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  • नई आबकारी नीति से शराब निर्माताओं में हड़कंप

    नई आबकारी नीति से शराब निर्माताओं में हड़कंप

    भोपाल,29 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)।प्रदेश में वर्ष 2020-21 की आबकारी नीति में देशी/विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानों के बड़े समूह बनाये जाने से मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि सीमावर्ती प्रांतों के मदिरा लायसेंसधारियों में जिज्ञासा देखी गई है जबकि मदिरा के निर्माताओं में हड़कंप मच गया है। डिस्टिलरियों के मालिकों का कहना है कि सरकार ने किसी बड़े निवेशक को एकमुश्त शराब सप्लाई के ठेके देने की तैयारी की है। इससे बड़े व्यापारी अधिक मुनाफा कमाने के लिए शराब की खरीद कम दामों पर करेंगे जबकि बाजार में मंहगी कीमत में बेचेंगे।

    आबकारी विभाग के सूत्रों के अनुसार बड़े मदिरा समूहों के निर्माण से मदिरा के अवैध व्यापार पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकेगा। इससे अस्वस्थ व्यवसायी प्रतिस्पर्धा समाप्त होगी और मदिरा उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता की वैध मदिरा उचित मूल्य पर उपलब्ध हो सकेगी। वर्ष 2020-21 के लिये घोषित आबकारी नीति से राज्य के राजस्व संवर्धन में नया प्रतिमान स्थापित होने की संभावना है। आबकारी आयुक्त श्री राजेश बहुगुणा ने इस सिलसिले में प्रदेश के और सीमावर्ती प्रांतों के मदिरा अनुज्ञप्तिधारियों से दूरभाष पर चर्चा की है।

    सरकारी सूत्रों का दावा है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 की आबकारी नीति में बड़े, मध्यम और छोटे मदिरा अनुज्ञप्तिधारियों की व्यावसायिक क्षमताओं का पूरा ध्यान रखा गया है। साथ ही नवीनीकरण/ई-टेण्डर/ई-बिडिंग जैसी पारदर्शी व्यवस्थाओं को अपनाया गया है। प्रदेश के जिन 16 जिलों की समस्त मदिरा दुकानें दो अथवा एक समूह में नीलाम होनी है, वहाँ एकाधिकारी व्यवसाय की चाह में उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा तथा दिल्ली जैसे प्रदेशों के ठेकेदारों में अत्यधिक रूचि नजर आ रही है। ये ठेकेदार विभिन्न माध्यमों से ठेकों के बारे में जानकारी हासिल कर रहे हैं। जिन जिलों में नवीनीकरण, लॉटरी या एक समूहों में मदिरा दुकानों की नीलामी होना है, उनसे संबंधित ठेकेदारों को विभाग द्वारा समन्वय कर जानकारी मुहैया कराई जा रही है।

    आबकारी व्यवस्था वर्ष 2020-21 के लिये मध्यप्रदेश के 36 जिलों में मौजूदा वर्ष के देशी/विदेशी मदिरा के फुटकर व्यवसायियों को उनके पक्ष में स्वीकृत अनुज्ञप्तियों को वर्ष 2020-21 की अवधि के लिये नवीनीकृत करने का अवसर दिया गया है। नवीनीकरण की कार्यवाही के लिये 29 फरवरी को गुना और अशोकनगर की सम्पूर्ण देशी/विदेशी फुटकर मदिरा दुकानों के लिये नवीनीकृत आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। प्रदेश के शेष जिलों में भी नवीनीकरण प्रक्रिया को लेकर मदिरा अनुज्ञप्तिधारियों ने सकारात्मक रूझान दिखाया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के शेष जिलों में पहले दिन ही 55 से भी अधिक मदिरा समूहों के लिये नवीनीकरण आवेदन क्रय किये जा चुके हैं। नवीनीकरण संबंधी प्रक्रिया 5 मार्च, 2020 तक जारी रहेगी।

  • माफिया से युद्ध को कमलनाथ ने दी खुली छूट

    माफिया से युद्ध को कमलनाथ ने दी खुली छूट

    मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय बैठक कल

    भोपाल 11 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमल नाथ सरकार ने अपने मात्र एक साल के कार्यकाल में वर्षों से माफिया राज के आतंक का दंश झेल रही आम जनता को इससे मुक्त कराने की मुहिम को तेज करने के लिए 12 दिसंबर को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। जनसम्पर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि अब प्रदेश में ‘लोगों के लिए लोगों की सरकार’ चलेगी न कि माफिया राज।

    जनसम्पर्क मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि मात्र एक साल में माफिया राज की कमर तोड़ने का जो साहस मुख्यमंत्री ने दिखाया है, उससे जनता को राहत मिली है। उन्होंने कहा कि माफिया, शासन-प्रशासन को ताक पर रखकर पूरे प्रदेश में दशकों से  समानांतर सरकार चला रहे थे, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही थी और विकास अवरूद्ध हो रहा था।

    श्री शर्मा ने कहा कि माफिया के खिलाफ जनमानस के साथ कमर कसकर खड़ी कमल नाथ सरकार ने मिलावटखोरों के खिलाफ ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ की शुरुआत की। आम जनता को जहर परोस रहे मिलावटखोर माफियाओं की धर-पकड़ से पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर कार्यवाही हुई। अभियान के दौरान मिलावटखोरों के खिलाफ 94 एफआईआर दर्ज की गई और 31 कारोबारियों के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई हुई।

    मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार की नई रेत नीति बन जाने से अभी तक प्रदेश की रेत संपदा लूटने और प्रदेश की जनता के हितों से कुठाराघात करने वाले माफिया के हौसले पस्त हो गए हैं। शासन-प्रशासन पर हमले कर और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कर बेखौफ रेत माफिया को एक ही फैसले से मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने ध्वस्त कर दिया है। यही नहीं, नई रेत नीति से प्रदेश को जो राजस्व करीब 200 करोड़ मिलता था, वह इस वर्ष बढ़कर 1234 करोड़ तक पहुँच गया है। पिछले 15 साल से 15 हजार करोड़ रुपए किसकी जेब में जा रहे थे, इसका खुलासा भी मुख्यमंत्री ने नई रेत नीति बनाकर किया है। अब ये पैसा निजी हाथों में जाने के बजाए प्रदेश के विकास और जनता के हितों के लिए उपयोग होगा। 

    जनसम्पर्क मंत्री ने कहा कि किसानों को मिलावटी खाद बेचने वाले माफियाओं से मुक्त कराने के लिए भी मुहिम पूरे प्रदेश में चल रही है। पिछले एक माह में 1313 उर्वरक विक्रेताओं और गोदामों का निरीक्षण कर लिए गए नमूनों में 110 प्रकरणों में मिलावट पाए जाने पर कार्रवाई की गई है।

    श्री पी.सी. शर्मा ने कहा कि इतना ही नहीं, कमल नाथ सरकार ने विभिन्न शहरों में अपने रसूख और माध्यमों का दुरुपयोग करके अनैतिक गतिविधियाँ चलाने, सरकारी और निजी जमीनों पर कब्जे कर अपना साम्राज्य बनाने वाले तथा इंदौर और ग्वालियर में भी माफिया के खिलाफ सारे दबावों के बावजूद सख्ती दिखाई है और कठोर कार्यवाही भी सुनिश्चित की है। इस दृढ़तापूर्ण कार्रवाई के पीछे एक ही लक्ष्य था कि अब माफिया को प्रदेश की जनता और यहाँ की सरकारी संपदा को लूटने की इजाजत नहीं होगी। 

    मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि जो नेता प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से माफिया के समर्थन में बयान देकर उनका संरक्षण कर रहे हैं, उनकी गतिविधियों से यह स्पष्ट है कि 15 साल में ये माफिया किनके संरक्षण में पनपे हैं। श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश में माफिया राज को जड़ से उखाड़ फेकने के लिए मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ की अध्यक्षता में 12 दिसंबर को उच्च स्तरीय बैठक होने जा रही है। इस बैठक में गृह मंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्त वार्ता) एवं एसआईटी, आईजी एवं कमिश्नर जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर, भोपाल, कलेक्टर इंदौर एवं कमिश्नर इंदौर नगर निगम उपस्थित रहेंगे।