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  • भागीरथपुरा मुद्दे पर सदन में चर्चा नहीं हो सकतीःविधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर

    भागीरथपुरा मुद्दे पर सदन में चर्चा नहीं हो सकतीःविधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर

    भोपाल, 20 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश विधानसभा का आज का सत्र हंगामेदार रहा।विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि कि नियमों के अनुसार जो मुद्दा चर्चा में एक बार आ चुका है उसे स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा में दोबारा नहीं लाया जा सकता है।  प्रश्नकाल से लेकर शून्यकाल और ध्यानाकर्षण तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सदन की कार्यवाही निर्धारित समय पर शुरू हुई, लेकिन कुछ ही देर में विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया, जिससे माहौल गरमा गया।

    विधानसभा में भागीरथपुरा पर आए स्थगन प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने नियमों का हवाला देते हुए खारिज कर दिया है।  विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा की मांग पर व्यवस्था देते हुए कहा कि विधानसभा की नियमावली के नियम 55 के उपखंड 5 के अनुसार सत्र में लाए गए स्थगन प्रस्ताव में  उस विषय की चर्चा नहीं हो सकती है जिस पर  सदन के उसी सत्र में चर्चा हो चुकी है। उन्होंने व्यवस्था देते हुए कहा कि  19 फरवरी 2026 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का प्रश्न इसी विषय पर चर्चा में था जिस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं उत्तर दिया था। इसके अलावा अन्य सदस्य भी इस विषय पर प्रश्न कर चुके हैं। इन सभी के उत्तर सदन में पटल पर हैं। उन्होंने कहा कि उपखंड 7 के अनुसार सदन में  उस विषय पर भी चर्चा नहीं हो सकती है जो किसी जांच आयोग के समक्ष है या न्यायालय में विचारधीन है।  उन्होंने कहा कि इस घटना पर स्वयं न्यायालय ने संज्ञान लिया है। न्यायालय ने इस पर आयोग बनाया है। आयोग को सिविल कोर्ट के अधिकार दिए गए हैं। आयोग ने अपनी सुनवाई शुरु कर दी है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए भागीरथपुरा के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा नहीं हो सकती है।

    प्रश्नकाल के दौरान कृषि, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रश्नों पर विपक्षी सदस्यों ने सरकार से जवाब तलब किया। कांग्रेस विधायकों ने प्रदेश में समर्थन मूल्य पर खरीदी, खाद की उपलब्धता और युवाओं के लिए सरकारी भर्तियों की स्थिति पर विस्तार से जानकारी मांगी। जवाब में संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों और युवाओं के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है तथा लंबित भर्तियों की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। इस दौरान कुछ पूरक प्रश्नों को लेकर तीखी बहस हुई और अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा।

    शून्यकाल में बिजली दरों में संभावित वृद्धि और नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के दावों के बावजूद आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ डाल रही है। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि राज्य में बुनियादी ढांचे पर ऐतिहासिक निवेश हो रहा है और बिजली आपूर्ति की स्थिति पहले से बेहतर हुई है।

    सदन में सबसे अधिक विवाद तब हुआ जब हाल ही में सामने आए एक कथित जमीन आवंटन प्रकरण पर चर्चा की मांग की गई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस मामले में पारदर्शिता नहीं बरती गई और उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है। इस पर सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष मुद्दों को राजनीतिक रंग देकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। कुछ समय के लिए विपक्षी सदस्य आसन के समीप आ गए और नारेबाजी की, जिसके चलते अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    स्थगन के बाद कार्यवाही पुनः शुरू हुई तो ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चर्चा हुई। ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और दवाओं की उपलब्धता को लेकर विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। स्वास्थ्य मंत्री ने जवाब देते हुए बताया कि नए पद सृजित किए गए हैं और टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ करने के लिए विशेष अभियान चला रही है।

    वित्तीय अनुशासन और बजट प्रावधानों को लेकर भी बहस हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि घोषणाएं अधिक और क्रियान्वयन कम है। सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि प्रदेश की विकास दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर है और निवेश प्रस्तावों में निरंतर वृद्धि हो रही है। इस दौरान कुछ सदस्यों के बीच तीखी टिप्पणियां भी हुईं, जिन्हें कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए गए।

    दिन के अंत में अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन संवाद और शालीनता के साथ ही जनता के मुद्दों का समाधान संभव है।

    कुल मिलाकर, आज की कार्यवाही में प्रदेश के कृषि, रोजगार, स्वास्थ्य और वित्तीय प्रबंधन जैसे प्रमुख मुद्दे केंद्र में रहे, वहीं जमीन आवंटन और बिजली दरों से जुड़े विवादों ने राजनीतिक तापमान बढ़ाए रखा। सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की, हालांकि हंगामे के कारण निर्धारित कार्यसूची का कुछ हिस्सा पूरा नहीं हो सका।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी दिनों में भी सदन में इन मुद्दों पर बहस जारी रहेगी और सरकार को विपक्ष के सवालों का विस्तृत जवाब देना होगा। फिलहाल, आज का दिन तीखी बहस और राजनीतिक टकराव के नाम रहा, जिसने विधानसभा के सत्र को फिर से सुर्खियों में ला दिया।

  • गुजरातियों का घंटा बजाने निकले कैलाश की छाती पर क्यों मच रहा तांडव

    गुजरातियों का घंटा बजाने निकले कैलाश की छाती पर क्यों मच रहा तांडव

    -आलोक सिंघई-

          “मालव धरती धीर गंभीर, डग डग रोटी पग पग नीर” (Malav dharti dheer gambhir, dag dag roti pag pag neer) यह कहावत मालवा क्षेत्र की उपजाऊ, समृद्ध और जल-संपन्न भूमि का वर्णन करती है, जिसका अर्थ है कि यह धरती बहुत उपजाऊ है जहाँ हर कदम पर रोटी (अनाज) और हर पग पर पानी (जल) उपलब्ध है ।पहली बार दुनिया को पता चला कि सफाई के तमगे जीतते इंदौर का पानी अब पूरी तरह जहरीला हो चुका है। इतना कि उसने लगभग दो दर्जन लोगों की बलि ले ली। वैसे तो शहर के भागीरथपुरा में दो सौ से अधिक लोग गंभीर स्तर पर बीमार पड़े लेकिन हजारों लोगों का मन आज भी घिन से भरा हुआ है जिन्हें स्थानीय निकाय और जन प्रतिनिधियों की लापरवाही की वजह से मलमूत्र भरा पानी पीने को मजबूर होना पड़ा। इस घटना के बावजूद खुद को शहर का भाग्यविधाता समझने का दंभ भरने वालों का दिल नहीं पसीजा। इन मौतों के बाद हाल ही में उनके परिवार की एक शादी का समारोह जितने बड़े पैमाने पर मनाया गया उससे पता चलता है कि वहां के जन प्रतिनिधि अब एक अलग ही नशे में मदमस्त घूम रहे हैं।

         कांग्रेस के राजकुमार राहुल गांधी सत्रह जनवरी को इंदौर आ रहे हैं। उनकी कांग्रेस इस घटना पर इसी दिन पूरे प्रदेश में भी विरोध प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा की राजनीति और स्थानीय नेताओं की अकुशलता की वजह से लोगों को अपने परिजनों का बिछोह सहना पड़ रहा है। दरअसल इंदौर की इस घटना से न केवल मालवा बल्कि पूरे प्रदेश और देश के लोगों का मन विक्षोभ से भरा हुआ है। यही वजह है कि कांग्रेस जैसे समयातीत हो चले राजनीतिक दल के नेता भी अंगड़ाई लेने लगे हैं। कुछ दिनों पहले मध्यप्रदेश का बंटाढ़ार करने में निपुण दिग्विजय सिंह ने भी एक अखबार में आलेख के माध्यम से भाजपा की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी। इस टसुए बहाते लेख के माध्यम से दिग्विजय ने गुजरातियों पर निशाना साधा था।उनका कहना था कि राज्य की पंचायतों तक में गुजरातियों को जो ठेके दिए गए उनसे राज्य की स्थिति बिगड़ी है। कई गुजराती ठेकेदार तो बगैर काम किए भुगतान लेकर रफूचक्कर हो गए। उन्होंने भाजपा के जिन नेताओं से जुड़े ठेकेदारों को पेटी कांट्रेक्ट दिए उन्होंने भी काम नहीं किया। इस वजह से राज्य और इंदौर की ये दुर्दशा हुई है।

    कवि दुष्यंत कुमार की साए में धूप की कुछ लाईनें आज ज्यादा प्रासंगिक हो रहीं हैं। कि

    कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं,गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं।

    अब तो इस तालाब का पानी बदल दो,ये कँवल के फूल कुम्हलाने लगे हैं

         शहरी नियोजन की विफलता को दर्शाने के लिए दिग्विजय ने जो लेख लिखा वह वास्तव में एक गहरी और अंदरूनी राजनीति का प्रकटीकरण बताया जा रहा है। पिछले लगभग ढाई दशकों से दिग्विजय सिंह मंदड़िए की तरह दांव खेल रहे हैं। शतरंज के पांसे फेंकते चुन्नू मुन्नू ने जिस तरह भाजपा की सत्ता में अपने महल खड़े किए उससे मध्यप्रदेश की राजनीति को आसानी से समझा जा सकता है। महापौर रहते हुए कैलाश विजयवर्गीय पर जिस पेंशन घोटाले का आरोप लगा था उसे अदालत ने सत्रह सालों बाद इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि सरकार ने इस मामले में अभियोजन की स्वीकृति ही नहीं दी।

          इस मामले में कांग्रेस के नेता के के मिश्रा का आरोप है कि कैलाश विजयवर्गीय ने महापौर बनने के बाद परिषद की पहली बैठक में ही संकल्प पारित करवा लिया कि पेंशनधारियों को नंदानगर सहकारी साख संस्था के माध्यम से भुगतान किया जाएगा। इसके बाद अपात्र लोगों को जमकर पेंशन का भुगतान किया गया। जांच में घोटाले की रकम 33 करोड़ से ज्यादा आंकी गई थी। मिश्रा ने कोर्ट में एक परिवाद दायर कर तत्कालीन महापौर कैलाश विजयवर्गीय, महापौर परिषद यानि एमआईसी के तत्कालीन सदस्य रमेश मेंदोला, पूर्व महापौर उमाशशि शर्मा, तत्कालीन सभापति और अब सांसद शंकर लालवानी, तत्कालीन निगमायुक्त संजय शुक्ला समेत 14 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, कूट रचना का आरोप लगाते हुए इन पर आपराधिक प्रकरण चलाने की मांग की थी।

           इसके बाद इंदौर जिस तरह राजनेताओं के धन उलीचने का अड्डा बना उसने तो पूरे इंदौर को ही लुटेरा बना दिया। इंदौर के चमकते विकास की अंतर्कथा ये साबित करती है कि जैसा राजा हो प्रजा वैसी ही हो जाती है। इसे समझने के लिए वहां के अस्पतालों की कहानिया हीं काफी हैं। छह आठ महीने पहले मेडीकल कालेज के सामने स्थित एक अस्पताल में जब मरीज के परिजनों ने देखा कि उन्हें थमाए गए बिल में एक ही खर्च कई बार दुहराया गया है तो उन्होंने अस्पताल के मालिक से बात की। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय मंत्रीजी से भी निवेदन किया कि अस्पताल बेवजह वसूली जा रही इस राशि का बिल संशोधित कर ले। मंत्रीजी के कार्यालय से अस्पताल प्रबंधक को फोन भी किया गया। इस पर प्रबंधक ने मरीज के परिजनों को दो टूक इंकार करते हुए कहा कि चुनाव से पहले मंत्रीजी उनसे पचपन लाख रुपए का चंदा ले चुके हैं। ऐसे में यदि वे मरीजों से भरपाई नहीं करेंगे तो फिर उन्हें अस्पताल बंद करना पड़ेगा।

             यही स्थिति वहां के तमाम कारोबारियों की  हो गई है। इंदौर में पदस्थ रहे पुलिस के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि अब ये शहर एक दूसरे पर टोपी धरने में महारथ हासिल कर चुका है। एक नागरिक का बेशकीमती प्लाट नेता नगरी के एक गुंडे ने हथिया लिया। जब वह बिल्डर मंत्रीजी के सामने पहुंचा तो उन्होंने अपने दरबार में गुंडे की पेशी करवाई। गुंडा पूरी तैयारी से दस्तावेज लेकर पहुंचा और उसने कहा कि प्लाट तो उसी का है, भैया बेवजह उस पर दावा जता रहे हैं। हूबहू कागज देखकर बिल्डर चकरा गया। नेताजी ने उसे समझाया कि आपस में समझ लो। बड़ी अनुनय विनय के बाद बिल्डर ने अपना ही प्लाट दो करोड़ रुपये की अड़ीबाजी चुकाकर वापस पाया।

           ये घटनाएं तो आज आम हैं। घर घर में ये विष फैल चुका है। बहनें भाई की संपत्ति पर अड़ी बाजी कर रहीं हैं। कोई ससुराल का जेवर हड़पकर भाग रही है कोई रिश्तेदारों को अच्छे इलाज का प्रलोभन दिखाकर उनकी संपत्तियां लुटवा रहा है। लड़के लड़कियां चमक दमक के फेर में टोपी पहिनते पहिनाते दिख रहे हैं। लगभग ढाई दशकों में भोला भाला इंदौर बिल्कुल बदल गया है। एक नया ही शैतान वहां के जेहन में बैठ गया है। जो इंदौर कभी उत्पादक था वह आज शातिर कारोबारी माफिया बन चुका है।

            भागीरथ पुरा की घटना भी इसी जहरीली राजनीति और काले धन की हवस की भेंट चढ़ा है। अपना दामन छुड़ा रहे भाजपा के नेताओं ने अपने जिस बंटाढार सरगना से गुजराती लाबी पर सवालिया निशान लगवाया है वह केवल आधा सच है। ये बात सही है कि गुजरात से आए कुछ ठेकेदारों ने शिवराज सिंह चौहान की पिलपिली सरकार को ठगी का पप्पू बना रखा था। शहरी नवीनीकरण के नाम पर आई योजनाओं में खुलेआम खा खा खैया का खेल खेला गया। लेकिन इससे भागीरथपुरा का अभिशाप नहीं ढांका जा सकता है।सबसे ज्यादा राजस्व उपार्जन करने वाला इंदौर नगर निगम अपनी जल मल व्यवस्था को चलाने के लिए खुद सक्षम है। उस पर किसी केन्द्रीय योजनाओं की लूट का कोई असर क्यों पड़ना चाहिए था। दरअसल योजनाओं की इस लूट में सहयोगी बने भाजपा के नेताओं को जरा भी फिक्र नहीं थी कि उनके शहर की पाईप लाईनें सड़ चुकी हैं। उन्हें बदला भी जाना चाहिए। तेज आबादी का बोझ झेलते शहर में नई पाईप लाईनें भी विकसित की जानी थी। वे तो बस उन कागजी योजनाओं में अपना हिस्सा लेकर खिसक लिए । नृशंस लापरवाही पर सवालों के जवाब में घंटा बताते नेताओं को देखकर भविष्य की राजनीति की दिशा आसानी से समझी जा सकती है।

             जबसे कैलाश जी को पश्चिम बंगाल का प्रभार दिया गया और भारी संसाधन झोंकने के बाद ममता दीदी का प्रसाद खाने वाले वामपंथियों ने वहां भाजपा की दाल नहीं गलने दी तबसे भाजपा में कई स्तरीय चिंतन चलता रहा है। इस बार एक लाबी कह रही थी कि पिछले अनुभवों का लाभ लेने के लिए कैलाश जी को दुबारा उस मोर्चे पर भेजा जाए। इस जमावट को करीब से देख रहे उनके विरोधियों ने कलकत्ता के उन उद्योगपतियों से चंदा वसूली के प्रमाण हाईकमान के समक्ष रख दिए कि जिन्हें केन्द्र ने युद्ध में सहयोग के लिए तैनात किया था। जाहिर है कि भाजपा हाईकमान अपनी इस गलती को दुबारा कैसे दुहरा सकता था। इस बीच भागीरथ पुरा हो गया और अपनी गलती को छुपाने के लिए गुजरातियों पर ठीकरा फोड़ने की नादानी भी सामने आ गई। इस एपीसोड के बाद भाजपा के कई अन्य नेताओं को आशा की किरणें दिखने लगी हैं और वे अपने कुर्ते पजामे पर कलफ लगवाने में जुट गए हैं। रही सही कसर पूरी करने के लिए कांग्रेसियों ने भी खम ठोक दिया है।

  • विश्व स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य पूरा करेंगे शहरी निकायःकैलाश विजय वर्गीय

    विश्व स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य पूरा करेंगे शहरी निकायःकैलाश विजय वर्गीय

    भोपाल, 18 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2047 में मध्यप्रदेश की कुल आबादी का लगभग 50 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। इस बात को ध्यान रखते हुए शहरी क्षेत्रों में अधोसंरचना कार्यों की योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में देश में विशिष्ठ स्थान बनाया है। हमारे विभाग की कोशिश होगी कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों का एयर क्वालिटी इंडेक्स अच्छा हो। इस वजह से शहरी क्षेत्रों में बगीचों के विकास के साथ-साथ नगरवन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्री श्री विजयवर्गीय भोपाल में राज्य सरकार के विकास और सेवा के दो वर्ष पूरा होने पर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।
    मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश के जो शहर नर्मदा नदी के किनारे में आते है, वहां शहरों का दूषित पानी नदीं में न मिलें। इस पर विभाग लगातार काम कर रहा है। मेट्रोपॉलिटन सिटी की चर्चा करते हुए मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग ने इंदौर-उज्जैन और भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास का कार्य शुरू कर दिया है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी में भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया है। इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम और धार जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया गया है। प्रदेश की 2 मेट्रोपॉलिटन सिटी इस तरह विकसित की जाएंगी। जहां शहरी आबादी को सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। मेट्रोपॉलिटन सिटी में निवेश और रोजगार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
    मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग की कोशिश है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की अधिक से अधिक सेवाओं का डिजिटलीकरण ऑनलाइन हों। इसको ध्यान में रखते हुए हमने ई-नगरपालिका विकसित की है। प्रदेश के शहरों को ग्रीन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। नगरीय सेवाओं में सोलर एनर्जी का अधिक से अधिक उपयोग किया जाएं। इसको सुनिश्चित किया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि नगरीय निकाय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो। इसके लिये शहरी क्षेत्रों की सम्पत्तियों का जीआई मेपिंग किया जा रहा है।
    प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में एक लाख 60 हजार से अधिक आवासों का निर्माण पूरा। प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश को बेस्ट परफॉर्मिंग अवार्ड की श्रेणी में दूसरा स्थान।
    उल्लेखनीय बिंदु-
    अमृत 2.0 में 300 परियोजनाओं का कार्य पूर्ण।
    जल गंगा संवर्द्धन अभियान में 3 हजार 323 जल संरचनाओं का, 74 जल संग्रहण संरचनाओं का लोकार्पण।
    स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में 8 शहरों का राष्ट्रीय पुरस्कार। साथ ही इंदौर ने देश के नम्बर वन शहर का सम्मान लगातार 8 साल बनायें रखा।
    कार्बन क्रेडिट से राशि अर्जित करने वाले इंदौर देश का प्रथम शहर
    दीनदयाल रसोई योजना में संचालित 56 केन्द्रों को बढ़कर इन्हें 191 केन्द्र किया गया।
    पीएम स्वनिधि योजना अंतर्गत 9 लाख से अधिक रहणी पटरी वालों को 14 लाख से अधिक ऋण प्रकरण मबजूत। मध्यप्रदेश को नवाचार और सर्वोत्तम अभ्यास की श्रेणी में पहला स्थान,
    आजीविकास मिशन में 3 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिलाया गया। 1 लाख 70 हजार युवाओं को स्व-रोजगार से जोड़ा गया।
    प्रदेश में 65 हजार स्व सहायता समूह का गठन। 6 लाख से अधिक परिवारों को स्व-सहायता समूह में जोड़ा गया।
    इंदौर में मेट्रो परिचालन शुरू भोपाल में दिसम्बर 2025 में ही शुरू होगा मेट्रो।
    हाउसिंग बोर्ड द्वारा एमपी ऑनलाईन के माध्यम से 532 करोड़ की सम्पत्तियों का विक्रय।
    गीता भवन स्थापना योजना 5 महीनों के लिये स्वीकृत।
    प्रदेश में इंटीग्रटेड टाउनशिप पॉलिसी-2025 मंजूर। प्रदेश में इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को भी मंजूरी।

  • नगरीय निकाय अपना बिजली बिल खुद भरें बोले विजयवर्गीय

    नगरीय निकाय अपना बिजली बिल खुद भरें बोले विजयवर्गीय


    भोपाल, 24 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। नगरीय विकास और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नगरीय विकास संचालनालय का निरीक्षण किया तो उन्हें स्थानीय शासन की ढेरों गड़बड़ियों से सामना करना पड़ा। उन्होंने साफ निर्देश दिए हैं कि नगरीय निकाय अपनी कराधान व्यवस्था सुधारें और बिजली के बिल स्वयं भरें । शासन से मिलने वाली राशि में होने वाली कटौती से बचने के लिए स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनना होगा। मंत्री के आश्वासन के बाद वित्त विभाग ने नगरीय निकायों को दी जाने वाली लगभग तीन सौ तीस करोड़ रुपयों की धनराशि जारी कर दी है।


    विभागीय सूत्रों ने बताया कि शासन के वित्त विभाग ने कड़ा वित्तीय अनुशासन लागू करते हुए नगरीय निकायों को दी जाने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति एवं अन्य राशि जारी करने पर रोक लगा रखी थी। नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारी इसे लेकर हो हल्ला मचा रहे थे। श्री विजय वर्गीय ने स्वयं पहुंचकर मामले का जायजा लिया तो नगरीय प्रशासन के कुशासन की पोल खुल गई। उनके साथ वित्त सचिव ज्ञानेश्वर पाटिल और नगरीय विकास आयुक्त भरत यादव भी मौजूद थे।

    वित्त विभाग ने कड़े वित्तीय अनुशासन के अंतर्गत नगरीय विकास विभाग पर अपनी उधारी चुकाने के लिए दबाव बनाया था। नगरीय निकायों की लापरवाही और उधार लेकर घी पीने की शैली के चलते मध्यप्रदेश का वित्तीय प्रबंधन प्रभावित हो रहा था। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के निर्देश के बाद वित्त विभाग ने इस बार पूरी राशि जारी कर दी है। आमतौर पर वित्त विभाग लगभग ढाई सौ करोड़ रुपए जारी करता है। बाकी राशि वह प्रोजेक्ट उदय योजना की शर्तों के कारण काट लेता है। नगरीय प्रशासन विभाग ने आश्वासन दिया है कि वह नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए टैक्स की वसूली समय पर कराने का प्रयास कर रहा है।


    विभागीय मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि मूलभूत राज्य वित्त आयोग, सड़क अनुरक्षण और मुद्रांक शुल्क की राशि, जो करीब एक हजार करोड़ रुपए के पास है, को जल्दी जारी किया जाए। उन्होंने यूआईडीएफ के अंतर्गत नगरीय निकायों को अमृत योजना की पूर्ति के लिए 500 करोड़ रुपए शीघ्र जारी करने की मांग की है। वित्त सचिव ने बताया कि इस संबंध में अधिकारिक रूप से एक हफ्ते के अंदर कार्रवाई की जाएगी। मंत्री विजयवर्गीय की मौजूदगी में हुई बैठक में यह भी तय हुआ कि मेट्रो रेल के संबंध में 350 करोड़ रुपए की स्वीकृत राशि के लिए राज्य का अंश शीघ्र जारी किया जाए। बैठक में तय हुआ कि पूंजीगत मदों की योजनाओं को नगरीय निकायों द्वारा लागू करने के संबंध में मानक प्रक्रिया तय कर सभी नगरीय निकायों को जारी की जाए। नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री शहरी अधो संरचना चतुर्थ चरण के अंतर्गत ऋण लिए जाने के संबंध में एमपीयूडीसी को अधिकृत किए जाने की स्वीकृति जल्द जारी किये जाने का आग्रह किया है। 552 ई-बसें छह शहरों में विजयवर्गीय ने प्रदेश के 6 प्रमुख नगरों में नगर परिवहन सेवा को मजबूत करने के लिए नगरीय विकास विभाग ने 552 ई-बसें लागू करने का प्रस्ताव वित्त विभाग को दिया है। नगरीय विकास मंत्री विजय वर्गीय ने कहा कि इस योजना में अन्य राज्यों ने गारंटी दी है, जिसे प्रदेश में भी वित्त विभाग द्वारा दी जाएगी।


    बैठक में वित्त विभाग ने बताया कि नगरीय निकायों की विभिन्न शासकीय विभागों पर अधिरोपित सेवा कर राशि की सूची उपलब्ध कराई जाए। इसके आधार पर वित्त विभाग द्वारा उक्त राशि शीघ्र दिलाए जाने के प्रयास किए जाएंगे। बैठक में मंत्री ने कहा कि नगरीय निकायों को देय चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि से राज्य स्तर पर कटौती नहीं की जाना चाहिए। ऐसी व्यवस्था हो कि नगरीय निकाय बिजली बिल की राशि खुद बिजली कंपनियों को जमा कराएं। बैठक में नगरीय विकास मंत्री ने न्यू पेंशन स्कीम के कर्मचारियों को ग्रेच्युटी दिए जाने के संबंध में विभागीय प्रस्ताव को वित्त विभाग द्वारा एक सप्ताह में निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले कैलाश विजयवर्गीय ने शिवाजी नगर पालिका भवन स्थित संचालनालय का निरीक्षण कर अधिकारियों को पेंशन, प्रशिक्षण जैसे मुद्दों पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    इस मौके पर अमृत योजना, मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों की भी विस्तार से समीक्षा कर कार्य समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। नगरीय क्षेत्रों में निर्मित हो चुके संजीवनी क्लीनिक को प्रारंभ कराने को भी कहा है। विजयवर्गीय ने कहा कि हमारा ध्येय है कि हर नागरिक तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे और समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति तक विकास की पहुंच सुनिश्चित हो। इस अवसर पर केश शिल्पी बोर्ड के अध्यक्ष श्री नंदकिशोर वर्मा जी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।विभाग के अपर आयुक्त शिवम वर्मा, कैलाश वानखेडे व प्रमुख अभियंता सुरेश सेजकर भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

    श्री विजयवर्गीय ने 450 वर्गफिट तक के भवन निर्माण पर 24 घंटे के भीतर भवन अनुज्ञा की अनुमति देने पर विचार करने के लिए भी अधिकारियों को निर्देषित किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इसके लिए नियम निर्माण से संबंधित वर्कशॉप आयोजित की जाये। विभागीय मंत्री ने आपदा प्रबंधन कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि वर्षा पूर्व नालों की साफ सफाई करवायी जाये व अतिक्रमण हटाऐं जायें।