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  • ट्विशा शर्मा मौत की जांच से चकराई सीबीआई

    ट्विशा शर्मा मौत की जांच से चकराई सीबीआई

    भोपाल,23 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).राजधानी के कटारा हिल्स स्थित एक प्रतिष्ठित परिवार में विवाह के कुछ ही महीनों बाद 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। नोएडा निवासी ट्विशा का शव 12 मई को उनके ससुराल में फंदे से लटका मिला था। प्रारंभिक तौर पर इसे आत्महत्या का मामला बताया गया, लेकिन परिजनों ने शुरुआत से ही हत्या, दहेज प्रताड़ना और साक्ष्य मिटाने के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। मामला इतना संवेदनशील हो गया कि अंततः इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपनी पड़ी।

    ट्विशा का विवाह दिसंबर 2025 में भोपाल के अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुआ था। समर्थ सिंह एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के पुत्र हैं। मृतका के परिवार का आरोप है कि विवाह के बाद से ही ट्विशा मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का शिकार थीं। परिवार का दावा है कि वह भोपाल छोड़कर वापस नोएडा आना चाहती थीं और अपनी परेशानियों का उल्लेख कई बार मित्रों तथा परिजनों से कर चुकी थीं। घटना से एक दिन पहले अपनी एक मित्र को भेजे गए संदेश में ट्विशा ने लिखा था कि वह “फंस गई हैं” और खुलकर बात नहीं कर सकतीं। इस संदेश ने मामले को और अधिक रहस्यमय बना दिया।

    मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब ट्विशा के परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया और दोबारा पोस्टमार्टम की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया। परिवार का आरोप था कि प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से उन्हें संतोष नहीं मिला। उन्होंने शव को सुरक्षित रखने, एम्स दिल्ली में पुनः परीक्षण कराने और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

    जांच के दौरान दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा, कथित गर्भपात के लिए दबाव, आर्थिक लेन-देन और वैवाहिक विवाद जैसे कई पहलू सामने आए। कुछ रिपोर्टों में शेयर निवेश और लाखों रुपये के वित्तीय विवाद की भी चर्चा हुई है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच एजेंसियों द्वारा अभी नहीं की गई है और इन्हें जांच का हिस्सा माना जा रहा है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने भी संज्ञान लिया। बाद में सीबीआई ने भोपाल पुलिस से जांच अपने हाथ में लेकर प्रकरण पुनः दर्ज किया। सीबीआई की विशेष टीम ने घटनास्थल का पुनर्निर्माण, डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण, मोबाइल रिकॉर्ड, अंतिम बातचीत और घटनाक्रम की विस्तृत पड़ताल शुरू की। जांच एजेंसी आधुनिक तकनीकों की सहायता से ट्विशा के अंतिम घंटों की परिस्थितियों को समझने का प्रयास कर रही है।

    इसी बीच ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह, जांच एजेंसियों के घेरे में आए। दोनों से विस्तृत पूछताछ की गई और न्यायालय ने उनकी हिरासत एवं न्यायिक रिमांड संबंधी आदेश भी जारी किए। हाल ही में अदालत ने उनकी न्यायिक रिमांड 30 जून तक बढ़ा दी है, जबकि जांच एजेंसियां दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों का इंतजार कर रही हैं।

    ट्विशा शर्मा की मौत ने केवल एक परिवार की त्रासदी को सामने नहीं रखा, बल्कि दहेज प्रताड़ना, वैवाहिक हिंसा, महिलाओं की सुरक्षा और प्रभावशाली परिवारों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच जैसे मुद्दों को भी राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। क्या यह आत्महत्या थी, आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला था या फिर कोई सुनियोजित साजिश? इस प्रश्न का उत्तर अब सीबीआई जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा।

    फिलहाल पूरे देश की निगाहें इस बहुचर्चित मामले पर टिकी हैं, जहां एक युवा महिला की असमय मृत्यु ने न्याय व्यवस्था, पुलिस जांच और सामाजिक मूल्यों से जुड़े कई कठिन प्रश्न खड़े कर दिए हैं।