देश के स्वास्थ्य पर भी सर्जिकल स्ट्राईक की जरूरतःडॉ.पारे

भोपाल,23 जनवरी,(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)। भारत की मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्थाएं एक महान देश को लाचार बना रहीं हैं। मोदी सरकार को इन पर सर्जिकल स्ट्राईक करके इसमें आमूल चूल बदलाव करना होगा। इस मुद्दे पर चुप्पी देश को भारी मंहगी पड़ रही है। युवाओं का देश भारत आज बीमार है और इसे स्वस्थ बनाने के लिए हम जो संसाधन झोंक रहे हैं उनसे हमारी प्रगति प्रभावित हो रही है। ये विचार एलोपैथिक और प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ.अंबर पारे ने व्यक्त किए।

राजधानी के स्वराज भवन सभागार में अक्षर प्रभात जीव संरक्षण की ओर से आयोजित व्याख्यान माला में उन्होंने ये विचार व्यक्त किए। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम में अक्षर प्रभात ट्रस्ट के रामगोपाल बंसल, रामनिवास गोलस और आनंद मार्ग संप्रदाय के कई गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। इस अवसर पर शाकाहार को प्रोत्साहित करने वाली पुस्तक (हम भी पशु हैं क्या) का विमोचन किया गया।

लाईलाज बीमारियों के इलाज के लिए लगभग 150 गांवों में मेडिकल कैंप लगाने वाले डॉ.अंबर पारे ने कहा कि देश के बीमार स्वास्थ्य ढांचे से निपटने के लिए हमें एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी और नेचुरोपैथी सभी का मिला जुला प्रयोग करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत में हर व्यक्ति घरेलू दवाओं की जानकारी रखता है लेकिन उसे इतना ज्यादा डरा दिया जाता है कि वो जड़ी बूटियों और चूरन चटनी को खलनायक मानने लगता है। बाजारू सोच ने आम नागरिकों की जीवनशैली को इतना अधिक प्रदूषित कर दिया है कि लोगों की जीवन शक्ति घट गई है। नए नए प्रकार के रोग बढ़ रहे हैं। इसके लिए देश में व्यापक जन जागरण अभियान चलाना होगा। मौजूदा स्वास्थ्य ढांचे की गड़बड़ियों को उजागर करने के का जिम्मा सरकार को अपने हाथों में लेना होगा और इस क्षेत्र में उसी तरह सर्जिकल स्ट्राईक करनी होगी जैसे पाकिस्तान के खिलाफ की गई थी। खासतौर पर ह्दय रोगियों को तरह तरह से भयाक्रांत किया जा रहा है और उनसे भारी रकम वसूल की जा रही है।

आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रोगी देश है। यहां दवाओं और इलाजों पर हर साल पांच लाख करोड़ से भी ज्यादा धन खर्च होता है। भारत को ठंडे देशों के लिए बनी दवाईयों की प्रयोगशाला बना दिया गया है। जबकि वे दवाईयां हमारी प्रकृति, खानपान और मनोदशाओं के लिए दुश्मन साबित हो रहीं हैं। उन्होंने कहा कि साईंटिफिक क्वांटम कन्शसनेस, सुपर कान्शियस एवं सब कांन्शियस, साईंस बियांड साईंस, योग एंड साईंटिफिक हीलिंग थैरेपी, स्पीरीचुअल साईंटिफिक हीलिंग पर अनुसंधान करके जो तरीके विकसित किए गए हैं उनसे असाध्य बीमारियों का भी इलाज संभव है।

उन्होंने कहा कि 99 फीसदी चिकित्सक और मरीज इंसान के शरीर के लक्षणों के आधार पर इलाज करते हैं। जबकि इसकी जड़ हमारे प्राण शरीर में छुपी होती है। इसके लक्षण साल भर या छह महीने पहले ही नजर आने लगते हैं। इसके बावजूद डाक्टर पैथालाजी रिपोर्ट के आधार पर मरीज को क्लीन चिट दे देते हैं। बाद में रोग को असाध्य घोषित कर दिया जाता है। डॉ.पारे ने कहा कि हम प्राकृतिक चिकित्सा से शरीर के रोग हटाने पर जोर देते हैं जिससे मरीज का स्थाई इलाज होता है। व्याख्यानमाला के दौरान सफल इलाज पाने वाले पूजा, सोनल और कई अन्य रोगियों के अनुभव भी साझा किए गए। अंत में रामनिवास गोलस ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *