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  • दवा माफिया पर सर्जिकल स्ट्राईक

    दवा माफिया पर सर्जिकल स्ट्राईक


    देश की प्रख्यात बड़ी बड़ी अस्पतालों के चढ़ते शेयर और आम जनता के घटते स्वास्थ्य ने दुनिया के तमाम देशों के बीच भारत की भारी बदनामी कराई है। बेशक भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं का ढांचा मजबूत हुआ है ।बढ़ते संसाधनों के बीच आम नागरिक की औसत आयु भी बढ़ी है, इसके बाद भी आम आदमी को स्वस्थ रहने की जितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है वह चिंताजनक है। दवा माफिया के इस मायाजाल को काटने के लिए केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना शुरु की थी। अगले चरण के रूप में दवाईयों की कीमतें मनमाने ढंग से बढ़ाने वाले दवा माफिया पर प्रहार किया गया है। केन्द्र की फार्मेसी काऊंसिल और राज्यों की फार्मेसी काऊंसिलों ने फार्मेसी एक्ट के अधिकारों का प्रयोग करते हुए दवाईयों पर मनमानी एमआरपी प्रकाशित करने और छूट देकर ग्राहकों को आकर्षित करने के काले कारोबार पर करारा प्रहार किया है।


    मध्यप्रदेश में केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन (एमपीसीडीए) ने दवाओं के अनुचित डिस्काउंट, प्रचार और छूट के माध्यम से होने वाले उपभोक्ता शोषण और स्वास्थ्य जोखिमों को दृष्टिगत रखते हुए मध्य प्रदेश राज्य फार्मेसी कौंसिल से निवेदन किया था कि वह इस पर रोक लगाने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी करे। इसके बाद 26 जुलाई 2025 को काऊंसिल ने दवाओं पर छूट के नाम पर अनुचित मुनाफा कमाने वाले दवा माफिया के विरुद्ध दिशा निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार के ड्रग कंट्रोलर, ड्रग आफिसर और ड्रग इंस्पेक्टरों ने दवा माफिया के इस जाल के विरुद्ध जांच भी शुरु कर दी है। जल्दी ही दवाओं की मूल कीमतों और इनके बेमेल काम्बीनेशन के विरुद्ध कार्रवाई करने की तैयारियां भी कीं गईं हैं।


    इस आदेश के माध्यम से फार्मेसी कौंसिल ने यह निर्देशित किया है कि रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट किसी भी प्रकार के छूट, ऑफर, बोर्ड, बैनर अथवा प्रचार सामग्री का उपयोग न करें, और उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। यह निर्णय न केवल फार्मेसी अधिनियम, 1948 तथा फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन्स, 2015 की भावना के अनुरूप है, बल्कि आम नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा और जीवन रक्षा की दिशा में एक दूरदर्शी और प्रभावशाली पहल भी है।


    छूट आधारित दवा बिक्री के कारण घटिया या नकली दवाओं की आपूर्ति में वृद्धि हो रही है। डाक्टर जिन दवाओं को अनुशंसित करता है,केमिस्ट उन्हें बदलकर छूट के नाम पर दूसरी दवाएं थमा देता है। इससे रोगियों में दवाओं के विरुद्ध एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी जटिलताएं बढ़ रहीं हैं।


    देश में दवाओं के मूल्य तय करने की जवाबदारी राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) को दी गई है। उसने पहले से ही शेड्यूल दवाओं पर 8-16% और नॉन-शेड्यूल पर 10-20% तक मार्जिन निर्धारित कर रखा है। प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ में कुछ प्रतिष्ठान छूट के नाम पर अनैतिक, अवैध एवं खतरनाक व्यापारिक प्रथाएं अपना रहे हैं — जिनमें सब-स्टैंडर्ड या नकली दवाओं की बिक्री, तथा डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन में मनमर्जी से परिवर्तन शामिल हैं।
    प्रिस्क्रिप्शन से इतर या गलत दवा दिए जाने से जीवन संकट में पड़ सकता है, विशेषकर गंभीर बीमारियों, हार्ट, कैंसर, डायबिटीज या मानसिक रोगों के मामलों में ये दवाएं मरीज को नुक्सान पहुंचा सकती हैं। छूट के नाम पर घटिया गुणवत्ता की या एक्सपायर्ड दवाओं की खपत बढ़ रही है, जिससे रोग ठीक होने के बजाय और गंभीर हो सकता है। मरीजों में AMR एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस , एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस, दवा का अप्रभावी होना, और एलर्जी या दुष्प्रभाव की घटनाएं बढ़ रही हैं।


    दवाएं बदल दिए जाने से मरीज को जो क्षति उठानी पड़ती है उससे डॉक्टर-फार्मासिस्ट के बीच भरोसे का रिश्ता कमजोर होने लगा है। समाज में फार्मेसी पेशे के प्रति विश्वास धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है, जिससे पूरे हेल्थकेयर सिस्टम की छवि प्रभावित हो रही है।
    केरल उच्च न्यायालय ने 31 जनवरी 2025 को पारित आदेश में फार्मासिस्टों को डिस्काउंट आधारित विज्ञापन न करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। महाराष्ट्र, पंजाब, गोवा, मणिपुर, छत्तीसगढ़, आदि राज्यों की फार्मेसी काउंसिल्स और ड्रग कंट्रोलर जम्मू कश्मीर भी इस विषय में स्पष्ट परामर्श जारी कर चुके हैं।

    दवा कारोबारियों ने दवा माफिया की चुनौती पर प्रहार करने के बाद मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन का अभिनंदन किया।


    एसोसिएशन ने फार्मेसी काऊंसिल के इस निर्देश पर प्रभावी अमल करने के लिए मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि वे संबंधित विभागों विशेष रूप से औषधि नियंत्रण प्रशासन (Drug Control Department) को आवश्यक निर्देश जारी करें, ताकि इस निर्णय का पालन सभी फार्मेसी आउटलेट्स को अनिवार्य रूप से करना पड़े।


    फार्मेसी क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि दवाईयों की दूकानों पर अलग अलग डिस्काऊंट के बोर्ड लगे होते हैं जिनमें एक ही किस्म की अलग अलग कंपनियों से बनी दवाएं अलग अलग रेट पर बेची जा रहीं हैं। कुछ सालों से दवा माफिया ने दवा निर्माण के साथ साथ मार्केटिंग का जो तंत्र विकसित किया है उसमें डाक्टरों के साथ सांठ गांठ की गई है। इस दवा माफिया ने प्रचलित ब्रांडों की दवाओं से मिलते जुलते नामों से कंपनियां बना लीं हैं। ये दवाईयां थर्ड पार्टी के लाईसेंस से बनाई जा रहीं हैं।इन दवाईयों पर पहले से कई गुना अधिक एमआरपी लिखवा दी जाती है फिर उस पर डिस्काउंट देकर छूट का कारोबार चलाया जाता है।


    फार्मेसी प्रेक्टिस एक्ट 2015 के अध्याय 7 एवं 8 में उल्लेख किया गया है की फार्मासिस्ट कोई भी ऐसा कार्य यह प्रचार प्रसार नहीं कर सकता जो की जनता को भ्रमित करें । इसी के तहत डिस्काउंट के बोर्ड लगाकर जनता को भ्रमित करना एक्ट के विरुद्ध है। इन सब को देखते हुए देश के 6 प्रदेशों में इस तरह के कार्य नहीं करने के लिए काउंसिल द्वारा समाचार पत्रों में सूचना प्रकाशित की गई है इसी के क्रम में मध्य प्रदेश में भी यह सूचना जारी की गई है। फार्मेसी एक्ट के तहत नियमों का पालन कराना काउंसिल के दायरे में आता है इसमें उनके साथ फूड एंड ड्रग का योगदान महत्वपूर्ण होता है।जम्मू एवं कश्मीर के ड्रग कंट्रोलर ने ही इसी तरह के निर्देश जारी किए हैं।


    दवाओं की गुणवत्ता और इनके बाजार मूल्यों पर नियंत्रण के लिए भारत में पहली बार इस तरह का अभियान सरकारी तंत्र की पहल पर चलाया जा रहा है। इससे जहां कुकरमुत्तों की तरह उग आईं नकली दवाओं की कंपनियों पर रोक लगेगी वहीं दवा कंपनियों की सांठगांठ से चलने वाले असपतालों की लूट से भी उपभोक्ताओं को बचाया जा सकेगा।

    मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन कहते हैं कि दवाओं की गुणवत्ता स्थापित करने के लिए नकली दवा कंपनियों पर रोक लगाना जनहित का कार्य है। निश्चित रूप से भारत सरकार ने दवा माफिया पर लगाम लगाने की जो मुहिम चलाई है उसका लाभ देश के दवा उद्योग और दवाईयों का निर्यात करने वाली कंपनियों को भी मिलेगा।दवा निर्माण का लाईसेंस देने में स्थानीय अधिकारियों ने जो गोरख धंधा चला रखा है इस मुहिम से उसे भी नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। भारत की दवाओं की साख बढ़ाने के इस अभियान से सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की जाने वाली दवाओं पर भी पड़ेगा जो भारत के आम लोगों के स्वास्थ्य के पैमाने पर एक सार्थक प्रयास साबित होगा।

  • फार्मा सेक्टर की समस्याओं का निराकरण शीघ्रःसंजय जैन

    फार्मा सेक्टर की समस्याओं का निराकरण शीघ्रःसंजय जैन


    भोपाल,15 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा है कि राज्य सरकार फार्मा उद्योग की मौजूदा जरूरतों और समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान रख रही है और जल्दी ही इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को विश्व स्तरीय सुविधाएं मिलने लगेंगी। स्वाधीनता दिवस आयोजन में राष्ट्रध्वज फहराने पहुंचे श्री संजय जैन ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव भारत सरकार के आर्थिक सुधारों को तेजी से लागू कर रहे हैं जिससे जनता को राहत मिलेगी।


    मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल और भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के परिसरों में झंडा वंदन के दौरान देशभक्ति के भाव से सराबोर उद्यमियों ने जोरदार नारे लगाकर राष्ट्र की आराधना की। श्री संजय जैन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिस तरह राजनीति को परिवार की बपौती बनाने वालों को चुनौती देने के लिए आम नागरिकों से राजनीति में आने का आव्हान कर रहे हैं उसी तरह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव सत्ता माफिया पर चोट करके प्रदेश की तरुणाई को मुख्य धारा में लाने का अभियान चला रहे है। देश नई करवट ले रहा है इसलिए मध्यप्रदेश में के दवा निर्माताओं और व्यापारियों के बीच संवाद स्थापित किया जा रहा है।उपमुख्यमंत्री स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण श्री राजेन्द्र शुक्ल के माध्यम से प्रदेश में राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा का केंद्र प्रारंभ करने के लिए एक प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। श्री शुक्ल ने फार्मेसी की पढ़ाई और प्रशिक्षण के लिए फार्मेसी काऊंसिल के माद्यम से देश और प्रदेश स्तर पर फार्मा सेक्टर को बल देने के लिए कई योजनाएं बनवाई हैंं। इसका लाभ नई पीढ़ी के फार्मासिस्टों को मिलेगा।


    उन्होंने कहा कि भारत के दवा उद्योग को वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन मध्यप्रदेश के दवा निर्माता और व्यापारी आम जनता को कम कीमत में अच्छी गुणवत्ता वाली दवाएं मुहैया कराने का प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के प्लेटफार्म पर भी मध्यप्रदेश में निर्मित दवाओं ने अपनी भागीदारी शुरु कर दी है। इस देशव्यापी नेटवर्क से हम राज्य और देश के लिए पूंजी निर्माण का अनुष्ठान कर रहे हैं. इसमें आम फार्मासिस्ट और दवा निर्माताओं की सक्रिय भागीदारी है।


    श्री जैन ने कहा कि कुछ इलाकों में फार्मासिस्टों को पंजीयन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा है ।काऊंसिल ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार शुरु किए हैं। जल्दी ही आम फार्मासिस्टों को कई सुविधाएं घर बैठे पारदर्शी तरीके से मिलने लगेंगी।
    फार्मेसी काऊंसिल के झंडा वंदन कार्यक्रम में श्री संजय जैन के साथ काऊंसिल के उपाध्यक्ष श्री राजू चतुर्वेदी और फार्मेसी काऊंसिल की रजिस्ट्रार सुश्री माया अवस्थी ने भाग लिया। काऊंसिल के सभी कर्मचारी और अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


    भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन की ओर से आयोजित स्वाधीनता दिवस कार्यक्रम में वरिष्ठ व्यापारियों को सम्मानित किया गया। मप्र फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने लगभग पचहत्तर वर्ष से अधिक उम्र के केमिस्टों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेन्द्र धाकड़, सचिव विवेक खंडेलवाल, अनिल कुमार जैन,राहुल नगाइच, सुहाग सिंह तोमर, अनिरुद्ध पारे, विक्रम शेरवानी, मनोज शर्मा, सुनील कुमार गुप्ता एवं दवा बाजार और राजधानी के दवा व्यापारी भी उपस्थित थे।

  • संजय जैन अब फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य भी निर्वाचित

    संजय जैन अब फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य भी निर्वाचित

    भोपाल 21 जुलाई (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की विधिक इकाई फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य के रूप में मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन को विधिवत पांच सालों के लिए निर्वाचित किया गया है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश अब देश के फार्मा सेक्टर में नई छलांग लगाने के लिए तैयार हो गया है। मोदी सरकार ने मेक इन इंडिया अभियान के अंतर्गत देश के फार्मा सेक्टर को विश्व की जरूरतों के लिए तैयार करने का रोड मैप बनाया है। मध्यप्रदेश की ओर से स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ने श्री संजय जैन को अपना प्रतिनिधि बनाकर भेजा है।
    फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.मोंटू पटेल ने पिछले दिनों अपने रायपुर प्रवास के दौरान श्री जैन से मध्यप्रदेश के फार्मा सेक्टर की संभावनाओं की जानकारी ली थी। उनके साथ आए केन्द्रीय फार्मेसी शिक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. दीपेन्द्र सिंह ने स्टेट फार्मेसी काऊंसिल की स्थितियों की समीक्षा की थी। इसके बाद दिल्ली में हुए फैसले के आधार पर पीसीआई के रजिस्ट्रार और सचिव अनिल मित्तल ने इस निर्वाचन की सूचना भेजी है।
    भारत सरकार की ये संस्था देश में फार्मेसी के शिक्षण प्रशिक्षण और कालेजों को मान्यता देने में प्रमुख भूमिका निभाती है।देश के दवा उद्योग को दिशा देने में भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय इस संस्था के माध्यम से ही संवाद करता है। वर्तमान नरेन्द्र मोदी सरकार ने जबसे मेक इन इंडिया का विचार लागू किया है तबसे भारत का दवा उद्योग कई मूलभूत बदलावों के साथ नई ऊंचाईयां छू रहा है।
    श्री संजय जैन को मध्यप्रदेश की ओर से पहली बार स्टेट फार्मेसी काऊंसिल का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। मध्यप्रदेश सरकार ने दवा के कारोबार में राज्य की भागीदारी बढ़ाने के लिए जो प्रयास किए हैं राज्य को उसका पूरा लाभ मिले इसके लिए श्री जैन कई बड़े दवा उद्योगों से निरंतर संपर्क कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ.प्रभुराम चौधरी ने दवा उद्योग को सुव्यवस्थित करके आम जनता को जो आधुनिक दवाईयां सस्ती कीमतों पर उपलब्ध कराने की मुहिम चलाई है उसमें संजय जैन की उपस्थिति प्रभावी साबित होगी।