नई
दिल्ली,(प्रेस सूचना
केन्द्र)। प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने बुधवार दोपहर
12:20 बजे देश को बताया
कि भारतीय वैज्ञानिकों ने
अंतरिक्ष में उपग्रह मार
गिराने का सफल परीक्षण कर लिया
है. असल में एंटी-सैटेलाइट
मिसाइल है क्या?
भारत के
पास एंटी-सैटेलाइट
मिसाइल के लिए पृथ्वी एयर
डिफेंस (पैड)
सिस्टम है. इसे
प्रद्युम्न बैलिस्टिक मिसाइल
इंटरसेप्टर भी कहते हैं.
यह एक्सो-एटमॉसफियरिक
(पृथ्वी के वातावरण
से बाहर) और
एंडो-एटमॉसफियरिक
(पृथ्वी के वातावरण
से अंदर) के टारगेट
पर हमला करने में सक्षम हैं.
यह दो स्टेज की बैलिस्टिक
मिसाइल है.
पूर्व
डीआरडीओ चीफ वीके सारस्वत
बताते हैं कि हमारे वैज्ञानिकों
ने पुराने मिसाइल सिस्टम को
अपग्रेड किया है. उसमें
नए एलीमेंट जोड़े हैं. इसका
मतलब ये है कि पहले से मौजूद
पैड सिस्टम को अपग्रेड कर तीन
स्टेज वाला इंटरसेप्टर मिसाइल
बनाया गया. फिर इस
परीक्षण में उसी मिसाइल का
इस्तेमाल किया गया.
पैड सिस्टम
की शुरुआती क्षमता
रेंज :
2000 किमी
गति:
1470 से 6126 किमी
प्रति घंटा
(हालांकि,
बाद में इसे अपग्रेड
कर और भी ताकतवर और घातक बनाया
गया है)
कैसे लॉन्च
किया एंटी-सैटेलाइट
मिसाइल
डीआरडीओ
ने बैलिस्टिक इंटरसेप्टर
मिसाइल के जरिए 300 किमी
की ऊंचाई पर मौजूद उपग्रह को
मार गिराया. यह
मिसाइल भुवनेश्वर से 150 किमी
दूर डॉ. एपीजे अब्दुल
कलाम व्हीलर आइलैंड से छोड़ी
गई. तीन स्टेज के
इस इंटरसेप्टर मिसाइल में दो
रॉकेट बूस्टर्स हैं. मिशन
कंट्रोल सेंटर को मिसाइल के
जरिए जो डाटा मिला है, उसकी
बदौलत मिशन के 100 फीसदी
सफलता की पुष्टि हुई है.
9 साल पहले
तिरुवनंतपुरम में हुए 97वें
इंडियन साइंस कांग्रेस में
डीआरडीओ के जनरल रुपेश ने पहली
बार घोषणा की थी कि भारत दुश्मन
के उपग्रहों को उसकी कक्षा
में ही गिराने की जरूरी टेक्नोलॉजी
विकसित कर रहा है. 10 फरवरी
2010 में डीआरडीओ के
डायरेक्टर जनरल और रक्षा
मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार
डॉ. वीके सारस्वत
ने कहा था कि भारत के पास लो
अर्थ और पोलर ऑर्बिट में मौजूद
दुश्मन के उपग्रहों को मार
गिराने के जरूरी सामान हैं.
चीन के
विदेश मंत्रालय ने भारत द्वारा
उपग्रह रोधी मिसाइल के सफल
परीक्षण को लेकर पीटीआई के
एक सवाल पर लिखित जवाब में
कहा, ”हमने खबरें
देखी हैं और उम्मीद करते हैं
कि प्रत्येक देश बाहरी अंतरिक्ष
में शांति बनाये रखेंगे।”
चीन ने ऐसा एक परीक्षण
जनवरी 2007 में किया
था जब उसके उपग्रह रोधी मिसाइल
ने एक निष्क्रिय मौसम उपग्रह
को नष्ट कर दिया था।
भोपाल,18 मार्च(प्रेस सूचना केन्द्र)। वायुसेना के पूर्व सैनिकों और अफसरों ने भारतीय सेना की कार्रवाईयों पर सवाल उठाने वालों को तमीज सिखाने के लिए खुली चेतावनी दी है। उनका कहना है कि जो सैनिक देश पर जान न्यौछावर करने तैयार रहते हैं उनकी कार्रवाई को घटिया राजनीति का मुद्दा न बनाया जाए। जिस तरह से कुछ नेताओं ने पुलवामा आतंकी हमले और उसके बाद वायुसेना की एयर स्ट्राईक को लेकर आधारहीन आरोप लगाए हैं उन्हें अब सावधान हो जाना चाहिए। बगैर नाम लिए कांग्रेस के एक पूर्व मुख्यमंत्री के बयानों पर भी वायुसेना के पूर्व अफसरों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
टॉप ब्रॉस पूर्व सैनिक एवं अधिकारी संघ भोपाल की ओर से रिटायर्ड विंग कमांडर डॉ.यू.के.चौधरी ने कहा कि कांग्रेस और कुछ अन्य राजनीतिक दल देश की सुरक्षा के मुद्दों पर जिस तरह से घटिया राजनीति कर रहे हैं वो सेना का अपमान है। सर्जिकल और एयर स्ट्राईक सैन्य बलों का विशेषाधिकार है। हम सुरक्षा के मुद्दों पर पूरे चिंतन मनन के साथ कार्रवाई करते हैं। देश की सुरक्षा हमारी जवाबदारी है। हम इसकी मंहगी कीमत भी चुकाते हैं। इसके बावजूद कुछ राजनेता काल्पनिक आरोपों के आधार पर सेना की कार्रवाई पर भ्रम फैला रहे हैं। जिन्हें सेना की कार्रवाई पर शक है वे सबूत पेश करें। हमसे सबूत मांगकर शत्रुओं को शक्तिशाली बनाने की गद्दारी न करें।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर राजनीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए हम राष्ट्रपति और राज्यपाल महोदय को ज्ञापन भी सौंप रहे हैं। बातचीत के दौरान पूर्व सैन्य अधिकारियों ने कहा कि हम बाहिरी दुश्मनों के साथ साथ देश के भीतर के दुश्मनों से भी निपटना जानते हैं। छोटे मोटे शत्रुओं का इलाज तो कंबल परेड से ही किया जा सकता है लेकिन गद्दारों का इलाज उसी तरह करना पड़ेगा जैसे हम शत्रुओं का करते हैं।
दिल्ली9 मार्च,( विनायक चटर्जी)। कुछ सप्ताह पहले लंदन अंडरग्राउंड ने अपना परिचालन शुरू होने की 156वीं वर्षगांठ मनाई। वह दुनिया के शुरुआती रेल तंत्रों में से एक है और उसने दर्जनों शहरी परिवहन नेटवर्क के डिजाइन को प्रभावित किया है। यहां तक कि उसके मशहूर मानचित्र तक का अनुकरण किया गया। दिल्ली मेट्रो में ‘माइंड द गैप (दूरी का ध्यान रखें)’ जैसी उसकी मौलिक घोषणा और उसके मानचित्र को देखने पर लगता है कि उस पर लंदन अंडरग्राउंड मेट्रो का असर है। ऐसा तब है जबकि दिल्ली मेट्रो को पैदा हुए अभी सिर्फ 16 वर्ष हुए हैं। यानी वह लंदन अंडरग्राउंड के कई सालों बाद अस्तित्व में आई है।
परंतु बुनियादी ढांचा क्षेत्र में नए होने का एक अर्थ बेहतर होना भी होता है क्योंकि बाद में बनने वाली परियोजनाएं, पिछली परियोजनाओं की सफलता और विफलता से काफी कुछ सीख चुकी होती हैं। बड़े और हवादार स्टेशन, आधुनिक रेल ट्रैक और डिब्बे तक दिल्ली मेट्रो तकनीकी तौर पर न केवल लंदन अंडरग्राउंड बल्कि कई अन्य पुरानी मेट्रो रेल व्यवस्थाओं मसलन न्यूयॉर्क मेट्रो आदि से भी काफी बेहतर है।
दिल्ली मेट्रो बहुत तेजी से प्रगति कर रही है। उसके बुनियादी विकास के आंकड़े सफलता की कहानी स्वयं कहते हैं। दिल्ली मेट्रो के ट्रैक की कुल लंबाई अब करीब 327 किलोमीटर हो चुकी है जो लंदन अंडरग्राउंड की 402 किमी की लंबाई के काफी करीब है। लंदन में 270 स्टेशन हैं जबकि दिल्ली में 236 स्टेशन हैं। दिल्ली जल्दी ही उसे पार कर सकता है। उसने 20 वर्ष में कमोबेश वह हासिल कर लिया है जहां तक पहुंचने में लंदन को 150 वर्ष लग गए हैं।
परंतु इसे अगर दूसरे तरीके से देखें तो दिल्ली मेट्रो को अभी भी अपनी समकक्ष मेट्रो रेल परियोजनाओं की तुलना में लंबी दूरी तय करनी है। लंदन अंडरग्राउंड में रोजाना 50 लाख लोग यात्रा करते हैं जबकि दिल्ली में हर रोज यात्रा करने वालों की तादाद 25 लाख है। हालांकि लंदन की आबादी दिल्ली की आबादी की तुलना में आधी है। दिल्ली मेट्रो के यात्रियों की तादाद 2017-18 में इससे ठीक एक वर्ष पहले की तुलना में कम ही हुई है।
यात्रियों की संख्या में इस कमी के लिए कई लोग लगातार दोबारा किराये में इजाफे को जिम्मेदार बताते हैं। सेंटर फॉर साइंस ऐंड एन्वॉयरनमेंट की एक रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली मेट्रो, वियतनाम की हनोई मेट्रो के बाद दुनिया की दूसरी सबसे महंगी मेट्रो सेवा है। यह आकलन एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति द्वारा अपनी मासिक आय में से मेट्रो यात्रा किराये के रूप में व्यय की जाने वाली औसत राशि पर आधारित है। हालांकि दिल्ली मेट्रो ने स्वयं इसका विरोध करते हुए कहा कि किराये में बढ़ोतरी काफी समय के बाद की गई है। कहा गया कि इस अवधि में राजधानी में औसत वेतन में बढ़ोतरी के साथ किराया उतना ज्यादा नहीं रह गया है।
परंतु दिल्ली मेट्रो की यात्रा करने वालों की संख्या मुंबई की उपनगरीय रेल से महज एक तिहाई है। मुंबई की उपनगरीय रेल सेवा अपने आप में लंदन अंडरग्राउंड जैसी ही अहमियत रखती है। दिल्ली मेट्रो के नेटवर्क का विस्तार होने के साथ यह अंतर कम होता जाएगा लेकिन एक सवाल बरकरार है कि आखिर दिल्ली मेट्रो के प्रदर्शन का आकलन किस मानक पर किया जाए? इसके अलावा देश भर में शुरू हो रही नई मेट्रो रेल परियोजनाओं को क्या सबक लेने की आवश्यकता है? उनमें से कई तो दिल्ली मेट्रो के ही ढर्रे पर आगे बढ़ रही हैं।
दुनिया भर में शहरी मेट्रो तंत्र से जुड़े अहम निर्णयों को इस बात से जूझना पड़ रहा है कि समाज के सभी धड़ों तक उसकी पहुंच और किराये को व्यवहार्य बनाए रखने के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए और इस दौरान सेवा को वित्तीय रूप से भी व्यवहार्य बनाए रखा जाए। यूरोप के अधिकांश देशों और अमेरिका में परिचालन लागत और यात्री किराये के बीच का अनुपात ऐसा है कि राजस्व जुटाने के लिए उनको सब्सिडी अथवा अन्य उपाय अपनाने पड़ते हैं। दिल्ली मेट्रो के किराये में बढ़ोतरी के बाद दिल्ली अथवा केंद्र सरकार की सब्सिडी पर इसकी निर्भरता कम हुई है। दिल्ली मेट्रो अपने परिचालन के लिए इन दो सरकारों पर काफी हद तक निर्भर रही है।
एक बार फिर न्यूयॉर्क मेट्रो और लंदन मेट्रो के परिचालन पर नजर डालना श्रेयस्कर होगा। लंदन अंडरग्राउंड मेट्रो की यात्री किराये से लागत वसूल करने की क्षमता न्यूयॉर्क की तुलना में कहीं बेहतर है। यह यात्रियों से इतना किराया वसूल कर लेती है कि वह अपनी परिचालन लागत के अतिरिक्त कुछ राशि जुटा ले। इस मामले में न्यूयॉर्क मेट्रो का प्रदर्शन सबसे कमजोर है।
ऐसा किराये के ढांचे में अंतर की वजह से भी है। लंदन और दिल्ली जैसे मेट्रो तंत्र दूरी या क्षेत्र आधारित मॉडल पर काम करते हैं जहां कोई यात्री जितनी अधिक दूरी तक यात्रा करता है, उतना अधिक किराया चुकाता है। न्यूयॉर्क जैसे शहरों में यात्री किराया तयशुदा है, भले ही वह कितनी भी दूर तक सफर करे। ऐसी व्यवस्था उन उपभोक्ताओं के लिए मुफीद है जो गरीब हैं और कार्यस्थल के आसपास रहने का बोझ नहीं उठा सकते।
साफ जाहिर है कि न्यूयॉर्क मेट्रो प्रणाली लंदन की तुलना में खासी सस्ती है। हालांकि इसकी भी एक कीमत है जो चुकानी पड़ती है। सब्सिडी के अभाव में कम किराया होने के चलते एक अवधि के बाद सेवा मानकों में कमी आनी शुरू हो जाती है। पटरियों और डिब्बों का रखरखाव और उनकी गुणवत्ता और उन्नयन का काम भी प्रभावित होता है। अचल संपत्ति विकास से कुछ हद तक नुकसान की भरपाई होगी लेकिन देश में तमाम मेट्रो प्रणालियों के पास यह सुविधा नहीं होगी।
आखिरकार, सरकारों को अपना पैसा खपाते हुए मेट्रो प्रणालियों को सब्सिडी प्रदान करनी ही होगी। वरना उन्हें किराया इतना अधिक रखना होगा कि गरीब यात्री उसका बोझ ही वहन न कर पाएं। ऐसे में समाज का वह तबका प्रभावित होगा जिसे इस तेज और किफायती सार्वजनिक परिवहन प्रणाली से सबसे अधिक लाभ होगा। इतना ही नहीं यह शहर की सड़कों को वाहनों के जाम से मुक्त रखने काम भी करता है। ऐसे में हमें सही चयन करना होगा।(लेखक फीडबैक इन्फ्रा के चेयरमैन हैं। लेख में प्रस्तुत विचार निजी हैं।)
योजनाओं को प्रभावी बनाने क्रियान्वयन की प्रक्रिया की होगी समीक्षा
भोपाल,5 मार्च(प्रेस सूचना केन्द्र)।मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि सरकार मंत्रालय से नहीं, पंचायतों से चलती है। पंचायत व्यवस्था योजनाओं और कार्यक्रम के क्रियान्वयन की धुरी है। अच्छी योजनाओं का क्रियान्वयन भी अच्छा होना चाहिये, अन्यथा वे सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा प्रभावी बनाने के लिये योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया की समीक्षा की जायेगी।
मुख्यमंत्री ने जिला एवं जनपद-पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों से कहा कि वे वर्तमान समय के संदर्भ में योजनाओं के क्रियान्वयन के तौर-तरीकों की समीक्षा कर अपने सुझाव दें। सरकार के सहभागी नहीं, सहयोगी बनें। श्री नाथ आज प्रशासन अकादमी में जिला एवं जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि हमारे देश और प्रदेश की अर्थ-व्यवस्था गाँव से जुड़ी है। इसलिये फोकस ग्रामीण क्षेत्र पर है। पंचायत राज इसकी धुरी है । सरकार की योजनाओं का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन करने की जिम्मेदारी जिला जनपद पंचायत के सीईओ और पंचायत सचिव की है। उन्होंने कहा कि कई योजनाएँ ऐसी हैं, जो पन्द्रह से बीस साल पहले बनीं। उनका क्रियान्वयन आज वैसा ही नहीं हो सकता है। उसमें परिवर्तन करने की आवश्यकता होगी। उन्होंने मनरेगा और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि वे इन योजनाओं के निर्माण से स्वत: जुड़े हैं। यूपीए सरकार में जब ये योजनाएँ बनी थीं, तब इसके क्रियान्वयन को लेकर कई सुधार करवाये थे। उन्होंने कहा कि समय बदला है, तो सरकार को यह भी बतायें कि क्रियान्वयन की प्रक्रिया में कौन से परिवर्तन करना है ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों को लाभ मिले।
लक्ष्य उत्कृष्ट क्रियान्वयन का बनाये
मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों की क्रियान्वयन व्यवस्थाओं की समीक्षा और सर्वे कराया जायेगा। पुरानी योजनाओं में क्या परिवर्तन कर सकते हैं, उनके जरिए और अधिक लोगों को कैसे लाभ पहुँचा सकते हैं, ये तथ्य सर्वे का आधार होंगे। उन्होंने जिला और जनपद पंचायत के सीईओ को जनता और सरकार के बीच की कड़ी बताते हुए कहा कि क्रियान्वयन में बदलाव हो, इसकी जिम्मेदारी भी उनकी है।
बेहतर उपयोग हो ग्रामीण क्षेत्रों के बजट का
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमारे देश का हो चाहे प्रदेश का, बजट का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण विकास पर खर्च होता है। ग्रामीण क्षेत्रों का प्रमुख व्यवसाय खेती-किसानी है। किसानों की क्रय शक्ति किस तरह बढ़ायें, इस पर भी हमें सोचना होगा। उन्होंने कहा कि कर्ज माफी स्थाई समाधान नहीं है, यह एक राहत है । इसके आगे यह सोचना होगा कि किसानों के अधिक उत्पादन का कैसे उपयोग करें, क्योंकि इससे ही उनकी आय को दोगुना कर सकते हैं, उनकी क्रय शक्ति को बढ़ा सकते हैं। किसानों की क्रय शक्ति से ही हमारी बहुत सी छोटी-छोटी आर्थिक गतिविधियाँ जुड़ी हैं, जो लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाती हैं। इस चुनौती को हम कैसे सफलता में बदलें, इसमें आप सभी को महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन करना है।
जल-संरक्षण बड़ी चुनौती
मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि आने वाले दस वर्षों में पानी की उपलब्धता हमारे लिये सबसे बड़ी चुनौती होगी। इसके लिये हमें विशेष प्रयास करने की जरूरत है। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को हमें मजबूत बनाना होगा।
सड़क से सिर्फ आवागमन ही नहीं, निवेश भी आता है
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाली सड़कों से सिर्फ आवागमन की सुविधा नहीं होती। सड़क निर्माण से कई प्रकार का निवेश भी आता है, जो लोगों के रोजगार का माध्यम बनता है। हमें इन अवसरों का लाभ उठाना चाहिये।
सरकार में सहयोगी बनें
मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि आज मध्यप्रदेश की शासन व्यवस्था बदली है। हम नई सोच, नई दृष्टि के साथ एक विकासोन्मुखी-जनोन्मुखी प्रशासनिक व्यवस्था की स्थापना करने जा रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि इस प्रदेश में हर व्यक्ति को भोजन, पानी, आवास के साथ एक बेहतर जीवन जीने का वातावरण मिले। इस नई व्यवस्था में आपको साथ चलना है। मध्यप्रदेश के विकास का एक नया नक्शा बनाना हमारा संकल्प है। इसमें न केवल आप भागीदारी करें बल्कि सहयोगी भी बनें।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि प्रदेश की 70 प्रतिशत आबादी के चहुँमुखी विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी जिला एवं जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की है। विकास की एक सुनियोजित अवधारणा जमीन पर क्रियान्वित होना चाहिये। इस दिशा में प्रभावी तरीके से काम करने की आवश्यकता है।
श्री पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ की स्पष्ट सोच है कि सरकार आम जनता के हित के लिये बनी है। इसलिये पंचायत से जुड़ी सभी संस्थाओं का दायित्व है कि वे ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं का अपने ही स्तर पर निदान करें ताकि हमारे ग्रामीण भाइयों को भटकना न पड़े। उन्होंने योजनाओं और विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने को कहा। श्री पटेल ने कहा कि सरकार त्रि-स्तरीय पंचायत राज को सुदृढ़ बनाने के लिये काम कर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री की पहल पर पंचायत पदाधिकारियों की स्वेच्छानुदान राशि में वृद्धि के आदेश जारी भी हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न योजनाओं के अधूरे कार्यों को प्राथमिकता से पूरा किया जाये।
अपर मुख्य सचिव श्रीमती गौरी सिंह ने विभागीय उपलब्धियों की जानकारी दी। जिला एवं जनपद के सीईओ ने अपने-अपने क्षेत्र में ग्रामीण योजनाओं के सफल क्रियान्वयन की जानकारी भी दी। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने नदी पुनर्जीवन पर केन्द्रित पुस्तक का विमोचन भी किया।
भुवन भूषण देवलिया स्मृति व्याख्यान माला में चुनाव,समाज और मीडिया पर विचारोत्तेजक चर्चा
मीडिया का बेअसर हो जाना चिंताजनक बोले जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा
भोपाल, 3 मार्च।बढ़ते बाजार वाद ने समाज और मीडिया के बीच की दूरियां कुछ इस तरह बढ़ा दी हैं कि चुनावी राजनीति मौलिक सामाजिक मुद्दों से भटक गई है। सत्ता के इर्द गिर्द ऐसे लोग जमा हो गए हैं जो सत्ता का दुरुपयोग करने में सिद्धहस्त हैं। सरकारें तबादले करके अफसरों को तो बदल सकती हैं लेकिन दलालों और बिचौलियों को बदलना संभव नहीं होता है। वे हर सरकार को घेर लेते हैं और सरकार की जड़ें काट देते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में भी बेहतरीन कार्य किया जा रहा है लेकिन सत्ता को घेरने वाले लोग असली पत्रकारों का हक छीन लेते हैं। ये विचार वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने आज राजधानी में आयोजित भुवन भूषण देवलिया स्मृति व्याख्यान में व्यक्त किए।इसी विषय पर जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि कुछ मामलों में मीडिया का दुरुपयोग किए जाने से उसकी साख प्रभावित हुई है जो चिंताजनक है।
डॉ.सर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग अध्यक्ष रहे एवं वरिष्ठ पत्रकार भुवन भूषण देवलिया की जयंती आज राजधानी में गरिमामयी के अवसर पर आयोजित व्याख्यान में स्वर्गीय देवलिया की पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला गया। विदिशा के पत्रकार गोविंद सक्सेना को इस अवसर पर राज्य स्तरीय भुवन भूषण देवलिया पत्रकारिता सम्मान से विभूषित किया गया। इसमें उन्हें 11 हजार रूपये का चेक,शाल श्रीफल एवं प्रशस्तिपत्र प्रदान किया गया। चुनाव, समाज और मीडिया विषय पर आयोजित व्याख्यान में मुख्य अतिथि के तौर पर मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क मंत्री पी.सी.शर्मा,प्रमुख वक्ताओं के रूप में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग और पटना से आए वरिष्ठ पत्रकार शशिधर खां, विशिष्ट अतिथि के रूप में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विवि भोपाल के कुलपति दीपक तिवारी, ने विषय के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार और सप्रे संग्रहालय के स्थापक विजयदत्त श्रीधर ने की। कार्यक्रम का संचालन लब्ध प्रतिष्ठित उद्घोषक विनय उपाध्याय ने किया। आभार प्रदर्शन जनसंपर्क अधिकारी अशोक मनवानी ने किया।
मुख्य अतिथि और जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि पहले अखबारों में यदि सत्ता प्रतिष्ठानों के खिलाफ दो लाईनें भी छप जाती थीं तो सरकारें कार्रवाई के लिए मजबूर हो जाती थीं,आज स्थिति ये हो गई है कि अखबारों में छपी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। हम भी प्रदेश की राजनीति करते हैं लेकिन पिछले पंद्रह सालों तक जब सरकार में नहीं थे तब हमारी गतिविधियां अखबारों की सुर्खियां नहीं बन पाती थीं। हमें कह दिया जाता था कि विज्ञापन आ जाने के कारण आपकी खबर नहीं छप पाई है। आज कांग्रेस की सरकार सभी को समान अवसर उपलब्ध करा रही है। यही वजह है कि गोविंद सक्सेना जैसे मेधावी पत्रकार आगे आ रहे हैं। ऐसे पत्रकारों का सम्मान समाज में पत्रकारिता की साख बढ़ाने में सहयोगी साबित होगा। राजनीति और पत्रकारिता का चोली दामन का साथ है। हम लोग अपने मददगार पत्रकारों और निंदा करने वाले पत्रकारों सभी से सीखते हैं और राजनीति को कारगर बनाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्वर्गीय देवलिया जी की स्मृति में आयोजित व्याख्यान में किए गए मंथन का लाभ समाज के सभी वर्गों को मिलेगा।
प्रमुख वक्ता के रूप में व्याख्यान माला को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने कहा कि देश में बहुत सारे पत्रकार अच्छा कार्य कर रहे हैं। वे जोखिम भी उठाते हैं और समाज के संवाद को सफल भी बनाते हैं।राजनीति पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारें अफसरों के तबादले तो कर देती हैं लेकिन दलालों और बिचौलियों की भूमिका नहीं बदल पातीं। यही वजह है कि सत्ता प्रतिष्ठान को घेरने वाले बिचौलिए जनता की आवाज सरकार तक नहीं पहुंचने देते। उन्होंने कहा कि डाक्टर राम मनोहर लोहिया कहते थे हमारी और सरकार की भूमिका कभी नहीं बदलती। हम हर सरकार के गलत कार्यों का विरोध करते हैं और हर सरकार सत्ता में आकर हमें जेल भेजने में जुट जाती है।
उन्होंने कहा कि वर्ल्ड इकानामिक फोरम ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें उसने भारत के मीडिया को सर्वाधिक भ्रष्ट बताया है। उन्होंने कहा कि कोई बलात्कार पीड़िता जब अपने ऊपर हुए अत्याचार की शिकायत करने थाने जाए और उसके साथ दुबारा बलात्कार हो जाए तो क्या इसे न्याय मिलना कहा जा सकता है। इसी तरह सभी जगह से निराश होकर जब लोग मीडिया के पास जाते हैं तो उन्हें एक नए किस्म के शोषण का सामना करना पड़ता है। जो पत्रकार जमीनी रिपोर्टिंग करते हैं और उन्हें सामाजिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है उनके लिए मीडिया संस्थानों या पत्रकार संगठनों का रक्षा कवच भी नहीं मिल पाता है। इसके बावजूद हमें जमीनी पत्रकारों को संरक्षण देना होगा। हमें सरकार से सवाल पूछने और जानकारी देने की परंपरा जारी रखनी होगी। हमें अपने कर्तव्य के लिए जेल जाने की सीमा तक तैयार रहना होगा तभी हम स्वर्गीय देवलिया जी को सच्ची श्रद्धांजलि दे सकेंगे।
पटना से आए वरिष्ठ पत्रकार शशिधर खान ने कहा कि डिजिटल युग ने मीडिया का कुछ ऐसा कायापलट कर दिया है कि हम पेड और फेक न्यूज के दौर में पहुंच गए हैं। प्रेस की आजादी का लाभ उठाकर कई बार घटनाओं की मीडिया ट्रायल शुरु हो जाती है। मीडिया फोरम उपभोक्ता की पसंद का डाटा पोस्ट कर रहे हैं जिससे आम लोगों की निजता खतरे में पड़ गई है। आज तो कोर्ट में अर्जी की सुनवाई होने से पहले ही मीडिया पर बहसें शुरु हो जाते हैं। इन बहसों में पीड़ित पक्ष तक शामिल नहीं होता है. यही वजह है कि कुछ मनगढ़ंत बातें भी कुछ ही मिनिटों में वायरल होकर पूरी दुनिया में फैल जाती हैं. हमें मीडिया की प्रमाणिकता को बचाने के लिए आगे आना होगा। हम ये साबित करें कि मीडिया की खबरें आम लोगों की बतोलेबाजी से अलग होती हैं, तभी इस पेशे की गरिमा बचाई जा सकती है।
माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति दीपक तिवारी ने कहा कि अखबारों की सुर्खियों के आधार पर लोग समाज का मूड भांपने का प्रयास करते हैं जबकि ये सच नहीं होता। इसी प्रकार सोशल मीडिया पर वे लोग अपना एजेंडा थोप देते हैं जिनके पास धन है और उनके कुछ निहित स्वार्थ हैं। उन्होंने कहा कि जनता बीच से लोग लोग लीडर्स के रूप में उभरते हैं उन्हें लोड लेना होगा। उन्हें समाज विरोधी बातों पर रोक लगाने के लिए आगे आना होगा। आज दुनिया भर के मीडिया जगत में भारत के मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं ये चिंताजनक है। चुनाव के दौर में नेताओं को व्यापक जनहित की बातों को सामने लाना होगा तभी हम सामजिक बदलाव कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय देवलिया सर ने युवाओं को प्रेरणा देकर सामाजिक बदलाव की अलख जगाई थी हम उस मशाल को जलाए रखेंगे और समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
अध्यक्षीय उद्बोधन में पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि छोटी जगहों पर आज भी जमीनी पत्रकारिता की जा रही है। कार्पोरेट मीडिया कुछ तयशुदा मु्द्दों को उभारकर सत्ता को साधने का प्रयास कर रहा है। चुनाव के इस दौर में यदि हम अगले दो तीन महीनों तक टीवी और अखबार देखना बंद रखें तो हम देश की सत्ता का चयन ईमानदारी से कर पाएंगे।
कार्यक्रम के आरंभ में भुवन भूषण देवलिया स्मृति व्याख्यानमाला समिति भोपाल की ओर से अतिथियों का पुष्प गुच्छ देकर अभिनंदन किया गया। समिति की ओर से डा . अपर्णा एलिया, अशोक मनवानी, आलोक सिंघई,अरुणा दुबे, पिंकी देवलिया ने अतिथियों का अभिनंदन किया। आशीष देवलिया ने अतिथियों को तुलसी के पौधे देकर पर्यावरण की रक्षा का संकल्प दुहराया। इस अवसर पर देवलिया जी के क्रतित्व एवं व्यक्तित्व पर केन्द्रित स्मृति ग्रंथ पत्रकारिता के भूषण का विमोचन हुआ । इसका संपादन वरिष्ठ पत्रकार सतीश एलिया ने किया है। कार्यक्रम में समिति के सदस्य वरिष्ठ पत्रकार शिव अनुराग पटैरिया, अजय त्रिपाठी तथा अमित कुमार, पूर्व सूचना आयुक्त आत्मदीप , शिवकुमार विवेक,वरिष्ठ पत्रकार आनंद पांडे , प्रमोद भारद्वाज,वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अरविंद दुबे, अवनीश सोमकुंवर, अजय उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार केएस शाइनी, शिफाली, दीप्ति चौरसिया, राजेन्द्र धनोतिया, प्रभु पटेरिया, गिरीश शर्मा, प्रेम पगारे, शिव हर्ष सुहालका, संजीव शर्मा,अमिताभ श्रीवास्तव, मुकेश मोदी,सुरेन्द्र द्विवेदी, प्रकाश साकल्ले, सुमन त्रिपाठी,शैलजा सिंघई, ममता यादव समेत बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और पत्रकार मौजूद थे।