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  • वंचितों का उपचार सेवा भावना से करें बोले महामहिम

    वंचितों का उपचार सेवा भावना से करें बोले महामहिम


    भोपाल, 5 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने चिकित्सकों से आग्रह किया है कि वे सेवा भावना के साथ गरीब और वंचित वर्गों का उपचार करें। माह में कम से कम एक बार ग्रामीण, दूरस्थ अंचलों और वंचित बस्तियों में नि:शुल्क चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करें। मनोचिकित्सक का उपचार व्यक्ति को उसके रिश्तों, कैरियर और जीवन के विभिन्न आयामों में सुधार कर उसे खुशहाल जिन्दगी देता है। उन्होंने अपेक्षा की कि संगोष्ठी मनोरोग के पीड़ित गरीब और वंचित वर्गों की सेवा भावना के साथ मदद और उपचार पथ के प्रदर्शन में सफल होगी। श्री पटेल आज नेशनल यंग सायक्याट्रिस्ट द्वारा “हैश टैग मेंटल हेल्थ” पर आयोजित दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।

    राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि राष्ट्र और समाज की गतिविधियों का सुचारू संचालन नागरिकों की शारीरिक, मानसिक क्षमताओं के साथ सामाजिकता की सम्पूर्ण स्थिति में स्वस्थ होने पर निर्भर करता है। आज समाज के सभी क्षेत्रों और वर्गों में आत्महत्या की घटनाएँ निरंतर सुनाई दे रही है। यह तेजी से उभर रहे मानसिक स्वास्थ्य संकट का संकेत है। भारत सरकार द्वारा मानसिक रोगियों की गरिमा के साथ जीवन जीने के अधिकारों को सुनिश्चित करने, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति, मानसिक स्वास्थ्य देख भाल अधिनियम 2017 और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत उपचार, पुनर्वास और मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन के कार्य किए जा रहे हैं। सरकार के प्रयासों को प्रभावी बनाने के लिए मानसिक स्वास्थ्य के सम्बन्ध में जन-जागरूकता और प्राथमिक देख-भाल में सामुदायिक सहभागिता के साथ प्रयास किए जाने चाहिए। राज्यपाल ने संगठन के सभी सदस्यों से कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल, आंगनवाड़ी, पंचायत पदाधिकारियों, पुलिस एवं अन्य ग्राम स्तरीय कर्मचारियों, शिक्षित व्यक्तियों के संवेदीकरण के प्रयासों में आगे आएं। संगोष्ठी में आयुष एवं अन्य चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों की सहभागिता से रोग चिन्हांकन, प्राथमिक देखभाल प्रयासों की संभावनाओं की तलाश करें। उन्होंने समाज में मनोरोगों की रोकथाम और उपचार प्रयासों के लिए मनोचिकित्सकों के वैचारिक विमर्श को सराहनीय और समय की आवश्यकता बताया है।

    विशिष्ट अतिथि पद्मश्री डॉ. बी.एन. गंगाधर ने कहा कि मनोचिकित्सा के क्षेत्र में पूर्व की तुलना में आशावादी और बेहतर भविष्य का परिदृश्य बन रहा है। मनोचिकित्सा के विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की संख्या में करीब 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। समाज में प्रचलित भ्रांतियों में कमी हुई है। मनोरोगों की उपचार पद्धति में योग जैसी पारंपरिक पद्धतियों के सम्मेलन से उपचार प्रबंधन बेहतर हुआ है। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी मनोरोगी के उपचार की व्यक्ति परक उपचार प्रणाली के विकास के पथ के प्रदर्शन का मंच बनें।

    इंडियन सायक्याट्रिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने कहा कि डिजिटल क्रांति ने जीवन के सभी क्षेत्रों में आमूलचूल परिवर्तन किए हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल टेक्नोलॉजी विकास के सहचर हो सकते है, मार्गदर्शक कभी नहीं बन सकते। जरूरी यह है कि तकनीक का पूर्ण चेतना के साथ उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि सोसाइटी द्वारा संस्था गठन के 75वें वर्ष में युवा शक्तियों को उद्बोधित करने के लिए पहल की गई है। संगोष्ठी युवा चिकित्सकों को शिक्षित और दीक्षित करेगी।

    आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. आर.एन साहू ने बताया कि संगोष्ठी में मनोचिकित्सा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक की संभावनाओं, सीमाओं और चुनौतियों पर चिंतन किया जाएगा। आत्महत्या, नशाखोरी जैसी समस्याओं के समाधान के प्रयासों पर शिक्षकों, अनुभवी चिकित्सकों और युवा चिकित्सकों का संवाद मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती में नए उत्साह और ऊर्जा का संचार करेगा।

    आयोजन समिति सचिव डॉ. समीक्षा साहू ने धन्यवाद ज्ञापन में बताया कि संगोष्ठी से अनुभवी चिकित्सकों और युवा चिकित्सकों को संवाद का मंच प्रदान करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने संगठन के प्रतिनिधि के रूप में माह में एक बार गरीब और वंचित वर्ग को नि:शुल्क चिकित्सकीय सेवाएँ प्रदान करने का आश्वासन दिया। प्रारंभ में अतिथियों का पुष्प-गुच्छ से स्वागत कर स्मृति-चिन्ह भेंट किये गये।

  • वनोपज संग्राहकों को शोषण से बचाएगा पेसा एक्टःराज्यपाल मंगूभाई पटेल

    वनोपज संग्राहकों को शोषण से बचाएगा पेसा एक्टःराज्यपाल मंगूभाई पटेल

    भोपाल,27 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि मध्यप्रदेश में लघु वनोपजों का संग्रहण एवं विक्रय दूरस्थ अंचलों में रहने वाले ग्रामीणों के लिये आजीविका का एक मुख्य साधन है। प्रदेश में लगभग 15 लाख परिवारों के 37 लाख सदस्य लघु वनोपज संग्रहण कार्य से जुड़े हैं, जिनमें 50 प्रतिशत से अधिक सदस्य जनजातीय वर्ग के हैं। इन लघु वनोपज संग्राहकों को बिचौलियों के शोषण से बचाने के लिए राज्य सरकार ने पेसा एक्ट लागू किया है। संग्रहीत लघु वनोपज का उचित लाभ दिलाने के उद्देश्य से प्रदेश में लघु वनोपज का संग्रहण एवं व्यापार अब ग्राम-सभा के माध्यम से किया जायेगा। राज्यपाल आज लाल परेड मैदान पर अंतर्राष्ट्रीय वन मेले के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
    राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीयकृत वनोपज के संग्रहण का वनवासियों एवं ग्रामीणों को उचित पारिश्रमिक दिलाने के लिये लघु वनोपज संघ कार्यशील है। संघ अपनी 1066 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों और 60 जिला वनोपज सहकारी यूनियनों के माध्यम से लघु वनोपज संग्रहण कार्य, रोजगार सुलभ कराने के साथ ही औषधीय और सुगंधित पौधों के प्र-संस्करण, भंडारण एवं विपणन का कार्य भी सफलता से कर रहा है। राज्यपाल ने कहा कि संघ द्वारा वनोपज विक्रय का लाभांश भी संग्राहकों को वितरित किया जा रहा है। इन गतिविधियों से जनजातीय भाइयों एवं बहनों को आत्म-निर्भर एवं सशक्त बनाने के प्रयास प्रशंसनीय हैं। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्रहण तथा अन्य लघु वनोपज संग्रहण कार्य में संलग्न अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य कमजोर वर्ग के ग्रामीणों का आर्थिक सुदृढ़ीकरण हो रहा है।
    राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि लघु वनोपज संघ द्वारा संचालित गतिविधियों के प्रचार-प्रसार, सुदूर वनांचलों में निवासरत जनजाति की लघु वनोपजों और प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति इत्यादि को पहचान दिलाने और मंच प्रदान करने के उद्देश्य से वन मेले का आयोजन प्रशंसनीय है।
    राज्यपाल श्री पटेल ने अगले वर्ष अंतर्राष्ट्रीय वन मेले में दोगुने लक्ष्य की प्राप्ति के लिये प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय एवं वैद्यों के परंपरागत औषधीय ज्ञान के प्रमाणीकरण एवं औपचारिक लाइसेंस की व्यवस्था के लिये प्रयास तेजी से करने की आवश्यकता है। इसके पहले राज्यपाल ने वन मेले के स्टॉलों का अवलोकन और मेले पर केन्द्रित स्मारिका का विमोचन किया।
    वन मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि इस वर्ष वन मेले में 2 लाख 50 हज़ार नागरिकों की उपस्थिति रही। लगभग 3 करोड़ रूपए के वनोपज उत्पादों का विक्रय हुआ। मेले में 28 करोड़ मूल्य के एमओयू साइन किये गये, जो विगत वर्ष से दो-गुने हैं। क्रेता-विक्रेता संवाद से बिचौलियों को हटाने का प्रयास किया गया ताकि वनोपज़ संग्राहक सीधे बड़े संस्थानों से जुड़े एवं उन्हें उत्पाद के बेहतर मूल्य प्राप्त हों। मंत्री डॉ. शाह ने आगामी दिवसों में किए जाने वाले कार्यों विशेषकर महुआ से च्यवनप्राश, चाकलेट आदि उत्पाद बनाये जाने की भी जानकारी दी।
    मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि इंदौर में फरवरी-मार्च 2023 में वन मेला लगवाया जायेगा। उन्होंने भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय वन मेले के सूत्रधार सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री व्ही.आर. खरे और श्री दवे का विशेष रूप से आभार माना। अपर मुख्य सचिव वन एवं प्रशासक मप्र लघु वनोपज संघ श्री जे.एन. कंसोटिया ने लघु वनोपज संघ द्वारा आगामी दिवसों में किए जाने वाले हितग्राहीमूलक कार्यों की जानकारी दी। प्रबंध संचालक लघु वनोपज संघ श्री पुष्कर सिंह ने वन मेले की उपलब्धियों और संचालित गतिविधियों की जानकारी दी। पीसीसीएफ़-सह-वन बल प्रमुख श्री रमेश कुमार गुप्ता सहित वन विभाग एवं लघु वनोपज संघ के अधिकारी, कर्मचारी और वनोपज विक्रेता उपस्थित थे। अपर प्रबंध संचालक श्री भागवत सिंह ने आभार माना।

    वन मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कहा है कि प्रदेश में संचालित विभिन्न जिला यूनियन, निजी संस्थाओं और वन धन केन्द्रों ने अंतर्राष्ट्रीय वन मेले में प्रशंसनीय कार्य किया है। इसके लिए वे बधाई के पात्र है। वन मंत्री लाल परेड ग्राउंड पर मेले के समापन कार्यक्रम में पुरस्कार वितरित कर रहे थे।



    वन मंत्री ने प्रदर्शनी के क्षेत्र में एम.पी.एम.एफ.पी. पार्क भोपाल को प्रथम, सामाजिक वानिकी को द्वितीय और म.प्र. मत्स्य महासंघ को तृतीय पुरस्कार स्वरूप शील्ड प्रदान की। प्रधानमंत्री वन धन योजना में पूर्व छिंदवाड़ा वन धन केन्द्र को प्रथम, पूर्व मण्डला वन धन को द्वितीय, उत्तर सिवनी वन धन केन्द्र को तृतीय एवं दक्षिण पन्ना वन धन केन्द्र और उमरिया वन धन केन्द्र को सांत्वना पुरस्कार से पुरस्कृत किया। प्रदेश में संचालित विभिन्न जिला यूनियनों में से सीहोर जिला यूनियन को प्रथम, औब्दुलागंज यूनियन को द्वितीय, पश्चिम बैतूल जिला यूनियन को तृतीय और गुना एवं छतरपुर यूनियन को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।
    वन मंत्री डॉ. शाह ने मेले में शामिल हुई निजी संस्थाओं में से विशाल जवारिया, पचमढ़ी प्रथम, त्रिशटा टी को द्वितीय और आदिवासी आयुर्वेदिक पचमढ़ी को तृतीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया। अन्य राज्यों की संस्थाओं में छत्तीसगढ़ राज्य (लघु वनोपज) को प्रथम, दीपू मिश्रा प्रतापगढ़ को द्वितीय, सुखदेव समत मेदनीपुर को तृतीय पुरस्कार से नवाजा गया। अंतर्राष्ट्रीय स्टॉलों की श्रेणी में नेपाल को पुरस्कृत किया गया। राज्य बाँस मिशन एवं विन्ध्य हर्बल को विशेष पुरस्कार से नवाजा गया।
    शहद संग्रहण में सामुदायिक प्रयास के लिए पश्चिम बैतूल की नांदा समिति को विशेष सम्मान, नर्मदापुरम वन मण्डल में स्थापित वन धन विकास केन्द्र को महुआ का ब्रिटेन में सफल निर्यात करने और छिन्दवाड़ा के मैनावाड़ी वन धन केन्द्र के अंतर्गत “वनभोज रसोई” को सफल सामुदायिक उपक्रम के विशेष सम्मान से नवाजा गया।
    अपर मुख्य सचिव वन श्री जे.एन. कंसोटिया, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री आर.के. गुप्ता, राज्य लघु वनोपज संघ के एम.डी. श्री पुष्कर सिंह सहित वन विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद थे।

  • हाईब्रिड शिक्षा में सफल पीढ़ी बनाने की अपार संभावनाएं : राज्यपाल श्री पटेल

    हाईब्रिड शिक्षा में सफल पीढ़ी बनाने की अपार संभावनाएं : राज्यपाल श्री पटेल

    भोपाल 18 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि हाईब्रिड शिक्षा में व्यक्ति और क्षेत्रपरक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उसके विस्तार की असीम संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा है कि ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफॉर्म और संस्था में शिक्षा के समन्वित स्वरूप हाईब्रिड शिक्षा के नए आयामों के बेहतर उपयोग पर विचार करना ज़रूरी है। श्री पटेल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के विद्यालयों के संगठन सहोदय के 27वें दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन के समापन समारोह को आभासी माध्यम से आज राजभवन में संबोधित कर रहे थे।
    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि पिछले दो सालों के दौरान कोरोना ने हमारे जीवन जीने का ढंग बदल दिया है। पढ़ाई-लिखाई से लेकर काम के तरीके और मनोरंजन के साधन सब बदल गए हैं। हाईब्रिड शिक्षा आपदा से मिला अवसर है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण पहुँचविहीन क्षेत्रों के वंचित वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने की चुनौतियों के समाधान हाईब्रिड शिक्षा में खोजे जाने चाहिए। वंचित वर्गों और क्षेत्रों के छात्रों के लिए वर्चुअल रियलिटी के द्वारा शिक्षण की व्यवस्था की पहल की जानी चाहिए। वंचित वर्गों को शिक्षा के नए अवसर दिलाने और निवेश बढ़ाने के प्रयास भी जरूरी हैं।
    राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के द्वारा भारतीय सनातन संस्कृति की मूल भावनाओं और 21वीं सदी की जरूरतों के लिए उपयुक्त भावी पीढ़ी के निर्माण का अवसर दिया है। वैश्विक परिदृश्य में रोजगार की संभावनाओं के दृष्टिगत शिक्षा में कौशल उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया जाना समय की मांग है। छात्र-छात्राओं में देश के वृहत्तर आर्थिक संदर्भों और वैश्विक अर्थ-व्यवस्था की समझ विकसित करना जरूरी है। पाठ्यक्रमों में सामाजिक व्यवहार और नेतृत्व क्षमता संबंधी कौशल को भी शिक्षा का अंग बनाया जाना आवश्यक है। पाठ्यक्रम में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विषय-सामग्री को शामिल किया जाए जो विद्यार्थियों को हमारी गौरवशाली संस्कृति की विविधता में एकता को देखने का समग्र नजरिया प्रदान करें।
    कांफ्रेंस के प्रारम्भ में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन श्री मनोज आहूजा ने स्वागत उद्बोधन दिया। बोर्ड के डायरेक्टर एकेडमिक श्री जोसेफ एमानुअल ने आभार माना।

  • राज्यपाल पहुंचे पुलिस के पचमढ़ी शिविर

    राज्यपाल पहुंचे पुलिस के पचमढ़ी शिविर

    भोपाल, 10 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मध्यप्रदेश के राज्यपाल महामहिम मंगुभाई पटेल ने शनिवार 09
    अक्टूबर को पुलिस प्रशिक्षण शाला पचमदी का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान महामहिम ने
    प्रशिक्षण शाला में प्रशिक्षणरत नव आरक्षकों के हथियार प्रशिक्षण की गतिविधियों का अवलोकन
    किया। साथ ही नव आरक्षकों की आवास व्यवस्था,भोजन व्यवस्था, विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षणों
    के लिए परिसर में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया।

    पुलिस प्रशिक्षण शाला परिसर स्थित ब्रिटिशकालीन भवनों तथा प्रशिक्षण शाला परिसर के विस्तार के संबंध में भी जानकारी ली। इस अवसर पर होशंगाबाद जोन की पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती दीपिका सूरी एवं पुलिस प्रशिक्षण
    शाला की पुलिस अधीक्षक श्रीमती निमिषा पाण्डेय ने महामहिम राज्यपाल महोदय को नव
    आरक्षकों के वर्ष भर चलने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

    श्रीमती निमिषा पाण्डेय ने बताया कि पुलिस प्रशिक्षण शाला पचमदी वर्ष 1960 में जबलपुर से
    स्थानांतरित कर पचमढ़ी लाई गई जिसमें वर्तमान में 72वें बैच के 126 नव आरक्षक प्रशिक्षणरत
    हैं। प्रशिक्षण कार्य में संलग्न स्टॉफ एवं उनके आवास और कल्याण संबंधी जानकारी भी दी गई।
    इस अवसर पर राज्यपाल महोदय द्वारा परिसर में स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित
    कर शहीदों को श्रद्धांजली दी। साथ ही परिसर में वृक्षारोपण भी किया। राज्यपाल महोदय ने नव
    आरक्षकों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण करने हेतु अग्रिम बधाई दी।