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  • फर्जी सेठ बनकर समृद्धि की राह में  रोड़ा बना था लूजर भास्कर

    फर्जी सेठ बनकर समृद्धि की राह में रोड़ा बना था लूजर भास्कर

    भोपाल,4 जुलाई (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय समेत देश की तमाम एजेंसियां इन दिनों शैल कंपनियों के सहारे काला धन सफेद करके उद्योगपति बन बैठे जेबकतरों की खाना तलाशी ले रहीं हैं। केरल के गोरखधंधेबाजों के बाद देश के अन्य प्रांतों में भी इन ठगों की धरपकड़ जारी है। मुद्रा को खोखला करने वाले इन फर्जी उद्योगपतियों से जूझने में राज्यों की सरकारें सबसे बड़ा अड़ंगा साबित हो रहीं हैं। पुलिस राज्य का विषय है और पुलिस की आंखें मूंदने के लिए काले धन के इन धोबियों ने राजनेताओं से गहरी सांठगांठ कर ली है। गुजरात के अहमदाबाद में पंजीकृत कराई गई डीबी कार्प लिमिटेड और इसके सहयोगी संस्थानों पर डाले गए छापे में पता चला कि बैंकों से लगभग 28 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेकर भास्कर समूह ने शैल कंपनियों के सहारे लगभग छह हजार करोड़ रुपयों का सालाना टर्नओवर हासिल कर लिया था। देश के वित्तीय ढांचे की आंखों में धूल झोंकने के लिए इस समूह ने बाजार से मंहगी दर पर निवेश जुटाया और पुलिस के रिश्वतखोरों की सहायता से इन छोटे निवेशकों की पूंजी हड़पकर उसे अपनी आय बता दिया.जबकि हकीकत में ये समूह देश के संसाधनों का लूजर बनकर सामने आया है.

    डीबी कार्प लिमिटेड में आ रहे विदेशी निवेश की जांच करने पर पता चला है कि कांग्रेस नेता दिग्गी के सहयोग से शुरु किए गए इस गोरखधंधे में भाजपा के कई बड़े दिग्गज भी शामिल हैं। सत्ताधीशों का ये गिरोह राज्य के खजाने से फर्जी योजनाओं के नाम पर मोटी रकमें निकालकर इस समूह को मुहैया कराता रहा है। आयकर अधिनियम की धारा 132 में जो तलाशी ली गई उससे इस काले कारोबार की पोल खुल गई है। समूह के मुंबई, दिल्ली, भोपाल, इंदौर,जयपुर, कोरबा,, नोयडा, अहमदाबाद, समेत लगभग 40 परिसरों की तलाशी ली गई है। लगभग सात दिनों तक डेरा डाले रहे अन्य प्रदेशों से भेजे गए अधिकारियों ने इस गोरखधंधे के पूरे दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। अपने समाचार पत्र समूह और राज्य के गृहमंत्री के सहारे दबाव बनाने के प्रयास भी नाकाम होने के बाद अब समूह के कर्ताधर्ता संघ के दरबार में दंड बैठक लगाने की जुगत भी बिठा रहे हैं।

    सरे चौराहे कथित प्रगति की पोल खुलने से शेयर मार्केट में औंधे मुंह गिरने लगा कंपनी का शेयर

    यह समूह मीडिया, बिजली, कपड़ा और रियल एस्टेट के अलावा कई अन्य धंधों से भी अपनी आय होना दिखाता रहा है। जबकि इसका मुख्य धंधा मनी लांड्रिंग(धनशोधन) का रहा है। समूह ने अपना सालाना कारोबार 6000 करोड़ रुपए दिखाया है।समूह से जुड़े उद्योगपति नमक, अगरबत्ती, साबुन, प्रिंटिंग आदि तमाम धंधों से अपनी आय दिखाते रहे हैं।प्रेस को बुद्धू समझने वाले इस गिरोह के सदस्य लोटा बाल्टियां बांटते रहते है विदेशों में अय्याशी करने वाले इन कारोबारियों की जान इन दिनों सांसत में फंसी हुई है क्योंकि देश के मुद्रा तंत्र से काले धन की धरपकड़ का शिकंजा भारत सरकार की पहल पर ही कसा गया है।

    सूत्रों के अनुसार समूह की फ्लैगशिप कंपनी डीबी कॉर्प लिमिटेड है, जो दैनिक भास्कर समाचार प्रकाशित करती है। कोयला आधारित बिजली उत्पादन व्यवसाय मेसर्स डीबी पावर लिमिटेड के नाम से किया जाता है। सरकारी सूत्र कहते हैं कि फर्जी खर्च और शेल संस्थाओं की आड़ में समूह ने सरसरी नजर में लगभग सात सौ करोड़ की टैक्स चोरी की है। समूह ने अपने कर्मचारियों के साथ शेयर धारकों और निदेशकों के रूप में कई कागजी कंपनियां बनाई हैं। इस तरह से निकाले गए धन को मॉरीशस स्थित संस्थाओं के माध्यम से शेयर प्रीमियम और विदेशी निवेश के रूप में विभिन्न व्यक्तिगत और व्यावसायिक खातों में वापस भेज दिया गया। परिवार के सदस्यों के नाम पनामा पेपर लीक मामले में भी सामने आए। विभागीय डेटा बेस बैंकिंग पूछताछ और अन्य तरीकों से पूछताछ का विश्लेषण करने के बाद तलाशी का सहारा लिया गया।

    जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि डीबी कार्प लिमिटेड के रूप में समूह को कमाई का एक नया साधन मिल गया था। शासन की अनुमति प्राप्त किए बगैर समूह ने मध्यप्रदेश हाऊसिंग बोर्ड से वह जमीन खरीद ली थी। खरीद का अनुबंध करने वाली कंपनी से मिलता जुलता नाम वाली नई कंपनी बनाकर मॉल खरीदा गया। बाद में आकार ली कंपनी देश भर में मॉल बनाने का दावा करके लोन पर लोन लेती चली गई।लगभग ढाई सौ करोड़ रुपयों से बने डीबी कार्प लिमि. पर आज हजारों करोड़ रुपयों का कर्ज है। ये राशि समूह की संपत्तियों से कई गुना अधिक है।इस राशि से समूह ने आय तो की लेकिन उस पर न तो टैक्स दिया न जुर्माना भरा।मुनाफे को शैल कंपनियों में घुमाकर और अधिक लोन लिया जाता रहा।

    बड़े समाचार प्रतिष्ठान देश के वित्तीय प्रबंधकों को धमकाने की आड़ बन गए थे.

    कंपनी ने मॉल बनाने के नाम पर भारी लोन उठाया है।बताते हैं कि इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक से सितंबर 2011 में 1,080,000,000रुपए, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक से अगस्त 2010 में 500,000,000 रुपए,आईडीबीआई बैंक से 1,890,000,000 रुपए,राबो इंडिया फाईनेंस लिमि.से 1,400,000,000रुपए,एबीएन एंब्रो बैंक एनवी से जून 2009 में 250,000,000 रुपए,यूको बैंक से चल संपत्तियों पर 120,000,000 रुपए,स्टेट बैंक आफ इंदौर से फरवरी 2010 में 517,000,000 रुपए, यस बैंक लिमिटेड से 700,000,000 रुपए, स्टेट बैंक आफ इंदौर से 20,000,000 रुपए,स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक से 250,000,000 रुपए, आईडीबीआई बैंक से 700,000,000रुपए, 31इंफोटेक ट्रस्टीशिप सर्विसेज लिमिटेड से 1,000,000,000 रुपए,एगको फाईनेंस जीएमबीएच से 1,778,500,000 रुपए, आईएल एंड एफएस ट्रस्ट कंपनी लिमिटेड से अक्टूबर 2007 में 250,000,000 रुपए,इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक आफ इंडिया लिमिटेड से फरवरी 2008 में 200,000,000 रुपए लोन के नाम पर जुटाए गए। ये तो प्राप्त जानकारी का बहुत छोटा हिस्सा है।

    जासूस बादशाह समाचार पत्र के ब्यूरो प्रमुख अनिल तिवारी बताते हैं कि समूह की वित्तीय अनियमितताओं पर देश की जांच एजेंसियां लंबे समय से निगाह रख रहीं थीं।कई दस्तावेजों को एकजुट करने का काम चल रहा है।अभी तक जो जानकारियां सामने आईं है उससे वित्तीय अनियमितताओं की केवल सरसरी जानकारी मिली है।इससे जुड़ी अन्य जानकारियां सामने आने पर पता चलेगा कि किस तरह उद्योग खड़े करने के नाम पर देश में ही धनशोधन की फेक्टरी चलाई जा रही थी।

    लूटो और भागो की तर्ज पर काम करता रहा समूह जिद करो दुनिया बदलो का टैग वाक्य सुनाता रहा लेकिन उसने न तो दुनिया बदली न ही देश को समृद्ध बनाया। बैंकों का पैसा हड़पकर समूह के कर्ता धर्ता अपने रिश्तेदारों के घरों में ये जायदाद छुपाते रहे।प्रदेश के नेता और अफसर तो समूह के दरवाजे पूंछ हिलाते रहे लेकिन पहली बार देश की जांच एजेंसियों ने तिजोरी में बंद लक्ष्मी को आजाद कराने की पहल की है। निश्चित तौर पर ये पहल कई करोड़ गरीबों के औद्योगिक संस्थान रोशन करेगी और हजारों करोड़ घरों में रोजगार के दीप जलाएगी।

  • जनता के अरबों रुपए दबाकर उद्योगपति बन बैठा भास्कर समूह

    जनता के अरबों रुपए दबाकर उद्योगपति बन बैठा भास्कर समूह

    भोपाल,28 जुलाई(अनिल तिवारी)। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 27 जुलाई मंगलवार को संसद में कहा कि रिजर्व बैंक को सरकारी क्षेत्र के बैंकों ने बताया है कि जानबूझकर कर्ज लौटाने में चूक करने वाले 2,494 लोगों से वसूली का काम जारी है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान एनपीए और बट्टे खाते में डाले गए ऋणों में से 3,12,987 करोड़ रुपयों की वसूली की गई है। इनमें से ज्यादातर लोग भास्कर समूह की तरह दबाव की रणनीति अपनाकर बैंकों से करोड़ों रुपए का लोन हड़प रहे थे। अपनी दबंगई के सहारे आडिट रिपोर्ट को मनमाफिक तैयार कराकर रोज नए लोन मंजूर करा रहे थे लेकिन उन्हें चुकाने की जगह सरकार को बदनाम करने की गुंडई करते रहे हैं।

    पिछले दिनों भास्कर समूह पर आयकर विभाग ने जो छापे डाले उसके बाद माफिया की तरह बर्ताव कर रहे समूह के प्रमोटरों ने अपने कांग्रेसी गुर्गों के माध्यम से सरकार और संसद पर ये कहकर दबाव बनाना शुरु कर दिया था कि ये पत्रकारिता पर हमला है। भास्कर समूह के तनखैया पत्रकारों ने भी शोर मचाना शुरु कर दिया कि आपातकाल की तरह प्रेस की आजादी को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है।जबकि सरसरे अनुमान के मुताबिक भास्कर समूह ने 28 हजार करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज ले रखा है।

    भास्कर समूह की लिस्टेड कंपनियां तो भास्कर इंडस्ट्रीज लिमिटेड और शारदा साल्वेंट लिमिटेड के नाम से दर्ज हैं लेकिन इसकी आड़ में सैकड़ा भर अनलिस्टेड कंपनियां भी काम कर रहीं थीं। इनमें आरके इंनवेस्टमेंट प्राईवेट लिमिटेड, बीईएल ट्रेडर्स प्राईवेट लिमिटेड, बीएफपी एंटरप्राईजेस प्राईवेट लिमिटेड,बेरी डेवलपर्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राईवेट लिमिटेड, बीएफपी ट्रेडर्स प्राईवेट लिमिटेड, भास्कर एयरलाईंस इंडिया प्राईवेट लिमिटेड, भास्कर ब्राडकास्टिंग कार्पोरेशन लिमिटेड, भास्कर डेनिम लिमिटेड, भास्कर एक्सिम लिमिटेड, भास्कर एक्सोआईल लिमिटेड, भास्कर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, भास्कर फूड्स प्राईवेट लिमिटेड,भास्कर ग्लोबल प्राईवेट लिमिटेड, भास्कर हाऊसिंग डेवलपमेंट कंपनी प्राईवेट लिमिटेड, भास्कर मल्टीमीडिया प्राईवेट लिमिटेड, भास्कर मल्टीनेट लिमिटेड,भास्कर पब्लिकेशन एंड एलाईड इंडस्ट्रीज प्राईवेट लिमिटेड,भास्कर बायोफ्यूल प्राईवेट लिमिटेड, भास्कर व्यंकटेश प्रोडक्ट प्राईवेट लिमिटेड, भोपाल फाईनेंशियल सर्विस प्राईवेट लिमिटेड,ब्रिक ज्वाईंट प्राईवेट लिमिटेड,ब्राईट ड्रग इंडस्ट्रीज लिमिटेड, चंबल ट्रेडिंग प्राईवेट लिमिटेड,डीबी बिल्डकॉन प्राईवेट लिमिटेड, डीबी इनर्जी प्राईवेट लिमिटेड, डीबी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, डीबी माल्स प्राईवेट लिमिटेड, डीबी माईनिंग कार्पोरेशन लिमिटेड,डीबी पावर लिमिटेड, डीबी पब्लिकेशंस प्राईवेट लिमिटेड, डिलाईट इंनवेस्टमेंट प्राईवेट लिमिटेड, डीलक्स ट्रेवल सर्विस प्राईवेट लिमिटेड, डिजाईन साल्यूशंस लिमिटेड, देव एंटरप्राईजेस प्राईवेट लिमिटेड, देव फिस्कल सर्विसेस प्राईवेट लिमिटेड, देव मीडिया प्राईवेट लिमिटेड, डेलीजेंट मीडिया कार्पोरेशन लिमिटेड, डायमेंशन मीडिया प्राईवेट लिमिटेड,डायरेक्ट ओह मीडिया प्राईवेट लिमिटेड, दिव्या देव डेवलपर्स प्राईवेट लिमिटेड,दिव्या ट्रेडिंग प्राईवेट लिमिटेड, एक्सोईल्स एंटरप्राईजेस प्राईवेट लिमिटेड, ग्वालियर बिल्डकान प्राईवेट लिमिटेड, इंडिया इंटरएक्टिव टेक्नालाजीस प्राईवेट लिमिटेड, खानदाधर मिनरल्स लिमिटेड,मंजुल पब्लिशिंग हाऊस प्राईवेट लिमिटेड, मेरी डेवलपर्स प्राईवेट लिमिटेड, जैसी कंपनियां शामिल हैं।

    कमलनाथ हों या शिवराज,पानी भरते रहे प्रदेश के सभी कर्णधार

    जिन प्रोप्राईटर फर्म्स से भास्कर समूह अपनी आय होना दिखाता रहा है उनमें मेसर्स भास्कर ग्लोबल, भास्कर फोटो टाईप सेटर भोपाल, भास्कर प्रिंटिंग प्रेस अहमदाबाद, सूरत,वडोदरा, भास्कर प्रिंटिंग प्रेस भोपाल, मेसर्स द्वारका प्रसाद अग्रवाल एंड ब्रदर्स, द्वारका प्रसाद अग्रवाल चैरीटेबल ट्रस्ट, गिरीश अग्रवाल हिंदू अविभाजित फैमिली, मेसर्स मतोलिया मोटल्स, ओमप्रकाश गर्ग हिंदू अविभाजित फैमिली, पवन अग्रवाल हिंदू अविभाजित फैमिली, रमेश चंद्र अग्रवाल हिंदू अविभाजित फैमिली, आरसी अग्रवाल चैरिटेबल ट्रस्टर, आरसी फोटो टाईप सेटर रायपुर, मेसर्स आरसी प्रिंटर्स, शारदा देवी चैरीटेबल ट्रस्ट, शिवपुरी ट्रेडिंग कार्पोरेशन, सुधीर अग्रवाल हिंदू अविभाजित फैमिली, शामिल हैं।

    जिन कंपनियों से ये समूह अपना कारोबार दिखाता रहा है उनमें न्यू इरा पब्लिकेशंस प्राईवेट लिमिटेड, पीकाक ट्रेडिंग एंड इंनवेस्टमेंट प्राईवेट लिमिटेड, रीजेंसी एग्रो प्रोडक्टस् प्राईवेट लिमिटेड, रीजेंसी होटल्स एंड इंनवेस्टमेंट्स इंडिया प्राईवेट लिमिटेड,एसए ट्रेडिंग एंड इन्वेस्टमेंट्स प्राईवेट लिमिटेड,सौराष्ट्र समाचार प्राईवेट लिमिटेड, एसबी होटल्स प्राईवेट लिमिटेड, शारदा रियल इस्टेट प्राईवेट लिमिटेड, शाश्वत होम्स प्राईवेट लिमिटेड, शौर्या डायमंड लिमिटेड, साल्वेंट ट्रेडर्स प्राईवेट लिमिटेड, स्टाईटेक्स ग्लोबल लिमिटेड, सनशाईन साल्वेंट प्राईवेट लिमिटेड, सर्ज डेवलपर्स प्राईवेट लिमिटेड, सूर्या आई इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर प्राईवेट लिमिटेड, राईटर्स एंड पब्लिशर्स लिमिटेड, वेंचर ड्राईव प्राईवेट लिमिटेड, विज्युअल मीडिया एंटरटेनमेंट प्राईवेट लिमिटेड, जैसी कई अन्य कंपनियां शामिल हैं।

    पत्रकारिता की आड़ में परिवारवाद

    आयकर अधिनियम की धारा 132 के तहत दिए गए नोटिस के जवाब में जो जानकारी समूह के प्रवर्तकों ने दी है उसमें परिवारों और रिश्तेदारों के नाम मोटा मालिकाना हिस्सा दिखाया गया है। कंपनी के प्रमोटरों की हिस्सेदारी भी बांटकर उन्हें संपत्ति का मालिक बनाया गया है।सर्व श्री गिरीश अग्रवाल 5.24 प्रतिशत संपत्ति के मालिक हैं। जबकि श्रीमती ज्योति अग्रवाल 5.26 प्रतिशत,कस्तूरी देवी अग्रवाल 3.08 प्रतिशत, नमिता अग्रवाल 4.23 प्रतिशत, निकिता अग्रवाल 1.42 प्रतिशत, पवन अग्रवाल 5.70 प्रतिशत,रमेश चंद्र अग्रवाल 19.66 प्रतिशत,स्वर्गीय रमेशचंद्र अग्रवाल हिंदू अविभाजित परिवार की हैसियत से 2.78 प्रतिशत, सुधीर अग्रवाल 8.73 प्रतिशत, भास्कर फूड्स प्राईवेट लिमिटेड 2.78 प्रतिशत,राईटर्स एंड पब्लिशर्स लिमिटेड 1.93 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ समूह के प्रमोटर्स हैं।

    अनुप्रिया आचार्यः डीबी कार्प लिमिटेड की डायरेक्टर, पिता की दौलत पर ऐश्वर्य का साम्राज्य

    जिन विदेशी हिस्सेदारों ने एनआरआई के तौर पर भागीदारी की है उनमें सर्वश्री बृजेश जे पटेल 2.34 प्रतिशत, जयवंत एन पटेल 5.99 प्रतिशत,कांतिभाई नाथाभाई पटेल 4.83 प्रतिशत, माया जे पटेल 5.80 प्रतिशत, पायल जी पटेल 2.34 प्रतिशत, सविबेन कांतिभाई पटेल 2.22 प्रतिशत, के भागीदार हैं। समूह में शामिल अन्य प्रमोटरों में चंबल ट्रेडिंग प्राईवेट लिमिटेड की 7.20प्रतिशत, भास्कर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की 7.89 प्रतिशत हिस्सेदारी है। अन्य लोगों की 0.58 प्रतिशत हिस्सेदारी भी दर्शायी गई है।कुल पांच लाख करोड़ से अधिक की संपत्तियां भास्कर समूह के पास इकट्ठी हैं। भास्कर के इस साम्राज्य में पलीता लगाने वालों में भी इसके प्रमोटर्स ही शामिल हैं क्योंकि समूह ने न तो सरकार को टैक्स देना उचित समझा न बैंकों को उसकी संपत्तियां लौटाईं और न ही प्रमोटरों को मुनाफे का हिस्सा दिया। इसी वजह से कागजों पर बनी कंपनियों की कागजी नाव डूबने की कगार पर जा पहुंची।

    चाचा महेश प्रसाद अग्रवालःरमेश ने हड़प लिया दैनिक भास्कर

    जनधन को दबाने वालों में स्वर्गीय रमेश चंद्र अग्रवाल का पूरा परिवार और खानदान बढ़ चढ़कर भागीदार रहा है। दस्तावेजों पर जनधन का मालिकाना हक प्राप्त करने वालों में रमेश चंद्र अग्रवाल की मां कस्तूरी देवी अग्रवाल, बहन मीना गर्ग, बहन नीलम गोयल, बेटे सुधीर अग्रवाल, गिरीश अग्रवाल, पवन अग्रवाल,शामिल हैं।अन्य मालिकों में रमेश चंद्र अग्रवाल की बेटी भावना अग्रवाल, दामाद स्वर्गीय डाक्टर ओपी गर्ग, दामाद श्री गोविंद प्रसाद गर्ग, जिठसास विनीता खेतावत, सुधीर अग्रवाल की पत्नी ज्योति अग्रवाल, सुधीर का बेटा अर्जुन अग्रवाल, बेटी शुभ अग्रवाल, ससुर डीडी बेरी, सास सुषमा बेरी, साले सुमीत बेरी, जिठसास अन्नू राखीजा, जिठसास नीतू सिंह, जिठसास रीनू दुआ शामिल हैं।

    दैनिक भास्कर समूह ने अपने राजनीतिक संबंधों और पत्रकारिता से अर्जित रसूख के दम पर बैंकों में भारी माफियागिरी मचाई थी।बैंकों ने भी इस कागजी विकास के दावों को सच माना और धड़ाधड़ मोटी रकमें समूह को थमा दीं। वर्ष 2013 से 2017 के दौरान भारतीय स्टेट बैंक ने 4,400,000,000 रुपए समूह को थमा दिए। सितंबर 2018 में आरबीएल बैंक लिमिटेड ने 1,000,000,000 रुपए समूह को दिए। अचल संपत्तियों और ब्याज को गिरवी रखकर आरबीएल बैंक ने 2,430,000,000 रुपए और दे दिए। एक्सिस ट्रस्टी सर्विस लिमिटेड ने 6,000,000,000 रुपए,एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज लिमिटेड ने 5,970,000,000 रुपए, एक्सिस ट्रस्टी सर्विस लिमिटेड ने 5,970,000,000 रुपए फिर जारी किए।हाऊसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड ने इन्हीं संपत्तियों को गिरवी रखकर अप्रैल 2011 में 250,000,000 रुपए, स्टेट बैंक आफ इंदौर ने मार्च 2011 में 250,000,000 रुपए, एलआईसी हाऊसिंग फायनेंस लिमिटेड ने 400,000,000 रुपए,आरबीएल बैंकलिमिटेड ने 1,995,000,000 रुपए,आरबीएल बैंक लिमिटेड ने ही संपत्तियों पर 313,000,000 रुपए सितंबर 2018 में जारी किए। कार्पोरेट गारंटी पर आरबीएल बैंक ने जुलाई 2019 में 218,750,100 रुपए, यूनियन बैंक आफ इंडिया ने दस्तावेजों के आधार पर 5,970,000,000 रुपए भास्कर समूह को थमा दिए। आईडीबीआई बैंक ने 750,000,000 रुपए, सेन्ट्रल बैंक आफ इंडिया ने 500,000,000 रुपए, पंजाब एंड सिंध बैंक ने 250,000,000 रुपए, स्टेट बैंक आफ पटियाला ने 432,900,000 रुपए, स्टेट बैंक आफ इंडिया ने 3,150,000,000 रुपए, एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज लिमिटेड ने 6,000,000,000 रुपए भास्कर समूह को थमा दिए जिन्हें न तो समूह लौटा रहा है न ही उससे आय हासिल करके उसे बढ़ा पा रहा है।

    बैंकों से हड़पी गईं इन राशियों की ये पूरी सूची नहीं हैं।प्राप्त राशियों में से ये चंद आंकड़े हैं जो राशियां खुद को कागज पर उद्योगपति बताकर भास्कर समूह ने हड़पी हैं। जिद करो दुनिया बदलो जैसा झांसेवाला स्लोगन देकर भास्कर समूह दिन ब दिन नाममात्र का ब्याज देकर ये राशि प्राप्त करता रहा है। समूह के लालच और ठगी का आलम ये है कि वह बैंकों को ब्याजराशि भी नहीं दे पा रहा है। शिवराज सिंह चौहान जैसी कमजोर सरकार अखबार को विज्ञापन के रूप में भारी धनराशि मुहैया कराती रही जिससे वह बैंकों की किस्त भरकर अधिकारियों को टहलाता रहा। बताते हैं कि एक्सिस बैंक की एक अधिकारी ने ब्याज की रकम जमा न करने पर रमेश चंद्र अग्रवाल को ऐसी डॉट पिलाई थी कि वे स्वयं मध्यप्रदेश सरकार के खजाने से रकम लेकर अहमदाबाद गए थे लेकिन हार्ट अटैक आ जाने की वजह से उनकी मौत हो गई।

    भास्कर समूह ने बैंकों से इतना अधिक कर्ज ले रखा है कि वह इसी मूल रकम भी बैंकों को नहीं लौटा सकता है। उसकी संपत्तियां भी इतनी नहीं हैं कि उन्हें बेचकर जनधन की वसूली की जा सके। समूह पर आयकर ही इतना बाकी है कि यदि वह जुर्माना सहित वसूला जाए तो पूरा समूह बिक जाए और फिर भी कर नहीं भरा जा सकता है। देश में फर्जी उद्योगपतियों का सरगना भास्कर समूह पत्रकारिता के दम पर अपनी झूठी शान बघार रहा है। जब आयकर की जांच शुरु हुई तो इसे पत्रकारिता पर हमला बताने वालों की भीड़ खड़ी हो गई। इन चंद आंकड़ों से समूह की औकात साफतौर पर आंकी जा सकती है। जो मुफ्तखोर इस समूह के साथ खड़े हो रहे हैं उनकी भी जांच कराई जानी जरूरी है ताकि जनधन को गड़पने वाले बदमाशों को आर्थिक विकास की धुरी से बाहर किया जा सके।