भोपाल,30 नवंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल ने जबसे पंजीयन का सारा रिकार्ड आनलाईन करना शुरु कर दिया है तबसे देश के विभिन्न संस्थानों के साथ साथ विदेशी दवा कारोबार में भी राज्य के फार्मासिस्टों को रोजगार आसानी से मिलने लगा है।किसी भी फार्मासिस्ट के पंजीयन रिकार्ड को पूरी दुनिया में आनलाईन देखा जा सकता है और उसके दावे की सत्यता परखी जा सकती है। इस डिजिटलाईजेशन के अभियान से नकली पंजीयन प्रमाण पत्रों पर नौकरी और कारोबार कर रहे लोगों में हड़कंप मच गया है और वे इस अभियान को रोकने के लिए तरह तरह के जतन करते देखे जा रहे हैं।
हाल ही में एक कथित फार्मासिस्ट ने जिस तरह काऊंसिल के दफ्तर में हंगामा मचाया और पुलिस ने उसकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज की उससे इस समस्या को आसानी से समझा जा सकता है। वह छात्र अपने हंगामे को सही ठहराने के लिए बाकायदा गवाह भी साथ लेकर आया था हालांकि परिषद की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में सारी स्थिति स्पष्ट की गई है और छात्र की आपराधिक हरकत को उजागर किया गया है।
जबकि तथ्यों को देखा जाए तो पिछले पाँच महीनों में परिषद् ने 4416 नए फार्मासिस्टों के पंजीकरण सफलतापूर्वक किए हैं । लगभग 8,000 आवेदन-पत्रों के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच आदि की प्रोसेसिंग की गई है। इस अवधि में कई महत्त्वपूर्ण सुविधाएँ जोड़ी गई हैं, जिनमें डिजिलॉकर एकीकरण, डोमिसाइल सत्यापन के साथ समग्र आईडी एकीकरण शामिल हैं। इससे पंजीयन की प्रक्रिया गलतियों से मुक्त हो गई है। अब पंजीयन के लिए किसी छात्र या फार्मासिस्ट को काउंसिल के दफ्तर आने की जरूरत ही नहीं रही है।
इन बदलावों से काउंसिल अब एक से डेढ़ महीने में नए रजिस्ट्रेशन जारी कर पा रही है। जब तक ये प्रक्रिया चलती रहती है तब तक पोर्टल पर आवेदन की स्थिति आसानी से देखी जा सकती है। अब तक 99% बी.फार्मा पंजीकरण और सभी संभव/सत्यापन योग्य शासकीय विश्वविद्यालयों के डी.फार्मा पंजीकरण पूरे कर लिए गए हैं।
जिन आवेदनों को प्रोसेसिंग के बाद पंजीकृत किया गया है उनमें लगभग 2000 आवेदन पुरानी प्रक्रिया के हैं जिनमें 2022/2024 के आवेदन मुख्यतः निजी विश्वविद्यालयों से संबंधित हैं । इनमें से अधिकतर आवेदनों का महाविद्यालयों से सत्यापन प्राप्त नहीं हुआ है। महाविद्यालयों से संपर्क करके ये पंजीयन भी जारी किए जा रहे हैं।
प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार परिषद ने 2023 में कुल 2889 पंजीयन जारी किए थे। 2024 में 2297 पंजीयन किए गए। जनवरी से मई 2025 तक 970,जून से नवंबर 2025 में जब पूरा ढांचा तैयार हो गया और पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की तैनाती हो गई तो 4416 फार्मासिस्टों के पंजीयन प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। पिछले 5 महीनों में, परिषद ने एक वर्ष में होने वाले कार्य से लगभग दो–तीन गुना अधिक पंजीकरण जारी किए हैं।इस अवधि में कुल 8,000+ आवेदन प्रोसेस किए गए। जिसकी जानकारी आवेदक के लॉगिन पर भेजी जा चुकी है।
डिजिटल सुधार और तेज सेवा
- DigiLocker, Domicile, Samagra ID एकीकरण
- आवेदन ट्रैकिंग व कारण-आधारित स्टेटस पोर्टल पर उपलब्ध है
- अब नए पंजीकरण 1–1.5 माह में जारी किए जा रहे हैं
- आवेदकों को काउंसिल आने की आवश्यकता समाप्त की गई
वर्तमान पेंडेंसी — कारण व स्थिति
- 99% बी.फार्मा और सभी सत्यापन योग्य सरकारी विश्वविद्यालयों के डी.फार्मा पंजीकरण पूर्ण किए गए हैं।
- वर्तमान में लगभग 2000 आवेदन पुरानी प्रक्रिया के हैं जिनमें 2022/2024 के आवेदन मुख्यतः निजी विश्वविद्यालयों से संबंधित हैं और जिनके लिए महाविद्यालयों से सत्यापन प्राप्त नहीं हुआ है। इनको भी सत्यापन प्राप्ति अनुसार क्लियर किया जा रहा है।
परिषद ने विगत 1 वर्ष में दलालों के माध्यम से पंजीयन कराने की परंपरा समाप्त करने में सफलता पाई है। ऑफलाइन हस्तक्षेप पर जीरो टॉलरेंस पालिसी लागू की है। इससे नाराज दलालों में भारी असंतोष है और वे काऊंसिल के बारे में आधारहीन बातें फैलाकर छात्रों को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। जब फर्जी पंजीयन नहीं हो पा रहे हैं तो दलालों ने कई सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों को भी गुमराह करके अफवाहें फैलाना जारी कर दिया है। जबकि थोड़े ही दिनों में राज्य में एक पारदर्शी और सरल डिजिटल पंजीयन स्तर हासिल किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश राज्य फार्मेसी परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि वह सभी आवेदकों के लिए तेज, पारदर्शी, डिजिटल,सटीक और ब्रोकर रहित सेवा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।