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  • एमपी की पहचान बाघ को बचाएं बोले डॉ.मोहन यादव

    एमपी की पहचान बाघ को बचाएं बोले डॉ.मोहन यादव

    भोपाल,28 जुलाई(प्रेस इनफॉर्मेशन सेंटर).मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यह हमारा सौभाग्य है कि मध्यप्रदेश सर्वाधिक बाघ वाला प्रदेश है। प्रदेश में बाघों की आबादी बढ़कर 785 पहुँच गई है। यह प्रदेश के लिये गर्व की बात है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि वन्य प्राणियों की सुरक्षा का कार्य अत्यंत मेहनत और परिश्रम का है। समुदाय के सहयोग के बिना वन्य प्राणियों की सुरक्षा संभव नहीं है। वन विभाग और वन्य प्राणियों की सुरक्षा में लगे सभी लोग बधाई के पात्र हैं, जिनके कारण मध्यप्रदेश एक बार फिर टाइगर स्टेट बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर जंगलों में बाघों के भविष्य को सुरक्षित करने और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लेने का आहवान किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाघों के संरक्षण के लिये संवेदनशील प्रयासों की आवश्यकता होती है जो वन विभाग के सहयोग से संभव हुई है। हमारे प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यानों में बेहतर प्रबंधन से जहाँ एक ओर वन्य प्राणियों को संरक्षण मिलता है, वहीं बाघों के प्रबंधन में लगातार सुधार भी हुए हैं।

    वन्य प्राणियों के प्रति संवेदनशीलता

    वन्य प्राणियों के प्रति संवेदनशीलता का हाल ही में सीहोर जिले में एक उदाहरण सामने आया था। सीहोर जिले के बुदनी के मिडघाट रेलवे ट्रेक पर बाघिन के तीन शावक ट्रेन की चपेट में आ गये थे, जिसमें दो गंभीर रूप से घायल शावकों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जिला प्रशासन और वन्य प्राणी चिकित्सकों की टीम द्वारा एक डिब्बे की विशेष ट्रेन से उपचार के लिये भोपाल लाया गया था।

  • वनों को समृद्धि का आधार बनाएं: राज्यपाल मंगुभाई पटेल

    वनों को समृद्धि का आधार बनाएं: राज्यपाल मंगुभाई पटेल

    भोपाल, 24 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि पर्यावरण संतुलन और समृद्धि के लिए अधिक से अधिक वृक्ष लगाए जाने चाहिए। वृक्ष होंगे तो पर्यावरण स्वस्थ होगा और वनोपज से समृद्धि आएगी। उन्होंने वन उत्पाद और औषधियों के गुणों के व्यापक स्तर पर प्रसार की आवश्यकता बताई है। उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि पारंपरिक रूप से सदियों से उपचार में उपयोग किए जाने वाली जड़ी-बूटियों, औषधियों का वैज्ञानिक स्वरूप में प्रमाणीकरण के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने जनजातीय समुदाय में प्रचलित अनुवांशिक रोग सिकल सेल के बारे में बताते हुए कहा कि वह 21 प्रकार के रोगों का कारण होता है। वन विभाग और आयुर्वेद विशेषज्ञों से कहा है कि वह रोग के उपचार में आयुर्वेदिक औषधियों के अनुसंधान के कार्य करें। उन्होंने मेले के संबंध में नगर में लाउड स्पीकर पर सूचना के प्रसार की आवश्यकता बताई है।

    राज्यपाल श्री पटेल राज्य लघु वनोपज व्यापार एवं विकास सहकारी संघ द्वारा आयोजित वन मेला 2024 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मेले का आयोजन हाट बाजार में किया गया है। वन, पर्यावरण एवं अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान, वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री श्री दिलीप अहिरवार भी उद्घाटन समारोह में मौजूद थे।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि लघु वनोपज से समृद्धि के लिए वन मेले का आयोजन सराहनीय पहल है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वह मेले में अधिक से अधिक खरीदारी कर, समाज के वंचित वर्ग के आर्थिक सशक्तिकरण के प्रयासों में सहभागी बने। उन्होंने कहा कि समाज की विकास की मुख्य धारा में पिछड़ने का प्रमुख कारण अशिक्षा है। विकास की पहली सीढ़ी शिक्षा है। उन्होंने वंचित वर्गों का आव्हान किया है कि वह बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि जल वायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग की चुनौतियां पर्यावरणीय असंतुलन का परिणाम है। पर्यावरण संतुलन का आधार वृक्षारोपण है।

    उन्होंने पेड़ों के आरोग्य, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वन औषधियों के साइड इफेक्ट नहीं होते। उनके उपचार का प्रभाव कोविड के समय हम सब ने देखा है। उन्होंने कहा कि घर की खिड़की के बाहर नीम अथवा पीपल के पेड़ होते हैं तो एयर कंडीशनिंग की आवश्यकता भी नहीं पड़ती है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में वृक्षारोपण में जनसहभागिता के लिए 12 राशि, 27 नक्षत्र और 9 ग्रह वनों की आयोजना की थी। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में सघन वृक्षारोपण बहुत जरूरी है। नागरिकों का आह्वान किया कि वे अपने जन्मदिन पर प्रतिवर्ष पौधरोपण और उसकी देख-भाल का संकल्प लें।

    वन, पर्यावरण एवं अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान ने बताया कि प्रदेश में 35 लाख लोग वनोपज संग्रहण कार्य से जुड़े हुए हैं। राज्य सरकार उनके कल्याण के लिए प्रभावी प्रयास कर रही है। तेंदूपत्ता संग्रहण की दर 3 हजार रुपए प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर, 4 हजार रुपए कर दी है। प्रदेश में 126 वन धन केन्द्र स्थापित किए गए हैं। एकलव्य शिक्षा विकास योजना के द्वारा उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों में शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है।

    वन पर्यावरण राज्य मंत्री श्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के वोकल फॉर लोकल की दिशा में राज्य सरकार द्वारा तेजी से कार्य किया जा रहा है। वन मेले का आयोजन वनोपज संग्राहकों को सीधे लाभांवित करने का प्रयास है।

    राज्यपाल का कार्यक्रम के प्रारंभ में जनजातीय लोक कलाकारों ने पारंपरिक लोक नृत्य के द्वारा स्वागत किया। उन्होंने कार्यक्रम के प्रारंभ में माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन कर मेले का उदघाटन किया। कार्यक्रम में अतिथियों का औषधीय पौधे भेंट कर स्वागत किया गया। उन्हें वरली आर्ट की कृति और हर्बल उत्पादों का गिफ्ट हेम्पर भेंट किया।

    स्वागत उद्बोधन अपर मुख्य सचिव वन, श्री जे.एन. कांसोटिया ने किया । आभार प्रदर्शन प्रबंध संचालक लघु वनोपज संघ श्री विभाष ठाकुर ने किया। इस अवसर पर मुख्यवन संरक्षक, वन बल प्रमुख श्री अभय पाटिल, वनोपज संग्राहक और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।