भोपाल, 20 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश विधानसभा का आज का सत्र हंगामेदार रहा।विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि कि नियमों के अनुसार जो मुद्दा चर्चा में एक बार आ चुका है उसे स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा में दोबारा नहीं लाया जा सकता है। प्रश्नकाल से लेकर शून्यकाल और ध्यानाकर्षण तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सदन की कार्यवाही निर्धारित समय पर शुरू हुई, लेकिन कुछ ही देर में विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया, जिससे माहौल गरमा गया।

विधानसभा में भागीरथपुरा पर आए स्थगन प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने नियमों का हवाला देते हुए खारिज कर दिया है। विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा की मांग पर व्यवस्था देते हुए कहा कि विधानसभा की नियमावली के नियम 55 के उपखंड 5 के अनुसार सत्र में लाए गए स्थगन प्रस्ताव में उस विषय की चर्चा नहीं हो सकती है जिस पर सदन के उसी सत्र में चर्चा हो चुकी है। उन्होंने व्यवस्था देते हुए कहा कि 19 फरवरी 2026 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का प्रश्न इसी विषय पर चर्चा में था जिस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं उत्तर दिया था। इसके अलावा अन्य सदस्य भी इस विषय पर प्रश्न कर चुके हैं। इन सभी के उत्तर सदन में पटल पर हैं। उन्होंने कहा कि उपखंड 7 के अनुसार सदन में उस विषय पर भी चर्चा नहीं हो सकती है जो किसी जांच आयोग के समक्ष है या न्यायालय में विचारधीन है। उन्होंने कहा कि इस घटना पर स्वयं न्यायालय ने संज्ञान लिया है। न्यायालय ने इस पर आयोग बनाया है। आयोग को सिविल कोर्ट के अधिकार दिए गए हैं। आयोग ने अपनी सुनवाई शुरु कर दी है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए भागीरथपुरा के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा नहीं हो सकती है।
प्रश्नकाल के दौरान कृषि, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रश्नों पर विपक्षी सदस्यों ने सरकार से जवाब तलब किया। कांग्रेस विधायकों ने प्रदेश में समर्थन मूल्य पर खरीदी, खाद की उपलब्धता और युवाओं के लिए सरकारी भर्तियों की स्थिति पर विस्तार से जानकारी मांगी। जवाब में संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों और युवाओं के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है तथा लंबित भर्तियों की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। इस दौरान कुछ पूरक प्रश्नों को लेकर तीखी बहस हुई और अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा।
शून्यकाल में बिजली दरों में संभावित वृद्धि और नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के दावों के बावजूद आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ डाल रही है। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि राज्य में बुनियादी ढांचे पर ऐतिहासिक निवेश हो रहा है और बिजली आपूर्ति की स्थिति पहले से बेहतर हुई है।
सदन में सबसे अधिक विवाद तब हुआ जब हाल ही में सामने आए एक कथित जमीन आवंटन प्रकरण पर चर्चा की मांग की गई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस मामले में पारदर्शिता नहीं बरती गई और उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है। इस पर सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष मुद्दों को राजनीतिक रंग देकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। कुछ समय के लिए विपक्षी सदस्य आसन के समीप आ गए और नारेबाजी की, जिसके चलते अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
स्थगन के बाद कार्यवाही पुनः शुरू हुई तो ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चर्चा हुई। ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और दवाओं की उपलब्धता को लेकर विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। स्वास्थ्य मंत्री ने जवाब देते हुए बताया कि नए पद सृजित किए गए हैं और टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ करने के लिए विशेष अभियान चला रही है।
वित्तीय अनुशासन और बजट प्रावधानों को लेकर भी बहस हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि घोषणाएं अधिक और क्रियान्वयन कम है। सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि प्रदेश की विकास दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर है और निवेश प्रस्तावों में निरंतर वृद्धि हो रही है। इस दौरान कुछ सदस्यों के बीच तीखी टिप्पणियां भी हुईं, जिन्हें कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए गए।
दिन के अंत में अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन संवाद और शालीनता के साथ ही जनता के मुद्दों का समाधान संभव है।
कुल मिलाकर, आज की कार्यवाही में प्रदेश के कृषि, रोजगार, स्वास्थ्य और वित्तीय प्रबंधन जैसे प्रमुख मुद्दे केंद्र में रहे, वहीं जमीन आवंटन और बिजली दरों से जुड़े विवादों ने राजनीतिक तापमान बढ़ाए रखा। सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की, हालांकि हंगामे के कारण निर्धारित कार्यसूची का कुछ हिस्सा पूरा नहीं हो सका।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी दिनों में भी सदन में इन मुद्दों पर बहस जारी रहेगी और सरकार को विपक्ष के सवालों का विस्तृत जवाब देना होगा। फिलहाल, आज का दिन तीखी बहस और राजनीतिक टकराव के नाम रहा, जिसने विधानसभा के सत्र को फिर से सुर्खियों में ला दिया।



