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  • सुशासन के सहयोगी उपकरण बने डाटा सेंटर का अवलोकन करने पहुंचे मुख्य सचिव

    सुशासन के सहयोगी उपकरण बने डाटा सेंटर का अवलोकन करने पहुंचे मुख्य सचिव


    भोपाल, 28 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने स्टेट डाटा सेंटर की कार्य प्रणाली का अवलोकन किया और अपेक्षा की है कि पीएम गति शक्ति से समन्वय कर डाटा का आदान प्रदान करें तथा राज्य शासन के सभी विभाग इस ऐप का राज्य की जनहितकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिक से अधिक उपयोग करें। मुख्य सचिव श्री जैन ने डाटा सेंटर की गतिविधियों पर संतोष व्यक्त किया और सेंटर के विस्तार के लिए प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव श्री एम. सेल्वेंद्रम और एमपी एसईडीसी के एमडी श्री आशीष वशिष्ठ और प्रोजेक्ट डायरेक्टर, स्वान श्री अंशुमान राज भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
    मुख्य सचिव श्री जैन ने डाटा सेंटर की कार्यप्रणाली का काफी सूक्ष्मता से जायजा लिया। उन्होंने ड्रोन डाटा डिपॉजिटरी का अवलोकन किया और खनिज, जल जीवन मिशन, ग्रामीण सड़क, सेंट्रल विस्टा जैसी प्रोजेक्ट के लिए किए जा रहे आन लाइन कार्य को भी देखा। उन्होंने मौके पर उपस्थित ग्वालियर के पटवारी से भी आधुनिक तकनीक से नक्शा आदि बनाने की जानकारी ली।
    मुख्य सचिव श्री जैन ने इस परियोजना को आमजन के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जीआईएस लैब से नक्शा विहीन और विस्थापित ग्रामों के नक्शा आदि को तैयार करने के उनके विजन को गुणवत्ता से पूर्ण होते देखना सुखद और सराहनीय है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जिलों में जीआई सिस्टम के लिए एक्सपर्ट की नियुक्ति की जाए और अभी जिन 28 जिलों में यह सुविधा है वहां के कार्यों की जानकारी ली जाए।
    मुख्य सचिव श्री जैन ने मध्यप्रदेश की सभी शासकीय वेबसाइट और डाटा की सुरक्षा के लिए किए जा रहे टूल आधारित कार्य का अवलोकन किया। उन्होंने साइबर अटैक से निबटने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सूक्ष्मता से जानकारी ली। मुख्य सचिव ने MPSEDC एवं MP SIRT की टीम की सराहना की है, जिन्होंने राज्य डाटा सेंटर को हैक करने के एक संगठित प्रयास की पहचान कर रिवर्स इंजीनियरिंग के माध्यम से उसके स्रोत का पता लगाया तथा चिन्हित की गई इंट्रूज़न्स को सैनिटाइज़ करने के लिये प्रभावी कार्रवाई की। इसके अतिरिक्त, टीम द्वारा भारत सरकार को पूरे देश में इसी प्रकार के हैकिंग प्रयासों की पहचान करने में सहयोग दिया तथा उनकी रोकथाम के लिये एडवाइजरी जारी करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप यह सुविधा अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान एवं प्रतिष्ठा प्राप्त कर चुकी है।
    मुख्य सचिव श्री जैन को बताया गया कि डाटा सेंटर की क्षमता बढ़ाने के लिए एआई आधारित सर्वर और जीपीयू स्थापित किए जाने की योजना है। मुख्य सचिव श्री जैन ने डाटा सेंटर संचालन की क्षमता 6 से 10 मेगावाट किए जाने के निर्देश दिए।
    मुख्य सचिव श्री जैन ने एमपीई सेवा एप्लिकेशन सहित अन्य ऐप की जानकारी ली तथा निर्देश दिए कि निर्धारित अवधि में सभी एप्लिकेशन तैयार करें, जिससे आमजन के लिए उपयोग में लाये जा सके।

  • बैंकों के हजारों करोड़ दबाए बैठे लोग नहीं चाहते दबंग नौकरशाही

    बैंकों के हजारों करोड़ दबाए बैठे लोग नहीं चाहते दबंग नौकरशाही

    भोपाल,23 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटऱ)। बैंकों की रकम दबाकर बैठा मीडिया माफिया हो या जमीनों पर कब्जा जमाने वाला भू माफिया,आपराधिक वारदातों में संलग्न दबंग, सरकारी योजनाओं को गड़प जाने वाले राजनेता और ठेकेदार कोई नहीं चाहता कि उनके विरुद्ध लंबित शिकायतें सुनी जाएं और उनका निराकरण हो। यही वजह  है कि जब मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और राजस्व अधिकारियों को शिकायतों का निराकरण करने की नसीहत दी तो माफिया ताकतों के टुकड़खोरों ने बात का बतंगड़ बना दिया। सहज संवाद की घटना को इस तरह प्रस्तुत किया गया मानों मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव कलेक्टरों को चोर कहना चाहते हैं। सरकार के मीडिया सलाहकारों ने इस मुद्दे पर खंडन जारी करवाकर तथ्य सामने रखे तो खबर का वैसा ही मंडन हो गया जैसा कि पहले से अपेक्षित था।

                   जनता के हित में उठी एक आवाज को कुचलने में जुटी माफिया ताकतें बार बार ये स्थापित करने का प्रयास कर रहीं हैं कि मानों सीएस ने नौकरशाही की मैली कुचैली तस्वीर को स्वीकार करके हथियार डाल दिए हों। कुछ नादान कलम घिस्सू ,जनहित की इस ललकार को  सीएस की चूक बताने में जुट गए हैं। शासन की ओर से कहा जा रहा है कि खबर को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है पर कोई मानने को राजी नहीं है। अब इसे अनपढ़ प्रदेश नहीं तो क्या कहा जाए जो जनहित में उठी आवाज के विरोध में अपनी खुशी तलाश रहा है। सभी जानते हैं कि शिवराज सिंह चौहान ने सुशासन के नाम पर लगभग दो दशकों तक जिस नौकर शाही को अपने सिर पर बिठाकर रखा वह आज बेलगाम हो चुकी है। कहीं राजनेताओं ने नौकरशाही को अपने दरवाजे बंधा कुत्ता बना दिया है कहीं संघ के नाम पर अफसरों के हाथ बांध दिए गए हैं। विपक्ष तो पहले से उन मुद्दों पर राजनीति करता रहा है जो समाज को सुधारने के बजाए बांटने का काम करते हैं।

                  कांग्रेस के नेता जीतू पटवारी ने सीएस की आवाज को मुख्यमंत्री और सरकार की असफलता दर्शाने के लिए प्रेस वार्ता तक बुला डाली। उनका कहना है कि सीएस ने जाने अनजाने में एक सच्चाई उजागर कर दी है। वे शासन के पक्ष पर गौर करने को राजी नहीं हैं कि मुख्य सचिव ने जो नहीं कहा उसे खबर बनाने की शैतानी कौन कर रहा है और क्यों कर रहा है। अखबारों की सुर्खियां बटोरने के लिए कांग्रेस के नेता इस गंभीर मुद्दे पर हंसी ठिठोली करने में जुट गए हैं। अन्य विपक्षी दलों की तो कोई आवाज ही नहीं है। उनका प्रदेश हित की  राजनीति से कोई वास्ता भी नहीं है। कांग्रेस के जो नेता राज्य में ठेकेदारी करके अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं वे भी नहीं चाहते कि नागरिकों की शिकायतों का निराकरण हो जाए । क्योंकि इससे सत्ता माफिया की जुगलबंदी की उनकी पोल भी खुल सकती है।  जो सत्ता माफिया कांग्रेस के शासनकाल में अपने डैने पसार चुका था वही आज अपने सहयोगियों के साथ भाजपा सरकार के सुशासन को पंगु बनाए हुए हैं। वह चाहता भी नहीं कि किसी तरह का सुशासन स्थापित हो।

               अटल बिहारी सुशासन संस्थान के जिन विशेषज्ञों ने बार बार सलाह देकर सरकारी तंत्र को जवाबदेह बनाने की सलाह दी वह भी इस घटना पर मुंह सिले हुए बैठे है। ये आनलाईन कांफ्रेंस पांच मुद्दों पर केन्द्रित थी। इनमें सुशासन, कानून व्यवस्था, कृषि,स्वास्थ्य और नगरीय प्रशासन जैसे जनहित से जुड़े विषय शामिल थे। जिन अतिक्रमण के मुद्दों पर जनता ने सीएम हेल्पलाईन पर शिकायतें की हैं उन्हें दबंगों ने अफसरों के सहारे पेंडिंग करवा दिया है। समय सीमा में निराकरण न होने की वजह से आम नागरिक परेशान हैं और बार बार कई स्तरों पर अपनी बातें उठाते रहते हैं। कानून व्यवस्था के मुद्दों को अपराधियों ने पुलिस प्रशासन से सांठ गांठ करके डंप करवा रखा है। कृषि विभाग का तो पूरा अमला नदारद है। खाद वितरण जैसे सरल विषय पर सरकारी अमले ने किसानों को धोबी का कुतका बना रखा है। स्वास्थ्य के लिए सरकारी अस्पतालों पर हजारों करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद जनता को निजी और कार्पोरेट अस्पतालों में लुटने को मजबूर होना पड़ रहा है। नगर पालिकाएं हों या नगर निगम सभी में अफसरों ने अपने कान और आंख बंद कर रखे हैं। वे सीएम हेल्पलाईन की शिकायतों को दबाव डालकर बंद करा देते हैं या एक दूसरे की ओर भेजकर टल्ले खिलाते रहते हैं।

            ऐसे हालात में यदि कोई मुख्य सचिव, अपने मातहतों को मुख्यमंत्री का भय दिखाकर लाईन पर लाना चाह रहा है तो मध्यप्रदेश का कथित मुख्यधारा का मीडिया इसे उपहास का विषय बनाने में जुट गया है। घरों में मां अपने बच्चों को पिता की नाराजगी का भय दिखाकर अच्छा नागरिक बनाने का प्रयास करती है। क्या इसे माता पिता के बीच दुश्मनी की तरह प्रस्तुत किया जाने लगेगा। राज्य का लगभग पैंतालीस फीसदी बजट खा जाने वाली नौकरशाही यदि जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरेगी तो निश्चित रूप से जन आक्रोश बढ़ेगा । जनता का असंतोष सरकार पर भी भारी पड़ेगा । सरकार और नौकरशाही के हित में यदि मुख्य सचिव उसे शिकायतों के निवारण की जिम्मेदारी पूरा करने की नसीहत दे रहे हैं तो वे कौन लोग हैं जो इसे आरोप प्रत्यारोप या विवाद का विषय बनाना चाहते हैं।

            सत्ता रूढ़ भाजपा को इस मुद्दे पर गंभीर रूप से चिंतन करना चाहिए। सरकार को असफल बनाने में जुटे माफिया को नसीहत देने के लिए सरकार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरह सख्त फैसले लेने होंगे। माफिया की कमर तोड़े बगैर यदि सरकार इस मुद्दे को दबाने का प्रयास करेगी तो आने वाला भविष्य भाजपा को एक असफल पार्टी के रूप में ही याद करेगा।

  • मुख्यसचिव ने कहा परीक्षा को देखते तय करें गणना की तारीख

    मुख्यसचिव ने कहा परीक्षा को देखते तय करें गणना की तारीख


    भोपाल 10 दिसंबर(प्रेस इंफॉर्मेशन सेंटर)मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी विभाग अध्यक्षों को निर्देश दिये है कि आगामी जनगणना 2027 के दृष्टिगत प्रशासनिक इकाइयों में जो भी परिवर्तन किये जाने हैं वे 31 दिसम्बर 2025 तक अनिवार्यतः कर लिये जांए। मुख्य सचिव श्री जैन की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय में भारत की जनगणना 2027 के दृष्टिगत राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की बैठक संपन्न हुई।

    उल्लेखनीय है कि जनगणना के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 01 अप्रैल से 30 सितम्बर 2026 के दौरान 30 दिवस की अवधि में किया जायेगा। मुख्य सचिव ने सम्बंधित विभागों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि स्कूली बच्चों की पढ़ाई, मानसून इत्यादि को ध्यान में रखते हुए उक्त 30 दिवस की अवधि निर्धारित की जायें।


    बैठक में बताया गया कि जनगणना के द्वितीय चरण में जनसंख्या की गणना का कार्य पूरे देश में एक साथ फ़रवरी 2027 में किया जायेगा। मुख्य सचिव श्री जैन ने स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया कि वे जनगणना के द्वितीय चरण को ध्यान में रखकर वर्ष 2026-27 का शैक्षणिक कैलेंडर तैयार करें। उन्होंने परीक्षाओं की समय-सारणी इस तरह तैयार करने के निर्देश दिये है जिससे विद्यार्थीयों को कोई असुविधा नहीं हो। साथ ही सम्बंधित विभागों को यह भी निर्देश दिये गये कि वे आपस में समन्वय करते हुए जनगणना 2027 के लिए मानव संसाधन की उपलब्धता के लिए योजना तैयार करें जिससे जनगणना का कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो सके।


    मुख्य सचिव श्री जैन ने आगामी जनगणना डिजिटल होने के मद्देनजर सर्वसम्बन्धितों को उचित समय पर युक्तियुक्त प्रशिक्षण दिए जाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिये। श्री जैन ने जनगणना के दौरान स्व-गणना (Self-Enumeration) किये जाने के प्रावधान की सराहना की। उन्होंने सभी सम्बंधित विभागों को यह भी निर्देश दिये कि वे जनगणना 2027 के कार्य के समन्वय के लिए अपने अपने विभागों में एक नोडल अधिकारी नामित करें। जनसंपर्क विभाग को जन सामान्य में जनगणना के प्रति जागरूकता लाने एवं भ्रांतियों को दूर करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिये गये ।


    मुख्य सचिव श्री जैन ने स्पष्ट रूप से कहा कि आम जन को यह बताया जाना आवश्यक होगा कि जनगणना 2027 पहली बार देश में डिजिटल होगी, जिसमें मोबाईल एप के माध्यम से आंकड़ों का संकलन एवं वेब पोर्टल के माध्यम से मैनेंजमेंट एवं मॉनिटरिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बात का प्रचार होना चाहिए कि जनगणना अधिनियम की धारा 15 के तहत जनगणना में संकलित व्यक्तिगत जानकारियां गोपनीय होती है साथ ही इन्हें कहीं पर भी साक्ष्य के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता।


    राज्य-स्तरीय जनगणना समन्वय समिति (SLCCC) की इस पहली बैठक में अपर मुख्य सचिव, गृह, अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन, अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास, सचिव, गृह एवं राज्य नोडल अधिकारी (जनगणना), निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय मध्यप्रदेश,राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी, एन.आई.सी. और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
    अपर मुख्य सचिव, गृह श्री शिव शेखर शुक्ल ने बताया कि मध्यप्रदेश में गृह विभाग जनगणना के लिए नोडल विभाग है जो भारत सरकार, जनगणना निदेशालय एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय स्थापित करते हुए जनगणना सम्पादन में अपनी भूमिका का निर्वहन करेगा । प्रारंभ में निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय द्वारा पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जनगणना 2027 की रूपरेखा, प्रारम्भिक तैयारियां, डिजिटल रोडमैप और संगठनात्मकढांचा इत्यादि के बारे में विस्तृत रूप से अवगत कराया। उन्होंने यह बताया कि इस बार की जनगणना में स्व-गणना (Self-Enumeration)का प्रावधान भी किया जायेगा जिससे कि आम नागरिक अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे।


    निदेशक, जनगणना द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय महत्त्व के इस वृहद कार्य में लगभग 1 लाख 75 हजार प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों के अतिरिक्त अन्य प्रशासनिक अमले की भी आवश्यकता होगी। निदेशक जनगणना द्वारा अवगत कराया गया कि जनगणना के प्रथम चरण के पूर्व परीक्षण का कार्य प्रदेश में जिला रतलाम की रतलाम तहसील, जिला सिवनी की कुरई तहसील के कुछ चयनित ग्रामों में तथा ग्वालियर जिले के नगर निगम ग्वालियर के चयनित वार्डों में नवम्बर 2025 में कराया गया। पूर्व परीक्षण कार्य को राज्य शासन एवं सम्बंधित जिला प्रशासन के सहयोग से सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है।