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  • रिटायर्ड आईएएस राकेश अग्रवाल की हत्या किस उद्योगपति ने कराई

    रिटायर्ड आईएएस राकेश अग्रवाल की हत्या किस उद्योगपति ने कराई

    भोपाल 05 अक्टूबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामला केवल लूट के लिए हत्या तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। पुलिस की प्राथमिक जांच में केयरटेकर वरुण कुमार मुख्य संदेही है और वारदात के बाद उसके लगातार ठिकाने बदलने, मृतक का मोबाइल आगरा में मिलने, घर में गैस फैलाने की कोशिश और अग्रवाल से जुड़े करीब पांच करोड़ रुपये के पुराने वित्तीय विवादों ने जांच के कई रास्ते खोल दिए हैं।उनकी नौकरी के दौरान उन्होंने जिन प्रोजेक्ट पर काम किया उनसे जुड़े लोगों से भी जानकारी बटोरी जा रही है। हालांकि हत्या का अंतिम मकसद अभी पुलिस ने स्पष्ट नहीं किया है।

    30 सितंबर की रात सूरज नगर स्थित घर में राकेश अग्रवाल की हत्या हुई। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार धारदार सर्जिकल ब्लेड से उनका गला काटा गया। घटनास्थल पर संघर्ष के स्पष्ट निशान नहीं मिले। पुलिस का अनुमान है कि वारदात उस समय हुई जब अग्रवाल सो रहे थे। हत्या के बाद घर की अलमारियों के ताले टूटे मिले। परिवार की ओर से सोने की चेन, अंगूठियां, महंगी घड़ियां, नकदी और मोबाइल सहित सामान गायब होने की जानकारी दी गई। इसी आधार पर पुलिस ने हत्या के साथ लूट/डकैती के कोण से भी जांच शुरू की।

    घटना के बाद सबसे महत्वपूर्ण सुराग केयरटेकर वरुण कुमार का गायब होना है। वह हत्या से करीब तीन दिन पहले ही एक निजी एजेंसी के माध्यम से अग्रवाल के घर काम पर आया था। वारदात के बाद वह घर से निकला और सीसीटीवी फुटेज में बैग के साथ दिखाई दिया। पुलिस ने उसके भागने का रूट तैयार किया है। ताजा जांच में उसकी गतिविधियां आगरा और फिर मथुरा-वृंदावन क्षेत्र तक पहुंची हैं। 5 अक्टूबर को पुलिस ने उसकी तलाश के लिए 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया और मध्यप्रदेश सहित पांच राज्यों में टीमें लगाई हैं।

    वरुण के भागने के दौरान मृतक का मोबाइल भी उसके साथ था। मोबाइल बाद में आगरा में मिला। वहां जिस युवक के पास फोन मिला, उसने पुलिस को बताया कि उसे मोबाइल रास्ते में पड़ा मिला था। पुलिस यह पता लगा रही है कि फोन वरुण से उस युवक तक कैसे पहुंचा। एक जांच कोण यह भी है कि वरुण ने फोन बेच दिया हो या किसी परिचित को दे दिया हो। मोबाइल की तकनीकी जानकारी और वरुण के पुराने नंबरों की गतिविधियों से उसके भागने की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

    हत्या के बाद घर में गैस फैलने की घटना ने भी जांच को महत्वपूर्ण दिशा दी है। पुलिस के अनुसार रसोई में गैस सिलेंडर की पाइप लाइन अलग की गई थी और गैस हवा में फैल रही थी। पास में गर्म इलेक्ट्रिक प्रेस रखे जाने की बात भी जांच में सामने आई है। पुलिस को आशंका है कि हत्या के बाद घर में आग लगाकर साक्ष्य नष्ट करने की कोशिश की गई। यह बिंदु इस बात की जांच को महत्वपूर्ण बनाता है कि वारदात के बाद आरोपी केवल भागना चाहता था या घटनास्थल के सबूत मिटाने की भी योजना थी।

    जांच का एक दूसरा और महत्वपूर्ण सिरा अग्रवाल से जुड़े पुराने आर्थिक विवादों तक पहुंचा है। पुलिस को करीब पांच करोड़ रुपये से जुड़े दो मामलों की जानकारी मिली है। इनमें एक मामला करीब एक करोड़ रुपये का है, जिसमें गुरुग्राम निवासी अजीत पाटनी के खिलाफ अग्रवाल ने शिकायत की थी। आरोप था कि कंपनी में निवेश और बेहतर रिटर्न का भरोसा देकर उनसे रकम ली गई। दूसरा मामला करीब चार करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा बताया गया है, जिसमें अवधेश दुबे का नाम सामने आया है। दोनों मामले न्यायिक प्रक्रिया में बताए जा रहे हैं। पुलिस अब इन मामलों के दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन और संबंधित लोगों से अग्रवाल के संपर्क की जांच कर रही है।

    इन आर्थिक विवादों को लेकर फिलहाल पुलिस ने हत्या से कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं किया है। लेकिन जांच में इनका सामने आना महत्वपूर्ण है। पुलिस पिछले एक वर्ष के दौरान अग्रवाल के संपर्कों, फोन रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और निवेश संबंधी गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है। यही जांच यह स्पष्ट कर सकती है कि इन पुराने विवादों का हत्या से कोई संबंध था या वे केवल अलग-अलग मामले थे।

    जांच में सुपारी या पहले से योजना बनाकर हत्या किए जाने की संभावना की भी चर्चा हुई है। इसका आधार यह है कि वरुण को घर के अंदर की व्यवस्था और अग्रवाल की दिनचर्या की जानकारी बहुत कम समय में हो गई थी तथा हत्या के बाद उसने सामान लेकर भागने और कथित तौर पर साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया। कुछ रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से यह भी कहा गया है कि उसके आने से पहले घर की रेकी की गई थी या हत्या की योजना पहले से हो सकती थी। हालांकि इस कोण की पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस ने किसी कथित सहयोगी या सुपारी देने वाले व्यक्ति का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।

    एक और महत्वपूर्ण सवाल केयरटेकर एजेंसी की भूमिका का है। वरुण को वर्मा होम हेल्थ केयर एजेंसी के माध्यम से काम पर भेजा गया था। जांच में एजेंसी के संचालन, वरुण के दस्तावेज और उसके पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया की पड़ताल की जा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार एजेंसी के पास वरुण का आधार, पैन और चरित्र प्रमाणपत्र था, लेकिन पंजाब के नाभा थाने से जारी चरित्र प्रमाणपत्र की वैधता 1 मई 2025 को समाप्त हो चुकी थी और भोपाल में नया पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया था। एजेंसी के संचालन और पंजीयन को लेकर भी सवाल उठे हैं।

    पुलिस अब तक परिवार, घरेलू सहायकों, ड्राइवरों, माली, सफाईकर्मियों और अन्य लोगों सहित करीब 15 व्यक्तियों के बयान दर्ज कर चुकी है। वरुण के पिता, बहन और परिचितों से भी पूछताछ की गई है। पुलिस उसके पुराने मोबाइल नंबरों और डिजिटल संपर्कों को खंगाल रही है। ताजा जांच में यह भी सामने आया है कि उसके पुराने मोबाइल नंबर दोबारा सक्रिय हुए हैं, जिससे पुलिस उसके संपर्कों और संभावित मददगारों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

    इस हत्याकांड में अभी कई सवालों के जवाब बाकी हैं। क्या हत्या का उद्देश्य केवल लूट था? क्या आर्थिक विवादों का इससे कोई संबंध है? क्या वरुण ने अकेले वारदात की या किसी की मदद ली? आगरा में मिला मोबाइल वहां तक कैसे पहुंचा? गैस छोड़ने का उद्देश्य वास्तव में साक्ष्य मिटाना था या कोई दूसरा कारण था? और सबसे महत्वपूर्ण, वरुण को अग्रवाल के घर भेजने से पहले उसका सत्यापन किस स्तर पर हुआ था?

    फिलहाल पुलिस की तलाश वरुण कुमार पर केंद्रित है। उसकी गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सूरज नगर की इस वारदात के पीछे लूट, व्यक्तिगत विवाद, पहले से रची गई योजना या किसी अन्य कारण की भूमिका थी। पांच करोड़ रुपये के पुराने वित्तीय विवाद और केयरटेकर की संदिग्ध गतिविधियां जांच के महत्वपूर्ण बिंदु जरूर बन गई हैं, लेकिन इनके बीच संबंध स्थापित होना अभी बाकी है।