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  • हवाला की आहूति से आईएएस कैसे बन पाएंगी माया अवस्थी

    हवाला की आहूति से आईएएस कैसे बन पाएंगी माया अवस्थी


    भोपाल,16 अप्रैल(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश की फूड एंड ड्रग कंट्रोलर कार्यालय की संयुक्त नियंत्रक माया अवस्थी की महत्वाकांक्षाएं राज्य की भाजपा सरकार के लिए गले में बंधा पत्थर बनती जा रहीं हैं। प्रशासन का दुरुपयोग करके उन्होंने भजकलदारम का जो खेल शुरु कर दिया है उससे राज्य की जनता विषैले खाद्य पदार्थों का सेवन करने के लिए मजबूर हो गई है। यही नहीं राजा भोज एयरपोर्ट के विमानपत्तन निदेशक रामजी अवस्थी की पत्नी होने के नाते उन्होंने सरकार को जो वीआईपी ट्रीटमेंट दिलाना शुरु किया है उससे वे कई मंत्रियों की गुडबुक में पहुंच गईं हैं। हालांकि इस वीआईपी ट्रीटमेंट की आड़ में कथित तौर पर उन्होंने हवाला कारोबारियों को वायु मार्ग से रकम पहुंचाने का गोरख धंधा भी चला रखा है। हवाला की इसी कमीशन के बलबूते वे राज्य प्रशासनिक सेवा से पदोन्नति पाकर आईएएस बनने का ख्वाब देख रहीं हैं.


    सत्ता के गलियारों से जो खबरें छन छनकर बाहर आ रहीं हैं उनसे पता चल रहा है कि राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी माया अवस्थी इन दिनों आईएएस बनने का अनुष्ठान बड़ी तन्मयता से चला रहीं हैं। इसके लिए उन्होंने अपने पति की मदद से मंत्रियों को हवाई अड्डे पर वीआईपी ट्रीटमेंट दिलाना शुरु कर दिया है। मंत्रियों की इसी करीबी का लाभ लेकर उन्होंने खाद्य अपमिश्रण करने वाले व्यापारियों से अवैध वसूली का नेटवर्क चला रखा है। हर संभागीय और जिला फूड अधिकारी को हर महीने शहर के अनुसार पेटियां लेकर राजधानी पहुंचना पड़ता है। विभाग के ही त्रस्त अधिकारियों का कहना है कि मैडम का वसूली अंदाज बड़ा खौफनाक है। वे उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल को अपना मामा बताती हैं।विमानपत्तन निदेशक पद पर पदस्थ अपने पतिदेव रामजी अवस्थी की मदद से उन्होंने रीवा में हवाई अड्डा शुरु करने के प्रोजेक्ट को मंजूरी दिला दी है। इसी प्रोजेक्ट की आड़ में उन्होंने वसूली का कारोबार धड़ल्ले से खोल दिया है।

    रामजी अवस्थीःहवाला कारोबार की आड़ में पत्नी को आईएएस बनाने का बीड़ा उठाया


    स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल पर तो मैडम ने वो जादू चला दिया है कि उन्हें आसमान से सोना झरता नजर आने लगा है। माया अवस्थी का फरमान राज्य के कोने कोने में व्यापारियों और सड़कों पर खड़े रेहड़ी वालों तक पहुंच गया है कि यदि उन्हें अपना कारोबार चलाना है तो सरकार की सेवा करनी होगी। तुम नकली खाद्य सामग्री बेचो या कम तौलो कोई तुम्हें नहीं छुएगा । यही वजह है कि राज्य में नकली खाद्य सामग्री धड़ल्ले से बिक रहीं हैं.


    जिन व्यापारियों की खाद्य सामग्री का नमूना फेल करना होता है तो उसे राज्य की सरकारी प्रयोगशाला में भिजवा दिया जाता है जहां नमूना मिलावटी पाया जाता है। जिन व्यापारियों को माफी देनी होती है तो उनके नमूने लैब की व्यस्तता का बहाना बनाकर निजी लैबों में भिजवा दिया जाता है। बताते हैं कि इन लैबों से हर महीने तगड़ी वसूली की जाती है। इसका प्रमाण उन लैबों के भुगतानों से सहज प्राप्त किया जा सकता है। मैडम खुद फाईल भेजकर उनके भुगतान जारी करवाती रहती हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों कर्मचारियों के मामलों की फाईलें या तो ढंडे बस्तों में डाल दी जाती हैं या फिर दलालों के माध्यम से उन्हें भजकलदारम की पगडंडी पर धकेल दिया जाता है।

    नरेन्द्र शिवाजी पटेलः प्रदेश के उपमुख्यमंत्री को झमेले में फंसाने की नादानी


    इस कार्य के लिए मैडम ने स्थापना शाखा में एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी को पदस्थ कर रखा है। राजेन्द्र मेहरा नाम का ये कर्मचारी वास्तव में चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी है। इसे गैरकानूनी तरीके से तृतीय श्रेणी अधिकारी बना दिया गया था। यह वहां पदस्थ अन्य कर्मचारियों को धमकाकर वसूली का कारोबार चलाता है। इसे पदोन्नति की पात्रता न होने की वजह से पदावनत किया जाना चाहिए था लेकिन मैडम की कृपा ने इसे विभाग का दबंग व्यक्ति बना दिया है।


    सूत्र बताते हैं कि हवाला का नेटवर्क चलाने वाले व्यापारियों के चंदे की आड में ही मैडम ने अपने पति की मदद से हवाई सेवा को कूरियर सर्विस की तरह चला रखा है। एयरपोर्ट का प्रबंधन भले ही विमानपत्तन प्राधिकरण के हाथ में हो लेकिन विमान तल की सुरक्षा का दायित्व टाटा के स्वामित्व वाली एयर इंडिया की एजेंसी सीएआईएएसएल के पास है। उसकी स्वयं की इनोवा गाडियां वीआईपी को विमान में बैठाने के लिए लगाई गईं हैं। मैडम अवस्थी के पतिदेव रामजी अवस्थी हर वीआईपी को अपने स्वागत कक्ष में बिठाते हैं और फिर उन्हें उनके निजी सामान समेत स्वयं अपनी कार में बिठाकर विमान के दरवाजे तक पहुंचाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में किसी प्रकार की चैकिंग नहीं की जाती है। सुरक्षा एजेंसी को मालूम रहता है कि वीआईपी को लाने ले जाने में जब इतना बड़ा अधिकारी स्वयं मौजूद है तो फिर हम क्यों पंगा लें।


    दरअसल एयर इंडिया के निजीकरण के दौरान लगभग पच्चीस हजार कर्मचारियों को निजी एजेंसियों के माध्यम से ठेके पर रखा गया है। टाटा वाली एयर इंडिया इनके मामले में ज्यादा दखलंदाजी नहीं करती क्योंकि उन कर्मचारियों का वेतन पुरानी शर्तों के आधार पर विमानपत्तन प्राधिकरण ही देता है। नियोक्ता एजेंसी उन कर्मचारियों का वेतन मनमर्जी से देती है । मजबूर कर्मचारी कुछ नहीं बोल पाते इसलिए विमानपत्तन अधिकारी होने का लाभ लेकर रामजी अवस्थी कथित तौर पर हवाला कारोबारियों को वीआईपी बताकर उनके लगेज समेत विमान में बिठाकर आते हैं। ग्राऊंड हैंडलिंग एजेंसी के कर्मचारी इसमें हस्तक्षेप नहीं कर पाते। जिस सीआईएसएफ को सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है उसे गच्चा देकर इस मार्ग से हवाला की रकम और कारोबारी सुरक्षित बच निकलते हैं।


    हवाला का ये कारोबार इतना मजबूत है कि इसका लाभ सरकार में बैठे नेता और आला अफसर सभी उठाते हैं। राज्य से पिछले बीस सालों में चुराए गए लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपयों को इसी तरह अन्य प्रदेशों या देशों तक पहुंचाया जाता रहा है। यही वजह है कि माया अवस्थी आज सरकार के कई बड़े नेताओं की नाक का बाल बन गईं हैं। उन्हें पूरा भरोसा है कि राज्य सरकार उनका नाम आईएएस की प्रमोशन सूची में केन्द्र के पास पहुंचाएगी। केन्द्र सरकार में भी बैठे कई लोग उन्हें एक सुविधा प्रदान करने वाली अधिकारी के रूप में जानते हैं । इसका लाभ लेकर वे आईएएस जरूर बन जाएंगी। मैडम का कुर्सी अभियान भले ही सबकी आंखों में धूल झोंककर चल रहा हो लेकिन इससे सरकार की खूब किरकिरी हो रही है। राज्य के घोटाले बाजों की इस कड़ी पर मोदी की न खाऊंगा न खाने दूंगा वाली निगाह अब तक क्यों नही पहुंची ये शोध का विषय है।

  • नाकामी पर पर्दा ढांकने रजिस्ट्रार ने छोटे मंत्री को ढाल बनाया

    नाकामी पर पर्दा ढांकने रजिस्ट्रार ने छोटे मंत्री को ढाल बनाया


    भोपाल, 11 अप्रैल,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल की प्रभारी रजिस्ट्रार माया अवस्थी ने काऊंसिल में चल रही अनियमिताओं पर पर्दा ढांकने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री को इस बार एक टूल की तरह इस्तेमाल किया है। लंबे समय से पंजीयन के लिए भटक रहे फार्मासिस्टों की शिकायतों पर अखबारी खबरों से परेशान प्रभारी रजिस्ट्रार ने इस बार राज्यमंत्री को अपनी ढाल बनाया। छोटे मंत्री के पास काऊंसिल का प्रभार भी नहीं है इसके बावजूद उन्होंने दौरा करके स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन कर डाला है।


    पिछले लंबे समय से प्रदेश के फार्मासिस्टों और केमिस्टों के बीच पंजीयन को लेकर मारामारी चल रही है।प्रदेश के फार्मेसी कालेजों से हर साल लगभग तीस हजार विद्यार्थी डिग्री लेकर निकलते हैं। फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकृत होने के बाद वे देश और दुनिया के विभिन्न फार्मा संस्थानों में नौकरी पा सकते हैं। इस लिहाज से ये पंजीयन उनके जीवन के लिए सुनहरा मोड़ साबित होता है। फार्मासिस्टों की इसी चाहत का फायदा उठाकर काऊंसिल में लंबे समय से हेराफेरी चलती रही है। प्रभारी रजिस्ट्रार माया अवस्थी का कहना है कि फार्मेसी की डिग्री लेकर आवारा किस्म के लोग खुद को फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकृत करवा लेते हैं और अपने पंजीयन प्रमाण पत्र के नाम पर मेडीकल दूकान खोलकर किराए पर दे देते हैं। इसीलिए हमारा प्रयास रहता है कि कम से कम फार्मेसिस्टों का पंजीयन हो ताकि अराजकता न फैले।


    यही तर्क देकर उन्होंने आज छोटे मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल का दौरा काऊंसिल में कराया। यहां मंत्रीजी के निर्देश पर फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन को बुला लिया गया। रजिस्ट्रार ने मंत्रीजी से कहा कि अध्यक्ष महोदय उन पर वाजिब पंजीयन जारी करने का दबाव बनाते हैं। इस पर अध्यक्ष ने मंत्रीजी को बताया कि हजारों विद्यार्थी परेशान घूमते रहते हैं इसीलिए वे रजिस्ट्रार को काऊंसिल में बैठने और प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश देते रहते हैं। फूड एवं ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की रजिस्ट्रार और काऊंसिल की प्रभारी रजिस्ट्रार माया अवस्थी ने शिकायती लहजे में मंत्री जी से कहा कि अध्यक्ष महोदय यहां पदस्थ रजिस्ट्रार कुमारी दिव्या पटेल को भी जांच उपरांत पंजीयन जारी करने का निर्देश देते रहे हैं। कुमारी पटेल इन दिनों मातृत्व अवकाश पर गई हुईं हैं इसलिए मुझे काऊंसिल का प्रभार दिया गया है। मेरे पर इतना समय नहीं है कि मैं यहां बैठकर पंजीयन जारी करूं।


    गौरतलब है कि मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल राज्य सरकार के निर्देश पर पंजीकृत संस्था है। इस संस्था में फार्मा क्षेत्र के चुने हुए जन प्रतिनिधियों को चुनाव के बाद पदस्थ किया जाता है। इसी संस्था के फंड से रजिस्ट्रार और स्टाफ का वेतन दिया जाता है। चुनी हुई काऊंसिल संस्था के फंड प्रबंधन और जनता की सुविधाओं के लिए प्रयास करती है। फंड का प्रबंधन रजिस्ट्रार के हाथ में होता है । राज्य प्रशासनिक सेवा से भेजे गए रजिस्ट्रार की नाकामियों का खमियाजा सरकार और काऊंसिल दोनों को भुगतना पड़ता है।


    फार्मा क्षेत्र को मजबूती देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान के अंतर्गत युवाओं को अवसर दिए जा रहे हैं. इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए ही काऊंसिल की चुनी हुई परिषद रजिस्ट्रार पर युवाओं के हित में जांच उपरांत पजीयन जारी करने के निर्देश देती रहती है। पिछले कुछ सालों से गड़बड़ियों को लेकर शिकायतें सामने आती रहीं हैं लेकिन सरकारी अमला अपना भ्रष्टाचार और नाकामी छुपाने के लिए तरह तरह के बहाने बनाता रहा है।


    विधानसभा चुनावों के पहले इंदौर की विजय नगर पुलिस ने जिस फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह को गिरफ्तार किया था उसमें फार्मेसी काऊंसिल के तीन बाबू संजय तिलकवार, विजय शर्मा और आरएन पांडे भी धरे गए थे। उन्हें तो तभी निलंबित कर दिया गया था पर उन्होंने जिन फर्जी मार्कशीटों पर फार्मासिस्टों का पंजीयन कराया था उन्हें तत्कालीन रजिस्ट्रार शैलेन्द्र हिनोतिया ने मंजूरी दी थी। शैलेन्द्र हिनोतिया को बगैर जांच किए पंजीयन जारी करने का दोषी पाया गया था लेकिन उन्होंने अपनी ऊंची पहुंच का उपयोग करके खुद को गिरफ्तारी से बचा लिया। चुनावों की बेला में सरकारी असफलता की पोल न खुले इसके लिए काऊंसिल के पदाधिकारियों ने पूर्व की परिषद की गलतियों को नजरंदाज करने का अनुरोध करके मीडिया और विपक्षी दलों के लोगों को शांत किया था।


    माया अवस्थी को भी भय है कि वे बाबुओं की नोटशीट पर दस्तखत करके पंजीयन जारी करेंगी तो भविष्य मे उन पर भी घोटाले में शामिल होने के आरोप लग सकते हैं। दिव्या पटेल ने भी अपने कार्यकाल में गिने चुने पंजीयन जारी किए । ये प्रमाण पत्र भी भारी ऊहापोह के बीच बाबुओं की सिफारिश पर जारी किए गए थे। यहां भेजे जाने वाले रजिस्ट्रार असली नकली अभ्यर्थियों की छानबीन नहीं करना चाहते वे तो बाबुओं की नोटशीट को ही आधार बनाते हैं । इसकी वजह से काऊंसिल में लंबे समय से भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है। वर्तमान परिषद फार्मा सेक्टर के प्रतिभाशाली लोगों के बीच से आई है इसलिए रजिस्ट्रार के स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों पर लगाम कसी गई है।


    काऊंसिल की परिषद के सदस्यों का कहना है कि राज्य के फार्मा सेक्टर को बल देने के लिए बड़ा वर्क फोर्स चाहिए। राज्य और केन्द्र सरकार की भी यही मंशा है। पंजीयन जारी करने की प्रक्रिया बड़ी पारदर्शी होती है। कालेजों से डिग्री पाने वाले विद्यार्थी यदि सभी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते हैं तो उन्हें पंजीयन जारी कर दिया जाना चाहिए। शासन को कई बार इसकी सूचना दी जा चुकी है कि फार्मा सेक्टर से जुड़ा पूर्णकालिक रजिस्ट्रार यहां पदस्थ किया जाए ताकि वह आवश्यक जांच उपरांत फार्मासिस्टों को पंजीकृत कर सके। अब सारी प्रक्रिया आनलाईन हो गई है इसलिए इसमें गड़बड़ी की संभावना नहीं है। इसके बावजूद प्रभारी रजिस्ट्रार न तो खुद दस्तावेंजों की जांच करवाने में इच्छुक हैं और न ही वे पंजीयन जारी करने मे रुचि लेती हैं। इससे सरकार को मिलने वाली फीस भी नहीं मिल पाती और युवाओं को चक्कर काटना पड़ते हैं जिससे वे दलालों के चंगुल में फंस जाते हैं। काऊंसिल इन्हीं गड़बड़ियों का निराकरण करने का प्रयास कर रही है।


    माया अवस्थी ने अपनी जवाबदारियों से पल्ला झाड़ने के लिए ही इस बार छोटे मंत्री को सामने ला खड़ा किया है। उनके पास फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन का प्रभार भी है। यहां फूड ड्रग के नमूनों की जांचें भी लंबित पड़ी हैं। ड्रग निर्माण की अनुमतियां जारी करने में भी भारी हेराफेरी की शिकायतें आ रहीं हैं। शायद यही वजह है कि छोटे मंत्रीजी को रजिस्ट्रार का पक्ष लेना न्याय जान पड़ रहा है। आज के दौरे में मंत्रीजी के साथ प्रभारी रजिस्ट्रार श्रीमती माया अवस्थी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी भी उपस्थित थे।