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  • हाईकोर्ट ने जमानत दी तो रंगदारी दिखाने लगा पास्को आरोपी

    हाईकोर्ट ने जमानत दी तो रंगदारी दिखाने लगा पास्को आरोपी


    भोपाल,2 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। फर्जी साक्ष्यों से अदालत को गुमराह करके जमानत लेने वाला पास्को आरोपी प्रकाश चंद वल्द चंद्रभान गुप्ता अब अपने गुर्गों से आतंक फैलाकर पीड़िता के परिजनों को डराने का प्रयास कर रहा है। उसके गुर्गे कंप्यूटर व्यवसायियों को धमका रहे हैं कि आरोपी की पकड़ बहुत ऊंची है और जो कोई उसके काले धंधे के बारे में जान जाता है उसे जान से हाथ धोना पड़ता है। वहीं हाईकोर्ट में उसने जो फर्जी दस्तावेज पेश किए थे और अपने वकीलों से झूठी दलीलें दिलवाई थीं उनकी शिकायत पुलिस के पास पहुंच गई है और पुलिस उनकी सत्यता की जांच कर रही है।


    नाबालिग पीड़िता ने बूटकाम सिस्टम्स नाम से कंप्यूटर की दूकान चलाने वाले प्रकाश चंद गुप्ता के खिलाफ अश्लील अनाचार की शिकायत की है जिसे पुलिस ने पास्को एक्ट के अंतर्गत दर्ज किया है। जिला अदालत ने तो मामले की गंभीरता को देखते हुए गुप्ता का जमानत आवेदन खारिज कर दिया था और उसे गिरफ्तार करने के निर्देश दिए थे। इस फैसले के विरुद्ध गुप्ता हाईकोर्ट पहुंचा और उसने वकीलों की फौज के साथ फर्जी दस्तावेजों का पुलिंदा पेश करके ये जताने की कोशिश की थी कि ये प्रकरण कारोबारी लेनदेन की वजह से दर्ज कराया गया है। जबकि पीडि़ता का कहना है कि हमारे पारिवारिक संबंध होने की वजह से मैं गुप्ता के घर थी तब उसने ये वारदात की थी।


    पुलिस ने अदालत में आरोपी के विरुद्ध जो साक्ष्य प्रस्तुत किए थे उनमें उसे ठग, और चरित्रहीन बताया गया था। व्यापार की आड़ में वह सूदखोरी का कारोबार चलाता है जिसमें लोगों को जमा राशि पर ऊंची ब्याज दर का भुगतान देने का लोभ दिखाता है।पुलिस ने उन प्रकरणों की सूची भी प्रस्तुत की थी जो विभिन्न व्यापारियों की ओर से इसके विरुद्ध भोपाल, इंदौर, दिल्ली, कलकत्ता समेत देश के कई शहरों में विचाराधीन हैं। लगभग एक महीने की फरारी के बाद अपने धंधे पर वापस लौटे गुप्ता ने व्यापारियों पर दबाव बनाने के लिए और आतंक फैलाने के लिए ये दुष्प्रचार अभियान चलाया है।


    गुप्ता का एक गुर्गा राहुल जैन कंप्यूटर व्यवसायी है और वह थद्दाराम काम्प्लेक्स एमपी नगर में कंप्यूटर से जुड़ी छोटी सामग्री और इसकी दूकान से बेकार बताकर बदले गए लैपटाप बेचता है। उसने इस मामले से जुड़े लोगों को धमकाते हुए कहा कि प्रकाश गुप्ता की पहुंच बहुत लंबी है। वह अदालतों को खरीदना और उनसे खेलना जानता है। पुलिस की क्या औकात जो उसका कुछ बिगाड़ सके। वह बड़े बड़े लोगों के करोड़ों रुपए ब्याज पर चलाता है। उसका हवाला कारोबार कई शहरों में फैला है। यूपी के लालगंज में उसके परिवार की सल्तनत चलती है।वह इतना खूंखार है कि जो उसके काले धंधे को जान लेता है उसे जान से हाथ धोना पड़ता है।जिन लोगों ने प्रकाश के विरुद्ध धोखाधड़ी की शिकायत की है वे केवल चक्कर खाते रहेंगे क्योंकि वह कई जजों को उलझे प्रकरणों में करोड़ों रुपए रिश्वत दिलाता है।


    राहुल ने दो पत्रकारों को देखकर जिस तरह की डींगें हांकी उससे प्रकाश गुप्ता के काले धंधे की एक नई तस्वीर सामने आई है। प्रकाश के इस गुर्गे ने कहा कि वह कई जजों, पुलिस वालों और अपराधियों को पालकर रखता है। हाईकोर्ट ने उसे उस मामले में भी जमानत दे दी जिसे भारत सरकार ने बाकायदा कानून बनाकर संगीन माना है। गौर तलब है कि जब इस मामले की जानकारी पुलिस को लगी तो उसने हाईकोर्ट में पेश किए इसके दस्तावेजों की छानबीन शुरु कर दी है।

  • यौन हमले का आरोपी बूटकॉम का प्रकाश गुप्ता फरार

    यौन हमले का आरोपी बूटकॉम का प्रकाश गुप्ता फरार


    लालगंज के माफिया परिवार से जुड़े गुप्ता पर यौन हमले के आरोप में पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज


    भोपाल, 23 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर). राजधानी के एमपीनगर में बूटकॉम सिस्टम्स नाम से दूकान चलाने वाले बदनाम व्यापारी प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ पुलिस ने नाबालिग बच्ची से यौन शोषण करने के आरोप में पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इस अपराध में प्रकाश चंद्र गुप्ता को जिंदा रहने तक जेल या फांसी की सजा हो सकती है। प्रकरण दर्ज करने के बाद से वह फरार है और पुलिस उसकी तलाश सरगर्मी से कर रही है।
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार धोखाधड़ी और जालसाजी से अरबों रुपयों की दौलत कमाने वाले कंप्यूटर व्यापारी प्रकाश चंद्र गुप्ता के पापों का घड़ा तेजी से भरता जा रहा है। अदालतों और पुलिस से सांठ गांठ करके लगातार तीस सालों तक सरेआम लूटमार करने वाला ठग प्रकाश चंद्र गुप्ता इस बार नाबालिग का यौन शोषण करने की वजह से पास्को एक्ट में फंस गया है। उसके खिलाफ राजधानी के अयोध्यानगर पुलिस थाने में विगत बीस जून को लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम 2012 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस थाना गोविंदपुरा में सब इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ दीपिका गौतम ने ये शिकायत दर्ज की है। पुलिस थाना अयोध्यानगर को बच्ची के विरुद्ध अपराध की शिकायत प्राप्त होने की वजह से कंट्रोल रूम ने उन्हें वहीं जाकर रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया था।
    फरियादिनी अपने माता पिता के साथ पुलिस थाने पहुंची थी और उसने बताया कि अयोध्या बायपास के कंफर्ट पार्क के मकान नंबर 9 में रहने वाले प्रकाश चंद्र गुप्ता ने उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न किया था जिसे वह दंडित करवाना चाहती है। पुलिस ने फरियादिनी की हस्तलिखित शिकायत पर प्रथम दृष्टया भादवि की धारा 354,354(क), 506, 9(एम),(एन)। 10 पास्को एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। बच्ची ने बताया कि उसके माता पिता के प्रकाश चंद्र गुप्ता के साथ पारिवारिक संबंध रहे हैं । मेरे माता पिता 18से 20 जुलाई 2015 को मेरी बड़ी बहन का एडमीशन दिल्ली विश्विद्यालय में करवाने गए थे इस दौरान उन्होंने उसे प्रकाश गुप्ता के घर छोड़ दिया था। मेरी मम्मी प्रकाश गुप्ता को राखी बांधती थी और पारिवारिक संबंधों की वजह से उन्होंने मुझे सुरक्षित माना था।

    बताते हैं गुप्ता ने सतगढ़ी में सात एकड़ जमीन खरीदी और एक एकड़ में जजों अफसरों की ऐशगाह बनाई है.


    बीस जुलाई 2015 को जब प्रकाश गुप्ता की पत्नी और बेटी ऊपर के कमरे में थे तब मैं खाना खाने के बाद नीचे के कमरे में बैठकर टीवी देख रही थी। टीवी देखते समय मेरी आंख लग गई। इसी दौरान प्रकाश गुप्ता ने आपत्तिजनक स्थिति में आकर मेरे शरीर से खिलवाड़ करना शुरु कर दिया। जब मैंने चिल्लाने की कोशिश की तो उसने मेरा मुंह दबा दिया और धमकाया कि यदि तूने किसी को बताने की कोशिश की तो मैं तुम्हारी मां और बड़ी बहन की हत्या कर दूंगा। इसके बाद जब मेरे माता पिता लौट आए तो उसके बाद भी प्रकाश गुप्ता मुझे जान से मारने की धमकी देता रहता था। मैं डर गई और इसी वजह से मैंने उस घटना के बारे में किसी को नहीं बताया।
    पीड़िता ने बताया कि मैंने इस तरह की घटनाओं के बारे में आनलाईन कई आलेख पढ़े । स्कूल में सैक्सुअल अवेयरनेस के कार्यक्रमों में भी लड़कियों को इस तरह के अपराधों के बारे में बताया गया। मी टू मूवमेंट किस तरह से समाज के काले चेहरे को उजागर करता है ये भी मालूम पड़ा। इससे मुझमें हिम्मत आई और मैंने उस घटना के बारे में अपने मम्मी पापा को जानकारी दी। मैं पुलिस के सामने सहायता की अपेक्षा करके हाजिर हुई हूं ताकि प्रकाश चंद गुप्ता जैसे भेड़ियों को कानून सम्मत सजा दिलवाई जा सके। अयोध्यानगर पुलिस ने दीपिका गौतम की आईडी थाने में न होने की वजह से प्रधान आरक्षक 2928 धर्मेन्द्र सिंह गुर्जर की आईडी से ये प्रकरण कायम किया है।
    गौरतलब है कि प्रकाश चंद्र गुप्ता के विरुद्ध राजधानी के पुलिस थानों में लगभग साढ़े तीन दशकों के दौरान कई आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं। कुछ प्रकरणों में तो उसे जेल भी भेजा गया है। इसके बावजूद बताते हैं कि वह अदालतों में वकीलों और जजों की सांठ गांठ से झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करके बच निकलता है। इस तरह के अपराधों से उसने और उसके सहयोगी वकीलों जजों ने अरबों रुपयों की दौलत एकत्रित कर ली है। सूत्र बताते हैं कि उसने कई गर्ल्स हास्टल भी चला रखे हैं जिनमें वह ऐसी लड़कियां रखता है जिन्हें कथित तौर पर जजों और पुलिस के अफसरों,नेताओं को गिफ्ट के तौर पर पेश किया जाता है। अपने अपराधों को छुपाने के लिए राजधानी में एक टीवी चैनल भी चला रखा है जिसका संचालन एक बड़े टीवी चैनल से निष्कासित पत्रकार करता है। वह और उसकी सहयोगी पत्रकार समाज के प्रभावशाली लोगों को पुरस्कार देकर इस आपराधिक कारोबार पर पर्दा डालने का काम करते हैं। भारतीय जनता पार्टी के एक स्वर्गवासी नेता के संरक्षण में वह करोड़ों रुपयों के ठेके लेता रहा है। पुलिस ने अपनी जांच में ऐसे कई बिंदुओं को भी शामिल किया है जिससे प्रकाश गुप्ता के अपराधों को उजागर किया जा सके और उसे दंडित किया जा सके। प्रकाश गुप्ता इन समय फरार है और उसने अपने अदालती संपर्कों के माध्यम से पुलिस पर दबाव बनाना शुरु कर दिया है।
    पास्को यानि प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रन फ्राम सेक्सुअल अफेंस एक्ट नाम का ये कानून 2012 में लाया गया था। इसमें बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर फैसला किया जाता है। ये कानून 18 साल से कम उम्र के लड़के और लड़कियों दोनों पर लागू होता है। पास्को कानून को 2019 में संशोधित करके मौत की सजा का भी प्रावधान कर दिया गया। इस कानून के तहत यदि आरोपी को उम्रकैद की सजा मिले तो वह जेल से जिंदा बाहर नहीं आ सकता।इसके अलावा दोषी व्यक्ति पर भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया जाता है। बच्चों के खिलाफ पोर्नोग्राफी करने वाले अपराधी को भी तीन से सात साल की जेल और जुर्माने की सजा से दंडित किया जाता है।