भोपाल, 25 फरवरी (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में लोक निर्माण विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने विभागीय कार्यों, गुणवत्ता नियंत्रण और पारदर्शिता पर विस्तृत वक्तव्य दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सड़क और पुल निर्माण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हमने लोक निर्माण से लोक कल्याण का जो लक्ष्य तय किया है उसे सार्थक करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि पिछले 13 महीनों में विभाग द्वारा 875 से अधिक औचक निरीक्षण किए गए। इन निरीक्षणों के आधार पर चार इंजीनियरों को निलंबित किया गया और 25 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। उन्होंने बताया कि गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट प्रणाली को और सुदृढ़ किया जा रहा है तथा प्रत्येक बड़े कार्य के लिए चरणबद्ध तकनीकी परीक्षण अनिवार्य किए गए हैं। निर्माण कार्यों में मानक सामग्री के उपयोग और समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर मॉनिटरिंग तंत्र सक्रिय किया गया है।
भोपाल में चर्चित तथाकथित “90 डिग्री पुल” के संदर्भ में मंत्री ने कहा कि पुल का वास्तविक कोण 119 डिग्री है और इसे स्वीकृत डिजाइन के अनुरूप बनाया गया है। तकनीकी पेचीगदियों के बीच इस पुल को इसी प्रकार बना पाना संभव हुआ है। उन्होंने बताया कि मामले की तकनीकी जांच कराई गई है और यदि कहीं प्रक्रिया में त्रुटि पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी जोड़ा कि भविष्य में डिजाइन स्वीकृति और साइट सुपरविजन के बीच बेहतर समन्वय के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं।
विपक्ष की ओर से सड़क निर्माण की गुणवत्ता, गड्ढों की समस्या और अधूरी परियोजनाओं को लेकर प्रश्न उठाए गए। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने इंदौर-भोपाल क्षेत्र की परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए जवाब मांगा। इस पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि मेट्रो परियोजना लोक निर्माण विभाग के अधीन नहीं आती, जबकि विभागीय सड़कों और पुलों पर निर्धारित भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) मानकों के अनुसार कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने रखरखाव मद में अतिरिक्त प्रावधान का प्रस्ताव रखा है, ताकि गड्ढा-मुक्त सड़कों का लक्ष्य समयबद्ध तरीके से हासिल किया जा सके।
चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे की टिप्पणी पर मंत्री ने कहा कि सदन में गंभीर विषयों पर रचनात्मक बहस होनी चाहिए। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि विकास कार्यों को राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाए। मंत्री ने यह भी बताया कि लोक शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए ‘लोकपथ’ एप को अपग्रेड किया गया है, जिससे नागरिक सीधे फोटो और लोकेशन टैग के साथ शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त विभाग ‘पीएम गति शक्ति’ प्लेटफॉर्म पर परियोजनाओं का डेटा एकीकृत कर रहा है, ताकि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़े और दोहराव से बचा जा सके।
मंत्री राकेश सिंह ने यह जानकारी भी दी कि ग्रामीण संपर्क सड़कों के उन्नयन के लिए चरणबद्ध योजना तैयार की गई है, जिसके तहत दूरस्थ और आदिवासी अंचलों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली सड़कों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में हजारों किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण और मजबूतीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे परिवहन लागत घटेगी और कृषि-उद्योग गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर सुधारात्मक कार्य किए जा रहे हैं।
सदन में सड़कों पर आवारा पशुओं से दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं का मुद्दा भी उठा। मंत्री ने कहा कि यह विषय बहु-विभागीय है और स्थानीय निकायों व पशुपालन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर समाधान की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रमुख राजमार्गों पर चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर और प्रकाश व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं।
विधानसभा में दिए गए इस विस्तृत वक्तव्य के माध्यम से मंत्री राकेश सिंह ने जहां विभाग की उपलब्धियों को रेखांकित किया, वहीं कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने का भरोसा भी दिलाया। बजट सत्र में लोक निर्माण विभाग पर हुई यह चर्चा प्रदेश में अधोसंरचना विकास की दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करती है।
