Month: July 2018

  • जीएसटी से मिली विकास की गारंटी

    जीएसटी से मिली विकास की गारंटी

    – भरतचन्द्र नायक
    गत सप्ताह जीएसटी परिषद ने अठासी वस्तुओं और सेवाओं पर टेक्स के रेट में कटौती कर घरेलु उपभोक्ता उत्पाद के मूल्य में सात आठ प्रतिशत तक उपभोक्ताओं राहत पहुंचाने का अपना मंतव्य जाहिर कर दिया है। इन वस्तुओं और सेवाओं पर 28 प्रतिशत जीएसटी था जिसे घटाकर 18 प्रतिशत और 12 प्रतिशत तक कर दिया है। टेक्स की दरों में कमी का लाभ उपभोक्ता को मिले इसमें दो राय नहीं है, लेकिन इसमें भी अगर मगर लगाकर उत्पादक राहत से उपभोक्ताओं को वंचित कर देते हैं। हांलाकि ऐसी दशा में समस्या से निपटने के लिए भी केंद्र सरकार ने मुनाफा विरोधी प्राधिकरण एन्टी प्राफिटियरिंग निकाय की व्यवस्था की है और उसने पिछले अवसर पर टेक्स घटने पर उत्पाद को और वितरकों को आगाह भी किया था। उसने पुराने एमआरपी पर संशोधित एमआरपी रेपर पर लिखकर घटे हुए टेक्स लाभ ग्राहकों को पहुंचाने को कहा था, लेकिन सामान्य तह ऐसी राहत महसूस नहीं की गई। टेक्स में राहत दिये जाने से केंद्र सरकार पर 70 हजार करोड़ रू. का बोझ पड़ा है। केंद्र सरकार ने 14 प्रतिशत राजस्व नहीं बढ़ने पर राज्यों को पांच साल की भरपाई का भरोसा दिया है। अच्छा है कि इस बार कुछ उत्पादकों ने स्वयं स्फूर्त होकर घरेलु उपभोक्ता वस्तुओं पर टेक्स घटती का लाभ उपभोक्ता को देने की घोषणा की है। ऐसा करने वालों में गोदरेज, एलजी इंडिया, पेनासोनिक इंडिया, जैसे संस्थान अग्रणी हैं। उद्योग जगत की इस सदस्यता का दूसरे उत्पादकों को अनुकरण कर समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व बोध दिखाना चाहिए। इसके साथ इन संस्थानों ने केंद्र से अपेक्षा की है कि विदेशों से आयात किये जाने वाले घरेलु सामान एप्लाएंसज पर लगने वाला आयात शुल्क बढ़ाया जाए। इसे बढ़ाकर घरेलु उद्योगों को केंद्र सरकार प्रोत्साहित करें। ऐसे समय जब विकसित देश संरक्षणवाद का सहारा ले रहे हैं भारत सरकार को भी देशी उद्योगों की आकांक्षा के अनुरूप आयात नीति में संशोधन करके उद्योगों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।

    जीएसटी को आरंभ हुए एक साल हो चुका है। जीएसटी राजस्व संग्रह में धीरे-धरे स्थिरता परिलक्षित हो रही है। औसतन यह राजस्व संग्रह 95 हजार करोड़ तक पहुंच चुका है। जनता अपेक्षा करती है कि अमुक वस्तु पर टेक्स कम हो। इसके अनुरूप जीएसटी परिषद विचार भी करती है। जब टेक्स में कटौती की जाती है तो सियासत शुरू हो जाती है। लेकिन असलियत यह है कि टेक्स कटौती को सियासी हथकंडा नहीं कहा जा सकता। क्यांेकि इसका दारोमदार जीएसटी परिषद पर है, जिसमें राज्यों की भी केंद्र के साथ भागीदारी है। जीएसटी परिषद वास्तव में भारतीय संघवाद का सबसे बड़ा प्रतीक है। जिसने जीएसटी को अल्प समय में पटरी पर लाकर जनता और उत्पादकों को कमोवेश सत्रह बेरियरों की बेड़ी से मुक्ति दिला दी है। परिवहन की रफ्तार बढ़ा दी है। इन डेढ़ दर्जन टेक्सों के बदले में जीएसटी जैसा एकीकृत टेक्स लगा है जिसकी प्रक्रिया को लेकर हौआ खड़ा किया जा रहा था, लेकिन परिषद ने नियमों का सरलीकरण करके इसे सुगम, सरल और आसान बना दिया है। फिर जो डेढ़ दर्जन टेक्स समाप्त हुए हैं वे मिलाकर बत्तीस प्रतिशत होते थे। जबकि जीएसटी की सबसे अधिक दर 28 प्रतिशत है।

    जीएसटी को लेकर राजनैतिक दलों को शिकायत है और वे एक ही स्लेव में सभी वस्तुओं और सेवाओं को शामिल करना चाहते हैं जो न तो उचित है और न संभव है। इस लिए जीएसटी को लेकर उद्योग जगत और उपभोक्ताओं में फैलाये जा रहे भ्रम से बचा जाना चाहिए। आखिर तीन दशकों के विचार विमर्ष के बाद ही 1 जुलाई 2017 से जीएसटी अमल में आया है। राज्यों की शिकायत दूर करते हुए मोदी सरकार ने आने वाले 5 वर्षों तक राज्यों को क्षतिपूर्ति करने का भरोसा दिलाया है और इस आश्वासन पर अमल भी शुरू हो गया है। दरअसल यूीपए सरकार के दौरान तो कांग्रेस ने राज्यों को क्षतिपूर्ति देना असंभव बताकर हाथ खीच लिऐ थे। इसलिए कांग्रेस को तो जीएसटी प्रणाली में मीनमेख निकालने का नैतिक अधिकार नहीं है।
    जीएसटी टेक्स निर्धारण के लिए पांच श्रेणियां मौजूदा है। माना जा रहा है कि इतनी अधिक श्रेणियों जब कभी भटकाव पैदा करती है। इसका उपाय खोजने के बारे में परिषद में गहन विचार विमर्ष बताता है कि आने वाले दिनों में पांच श्रेणियों की जगह तीन स्लेव शेष रहेंगे, लेकिन इसमें जल्दवाजी नहीं की जा सकती क्योंकि इससे राज्यों को मिलने वला राजस्व जुड़ा है, राज्यों की आम सहमति आवश्यक होगी। पूर्व वित्तमंत्री श्री पी. चिदंबरम जो यूपीए सरकार में प्रभावशाली मंत्री रहे। जीएसटी के अमल के असमर्थ रहे हैं अब आपत्ति इस बात पर कह रहे हैं कि जिन 88 वस्तु सेवाओं पर टेक्स घटाया गया। वह 2017 में भी घटाया जाना संभव था। अब इसका सटीक उत्तर तो यही हो सकता है कि टेक्स कम करने अथवा बढ़ाने में किसी विशेष राजनैतिक दल अथवा जैसा चिदम्बरम का आरोप है, अकेली भाजपा ही उत्तरदायी नहीं है। परिषद में प्रतिनिधित्व करने वाले राज्यों का पूरा हस्तक्षेप है और सहमति से ही फैसला लिया जाता है। इसलिए जनता बीच में भाजपा को लाना बेमानी है। अर्थशास्त्री ही नहीं समाज शास्त्री और आमजन जनता है कि सरकारों का संचालन टेक्स कराधान और उसके संग्रह पर निर्भर रहता है। इसलिए सीधी सी बात है कि जीएसटी कराधान की शुरूआत ही इस सोच के साथ हुई कि इससे राज्यों और केंद्र को आर्थिक क्षति न पहुंचने पाये। जैसे-जैसे जीएसटी कराधान में स्थिरता आती गई। सोच विचार के साथ वस्तु और सेवा पर लगने वाले टेक्स पर रियायत देने पर परिषद ने विचार आरंभ किया और यह सिलसिला जारी रहेगा। एक वर्ष में 384 वस्तुओं पर से टेक्स कम किया गया है। अब चूंकि जीएसटी का कर संग्रह 95 हजार करोड़ रू. तक औसतन पहुंच गया है। जीएसटी करों में राहत देने पर परिषद विचार करने में सक्षम होगी। इससे उपभोक्ता वस्तुओं के दामों में कमी आना निश्चित है। इससे मुद्रास्फीति भी घटेगी। राज्यों की क्षतिपूर्ति करने में श्री नरेंद्र मोदी सरकार की सदाशयता प्रशंसनीय कही जाएगी। क्योंकि यूपीए सरकार में जब सेंट्रल सेल्स टेक्स तीन से दो प्रतिशत किया था। डाॅ. मनमोहन सिंह सरकार ने राज्यों को वायदा किया था कि राज्यों के नुकसान की केंद्र भरपाई करेगा। परंतु यूपीए सरकार वायदे से मुकर गई और उसने 2011-12 की क्षतिपूर्ति कभी नहीं की।

    मजे की बात है कि अब जनता जीएसटी को मूल्य स्थिरता का माध्यम मानने लगी है। यही कारण है कि पेट्रोलियम उत्पादों की अस्थिर कीमतों से चिन्तित उपभोक्ता डीजल, पेट्रोल को भी जीएसटी के नेट में लाने की मांग करने लगे हैं। उपभोक्ताओं का मानना है कि यदि डीजल पेट्रोल जीएसटी कराधान के अंतर्गत लाया गया तो वास्तव में उपभोक्ता अच्छे दिनों का अहसास जरूर करेंगे। यह भी धारणा बनाई जा रही है कि दरों में कमी चुनावी आहट को सुनकर हो रही है और व्यापरी घरानों की आकांक्षा पूरी की जा रही है लेकिन वास्तव में यह सोच सियासत का बदरूप चेहरा है। जीएसटी जैसे ऐतिहासिक आर्थिक क्रांतिकारी सुधार को चुनावी नजरिये से देखना कतई उचित नहीं है।

  • किसानों को राहत देने सरकार ने बदला कानून

    किसानों को राहत देने सरकार ने बदला कानून


    मंत्रि-परिषद के निर्णय

    भोपाल 16 जुलाई(पीआईसी)।
    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में सहायक उप निरीक्षक (कम्प्यूटर)/प्रधान आरक्षक (कम्प्यूटर) और आरक्षक संवर्ग की सीधी भर्ती में महिला उम्मीदवारों के लिये ऊँचाई मापदंड 155 सेन्टीमीटर रखने का निर्णय लिया गया।

    मंत्रि-परिषद ने विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना में पिछड़े वर्ग के 10 विद्यार्थियों के स्थान पर 50 विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष लाभांवित करने का निर्णय लिया। इस योजना में उनकी छात्रवृत्ति का भुगतान शासन द्वारा किया जायेगा।

    किसान-कल्याण एवं कृषि विकास

    मंत्रि-परिषद ने भारत सरकार द्वारा नेशनल मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन एण्ड टेक्नॉलाजी अंतर्गत सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चर मेकेनाईजेशन (एस.एम.ए.एम) के वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक निरंतर संचालन के लिये कुल 379 करोड़ 89 लाख रूपये का अनुमोदन देने का निर्णय लिया। इसमें केन्द्रांश 227 करोड़ 93 लाख और राज्यांश 151 करोड़ 96 लाख रूपये है।

    मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में कृषि यंत्रीकरण की गतिविधियों को समग्र रूप से विस्तारित करने के उद्देश्य से क्रियान्वित की जा रही कृषि शक्ति योजना के वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक निरंतर संचालन के लिये 32 करोड़ 35 लाख रूपये स्वीकृत किये।

    राजस्व

    मंत्रि-परिषद ने राजस्व पुस्तक परिपत्र में केला फसल की हानि के लिये आर्थिक अनुदान सहायता राशि के मापदंडों में संशोधन करने का निर्णय लिया। निर्णय अनुसार 25 से 33 प्रतिशत फसल क्षति होने पर 15 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर अनुदान सहायता, 33 से 50 प्रतिशत पर 27 हजार और 50 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति होने पर 1 लाख रूपये प्रति हेक्टेयर अनुदान सहायता राशि देने का निर्णय लिया गया।

    मंत्रि-परिषद ने जिला राजपूत समाज ट्रस्ट, मंदसौर को स्कूल, छात्रावास, सामुदायिक भवन और सांस्कृतिक भवन निर्माण के लिये कस्बा मंदसौर में भूमि आवंटन करने का निर्णय लिया।

    जल संसाधन

    मंत्रि-परिषद ने खण्डवा जिले की भाम मध्यम सिंचाई परियोजना के लिये भू-अर्जन अधिनियम और पुनर्वास नीति के अनुसार भू-अर्जन एवं पुनर्व्यवस्थापन के लिये परियोजना प्रतिवेदन अनुसार अनुमानित व्यय के अतिरिक्त डूब क्षेत्र के कृषकों को विशेष पैकेज का लाभ देने का निर्णय लिया। परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति में भू-अर्जन एवं पुनर्वास कार्य के लिये 71 करोड़ 93 लाख का प्रावधान है। डूब क्षेत्र के ऐसे कृषक, जिन्हें भू-अर्जन अधिनियम के तहत सोलेशियम सहित मुआवजा राशि 10 लाख रूपये प्रति हेक्टेयर से कम प्राप्त हो रही है, को विशेष पैकेज के तहत न्यूनतम 10 लाख रूपये प्रति हेक्टेयर की दर से एकमुश्त राशि देने की स्थिति में भू-अर्जन एवं पुनर्वास पर 62 करोड़ 72 लाख रूपये की राशि व्यय की जाऐगी।

    इसी प्रकार खण्डवा जिले की आवंलिया मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए भू-अर्जन एवं पुनर्व्यवस्थापन के लिए डूब क्षेत्र के कृषकों को 47 करोड़ 78 लाख की राशि का व्यय विशेष पुनर्वास पैकेज अन्तर्गत किया जायेगा।

    मंत्रि-परिषद ने श्योपुर जिले की चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के कुल सैंच्य क्षेत्र 12 हजार हेक्टेयर के लिये 167 करोड़ 58 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी है।

    चिकित्सा शिक्षा

    मंत्रि-परिषद ने चिकित्सा महाविद्यालय, ग्वालियर में कैंसर उपचार की उच्च क्षमता वाली रेडियोथेरेपी मशीन स्थापित करने और उपचार की गुणवत्ता बढ़ाने के लिये टर्सरी कैंसर केयर सेंटर की स्थापना के लिये 42 करोड़ रूपये के पूँजीगत निवेश तथा 12 नवीन पदों के सृजन का स्वीकृति दी।

    इसी क्रम में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत ग्वालियर स्थित मानसिक आरोग्यशाला में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य प्रोग्राम के अंतर्गत मेन पॉवर डेव्हलपमेन्ट स्कीम की निरंतरता और स्वीकृत 31 करोड़ 60 लाख की परियोजना के क्रियान्वयन के लिये 16 संविदा पदों के सृजन का भी अनुमोदन दिया।

    चिकित्सा महाविद्यालय, जबलपुर में न्यूरो सर्जरी विभाग को राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ बैंचमार्क स्तर की सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से उसके उन्नयन के लिये 75 नवीन पदों के सृजन तथा निर्माण कार्य के लिये 15 करोड़ 83 लाख 11 हजार रूपये की पुनरीक्षित स्वीकृति प्रदान की गई।

    भंडार क्रय नियम में संशोधन

    मंत्रि-परिषद ने सामान्य उपयोग की सामग्री और सेवाएँ लेने के लिए भारत सरकार द्वारा विकसित जैम पोर्टल (गव्हर्नमेंट ई-मार्केट प्लेस) का उपयोग करने के लिए म.प्र भण्डार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम 2015 में संशोधन कर म.प्र भण्डार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम 2017 का अनुमोदन किया।

    लोक निर्माण

    मंत्रि-परिषद ने म.प्र राजमार्ग निधि में प्राप्त होने वाले राजस्व की राशि का वित्तीय वर्ष 2018-19 से आगामी 10 वर्ष के लिये म.प्र रोड डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन के पक्ष में प्रतिभूतिकरण करने का निर्णय लिया। इसका उपयोग कार्पोरेशन द्वारा निर्माणाधीन और नवीन राज्य राजमार्गों तथा मुख्य जिला मार्गों के लिए किया जाएगा।

    कर्मचारी कल्याण

    मंत्रि-परिषद ने कार्यभारित सेवा में कार्यरत कर्मचारियों तथा दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों, स्थाई कर्मियों को मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति उपादान का भुगतान, उपादान भुगतान अधिनियम 1972 के प्रावधानों के तहत करने का निर्णय लिया। यह व्यवस्था 7 अक्टूबर 2016 से प्रभावी होगी। मंत्रि-परिषद ने निर्णय लिया कि इस तिथि के पूर्व मृत अथवा सेवानिवृत्त कर्मचारियों के प्रकरणों में, जिनमें नियंत्रण प्राधिकारी अथवा न्यायालय द्वारा निर्णय दिया गया है अथवा भविष्य में दिया जाता है, गुण दोष के आधार पर परिपालन के संबंध में निर्णय लेने के लिये संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष को प्राधिकृत किया जाये।

    विधि विधायी

    मंत्रि-परिषद ने म.प्र उच्च न्यायालय के निजी सचिवों का ग्रेड वेतन दिनांक 1 जनवरी 2016 से 4200 रूपये से उन्नयित कर 4800 रूपये किये जाने को अनुमोदन प्रदान किया।

    सहकारिता

    मंत्रि-परिषद ने जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों से संबद्ध प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के डिफाल्टर सदस्यों के बकाया कालातीत ऋणों के निपटारे के लिये 6 अप्रैल 2018 से लागू मुख्यमंत्री ऋण समाधान योजना में भाग लेने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2018 तक बढा़ने के निर्णय को अनुमोदन प्रदान किया।

    अनुसूचित जाति कल्याण

    मंत्रि-परिषद ने अनुसूचित जाति कल्याण विभाग की बस्ती विकास योजना को वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक निरंतर संचालित करने का निर्णय लिया।