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  • राजा विक्रमादित्य के न्याय की स्थापना करती मोहन सरकार

    राजा विक्रमादित्य के न्याय की स्थापना करती मोहन सरकार

    विजय शाह प्रकरण को केवल एक विवादित बयान के रूप में देखने के बजाय लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि की अभिव्यक्ति, राजनीतिक विमर्श और संस्थागत मर्यादा के व्यापक संदर्भ में देखने की आवश्यकता है। विजय शाह लंबे समय से आदिवासी समाज की राजनीति का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता हैं। उनकी राजनीतिक भाषा और संवाद की शैली को उसी सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ में समझना चाहिए, न कि चुनिंदा शब्दों को अलग करके ऐसा अर्थ निकालना चाहिए जो वक्ता की मूल भावना से मेल ही न खाता हो।डाक्टर मोहन यादव की सरकार ने माननीय सुप्रीम कोर्ट की भावना को दृष्टिगत रखते हुए इस मुद्दे पर जो रुख अपनाया है वह लोकतांत्रिक इतिहास में एक मील का पत्थर बनने जा रहा है।मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट के इस फैसले से एक बार फिर राजा विक्रमादित्य की न्यायप्रियता का माडल देश के सामने प्रकट हुआ है।

    इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या किसी जनप्रतिनिधि की कही हुई बात को उसके पूरे संदर्भ से काटकर ऐसी व्याख्या दी जा सकती है, जिससे विधायिका और न्यायपालिका के बीच अनावश्यक टकराव की स्थिति पैदा हो? लोकतंत्र का उत्तर स्पष्ट है—जनप्रतिनिधि की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए और किसी भी बयान की व्याख्या उसके संपूर्ण संदर्भ में की जानी चाहिए।

    विजय शाह ने जिस संदर्भ में अपनी बात रखी, उसे राजनीतिक आलोचकों ने जिस रूप में प्रस्तुत किया, उसके बीच अंतर को समझना जरूरी है। किसी नेता की भाषा को लेकर असहमति हो सकती है, लेकिन असहमति और आशय को विकृत करके प्रस्तुत करना दो अलग बातें हैं। यदि किसी वक्तव्य में सेना के विरुद्ध भावना नहीं थी, देश के विरुद्ध भावना नहीं थी और कर्नल सोफिया कुरैशी के प्रति व्यक्तिगत वैमनस्य का उद्देश्य नहीं था, तो पूरे प्रसंग को उसी राजनीतिक और भावनात्मक संदर्भ में समझा जाना चाहिए।

    यहां एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है—विजय शाह केवल एक मंत्री नहीं, बल्कि आदिवासी समाज से आने वाले जननेता हैं। आदिवासी राजनीति की अपनी भाषिक और सामाजिक अभिव्यक्ति की परंपरा रही है। जनप्रतिनिधित्व का अर्थ केवल सदन के भीतर बोलना नहीं है; जनता के बीच जाकर उनकी भावनाओं, आक्रोश और राष्ट्रहित से जुड़े प्रश्नों को अपनी भाषा में व्यक्त करना भी लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का हिस्सा है। यही लोकतंत्र की जीवंतता है।

    सरकार ने अपना राजनीतिक रुख स्पष्ट करके यह संदेश दिया है कि किसी जनप्रतिनिधि की राजनीतिक अभिव्यक्ति को मनमाने ढंग से परिभाषित नहीं किया जा सकता। यही बिंदु इस पूरे प्रकरण को महत्वपूर्ण बनाता है। सरकार यदि अपने मंत्री के पक्ष को राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर स्पष्ट करती है, तो उसका अर्थ न्यायपालिका से टकराव नहीं है। बल्कि लोकतंत्र में विधायिका और कार्यपालिका की अपनी संवैधानिक भूमिका है और न्यायपालिका की अपनी भूमिका। इन संस्थाओं के बीच मतभेद को स्वतः टकराव अथवा संवैधानिक संकट मान लेना भी लोकतांत्रिक दृष्टि से उचित नहीं है।

    वास्तविक खतरा तब पैदा होता है जब राजनीतिक विरोध को न्यायिक संघर्ष का रूप देने की कोशिश की जाती है। किसी राजनीतिक बयान पर राजनीतिक जवाब दिया जाना चाहिए, तथ्यों के आधार पर उसका प्रतिवाद होना चाहिए और आवश्यकता होने पर कानूनी प्रक्रिया अपने रास्ते पर चलनी चाहिए। लेकिन किसी बयान को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर ऐसा वातावरण बनाना कि सरकार और न्यायपालिका आमने-सामने हैं, लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए स्वस्थ संकेत नहीं है।

    मोहन सरकार का स्पष्ट रुख इसी दृष्टि से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। सरकार ने यह संदेश दिया है कि वह अपने जनप्रतिनिधि की अभिव्यक्ति को राजनीतिक दबाव के आधार पर परिभाषित नहीं होने देगी। यह रुख लोकतंत्र में विधायिका की गरिमा को मजबूत करता है। साथ ही, न्यायिक प्रक्रिया अपने निर्धारित मार्ग पर चल सकती हैदोनों बातें एक-दूसरे की विरोधी नहीं हैं।

    यह भी याद रखना चाहिए कि राष्ट्रभक्ति पर किसी एक राजनीतिक समूह का एकाधिकार नहीं हो सकता। देश के प्रति सम्मान और सेना के प्रति गौरव भारतीय समाज की व्यापक भावना है। विजय शाह के वक्तव्य की आलोचना करने वाले भी राष्ट्रहित की बात कर सकते हैं और उनका विरोध करने वाले भी। लोकतांत्रिक भारत की खूबसूरती यही है कि राष्ट्रप्रेम की अभिव्यक्ति के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं।

    इसलिए विजय शाह प्रकरण को राजनीतिक षड्यंत्र, न्यायपालिका बनाम विधायिका अथवा राष्ट्रभक्ति बनाम राष्ट्रविरोध जैसे अतिरंजित द्वंद्व में बदलने के बजाय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनप्रतिनिधित्व के अधिकार के प्रश्न के रूप में देखना अधिक सार्थक होगा। किसी जननेता के कथन को उसके मूल संदर्भ से हटाकर उसकी राजनीतिक पहचान पर प्रहार करने का माध्यम बनाना लोकतांत्रिक संवाद को कमजोर करता है।

    मोहन सरकार का स्पष्ट रुख इस अर्थ में महत्वपूर्ण है कि उसने अपने जनप्रतिनिधि के राजनीतिक अधिकार और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के प्रश्न पर अस्पष्टता नहीं दिखाई। लोकतंत्र में सरकार का काम केवल प्रशासन चलाना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधित्व की गरिमा की रक्षा करना भी है।कांग्रेस के प्रवक्ता मुकेश नायक ने भी इस मुद्दे को मजाकिया लहजे में स्वीकार्य बनाने की जो पहल की वह भी स्वस्थ लोकतत्र की दिशा में स्वागतयोग्य कदम है।

    अंततः इस पूरे प्रकरण से यही संदेश निकलता है कि लोकतंत्र में किसी नेता के शब्दों से असहमति हो सकती है, लेकिन उसकी राजनीतिक अभिव्यक्ति को मनमाने अर्थ देकर दबाने का प्रयास लोकतांत्रिक संस्कृति के लिए उचित नहीं है। विजय शाह की आदिवासी राजनीतिक पृष्ठभूमि, उनका जनसरोकार और उनके वक्तव्य का मूल संदर्भ—इन सभी को साथ रखकर ही निष्पक्ष निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए। राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन जनप्रतिनिधि की आवाज को कुतर्क, अतिरंजना और संदर्भ-विहीन व्याख्या के जरिए बाधित करना लोकतंत्र को मजबूत नहीं, बल्कि कमजोर करता है।मोहन सरकार के इस फैसले पर सभी ओर यही स्वर उभरते नजर भी आ रहे हैं।

  • विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से पढ़ी जाएगी भारत की यशोगाथा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से पढ़ी जाएगी भारत की यशोगाथा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल,01 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतवर्ष ने अपने ज्ञान से सम्पूर्ण ब्रह्मांड को अलौकिक किया है। कालगणना की पद्धति 300 साल पहले तक हमारे देश से दुनिया तक जाती थी। भारतीय संस्कृति का प्रत्येक पहलु प्रकृति और विज्ञान का ऐसा विलक्षण उदाहरण है, जो विश्व कल्याण का पोषक है। इन्हीं धरोहरों के आधार पर निर्मित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय परम्परा का गौरवपूर्ण प्रतीक है। इस घड़ी के माध्यम से भारत के गौरवपूर्ण समय को पुनर्स्थापित किया जा रहा है। विरासत-विकास-प्रकृति और तकनीक के संतुलन का प्रकटीकरण विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के अनावरण और उसके ऐप लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास के नवनिर्मित द्वार पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का मंत्रोच्चार के बीच अनावरण किया। इस अवसर पर शौर्य स्मारक से आरंभ हुई ‘भारत का समय-पृथ्वी का समय’ रैली मुख्यमंत्री निवास पहुंची। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रैली में शामिल युवाओं का स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के ऐप का लोकार्पण, राजा भोज पर निर्मित यू-ट्यूब सीरीज के फोल्डर का विमोचन और खगोल विज्ञान पर केन्द्रित फिल्म की सीडी का विमोचन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैदिक घड़ी के उपयोग को प्रोत्साहित करने का आहवान किया और उपस्थित युवाओं से मोबाइल में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप भी डाउनलोड करवाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर वैदिक घड़ी भेंट की गई।

    विक्रमादित्य वैदिक घड़ीः भारतीय कालगणना विज्ञान की यशोगाथा का दस्तावेज


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि सनातन संस्कृति के व्रत, त्यौहार अंग्रेजी कैलेंडर के आधार पर नहीं आते, उनकी गणना में ऋतुओं का प्रभाव शामिल है। सावन-भादो-कार्तिक माह का प्रभाव हम सब अपने जीवन में अनुभव कर रहे हैं। पूर्णिमा और अमावस्या का समुद्र पर प्रभाव ज्वार-भाटा से आंका जा सकता है, इससे हमारी तिथियों की सत्यता भी प्रमाणित होती है। मानसिक रोगियों पर अमावस्या और पूर्णिमा का प्रभाव चिकित्सा शास्त्र भी स्वीकार करता है। मानव शरीर संरचना में 70 प्रतिशत जल का अंश है, जो अमावस्या और पूर्णिमा पर प्रभावित होता है। इसी का परिणाम है कि मानसिक चिकित्सालयों को अमावस्या और पूर्णिमा पर विशेष सतर्कता बरतने के स्थाई निर्देश हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय शास्त्रों में समय की गणना सूक्ष्मतम स्तर तक की गई है। सनातन संस्कृति में सूर्योदय से सूर्योदय तक की गणना का विधान है। इस प्राचीन गणना में 30 मुहूर्त हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में विभिन्न सिद्धांतों पर विचार-विमर्श के लिए कोई बंधन या दंड नहीं है, जबकि कालगणना पर वैचारिक मतभेद के कारण मृत्युदंड देने का उद्धरण पश्चिम के इतिहास में मिलता है।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खगोलीय अध्ययन के लिए सूर्य से बनने वाली छाया के आधार पर सूर्य की गति की गणना की गई। उन्होंने बताया कि भारत का केन्द्र उज्जैन है और उज्जैन का केन्द्र वर्तमान में डोंगला में स्थित है। डोंगला का प्रसंग भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा से जुड़ता है। संभवत: डोंगला के इस महत्व से ही भगवान श्रीकृष्ण का आगमन हुआ था। पंचांग भारतीय कालगणना की शुद्धता और सटीकता का जीवंत उदाहरण हैं। पंचांग के विद्वान चंद्रग्रहण, सूर्यग्रहण, तिथि, नक्षत्र, वार, व्रत, त्यौहार और मुहूर्तों की जानकारी वर्तमान में भी त्वरित रूप से उपलब्ध कराते हैं।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री निवास के द्वार पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित की गई है। मुख्यमंत्री निवास केवल मुख्यमंत्री का नहीं, अपितु सभी प्रदेशवासियों की धरोहर है। प्रदेशवासियों द्वारा दिया गया अधिकार और लोगों का भरोसा ही हमारी सरकार का आधार है। भारतीय संस्कृति के अतीत के गौरवशाली पृष्ठों का प्रकटीकरण हमारा दायित्व है। इसी का परिणाम है कि हमारी कालगणना का केन्द्र उज्जैन है, परंतु कालगणना की पद्धति की जानकारी प्रदेश की राजधानी में हो, इसके लिए प्रयास करते हुए विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना भोपाल में की गई। भारतीय कालगणना की पद्धति की जानकारी का वैश्विक रूप से भी प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैदिक घड़ी के ऐप के माध्यम से हम अपने मोबाइल में वैदिक घड़ी का संचालन कर सकते हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा और संस्कृति विभाग के इस आयोजन में योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि हम आजादी के अमृतकाल में चल रहे हैं। पूरी दुनिया का समय बदल रहा है, पश्चिम के बाद अब पूर्व का समय आया है।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अपने दृष्टिकोण को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। भारत का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए वे प्रतिबद्ध हैं। उन्हीं के प्रयासों से वर्ष 2014 में दुनिया के अंदर यूनेस्को के माध्यम से योग को पुनर्स्थापित किया गया। भारत का ज्ञान, कौशल और विशेषता केवल भारत के लिए नहीं है, यह समूची मानवता के लिए है। भारत का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए इस भाव से प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में हम निरंतर सक्रिय और अग्रसर हैं।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुशासन के आधार पर ही विक्रमादित्य काल वर्तमान समय तक याद किया जाता है। सुशासन के इन्हीं उच्चतम मापदंडों के आधार पर प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में वर्तमान में व्यवस्थाओं का संचालन हो रहा है। उनके प्रत्येक निर्णय से देश गौरवान्वित होता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी हर परिस्थिति में हमारे वैज्ञानिकों, सैनिकों, किसानों सहित देश के लिए समर्पित प्रत्येक व्यक्ति के साथ हैं।
    खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि उस राष्ट्र का भविष्य ही सुरक्षित रहता है, जो अपने अतीत और संस्कृति को प्रतिबद्धता के साथ आत्मसात करता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन की ध्वजा चहुंओर लहरा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले लगभग दो वर्षों में विकास और जनकल्याण के साथ सनातन संस्कृति को सहेजने की जो पहल की है, वह सराहनीय और वंदनीय है। कार्यक्रम को पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, सांसद श्री आलोक शर्मा, वैदिक घड़ी के अन्वेषणकर्ता श्री आरोह श्रीवास्तव, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे और महर्षि सांदीपनि विश्वविद्यालय के कुलगुरू पंडित शिवशंकर मिश्र ने भी संबोधित किया।
    कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, विधायक श्री विष्णु खत्री, भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, अध्यक्ष नगर निगम श्री किशन सूर्यवंशी, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरू और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।
    वैदिक घड़ी और ऐप की विशेषताएं
    विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय काल गणना पर आधारित विश्व की पहली घड़ी है, जो भारतीय परंपरा, वैदिक गणना और वैज्ञानिक दृष्टि का अद्भुत संगम है। यह भारत की सांस्कृतिक धुरी बनकर वैश्विक भाषाओं, पंरपराओं, आस्था और धार्मिक कार्यों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बनेगी। साथ ही विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के तैयार किये गये मोबाइल ऐप में 3179 विक्रम पूर्व, महाभारतकाल से लेकर 7 हजार से अधिक वर्षों के पंचांग, तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, मास, व्रत एवं त्यौहारों की दुर्लभ जानकारियां समाहित की गई हैं। धार्मिक कार्यों, व्रत और साधना के लिए 30 अलग-अलग शुभ मुहूर्तों की जानकारी एवं अलार्म की सुविधा भी है। प्रचलित समय में वैदिक समय (30 घंटे), वर्तमान मुहूर्त स्थान, GMT और IST समय, तापमान, हवा की गति, आर्द्रता एवं मौसम संबंधी सूचनाएं भी लोगों को उपलब्ध करायी गई है। यह ऐप 189 से अधिक वैश्विक भाषाओं में उपलब्ध है। इसमें दैनिक सूर्योदय और सूर्यास्त की गणना तथा इसी आधार पर हर दिन के 30 मुहूर्तों का सटीक विवरण शामिल है।