भोपाल,16 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। 10वां अंतर्राष्ट्रीय वन मेला 17 से 23 दिसंबर तक लाल परेड मैदान में आयोजित होने जा रहा है। मेले का उद्घाटन शाम पांच बजे राज्यपाल मंगूभाई पटेल करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे, विशिष्ट अतिथि के रूप में वन एवं पर्यावरण, राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार भी उपस्थित रहेंगे। मंत्री दिलीप अहिरवार ने आज एक भीड़ भरी पत्रकार वार्ता में बताया कि मेले की थीम ‘लघु वनोपज से महिला सशक्तिकरण’ रखी गई है। लघु वनोपजों के प्रबंधन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, प्रदेश में लघु वनोपज संग्रहण कार्य में लगभग 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी है।
मंत्री दिलीप अहिरवार ने बताया कि मेले में 300 स्टाल्स लगाए जाएंगे। प्रदेश के जिला यूनियन, वन धन केंद्र, जड़ी-बूटी संग्राहक, उत्पादक, कृषक, आयुर्वेदिक औषधि निर्माता, परंपरागत भोजन सामग्री के निर्माता एवं विक्रेतागण अपने उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय करेंगे। उन्होंने कहा कि मेले में लघु वनोपज एवं औषधीय पौधों के क्षेत्र की गतिविधियों, उत्पादों एवं अवसरों को प्रदर्शित करने एवं इससे जुड़े संग्राहकों, उत्पादकों, व्यापारियों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों, प्रशासकों एवं नीति निर्धारकों के बीच संवाद स्थापित करने के लिए एक व्यापक मंच उपलब्ध कराया जाएगा।
मेले में विभिन्न शासकीय विभागों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। साथ ही 19 एवं 20 दिसंबर को मेला स्थल पर ‘लघु वनोपज से महिला सशक्तिकरण’ पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। जिसमें श्रीलंका, नेपाल एवं ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधिगण भाग लेंगे। 21 दिसंबर को क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित होगा,जिसमें उच्च गुणवत्ता युक्त लघु वनोपजों (औषधीय पौधों ) कच्ची जड़ी-बूटियों एवं एमएफपी-पार्क की बनाईं हुईं आयुर्वेदिक औषधियों के क्रय-विक्रय के लिए अनुबंध किए जाएंगे।
मंत्री दिलीप अहिरवार ने बताया कि मेले में ओपीडी संचालन किया जाएगा। जिसमें आयुर्वेदिक पद्धति के चिकित्सकों, उपचार करने वाले विशेषज्ञों द्वारा निशुल्क चिकित्सा परामर्श दिया जाएगा। जिसमें 25 हजार लोगों के उपचार कराने की संभावना है।
वन राज्य मंत्री ने बताया कि मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिसमें आर्केस्टा, नुक्कड़ नाटक एवं लोक नृत्य, स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए चित्रकला, फैंसी ड्रेस, गाय कार्यक्रम आयोजित होंगे, साथ ही 18 दिसंबर को लोक गायिका मालिनी अवस्थी एवं 19 को हास्य कलाकार एहसान कुरैशी, 20 को सूफी बैंड, 21 फिडली क्राफ्ट और 22 को ‘एक शाम वन विभाग के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन होगा।
अंतर्राष्ट्रीय वन मेला, 2024, प्रदेश की वन संपदा और महिला सशक्तिकरण को समर्पित एक ऐसा मंच है, जो पर्यावरण, संस्कृति और अर्थव्यवस्था के सामंजस्य को प्रदर्शित करता है।
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राजधानी में अंतर्राष्ट्रीय वनमेले का शुभारंभ
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वनों को समृद्धि का आधार बनाएं: राज्यपाल मंगुभाई पटेल
भोपाल, 24 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि पर्यावरण संतुलन और समृद्धि के लिए अधिक से अधिक वृक्ष लगाए जाने चाहिए। वृक्ष होंगे तो पर्यावरण स्वस्थ होगा और वनोपज से समृद्धि आएगी। उन्होंने वन उत्पाद और औषधियों के गुणों के व्यापक स्तर पर प्रसार की आवश्यकता बताई है। उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि पारंपरिक रूप से सदियों से उपचार में उपयोग किए जाने वाली जड़ी-बूटियों, औषधियों का वैज्ञानिक स्वरूप में प्रमाणीकरण के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने जनजातीय समुदाय में प्रचलित अनुवांशिक रोग सिकल सेल के बारे में बताते हुए कहा कि वह 21 प्रकार के रोगों का कारण होता है। वन विभाग और आयुर्वेद विशेषज्ञों से कहा है कि वह रोग के उपचार में आयुर्वेदिक औषधियों के अनुसंधान के कार्य करें। उन्होंने मेले के संबंध में नगर में लाउड स्पीकर पर सूचना के प्रसार की आवश्यकता बताई है।
राज्यपाल श्री पटेल राज्य लघु वनोपज व्यापार एवं विकास सहकारी संघ द्वारा आयोजित वन मेला 2024 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मेले का आयोजन हाट बाजार में किया गया है। वन, पर्यावरण एवं अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान, वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री श्री दिलीप अहिरवार भी उद्घाटन समारोह में मौजूद थे।
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि लघु वनोपज से समृद्धि के लिए वन मेले का आयोजन सराहनीय पहल है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वह मेले में अधिक से अधिक खरीदारी कर, समाज के वंचित वर्ग के आर्थिक सशक्तिकरण के प्रयासों में सहभागी बने। उन्होंने कहा कि समाज की विकास की मुख्य धारा में पिछड़ने का प्रमुख कारण अशिक्षा है। विकास की पहली सीढ़ी शिक्षा है। उन्होंने वंचित वर्गों का आव्हान किया है कि वह बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि जल वायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग की चुनौतियां पर्यावरणीय असंतुलन का परिणाम है। पर्यावरण संतुलन का आधार वृक्षारोपण है।
उन्होंने पेड़ों के आरोग्य, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वन औषधियों के साइड इफेक्ट नहीं होते। उनके उपचार का प्रभाव कोविड के समय हम सब ने देखा है। उन्होंने कहा कि घर की खिड़की के बाहर नीम अथवा पीपल के पेड़ होते हैं तो एयर कंडीशनिंग की आवश्यकता भी नहीं पड़ती है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में वृक्षारोपण में जनसहभागिता के लिए 12 राशि, 27 नक्षत्र और 9 ग्रह वनों की आयोजना की थी। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में सघन वृक्षारोपण बहुत जरूरी है। नागरिकों का आह्वान किया कि वे अपने जन्मदिन पर प्रतिवर्ष पौधरोपण और उसकी देख-भाल का संकल्प लें।
वन, पर्यावरण एवं अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान ने बताया कि प्रदेश में 35 लाख लोग वनोपज संग्रहण कार्य से जुड़े हुए हैं। राज्य सरकार उनके कल्याण के लिए प्रभावी प्रयास कर रही है। तेंदूपत्ता संग्रहण की दर 3 हजार रुपए प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर, 4 हजार रुपए कर दी है। प्रदेश में 126 वन धन केन्द्र स्थापित किए गए हैं। एकलव्य शिक्षा विकास योजना के द्वारा उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों में शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है।
वन पर्यावरण राज्य मंत्री श्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के वोकल फॉर लोकल की दिशा में राज्य सरकार द्वारा तेजी से कार्य किया जा रहा है। वन मेले का आयोजन वनोपज संग्राहकों को सीधे लाभांवित करने का प्रयास है।
राज्यपाल का कार्यक्रम के प्रारंभ में जनजातीय लोक कलाकारों ने पारंपरिक लोक नृत्य के द्वारा स्वागत किया। उन्होंने कार्यक्रम के प्रारंभ में माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन कर मेले का उदघाटन किया। कार्यक्रम में अतिथियों का औषधीय पौधे भेंट कर स्वागत किया गया। उन्हें वरली आर्ट की कृति और हर्बल उत्पादों का गिफ्ट हेम्पर भेंट किया।
स्वागत उद्बोधन अपर मुख्य सचिव वन, श्री जे.एन. कांसोटिया ने किया । आभार प्रदर्शन प्रबंध संचालक लघु वनोपज संघ श्री विभाष ठाकुर ने किया। इस अवसर पर मुख्यवन संरक्षक, वन बल प्रमुख श्री अभय पाटिल, वनोपज संग्राहक और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।
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जंगलों का कवच हैं जड़ी बूटियां बोले उत्तराखंड के वनमंत्री
भोपाल,22 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।उत्तराखण्ड के वन मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि आज के वन हमारी सामुदायिक सहभागिता से विकसित हो रहे हैं। जरूरी है कि इन वनों को वनवासियों की आत्मनिर्भरता का साधन भी बनाया जाए ताकि वनों का विनाश रुक सके और घने जंगल हमारी परिस्थितिकी को संवारने का साधन बन सकें। राजधानी के लाल परेड मैदान में चल रही दो दिवसीय कार्यशाला में श्री उनियाल ने वनसंपदा को जंगलों का रक्षा कवच बताया है। ये दो दिवसीय कार्यशाला ‘लघु वनोपज से आत्म-निर्भरता’ विषय पर आयोजित हो रही है जिसमें वनमेले में आए कई प्रकृति प्रेमी भी शामिल हो रहे हैं।
श्री उनियाल ने कान्फ्रेंस में विभिन्न आयुर्वेदिक और वन-शिक्षण संस्थाओं से शामिल हुए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि दुनिया का कोई लक्ष्य आपकी हिम्मत से बड़ा नहीं हो सकता। आप ये न सोचों कि इतने विशाल जंगलों को हम कैसे बचा सकते हैं। वनोपज से होने वाली आय जंगलों के रक्षकों की इतनी बड़ी फौज खड़ी कर सकती है जो सीमित संसाधनों में भी सफलता दिला सकती है।जंगलों की उपयोगिता से जुड़ी यह मानव शक्ति बगैर वेतन पर्यावरण बचा सकती है। जरूरत है कि हम लोगों को जड़ी बूटियों का महत्व समझाएं। देशी चिकित्सा के तौर तरीके उन्हें पेड़ों का महत्व आसानी से बता सकते हैं।
राज्य लघु वनोपज संघ के एमडी पुष्कर सिंह ने बताया कि दो दिन तक चलने वाली कार्यशाला में देश-विदेश में हुए विभिन्न अनुसंधानों की जानकारी मिलेगी, जो आयुर्वेद के विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक साबित होगी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री आर.के. गुप्ता ने बताया कि वन मेले में लगे स्टालों से प्रदेश की जैव विविधता झलकती है। यहाँ एक ओर पातालकोट का विश्व विख्यात शहद, झाबुआ का लाल चावल, महाकौशल क्षेत्र का कोदो-कुटकी और कई तरह के पारम्परिक औषधीय पौधों की प्रचुरता है।
कार्यशाला में नेपाल, इंडोनेशिया, भूटान के विशेषज्ञों के साथ मध्यप्रदेश सहित उत्तराखण्ड, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश के विषय-विशेषज्ञ, अधिकारी और इंडस्ट्री एक्सपर्ट शामिल हुए।नेपाल सरकार के जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण सलाहकार डॉ. माधव कर्की वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शामिल हुए। उन्होंने मध्यप्रदेश और उत्तराखण्ड राज्य के संसाधनों के सतत प्रबंधन और संवर्धन की तारीफ करते हुए कहा कि नेपाल को इस संदर्भ में सीखना होगा।
वन मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने लाल परेड ग्राउंड में लगे वन मेले में लगी विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया और प्रदर्शित उत्पादों की जानकारी भी प्राप्त की। वन बल प्रमुख आर.के. गुप्ता ने वन मंत्री को प्रतीक-चिन्ह भेंट किया। इस मौके पर भारतीय वन प्रबंध संस्थान (आईआईएफएम भोपाल) के डायरेक्टर डॉ. के. रविचंद्रन की मौजूदगी विशेष रही। अपर प्रबंध संचालक (व्यापार) श्री विभाष ठाकुर ने सभी आगंतुकों का आभार माना। -

जंगलों से समृद्ध जनजीवन
ऋषभ जैन
मध्यप्रदेश में सामुदायिक भागीदारी से वन प्रबंधन, संरक्षण एवं सुधार की दिशा में वन समितियों के माध्यम से शानदार काम किया गया है जो पूरे देश में अनूठा है। इन वन समितियों से जुड़े परिवार आर्थिक रूप से भी सशक्त हुए हैं।
वन समितियों के उल्लेखनीय कामसतना की ग्राम वन समिति गोदीन ने गोंड जनजाति की महिलाओं को सॉफ्ट टॉय बनाने का प्रशिक्षण ग्रीन इंडिया मिशन में दिया है। इसी प्रकार सीधी वन मंडल की ग्राम वन समिति बम्हनमरा ने बिगड़े वन क्षेत्र में काम करना शुरू किया और अवैध कटाई, चराई, अतिक्रमण से जंगलों की सुरक्षा की। समिति को महुआ फूल, गुल्ली, अचार, जलाऊ लकड़ी मिल रही है।बालाघाट की ग्राम समिति अचानकपुर ने बाँस-रोपण क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की। बाँस के दोहन से समिति को एक लाख रूपये का शुद्ध मुनाफा हुआ। वन मंडल सीधी की ग्राम वन समिति ने वन विहीन पहाड़ी में काम करना शुरू किया और अपने परिश्रम से इसे सघन सागौन वन में बदल दिया। समिति को सागौन की बल्लियों से आर्थिक लाभ भी हुआ। वन मंडल पश्चिम मंडला की ग्राम वन समिति मनेरी ने वन विहीन पहाड़ी को हरा-भरा बना दिया। इसी प्रकार अन्य समितियाँ भी अपने-अपने क्षेत्रों में सरकार के सहयोग से शानदार काम कर रही हैं। प्रदेश का वनक्षेत्र 94 हजार 689 वर्ग किलोमीटर है जो अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक है। यह देश के कुल वन क्षेत्र का 12.3% है। प्रदेश के 79 लाख 70 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र के प्रबंधन में जन-भागीदारी के लिये 15 हजार 608 गाँवों में वन समितियाँ काम कर रही हैं। पिछले एक दशक में 1552 गाँवों में वन समितियों ने 4 लाख 31 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र में सुधार किया है। जब पूरी दुनिया में वनों पर खतरा मंडरा रहा है, ऐसे समय इन समितियों ने वन विभाग के साथ मिलकर शानदार काम किया है।
राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ, वनोपज संग्रह करने वाले परिवारों को उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से काम कर रहा है। संघ के नवाचारी उपायों से तेंदूपत्ता संग्राहकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। तेंदूपत्ता सीजन में 2021 कोविड-19 के कारण लॉक-डाउन के बाद भी तेंदूपत्ता संग्रहण कराकर दूरदराज के क्षेत्रों में रह रहे जनजातीय परिवारों को 415 करोड़ रूपये का पारिश्रमिक दिलाया गया और 192 करोड़ का लाभांश भी वितरित किया गया।
पुरानी नीति में 70 फीसदी लाभांश संग्राहकों को बोनस के रूप में दिया जाता था। साथ ही 15% राशि संग्राहकों के सामाजिक एवं आर्थिक कल्याण के लिए और 15% राशि वन क्षेत्रों में लघु वन उपज देने वाली प्रजातियों के संरक्षण एवं विकास पर खर्च की जाती थी। अब “पेसा अधिनियम” की भावना के अनुसार तेंदूपत्ता के व्यापार से होने वाले लाभ का 75% संग्राहकों को, 10% राशि संग्राहकों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण के लिए और 10% राशि वन क्षेत्रों में लघु वनोपज प्रजातियों के संरक्षण तथा 5 प्रतिशत ग्राम सभाओं को दी जाएगी।
वन विभाग द्वारा नए संकल्प में राष्ट्रीय उद्यानों में पर्यटकों के प्रवेश से मिलने वाली राशि का 33% वन समितियों को देने का प्रावधान किया गया है । समितियों को आवंटित क्षेत्र में ईको पर्यटन का कार्य संचालित करने के लिए सशक्त किया गया है। इससे होने वाली आय वन समिति को मिलेगी। इससे स्थानीय युवाओं को आर्थिक गतिविधियाँ शुरू करने के अवसर मिलेंगे।
वन समितियों का माइक्रो प्लान
प्रदेश के एक तिहाई गाँव वन क्षेत्रों के अंदर या उसके आसपास बसे हैं। वहाँ के निवासियों की आजीविका वनों पर आधारित है।
आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश में इस साल के आखिर तक 5 हजार वन समितियों का माइक्रो प्लान तैयार करने का लक्ष्य है। इससे रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही ग्राम समुदाय अपनी आवश्यकता की वनोपज का उत्पादन कर अपने पैरों पर खड़े हो सकेंगे।
लाभांश में वृद्धि
वन समितियों को दिए जाने वाले लाभांश में वृद्धि की गई है। पहले जिला स्तर पर शुद्ध लाभ की राशि का 20 फीसदी मिलता था, जिसकी वजह से राशि का वितरण केवल कुछ ही जिलों में हो पाता था। अधिकांश समितियाँ लाभ से वंचित रह जाती थी। नए संकल्प के अनुसार प्रत्येक समिति को उसके क्षेत्र में से किए गए दोहन से प्राप्त राजस्व का 20 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। पहले काष्ठ एवं बाँस का 50 करोड़ रूपए तक का लाभांश वितरण होता था। अब लगभग 160 करोड़ प्रति वर्ष हो रहा है।
ग्राम सभाओं को सौंपा अधिकार
वन समितियों के गठन एवं पुनर्गठन करने का अधिकार अब ग्राम सभाओं को सौंपा गया है। वन समिति की कार्यकारिणी में महिलाओं एवं कमजोर वर्गों के लोगों को शामिल करने की व्यवस्था भी की गई है। प्रदेश में अनेक प्रकार की वनोपज का उत्पादन होता है। इसमें महुआ, तेंदूपत्ता, हर्रा, बहेड़ा, आंवला और चिरौंजी प्रमुख है। पेसा कानून की भावना के अनुरूप ग्राम सभाओं को लघु वनोपजों का पूरा अधिकार सौंपा गया है।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ऐसे निर्णय लिये गये हैं, जो वन समितियों से जुड़े संग्राहक परिवारों के लिये परिवर्तनकारी साबित हुए हैं। वन समितियों को भरपूर आर्थिक लाभ हुआ है। उदाहरण के लिये 32 वनोपजों का समर्थन मूल्य निर्धारित करने से करीब 17 लाख परिवारों को लाभ हुआ है। तेंदूपत्ता व्यापार के शुद्ध लाभ का 70 प्रतिशत के स्थान पर 75 प्रतिशत देने से 17 लाख परिवारों को लाभ हुआ है।
तेंदूपत्ता संग्रहण दर में वृद्धि
तेंदूपत्ता संग्रहण दर में लगातार वृद्धि की गई है। इसी के अनुपात में पारिश्रमिक और बोनस का भुगतान भी किया गया है। तेंदूपत्ता संग्रहण दर वर्ष 2005 में प्रति मानक बोरा ₹400 थी, जो अब बढ़कर 2500 सौ रूपये प्रति मानक बोरा हो गई है। पारिश्रमिक का भुगतान वर्ष 2005 में ₹67 करोड़ रूपये होता था, जो वर्ष 2021 में बढ़कर 415 करोड़ रूपये हो गया है। संग्राहकों के बच्चों के लिए एकलव्य शिक्षा योजना पिछले ग्यारह साल से चल रही है, जिससे अब तक 1712 बच्चों को शिक्षा के लिये 2 करोड़ एक लाख रूपये की राशि उपलब्ध कराई गई है।
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भारतीय मजदूर संघ ने किया वृक्षारोपण
भारतीय मजदूर संघ ने आज सागर के विधायक शैलेन्द्र जैन के नेतृत्व में वृक्षारोपण किया. सागर,28 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मजदूर संघ के तत्वाधान में आज जिला इकाई सागर ने श्रीमती अमृता देवी विश्नोई जी के बलिदान को पर्यावरण दिवस के रूप में केंद्रीय बीड़ी अस्पताल सागर के परिसर में वृक्षारोपण कर मनाया।
इस अवसर पर माननीय नगर विधायक शैलेंद्र जैन के मुख्य आतिथ्य में एवं भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश मंत्री आशीष सिंह जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुरेश बौद्ध , स्वास्थ्य विभाग से सिविल सर्जन श्रीमती डॉक्टर ज्योति चौहान डॉक्टर प्रदीप चौहान सहायक श्रम आयुक्त भगवत प्रसाद कोरी बीड़ी अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्रीमती बरूआ ,जिला मलेरिया अधिकारी डॉ शैलेंद्र शाक्य प्रदेश महामंत्री कंस्ट्रक्शन मजदूर महासंघ से डॉ प्रदीप पाठक बीड़ी श्रमिक संगठन से राष्ट्रीय सचिव श्रीमती राजकुमारी पवार शहर के समाजसेवी मस्तराम घोसी के विशिष्ट आतिथ्य एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारतीय मजदूर संघ के जगदीश जी जारोलिया की अध्यक्षता में कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती एवं भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक श्रीमान दत्तोपंत जी ठेंगड़ी की छाया चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। इसी क्रम में स्वागत की श्रंखला में मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत सम्मान विभिन्न संगठनों से पधारे हुए अध्यक्ष एवं पदाधिकारियों द्वारा तिलक एवं पुष्प गुच्छ एवं मालाओं के माध्यम से किया गया।
तत्पश्चात स्वागत उद्बोधन के लिए राकेश श्रीवास्तव मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष के द्वारा किया गया, कार्यक्रम का मंच संचालन भारतीय मजदूर संघ सागर के जिला मंत्री राहुल जैन के द्वारा किया गया।
इसी क्रम में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि अमृता देवी विश्नोई एवं विश्नोई समाज के द्वारा जो पर्यावरण को बचाने के लिए बलिदान दिया गया हम सभी आज यहां आज भारतीय मजदूर संघ की इस परंपरा को भारतीय पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने एकत्रित हुए हैं ।मैं जनता का एक जनप्रतिनिधि होने के नाते आप सभी को यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि विधानसभा में इस प्रस्ताव को विशेष रुप से लाऊंगा जिससे आगामी आने वाले वर्ष में हम सभी एक साथ पूर्व तैयारी कर बड़े स्तर पर इस पर्यावरण दिवस को आयोजन संपूर्ण मध्यप्रदेश में एक साथ वृक्षारोपण कर मनाने का प्रयास करेंगे,इस अवसर पर उन्होंने भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से आवाहन किया कि श्रमिकों की शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन के लिए चिन्हित क्षेत्रों में अभियान चलाकर वैक्सीनेशन कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ वैक्सीनेशन के कार्यक्रम को सफल बनाने का प्रयास हम और आप सभी मिलकर करेंगे।आज के वृक्षारोपण कार्यक्रम में भारतीय मजदूर संघ से संबंधित विभिन्न संगठनों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की, जिसमें प्रमुख रूप से भारतीय मजदूर संघ के कार्यकारी जिला अध्यक्ष दीपक मिश्रा, कार्यालय मंत्री राम ठाकुर , के साथ दामोदर प्रजापति ब्रजमोहन पांडे विशाल खरे मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ से ऐसी द्विवेदी अशोक तिवारी अवधेश उपाध्याय अजय खरे डीके तिवारी विकास उपाध्याय दिनेश कनौजिया रघुवर प्रसाद दुलीचंद पटेल , कैलाश सोनी , देवेंद्र पंथी एवं मध्य प्रदेश बिजली कर्मचारी महासंघ से केशव प्रसाद तिवारी , राम विवेक गौतम ,सतीश मेहता ,महेंद्र प्रजापति श्रीमान कक्का , एवं बीड़ी संगठन के अध्यक्ष श्याम चरण जाटव, शीतल प्रसाद वर्मा , दीपेश जाटव , कृषि एवं ग्रामीण मजदूर महासंघ से अमित उपाध्याय, सर्वानंद पांडे ,कंस्ट्रक्शन मजदूर महासंघ के विभिन्न पदाधिकारी और पर्यावरण संयोजक अमित रैकवार, बहन श्रीमती रश्मि कुशवाहा , संजय भाटी ,एम ई एस कार्यकारी यूनियन से नितेश साहू , संतोष शर्मा के साथ समस्त संबद्ध संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ शहर वासियों ने सामूहिक रूप से वृक्षारोपण कर कार्यक्रम को सफल बनाया, इसी क्रम में जिला अध्यक्ष की ओर से सभी का आभार व्यक्त किया गया।