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  • सिद्धार्थ चौधरी के हमलावर को गोली कब पड़ेगी

    सिद्धार्थ चौधरी के हमलावर को गोली कब पड़ेगी


    खरगोन में पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ चौधरी जब दंगाईयों को तलवारबाजी से रोक रहे थे तो किसी दंगाई ने उन पर गोली चला दी। ये तो संयोग ही था कि गोली उनके पैर में लगी। चौधरी मध्यप्रदेश पुलिस के एक जांबाज अफसर हैं। सहृदयता और कर्तव्यनिष्ठा उनमें कूट कूटकर भरी है। ऐसे बेशकीमती अफसर के खिलाफ यदि प्रदेश का ही कोई नौजवान नफरत का खेल खेलने लगे तो निश्चित रूप से ये चिंता की बात है। ये न केवल पुलिस बल्कि समूचे प्रशासनिक तंत्र और सरकार के लिए भी खतरे की घंटी है। आप इसे जातीय उन्माद, आतंकवाद, नक्सलवाद या धर्मांधता कहकर खारिज नहीं कर सकते। आप इसे बहके हुए युवाओं की गलती कहकर दबा भी नहीं सकते। यदि इस घटना से प्रदेश ने मुंह चुराने की कोशिश की तो निश्चित तौर पर हम भविष्य में किसी बड़ी घटना को फलित होने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।


    कश्मीर में आजादी के बाद से नेहरू के वंशजों ने कांग्रेस के बैनर तले जो खून की होली खेली उसने कश्मीर की तरुणाई को बरसों पीछे धकेल दिया था। हजारों युवाओं ने अपनी जान गंवाई और महिलाओं का सुहाग उजड़ गया। अलगाववादियों के हौसले इतने बुलंद हो गए थे कि वे सशस्त्र सेना पर हमला करने से भी नही चूकते थे। सैनिक कैम्पों पर बम फेंकना या सैनिकों को झांपड़ मार देना वहां आम बात थी। सैनिकों की मजबूरी ये थी कि वे बगैर आदेश के गोली नहीं चला सकते थे। सेना के ही कई अफसर ऐसे मामलों में कोर्ट मार्शल को अपनी ही सेना के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल करते थे। वजह साफ थी कि तत्कालीन सत्ताधीशों के चरण चूमकर वे प्रमोशन पाते रहते थे। जब मौजूदा राष्ट्रवादी सरकार ने कश्मीर की समस्या को समाधान के अंजाम तक पहुंचाने का फैसला कर लिया तब जाकर कश्मीर को देश की मुख्यधारा में लाने का ख्वाब साकार हो सका है।


    जब सेना का रुतबा धूल धूसरित कर दिया गया था तब असम के एक मेजर ने अलगाववादियों को सबक सिखाने का नायाब तरीका ढूंढ़ निकाला। उपचुनाव के दौरान चार पांच सौ लोगों की भीड़ ने सेना की टुकड़ी को घेर लिया और पथराव करने लगे। इस बीच सेना के कंपनी कमांडर लीतुल गोगोई ने एक उपद्रवी को पकड़ा और सेना की जीप के बोनट पर बांध दिया। उस जीप के पीछे चल रही बख्तरबंद गाड़ी से चेतावनी दी जा रही थी कि उपद्रवियों का यही हाल होगा। उसे नौ गांवों में इसी तरह घुमाया गया। चुनाव कराने गई टीम को सकुशल बाहर निकाल लाने वाले इस उपाय की दुनिया भर में तारीफ की गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला ने इसे अत्याचार बताकर सैन्य अफसर पर कोर्ट आफ इंक्वायरी कराने का दबाव बनाया। हालांकि जांच में अफसर को बेकसूर करार दिया गया। इस तरह के उपाय समाज में दंगा भड़काने वालों के विरुद्ध किए जाते हैं तो भले ही इनकी निंदा की जाए पर ये अपरिहार्य होते हैं। खरगोन में दंगा भड़काने वालों के बीच से भी अफसर पर गोली चलाने वाले शख्श को खोज निकालना और उसे सरे चौराहे गोली मारकर दंडित करना जरूरी हो गया है।
    दरअसल कानून को अपने घर की मुर्गी मानने का मुगालता एक दिन में ही नहीं पनपा है। बरसों से सरकारी अफसरों और पुलिस के लोगों ने जिस तरह से शोषकों और अत्याचारियों को पनाह देने का सोच अपना रखा है उसकी सजा सिद्धार्थ चौधरी जैसे युवा अफसरों को भुगतनी पड़ रही है। आज के युवा अफसरों ने भले ही कोई अपराध नहीं किया हो लेकिन बरसों से एसडीएम कार्यालयों, तहसीलियों,पुलिस थानों में चंदा वसूली का खुला खेल चल रहा है उसके कारण प्रशासनिक न्याय तंत्र का खौफ खत्म हो गया है। सरकारी नौकरियों में अफसरों को वेतन और पेंशन मिलने के बावजूद कई अफसर चंदा वसूली को ही अपनी मुख्य ड्यूटी समझते हैं। उनके पास जानकारी तो होती है कि किसी आपराधिक घटना के पीछे मास्टर माइंड कौन है लेकिन वे उनके गिरेबान पर हाथ नहीं डालते। यही वजह है कि जब ये संरक्षित अपराधी पुलिस या कानून पर ही हाथ डालने लगते हैं तो हाहाकार मच जाता है।
    खरगोन में उपद्रव फैलाने वालों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने सख्त आपरेशन चलाया है लेकिन उपद्रवियों के घर तोड़ देने और उन्हें जेलों में भर देने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता है. धार्मिक पाखंडों की आड़ में पल रहे इस अपराध बोध को सार्वजनिक मंचों पर दंडित करने की जरूरत है।
    दमोह के कुंडलपुर में लाखों करोड़ों रुपयों की दानराशि हड़पने का ख्वाब देखने वाले चंद ठगों ने जब पंचकल्याणक महोत्सव के दौरान बखेड़ा खड़ा करने और पदाधिकारियों से मारपीट करने का जो प्रयास किया उसे लेकर पुलिस ने कुछ लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की। चंद लोग तो पुलिस की निगाह में आ गए लेकिन युवाओं को भड़काकर मारपीट के लिए उकसाने वाले कुछ असली अपराधी पुलिस के रिकार्ड में नहीं दर्ज हो पाए। आज वही अपराधी नए नए षड़यंत्र रचने का काम कर रहे हैं। पुलिस का मुखबिर तंत्र इतना ढीला है कि न तो वो उन्हें उजागर कर पा रहा है न ही उन्हें दंडित करके भविष्य के खतरों की सुरक्षा का प्रबंध कर पा रहा है। एक अपराधी ने तो अपने निवास पर बैठक बुलाकर कमेटी के तख्तापलट की साजिश भी रची लेकिन पुलिस इसे महज राजनीतिक दांव पेंच मान रही है। जबकि आरोपियों के विरुद्ध तीर्थ क्षेत्र में ठगी करने का इतिहास पहले से उजागर है। अब यदि ऐसे अपराधियों पर समय रहते कोई अंकुश नहीं लगाया जाएगा तो जाहिर है कि भविष्य में किसी बड़ी घटना की संभावना खारिज नहीं की जा सकती।
    ऐसा नहीं कि इन असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पुलिस को किसी अपराध के घटित होने का इंतजार करना पड़े। अपराधियों की खोज और उन्हें निरंतर नसीहत देने का काम पुलिस की जवाबदारी में पहले से ही शामिल है। इसके लिए तीन दशकों पहले पत्रकारों के नेटवर्क को पुलिस के साथ जोड़ा गया था लेकिन चंद आपराधिक तत्वों ने पत्रकारों के इस नेटवर्क में अपराधियों को भर दिया। नतीजतन हालात वही ढाक के तीन पात होकर रह गए।


    खरगोन में सिद्धार्थ चौधरी पर हमले ने एक बार फिर पुलिस और प्रशासन को सावधान किया है। कमलनाथ जैसे भौंदू राजनेता ने तो अपनी राजनीति को चमकाने के लिए पत्रकारों को खलनायक बताने का अभियान चला दिया था। मौजूदा शिवराज सिंह चौहान की सरकार समाज के सूचना तंत्र को संवारने के बजाए उसे कचराघर बनाने का काम करती रही है। पिछले विधानसभा चुनावों में शिवराज सरकार की शर्मनाक हार के बावजूद सूचना तंत्र का महत्व भाजपा के कर्णधार नहीं समझ सके । अब जबकि प्रदेश गहरे आर्थिक संकटों से जूझ रहा है। कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। विकास योजनाओं के लिए पूंजी जुटाना टेढ़ी खीर हो गया है तब जरूरी है कि सामाजिक विद्वेष फैलाने वाले ठगों की पहचान करके उन्हें निर्मूल किया जाए। पूंजी का सफल निर्माण तभी संभव है जब शासन तंत्र के एक हाथ में योजनाओं का खाका हो और दूसरे हाथ में दंड का शमशीर,तभी मध्यप्रदेश को आधुनिक भारत का सफल प्रदेश बनाया जा सकता है।

  • गोल्डन सिम के लिए धोखाधड़ी करने वाले धराए

    गोल्डन सिम के लिए धोखाधड़ी करने वाले धराए

    भोपाल, 17 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। थाना गोरखपुर में 15 मार्च को हरजिन्दर सिंह उम्र 53 वर्ष निवासी गुप्तेश्वर वार्ड गुडलक अपार्टमेंट के सामने महानद्दा गोरखपुर ने लिखित शिकायत की थी कि वह स्पेयर पार्टस की दुकान चलाता है। दो फरवरी 22 को एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा उसके साढू भाई हरविन्दर सिंह निवासी प्रेमनगर के मोबाइल में गोल्डन नम्बर सीरीज के लिये टेक्सट मैसेज भेजा गया। जिसमें गोल्डन नम्बर सीरीज के लिये 49 हजार 999 रूपये के आफर में मोबाइल में बात करने तथा व्हाटसएप मैसेज करने के लिये लिखा था। तब हरविंदर सिंह ने इस स्कीम के बारे में मुझे बताया था। हरविंदर सिंह से मेने वह नंबर लेकर उक्त मोबाइल नम्बर के धारक से कॉल एवं व्हाटसएप पर मैसेज से बात की। मोबाइल नम्बर के धारक ने स्वयं को एयरटेल का एजेन्ट बताया एवं एयरटेल के गोल्डन मोबाइल नम्बर 900000000 की सिम के एलाटमेंट के लिये व्हाटसएप में टेक्सट इन्वाइस भेजी। जिसमें अकाउण्ट नम्बर, आईएफएससी कोड देते हुये बैंक खाते नम्बर पर 41 हजार 300 रूपये पेमेण्ट करने के लिये कहा गया था। मेने एयू स्माल फायनेंस बैंक शाखा नेपियर टाउन के खाते से बताये गये बैंक खाते में पेमेण्ट कर दी गई। किंतु अभी तक मुझे गोल्‍डन सिम प्राप्‍त नहीं हुई और न ही मोबाईल धारक उसका फोन उठा रहा है। अज्ञात व्यक्ति द्वारा मेरे साथ 41 हजार 300 रूपये की धोखाधडी की गयी है। शिकायत पर अज्ञात मोबाइल धारक के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया गया।

    पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री सिद्धार्थ बहुगुणा ने घटित हुई घटना को गंभीरता से लेते हुये अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर दक्षिण/अपराध श्री गोपाल खाण्डेल के मार्गदर्शन में नगर पुलिस अधीक्षक गोरखपुर श्री आलोक शर्मा के नेतृत्व में थाना गोरखपुर, क्राइम ब्रांच एवं सायबर सेल की संयुक्त टीम गठित कर अज्ञात आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार करने के निर्देश दिए।

    विवेचना के दौरान ज्ञात हुआ कि भरतीपुर के रहने वाले अशोक तीरथानी के बैंक अकाउंट में शिकायतकर्ता का पैसा ट्रांसफर कराया गया है। जिस पर अशोक तीरथानी को अभिरक्षा में लेते हुये सघन पूछताछ की गयी तो उसने अपने मित्र दिलीप कुकरेजा तथा शुभम उर्फ शिवम राय के साथ कई बैंक अकाउंट खोलकर धोखाधडी का पैसा बैंक अकाउंट में ट्रांजैक्शन करना स्वीकार किया।

    टीम ने दिलीप कुकरेजा एवं शुभम राय को गिरफ्तार कर पूछताछ करने पर जानकारी प्राप्त हुई कि मुम्बई में रहने वाले रवि मिश्रा एवं राज के कहने पर शुभम राय ने जबलपुर शहर में कई लोगों के नाम से विभिन्न बैंकों में कई बैंक अकाउंट खुलवाये हैं। जिसमें रवि मिश्रा एवं राज एयरटेल कम्पनी का एजेंट बताकर लोगों को गोल्डन सिम प्रोवाईड कराने का लालच देकर अपने गिरोह के लोगों के खाते में पैसे ट्रांसफर कराते थे। इन पैसों में से शुभम राय अपना हिस्सा लेकर शेष राशि रवि मिश्रा को ट्रांसफर कर देता था। इस तरह शुभम राय ने अन्य लोगों को भी फर्जी खाता खोलने के लिए प्रेरित किया और 52 बैंक अकाउंट में लगभग तीन करोड रूपये का ट्रांजेक्शन कराया और अपने साथी रवि मिश्रा के साथ शेयर किया।

    आरोपी शुभम राय की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त 52 बैंक अकाउंट के ट्रांजेक्शन, सात नग एटीएम डेबिट कार्ड, एक पासबुक, दो चैक बुक, दो आधार कार्ड, एक पेनकार्ड, एक केवायसी फार्म, आठ मोबाईल फोन, एक स्कूटी जप्त की गयी है। आरोपीगण के बैंक खातो की जानकारी प्राप्त की गयी। जिसके अनुसार लगभग तीन करोड रुपये का धोखाधडी की गयी है। तीनों आरोपियों को प्रकरण में विधिवत गिरफ्तार करते हुये मान्नीय न्यायालय के समक्ष पेश करते हुये आरोपी शुभम राय को रिमाण्ड पर लिया जा रहा है।

    गिरोह का मुख्य आरोपी मुम्बई निवासी रवि मिश्रा मूलतः बिहार पटना का रहने वाला है। वह लोगों को मैसेज एवं काल करके एयरटेल कम्पनी का वीआईपी नम्बर/फैंसी नम्बर देने का लालच देकर पैसों की मांग करता था। शुभम राय जबलपुर में लोगों को प्रति खाता 1000 रुपये का लालच देकर उनसे खाते खुलवाकर चैक बुक, एटीएम अपने पास रख लेता था तथा उक्त खातों में जालसाजी का पैसा डलवाकर शुभम राय अपना हिस्सा रखने के बाद शेष रूपए रवि मिश्रा के अकाउंट में ट्रांसफर कर देता था।

    आरोपी शुभम राय, रवि मिश्रा का दोस्त है जो कि पहले मुम्बई में लगभग पांच साल वर्ष 2007-2012 तक फिल्म सिटी में साथ में काम कर चुका है। पूर्व में शुभम राय इसी प्रकार की जालसाजी में वर्ष 2017 में लखनउ उत्तर प्रदेश में पकड़ा जा चुका है। आरोपी शुभम राय ने महाराष्ट्र, तमिलनाडू, केरल के अलावा कई राज्यों में धोखाधडी करना स्वीकारा किया है। अभी तक की पूछताछ में लगभग 500 से ज्यादा व्यक्तियों के साथ धोखाधडी एवं लगभग 52 बैंक अकाउंट खुलवाने एवं उसमें लगभग तीन करोड रुपये के ट्रांजेक्शन की जानकारी प्राप्त हुई है।

  • पुलिसिंग का मॉडल बनेगी पुलिस कमिश्नर प्रणालीःनरोत्तम मिश्रा

    पुलिसिंग का मॉडल बनेगी पुलिस कमिश्नर प्रणालीःनरोत्तम मिश्रा

    भोपाल,20 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि भोपाल में लागू की गई पुलिस कमिश्नर प्रणाली को प्रभावी रूप से अमल में लाया जाए। आम नागरिकों को इसका एहसास भी होना चाहिए। पुलिस जनता के साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार करे और अपराधियों के दिल में खौफ पैदा हो। कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस आधुनिक तकनीक को अपनाए। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिये अत्याधुनिक तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल करने के निर्देश भी दिये। उन्होंने पुलिस कमिश्नर प्रणाली के लाभों से जनता को अवगत कराने को कहा है।

    गृह मंत्री डॉ. मिश्रा पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद सोमवार को इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिये पुलिस कंट्रोल रूप भोपाल में दिये जा रहे प्रशिक्षण का जायजा ले रहे थे। प्रशिक्षण में भोपाल के पुलिस आयुक्त श्री मकरंद देउस्कर भी मौजूद थे।

    डॉ. मिश्रा ने पुलिस के आला अधिकारियों को निर्देश दिये कि प्रशिक्षण व्यवहारिक हो, जिससे पुलिस कमिश्नर प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन हो। उन्होंने कहा कि इस नये सिस्टम के लागू होने के बाद अपराध नियंत्रण के सकारात्मक परिणाम अपेक्षित है।

    गृह मंत्री डॉ. मिश्रा ने सभी प्रतिभागी अधिकारियों से बेहतर परिणाम की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि पुलिस को सौंपे गये नये दायित्वों में कोई लापरवाही न बरतें। उन्होंने सिस्टम के क्रियान्वयन को देश में सबसे अच्छा बनाने के लिये सभी से अपना शत-प्रतिशत सर्वश्रेष्ठ योगदान देने का आव्हान किया।

  • अपराध नियंत्रण के साथ उन्हें उभारती भी है पुलिस कमिश्नर प्रणाली

    अपराध नियंत्रण के साथ उन्हें उभारती भी है पुलिस कमिश्नर प्रणाली


    विनीत नारायण
    देश भर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली को अपराध नियंत्रण की दवाई समझा जा रहा है जबकि हकीकत में जिन शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लागू किया गया है वहां पुलिस ने अपराध की पहचान करने का तो काम किया है लेकिन अपराध को नियंत्रित करने में पुलिस का तंत्र बुरी तरह असफल रहा है। देश में पुलिस प्रणाली, पुलिस अधिनियम 1861 पर आधारित है। आज भी ज्यादातर शहरों में पुलिस प्रणाली इसी अधिनियम से चलती है। लेकिन कुछ शहर पहले उत्तर प्रदेश में लखनऊ और नोयडा में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की गई थी।दावा यह किया गया था कि इसमें अपराध को रोकने और कानून व्यवस्था सुधारने में लाभ होगा,पर असल में हुआ क्या। पुलिस व्यवस्था में पुलिस कमिश्नर सर्वोच्च पद होता है। वैसे ये व्यवस्था अंग्रेजों के जमाने की है जो तब कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में ही हुआ करती थी। जिसे धीरे धीरे और राज्यों में लाया गया।
    भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के भाग (4) के तहत हर जिलाधिकारी के पास पुलिस पर नियंत्रण रखने के कुछ अधिनियम होते हैं। साथ ही, दंड प्रक्रिया संहिता(सीआरपीसी) एक्जुकेटिव मैजिस्ट्रेट को कानून और व्यवस्था को विनियमित करने के लिए कुछ शक्तियां भी प्रदान करता है। साधारण शब्दों में कहा जाए तो पुलिस अधिकारी कोई भी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं है। वह आकस्मिक परिस्थितियों में डीएम या मंडल कमिश्नर या फिर शासन के आदेश के तहत ही कार्य करते हैं। परंतु पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हो जाने से जिलाधिकारी और एग्जीक्यूटिव मैजिस्ट्रेट के अधिकार पुलिस अधिकारियों को ही मिल जाते हैं। जिससे वह किसी भी परिस्थिति में निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र रहता है।
    बड़े शहरों में अक्सर आपराधिक गतिविधियों की दर भी उच्च होती है। ज्यादातर आपातकालीन परिस्थितियों में लोग उग्र हो जाते हैं। क्योंकि पुलिस के पास तत्काल निर्णय लेने के अधिकार नहीं होते। कमिश्नर प्रणाली में पुलिस प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के लिए खुद ही मैजिस्ट्रेट की भूमिका निभाती है। इस सिस्टम में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी के पास सीआरपीसी के तहत कई अधिकार आ जाते हैं और वह कोई भी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र होता है। साथ ही साथ कमिश्नर सिस्टम लागू होने से पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ जाती है।हर दिन के अंत में पुलिस कमिश्नर, जिला पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिदेशक को अपने कार्यों की रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह मंत्रालय) को देनी होती है। इसके बाद ये रिपोर्ट मुख्य सचिव को दी जाती है।
    पुलिस आयुक्त शहर में उपलब्ध स्टाफ का उपयोग अपराधों को सुलझाने, कानून और व्यवस्था को बनाए रखने, अपराधियों और असामाजिक लोगों की गिरफ्तारी, ट्रेफिक सुरक्षा आदि के लिए करता है। साथ ही साथ पुलिस कमिश्नर सिस्टम से त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया, पुलिस जांच की उच्च गुणवत्ता सार्वजनिक शिकायतों के निवारण की उच्च संवेदनशीलता, प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक उपयोग आदि भी बढ़ जाता है।
    उत्तर प्रदेश में नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन और उससे भड़की हिंसा के समय ये देखा गया था कि कई जिलों में एसएसपी व डीएम के बीच तालमेल नहीं था। इसीलिए भीड़ पर काबू पाने में वहां की पुलिस नाकामयाब रही। इसके बाद ही सुश्री मायावती के शासन के दौरान 2009 से लंबित पड़े इस प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए योगी सरकार ने पुलिस कमिश्नर व्यवस्था को लागू करने का विचार बनाया। सवाल यह आता है कि इस व्यवस्था से क्या वास्तव में अपराध कम हुआ। जानकारों की मानें तो कुछ हद तक अपराध रोकने में ये व्यवस्था ठीक है जैसे दंगों के समय लाठीचार्ज करना हो तो मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी को डीएम से अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी। इसके साथ ही कुछ अन्य धाराओं के तहत जैसे धारा 144 लगाने, कर्फ्यु लगाने, 151 में गिरफ्तार करने, 10716 में चालान करने जैसे कई अधिकार भी सीधे पुलिस को मिल जाते हैं।
    प्रायः देखा जाता है कि यदि किसी मुजरिम को गिरफ्तार किया जाता है तो साधारण पुलिस व्यवस्था में उसे 24 घंटों के भीतर डीएम के समक्ष पेश करना अनिवार्य होता है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद डीएम के निर्णय पर ही मुजरिम दोषी है या नहीं ये तय होता है। लेकिन कमिश्नर व्यवस्था में पुलिस के आला अधिकारी ही ये तय कर लेते हैं कि मुजरिम को जेल भेजा जाए या नहीं।
    चौंकाने वाली बात ये है कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े के अनुसार जिन जिन शहरों में ये व्यवस्था लागू हुई है वहां प्रतिलाख व्यक्ति अपराध की दर में कोई कमी नहीं आई है। मिसाल के तौर पर जयपुर में 2011 में जब ये व्यवस्था लागू हुई उसके बाद से अपराध की दर में 50 प्रतिशत की दर तक बढ़ोत्तरी हुई है। 2009 के बाद से लुधियाना में यही आंकड़ा 30 प्रतिशत है। फरीदाबाद में 2010 के बाद से ये आंकड़ा 40 प्रतिशत से अधिक है। गुवाघाटी में 2015 में जब कमिश्नर व्यवस्था लागू हुई तो वहीं भी 50 प्रतिशत तक अपराध दर में वृद्धि हुई है।
    ब्यूरो के आंकड़ों से ये पता चलता है कि कमिश्नर व्यवस्था में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों में से दोष सिद्धि दर में भी भारी गिरावट आई है। पुणे में 14.14 प्रतिशत, चेन्नई में 7.97 प्रतिशत, मुंबई में 16.36 प्रतिशत, दिल्ली में 17.20 प्रतिशत,बेंगलुरु में 17.32 वहीं इंदौर में जहां सामान्य पुलिस व्यवस्था है वहां इसकी दर 40.13 प्रतिशत है। यानि पुलिस कमिश्नर व्यवस्था में पुलिस द्वारा नाहक गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या दोषियों से काफी अधिक है।
    जिस तरह आनन फानन में सरकार ने बिना गंभीर विचार किए कृषि कानूनों को लागू करने के बाद उन्हें वापस लिया, उसी तरह देश के अन्य शहरों में पुलिस व्यवस्था में बदलाव लाने से पहले,सरकार को इस विषय में जानकार लोगों के सहयोग से इस विषय पर गंभीर चर्चा कर ही निर्णय लेना चाहिए। गृहमंत्री अमित शाह को विशेषज्ञों की एक टीम गठित कर इस बात पर अवश्य गौर करना चाहिए कि आंकड़ों को अनुसार पुलिस कमिश्नर व्यवस्था से अपराध घटे नहीं बल्कि बढ़े हैं और निर्दोष नागरिकों को नाहक प्रताड़ित किया गया है।

  • भोपाल और इंदौर मेट्रोपोलिटियन क्षेत्र घोषित, पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू

    भोपाल और इंदौर मेट्रोपोलिटियन क्षेत्र घोषित, पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू


    पुलिस आयुक्त प्रणाली के लिये अधिसूचना जारी

    भोपाल, 09 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राज्य सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए प्रदेश के महानगर भोपाल और इंदौर में पुलिस आयुक्त प्रणाली को लागू कर दिया है। इस संबंध में आज अधिसूचना जारी कर दी गई है। गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पुलिस मुख्यालय में आयोजित पत्रकारवार्ता में बताया कि कानून-व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन और दोनों शहरों की जनसंख्या 10 लाख से अधिक होने पर राज्य सरकार ने संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक नगरीय क्षेत्रों एवं सीमाओं को मेट्रो पोलिटियन क्षेत्र घोषित किया है। मंत्री डॉ. मिश्रा ने सरकार द्वारा लिये गये बहु-प्रतीक्षित ऐतिहासिक निर्णय के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का आभार माना। पुलिस मुख्यालय भोपाल में पुलिस आयुक्त प्रणाली को लागू किये जाने संबंधी जानकारी की उद्घोषणा के समय पुलिस महानिदेशक श्री विवेक जौहरी और अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा भी मौजूद थे।

    गृह मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि पुलिस आयुक्त प्रणाली में इंदौर नगरीय पुलिस जिले में 36 थानों और भोपाल नगरीय पुलिस जिले में 38 थानों की सीमाओं को समाविष्ट किया गया है। दोनों शहरों में पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी पुलिस आयुक्त रहेंगे। उन्होंने बताया कि दोनों महानगरों में पुलिस आयुक्त प्रणाली के लिये अधिकारियों के पद और जोन का भी निर्धारण किया गया है।

    मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि पुलिस आयुक्त प्रणाली के लागू हो जाने से इंदौर और भोपाल के पुलिस आयुक्त की शक्तियों एवं प्राधिकारों को मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक तथा महानिरीक्षक के सामान्य नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण के अधीन निहित किया गया है। पुलिस आयुक्त को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ होंगी। मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया है कि भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता-1973 (1974 का 2) की धारा-21 द्वारा प्रदत्त शक्तियों में इंदौर और भोपाल नगरीय पुलिस जिले में पदस्थ पुलिस उपायुक्तों एवं पुलिस सहायक आयुक्तों को अपने-अपने अधिकारिता क्षेत्र में विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर शक्तियाँ प्रदान की गई हैं।

    मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि पुलिस एक्ट-1861 के अनुसार मेट्रोपोलिटिन क्षेत्र में पुलिस आयुक्त के अधीन पुलिस का प्रशासन रहेगा। पुलिस आयुक्त पुलिस महानिदेशक के सामान्य नियंत्रण एवं परिवेक्षण में रहेंगे। उन्होंने बताया कि बंदी अधिनियम-1900 अनुसार जेल में बंद कैदियों को पैरोल और आपातकाल में पैरोल बोर्ड की अनुशंसा पर सशर्त छोड़ा जा सकेगा। विष अधिनियम-1919 के तहत गैर कानूनी ज़हर या तेज़ाब रखने अथवा बेचने वालों की तलाशी से बरामद ज़हर या तेज़ाब जप्त किया जा सकेगा। अनैतिक व्यापार अधिनियम-1956 में निहित प्रावधान अनुसार वैश्यावृत्ति के विरुद्ध कार्यवाही की जा सकेगी और इस पेशे में धकेली गई महिलाओं को मुक्त कराया जाकर उन्हें संरक्षण-गृह में भेजा जा सकेगा।

    मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू हो जाने से विधि विरुद्ध क्रिया-कलाप निवारण अधिनियम-1967 अनुसार केन्द्र सरकार द्वारा मेट्रोपोलिटिन क्षेत्र में प्रतिबंधित संगठनों को गैर कानूनी गतिविधियों को रोकने के लिये प्रतिबंधित किया जा सकेगा। मोटर यान अधिनियम-1988 (1988 का 59) का प्रयोग करते हुए वाहनों की पार्किंग अथवा उनके रुकने के स्थान स्थानीय अधिकारियों से समन्वय कर निर्धारित किये जा सकेंगे। वाहनों की गति सीमा निर्धारित की जा सकेगी। लोक सुरक्षा के हित में या उनकी सहूलियत के लिये या किसी सड़क या पुल की स्थिति को देखते हुए, वाहनों की अधिकतम गति निर्धारित करने के लिये उपयुक्त ट्रैफिक साइन लगाये जा सकेंगे।

    मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि लोक सुरक्षा के हित में या उनकी सहूलियत के लिये या किसी सड़क या पुल की स्थिति को देखते हुए, श्रेणी विशेष के वाहनों के उपयोग को सामान्यत: अथवा निर्धारित क्षेत्र या निर्धारित सड़क पर प्रतिबंधित किये जा सकेंगे या सशर्त अनुमति दी जा सकेगी। मध्यप्रदेश सुरक्षा अधिनियम-1990 के अंतर्गत गुण्डे-बदमाशों और ऐसे अपराधी तत्वों के गैंग और आदतन अपराधियों को जिलाबदर किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि शासकीय गुप्त बात अधिनियम-1923 अंतर्गत सरकारी गोपनीय दस्तावेज रखने और इस अधिनियम के विरुद्ध की गई गतिविधियों पर कार्यवाही की जा सकेगी।

  • राज्यपाल पहुंचे पुलिस के पचमढ़ी शिविर

    राज्यपाल पहुंचे पुलिस के पचमढ़ी शिविर

    भोपाल, 10 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मध्यप्रदेश के राज्यपाल महामहिम मंगुभाई पटेल ने शनिवार 09
    अक्टूबर को पुलिस प्रशिक्षण शाला पचमदी का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान महामहिम ने
    प्रशिक्षण शाला में प्रशिक्षणरत नव आरक्षकों के हथियार प्रशिक्षण की गतिविधियों का अवलोकन
    किया। साथ ही नव आरक्षकों की आवास व्यवस्था,भोजन व्यवस्था, विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षणों
    के लिए परिसर में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया।

    पुलिस प्रशिक्षण शाला परिसर स्थित ब्रिटिशकालीन भवनों तथा प्रशिक्षण शाला परिसर के विस्तार के संबंध में भी जानकारी ली। इस अवसर पर होशंगाबाद जोन की पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती दीपिका सूरी एवं पुलिस प्रशिक्षण
    शाला की पुलिस अधीक्षक श्रीमती निमिषा पाण्डेय ने महामहिम राज्यपाल महोदय को नव
    आरक्षकों के वर्ष भर चलने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

    श्रीमती निमिषा पाण्डेय ने बताया कि पुलिस प्रशिक्षण शाला पचमदी वर्ष 1960 में जबलपुर से
    स्थानांतरित कर पचमढ़ी लाई गई जिसमें वर्तमान में 72वें बैच के 126 नव आरक्षक प्रशिक्षणरत
    हैं। प्रशिक्षण कार्य में संलग्न स्टॉफ एवं उनके आवास और कल्याण संबंधी जानकारी भी दी गई।
    इस अवसर पर राज्यपाल महोदय द्वारा परिसर में स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित
    कर शहीदों को श्रद्धांजली दी। साथ ही परिसर में वृक्षारोपण भी किया। राज्यपाल महोदय ने नव
    आरक्षकों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण करने हेतु अग्रिम बधाई दी।

  • राज्यपाल मंगूभाई पटेल बोले साईबर सुरक्षा की मजबूती अनिवार्य

    राज्यपाल मंगूभाई पटेल बोले साईबर सुरक्षा की मजबूती अनिवार्य

    सायबर क्राइम इंवेस्टिगेशन एवं इंटेलिजेंस समिट-2021 का समापन

    भोपाल01 अक्टूबर,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। तेजी से बदलती हुई दुनिया में भूमि, समुद्र, वायु और अंतरिक्ष के साथ ही सायबर डोमेन का भी व्‍यापक एवं महत्‍वपूर्ण स्‍थान हो गया है। इसके असीमित उपयोग की संभावना है। नवीन तकनीक के सदुपयोग से जहाँ आमजन लाभांवित हो रहे हैं वहीं असामाजिक तत्‍व इसके दुरूपयोग से विभिन्‍न अपराधों को भी अंजाम दे रहे हैं। इस तरह की समि‍ट सायबर सुरक्षा और अपराध नियंत्रण का प्रासंगिक और सराहनीय प्रयास है। उक्‍त उद्गार आज मध्‍यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी के सभागार में दस दिवसीय सायबर क्राइम एवं इंटेलिजेंस समिट-2021 के समापन अवसर पर मुख्‍य अतिथि‍ के रूप में मध्‍यप्रदेश के राज्‍यपाल मंगूभाई पटेल ने व्‍यक्‍त किए। उन्‍होंने कहा कि अर्थव्‍यवस्‍था डिजीटल, कैशलेस की ओर अग्रसर है अत: सायबर सुरक्षा की मजबूती अनिवार्य है। इंटरनेट का कल्‍याणकारी कार्यों में सदुपयोग हो। सभी राज्‍यों की सहभागिता तथा अंतर्राष्‍ट्रीय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन निश्चित ही सायबर सुरक्षा और सायबर अपराध नियंत्रण में सहायक होगा। राज्‍यपाल श्री पटेल ने विद्यालयीन/महाविद्यालयीन पाठ्यक्रम में भी सायबर सुरक्षा जागरूकता को शामिल करने की आवश्‍यकता बताई।

          पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कोविड काल में सायबर अपराधों में अत्‍यधिक बढ़ोत्‍तरी देखी गई। शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस तरह के अपराध घटित हुए हैं। इस समिट में सायबर अपराध के निराकरण/विवेचना/नियंत्रण हेतु अधिकतम प्रयास किए गए हैं। विशेषज्ञों और सहभागियों ने अपना ज्ञान और तकनीक साझा की। डीजीपी ने कहा कि ” समिट के प्रतिभागी इस दौरान प्राप्‍त ज्ञान को अपने सहकर्मी/अधीनस्‍थों से भी साझा कर प्रशिक्षित करेंगे ताकि इन अपराधों पर त्‍वरित कार्यवाही संभव हो।

          विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) श्रीमती अरूणा मोहन राव ने बताया कि समिट में तीन हजार से अधिक अधिकारियों ने सहभागिता की है। 56 से अधिक राष्‍ट्रीय/अंतर्राष्‍ट्रीय विषय विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्‍त हुआ है। सभी राज्‍यों में समन्‍वय और तकनीकी जानकारी का आदान-प्रदान त्‍वरित और प्रभावी कार्यवाही में सहयोगी होगा। उन्‍होंने कहा कि समिट आशानुकूल रही। समापन कार्यक्रम में यूनीसेफ की श्रीमती मारग्रेट ने भी सायबर क्राइम एंड द इम‍रजिंग टेक्‍नोलॉजी पर वर्चुअल संबोधन दिया।

    समिट के समापन अवसर पर अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक  प्रशिक्षण श्रीमती अनुराधा शंकर, पुलिस अकादमी के निदेशक राजेश चावला, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक सायबर सेल योगेश देशमुख, सेवानिवृत्‍त पुलिस महानिदेशक मध्‍यप्रदेश ऋषि कुमार शुक्‍ला व क्‍लीयर ट्रेल संस्‍था के वाईस प्रेसीडेंट मनोहर कटोच सहित समिट के आयोजन से जुड़ीं संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं अधिकारी  मौजूद थे। आभार प्रदर्शन उप निदेशक पुलिस अकादमी डॉ विनीत कपूर ने किया।

    समिट में मध्यप्रदेश सहित अन्‍य राज्‍यों के तीन हजार से अधिक पुलिस अधिकारियों ने सायबर क्राइम से निपटने एवं आधुनिक तरीकों से खुफिया जानकारी जुटाने की बारीकियाँ सीखीं।  इस समिट का आयो‍जन मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा सॉफ्ट क्लिक फाउंडेशन, यूनीसेफ व क्‍लीयर ट्रेल कम्‍यूनिकेशन एनालिटिक्‍स के सहयोग से किया गया। समिट में देश एवं दुनिया के विख्‍यात सायबर क्राइम व इंटेलीजेंस विशेषज्ञों द्वारा सायबर क्राइम रोकथाम के गुर सिखाए गए। इस समिट में ऑनलाइन गेमिंग और गेम्बलिंग, किप्टोकरेंसी और क्रिप्‍टो-ट्रेड अपराधों जैसे महत्वपूर्ण विषयों के साथ वित्तीय धोखाधडी, एन्क्रिप्टेड व्हीओआईपी संचार पर अपराध को हल करने, ड्रोन तकनीक इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और अन्य विषयों पर मंथन हुआ। यह समिट महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ होने वाले सायबर अपराध रोकने एवं पुलिस अधिकारियों की कार्य क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से भी आयोजित की गई थी।

  • पुलिस से परिचित कराएगी डाटा बुक

    पुलिस से परिचित कराएगी डाटा बुक

    पुलिस महानिदेशक श्री सिंह ने किया ”स्‍टेटिस्टिकल डाटा-2020” पुस्‍तक का विमोचन

    भोपाल, 10 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र). पुलिस मुख्‍यालय की योजना शाखा द्वारा पुलिस की अन्‍य शाखाओं के सहयोग से मध्‍यप्रदेश पुलिस के सांख्‍यकीय आंकड़ों को समाहित कर ”स्‍टेटिस्टिकल डाटा-2020” पुस्‍तक का प्रकाशन किया है। पुलिस महानिदेशक श्री विजय कुमार सिंह ने सोमवार को इस पु‍स्‍तक का विमोचन किया।

    ”स्‍टेटिस्टिकल डाटा-2020” पु‍स्‍तक को इस हिसाब से तैयार किया गया है, जिससे मध्‍यप्रदेश पुलिस की बेहतरी व क्षमता संवर्धन के लिए उपयोगी योजनाएं तैयार की जा सके। मध्‍यप्रदेश पुलिस के आधुनिकीकरण एवं उन्‍न्‍यन को ध्‍यान में रखकर इस पु‍स्‍तक को अंतिम रूप दिया गया है।

          विमोचन कार्यक्रम में अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक योजना श्री अनंत कुमार सिंह, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक प्रबंध श्री डी श्रीनिवास राव, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक निजी सुरक्षा एजेंसी श्री एम.एस.शर्मा, पुलिस महानिरीक्षक योजना श्री योगेश चौधरी, पुलिस महानिरीक्षक अपराध अनुसंधान श्री डी.श्रीनिवास वर्मा, सहायक पुलिस महानिरीक्षक संपदा श्री सुनील तिवारी व सहायक पुलिस महानिरीक्षक योजना श्री मनोज केडिया भी मौजूद थे।

    अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक योजना श्री अनंत कुमार सिंह के मार्गदर्शन में तैयार हुई इस सांख्यिकी पुस्‍तक में पुलिस से संबंधित बुनियादी आंकड़े मसलन पुलिस में क्षेत्र के अनुपात में उपलब्‍ध मानव संसाधन अर्थात आई.जी., डीआईजी, एसपी, सीएसपी, एसडीओपी, सशस्‍त्र बल इत्‍यादि की संख्‍या उपलब्‍ध है। साथ ही कुल पुलिस थानों की संख्‍या के साथ-साथ महिला, अजाक, यातायात व सीआईडी थानों की संख्‍या भी पुस्‍तक में शामिल की गई है। रेंजवार पुलिस थानों में दर्ज अपराधों की स्थिति सहित मध्‍यप्रदेश से संबंधित भौगोलिक, प्रशासनिक व सामाजिक सांख्‍यकीय आंकड़े भी पुस्‍तक में प्रमुखता से शामिल किए गए हैं।

  • सिमी से जुड़े दो आतंकी गिरफ्तार

    सिमी से जुड़े दो आतंकी गिरफ्तार

    मध्‍यप्रदेश एटीएस को बड़ी सफलता, सिमी के दो सदस्‍य दो दिन के भीतर पकड़े

    भोपाल,13 दिसंबर (प्रेस सूचना केन्द्र)। मध्‍यप्रदेश पुलिस के आतंक विरोधी दस्‍ता (एटीएस) को बड़ी कामयाबी मिली है। एटीएस ने दो दिन के भीतर प्रतिबंधित संगठन सिमी के दो सस्‍दयों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किये गए सिमी सदस्‍यों में एजाज व इलियास शामिल हैं। आरोपी एजाज पिछले 13 वर्षों से एवं आरोपी इलियास पिछले 18 वर्षों से फरार था। विभिन्‍न राज्‍यों की गुप्‍तचर एजेंसियों को इन दोंनों आरोपियों की तलाश थी।

         अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक एटीएस श्री राजेश गुप्‍ता ने बताया कि सिमी के सदस्‍य एजाज शेख पिता मोहम्‍मद अकरम निवासी जाकिर हुसैन मार्ग बुरहानपुर को एटीएस ने पुख्‍ता सूचना के आधार पर गत 12 दिसंबर को पाला बाजार बुरहानपुर से पकड़ा है। एजाज के खिलाफ एटीएस मुंबई में विधिविरूद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 10,13 के तहत आरोप दर्ज है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी एजाज को सीजेएम न्‍यायलय बुरहानपुर में पेश किया गया है। साथ ही महाराष्‍ट्र एटीएस को भी उसकी गिरफ्तारी के संबंध में सूचना दे दी गई है।

         मध्‍यप्रदेश एटीएस द्वारा इसी तरह दिल्‍ली स्‍पेशल सेल की मदद से आरोपी इलियास शेख पिता मोहम्‍मद अकरम निवासी शाहीन नगर ओखला दिल्‍ली को 13 दिसंबर को दिल्‍ली से गिरफ्तार किया गया है। इलियास के खिलाफ बुरहानपुर थाना कोतवाली में भारतीय दंड विधान की धारा 153ए एवं विधिविरूद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 11,13 के तहत प्रकरण दर्ज है। साथ ही एटीएस थाना मुंबई में भी इलियास के खिलाफ विधिविरूद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 11,13 के तहत प्रकरण कायम है।

         अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक एटीएस श्री गुप्‍ता ने बताया कि इलियास को फिलहाल मुंबई एटीएस को सौंपा गया है। इसे बुरहानपुर कोतवाली में दर्ज प्रकरण में रिमांड पर लिया जाएगा। अन्य सूत्र बताते हैं कि दोनों आतंकी एहतेशाम सिद्दीकी और अब्दुल सुभान कुरैशी उर्फ तौकीर के साथ जुड़े थे.