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  • शिवराज का गोदी मीडिया अपने पाप छुपाने में जुटा

    शिवराज का गोदी मीडिया अपने पाप छुपाने में जुटा

    भोपाल,04 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने जबसे मध्यप्रदेश सरकार को पाखंडी परिपाटियों से बाहर निकालने की मुहिम चलाई है तबसे तंत्र की आड़ में बैठकर आम नागरिकों का खून चूसने वाले दलालों में हड़कंप मचा हुआ है।   पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान जिस गोदी मीडिया को पालने पोसने के लिए सरकारी खजाने से लगभग हजार करोड़ रुपए खर्च कर रहे थे वह तो लगभग बौखला गया है । उसने सरकारी फरमान को हाईकोर्ट का भय दिखाकर पापों का पिटारा छुपाने की कोशिश शुरू कर दी है।

    जनता से सीधा संवाद स्थापित करने के लिए शासन ने नर्मदापुरम संभाग में उपायुक्त राजस्व 2012 बैच के गणेश कुमार जायसवाल को जनसंपर्क विभाग में अपर संचालक के पद पर पदस्थ करने का आदेश जारी कियाथा। जैसे ही ये आदेश जारी हुआ तो जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों ने ये कहकर शासन के आदेश को मानने से इंकार कर दिया कि ये अधिकारी तो जूनियर है। हमारे तो उपसंचालक भी इससे वरिष्ठ हैं। सरकार किसी बाहिरी अफसर को हमारे विभागीय कैडर में कैसे पदस्थ कर सकती है। इससे पहले शिवराज सिंह सरकार ने जिस आईपीएस अधिकारी को संचालक बनाकर भेजा था वह सीनियर था लेकिन ये तो बहुत जूनियर है। हम इसके अधीन कैसे काम कर सकते हैं। इस एक दिवसीय कलमबंद हड़ताल की कमर तब टूट गई जब उन्हें समझाया गया कि शासन के आदेश का विरोध सड़कों पर करना अनुशासन हीनता होगी।

    विभाग के अधिकारियों का कहना था कि वे सरकार का प्रचार कार्य संभालते हैं। यदि सरकार उनकी बात नहीं मानेगी तो वे सरकार का जनसंवाद ढप कर देंगे । उन्होंने अपना विरोध मुखरता पूर्वक दर्ज कराने के लिए कर्मचारी संगठनों को भी साथ खड़ा कर लिया था। जैसे ही इस प्रदेशव्यापी हड़ताल की खबर मंत्रालय तक पहुंची तो आला अधिकारियों ने विभाग को निर्देश दिए कि वे अपनी हड़ताल समाप्त करें ,हम इन स्थितियों को  संवाद से समझेंगे। कमिश्नर जनसंपर्क आईएएस दीपक सक्सेना ने अधिकारियों को समझाया कि वे हड़ताल समाप्त करें हम आपकी मांगों पर सदाशयता पूर्वक विचार करके कोई रास्ता निकालेंगे।

    अधिकारियों ने मौके की नजाकत को भांपकर हड़ताल तो वापस ले ली लेकिन अपने दांव पेंच जारी रखे। जिन पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के नाम पर बजट की बड़ी राशि खर्च की जाती थी उन्हें अपने पक्ष में लामबंद करके अधिकारियों ने उनके कंधे से अपनी बंदूक चलानी शुरु कर दी। विभिन्न पत्रकार संगठनों और मीडिया संस्थानों ने भी अधिकारियों की नाराजगी से हामी भरते हुए सरकारी फरमान की मुखालिफत शुरु कर दी। अब जबकि सरकारी खजाने से भजकलदारम करने वाले इस गोदी मीडिया को समझ में आ गया है कि शासन अपने जनसंवाद को बगैर किसी दलाली झोल के जारी करना चाहता है तो उन्होंने सरकारी फरमान को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर शुरु कर दी है।

    इस संबंध में आज एक पत्रकार की जनहित याचिका की प्रति सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई है । इस पत्रकार का कहना है कि विभाग के अधिकारी सीधे सरकार से पंगा नहीं ले सकते इसलिए उनके कहने पर ही मैं हाईकोर्ट जा रहा हूं। जब उसे बताया गया कि वह पीड़ित पक्ष नहीं है। वह विभाग में अधिकारी नहीं है । इस सरकारी आदेश से जनता को कोई नुक्सान नहीं हो रहा है इसलिए वह पीड़ित पक्ष बनकर यदि अदालत जाएगा तो उसे स्टे मिलने के बजाए दंड भी भुगतना पड़ सकता है। यदि अधिकारियों के हक छीने जा रहे हैं तो वे स्वयं अदालत जा सकते हैं।

    गोदी मीडिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को भय है कि यदि बाहिरी अधिकारी विभाग में आ गया तो वह यहां बरसों से चल रहे गोरखधंधे की पोल खोल देगा। इससे उन्हें प्रमोशन की जगह जेल यात्रा तक भुगतना पड़ सकती है। ऐसे में सरकारी फरमान का विरोध करना उनकी मजबूरी है। हालांकि अभी सरकार ने नव आगंतुक को फिलहाल अपनी पुरानी पदस्थापना पर ही बने रहने को कहा है। उसे कहा गया है कि जब विभागीय अधिकारियों की नाराजगी दूर हो जाएगी तब आपको भेजा जाएगा।

    भाजपा संगठन से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये डाक्टर मोहन यादव की सरकार है। सरकार यदि कोई फैसला करती है तो उसे सख्ती से लागू भी करती है। यदि जनसंपर्क विभाग के अफसर इसी तरह विरोध करते रहेंगे तो उनका ये कदम विभाग के पैरों पर मारी गई कुल्हाड़ी साबित होगा।

  • लागत का आधा मुनाफा सरकार देगीःशिवराज सिंह चौहान

    लागत का आधा मुनाफा सरकार देगीःशिवराज सिंह चौहान


    नई दिल्ली, 29 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज लोक सभा में प्रश्नकाल के दौरान, देश में समग्र कृषि विकास की तथ्यों व आंकड़ों सहित विस्तार से जानकारी दी और बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने का अभियान निरंतर जारी है।

    केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि कृषि क्षेत्र के विकास के लिए छह उपाय किए गए हैं। पहला– सरकार ने उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। दूसरा– आय बढ़ाने के लिए लागत कम करना। तीसरा– उत्पादन के ठीक दाम सुनिश्चित करना। चौथा– नुकसान की स्थिति में उचित मुआवजे की व्यवस्था। पांचवां– कृषि का विविधीकरण, केवल एक फसल की खेती नहीं, बल्कि फलों, फूलों, सब्ज़ियों, औषधियों की खेती, कृषि वानिकी, मछली पालन, पशुपालन, अलग-अलग प्रयत्नों को बढ़ावा देना और छठा– प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरकों के प्रयोग के साथ भावी पीढ़ी के लिए धरती को सुरक्षित रखना। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में फसलों का उत्पादन 246.42 मिलियन टन से बढ़कर अब 353.96 मिलियन टन हो गया है। दलहन उत्पादन 16.38 मिलियन टन से बढ़कर 25.24 मिलियन टन हो गया, वहीं तिलहन उत्पादन, 27.51 मिलियन टन से बढ़कर 42.61 मिलियन टन हो गया है। बागवानी उत्पादन 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 367.72 मिलियन टन हो गया है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि किसानों द्वारा ही दूध का उत्पादन किया जा रहा है और इसमें काफी बढ़ोतरी हुई है।

    श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जहां तक किसानों की आय का सवाल है, मैं दावे के साथ कहता हूं कि कई किसानों की आय दोगुनी से भी ज़्यादा हो गई है। पूर्व यूपीए सरकार में कृषि बजट 27 हज़ार करोड़ रुपये था, जो बढ़कर अब 1 लाख 27 हज़ार करोड़ रुपये हो गया है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि पहले थी ही नहीं और अब 10 करोड़ किसानों को किसान सम्मान निधि से लाभान्वित किया जा रहा है। हमें अपने प्रधानमंत्री के नेतृत्व पर गर्व है। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि लगभग 2 लाख करोड़ रुपये उर्वरकों पर केंद्र सरकार सब्सिडी दे रही है। उन्होंने बताया कि पूर्व सरकार में केसीसी और बाकी संस्थागत लोन की राशि मात्र 7 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपये हो गई है। ‘फसल बीमा योजना’ में केंद्र सरकार ने 35 हजार करोड़ रुपये प्रीमियम के मुक़ाबले 1 लाख 83 हजार करोड़ रुपये क्लेम किसानों के खाते में डालने का काम किया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए मैकेनाइजेशन पर सब्सिडी दे रही है। “पर ड्रॉप-मोर क्रॉप” पर किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर दिए जा रहे हैं। पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस टेक्नॉलाजी, फल-सब्ज़ियों के उत्पादन से लेकर बाकी सभी चीज़ों में उत्पादन बढ़ाने के प्रयास और ठीक ढंग से ख़रीदने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों की आय बढ़े, इसलिए सरकार ने फैसला किया कि लागत में कम से कम 50 प्रतिशत मुनाफ़ा जोड़कर किसानों को एमएसपी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल व्यापक पैमाने पर एमएसपी पर फसलों की खरीद हो रही। नुक़सान की भरपाई की जा रही है। यूरिया, डीएपी, बाकी उर्वरक, सब्सिडी पर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, जिससे किसानों की आय निरंतर बढ़ रही है। कई योजनाएं उन किसानों के लिए चलाई जाती है, जिनके पास कम लैंड होल्डिंग होती है। जो टेनेंट फॉर्मर्स हैं, उनके लिए अलग-अलग योजना है। केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अगर जिसके पास स्वामित्व है वो किसान, टेनेंट फॉर्मर को अधिकृत कर देते हैं तो फसल बीमा योजना का लाभ उनको मिलता है। पिछले दिनों जो हमारे टेनेंट फॉर्मर्स हैं और जो बटाई पर खेती करते हैं, उनको प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में ऐसे टेनेंट और शेयर क्रॉपर दोनों मिलाकर शेयर क्रॉपर 6 लाख 55 हजार 846 किसानों को लाभ दिया गया है, वहीं 41 लाख 62 हजार 814 किसानों को लाभ दिया गया है।

    आगे केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि दलहन व तिलहन खरीद के लिए पीएम आशा योजना बनाई गई है। तुअर, मसूर व उड़द ये शत-प्रतिशत एमएसपी पर खरीदी जाएगी, ये फैसला किया है, और बाकी भी जो फसलें दलहन, तिलहन की हो, उसे भी खरीदने की उचित व्यवस्था की गई है। हम लगातार प्रयत्न कर रहे हैं कि बिचौलिए सफल ना हो पाएं, किसानों को जो एमएसपी का रेट तय है, वो ठीक ढंग से मिलें। श्री चौहान ने आंकड़ों सहित बताया कि धान की एमएसपी 2013–14 में ₹1310 थी, अब बढ़कर ₹2369 हो गई है। बाजरा ₹1250 से ₹2775 हो गया। रागी की ₹1500 से बढ़ाकर ₹4886 कर दी गई। मक्का की ₹1310 से बढ़ाकर ₹2400 कर दी गई। तुअर की ₹4300 से बढ़ाकर ₹8000 कर दी गई। मूंग की ₹4500 से बढ़ाकर ₹8768 कर दी गई। उड़द ₹4300 से बढ़ाकर ₹7800 कर दी गई। मूंगफली की ₹4000 से बढ़ाकर ₹7263 कर दी गई। सूरजमुखी की ₹3700 से बढ़ाकर ₹7721 कर दी गई। सोयाबीन की ₹2560 से बढ़ाकर ₹5328 कर दी गई। तिल की ₹4500 से बढ़ाकर ₹9846 कर दी गई। रामतिल की ₹3500 से बढ़ाकर ₹9537 कर दी गई। कपास की ₹3700 से बढ़ाकर ₹7710 कर दी गई। उन्होंने कहा कि एमएसपी दोगुनी तो की ही है साथ ही साथ खरीद भी कई गुना ज़्यादा की है। पूर्व सरकार में 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दलहन खरीदी गई थी और अब यह आकड़ा बढ़कर 1 करोड़ 82 लाख मीट्रिक टन हो गया है।

    अंत में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी हितैषी प्रधानमंत्री हैं, इसलिए पूर्व की फसल बीमा योजना को किसान हितैषी बनाकर उसमें अनेक परिवर्तन किए गए हैं। अब अगर बीमा कंपनी, किसान का जो क्लेम बनता है, उसका समय पर भुगतान नहीं करती तो निर्धारित तिथि के 21 दिन में भुगतान नहीं करने पर 12 प्रतिशत ब्याज बीमा कंपनी पर लगाया जाएगा, जो किसान के खाते में डाला जाएगा। दूसरा, कई बार राज्य सरकार का शेयर आने में भी देर होती है, राज्य सरकर भी अगर शेयर करने में देर करेगी तो उन पर भी 12 प्रतिशत ब्याज लगेगा, जो सीधे किसान के खाते में जाएगा। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि अब क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट की दिक्कतें दूर कर यसटेक (प्रौद्योगिकी आधारित उपज अनुमान) प्रणाली अपनाई गई है, सैटेलाइट आधारित रिमोट सेन्सिंग के माध्यम से फसल का आंकलन करने की व्यवस्था की गई है, इससे पारदर्शी व्यवस्था को बल मिलेगा। अब डिजिटल माध्यम से फसल की क्षति का आंकलन हो सकेगा, जिसके आधार पर पूरी भरपाई किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत की जाएगी।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय कृषि मंडी (ई-नाम) पोर्टल के साथ 1,522 मंडियों को एकीकृत किया गया है, जिसका ट्रेड वॉल्यूम दिनांक 30.6.2025 की स्थिति के अनुसार विभिन्न कृषि वस्तुओं का 12.03 करोड़ मीट्रिक टन (एमटी) और नारियल, पान, स्वीट कॉर्न, नींबू और बांस जैसी गणनीय वस्तुओं की 49.15 करोड़ यूनिट्स है। ई-नाम प्लेटफॉर्म पर ₹4,39,941 करोड़ का व्यापार दर्ज किया गया है। प्रारम्भ से अब तक व्यापार की मात्रा और मूल्य का राज्यवार विवरण अनुबंध पर दिया गया है।

    छोटे और सीमांत किसानों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को ई-नाम प्लेटफॉर्म में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु, सरकार ने विभिन्न पहल की हैं। प्रत्येक ई-नाम मंडी में किसानों और स्टेकहोल्डेर्स के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस प्लेटफॉर्म को वेब और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से सुलभ बनाया गया है। इसके अलावा, डिजिटल पहुँच बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया चैनलों के माध्यम से ट्यूटोरियल सामग्री उपलब्ध किए गए है।

    आज की तिथि के अनुसार, 1.79 करोड़ से अधिक किसान और 4,518 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) ई-नाम पर पंजीकृत हैं। इनमें महाराष्ट्र में पंजीकृत 12,41,854 किसान और 354 एफपीओ शामिल हैं। हिंगोली ज़िले में, बसमत, हिंगोली और सेनगांव स्थित तीन कृषि उपज मंडी समितियाँ (एपीएमसी) ई-नाम पर शामिल हैं। इन समितियों में पंजीकृत 28,197 किसानों में से 10,437 किसानों ने ई-नाम पर व्यापार किया है।

    एग्रीकल्चर मार्केटिंग राज्य का विषय है। व्यापार लाइसेंसों को उदार बनाने और निर्बाध अंतर-राज्यीय व्यापार को सुनिश्चित करने का कार्य राज्य सरकारों का है। लाइसेंसिंग मानदंडों को उदार बनाकर, सभी ई-नाम पंजीकृत खरीदारों को मंडियों में बोली लगाने की अनुमति देकर कुछ राज्य ई-नाम के माध्यम से अंतर-राज्यीय व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं। किसानों सहित उपयोगकर्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए ई-नाम के अंतर्गत एक टोल-फ्री हेल्पलाइन (18002700224) स्थापित की गई है। पिछले 3 वर्षों में अंतर-राज्यीय व्यापार की मात्रा 67,29,72,855 करोड़ रुपये रही है।

    वर्तमान में, ई-नाम पर ऑनलाइन नीलामी के लिए 238 वस्तुओं को अधिसूचित किया गया है। राज्यों से नई वस्तुओं को जोड़ने के अनुरोध नियमित रूप से प्राप्त होते हैं और विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय (डीएमआई) द्वारा उचित समावेशन के लिए उनकी जांच की जाती है। वस्तुओं और सेवाओं को जोड़ने की प्रक्रिया सक्रिय रूप से चल रही है।

  • कृषक कल्याण मिशन से मध्यप्रदेश लिखेगा नई इबारत

    कृषक कल्याण मिशन से मध्यप्रदेश लिखेगा नई इबारत

    भोपाल,15 अप्रैल(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश के किसानों के समन्वित विकास के लिए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग, मत्स्य पालन विभाग, पशु पालन एवं डेयरी विभाग, सहकारिता विभाग, खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग में प्रचलित योजनाओं को एक मंच पर लाकर मध्यप्रदेश किसान कल्याण मिशन को प्रारंभ करने की सैद्धांतिक अनुमति दी गयी।

    मध्यप्रदेश ने कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। कृषि उत्पादकता (किलोग्राम प्रति हेक्टेयर) वर्ष 2002-2003 में 1195 था जो वर्ष 2024 में 2393 हो गया। यह वृद्धि 200 प्रतिशत हो गयी है। फसल उत्पादन (लाख मीट्रिक टन) वर्ष 2002-2003 में 224 एवं वर्ष 2024 में 723 होकर 323 प्रतिशत हो गयी है। कृषि विकास दर (प्रतिशत में) 2002-2003 में 3 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 9.8 प्रतिशत हो गयी। 327 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कृषि क्षेत्र का बजट (करोड़ रूपये) वर्ष 2002-2003 में 600 करोड़ एवं वर्ष 2024 में 27050 करोड़ होकर वृद्धि दर 4508 प्रतिशत हुई। मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र का योगदान प्रदेश की जीडीपी में 39 प्रतिशत है।

    म.प्र. कृषक कल्याण मिशन का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, कृषि को जलवायु-अनुकूल बनाना, धारणीय कृषि पद्धतियों को अपनाना, जैव विविधता और परम्परागत कृषि ज्ञान संरक्षण, पोषण एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करना है।

    किसानों की आय में वृद्धि- कृषि तथा उद्यानिकी के अंतर्गत फसलों की उत्पादकता में वृद्धि, उच्च मूल्य फसलों की खेती, गुणवत्तापूर्ण आदानों की उपलब्धता – बीज, रोपण सामग्री, उर्वरक, कीटनाशक, और कृषि विस्तार एवं क्षमता विकास, सस्ती ब्याज दरों पर ऋण की आसान उपलब्धता, खाद्य प्र-संस्करण और कृषि आधारित उद्योग, वैल्यू-चैन विकास और मौजूदा वैल्यू-चैन का सुदृढ़ीकरण, मप्र की विशिष्ट समस्याओं के लिए अनुसंधान एवं विकास है।

    कृषि तथा उद्यानिकी सस्टेनेबल कृषि पद्धतियां के अंतर्गत गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस (जीएपी) को अपनाना, जैविक/प्राकृतिक खेती क्षेत्र में बढ़ोतरी, जैविक एवं प्राकृतिक उत्पादों के लिए मार्केट लिंकेज का निर्माण तथा सुदृढ़ीकरण, जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद हेतु प्रमाण पत्र जारी करने तथा ट्रैसेबिलिटी सिस्टम को विकसित ,किसानों की उपज के उचित मूल्य सुनिश्चित करना,मंडियों का आधुनिकीकरण एवं उन्नयन, मंडी कार्यों के प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग, मण्डी में पारदर्शी तथा निष्पक्ष नीलामी की प्रक्रिया को सुदृढ़ एवं मंडी के बाहर उपज बेचने की सुविधा को विकसित करना, जिन फसलों में वायदा अनुबंधों की अनुमति है, उनकी कार्य योजना तैयार करना है।

    किसानों की आय में वृद्धि के लिए सहकारिता एवं मत्स्य पालन के अंतर्गत सहकारिता के माध्यम से दूध संकलन के कवरेज को 26000 ग्रामों तक ले जाया जायेगा। दूध संकलन व प्र-संस्करण की वर्तमान क्षमता को बढाकर 50 लाख लीटर / दिवस किया जायेगा। पशुओं में स्टॉल फीडिंग एवं मिनरल मिक्चर का घरेलू विकल्प का उपयोग से निराश्रित गौवंश की संख्या में कमी लाना। मत्स्य पालन क्षेत्र में आय वृद्धि के लिए आधुनिक तकनीकों का प्रयोग – Cage Farming तथा Biofloc, मछुआ/किसान क्रेडिट कार्ड योजनान्तर्गत शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराकर स्व-रोजगार को बढ़ावा दिया जायेगा।

    मिशन के अन्य घटक में कृषि का जलवायु-अनुकूलन तथा रिस्क मिटिगेशन, जलवायु अनुकूल किस्मों को विकसित करवाना, कृषि फसलों के साथ ही पशुपालन, मत्स्योत्पादन को अपनाना, जैव विविधता और परम्परागत कृषि ज्ञान संरक्षण, पारंपरिक कृषि पद्धतियों का दस्तावेज़ीकरण, संरक्षण और उपयोग शामिल है।

    मिशन के अपेक्षित परिणाम में उद्यानिकी फसलों का सकल वर्धित मूल्य कृषि आधारित फसलों से अधिक किया जायेगा। उद्यानिकी फसलों का क्षेत्रफल राष्ट्रीय औसत के बराबर लाया जायेगा। कृषि यंत्रीकरण को डेढ़ गुना करना, कृषि क्षेत्र में पूंजी निवेश को 75 प्रतिशत बढाना, प्रदेश को नरवाई जलाने से मुक्त करना, जैविक / प्राकृतिक / गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस कृषि के अंतर्गत संपूर्ण बोये गये क्षेत्र का 10 प्रतिशत हिस्सा एवं सूक्ष्म सिंचाई को 20 प्रतिशत क्षेत्रफल तक पहुंचाना हैं।

    फसल बीमा का कवरेज 50 प्रतिशत तक करना, संकर तथा उन्नत बीजों का विस्तार आधे क्षेत्रफल तक करना, प्रदेश के अन्नदाता को ऊर्जादाता सौर ऊर्जा पम्प अनुदान पर उपलब्ध कराये जाना, नये प्र-संस्करण क्षेत्रों की स्थापना, विपणन नेटवर्क का विस्तार और प्रदेश की बाहर की मंडियों तक पहुंच बढ़ाना, मत्स्य बीज के मामलें में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना, कोल्ड चेन और नेटवर्क विकास के जरिये किसानों को मत्स्य संपदा के लिए मिलने वाले मूल्य को डेढ़ गुना करना, उच्च उत्पादकता मछली का पालन 10288 मीट्रिक टन किया जाना, मत्स्य पालन के लिए 1.47 लाख किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराये जायेंगे। संगठित क्षेत्र में दुग्ध संकलन को 50 लाख लीटर प्रतिदिन किया जायेगा। पशुधन उत्पादकता में 50 प्रतिशत की वृद्धि की जायेगी। बेसहारा गौ-वंश की देखभाल के लिए प्रदेशव्यापी नेटवर्क तैयार करना, जिससे सड़कों पर उनकी उपस्थिति शून्य हो सकेगी।

    मध्यप्रदेश कृषक कल्याण मिशन की साधारण सभा के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे। मिशन क्रियान्वयन की कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे। मिशन क्रियान्वयन जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में किया जायेगा।

    चिकित्सा महाविद्यालय, सतना से संबंद्ध नवीन चिकित्सालय के निर्माण के लिए राशि 383 करोड़ 22 लाख रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद द्वारा लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग अंतर्गत चिकित्सा महाविद्यालय, सतना से संबंद्ध नवीन चिकित्सालय के निर्माण के लिए राशि 383 करोड़ 22 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है।

    गांधी चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय में नवीन पदों की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद द्वारा लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत गांधी चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय में पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी एवं नियोनेटोलॉजी विभाग में नियमित स्थापना के कुल 12 नवीन पदों का सृजन किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इन पदों में प्राध्यापक के 3 पद, सह प्राध्यापक के 3 पद, एवं सहायक प्राध्यापक के 3 पद एवं सीनियर रेसीडेंट के 3 पद शामिल हैं।

  • दुनिया की हर थाली में हो भारत का जैविक खाद्यान्नःप्रधानमंत्री मोदी

    दुनिया की हर थाली में हो भारत का जैविक खाद्यान्नःप्रधानमंत्री मोदी

    नई दिल्ली,16 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सरकार ने अनुसंधान बुनियादी ढांचे की समीक्षा, जलवायु के अनुकूल फसल किस्मों के विकास, एक करोड़ किसानों के बीच प्राकृतिक खेती को बढ़ावा और जैव-इनपुट संसाधन केंद्रों की स्थापना जैसी पहल के जरिये कृषि उत्पादकता को बढ़ाने के लिए एक व्यापक रणनीति की रूपरेखा तैयार की है।
    इसके अलावा सरकार के अन्‍य प्रयासों में दलहन एवं तिलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करना, सब्जी उत्पादन क्लस्टर विकसित करना, कृषि में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को लागू करना और नाबार्ड के जरिये झींगा पालन को प्रोत्‍साहित करना शामिल है। इन पहलों का उद्देश्य कृषि को आधुनिक बनाना और कृषि क्षेत्र में सतत विकास सुनिश्चित करना है। आइए, सरकार द्वारा इस क्षेत्र को उन्नत बनाने और इस संबंध में लागू सरकारी योजनाओं की प्रगति के बारे में चर्चा करते हैं।

    1. प्राकृतिक खेती
      माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट में कृषि को प्राथमिकता दी है। उन्‍होंने प्रमाणन एवं ब्रांडिंग द्वारा समर्थित 1 करोड़ किसानों के समक्ष प्राकृतिक खेती करने का प्रस्ताव रखा है। इसका कार्यान्वयन इच्छुक ग्राम पंचायतों के साथ वैज्ञानिक संस्थानों के जरिये किया जाएगा। इसके अलावा आवश्यकता पर आधारित 10,000 बीआरसी स्थापित किए जाएंगे, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर सूक्ष्म उर्वरक एवं कीटनाशक विनिर्माण नेटवर्क स्‍थापित होगा।
      क्या है प्राकृतिक खेती
      प्राकृतिक खेती रसायन मुक्त खेती है, जिसमें पशुधन को शामिल करते हुए कृषि के प्राकृतिक तरीके और भारतीय पारंपरिक ज्ञान पर आधारित विविध फसल व्‍यवस्‍था शामिल हैं। इसका उद्देश्‍य जलवायु के प्रति बेहतर अनुकूलता के साथ मृदा स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार लाने और किसानों की इनपुट लागत को कम करने के लिए गैर-सिंथेटिक रासायनिक इनपुट का उपयोग करना है।
      भारत में प्राकृतिक खेती
      भारत सरकार ने परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) के तहत सीमित क्षेत्रों में ‘भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (बीपीकेपी)’ के जरिये 2019-20 में प्राकृतिक खेती की शुरुआत की थी। बीपीकेपी को राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन (एनएमएनएफ) के जरिये मिशन मोड में आगे बढ़ाने की योजना है।
      एनएमएनएफ, को खेती की प्रकृति पर आधारित टिकाऊ प्रणालियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रस्तावित किया जा रहा है। इसमें कृषि इनपुट भी शामिल है ताकि बाहर से खरीदे गए इनपुट पर निर्भरता कम होगी, मृदा क्वालिटी बेहतर होगी और इनपुट लागत में कमी आएगी। साथ ही इसमें विस्तार एवं अनुसंधान संस्थानों की खेतों पर कृषि-पारिस्थितिकी अनुसंधान एवं ज्ञान पर आधारित विस्तार क्षमताओं को मजबूत करना, प्राकृतिक खेती के फायदे, संभावना एवं कार्यप्रणाली पर बेहतर ज्ञान एवं प्रस्‍तुति के लिए प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों के अनुभव और वैज्ञानिक विशेषज्ञता को साथ लाते हुए उनसे सीखना, प्राकृतिक रूप से उगाए गए रसायन मुक्त उत्पादों के लिए वैज्ञानिक तौर पर समर्थित एवं किसानों के अनुकूल आसान प्रमाणन प्रक्रियाएं स्थापित करना और प्राकृतिक रूप से उगाए जाने वाले रसायन मुक्त उत्पादों के लिए एकल राष्ट्रीय ब्रांड स्‍थापित करना और उसका प्रचार करना शामिल हैं।
      चार वर्षों (2022-23 से 2025-26) की अवधि के लिए इस योजना का कुल परिव्यय 2,481.00 करोड़ रुपये है।
    2. दलहन एवं तिलहन में आत्मनिर्भरता के लिए सरकारी पहल
      दलहन एवं तिलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करना भारत सरकार की प्राथमिकता रही है। इसके लिए विभिन्न पहल एवं योजनाएं शुरू की गई हैं:
      राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम)
      भारत सरकार द्वारा 2018-19 से देश में खाद्य तेल में उत्‍पादन बढ़ाकर, आयात का बोझ कम करने के उद्देश्‍य से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन- तिलहन (एनएफएसएम-ओएस) को लागू किया गया है।
      इसका उद्देश्य देश में तिलहन (मूंगफली, सोयाबीन, रेपसीड एवं सरसों, सूरजमुखी, कुसुम, तिल, नाइजर, अलसी एवं अरंडी) के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि करना है। साथ ही, पाम ऑयल एवं वृक्ष आधारित तिलहन (जैतून, महुआ, कोकम, जंगली खुबानी, नीम, जोजोबा, करंज, सिमरोबा, तुंग, च्यूरा एवं जेट्रोफा) का क्षेत्र विस्तार करना है।
      सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप तिलहन की खेती के लिए कुल क्षेत्र 2014-15 में 2.56 करोड़ हेक्टेयर से बढ़कर 2023-24 में 30.08 करोड़ हेक्टेयर हो गया है, जो 17.5 % की वृद्धि दर्शाता है। परिणामस्‍वरूप पिछले 9 वर्षों में खाद्य तेलों का घरेलू उत्पादन 2015-16 में 86.30 लाख टन के मुकाबले 40 % से अधिक बढ़कर 2023-24 में 121.33 लाख टन हो गया है। घरेलू मांग में भारी उछाल के बावजूद अब आयात पर हमारी निर्भरता 63.2 % से घट कर 57.3% हो गयी है । राष्ट्रीय पाम ऑयल मिशन के तहत भी हमारे किसानों की मदद से तिलहन की खेती के लिए क्षेत्र बढ़कर 4.7 लाख हेक्टेयर तक हो गया है।
      न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी)
      एमएसपी हमारे किसानों के लिए उनकी उपज की वास्तविक लागत के मुकाबले 50 प्रतिशत अधिक मूल्‍य सुनिश्चित करता है । इस प्रकार कृषि लागत पर आकर्षक रिटर्न मिलता है। आज एमएसपी सबसे अधिक है । एक दशक पहले के मुकाबले मसूर के एमएसपी में 117 प्रतिशत, मूंग के एमएसपी में 90 प्रतिशत, चना दाल के एमएसपी में 75 प्रतिशत, तुअर और उड़द के एमएसपी में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नाफेड और एनसीसीएफ, किसानों को दलहन और मसूर की खेती में विविधता लाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। वे किसानों के साथ सरकारी खरीद के लिए एक निर्धारित मूल्‍य पर 5 साल का अनुबंध करने के लिए तैयार हैं। यह भारत सरकार द्वारा उठाया गया एक बड़ा कदम है ।
    3. अधिक उपज और जलवायु के अनुकूल किस्में: भारत में समय की मांग
      भारत सरकार ने देश भर में कृषि पद्धतियों में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से 32 क्षेत्रीय व बागवानी फसलों में 109 नई उच्च उपज देने वाली और जलवायु-अनुकूल किस्मों को पेश करने की एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। इन नई किस्मों को फसल उत्पादकता बढ़ाने और सस्‍टेनेबिलिटी सुनिश्चित करते हुए विविध जलवायु परिस्थितियों के अनुकूललिए विकसित किया गया है।
      वर्ष 2014-15 से 2023-24 के दौरान अधिक उपज देने वाली कुल 2,593 किस्में जारी की गईं। इनमें 2,177 जलवायु के अनुकूल (कुल का 83 प्रतिशत) जैविक एवं अजैविक तनाव प्रतिरोध के साथ और 150 जैव-फोर्टिफाइड फसल किस्में शामिल हैं। इसके अलावा 56 फसलों की 2,200 से अधिक किस्मों के 1 लाख क्विंटल से अधिक ब्रीडर बीजों का उत्पादन किया जा रहा है। जलवायु के अनुकूल प्रौद्योगिकी को अपनाए जाने से असामान्य वर्षों के दौरान भी उत्पादन में वृद्धि हुई है।
    4. कृषि में बदलाव: डिजिटल फसल सर्वेक्षण में क्रांति लाने के लिए डीपीआई पहल
      कृषि में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) को लागू किए जाने संबंधी सरकार की पहल का उद्देश्य किसानों को लाभ पहुंचाने और कृषि दक्षता को बेहतर करने के लिए डिजिटल तकनीक का फायदा उठाते हुए इस क्षेत्र में क्रांति लाना है। पायलट परियोजनाओं की सफलता से उत्साहित होकर इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम को तीन वर्षों के दौरान राज्य सरकारों के सहयोग आगे बढ़ाया जाएगा।
      शुरुआती चरण में खरीफ सीजन के दौरान 400 जिलों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके तहत डीपीआई का उपयोग करते हुए तीनों फसल सीजन में खेतों में बोआई की गई फसल और उसके रकबे के बारे में विस्तृत आंकड़े जुटाए जाएंगे। इससे हरेक खेत के लिए सटीक, वास्तविक समय आधारित फसल क्षेत्र की जानकारी प्रदान करने और गिरदावरी जैसे पारंपरिक सर्वेक्षण तरीकों को बदलने में मदद मिलेगी। इन पहलुओं के डिजिटलीकरण के साथ सरकार सब्सिडी वितरण, बीमा कवरेज और आपदा प्रबंधन सहित कृषि रणनीतियां तैयार करने और उन्हें बेहतर ढंग से लागू कर सकती है।
    5. तकनीकी पहल: सुलभ किसान क्रेडिट कार्ड के साथ किसानों का सशक्तिकरण
      कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीएएंडएफडब्लू) अपनी प्रमुख संशोधित ब्याज सहायता योजना (एमआईएसएस) के जरिये किसानों की सहायता के प्रतिबद्ध है। इसका उद्देश्य किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिये अल्पकालिक आवश्यकताओं के लिए किफायती ऋण प्रदान करना है। इस योजना की दक्षता, पारदर्शिता और समय पर लाभ वितरण को बेहतर करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने पिछले साल शुरू किए गए किसान ऋण पोर्टल (केआरपी) के जरिये दावा प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया है।
      फिलहाल केआरपी 1,71,221 बैंक शाखाओं, 33 अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी), 356 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी), 20 राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी), 45 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी), आरबीआई और नाबार्ड के साथ एकीकृत हो चुका है। यह पोर्टल फिलहाल किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) खातों के लिए ब्याज अनुदान एवं पीआरआई दावों को प्रॉसेस कर रहा है, जिसमें वर्ष 2024-25 के लिए 22,600 करोड़ रुपये का बढ़ा हुआ आवंटन शामिल है।
      इसके अलावा सरकार संस्थागत ऋण तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी का फायदा उठाते हुए किसान ऋण पोर्टल (केआरपी) की क्षमताओं को बढ़ा रही है। इससे किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिये कृषि ऋण तक निर्बाध और बिना किसी परेशानी के पहुंच सुन‍िश्चित होगी। सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप चालू केसीसी खातों की संख्या 2013 में 6.46 करोड़ से बढ़कर 2024 में 7.75 करोड़ हो गई है। इसी प्रकार इन केसीसी खातों में बकाया ऋण 2013 में 3.63 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 9.81 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
    6. पर ड्रॉप मोर क्रॉप (पीडीएमसी)
      देश में 2015-16 से पर ड्रॉप मोर क्रॉप (पीडीएमसी) यानी प्रति बूंद अधिक फसल योजना लागू की जा रही है। पीडीएमसी सूक्ष्म सिंचाई यानी ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से खेत स्तर पर जल उपयोग दक्षता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करती है। सूक्ष्म सिंचाई से जल की बचत होने के साथ-साथ उर्वरक उपयोग, श्रम खर्च एवं अन्य इनपुट लागत में भी कमी आती है और किसानों की समग्र आय में वृद्धि होती है।
      इस योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई की व्‍यवस्‍था के लिए लघु एवं सीमांत किसानों को 55 प्रतिशत और अन्य किसानों को 45 प्रतिशत की दर से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। सूक्ष्म सिंचाई के कवरेज का विस्तार करने के लिए संसाधन जुटाने में राज्यों की मदद के लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के साथ मिलकर सूक्ष्म सिंचाई कोष (एमआईएफ) स्‍थापित किया है।
      वर्ष 2015-16 से 2023-24 तक पीडीएमसी के जरिये देश में सूक्ष्म सिंचाई के तहत कुल 90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया है, जो पीडीएमसी से पहले के नौ वर्षों की कवरेज की तुलना में काफी (92 प्रतिशत) अधिक है।
      निष्कर्ष
      केंद्र सरकार की समग्र कृषि रणनीति का उद्देश्य अनुसंधान एवं विकास के जरिये उत्पादकता एवं पर्यावरण के प्रति अनुकूलता को बेहतर करना और अधिक उपज वाली नई फसल किस्मों को पेश करना है। इसके तहत एक करोड़ किसानों के लिए प्राकृतिक खेती की पहल को प्राथमिकता दी गई है, जैव-इनपुट केंद्र स्‍थापित करने और दलहन एवं तिलहन के उत्‍पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं । डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और झींगा प्रजनन केंद्रों के लिए मदद जैसी पहल देश भर में कृषि के विस्‍तार एवं आधुनिकीकरण के लिए भारत सरकार द्वारा उठाये जा रहे महत्वपूर्ण क़दमों को रेखांकित करती हैं।
  • भाजपा की सेवा भावना को मिला जनता का आशीर्वाद बोले शिवराज

    भाजपा की सेवा भावना को मिला जनता का आशीर्वाद बोले शिवराज

    कार्यकर्ता महाकुंभ 25 को, प्रधानमंत्री जी दिलाएंगे विजय का संकल्प : नरेंद्र सिंह तोमर
    21 दिनों में 223 विधानसभाओं में 10880 कि.मी. चली पांचों जन आशीर्वाद यात्राएंः विष्णुदत्त शर्मा
    जन आशीर्वाद यात्राओं की अभूतपूर्व सफलता पर पार्टी नेताओं ने की मीडिया से चर्चा
    भोपाल, 23सितंबर(प्रेस इंफॉर्मेशन सेंटर)। भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश के विभिन्न अंचलों से पांच जन आशीर्वाद यात्राएं निकाली थीं, जिन्हें अभूतपूर्व सफलता हासिल हुई है। इन यात्राओं को जनता का भरपूर समर्थन मिला है। वास्तव में बीते समय में भाजपा की केंद्र और राज्य सरकारों ने जो काम किए हैं, उनके प्रतिफल ने जनता ने इन यात्राओं को अपना आशीर्वाद दिया है। यात्राओं को मिले अभूतपूर्व जनसमर्थन से यह साफ हो गया है कि प्रदेश में एक बार फिर भाजपा की सरकार बनने जा रही है। इन यात्राओं का समापन पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर 25 सितंबर को भोपाल के जंबूरी मैदान में होगा, जिसमें प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में पार्टी कार्यकर्ता विजय का संकल्प लेंगे। यह बात प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री एवं चुनाव प्रबंधन समिति के प्रदेश संयोजक श्री नरेंद्रसिंह तोमर एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री विष्णुदत्त शर्मा ने शनिवार को पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए कही।
    देश की आधी आबादी को मोदी जी ने अमृतकाल में दिलाया पूरा न्यायः शिवराजसिंह चौहान
    पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि सबसे पहले मैं नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद के दोनों सदनों से सर्वसम्मति से पारित कराने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद देना चाहता हूं। प्रधानमंत्री जी की इस पहल से आजादी के अमृतकाल में देश की आधी आबादी को पूरा न्याय मिला है। श्री चौहान ने कहा कि महिला सशक्तीकरण भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिकता रही है और मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है, जिसने निकाय चुनावों में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया। गिरते सेक्स रेश्यो को संभालने के लिए लाडली लक्ष्मी योजना शुरू की। उन्होंने कहा कि हम पुलिस की भर्ती में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दे रहे हैं, जिसे 35 प्रतिशत तक ले जाएंगे। महिलाओं के लिए स्टाम्प शुल्क में कटौती की है। लाडली बहना योजना में हम 1.32 करोड़ बहनों को 1250 रुपये प्रतिमाह दे रहे हैं, जिसे 3000 रुपये तक ले जाएंगे। श्री चौहान ने कहा कि भाजपा की सरकार ने जनता की जो सेवा की है, उसके कारण उसे जन आशीर्वाद यात्राओं में जनता का भरपूर समर्थन मिला है। इन यात्राओं को अभूतपूर्व सफलता मिली है, जिसके लिए मैं प्रदेश अध्यक्ष श्री विष्णुदत्त शर्मा, पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रदेश की जनता का आभार जताता हूं।
    जिसका नेता पहियों वाला सूटकेस सिर पर रखे, उस पार्टी का क्या होगा?
    मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस भी यात्राएं निकाल रही है। हम भी यात्राएं निकालते हैं, एकात्म यात्रा, स्नेह यात्रा, आशीर्वाद यात्रा। कांग्रेस ने तो इन यात्राओं का नाम भी ऐसा रखा है कि जिसे सुनकर मन विचलित हो जाए। कांग्रेस जन आक्रोश यात्राएं निकाल रही है। ये यात्राएं ऐसी हैं, जिनमें कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता एक-दूसरे के प्रति आक्रोश दिखा रहे हैं। कहीं धक्का-मुक्का हो रहा है तो कहीं गोलियां भी चल रही हैं। कमलनाथ इस बाते को जानते हैं, इसलिए वो इन यात्राओं से ही गायब हैं। वहीं, दिग्विजय सिंह का तो फोटो भी इन यात्राओं के पोस्टर में नहीं लगाया गया है। कोई भी यह अनुमान लगा सकता है कि ऐसी पार्टी जिसका नेता पहियों वाले सूटकेस को सिर पर रखकर चलता हो, उसका भविष्य क्या होगा?
    वादे नहीं निभाए, इसलिए कांग्रेस के खिलाफ आक्रोशित है जनता
    श्री चौहान ने कहा कि वास्तव में आक्रोश प्रदेश की जनता में है, कांग्रेस के खिलाफ। 2003 के पहले मि. बंटाढार की सरकार ने प्रदेश की जो दुर्गति की थी, उसको लेकर जनता में आक्रोश है और मि. बंटाढार भी इस बात को मानते हैं। वो कहते हैं कि मेरे जाने से कांग्रेस के वोट कट जाएंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के खिलाफ आक्रोश इसलिए है क्योंकि कमलनाथ की सरकार ने जनहित की योजनाएं बंद कर दी थीं। बच्चों के लेपटॉप छीन लिए थे, संबल योजना बंद कर दी थी और बैगा, भारिया, सहरिया बहनों को मिलने वाली 1000 रुपये की सहायता छीन ली थी। कमलनाथ ने कन्यादान योजना की राशि बढ़ाने की बात कही, लेकिन किसी को भी पैसे नहीं दिए। कमलनाथ ने प्रधानमंत्री आवास योजना में स्वीकृत दो लाख आवास लौटा दिये और गरीबों को पक्के मकान से वंचित कर दिया। जनता इसलिए आक्रोशित है क्योंकि कमलनाथ ने किसान सम्मान निधि योजना के नाम नहीं भेजे। जलजीवन मिशन शुरू नहीं करके माता-बहनों की तकलीफों को नजरअंदाज किया। कमलनाथ सरकार ने किसानों, बेरोजगारों से किए गए वादे पूरे नहीं किए इसलिए प्रदेश की जनता में आक्रोश है। भाजपा ने जनता की सेवा की है, इसलिए उसे जनता का आशीर्वाद मिल रहा है।
    सनातन की आलोचना पर मौनी, वोट के लिए ढोंगी बाबा बन जाते हैं कमलनाथ
    श्री चौहान ने कहा कि कांग्रेस के इंडी गठबंधन में ऐसे-ऐसे नेताओं और दलों को शामिल किया गया है, जो सनातन की आलोचना करते हैं। गालियां देते हैं, डेंगू, मलेरिया और वायरस कह कर अपमानित करते हैं। लेकिन कमलनाथ ने इन नेताओं के खिलाफ एक शब्द नहीं बोला। वे सनातन की आलोचना पर मौनी बाबा बन जाते हैं और जब वोट लेना हो, तो ढोंगी बाबा बन जाते हैं। श्री चौहान ने कहा कि जनता सनातन के इस अपमान को सहन नहीं करेगी और जब उसके आक्रोश का प्रकटीकरण होगा, तो कमलनाथ और उनकी पार्टी कहीं की नहीं रहेगी।
    पार्टी के विजय अभियान में मील का पत्थर साबित होगा कार्यकर्ता महाकुंभः नरेंद्र सिंह तोमर
    पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री एवं प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जन आशीर्वाद यात्रा का जनता का जो अपार स्नेह और मिला है, यात्रा जिस तरह से अपने उद्देश्य में सफल रही है, उसके लिए मैं प्रदेश अध्यक्ष श्री विष्णुदत्त शर्मा जी, केंद्रीय नेतृत्व और पार्टी कार्यकर्ताओं का आभार प्रकट करता हूं। उन्होंने कहा कि 25 सितंबर को पं. दीनदयाल उपाध्याय जी का जन्मदिन है, जो भारतीय जनता पार्टी के चिंतन के प्रेरणास्रोत हैं। पं. उपाध्याय जी के जन्मदिन पर 25 सितंबर को भारतीय जनता पार्टी द्वारा जंबूरी मैदान में कार्यकर्ता महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें पूरे प्रदेश के लाखों कार्यकर्ता भाग लेंगे। इस महाकुंभ में कार्यकर्ता प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की उपस्थिति में विजय का संकल्प लेंगे। यह महाकुंभ पार्टी की चुनाव तक की यात्रा और विजय को सुनिश्चित करेगा तथा पार्टी के विजय अभियान में मील का पत्थर साबित होगा।
    इसलिए एमपी के मन में उतर गए मोदी जी
    श्री तोमर ने कहा कि 2003 तीन के बाद मध्यप्रदेश को विकास के पथ पर आगे बढ़ाने में मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की सरकार ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया है। उन्होंने कहा कि मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की योजनाओं, जनहित के कामों का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया गया है। केंद्र और प्रदेश सरकारें मिलकर मध्यप्रदेश में आमूलचूल परिवर्तन करने का प्रयास कर रही हैं। शिवराज जी ने 44 लाख लोगों को मकान बनाकर दिए, तो एमपी के मन में मोदी होगें ही। इसी तरह जब कोविड के भयानक दौर में बीमारी के कारण भले ही किसी की मौत हुई हो, लेकिन भूख के कारण देश और मध्यप्रदेश में किसी भी व्यक्ति को परेशान नहीं होना पड़ा और शिवराज जी की सरकार ने राज्य के 5 करोड लोगों को मुफ्त में अनाज पहुंचाने में सार्थक भूमिका निभाई। चाहे किसान सम्मान निधि योजना हो, घर-घर में शौचालय का निर्माण हो, या फिर उज्जवला योजना का क्रियान्वयन हो, प्रधानमंत्री श्री मोदी की सरकार लोगों का जीवन स्तर उठाने के लिए जो प्रयास कर रही है, उनमें रंग भरने का काम मुख्यमंत्री श्री शिवराज जी की सरकार कर रही है। श्री तोमर ने कहा कि चुनाव की बेला है, महाकुंभ का समय है और विजय का संकल्प है। मुझे पूरा विश्वास है कि डंबल इंजन की सरकार और भारतीय जनता पार्टी मिलकर प्रदेश में फिर से एक बार सरकार बनाने में सफल होंगी।
    अद्भुत और अद्वितीय है मोदी जी की कार्यशैली
    श्री तोमर ने कहा कि देश में अब तक जितने प्रधानमंत्री हुए हैं, सभी का देश के लिए कुछ न कुछ योगदान रहा है। लेकिन प्रधामनमंत्री मोदी जी की जो कार्य पद्धति है, वो अपने आप में अद्भुत और अद्वितीय है। हाल ही में जी – 20 सम्मेलन हुआ था, उसके घोषणा पत्र में महिलाओं पर एक बड़ा पैरा सर्वसम्मति से शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री जी ने संसद का विशेष सत्र बुलाकर महिला आरक्षण बिल को सर्वसम्मति को पास कराकर पूरी दुनिया में देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने का काम किया है। श्री तोमर ने कहा कि विश्वकर्मा जयंती के दिन प्रधानमंत्री जी ने विश्वकर्माओं के लिए योजना शुरू की है। हाथ के हुनर वाले कारीगरों की संख्या ज्यादा नहीं है। मोदी जी ने इन छोटे कारीगरों को योजना के माध्यम से न सिर्फ आर्थिक सहायता दी, बल्कि उनके हुनर को उन्नत बनाने और उनके प्रति लोगों के मन में सम्मान पैदा करने का काम भी किया है। विश्वकर्मा जयंती के दिन लोहार, बढ़ई जैसे कारीगरों के काम पर डाक टिकट जारी करके प्रधानमंत्री जी ने उन्हें जो सम्मान दिया है, वह सचमुच अद्भुत है।
    10600 किलोमीटर का लक्ष्य था, 10880 किलोमीटर चली यात्राएंः विष्णुदत्त शर्मा
    मीडिया को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा मध्यप्रदेश में चुनावी अभियान के अंतर्गत पांच जन आशीर्वाद यात्राओं का आयोजन किया गया। पहली यात्रा का शुभारंभ 3 सितम्बर को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे.पी.नड्डा ने श्रीराम की कर्मस्थली चित्रकूट से किया था। दूसरी यात्रा की शुरुआत 4 सितम्बर को नीमच से देश के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी ने की थी। 5 सितम्बर को श्योपुर एवं जनजातीय क्षेत्र मंडला से दो जन आशीर्वाद यात्राओं का शुभारंभ देश के गृहमंत्री श्री अमित शाह जी ने किया था। पांचवी यात्रा 4 सितम्बर को धूनी वाले बाबा का आशीर्वाद लेकर खण्डवा से प्रारंभ हुई थी, जिसकी शुरूआत केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी जी ने की थी। श्री शर्मा ने कहा कि पूर्व में जो जन आशीर्वाद यात्राएं निकलती थीं, वो सभी विधानसभाओं तक नहीं पहुंच पाती थीं। लेकिन इस बार 21 दिनों में पांच जन आशीर्वाद यात्राएं 223 विधानसभाओं तक पहुंची हैं। श्री शर्मा ने कहा कि इन यात्राओं को 10600 किलोमीटर की दूरी तय करना था, लेकिन जनसमर्थन से उत्साहित होकर इन यात्राओं ने 10880 किलोमीटर की दूरी तय की।
    गरीब कल्याण के कामों पर जनता ने लगाई मोहर, यात्राओं को दिया आशीर्वाद
    श्री शर्मा ने कहा कि इन पांचों जन आशीर्वाद यात्राओं में पार्टी को जनता का जो भरपूर आशीर्वाद प्राप्त हुआ है, उसके माध्यम से जनता से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की सरकारों द्वारा किए जा रहे गरीब कल्याण के कार्यों पर मोहर लगा दी है। गरीब कल्याण के इन्हीं प्रयासों का रिपोर्ट कॉर्ड लेकर पार्टी कार्यकर्ता 65523 बूथों और लगभग 11 हजार शक्ति केंद्रों तक पहुंचे थे और इन्हीं को लेकर हम यात्राओं के माध्यम से जनता के बीच गए थे, जिसे जनता का भरपूर समर्थन मिला है। केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की सरकारों के कामों से गरीब जनता के जीवन में जो बदलाव आए हैं, उनके चलते जनता ने पांचों जन आशीर्वाद यात्राओं को उत्साह और उमंग के साथ अपना आशीर्वाद दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने बीमारू मध्यप्रदेश को विकसित राज्य बनाया है और आगे उसे स्वर्णिम मध्यप्रदेश बनाने का लक्ष्य है। श्री शर्मा ने कहा कि सरकार के कामों से प्रदेश की जनता में विश्वास जागृत हुआ है।
    2500 स्थानों पर हुआ स्वागत, सभाओं में शामिल हुए 1 करोड़ से ज्यादा लोग
    प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि जन आशीर्वाद यात्राओं का 2500 से अधिक स्थानों पर स्वागत किया गया तथा पार्टी नेताओं ने 750 स्थानों पर रथसभाएं एवं 250 स्थानों पर बड़ी मंच सभाओं को संबोधित किया, जिनमें 1 करोड के लगभग लोगों की सहभागिता रही। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के गरीब कल्याण रिपोर्ट कार्ड के माध्यम से फिर इस बार-भाजपा सरकार के स्टीकर घर-घर में लगाकर इस अभियान की शुरुआत की गई थी, जिसके माध्यम से हम लगभग 1 करोड़ लोगों तक पहुंचे। यात्रा के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने मध्यप्रदेश के मन में मोदी नाम से सदस्यता अभियान की शुरुआत की थी, जिसमें पार्टी से युवाओं और नये सदस्यों को जोड़ने का काम किया गया। इस अभियान के अंतर्गत आज तक 23 लाख 65 हजार 711 लोगों ने भाजपा की सदस्यता ली है, जिसमें 8 लाख लोगों ने पुनः रजिस्ट्रेशन कराया और 14 लाख, 11 हजार, 754 नये सदस्यों ने पहली बार भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। देश एवं प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के साथ महिलाओं को अधिकार संपन्न बनाने का जो काम किया है, उसका परिणाम भी इस अभियान में दिखाई दिया। अभियान के दौरान 8 लाख 40 हजार 784 बहनों ने पार्टी की सदस्यता ली, जो कुल सदस्यता का 65 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि इन यात्राओं में हर वर्ग के लोगों ने जिस तरह उत्साहपूर्वक भाग लिया है, वह सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की नीति का परिणाम है। श्री शर्मा ने कहा कि इन यात्राओं के दौरान जन आकांक्षा पेटियों के माध्यम से स्वर्णिम मध्यप्रदेश के लिए जनता के सुझाव लिये गये हैं, जिन्हें घोषणा-पत्र में शामिल किया जाएगा। श्री शर्मा ने कहा कि जन आशीर्वाद यात्राओं को जो अभूतपूर्व सफलता मिली है, वह पार्टी कार्यकर्ताओं और केंद्रीय नेतृत्व की मेहनत का परिणाम है, जिसके लिए मैं पार्टी नेतृत्व, सभी कार्यकर्ताओं और मीडिया को बधाई एवं धन्यवाद देता हूं।

  • जंगलों से समृद्ध जनजीवन

    जंगलों से समृद्ध जनजीवन

    ऋषभ जैन

    मध्यप्रदेश में सामुदायिक भागीदारी से वन प्रबंधन, संरक्षण एवं सुधार की दिशा में वन समितियों के माध्यम से शानदार काम किया गया है जो पूरे देश में अनूठा है। इन वन समितियों से जुड़े परिवार आर्थिक रूप से भी सशक्त हुए हैं।

    वन समितियों के उल्लेखनीय कामसतना की ग्राम वन समिति गोदीन ने गोंड जनजाति की महिलाओं को सॉफ्ट टॉय बनाने का प्रशिक्षण ग्रीन इंडिया मिशन में दिया है। इसी प्रकार सीधी वन मंडल की ग्राम वन समिति बम्हनमरा ने बिगड़े वन क्षेत्र में काम करना शुरू किया और अवैध कटाई, चराई, अतिक्रमण से जंगलों की सुरक्षा की। समिति को महुआ फूल, गुल्ली, अचार, जलाऊ लकड़ी मिल रही है।बालाघाट की ग्राम समिति अचानकपुर ने बाँस-रोपण क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की। बाँस के दोहन से समिति को एक लाख रूपये का शुद्ध मुनाफा हुआ। वन मंडल सीधी की ग्राम वन समिति ने वन विहीन पहाड़ी में काम करना शुरू किया और अपने परिश्रम से इसे सघन सागौन वन में बदल दिया। समिति को सागौन की बल्लियों से आर्थिक लाभ भी हुआ। वन मंडल पश्चिम मंडला की ग्राम वन समिति मनेरी ने वन विहीन पहाड़ी को हरा-भरा बना दिया। इसी प्रकार अन्य समितियाँ भी अपने-अपने क्षेत्रों में सरकार के सहयोग से शानदार काम कर रही हैं।

    प्रदेश का वनक्षेत्र 94 हजार 689 वर्ग किलोमीटर है जो अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक है। यह देश के कुल वन क्षेत्र का 12.3% है। प्रदेश के 79 लाख 70 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र के प्रबंधन में जन-भागीदारी के लिये 15 हजार 608 गाँवों में वन समितियाँ काम कर रही हैं। पिछले एक दशक में 1552 गाँवों में वन समितियों ने 4 लाख 31 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र में सुधार किया है। जब पूरी दुनिया में वनों पर खतरा मंडरा रहा है, ऐसे समय इन समितियों ने वन विभाग के साथ मिलकर शानदार काम किया है।

    राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ, वनोपज संग्रह करने वाले परिवारों को उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से काम कर रहा है। संघ के नवाचारी उपायों से तेंदूपत्ता संग्राहकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। तेंदूपत्ता सीजन में 2021 कोविड-19 के कारण लॉक-डाउन के बाद भी तेंदूपत्ता संग्रहण कराकर दूरदराज के क्षेत्रों में रह रहे जनजातीय परिवारों को 415 करोड़ रूपये का पारिश्रमिक दिलाया गया और 192 करोड़ का लाभांश भी वितरित किया गया।

    पुरानी नीति में 70 फीसदी लाभांश संग्राहकों को बोनस के रूप में दिया जाता था। साथ ही 15% राशि संग्राहकों के सामाजिक एवं आर्थिक कल्याण के लिए और 15% राशि वन क्षेत्रों में लघु वन उपज देने वाली प्रजातियों के संरक्षण एवं विकास पर खर्च की जाती थी। अब “पेसा अधिनियम” की भावना के अनुसार तेंदूपत्ता के व्यापार से होने वाले लाभ का 75% संग्राहकों को, 10% राशि संग्राहकों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण के लिए और 10% राशि वन क्षेत्रों में लघु वनोपज प्रजातियों के संरक्षण तथा 5 प्रतिशत ग्राम सभाओं को दी जाएगी।

    वन विभाग द्वारा नए संकल्प में राष्ट्रीय उद्यानों में पर्यटकों के प्रवेश से मिलने वाली राशि का 33% वन समितियों को देने का प्रावधान किया गया है । समितियों को आवंटित क्षेत्र में ईको पर्यटन का कार्य संचालित करने के लिए सशक्त किया गया है। इससे होने वाली आय वन समिति को मिलेगी। इससे स्थानीय युवाओं को आर्थिक गतिविधियाँ शुरू करने के अवसर मिलेंगे।

    वन समितियों का माइक्रो प्लान

    प्रदेश के एक तिहाई गाँव वन क्षेत्रों के अंदर या उसके आसपास बसे हैं। वहाँ के निवासियों की आजीविका वनों पर आधारित है।

    आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश में इस साल के आखिर तक 5 हजार वन समितियों का माइक्रो प्लान तैयार करने का लक्ष्य है। इससे रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही ग्राम समुदाय अपनी आवश्यकता की वनोपज का उत्पादन कर अपने पैरों पर खड़े हो सकेंगे।

    लाभांश में वृद्धि

    वन समितियों को दिए जाने वाले लाभांश में वृद्धि की गई है। पहले जिला स्तर पर शुद्ध लाभ की राशि का 20 फीसदी मिलता था, जिसकी वजह से राशि का वितरण केवल कुछ ही जिलों में हो पाता था। अधिकांश समितियाँ लाभ से वंचित रह जाती थी। नए संकल्प के अनुसार प्रत्येक समिति को उसके क्षेत्र में से किए गए दोहन से प्राप्त राजस्व का 20 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। पहले काष्ठ एवं बाँस का 50 करोड़ रूपए तक का लाभांश वितरण होता था। अब लगभग 160 करोड़ प्रति वर्ष हो रहा है।

    ग्राम सभाओं को सौंपा अधिकार

    वन समितियों के गठन एवं पुनर्गठन करने का अधिकार अब ग्राम सभाओं को सौंपा गया है। वन समिति की कार्यकारिणी में महिलाओं एवं कमजोर वर्गों के लोगों को शामिल करने की व्यवस्था भी की गई है। प्रदेश में अनेक प्रकार की वनोपज का उत्पादन होता है। इसमें महुआ, तेंदूपत्ता, हर्रा, बहेड़ा, आंवला और चिरौंजी प्रमुख है। पेसा कानून की भावना के अनुरूप ग्राम सभाओं को लघु वनोपजों का पूरा अधिकार सौंपा गया है।

    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ऐसे निर्णय लिये गये हैं, जो वन समितियों से जुड़े संग्राहक परिवारों के लिये परिवर्तनकारी साबित हुए हैं। वन समितियों को भरपूर आर्थ‍िक लाभ हुआ है। उदाहरण के लिये 32 वनोपजों का समर्थन मूल्य निर्धारित करने से करीब 17 लाख परिवारों को लाभ हुआ है। तेंदूपत्ता व्यापार के शुद्ध लाभ का 70 प्रतिशत के स्थान पर 75 प्रतिशत देने से 17 लाख परिवारों को लाभ हुआ है।

    तेंदूपत्ता संग्रहण दर में वृद्धि

    तेंदूपत्ता संग्रहण दर में लगातार वृद्धि की गई है। इसी के अनुपात में पारिश्रमिक और बोनस का भुगतान भी किया गया है। तेंदूपत्ता संग्रहण दर वर्ष 2005 में प्रति मानक बोरा ₹400 थी, जो अब बढ़कर 2500 सौ रूपये प्रति मानक बोरा हो गई है। पारिश्रमिक का भुगतान वर्ष 2005 में ₹67 करोड़ रूपये होता था, जो वर्ष 2021 में बढ़कर 415 करोड़ रूपये हो गया है। संग्राहकों के बच्चों के लिए एकलव्य शिक्षा योजना पिछले ग्यारह साल से चल रही है, जिससे अब तक 1712 बच्चों को शिक्षा के लिये 2 करोड़ एक लाख रूपये की राशि उपलब्ध कराई गई है।