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  • सेवा का मुनाफा बांटता इक्विटास बैंक

    सेवा का मुनाफा बांटता इक्विटास बैंक

    भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में आम तौर पर बैंक को जमा लेने, ऋण देने और मुनाफा कमाने वाली वित्तीय संस्था के रूप में देखा जाता है। लेकिन इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने इस पारंपरिक परिभाषा में एक महत्वपूर्ण नया अध्याय जोड़ने का प्रयास किया है। यहां बैंकिंग को बैलेंस शीट और मुनाफे का कारोबार बनाने के साथ आर्थिक रूप से वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम भी बनाया गया है। इस सोच के केंद्र में रहे हैं बैंक के संस्थापक और पूर्व एमडी एवं सीईओ पी. एन. वासुदेवन।

    इक्विटास की कहानी 2007 में माइक्रोफाइनेंस संस्था के रूप में शुरू हुई और 2016 में यह बैंक बना। वासुदेवन की प्रबंधन शैली की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने छोटे और अनौपचारिक कारोबार करने वाले लोगों को बैंकिंग व्यवस्था के योग्य बनाने के बजाय बैंकिंग व्यवस्था को उनकी जरूरतों के अनुरूप ढालने का प्रयास किया। बैंक ने छोटे व्यापारियों, वाहन मालिकों, लघु उद्यमियों और निम्न आय वर्ग के ग्राहकों के लिए ऐसे ऋण मॉडल विकसित किए जिनमें स्थानीय आर्थिक परिस्थितियों और ग्राहक की वास्तविक क्षमता को महत्व दिया गया। बैंक के दस्तावेजों के अनुसार समय के साथ ऋण पोर्टफोलियो को असुरक्षित माइक्रोफाइनेंस से अधिक सुरक्षित ऋणों की ओर मोड़ा गया। 2024-25 में बैंक के लगभग 88 प्रतिशत ऋण सुरक्षित थे।

    यही परिवर्तन इक्विटास की प्रबंधन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। केवल तेजी से ऋण बांटना लक्ष्य नहीं रहा, बल्कि जोखिम को समझते हुए ऋण की गुणवत्ता सुधारना भी प्राथमिकता बनी। छोटे व्यवसाय ऋण इसका प्रमुख उदाहरण है। 2024-25 में Small Business Loans का पोर्टफोलियो 25 प्रतिशत बढ़कर 16,383 करोड़ रुपये हुआ और इस खंड का GNPA 2.54 प्रतिशत रहा। बैंक ने डिजिटल माध्यम से भी इस कारोबार को विस्तार दिया।

    वासुदेवन की सोच का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू था—ग्राहक को केवल उधार लेने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि भविष्य का बैंकिंग ग्राहक और उद्यमी मानना। यही कारण है कि बैंक ने डिजिटल बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, इन-हाउस UPI अवसंरचना और ग्राहक संबंध प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में निवेश किया। 2025 में बैंक ने ‘Equitas 2.0’ क्लाउड-नेटिव डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म शुरू किया और UPI infrastructure को भी अपने नियंत्रण में लाने की दिशा में कदम बढ़ाया।

    इक्विटास की सबसे अलग पहचान हालांकि ‘Beyond Banking’ है। बैंक अपनी आधिकारिक जानकारी में कहता है कि वह सालाना शुद्ध लाभ का 5 प्रतिशत तक Equitas Development Initiatives Trust और Equitas Healthcare Foundation के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्तीय समावेशन और सामाजिक परिवर्तन पर खर्च करता है। बैंक के अनुसार उसकी इन पहलों से अब तक लगभग 1.47 करोड़ लोगों को लाभ पहुंचा है। इनमें स्वास्थ्य शिविरों के 81.98 लाख से अधिक लाभार्थी, 7.12 लाख से अधिक महिलाओं का कौशल प्रशिक्षण, 3.39 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार और 29,000 से अधिक मरीजों का श्रंगेरी शारदा इक्विटास अस्पताल में उपचार शामिल है।

    श्रंगेरी शारदा इक्विटास अस्पताल इस विचार का सबसे प्रभावशाली उदाहरण है। श्रंगेरी शारदा पीठ (मठ)के सहयोग से स्थापित यह अस्पताल कैंसर और मल्टी-स्पेशियलिटी उपचार को अपेक्षाकृत सुलभ बनाने की दिशा में काम करता है। यहां बैंकिंग की कमाई का एक हिस्सा ऐसी व्यवस्था खड़ी करने में लगाया जा रहा है जिसका प्रत्यक्ष लाभ उन लोगों तक पहुंचता है जो महंगे स्वास्थ्य उपचार का खर्च उठाने में कठिनाई महसूस करते हैं। इसीलिए ‘आपका पैसा केवल ब्याज नहीं कमाता, बल्कि समाज में भी काम करता है’—इक्विटास के ‘Beyond Banking’ संदेश का मूल आधार है।

    अब प्रश्न यह है कि निवेशक और जमाकर्ता इक्विटास को किस नजर से देखें? इसका उत्तर केवल सामाजिक कार्यों में नहीं, बैंक की वित्तीय प्रगति में भी तलाशना होगा। दिसंबर 2025 तक बैंक के सकल अग्रिम लगभग 43,269 करोड़ रुपये पहुंच गए थे। सितंबर 2025 की तुलना में तिमाही आधार पर 10.60 प्रतिशत और दिसंबर 2024 की तुलना में 15.86 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई।

    जनवरी 2026 में जारी तीसरी तिमाही के परिणामों में बैंक ने 90 करोड़ रुपये का तिमाही शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही से 36 प्रतिशत अधिक था। सकल अग्रिम में 16 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई, जबकि वितरण 28 प्रतिशत बढ़कर 6,557 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। बैंक की पूंजी पर्याप्तता 20.47 प्रतिशत रही और लागत-ए-धन घटकर 7.13 प्रतिशत हुई।फिजूलखर्ची रोककर बैंक अपने ग्राहकों के बीच मुनाफा बांटने की जो ईमानदारी दिखाता है वह बैंक के कारोबार को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।

    इन आंकड़ों के बीच एक सावधानी भी जरूरी है। माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में दबाव के कारण 2025 की पहली तिमाही में बैंक को 330 करोड़ रुपये के अतिरिक्त प्रावधान करने पड़े थे और उस तिमाही में 224 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज हुआ था। बाद की तिमाहियों में लाभ और कारोबार में सुधार दिखाई दिया। इसलिए इक्विटास को जोखिम-मुक्त बैंक मानना उचित नहीं होगा। बैंकिंग में हमेशा ऋण गुणवत्ता, ब्याज दर, जमा वृद्धि, पूंजी पर्याप्तता और नियामकीय जोखिम पर नजर रखना आवश्यक है। इक्विटास बैंक ने अपने परिचालन की लागत घटाकर एकत्रित पूंजी के उचित निवेश से ज्यादा मुनाफा कमाया। यही वजह है कि आज बैंकिंग कारोबार में ये बैंक अपने निवेशकों को सबसे ज्यादा मुनाफा दिला पा रहा है।

    फिर भी इक्विटास की विशेषता यह है कि उसने एक कठिन प्रश्न का व्यावहारिक उत्तर देने की कोशिश की है—क्या बैंक ग्राहक के पैसे को सुरक्षित रखते हुए उसे आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बना सकता है? पी. एन. वासुदेवन की प्रबंधन सोच ने इसी प्रश्न को बैंक की संस्कृति का हिस्सा बनाया। उनके नेतृत्व में विकसित मॉडल में वित्तीय समावेशन, डिजिटल तकनीक, सुरक्षित ऋण, ग्राहक विश्वास और सामाजिक उत्तरदायित्व को एक साथ रखा गया।

    जमाकर्ता के लिए इसका अर्थ यह है कि बैंक चुनते समय केवल अधिक ब्याज दर देखना पर्याप्त नहीं है। बैंक की वित्तीय स्थिति, जोखिम प्रबंधन, पूंजी और नियामकीय सुरक्षा भी देखनी चाहिए। इक्विटास की जमा राशि भी अन्य पात्र बैंक जमाओं की तरह लागू नियमों के अनुसार जमा बीमा व्यवस्था के दायरे में आती है। इसलिए बड़े निवेश को केवल आकर्षक ब्याज के आधार पर किसी एक बैंक में केंद्रित करने के बजाय अपनी जोखिम क्षमता और नियामकीय सीमाओं को ध्यान में रखना अधिक समझदारी है।

    इक्विटास की वास्तविक उपलब्धि शायद यही है कि उसने बैंकिंग को ‘पैसे का कारोबार’ भर न मानकर ‘विश्वास का कारोबार’ बनाने की कोशिश की है। जब बैंक की जमा राशि छोटे उद्यमी को कारोबार खड़ा करने में मदद करती है, किसी महिला को कौशल देकर रोजगार से जोड़ती है, किसी बच्चे को शिक्षा देती है और किसी जरूरतमंद मरीज को इलाज उपलब्ध कराती है, तब बैंकिंग की परिभाषा कुछ व्यापक हो जाती है।यही वजह है कि