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  • मध्यप्रदेश की विरासत को मिला जीआई टैग

    मध्यप्रदेश की विरासत को मिला जीआई टैग

    भोपाल 3 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।भारत का दिल कहे जाने वाले मध्यप्रदेश की 5 बहुत ही प्राचीन शिल्प कला को जीआई टैग के द्वारा भारत की बौद्धिक संपदा अधिकार में शुमार होने का गौरव प्राप्त हुआ है। एमएसएमई मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने मध्यप्रदेश की विरासत को मिली इस ऐतिहासिक पहचान के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हुए विभागीय अधिकारियों को बधाई दी है। इस उपलब्धि को जीआई मैन ऑफ इंडिया के नाम से प्रख्यात पद्मश्री डॉ. रजनी कांत ने अत्यंत गर्व का पल बताया है।

    जीआई रजिस्ट्री चेन्नई के वेबसाइट पर इन उत्पादों के सामने रजिस्टर्ड का स्टेटस आते ही संबंधित शिल्पियों में खुशी की लहर दौड़ गई और मध्यप्रदेश के लिए यह पहल करने वाले सूक्ष्म,लघु,मध्यम उद्यम विभाग सहित अन्य विभागों में भी नई चेतना आ गईं है।

    लगभग एक वर्ष पूर्व ही इन सभी के लिए जीआई का आवेदन खजुराहो स्टोन क्रॉफ्ट, बैतूल भरेवा मेटल क्रॉफ्ट, ग्वालियर पत्थर शिल्प और ग्वालियर पेपर मैशे के लिए नाबार्ड, मध्यप्रदेश ने और छतरपुर फर्नीचर के लिए सिडबी मध्यप्रदेश ने वित्तीय सहयोग प्रदान किया था। एमएसएमई विभाग मध्यप्रदेश के प्रयास से स्थानीय शिल्पियों की संबंधित संस्थाओं द्वारा यह सभी जीआई एप्लिकेशन पद्मश्री डॉ. रजनीकांत के तकनीकी सहयोग से भेजे गए थे।

    नवम्बर माह में ही पन्ना डायमंड को जीआई टैग प्राप्त हुआ है और लगभग 25 उत्पादों की जीआई मिलने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है।

  • सत्ता के लुटेरों को क्यों पनाह दे रही अफसरशाही

    सत्ता के लुटेरों को क्यों पनाह दे रही अफसरशाही

    भारत से अंग्रेजों को विदा हुए सतत्तर साल हो चुके हैं लेकिन उनका लूट का तंत्र आज भी बदस्तूर जारी है। आज भी आला अफसरों में एक वर्ग ऐसा है जो सरकारी संसाधनों को लूटने वालों को पनाह देता रहता है। सैडमैप के संसाधनों की लूटमार में ये कहानी स्पष्ट रूप से सामने आ रही है।सरकारी नौकरियां बेचने वालों के लिए सैडमैप आज एक मुफीद अखाड़ा बन गया है।नौकरशाही के ही एक वर्ग ने गुणवत्ता पूर्ण कार्य बल उपलब्ध कराने के लिए एक कंपनी सेक्रेटरी अनुराधा सिंघई को यहां का एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनाया था। उन्हें पांच सालों के लिए नियुक्ति दी गई थी। उन्होंने अपना काम संभालते ही सैडमैप में जुटे नौकरी माफिया और रिश्वत देकर नौकरी में आए फोकटियों की छुट्टी करनी शुरु कर दी। इससे हड़कंप मच गया और नौकरी माफिया ने कुछ निकाले गए कर्मचारियों को आगे करके ईडी अनुराधा सिंघई पर कथित अनियमितताओं को लेकर प्राथमिकी दर्ज करवा दी। मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो विद्वान न्यायाधीशों ने अनुराधा सिंघई को क्लीनचिट दे दी। उन्होंने अपना काम फिर चालू किया और सैडमैप को भंडार क्रय नियमों के अधिकार दिलाकर संस्थान की आय और बढ़ा दी। जब उन्होंने कार्यभार संभाला था तब सैडमैप की आय लगभग बीस करोड़ रुपए थी, कर्मचारियों को लगभग दस महीनों से तनख्वाह नहीं मिली थी। संस्थान लगभग बंद होने की कगार पर पहुंच गया था। विभिन्न कंपनियों और सरकारी प्रतिष्ठानों से कारोबार लेकर उन्होंने सैडमैप का टर्नओवर बीस करोड़ रुपयों से बढ़ाकर एक सौ तीस करोड़ रुपए कर दिया। जैसे ही ये चमत्कार लोगों की निगाह में आया वैसे ही लुटेरे सत्ता माफिया की लार टपकने लगी। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कुछ सत्ता के दलालों से सांठगांठ करके उन्होंने इस बार ईडी अनुराधा सिंघई को निलंबित करा दिया।

    इस अन्याय के खिलाफ जब वे हाईकोर्ट गईं तो शासन ने सैडमैप के फंड से ही लगभग नौ लाख रुपए निकालकर वकीलों की फौज पर खर्च कर दिए। हाईकोर्ट जबलपुर में जब शासन की ओर से महाधिवक्ता और उनके सहयोगी दर्जन भर वकीलों ने कहा कि निलंबन कोई सजा थोड़ी है। हमने तो केवल दस्तावेजों की जांच करने के लिए ईडी को निलंबित किया है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि ठीक है अभी मामला पूरी तरह पका नहीं है इसलिए शासन को जांच कर लेने दी जाए। जिस तरह इकतरफा निलंबन की कार्यवाही की गई वह प्राकृतिक न्याय सिद्धांत के विरुद्ध थी। सैडमैप एक स्वायत्तशासी निकाय है और उद्योग विभाग के सचिव केवल इसके संरक्षक होते हैं। शासन इस संस्थान को कोई अनुदान भी नहीं देता है। ईडी, उद्योग विभाग का भी अधिकारी नहीं होता है इसके बावजूद श्रीमती सिंघई को उद्योग विभाग में हाजिरी देने के निर्देश दिए गए. संस्थान के लिए करोड़ों रुपए कमाने वाली इस कंपनी सेक्रेटरी को गुजारे भत्ते के रूप निलंबन के बाद मात्र आठ हजार रुपए दिए गए।

    इस अन्याय के विरुद्ध अनुराधा सिंघई ने मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव को पत्र लिखा जिसमें कहा गया कि उन्हें उद्योग विभाग के सचिव आईएएस नवनीत मोहन कोठारी अनावश्यक रूप से प्रताडि़त कर रहे हैं। अपने पत्र में उन्होंने न्याय के लिए अनुरोध करते हुए लिखा कि सैडमैप के अध्यक्ष और सचिव नवनीत मोहन कोठारी अपनी शक्ति और पद का दुरुपयोग करते हुए एक वरिष्ठ महिला अधिकारी का उत्पीड़न, दुर्व्यवहार, मानसिक यातना, अपमान,गलत निलंबन और अब जीवन भत्ता निर्वाह रोक रहे हैं । ऐसे में मुख्यमंत्री और जनप्रतिनिधि होने के नाते आप मामले में हस्तक्षेप करें और न्याय दिलाएं।

    उद्योग विभाग के सचिव ने मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम के कार्यकारी निदेशक सीएस धुर्वे के माध्यम से बीस अगस्त को एक पत्र भेजा और 21 अगस्त तक एक दिन में लगभग डेढ़ लाख पृष्ठों की जानकारी देने का दबाव बनाया। इसके जवाब में ईडी ने पत्र लिखकर निवेदन किया इस इस डेटा को संग्रहित करने में लगभग एक महीने का समय लगेगा इसलिए कृपया जवाब देने की समय सीमा बढ़ाने की कृपा करें। इस पत्र पर उद्योग विभाग ने कोई फैसला नहीं लिया और तीन सितंबर को ईडी को इकतरफा निलंबित कर दिया गया।
    उद्योग विभाग ने एक छोटे अफसर अंबरीश अधिकारी को भेजकर इकतरफा ईडी का कार्यभार हथिया लिया। श्री अंबरीश को विभाग के कुछ कर्मचारियों के साथ ईडी के दफ्तर भेजा गया और जबर्दस्ती ईडी की कुर्सी हथिया ली गई। ईडी को कार्यालय में मौजूद अपना निजी सामान भी नहीं उठाने दिया गया और सुरक्षा के लिए लगाए गए सभी कैमरे बंद कर दिए गए। उद्योग विभाग ने हाईकोर्ट को कहा कि कर्मचारियों के पीएफ, ईसआईसी चालान और फार्म 16 मे कोई छेड़छाड़ न हो सके इसके लिए श्रीमती सिंघई को निलंबित किया गया है जो कि कोई सजा नहीं है। एक स्वायत्तशासी निकाय की ईडी को पद से हटाने के इस षड़यंत्र में सैडमैप के ही फंड से लाखों रुपए निकाले गए और महाधिवक्ता समेत सचिव ने आठ प्रमुख वकीलों को खड़ा करके ऐसा माहौल बनाया कि हाईकोर्ट कोई राहत न दे पाए। यही नहीं अनुकूल रोस्टर का इंतजार करने के नाम पर भी मामले को कई दिनों तक लटकाया गया।

    श्रीमती अनुराधा सिंघई की कार और ड्राईवर छीन लिए गए। गौरतलब ये है कि जिस जानकारी को इकट्ठा करने के लिए उद्योग विभाग उन्हें एक महीने का वक्त नहीं दे रहा था उस जानकारी को अब तक उद्योग विभाग का अमला भी एकत्रित नहीं कर पाया है।फिर वो जानकारियां केंद्र या अन्य विभागों के पास संरक्षित है।जब सैडमैप के कर्मचारियों को दस दस महीनों तक वेतन नहीं मिल पा रहा था तब तो सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग कभी सामने नहीं आया। जिस स्ववित्त पोषित संगठन को अनुराधा सिंघई ने पैरों पर खड़ा किया उनके विरुद्ध कर्मचारियों को मानव ढाल बनाकर हमले किए जा रहे हैं। जिस नौकरी माफिया को सैडमैप से निकाल बाहर किया गया था उसने एक होनहार महिला अधिकारी का चरित्र हनन करने के लिए फर्जी मोबाईल चैट बनाया को पुलिस जांच में सामने आ गया। इस कूटरचना के आरोपी सिक्योरिटी एजेंसी के संचालक और उसके कर्मचारी का अपराध भी पुलिस ने उजागर कर दिया जिससे षड़यंत्र का पूरा खुलासा हो गया है। तब भी उद्योग विभाग ने आगे आकर कभी नौकरी माफिया के विरुद्ध सैडमैप को सहयोग नहीं किया।

    उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि एक महिला अधिकारी ने अपने पसीने और परिश्रम से मृत संगठन को पुर्नजीवित किया तो लोग फसल काटने आ गए और बीज बोने वाले को कुचलने लगे। इन लोगों को पुरुष भी कैसे कहा जा सकता है। एक झुंड में आकर ये एक महिला का शिकार करने में जुटे हुए हैं। ईडी ने अपने जिन सहयोगियों को संविदा आधार पर नियुक्त किया था उन्हें तोड़ने के लिए सचिव ने अध्यक्ष के रूप में फैसला लिया कि उन्हें सैडमेप में नहीं बल्कि किन्हीं अन्य सूचीबद्ध एजेंसियों के पेरोल पर रखा जाए। इसके लिए एक मानव संसाधन समिति का गठन किया जाए। ईडी ने सचिव को संभावित अधिकारियों की सूची भेजकर कहा कि आप आपने स्तर पर इस सूची को तय कर दीजिए । इसके बावजूद किसी समिति को गठित नहीं किया गया ताकि ईडी अपने सहयोगियों की टीम बढ़ाकर लंबित कार्यों का निपटारा न कर पाएं।

    लगभग तीन सालों में श्रीमती सिंघई ने सैडमेप का टर्नओवर चार गुना तक बढ़ा दिया है। नौकरियां बेचने वाले गिरोह को निकाल बाहर किया गया। मैनपावर आऊटसोर्सिंग उद्योग को साफ सुथरा बनाकर सरकारी कार्यालयों में संविदा के आधार पर नियुक्तियां सरल बना दी गईं। यही वजह थी कि सैडमेप को मध्यप्रदेश भंडार क्रय नियम अंतर्गत नैमेत्तिक नोडल एजेंसी बनाया गया।

    श्रीमती अनुराधा सिंघई ने अपने पत्र में लिखा है कि उन्होंने अगले दो सालों में लगभग पचास लाख नौकरियां सृजित करके रोजगार समस्या का समाधान करने का बीड़ा उठाया है। इस लक्ष्य को वे लगातार हासिल करती जा रहीं हैं जबकि नौकरी माफिया के लोग इन बेरोजगारों से नौकरी के एवज में रिश्वत लेकर बेरोजगारों और राज्य के साथ गद्दारी करने का षड़यंत्र कर कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि उनका गलत निलंबन रद्द किया जाए और उन्हें सम्मान के साथ बहाल किया जाए। उनके वित्तीय नुक्सान की भरपाई की जाए और वास्तविक दोषी को दंडित किया जाए।

    इस पत्र के जवाब में आईएएस और सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग के सचिव नवनीत कोठारी का कहना है कि श्रीमती सिंघई कई छोटे कर्मचारियों का वेतन नहीं दे रहीं थीं इसलिए उन्हें निलंबित किया गया है। जब उनसे कहा गया कि जिन कर्मचारियों की नौकरियां संदिग्ध हैं तो उन्हें वेतन क्यों दिया जाना चाहिए तो उन्होंने कहा कि हम मामले की जांच करा रहे हैं। उनके हटाए गए नौकरी माफिया को दुबारा सैडमैप में जगह दिए जाने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मैं पिछले सात महीनों से सचिव पद पर आया हूं इससे पुराने मामलों के बारे में मैं कुछ नहीं बोल सकता।

    पाकिस्तान में सेना ने जिस तरह हर कमाई के तंत्र पर अपना कब्जा जमा लिया है और वहां कि अर्थव्यवस्था छिन्न भिन्न कर दी है उसी प्रकार मध्यप्रदेश में नौकरशाही ने हर कमाई के तंत्र पर अपना सिक्का जमा लिया है। लगभग अस्सी हजार करोड़ का स्थापना व्यय हड़प जाने वाला सरकारी तंत्र जनता की समस्याओं का समाधान देने में असफल साबित हो रहा है। उत्पादकता बढ़ाने के स्थान पर उद्यमियों से लूटमार की जाने लगी है।मोदी सरकार ने राज्य की आय बढ़ाने का लक्ष्य तय करके डाक्टर मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर भेजा है। चेतन काश्यप जैसे हुनरमंद उद्योगपति सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग के मंत्री बनाए गए हैं इसके बावजूद उनकी नाक तले नौकरी माफिया का षड़ंयत्र बदस्तूर जारी है।व्यापम भर्ती घोटाले की कहानियों की स्याही अभी सूखी नहीं है और एक बार फिर सेडमैप से नौकरियां बेचे जाने की नींव रखी जाने लगी है।उम्मीद की जानी चाहिए कि इस विषय पर राज्य के नीति निर्धारक एक बार गंभीरता से विचार करेंगे और समस्या का समाधान ढूंढ़ने में अपने हुनर का प्रयोग करेंगे। प्रशासनिक प्रमुख को बदलकर राज्य सरकार ने सुशासन की अपनी मंशा तो जाहिर कर दी है देखना है कि इसका असर कितने दिनों में साकार होता नजर आता है।

  • उमाजी की अर्थनीति के असली हीरो चेतन काश्यप

    उमाजी की अर्थनीति के असली हीरो चेतन काश्यप


    दिग्विजय सिंह की दिग्भ्रमित सरकार को 2003 में घाटी पर उतारकर उमाश्री भारती ने जिस भारतीय जनता पार्टी की सरकार को सत्ता दिलाई थी वह सत्ता में आते ही आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के फार्मूले पर काम करने लगी। वैश्विक सूदखोरों की लॉबी ने उमाजी के पंच ज अभियान को सत्ता से धकेलकर जिस कर्ज आधारित विकास की अर्थव्यवस्था को सत्तासीन कराया वह बीस सालों तक छायी रही । बिजली ,सड़क और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक संस्थाओं ने राज्य को भरपूर कर्ज मुहैया कराया। शिवराज जी को इस दौर के लिए सत्ता में भेजा गया था तो उन्होंने आधारभूत ढांचे का धन जनता के बीच बांटकर खूब वाहवाही बटोरी। आज शिवराज सिंह चौहान जनता के बीच बड़ा ब्रांड बन चुके हैं लेकिन अब राज्य उस अंधी गली में पहुंच गया है कि उसे विकास के नए प्रतिमान तलाशने पड़ रहे हैं। नए मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के सामने चुनौती है कि वे विकास के उत्पादक मॉडल को जमीन पर उतारें और राज्य की समस्याओं का उचित समाधान तलाशें । ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने रतलाम शहर के विधायक और डॉ.मोहन यादव केबिनेट के मंत्री चेतन काश्यप के माध्यम से जो संदेश दिया है वह गौर करने लायक है।
    रतलाम शहर के विधायक चेतन काश्यप अपनी दानशीलता और जमीनी विकास को महत्व देने के लिए मॉडल बन चुके हैं। उनके बेटे कारोबार करते हैं जबकि चेतन काश्यप राजनीति की रीढ़ बने हुए हैं। उन्होंने जिन प्रकल्पों को साकार किया है वे आत्मनिर्भर समाज के लिए मार्गदर्शक बन गए हैं। उन्होंने सौ लोगों को ऐसे आवास बनवाकर दिए हैं जो आत्मिर्भरता की राह पर चलकर समृद्ध हो रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उन्होंने रोजगार को जोड़कर सुखमय संसार की गारंटी सुनिश्चित की है। उनके विशाल आवास की भोजनशाला कार्यकर्ताओं और जरूरतमंदों को समाजसेवा का मंच देती है। पूरे नगर और आसपास के गांवों में चेतन काश्यप को लक्ष्मी पुत्र माना जाता है। लोग जानते हैं कि भाई जी यदि खड़े हैं तो वहां सुशासन खुद ब खुद हाथ बांधे खड़ा हो जाएगा। यही वजह है कि वे चुनाव में गली गली की धूल नहीं फांकते। जनता स्वयं उनके लिए चुनाव लड़ती है।ऐसे आदर्श लोक सेवक यदि हर विधानसभा को मिलने लगें तो एक पंचवर्षीय योजना में राज्य की काया ही पलट जाए।
    कांग्रेस जिस भाजपा को सेठों और बनियों की पार्टी कहकर उपहास उड़ाती थी उस भाजपा ने उन्हें पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया। राज्य की अर्थव्यवस्था में किस ढांचे की जरूरत है वे अच्छी तरह जानते हैं। पिछले दो दशकों में भाजपा ढांचागत विकास पर कार्य कर रही थी तब चेतन काश्यप की भूमिका का उपयोग किया जा सकता था लेकिन शिवराज जी और उनके बटोरनाथ मंत्री अपने काम में किसी प्रकार का खलल नहीं चाहते थे। यही वजह है कि उन्होंने चेतन काश्यप की प्रतिभा का इस्तेमाल करने पर कोई गौर नहीं किया। चेतन काश्यप रतलाम में जो गोल्ड सोक (सोने का बाजार)बनवा रहे हैं। वह जब आकार ले लेगा तो रतलाम देश की प्रमुख सोने की मंडी बन जाएगा। यहां बनने वाले गोल्ड के आभूषण दुबई की तरह देश और विदेश के लिए आकर्षण का केन्द्र बन जाएंगे। सोने के कारोबार को इससे पहले इतनी कुशलता से दुनिया में कहीं नहीं खड़ा किया गया है।ऐसे ढेरों विचार काश्यप की झोली में हर वक्त मौजूद रहते हैं।
    खुद चेतन काश्यप बताते हैं कि जैन साध्वी ने उन्हें प्रेरणा दी थी कि वे अपने हुनर और भाग्य की सौगात समाज के पिछड़े और दलित लोगों को मुख्यधारा में लाने के दें। तबसे काश्यप का लक्ष्य बन गया है कि वे विकास की दौड़ में पिछड़ चुके नागरिकों का जीवन संवारने में जुट गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब मध्यप्रदेश में अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की तो उन्होंने रतलाम शहर को ही चुना। पहली चुनावी सभा में उनके साथ चेतन काश्यप और मंदसौर के सांसद सुधीर गुप्ता भी मौजूद थे। सुधीर गुप्ता संसद में लोक लेखा समिति, वित्त समिति, रसायन व उर्वरक समितिके अलावा लोकसभा आवास समिति की जवाबदारी भी संभालते हैं। वे प्रधानमंत्री के उन प्रमुख सहयोगियों में शामिल हैं जो भाजपा की विकास की अवधारणा की आधारशिला हैं।
    चेतन काश्यप को मंत्री बनाकर डॉक्टर मोहन यादव सरकार ने जता दिया है कि मध्यप्रदेश अब भाजपा की उस सुविचारित विकास नीतियों पर अमल करने जा रहा है जो देश को न केवल पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बना देंगे बल्कि इस लक्ष्य से भी कई गुना आगे निकल जाएंगे। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने चेतन काश्यप को सलाह देकर विकास के इस मॉडल के प्रति अपनी सहमति जताई है।
    उमा भारती अपने भाषणों में कहती रहीं हैं कि वे दलितों और पिछड़ों को विकसित तभी मानेंगी जब वे खुद शहरों के प्रमुख बाजारों में अपने प्रतिष्ठान खड़े करके देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने लगें। समाज में वैमनस्य फैलाती कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी जैसे दलों के लिए भाजपा ने जो प्रतिमान खड़े किए हैं वे हतप्रभ कर देने लायक हैं। पचहत्तर सालों के बाद मध्यप्रदेश की सरकारी नौकरियों में मात्र चार लाख दलितों और पिछड़ों को रोजगार मिल सके हैं जबकि भारतीय जनता पार्टी ने अकेले लाड़ली बहना योजना से चालीस लाख दलितों के घर में आय का दीपक जला दिया है। अन्य योजनाओं का आंकड़ा देखा जाए तो पिछड़ों और दलितों की राजनीति करने वाले तमाम राजनीतिक दल अवाक रह जाएंगे। विकास का वामपंथी मॉडल जिन श्रमिकों की बात करता है भाजपा ने उन्हें समाज की उत्पादकता में हिस्सेदार बनाकर सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने हुकुमचंद मिल और ग्वालियर की विनोद मिल के परिसमापन की जो पहल की वह भाजपा के श्रमिकों के प्रति समर्पण की आहट है।
    नई सरकार राज्य में पूंजी उत्पादन का जो मॉडल खड़ा करना चाह रही है उसकी झलक अभी से मिल गई है। उमा भारती ने चेतन काश्यप के बहाने एक बड़ी बहस को जन्म दिया है। वे कह रहीं हैं कि चेतन काश्यप को वेतन लेना चाहिए और अपने कर कमलों से उसे समाज की बेहतरी के लिए खर्च करना चाहिए। उनके सेवा कार्य तभी भाजपा के समर्पण के प्रकाश स्तंभ बन पाएंगे। आने वाले समय में राज्य एक बड़ी बहस में शामिल होने जा रहा है जिसमें एक ओर राज्य को कर्जदार बनाकर वाहवाही लूटने वाली लॉबी खड़ी होगी वहीं दूसरी ओर वित्तीय संसाधनों का विकास करके देश को बुलंदी पर पहुंचाने वाले स्वयंसेवक खड़े होंगे। तब विकास की अवधारणा का अंतर साफ समझा जा सकेगा।