है।

    श्री विष्णुदत्त शर्मा को अपने बेहतर कार्यों के लिए कई अवार्ड भी प्राप्त हुए हैं। वर्ष 2018 में उन्हें दिल्ली के प्रतिष्ठित कलाम फाउंडेशन द्वारा कलाम इनोवेशन एंड गवर्नेंस अवार्ड मिला। एमआईटी पुणे द्वारा यूथ लीडर अवार्ड प्रदान किया गया। इसके साथ ही शासकीय एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा युवाओं के नेतृत्व प्रदान करने, सामाजिक कार्यों के लिए प्रेरित करने, सेवा कार्यों को मान्यता प्रदान करते हुए कई अन्य अवार्ड, स्मृति चिन्ह एवं अभिनंदन पत्र भी मिले।

    श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कई विदेश यात्राएं भी कीं। इनमें भारत सरकार के युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय द्वारा इंडो-चीन यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम 2015 में भारतीय डेलीगेशन का नेतृत्व प्रमुख रहा। अंतरराष्ट्रीय एग्रीकल्चर सेमिनार के लिए बैंकाक गए। राजनीतिक, सामाजिक अध्ययन के लिए सिंगापुर की यात्रा की। साथ ही नेपाल भी गए।

  • पोर्टल से मकान आबंटन सरल बोले प्रमुख सचिव गृह एस.एन.मिश्रा

    पोर्टल से मकान आबंटन सरल बोले प्रमुख सचिव गृह एस.एन.मिश्रा

    भोपाल,14 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। सरकारी कर्मचारियों और अफसरों को आवास आवंटन करने के लिए बनाए गए वेब पोर्टल ई – आवास ने अब जरूरत मंद अमले को सरकारी मकान आबंटित करने की व्यवस्था सरल बना दी है। इस पोर्टल की सुविधाओं के संबंध में आज भोपाल स्थित समस्त डीडीओ को नरोन्हा अकादमी में प्रशिक्षण दिया गया । प्रमुख सचिव गृह एस.एन.मिश्रा और संपदा संचालक आर.आर.भोसले ने भी प्रशिक्षण को संबोधित किया ।

    इस नए वेब पोर्टल से संपदा संचालनालय से शासकीय आवासों का बेहतर प्रबंधन किया जाएगा। शासकीय आवास के लिए अभी कर्मचारियों को 25 से 30 साल तक की प्रतीक्षा करनी पड़ रही है उसके स्थान पर उनको ई -आवास वेब पोर्टल के माध्यम से शासकीय आवासों का बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता के कारण 5 वर्ष में ही शासकीय आवास मिल सकेंगे।

    संपदा संचनालय भोपाल ई-गवर्नेंस पोर्टल www.sampada.mp.gov.in

    एनआईसी भोपाल के सहयोग से विकसित किया गया है। इसमें समस्त आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को शासकीय सेवकों द्वारा आवास आवंटन हेतु ऑनलाइन भरे गए आवेदनों का सत्यापन करने का कार्य किया जाएगा जिसमें अपात्र आवेदनों को अस्थाई रूप से निरस्त करने का भी प्रावधान डीडीओ को दिया गया है इसके साथ ही जो भी आवेदन इसमें ऑनलाइन ही निरस्त किए किए गए होंगे उसकी भी जानकारी सीधे शासकीय सेवक को एवं उसके डीडीओ को भी मिल पाएगी । शासकीय कर्मचारियों को संपदा संचनालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। स्वीकृत आवेदनों की जानकारी एवं वेटिंग लिस्ट की भी जानकारी इस पोर्टल के माध्यम से शासकीय कर्मचारी प्राप्त कर सकेंगे ।

    अगले चरण में नवीन निर्मित किए जा रहे हैं वेब पोर्टल को कोष एवं लेखा संचनालय के आईएफएमएस आई पोर्टल से इंटीग्रेशन का कार्य लगभग पूर्णता की ओर है जिसमें कर्मचारी की वेतन आहरण एवं सेवानिवृत्त के डाटा के आधार पर संपदा संचनालय द्वारा स्थानांतरण सेवानिवृत्त दिवंगत आदि होने की स्थिति में आवास रिक्त कराए जाने की कार्यवाही की जा सकेगी । साथ ही शासकीय आवासों की लाइसेंस फीस की वसूली संबंधी कार्य भी नवीन पोर्टल के आधार पर की जा सकेगी ।

    इस अवसर पर कार्यक्रम में प्रमुख सचिव गृह एस.एन.मिश्रा,संचालक संपदा आर.आर.भोंसले, आवंटन अधिकारी संपदा मुकुल गुप्ता एवं सुनील जैन वरिष्ठ तकनीकी निदेशक भी उपस्थित थे ।

  • आपमें काम शुरु करने की ताकत होती तो आईएएस अफसर बनकर नौकरी नहीं करते-गडकरी

    आपमें काम शुरु करने की ताकत होती तो आईएएस अफसर बनकर नौकरी नहीं करते-गडकरी

    नागपुर 20 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने आईएएस अफसरों के काम पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा- ‘मैं आपको सच बताता हूं, पैसे की कोई कमी नहीं है, जो कुछ कमी है वो सरकार में काम करने वाली मानसिकता की है। जो निगेटिव एटीट्यूड है, निर्णय करने में जो हिम्मत चाहिए, वो नहीं है।’ केंद्रीय मंत्री रविवार को नागपुर में विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के हीरक जयंती समारोह के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे।

    नितिन गडकरी ने आगे कहा- ‘परसों मैं एक बड़े फोरम में था, वे(आईएएस अफसर) कह रहे थे- हम यह शुरू करेंगे, वो शुरू करेंगे, तो मैंने उनको कहा- आप क्यों शुरू करेंगे? आपकी अगर शुरू करने की ताकत होती तो आप आईएएस अफसर बनकर यहां नौकरी नहीं करते। उन्होंने आगे कहा कि आप जाकर कोई बड़ा उद्योग कर सकते थे, आपका यह काम नहीं है, जो कर सकता है उसकी आप ज्यादा मदद करो, आप इस लफड़े में मत पड़ो। वी आर ओनली फैसिलिटेटर।’

    इस दौरान गडकरी ने अपने लक्ष्यों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में हमने 17 लाख करोड़ रुपए के काम करवाए हैं। इस साल वह 5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचना चाहते हैं।

    केंद्रीय मंत्री गडकरी ने यह भी कहा कि लोगों को उस क्षेत्र में काम करना चाहिए, जिसमें वे अच्छा कर सकते हैं। इससे पहले गडकरी ने रविवार को छत्रपति नगर के एक ग्राउंड में क्रिकेट भी खेला। उन्होंने शहर के कई ग्राउंड्स का दौरा किया। साथ ही खासदर क्रीड़ा महोत्सव के खिलाड़ियों की हौसला अफजाई भी की। केंद्रीय मंत्री ने एक ने एक ट्वीट में कहा- मैंने शहर की कई जगहों पर खिलाड़ियों के साथ अच्छा वक्त बिताया। छत्रपति नगर में मैं खुद को खिलाड़ियों के साथ खेलने से नहीं रोक सका।

  • होलिका में गौकाष्ठ का  उपयोग करें- कलेक्टर

    होलिका में गौकाष्ठ का उपयोग करें- कलेक्टर

    भोपाल12 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)।कलेक्टर तरूण पिथोड़े और केन्द्रीय पर्यावरण विभाग के अधिकारियों के साथ हुई चर्चा में निर्णय लिया गया कि इस बार होलिका दहन में लकड़ी का उपयोग नहीं करते हुए अधिकाधिक गौकाष्ठ का उपयोग हो इसके लिए विशेष अभियान चलाकर नागरिकों और स्कूली विद्यार्थियों को जागरूक किया जाये । भोपाल जिले में शवदाह गृहों में भी गौकाष्ठ का उपयोग हो इसके लिए भी मुहिम चलाई जायेगी । पर्यावरणविद डॉ. योगेश सक्सेना ने बताया कि जिले की शासन सेअनुदान प्राप्त गौशालाएं गौकाष्ठ का निर्माण कर शवदाह गृहों एवं लकड़ी के टालों पर इसका विक्रय कर रोजगार का जरिया बनाया जा सकता है । इसी प्रकार सेन्ट्रल जेल भोपाल के कैदियों को भी गौकाष्ठ निर्माण कराकर रोजगार से जोड़ा गया है । इसके लिए गोकाष्ठ निर्माण की मशीन जेल परिसर में स्थापित की गई है ।

    पर्यावरण संरक्षण प्रदेश के लिए स्थाई जरूरतों में से एक है । पर्यावरण केसंरक्षण, बचाव और हरा भरा शीतल प्रदेश हो इसके लिए शासन प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है । पेड़ों को कटने से बचाने के लिए गौकाष्ठ आधारित लकड़ी, कंडे और अन्य संसाधन आज पर्यावरण को सामान्य स्थिति में लाने के लिए उपयोग में लाए जा रहे हैं ।

    कमिश्नर एवं कलेक्टर भोपाल के इस अभियान से नवाचार हो रहे हैं । गौकाष्ठ के उपयोग से सघन जंगल, जलवायु और पर्यावरण को बचाने में मदद मिलेगी । गौकाष्ठ आधारित वस्तुएं पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए उपयोग में लाई जा रही हैं ।इस ओर कईं सामाजिक संस्थाएं, समाजसेवी भी अपना योगदान कर रहे हैं । गौकाष्ठ के उपयोग से जहां पर्यावरण को नई ऊर्जा मिल रही है वहां इसके उपयोग से पर्यावरण और बेवक्त बदलते मौसम की प्रतिकूल परिस्थिति को बदलने में मदद मिल रही है । गौकाष्ठ के उपयोग से जहां पेड़ों को कटने से बचाने में मदद मिलेगी वहां इसके उपयोग से रोजगार के नवीन अवसरों का सृजन हो सकेगा । साथ ही विभिन्न संस्थाओं को, आजीविका मिशन और गौशालाओं को पर्याप्त व्यवस्था के साथ साथ उनकी आर्थिक स्थिति में भी बदलाव लाया जा सकेगा । महिलाओं को भी रोजगारसे जोड़ा जा सकेगा । इससे शासन प्रशासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ विभिन्न संस्थाओं और शासकीय अशासकीय गौशालाओं को भी मिल सकेगा ।

    क्या है गौकाष्ठ

    गाय के गोबर से निर्मित कंडे रूपी लकड़ियां हैं । गौकाष्ठ के उपयोग से वातावरण में कार्बनडाई आक्साईड की मात्रा भी कम होती है और गौकाष्ठ की केलोरिक वेल्यू लकड़ी से अधिक और घनत्व ज्यादा होता है जो पर्याप्त मात्रा में ईधन के लिए भी अनुपयोगी है । गौकाष्ठ निर्मित वस्तुएं प्रदूषण को रोकने, बढ़ती जरूरतों के लिए उपयोगी साबित हो रही हैं । गौकाष्ठ दैनिक जीवन में भी बहुतायत उपयोगी साबित हो रही है, साथ ही कईं कार्यक्रमों में भी इसकी उपयोगिता प्रमाणित है । गौकाष्ठ के उपयोग से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे । साथ ही पूरे प्रदेश में लकड़ियों एवं अन्य वस्तुओं के जलाने से पर्यावरण को बचाया जा सकेगा । पेड़ों की अत्यधिक कटाई को रोकने में मदद मिलेगी एवं इसके दोहरे उपयोग से हम पर्यावरण के संरक्षण में भागीदार बनेंगे और वातावरण को शुद्ध बना सकेंगे ।

  • पुलिस से परिचित कराएगी डाटा बुक

    पुलिस से परिचित कराएगी डाटा बुक

    पुलिस महानिदेशक श्री सिंह ने किया ”स्‍टेटिस्टिकल डाटा-2020” पुस्‍तक का विमोचन

    भोपाल, 10 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र). पुलिस मुख्‍यालय की योजना शाखा द्वारा पुलिस की अन्‍य शाखाओं के सहयोग से मध्‍यप्रदेश पुलिस के सांख्‍यकीय आंकड़ों को समाहित कर ”स्‍टेटिस्टिकल डाटा-2020” पुस्‍तक का प्रकाशन किया है। पुलिस महानिदेशक श्री विजय कुमार सिंह ने सोमवार को इस पु‍स्‍तक का विमोचन किया।

    ”स्‍टेटिस्टिकल डाटा-2020” पु‍स्‍तक को इस हिसाब से तैयार किया गया है, जिससे मध्‍यप्रदेश पुलिस की बेहतरी व क्षमता संवर्धन के लिए उपयोगी योजनाएं तैयार की जा सके। मध्‍यप्रदेश पुलिस के आधुनिकीकरण एवं उन्‍न्‍यन को ध्‍यान में रखकर इस पु‍स्‍तक को अंतिम रूप दिया गया है।

          विमोचन कार्यक्रम में अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक योजना श्री अनंत कुमार सिंह, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक प्रबंध श्री डी श्रीनिवास राव, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक निजी सुरक्षा एजेंसी श्री एम.एस.शर्मा, पुलिस महानिरीक्षक योजना श्री योगेश चौधरी, पुलिस महानिरीक्षक अपराध अनुसंधान श्री डी.श्रीनिवास वर्मा, सहायक पुलिस महानिरीक्षक संपदा श्री सुनील तिवारी व सहायक पुलिस महानिरीक्षक योजना श्री मनोज केडिया भी मौजूद थे।

    अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक योजना श्री अनंत कुमार सिंह के मार्गदर्शन में तैयार हुई इस सांख्यिकी पुस्‍तक में पुलिस से संबंधित बुनियादी आंकड़े मसलन पुलिस में क्षेत्र के अनुपात में उपलब्‍ध मानव संसाधन अर्थात आई.जी., डीआईजी, एसपी, सीएसपी, एसडीओपी, सशस्‍त्र बल इत्‍यादि की संख्‍या उपलब्‍ध है। साथ ही कुल पुलिस थानों की संख्‍या के साथ-साथ महिला, अजाक, यातायात व सीआईडी थानों की संख्‍या भी पुस्‍तक में शामिल की गई है। रेंजवार पुलिस थानों में दर्ज अपराधों की स्थिति सहित मध्‍यप्रदेश से संबंधित भौगोलिक, प्रशासनिक व सामाजिक सांख्‍यकीय आंकड़े भी पुस्‍तक में प्रमुखता से शामिल किए गए हैं।

  • लैंगिक अपराधों की विवेचना फोरेंसिक साक्ष्यों से करेंःडीजीपी

    लैंगिक अपराधों की विवेचना फोरेंसिक साक्ष्यों से करेंःडीजीपी

    18 जिलों के 42 पुलिस अधिकारियों ने सीखीं उत्‍कृष्‍ट विवेचना की बारीकियाँ

    भोपाल,07 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)।  पुलिस अधिकारी महिला अपराधों से संबंधित नये कानूनों की बारीकियाँ समझें और साक्ष्‍य आधारित, आधुनिक एवं स्‍मार्ट पुलिसिंग के जरिए महिला उत्‍पीड़न से संबंधित अपराधों की ऐसी विवेचना करें, जिससे कोई भी अपराधी बचने न पाए। यह बात पुलिस महानिदेशक विजय कुमार सिंह ने कही। श्री सिंह शुक्रवार को मध्‍यप्रदेश पुलिस अकादमी भौंरी में ”लैंगिक अपराधों की विवेचना में पुलिस की भूमिका” विषय पर संपन्‍न हुई मास्‍टर ट्रेनर्स की तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने कहा क्रिमनल जस्टिस सिस्टम के सभी अंगों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है, तभी हम पीड़ित को न्याय और अपराधी को सजा दिलाने में सफल होंगे।

    सर्वोच्‍च न्‍यायालय द्वारा महिला अपराधों की विवेचना के संबंध में दिए गए दिशा-निर्देशों के परिपालन में पुलिस मुख्यालय की निर्देश पर यह कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में प्रदेश के 18 जिलों से आए उप निरीक्षक से लेकर अतिरिक्‍त पुलिस अधीक्षक स्‍तर के 42 पुलिस अधिकारियों को खास तौर पर महिलाओं के उत्पीड़न से संबंधित अपराधों की उत्कृष्ट विवेचना करने के गुर सिखाए गए। समापन सत्र में विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण श्री संजय राणा,  मध्‍यप्रदेश पुलिस अकादमी के निदेशक श्री के.टी.वाइफे एवं संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवा डॉ वंदना खरे मंचासीन   थीं।

    पुलिस महानिदेशक श्री सिंह ने कहा कि महिला अपराधों की विवेचना के दौरान विशेष सावधानी व सतर्कता बरतने की जरूरत है। साक्ष्‍य जुटाने व डीएनए जाँच के लिए सैंपल भेजने से लेकर उसकी रिपोर्ट न्‍यायालय में प्रस्‍तुत करने तक निर्धारित प्रोटोकॉल व समय-सीमा का पालन करें। उन्‍होंने पुलिस अधिकारियों से इस काम को चुनौती के रूप में लेकर अंजाम देने को कहा।

    विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण श्री संजय राणा ने कहा कि सर्वोच्‍च न्‍यायालय के दिशा-निर्देशों के पालन में एक साल के भीतर प्रदेश भर में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर लगभग 650 पुलिस अधिकारियों को उत्‍कृष्‍ट विवेचना का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्‍होंने कहा विशेषज्ञ रिसोर्स पर्सन का लाभ जिले स्‍तर तक पहुँचाने के लिए वीडियो कॉन्‍फ्रेसिंग के जरिए भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए स्‍मार्ट क्‍लास तैयार किए जा रहे हैं।

    कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा यौन अपराधों की उत्‍कृष्‍ट विवेचना व वैज्ञानिक साक्ष्‍य जुटाने की बारीकियां सहित इस संबंध में सर्वोच्‍च न्‍यायालय द्वारा दिए गए अन्‍य दिशा-निर्देशों के बारे में विस्‍तार पूर्वक बताया गया। यहाँ प्रशिक्षित किए गए सभी मास्‍टर ट्रेनर्स अपने-अपने जिलों में जाकर पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित करेंगे।

    समापन सत्र में पुलिस महानिदेशक ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर प्रशिक्षुओं ने भी अपना फीडबैक दिया और प्रशिक्षण को अत्‍यंत उपयोगी बताया। आरंभ में पुलिस प्रशिक्षण अकादमी के निदेशक श्री के.टी.वाईफे ने कार्यशाला की विषय वस्‍तु पर प्रकाश डाला। सभी अतिथियों को स्‍मृति चिन्‍ह के रूप में पुस्‍तकें भेंट की गईं। समापन सत्र का संचालन प्रशिक्षण अकादमी के अतिरिक्‍त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज पाण्‍डेय ने किया। अंत में अतिरिक्‍त पुलिस अधीक्षक श्रीमती रश्मि पाण्‍डेय ने सभी के प्रति आभार व्‍यक्‍त किया।

    इस अवसर पर  अतिरिक्‍त पुलिस अधीक्षक प्रशिक्षण श्रीमती निमिषा पाण्‍डेय व मध्‍यप्रदेश पुलिस अकादमी के अतिरिक्‍त पुलिस अधीक्षक श्री कमल मौर्य सहित अन्‍य संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

    शंका समाधान के लिए शुरू होगी इनफोरमेशन डेस्‍क

    पुलिस महानिदेशक श्री विजय कुमार सिंह ने मध्‍यप्रदेश पुलिस प्रशिक्षण अकादमी भौंरी की प्रशिक्षण व्‍यवस्‍था एवं सुविधाओं की सराहना की। साथ ही कहा कि यहाँ से प्रशिक्षण लेकर जाने वाले पुलिस अधिकारियों सहित अन्‍य विवेचना अधिकारियों की शंकाओं के समाधान के लिए अकादमी में एक इनफोरमेशन डेस्‍क शुरू की जाए।

  • कमलनाथ का सिख दंगों से कोई नाता नहीं -पीसी शर्मा

    कमलनाथ का सिख दंगों से कोई नाता नहीं -पीसी शर्मा

    भोपाल,6 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। दिल्ली में 1984 के सिख विरोधी दंगों से मुख्यमंत्री कमलनाथ का कोई लेना देना नहीं है। इस मुद्दे पर अब तक बिठाए गए आयोगों ने भी कमलनाथ को दोषी नहीं पाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसके बावजूद सदन में कहा कि कांग्रेस ने सिख दंगों के आरोपों के बाद भी कमलनाथ को मुख्यमंत्री बना रखा है। ये तथ्य गलत है और प्रधानमंत्री जैसे पद पर बैठे व्यक्ति को ये कहना शोभा नहीं देता। आज राजधानी के जनसंपर्क संचालनालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में श्री शर्मा ने दावा किया कि श्री कमलनाथ के नेतृत्व में प्रदेश विकास की ओर बढ़ रहा है।

    जब उन्हें बताया गया कि सिख दंगों के दौरान इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर संजय सूरी ने अपनी आंखों देखी घटना के बाद अपने अखबार में खबर छापी थी।जिसमें लिखा गया था कि स्वयं कमलनाथ ने सेंट्रल दिल्ली के रकाबगंज गुरुद्वारे के बाहर भीड़ का नेतृत्व किया था और उनकी उपस्थिति में दो सिख मारे गए थे। इस मामले की जांच करने वाले नानावटी आयोग ने कमलनाथ को संदेह का लाभ दिया था।जांच आयोग ने दो लोगों की गवाही सुनी थी, जिसमें तत्कालीन इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर संजय सूरी भी शामिल थे। उन्होंने कमलनाथ के मौके पर मौजूद होने की पुष्टि की थी। कमलनाथ ने यह स्वीकार किया था कि वे वहां मौजूद थे और भीड़ को शांत करने की कोशिश कर रहे थे।

    पिछले दिनों शिरोमणी अकाली दल के सदस्य और दिल्ली के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने मांग की थी कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तुरंत कमलनाथ को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने के लिए कहें। उन्होंने दो गवाहों के लिए भी सुरक्षा की मांग की थी जो कमलनाथ के खिलाफ अदालत में गवाही देने के लिए तैयार हैं।

    केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने गृह मंत्रालय के सिख विरोधी दंगों का केस वापस खोलने के फैसले का स्वागत किया था। हरसिमरत बादल ने अपने ट्वीट में लिखा था कि ‘मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के खिलाफ मुकदमे को फिर से खोलना सिखों की जीत है। गलत तरीके से हल किए गए मामलों को फिर से खोलने के हमारे निरंतर प्रयासों का नतीजा है। अब कमलनाथ अपने अपराधों की कीमत चुकाएंगे.’

  • जनगणना कार्य में एमपी ने लगाया अड़ंगा

    जनगणना कार्य में एमपी ने लगाया अड़ंगा

    मंत्रि-परिषद के निर्णय

    भोपाल,5 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)।मुख्यमंत्री कमल नाथ की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में ‘मध्यप्रदेश हाइब्रिड नवकरणीय ऊर्जा एवं एनर्जी स्टोरेज नीति’ लागू करने का निर्णय लिया। यह नीति मध्यप्रदेश राज्य में 3 परियोजनाओं के विकास के लिए लागू की जायेगी। इसमें हायब्रिड पॉवर परियोजना (एच.पी.पी.) में एक परियोजना स्थल पर दो या दो से अधिक नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों से विद्युत उत्पादन होगा, जिसमें ऊर्जा भण्डारण भी शामिल हो सकता है।

    मंत्रि-परिषद ने शासकीय संकल्प पारित कर भारत सरकार से नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 को निरसित करने का आग्रह किया तथा ऐसी नयी सूचनाओं, जिन्हें राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) 2020 में अद्यतन करने के लिए चाहा गया है, को वापस लेने एवं उसके पश्चात ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के अधीन गणना करने का कार्य करने का भी आग्रह किया।

    ‘मध्यप्रदेश हाइब्रिड नवकरणीय ऊर्जा एवं एनर्जी स्टोरेज नीति’ के अंतर्गत इसके अलावा, नवकरणीय ऊर्जा के मौजूदा परियोजना स्थलों के सह-स्थित या स्टैंड-अलोन एनर्जी स्टोरेज संयंत्र स्थापित किये जा सकते हैं ताकि नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों का समुचित उपयोग किया जा सके एवं ग्रिड स्थिरता की दिशा में प्रयास किये जा सकें। उपलब्ध अधोसंरचनाओं और नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों की क्षमताओं के दोहन करने के लिए विभिन्न नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों के हायब्रिडाईजेशन और विभिन्न प्रकार के ऊर्जा भण्डारण को बढ़ावा देने के लिए एक प्रगतिशील नीति की आवश्यकता प्रतिपादित की गई।

    मंत्रि-परिषद ने सामाजिक क्षेत्र में नि:शक्त, निर्धनों के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं को पुरस्कार के लिए इन्दिरा गाँधी समाजसेवा पुरस्कार 1992 में संशोधन कर पुरस्कार की राशि को एक लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने का अनुसमर्थन किया।

    मंत्रि-परिषद ने मंत्रियों द्वारा दिये जाने वाले स्वेच्छानुदान की राशि में किसी एक प्रकरण के लिए वर्तमान में निर्धारित सीमा राशि 20 हजार रूपये को बढ़ाकर 40 हजार रूपये करने का निर्णय लिया गया। मंत्रि-परिषद ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग की योजना ‘विधानसभा भवन एवं विधायक विश्राम गृह का विस्तारण ‘ को निरंतर रखने के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति देने की मंजूरी दी।

    मंत्रि-परिषद ने स्कूल शिक्षा विभाग के अन्तर्गत राज्य स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक संवर्ग) शर्तें एवं भर्ती नियम 2018 में परिवीक्षा अवधि, परिवीक्षा अवधि के वेतनमान एवं आरक्षण नियमों में किये गये संशोधन के प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया। इसी प्रकार मध्यप्रदेश जनजातीय एवं अनुसूचित जाति शिक्षण संवर्ग, सेवा एवं भर्ती नियम 2018 में संशोधन करने का निर्णय भी लिया गया।

    मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राज्य सेवा परीक्षा में संबंधित राज्य सेवा परीक्षा नियम 2015 में भर्ती की प्रक्रिया के संबंध में संशोधन करने का निर्णय लिया और यह संशोधन राज्य सेवा परीक्षा 2019 से लागू करने की मंजूरी दी।

    मंत्रि-परिषद ने शासन के विभिन्न विभागों द्वारा क्रियान्वित की जाने वाली योजनाओं एवं परियोजनाओं, सतत विकास के लक्ष्य, आकांक्षी जिलों तथा विकासखण्डों की निरंतर प्रभावी मॉनीटरिंग के लिए राज्य योजना आयोग में क्रियाशील प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग यूनिट का कार्यकाल अगले 5 वर्षों के लिए निरंतर रखने की मंजूरी दी। यूनिट में वर्तमान में कार्यरत सलाहकार एवं कार्यकारी पूर्व में स्वीकृत अवधि 31 मार्च 2020 तक कार्यरत रहेंगे। बैठक में एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2023 तक की अवधि के लिए 31 पदों पर संविदा आधार पर नियुक्ति करने की मंजूरी दी गयी । इसमें प्रिंसिपल कंसलटेंट का एक, सीनियर कंसलटेंट के 10 और कंसलटेंट के 20 पद शामिल हैं। संविदा आधार पर चयन की प्रक्रिया योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा निर्धारित की जायेगी।

    मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी परियोजनाओं के विकास एवं रख-रखाव करने के लिए राज्य स्तर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन मैप-आई.टी. अन्तर्गत गठित सेन्टर ऑफ एक्सिलेंस के लिए बढ़ती चुनौतियों एवं इसके सुदृढ़ीकरण को ध्यान में रखते हुये कुल 16 नये पदों के सृजन की मंजूरी दी । सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा जिन विभागों के लिए कार्य किया जायेगा, उन विभागों से मैप-आई.टी. द्वारा निर्धारित मापदंड अनुसार शुल्क दिये जाने का अनुमोदन किया गया।

  • सरकार की धूर्तता उजागर करने का धर्म निभाए प्रेस

    सरकार की धूर्तता उजागर करने का धर्म निभाए प्रेस

    प्रदेश भर के पत्रकार संगठन कल पांच फरवरी को सरकार से अपनी नाराजगी जताने भोपाल में इकट्ठे हो रहे हैं। उनकी नाराजगी की वजह सरकार की ओर से दिए जाने वाले विज्ञापनों में मनमानी कटौती करना है। पूर्व की शिवराज सिंह सरकार को विज्ञापन वाली सरकार बताकर सत्ता में आई कमलनाथ सरकार शुरु से प्रेस विरोधी रही है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की प्रेस के प्रति बदनीयती को देख चुकने के बावजूद ढेरों पत्रकारों ने कांग्रेस को सत्ता में लाने का एजेंडा चलाया था। इन्हीं पत्रकारों ने छिंदवाड़ा मॉडल को प्रदेश के विकास का राजमार्ग बताया था। ये वही पत्रकार थे जो शिवराज सिंह चौहान की सरकार की नालायकियों पर भी वाहवाही कर रहे थे। शिवराज की भाजपा भी उन्हीं पत्रकारों पर लट्टू थी जो अंधाधुंध कर्ज लेकर किए जा रहे विकास को प्रदेश का भविष्य बता रहे थे। हर साल तकरीबन पांच सौ करोड़ रुपए विज्ञापन के नाम पर खर्च करके शिवराज सरकार ने सौजन्य का वातावरण बनाया था। ये पांच सौ करोड़ रुपए प्रदेश के दो लाख दस हजार करोड़ के बजट का बहुत छोटा हिस्सा होता था। ये जानते बूझते कमलनाथ सत्ता में आने के बाद से प्रेस को जूता दिखा रहे हैं। यही वजह है कि पत्रकार उनसे खफा हैं और वे कमलनाथ विहीन सरकार की मांग कर रहे हैं।

    भाजपा को विज्ञापन वाली सरकार बताने वाले कमलनाथ ने भी सत्ता में आने के साल भर में लगभग चार सौ करोड़ रुपए विज्ञापन पर खर्च कर दिए हैं।वित्तीय वर्ष में ये राशि पांच सौ करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी होगी। अपनी इस हिकमत अमली में प्रबंधन की महारथ दिखाते हुए कमलनाथ ने लगभग बारह हजार पत्रकारों का टेंटुआ दबा दिया है। इन पत्रकारों के छोटे छोटे अखबार सरकार की ओर से मिलने वाले लगभग साठ हजार रुपए सालाना के सहारे परिवार चलाते थे और लोकतंत्र की जय जयकार करते थे। इसमें आधी राशि वह थी जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती थी। लगभग नाममात्र की धनराशि के सहारे ये छोटे पत्रकार लोकतंत्र के नाम पर लूट करने वाले अफसरों और बाबुओं की खैरखबर लेते रहते थे। आज वे सरकार के खिलाफ लामबंद क्यों हैं इस रहस्य को समझना कठिन नहीं है।

    कांग्रेस की राजमाता इंदिरा गांधी ने सरकारीकरण और उद्योगों के राष्ट्रीयकरण को जिस तरह देश का भाग्य विधाता बताया था उसकी पोल खुद कांग्रेसी ही खोल चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह ने जिस तरह नरसिम्हाराव की सरकार के वित्तमंत्री रहते हुए इस सरकारीकरण से मुक्ति का जो अभियान चलाया वो आज 29 साल बाद भी अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया है।वे कहते थे कि इंस्पेक्टर राज अब कभी नहीं लौटेगा। इसके बावजूद कांग्रेस की भ्रष्ट सरकारें हों या फिर कांग्रेस की पूंछ पकड़ू शिवराज सिंह चौहान जैसी सरकारें कोई भी भ्रष्टाचार के राजमार्ग को छोड़ने तैयार नहीं हैं। कमलनाथ ने तो आपातकाल के दौरान अपनाए गए फार्मूले का इस्तेमाल करके उस इंस्पेक्टर राज की वापिसी कर दी है।

    शिवराज सिंह चौहान की अति लोकप्रिय सरकारों ने कर्ज लेकर विकास के नाम पर पैसा बांटने का जो महारथ हासिल किया था उससे खैरात तो बंटती रही लेकिन विकास का ढांचा तैयार नहीं हो सका। आधारभूत ढांचे के विकास के नाम पर कर्ज लेकर शिवराज सरकार ने ढेरों कल्याणकारी योजनाएं चलाईं जिसकी वजह से लोगों में आज भी शिवराज के प्रति सदाशयता का भाव बना हुआ है। इसके बावजूद आय के आत्मनिर्भर संसाधन नहीं बन सके हैं। भारी बेरोजगारी से जूझ रहे प्रदेश को ये हकीकत अब समझ आ रही है जब कमलनाथ सरकार ने फोकट धन बांटने वाली योजनाएं बंद करना शुरु कर दीं हैं। इसके बावजूद सरकारी तंत्र की आड़ में खजाना उलीचने की परंपराएं आज भी जारी हैं।

    यही वजह है कि कमलनाथ सरकार ने भी सत्ता में आने के बाद खजाना लूटना जारी रखा है। सही मायनों में कमलनाथ सरकार दोहरी लूट कर रही है। सरकारी खजाने को लूटने वालों पर अंकुश लगाने के बजाए उसने तबादलों और पोस्टिंग का जो बेशर्मी भरा नंगा नाच किया उसने खजाने को बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया है। हर तबादला भारी भरकम चंदा लेकर ही किया गया। ये अफसर जब नई पोस्टिंग पर गए तो उसका खर्च प्रदेश सरकार को वहन करना पड़ा। कई पदों पर बड़े अफसर तो दो से तीन करोड़ रुपए तक की रिश्वत लेकर गए थे इसलिए उन्होंने नया पद संभालते ही वसूलियां शुरु कर दीं। यही वजह है कि प्रदेश का खजाना तो खाली होता गया पर रिश्वतखोरों की चांदी हो गई। ये सब उस दौर में हुआ है जब कमलनाथ मिलावटखोरों और माफिया के विरुद्ध अभियान चला रहे हैं। अफसरों ने इस आड़ में प्रदेश को भरपूर लूटा क्योंकि वे तो इसके लिए सरकार को चंदा पहले ही दे चुके थे।

    शिवराज सिंह सरकार से सुविधा शुल्क लेने में मगन प्रेस इन सब गड़बड़झाले की रिपोर्ट करने को तैयार नहीं है। वह आज भी सोच रही है कि कमलनाथ कभी तो पसीजेंगे। आखिर उनकी भी पार्टी को चुनाव में जाना है। वे आज नहीं तो कल शिवराज की वही परिपाटी शुरु कर देंगे जिसने प्रेस को सुविधाभोगी बनाकर घरों तक सीमित कर दिया था।

    कमलनाथ की सरकार हर वित्तीय वर्ष में सरकारी अमले के वेतन पर 75 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है। उसे इस अमले से एक लाख अस्सी हजार करोड़ की आय का अनुमान था।वित्तमंत्री तरुण भानोट ने डींगे हांकते हुए दो लाख दस हजार रुपए खर्च करने का दावा किया था। उनका कहना था कि हम वसूलियां इतनी ज्यादा करेंगे कि विकास के लिए इससे ज्यादा राशि जुटा लेंगे। इसके विपरीत सरकार की बदनीयती के चलते राज्य का खर्च भी नहीं निकल पाया है। उलटे सरकार ने लगभग इक्कीस हजार करोड़ का नया कर्ज ले डाला है। ये कर्ज भी भारी ब्याज पर लिया गया है।

    बैंक डिफाल्टरों से चंदा वसूली के लिए उन्हें सरकारी ठेकों में शामिल करके सरकार और उसके मंत्रियों ने जो चंदा वसूला है उससे वे टाकीज और अस्पताल खरीद रहे हैं। पांच सितारा होटलें बना रहे हैं। उद्योगों में भागीदारी बढ़ा रहे हैं। प्रदेश के लोगों को वे खजाना खाली होने का रोना सुना रहे हैं।

    सरकार के सामने विज्ञापनों का रोना रोने वाले पत्रकार ये पूछने को भी राजी नहीं हैं कि प्रदेश के मालिक कहलाने वालों के पास ऐसी कौन सी जादू की छड़ी है जो उन्होंने हजारों करोड़ रुपयों की दौलत जुटा ली है। उनके बेटे नशे में डूबे रहने के बाद भी हजारों करोड़ रुपयों की संपत्तियों के मालिक बन बैठे हैं। देश की जांच एजेंसियों ने उनके रिश्तेदारों से जो बयान लिए हैं उनमें साफ हो चुका है कि ये दौलत कहां से जुटाई गई है,इसके बावजूद प्रदेश के अखबार आईफा अवार्ड को प्रदेश का भाग्य संवारने का फार्मूला बता रहे हैं। पत्रकारों को चाहिए कि वे दुर्घटना और षड़यंत्रों से आई कमलनाथ सरकार की असलियत प्रदेश की जनता के सामने उजागर करें। जनता का विश्वास जीतें और अपने पैर मजबूत करें। अच्छी पत्रकारिता के लिए इससे अच्छा समय शायद फिर कभी न मिल पाएगा।

  • गांधी का सत्याग्रह अंग्रेजों का नाटक था बोले हेगड़े

    गांधी का सत्याग्रह अंग्रेजों का नाटक था बोले हेगड़े

    बैंगलुरु,2 फरवरी(शैलेश शुक्ला)।पूर्व केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक से बीजेपी सांसद अनंत कुमार हेगड़े एक बार फिर से विवादों में हैं।हेगड़े ने राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी पर हमला बोला है और आजादी के आंदोलन को ‘ड्रामा’ करार दिया।बीजेपी नेता ने कहा कि पता नहीं लोग कैसे ‘इस तरह के लोगों को’ भारत में ‘महात्‍मा’ कहा जाता है।

    उत्‍तर कन्‍नड लोकसभा सीट से सांसद हेगड़े ने कहा कि पूरा स्‍वतंत्रता संघर्ष अंग्रेजों की सहमति और मदद से अंजाम दिया गया।’ हेगड़े ने कहा, ‘इन कथित नेताओं में से किसी नेता को पुलिस ने एक बार भी नहीं पीटा था। उनका स्‍वतंत्रता संघर्ष एक बड़ा ड्रामा था।’ महात्मा गांधी के ग्रुप के लोगों पर अंग्रेजों ने अत्याचार नहीं किया था। इन्हें जेल में भी सभी सुविधाएं दीं गई थी।

    हेगड़े ने कहा, ‘स्‍वतंत्रता संघर्ष को इन नेताओं ने ब्रिटिश लोगों की सहमति से रंगमंच पर उतारा था। यह वास्‍तविक संघष नहीं था। यह मिलीभगत से हुआ स्‍वतंत्रता संघर्ष था।’ बीजेपी नेता ने महात्‍मा गांधी के भूख हड़ताल और सत्‍याग्रह को एक ‘ड्रामा’ करार दिया।

    उन्‍होंने कहा, ‘कांग्रेस का समर्थन करने वाले लोग लगातार यह कहते रहते हैं कि भूख हड़ताल और सत्‍याग्रह की वजह से भारत को आजादी मिली। यह सत्‍य नहीं है। अंग्रेज सत्‍याग्रह की वजह से भारत से नहीं गए। अंग्रेजों ने निराशा में आकर हमें आजादी दी। जब मैं इतिहास पढ़ता हूं तो मेरा खून खौल उठता है। इस तरह से लोग हमारे देश में महात्‍मा बन गए।’

    इस बीच कांग्रेस नेता जयवीर शेरगिल ने अनंत कुमार हेगड़े के बयान की तीखी आलोचना की है। जयवीर ने कहा, महात्मा गांधी को देशप्रेम का सर्टिफिकेट उस पार्टी से नहीं चाहिए जो गोरों की सरकार के चमचे थे। अनंत हेगड़े उस संगठन से आते हैं जिन्होंने तिरंगे का विरोध किया, संविधान का विरोध किया, जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया।(नवभारत टाईम्स से साभार)