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  • प्रकाश चंद्र गुप्ता ने पीएनबी के अफसरों को कैसे ठगा

    प्रकाश चंद्र गुप्ता ने पीएनबी के अफसरों को कैसे ठगा


    भोपाल, 29 अक्टूबर,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).पंजाब नेशनल बैक से बत्तीस लाख रुपयों की ठगी करके दुगुने रुपए वसूल करने वाले ठग प्रकाश चंद्र गुप्ता को बचाने में किस तरह कानून के रखवालों ने ही अपनी भूमिका निभाई इसकी कथा आधुनिक ठगों की कार्यप्रणाली का नमूना बन गई है । इसका अध्ययन अब कानून के विशेषज्ञ भी कर रहे हैं ।कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर कानून की आड़ लेकर गुप्ता ने इस बार केनरा बैंक की मैनेजर को अपना शिकार बनाया है । पंजाब नेशनल बैंक की कथा पढ़कर गुप्ता के आपराधिक चरित्र को आसानी से समझा जा सकता है।

    पंजाब नेशनल बैंक का वो वसूली नोटिस जिसमें प्रकाश चंद्र गुप्ता की रखैल रीना गुप्ता और उसके पिता शंभुदयाल मालवीय की गिरवी रखी संपत्तियों का उल्लेख है.


    भोपाल के मेसर्स बूटकाम सिस्टम्स के प्रोप्राईटर प्रकाश चंद्र गुप्ता ने पंजाब नेशनल बैंक की हबीबगंज शाखा से नकद उधार खाते और ओवरड्राफ्ट के जरिए बत्तीस लाख रुपए का ऋण लिया था। इस लोन को चुकाने से बचने के लिए गुप्ता ने अनेकों हथकंडे अपनाए । वर्ष 2006 में बैंक ने लिए गए लोन की वसूली के लिए जब पत्राचार किया तो गुप्ता ने बैंक में जाकर 15 अप्रैल 2006 को दो लाख रुपए जमा कराए । बैंक की जमा पर्ची भरते समय गुप्ता ने जालसाजी करते हुए ग्राहक की जमा पर्ची पर हेरफेर करते हुए दो लाख को बत्तीस लाख रुपए बना लिया। जिस पर बैंक सील लगा चुका था। बैंक की काऊंटर फाईल में मात्र दो लाख रुपए की इंट्री लिखी गई थी। स्वयं प्रकाश चंद्र गुप्ता ने बैंक की शाखा में जाकर शाखा प्रबंधक सुधीर शर्मा को दो लाख रुपए दिए जिसकी रसीद उन्होंने स्वयं सील लगाकर गुप्ता को दी थी। इसने आपराधिक षड़यंत्र करते हुए दो लाख को अपनी पर्ची पर बत्तीस लाख बना लिया और परची सुरक्षित रख ली। जब बैंक ने बत्तीस लाख रुपयों में से दो लाख रुपए काटकर ब्याज समेत लगभग चालीस लाख रुपयों की वसूली के लिए पत्र लिखा तो गुप्ता अपनी कूटरचित जमा पर्ची दिखाते हुए बैंक के ऊपर दबाब बनाया कि वह बत्तीस लाख रुपए नकद जमा कर चुका है इसलिए उसे नोड्यूज प्रमाण पत्र प्रदान किया जाए। तब बैंक को अपने साथ की गई धोखाघड़ी का पता चला।


    शातिर प्रकाश चंद्र गुप्ता ने अपनी सोची समझी साजिश को अंजाम देने के लिए बैंक अधिकारियों के विरुद्ध झूठी प्राथमिकी दर्ज करवाने पहुंच गया। उसने बैंक के चार अधिकारियों के खिलाफ सिविल रिकवरी प्रकरण भोपाल जिला न्यायालय में दर्ज करवा दिया। इस ठगी को उसने स्थानीय अखबारों के माध्यम से बैंक की घोखाघड़ी बताना शुरु कर दिया। उसने अपनी परची को सही और बैंक की परची को झूठ बताने के लिए निजी हस्तलिपि विशेषज्ञ एच.एस.तोमर का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया । कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बैंक के अधिकारियों को कानून और सजा का डर दिखाना शुरु कर दिया। कुछ भ्रष्ट न्यायिक अधिकारियों और एक कर्मचारी नेता के माध्यम से बैंक अधिकारियों को समझौते के लिए तैयार करना शुरु कर दिया। कुछ भ्रष्ट पुलिस के अधिकारियों ने भी बैंक के लोगों को डराया कि उनके विरुद्ध कई अन्य जांच भी शुरु हो सकती हैं। सभी बैंक अधिकारी रिटायरमेंट की सीमा के करीब पहुंच चुके थे। उन्हें भय था कि यदि उनके विरुद्ध ये प्रकरण लंबे समय तक चलता रहा तो उनका रिटायरमेंट में कई अड़चनें आएंगी।


    अदालती दबावों और पुलिस व प्रकाश गुप्ता की प्रताड़ना से तंग आकर आखिरकार उन्होंने समझौते के लिए अपनी हामी भर दी। इस प्रकरण में अदालत ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को मान्य करते हुए आदेश पारित कर दिया। इस तरह बैंक अधिकारियों ने उस अपराध के प्रति अपने घुटने टेक दिए जो उन्होंने कभी किया ही नहीं था।ये राशि उन्होंने अपनी जेब से चुकाई। इस तरह कानून की खामियों और पुलिस व न्यायपालिका के अधिकारियों की मिलीभगत से प्रकाश गुप्ता अपराध करने में सफल हुआ।

  • हाईकोर्ट को गुमराह करके पास्को आरोपी प्रकाश गुप्ता ने फिर खरीदी जमानत

    हाईकोर्ट को गुमराह करके पास्को आरोपी प्रकाश गुप्ता ने फिर खरीदी जमानत


    भोपाल 28 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। अदालतों को गुमराह करके ठगी के आरोपों से बच निकलने में माहिर बूटकाम सिस्टम्स के प्रकाश चंद गुप्ता को फिलहाल गिरफ्तारी से बच निकलने में सफलता मिल गई है।इसके बावजूद पास्को एक्ट में दर्ज ताजा मामले से उसके ठगी और व्यभिचार के अपराध पूरी तरह उजागर हो गए हैं। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट ने उसका जो जमानत आवेदन मंजूर किया उसमें उसे पुलिस के सामने सरेंडर करने ,पासपोर्ट जमा करने, विदेश भागने से रोकने, पचास हजार रुपए का निजी मुचलका भरने और पुलिस जांच अधिकारी के सामने जांच के लिए हर समय उपलब्ध रहने की शर्त लगाई है। आरोपी की जमानत के लिए उसने वकील मनीष दत्त से जो झूठे तथ्य पेश करवाए उसके आधार पर अदालत को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का निर्देश देने का रास्ता खुल गया है।


    सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कंप्यूटर के कारोबार की आड़ में साहूकारी करके लोगों का धन हड़प जाने के जो मामले अदालतों में लंबित हैं उनमें वह साक्ष्यों को नष्ट करके अब तक बचता रहा है। पुलिस के रिकार्ड में ऐसे सैकड़ों मामले दर्ज हैं जिनमें उसने लोगों को झांसा देकर जमा राशि का चैक वापस ले लिया और फिर पैसा जमा करने वालों के खिलाफ ही कर्ज न लौटाने की शिकायत दर्ज करवा दी। पुलिस के देहाती अपराध रजिस्टर में प्रकाश चंद गुप्ता कुख्यात ठग के रूप में दर्ज है पर कुछ अदालतों को खरीदकर या उन्हें झांसा देकर वह अब तक बचता रहा है। इस बार एक बच्ची ने उसके खिलाफ यौन दुराचार की शिकायत दर्ज कराई है जिसमें गिरफ्तारी से बचने के लिए उसके वकीलों की फौज ने दलील दी कि बच्ची ने आठ सालों बाद शिकायत की है इसलिए उसे जमानत पर रिहा कर दिया जाना चाहिए। जबकि वह बच्ची अभी भी नाबालिग है।


    हमारे न्यायालयीन संवाददाता ने बताया कि अदालत ने आरोपी के वकीलों की ओर से पेश किए गए झूठे तथ्यों को भी स्वीकार कर लिया और उसे सशर्त जमानत दे दी है जबकि पास्को एक्ट में जोड़े गए उपबंधों में इस तरह की जमानत देने का प्रावधान बाधित किया गया है। आपराधिक संशोधन विधेयक 2018 ने धारा 438 में खंड 4 जोड़कर और कानून में अपवाद बनाए गए हैं । उक्त धारा के अनुसार, 16 वर्ष से कम उम्र की महिला के साथ बलात्कार, 12 वर्ष से कम उम्र की महिला के साथ सामूहिक बलात्कार और 16 वर्ष से कम उम्र की महिला के साथ सामूहिक बलात्कार के अपराध के आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती है। 12 वर्ष से कम उम्र की महिला के विरुद्ध अपराध, भारतीय दंड संहिता, 1860 की क्रमशः धारा 376(3), 376 एबी, 376 डीए और 376 डीबी के तहत दंडनीय है।


    आरोपी प्रकाश चंद गुप्ता के विरुद्ध जब स्थानीय अदालत ने गिरफ्तारी के आदेश दिए तो आनन फानन में उसने झूठे दस्तावेज बनाकर पीड़िता के पिता के विरुद्ध ही पैसा हड़प जाने की कहानी गढ़ ली। पुलिस ने तो उसकी ये दलील नहीं सुनी लेकिन हाईकोर्ट में मनीष दत्त की ओर से प्रस्तुत झूठ तब उजागर हो गया जब उन्होंने कहा कि आरोपी ने पीडि़ता की मां को भारी रकम उधार दी है और उसे न लौटाने के लिए पीडि़ता ने उस पर आरोप लगाए हैं। जबकि हकीकत ये है कि पीडि़ता के परिवार से करीबी बढ़ाने के लिए आरोपी गुप्ता ने उनके पिता से लाखों रुपए ब्याज पर उधार लिए थे जिन्हें वो कथित तौर पर गड़प गया है।


    बताते हैं कि मनीष दत्त ने आरोपी के बचाव में एक और झूठी दलील दी कि आरोपी के पिता ने एक और व्यक्ति के विरुद्ध पहले व्यभिचार की शिकायत की थी जबकि ऐसा कोई मामला कभी कहीं दर्ज नहीं हुआ है।जबकि आरोपी ने जिन सैकड़ों लोगों की जमा राशि गड़प की है उसके मुकदमे भोपाल की जिला अदालत और दिल्ली, इंदौर, कलकत्ता की अदालतों में चल रहे हैं। आरोपी संभ्रांत व्यक्ति नहीं है और आईपीसी की धारा 438 के तहत जमानत पाने के लाभ का हकदार नहीं है क्योंकि उसके विरुद्ध वर्तमान में 4 करोड़ 27 लाख रुपए की धोखाधड़ी का एक मामला तो विक्रमादित्य सिंह पुत्र श्री राजेन्द्र सिंह की ओर से चलाया जा रहा है। इस मामले में वह जेल जा चुका है और जमानत पर रिहा है। उसके खिलाफ धारा 354 के अंतर्गत एक और महिला के ऊपर अश्लील तरीके से हमला करने का प्रकरण दर्ज हुआ था जिसमें उसने समझौता कर लिया था ।अदालत की भाषा में समझौता होना अपराध होने से बरी होना नहीं होता है।

    एक अन्य केस इसकी दुकान में कार्य करने वाली एक लड़की के साथ अवैध संबंध होने पर लड़की के गर्भवती हो जाने पर बलात्कार और अन्य धाराओं में दर्ज कराए गए थे। इस प्रकरण में भी प्रकाश गुप्ता ने अवैध रूप से समझौता करके लड़की के परिजनों को झांसा दिया कि मैं शादी कर लूंगा । कानून की निगाह में बलात्कार का आरोप भी समझौता होने के बावजूद बरी होना नहीं माना जाता। हिंदू विवाह अधिनिमय में दो विवाह की अनुमति भी नहीं है।


    पुलिस के सूत्र बताते हैं कि प्रकाश गुप्ता जिन व्यक्तियों से जमा राशि लेकर उनसे ठगी करता रहा है उनकी मूल रकम लौटाने से इंकार करने के लिए वह उनके नकली हस्ताक्षर बना लेता है और अदालत में जाली दस्तावेज पेश करता रहा है। अदालतें उसकी ओर से प्रस्तुत तथ्यों को क्यों स्वीकार कर लेती हैं ये भी जांच का विषय है। फर्जी दस्तावेज बनाकर वह ये सिद्ध करने की कोशिश करता है कि उसे विरोधी पक्षकार से पैसे लेने हैं। देने नहीं हैं। ये इसके अपराध करने का तरीका है।

  • लेडी किलर ठग प्रकाश चंद गुप्ता का आडियो वायरल

    लेडी किलर ठग प्रकाश चंद गुप्ता का आडियो वायरल


    भोपाल,26 जुलाई,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पास्को एक्ट में लगभग एक महीने की फरारी के बाद हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के साथ ही बूटकाम सिस्टम्स (Bootcom Systems) का प्रकाश चंद गुप्ता (Prakash Chand Gupta) अब एक और आडियो वायरल होने से चर्चाओं में आ गया है। ये आडियो उसके आकर्षक ब्याज के झांसे में लाखों रुपए गंवा चुकी एक महिला के करीबी ने रिकार्ड किया था। हाईकोर्ट ने पासपोर्ट जब्त करने के साथ उसे पुलिस थाने में हाजिरी की शर्त पर जमानत दी है।
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फरारी के दौरान न केवल उसका कंप्यूटर कारोबार चलता रहा बल्कि उसका साहूकारी का धंधा भी बदस्तूर जारी था। इस कारोबार के सहारे ही वह लोगों का करोड़ों रुपया ब्याज पर लेकर कुछ बड़े व्यापारियों तक पहुंचाता है जो बैंकों के अरबों रुपये ब्याज पर लिए हुए हैं। इसी रकम उन कारोबारियों ने कर्ज पर चला रखा है। बैंक की किस्तें भरने के लिए वे बाजार का पैसा लेकर गड़प जाते हैं। इसी कड़ी में प्रकाश चंद गुप्ता भी कई जगह फ्रंट फेस तो कई जगह बैक कड़ी के रूप में काम करता है। हवाला के कारोबार से ये रकम शहर के विभिन्न इलाकों तक पहुंचाई जाती है।
    पिछले दिनों न्यायालय परिसर में नौकरी करने वाली ऐसी ही महिला ने अपनी रकम का ब्याज और मूलधन वापस मांगा तो गुप्ता ने उन्हें गालियां देकर दूकान से बाहर निकाल दिया। उसने महिला को विश्वास में लेकर पहले ही मूल चैक वापस ले लिया था और उसे फाड़ दिया था जबकि चैक की फोटो कापी महिला के पास है। उसने अपने दस्तावेजों के आधार पर पुलिस और अदालत में ठगी की शिकायत की है जो वाद अभी लंबित है।
    महिला और प्रकाश गुप्ता के बीच लेनदेन को लेकर जो झड़प हुई उसकी आडियो क्लिप हमारे पास मौजूद है। वार्तालाप में कुछ अश्लील गालियां भी मौजूद हैं जिन्हें मामले की गंभीरता को समझने के लिए सुनना जरूरी है। इसी के चलते हम अनकट आडियो आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। कृपया प्रकाश गुप्ता की असलियत को समझने के लिए इसे सुनें और गालियों को नजरंदाज करें। ये आडियो हमें फरियादी अभिलाषा राहते की ओर से उपलब्ध कराया गया है, प्रेस इंफार्मेशन सेंटर इस आडियो की सत्यता की कोई गारंटी नहीं लेता है।

  • कानून माफिया की शह से खूब चला ठगी का कंप्यूटर

    कानून माफिया की शह से खूब चला ठगी का कंप्यूटर


    बूटकॉम सिस्टम्स के प्रकाश गुप्ता पर देश भर के व्यापारियों ने दर्ज कराए अमानत में खयानत के केस


    भोपाल,25 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। यूपी के लालगंज से आकर राजधानी में कंप्यूटर का कारोबार चलाने वाले प्रकाशचंद गुप्ता ने ठगी और लूट के लिए कानून की पेचीदगियों को अपना हथियार बना रखा है। पिछले तीस सालों में उसने हजारों लोगों के साथ धोखाघड़ी और ठगी की है लेकिन हर बार वह कानून की पकड़ से बचता रहा है। लूट के धन को उसने इस्कान फाऊंडेशन और राजधानी के एक बड़े माफिया समूह में निवेश कर दिया है। कई इमारतें और फार्महाऊस खरीदकर उसने अपनी स्थायी आय का इंतजाम किया है। कंप्यूटर की दूकान तो महज आय दिखाने और टर्नओवर बढ़ाने के लिए खोल ऱखी है। अपना बढ़ा कारोबार दिखाने के लिए वह दूसरे व्यापारियों का माल लेकर सस्ते में बेच देता है और उन व्यापारियों का धन गड़प लेता है। राजधानी में ही उसके विरुद्ध ढेरों केस लंबित पड़े हैं। वह हर मुकदमे को अदालत तक पहुंचने की राह सरल करता है फिर दांवपेंच और कुछ जजों से सांठगांठ करके बच निकलता है।

    प्रकाश चंद्र गुप्ताः चरित्रहीनता, धोखाधड़ी और चालबाजियों ने कारोबारी परंपराओं को तार तार किया.


    राजधानी की पुलिस बरसों से इस ठग की चालबाजियों के सामने लाचार है। कभी भ्रष्ट पुलिस अफसर उसके लिए ढाल बन जाते हैं तो कभी भ्रष्ट न्यायाधीश उसके अपराधों के अभिभावक बन जाते हैं। शहर के एक नामी गिरामी वकील तो उसके अघोषित पार्टनर बनकर करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। उसने एक रखैल रख छोड़ी है जिससे उसके एक बेटी है। एक बेटी पहली शादी से है। इन दोनों परिवारों की शान शौकत के लिए वह करोड़ों रुपए खर्च करता है। सोने के जेवर और विलासिता की वस्तुएं तो वह ऐसे खरीदता है जैसे किसी रियासत का महाराजा हो। जजों और अफसरों को सप्लाई की जाने वाली लड़कियों को वह स्कूटर और कारें गिफ्ट में देता है। अपना धन मांगने वालों को डराने के लिए उसने कई बंदूकें और तलवारें ले रखी हैं। रौब जमाने के लिए वह पुलिस अफसरों के साथ शूटिंग अकादमी में शामिल होता है। जजों और पुलिस अफसरों को रिश्वत देने के लिए उसने उनका पैसा ब्याज पर चलाने के नाम पर खासा निवेश कर रखा है। यही पुलिस अफसर जनता से लूट में उसके सहयोगी बनते रहते हैं।
    प्रकाश चंद गुप्ता ने पिछले तीन दशकों में हजारों नागरिकों से ठगी और धोखाघड़ी की है। अपनी दूकान बूट काम सिस्टम पर वह कई बार ग्राहकों को असली कीमत से कम दाम पर कंप्यूटर बेच देता है और कई बार तीस हजार का कंप्यूटर डेढ़ लाख में भी बेच देता है।ग्राहक की अज्ञानता का लाभ लेकर वह लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम कारोबार चला रहा है। यदि कोई जांच एजेंसी का अफसर या सिपाही उसकी दूकान पर जाकर छानबीन करने की कोशिश करे तो वह झग़ड़ा करने पर उतारू हो जाता है और अपने टुकड़खोर पुलिस वालों के माध्यम से उसे गालियां पड़वाता है। उसके चंगुल में फंसे व्यापारी यदि उसे माफ कर दें और दुबारा धंधा करने पर राजी हो जाएं तब भी वह उन्हें दुबारा ठगने से नहीं चूकता।

    अयोध्यानगर पुलिस थानाः समाज से गद्दारी को सलाखों के पीछे पहुंचाने का साहस


    बड़े व्यापारियों और निवेशकों को ठगने के लिए वह उनसे पारिवारिक संबंध बढ़ाता है और घर की महिलाओं को गिफ्ट देकर अपने पक्ष में खड़ा कर लेता है। बाद में जब उनके परिवार से बड़ी रकम लेकर ठगी की बात सामने आती है तो इन्हीं महिलाओं को लालच देकर वह अपना मुखबिर बना लेता है। बड़े धन्नासेठों पर अड़ी बाजी और उन पर झूठे मुकदमे दर्ज कराकर ठगने के लिए वह वकीलों और भ्रष्ट जजों का सहारा लेता है। जब किसी मुकदमे की वजह से उसे जेल यात्रा करनी पड़े तो उसकी खबर अखबारों में न छप सके इसके लिए वह मोटी रकम खर्च करता है। उसके गिरोह में कई ऐसे पत्रकार भी शामिल हैं जो सही खबर छापने वाले पत्रकारों के विरुद्ध ही दुष्प्रचार करने में जुट जाते हैं। इसके बावजूद उसकी ठगी और धोखाधड़ी के कई मुकदमे आज भी अदालतों में विचाराधीन है।
    कई बैंकों मैनेजरों से सांठ गांठ करके उसने करोड़ों रुपए हासिल किए हैं। इन बैंकों से मुकदमा जीतने में और मुआवजा पाने में वकीलों और भ्रष्ट जज उसके सलाहकार होते हैं। वे साक्ष्य बनवाते हैं और अदालती प्रक्रिया पूरी करके उसे मोटी रकम दिलवाते हैं। इसी राशि का बड़ा हिस्सा जजों और वकीलों में भी बंटता है। इस विषय पर आरोप लगाने वालों को धमकाने के लिए अवमानना कानून का सहारा लिया जाता है।
    उससे पीड़ित लोगों में कलकत्ता , मुंबई , दिल्ली ,इंदौर, भोपाल और कई थोक व्यापारी भी शामिल हैं।अफसरों औंर न्यायाधीशों की तो बड़ी फेरहिस्त है।कई अफसरों और न्यायाधीशों को तो इसके चंगुल में फंसकर अपनी नौकरियां भी गंवानी पड़ी हैं।कुख्यात अपराधी मुख्तयार मलिक ने जब एक जज राजीव भटजीवाले की रकम गड़प जाने की वजह से इसे धमकाया तो इसने पुलिस अफसरों और न्यायाधीशों की मदद से उसके एनकाऊंटर का आदेश तक करवा दिया था।


    प्रकाश चंद गुप्ता से पीड़ित व्यापारियों में सवेरा इंडिया प्राईवेट लिमिटेड के चौबीस मुकदमे मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कलकत्ता के समक्ष विचाराधीन हैं। स्काईलाईन सिस्टम्स इंदौर ,बाईट पेरी फेरल्स इंदौर, हस्ती कंप्यूटर्स इंदौर, सेन्ट्रोनिक्स इंदौर, शर्ललाईन सिस्टम्स इंदौर, मित्तल इंफोटेक इंदौर, आई प्लांट इंदौर, एमीट्रान डिजिटेक इंदौर, विनायक इंफोटेक इंदौर, डीबी इंफोटेक इंदौर, लेटेस्ट डिवाईस प्राईवेट लिमिटेड भोपाल, दीप कंप्यूटर्स भोपाल, सेज विश्वविद्यालय भोपाल, शिवांकरी सिंह, रंजना सिंह, छोटी बाई, डब्ल्यूपीजी सीएंडसी कंप्यूटर्स एंड पेरीफेरल्स इंडिया प्राईवेट लिमिटेड दिल्ली, सवेरा डिजिटल इंडिया प्राईवेट लिमिटेड कोलकाता, राज्य सरकार, संदीप जैन माईक्रोलैंड कंप्यूटर्स जबलपुर, विक्रमादित्य सिंह, अभिलाषा राहते, समेत कई अन्य व्यापारियों के मुकदमे भी अदालतों में विचाराधीन हैं। इसके अलावा प्रकाश गुप्ता ने फाईनेंस फर्म भी पंजीकृत करा रखी है जिस पर उसने सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपए ऊंचा ब्याज देने के नाम पर ले रखे हैं। उन्हें उसने ब्याज देना बंद कर रखा है। कई लोगों के तो मूल चैक बापस ले लिए हैं और वे अपनी रकम पाने के लिए दर दर की ठोकरें खा रहे हैं। पक्की लिखा पढी न होने से तो वह सैकड़ों लोगों की रकम गड़प कर चुका है। हुंडी कारोबार के कई अगड़िए इसके गोपनीय अड्डे पर व्यापारियों का करोड़ों रुपया पहुंचाते हैं जिसे गड़प करने के लिए इसने विभिन्न तरीके अपना रखे हैं।लोगों को झांसा देने के लिए उसने कई नोटरियों, वकीलों, पत्रकारों,जजों,पुलिस अफसरों को अपने जाल में फंसा रखा है। अवैध हथियारों की तस्करी हो या फिर नशे का गोरखधंधा सभी कारोबारों में उसकी हिस्सेदारी है। वह कई बार बड़बोले पन में कहता है कि बूचड़खानों से जुड़े अपराधियों की मदद से वह अधिक दबाव डालने वाले लोगों की हत्याएं भी करवा देता है। राजधानी पुलिस के सामने यह सफेद कालर अपराधी अब एक अनसुलझी पहेली बन गया है। हाल ही में एक बालिका पर यौन हमले के आरोप में इस पर पास्को एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। यदि अदालतों, पुलिस और राजनीति में जड़े जमाए अपराधियों का संरक्षण नहीं मिल सका तो इस बार प्रकाश गुप्ता की लंका राख हो सकती है।