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  • चुनाव नहीं हुए पर सहकारी आंदोलन सफल,विश्वास सारंग का दावा

    चुनाव नहीं हुए पर सहकारी आंदोलन सफल,विश्वास सारंग का दावा

    भोपाल,24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सहकारी पैक्स समितियों तक के चुनाव न कराए जाने से सहकारिता आंदोलन में आम किसानों की सहभागिता समाप्त हो गई है। इसके बावजूद राज्य के सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग का दावा है कि सहकारी आंदोलन सफल हो रहा है।राजधानी के अपेक्स बैंक सभागार में पहले तो उन्होंने खेलों में पदक जीतने वाले युवाओं की सफलता को अपनी कुशलता बताया बाद में सहकारिता के क्षेत्र में केन्द्रीय सहयोग का हवाला देकर अपनी पीठ थपथपाई।


    सरकार के दो साल पूरे होने पर शाबासी लेने पहुंचे मंत्री से जब पूछा गया कि धारा 11 के मापदंडों के अनुसार बैंक पूंजी विहीन हो गए हैं इस पर सरकार क्या कर रही है तो उन्होंने कहा कि हमने बैंकों को पूंजी मुहैया कराई है । उन्होंने कहा कि संस्थाओं के चुनाव कानूनी तौर पर करा लिये जाते हैं इससे हमें कामकाज चलाने लायक वैधानिक अधिकार मिल जाते हैं। सहकारी समितियों ने किसानों को कर्ज भी मुहैया कराया है और वसूली की बिगड़ी चाल भी सुधारी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में हम किसानों को घर घर खाद पहुंचाने की व्यवस्था कर रहे हैं जो देश में अनूठी मिसाल के रूप में गिनी जाएगी।


    कंपनी के तौर पर चलाई जा रही सहकारी योजनाओं के आरोप से असहमति जताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डबल इंजन सरकार की परिकल्पना जहाँ केंद्र और राज्य एक साझा लक्ष्य, साझा गति और साझा परिणाम के साथ काम करते हैं, आज मध्यप्रदेश में ज़मीन पर साकार रूप ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सक्षम नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने बीते दो वर्षों में सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं।


    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी आज राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पदक अर्जित कर देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। वर्ष 2024 में पेरिस (फ्रांस) में आयोजित ओलम्पिक व पैरा ओलम्पिक 2024 में प्रदेश के खिलाड़ियों ने प्रतिभागिता कर पदक अर्जित किये। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी मध्यप्रदेश ने खेलों में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, तमिलनाडु में भी प्रदेश के खिलाड़ियों ने 29 पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसी प्रकार 38वें नेशनल गेम्स, उत्तराखण्ड में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने 67 पदक अर्जित कर राज्यों में तीसरा स्थान प्राप्त किया।


    वर्ष 2024-25 की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री श्री सारंग ने बताया कि प्रदेश के खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कुल 57 पदक तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 391 पदक अर्जित किए। हॉकी एशिया कप 2025, 16वीं एशियन शूटिंग चैंपियनशिप कजाकिस्तान, खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल श्रीनगर एवं एशियन केनो स्लालम चैंपियनशिप चीन में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर प्रदेश को शीर्ष राज्यों की श्रेणी में स्थापित किया है।


    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि किसानों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने हेतु ऑनलाइन केसीसी आवेदन, एकीकृत साख सीमा तथा नकद-वस्तु ऋण की बाध्यता समाप्त करने जैसे सुधार प्रस्तावित हैं। सभी PACS में ई-PACS के माध्यम से ऑनलाइन सेवाएं और SMS सूचना अनिवार्य की जाएगी। उन्होने बताया कि कमजोर जिला सहकारी बैंकों को आर्थिक सहायता देकर 0% ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। डिफॉल्टर किसानों को मुख्यधारा में लाने हेतु एकमुश्त समझौता योजना तथा आर्थिक अनियमितताओं से प्रभावित किसानों को जांच अवधि में राहत देने की व्यवस्था हेतु न्याय योजना प्रस्तावित है।


    मंत्री श्री सारंग ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 के अनुरूप राज्य की सहकारिता नीति में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। जनवरी 2026 में IBPS के माध्यम से 2000 से अधिक पदों पर भर्ती एवं सतत प्रशिक्षण की योजना है। उन्होंने कहा कि CPPP मॉडल के विस्तार से सहकारिता में निजी निवेश और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 अंतर्गत उत्कृष्ट संस्थाओं को पुरस्कृत किया जाएगा तथा जिला सहकारी बैंकों में NEFT/RTGS, QR कोड एवं इंटरनेट बैंकिंग जैसी आधुनिक तकनीकी सुविधाएं लागू की जाएंगी।

  • भाजपा ने एमपी को बीमारू के कलंक से मुक्त कराया बोले अमित शाह

    भाजपा ने एमपी को बीमारू के कलंक से मुक्त कराया बोले अमित शाह


    केंद्रीय गृह मंत्री ने लांच किया प्रदेश सरकार का 2003-2023 गरीब कल्याण रिपोर्ट कार्ड

    भोपाल,20 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश के गठन के बाद से 2003 तक ज्यादातर समय कांग्रेस की ही सरकारें सत्ता में रही हैं। इन सरकारों ने प्रदेश को बीमारू राज्य बना दिया था। मध्यप्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल था, जो देश के विकास में बाधक थे। 2003 में प्रदेश में उमा भारती जी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। बाद में बाबूलाल गौर और शिवराजसिंह चौहान ने उस सरकार का नेतृत्व किया। भाजपा की सरकार ने प्रदेश को 20 सालों में बीमारू से बेमिसाल राज्य बनाया, बंटाढार से बुलंदियों पर पहुंचाया, पिछड़े से अग्रणी बनाया, समृद्ध और खुशहाल राज्य बनाया। मि. बंटाढार और कमलनाथ इस बात का जवाब दें कि 53 सालों में उनकी सरकारों ने प्रदेश के लिए क्या किया? क्यों प्रदेश की जनता के साथ अन्याय किया? क्यों मध्यप्रदेश का काफिला लुटा? यह बात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को प्रदेश सरकार के 20 सालों का गरीब कल्याण रिपोर्ट कॉर्ड जारी करते हुए कही। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने भी संबोधित किया। इस दौरान मंच पर प्रदेश शासन के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा मौजूद थे।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 2003 से पहले मध्यप्रदेश बीमारू राज्य हुआ करता था। 2003 में आई भाजपा की सरकार ने प्रदेश को बीमारू राज्य के कलंक से मुक्ति दिलाई। 2003 से 2023 तक के 20 साल प्रदेश में गरीबी से मुक्ति का स्वर्णकाल का समय रहा है। इन सालों में आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की नींव डाली गई। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार बनी और प्रधानमंत्री मोदी जी ने मध्यप्रदेश की दिल खोलकर मदद की। डबल इंजन वाली सरकार ने प्रदेश में विकास के नए प्रतिमान गढ़े। न सिर्फ सड़क, बिजली और पानी की समस्या दूर हुई, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सुशासन और विकास के सभी मापदंडों पर प्रदेश को आगे बढ़ाया और राजधानी भोपाल से गांव की चौपाल तक विकास और खुशहाली बयार चलाई। इसका प्रति उत्तर देते हुए प्रदेश की जनता ने भी दिल खोलकर वोट दिये। 2019 में 29 में से 28 सीटें भाजपा को दीं और 2024 में जो एक सीट की कमी रह गई है, वो भी जनता पूरी कर देगी। श्री शाह ने कहा कि मैं प्रदेश की जनता को विश्वास दिलाता हूं कि देश के अमृतकाल में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनेगा। उन्होंने कहा कि आने वाला चुनाव प्रदेश को विकसित और सर्वोच्च राज्य बनाने तथा गरीबी से संपूर्ण मुक्ति दिलाने वाला चुनाव है और मुझे पूरा विश्वास है कि प्रदेश की 9 करोड़ जनता का आशीर्वाद हमें मिलेगा।

    श्री शाह ने कहा कि 2014 में सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने 60 करोड़ गरीबों का जीवन स्तर ऊपर उठाया। 14 करोड़ लोग गरीबी की सीमा रेखा से बाहर हुए। लगभग 10 सालों में देश की आबादी 10 प्रतिशत लोगों को गरीबी रेखा से बाहर करके मोदी जी गरीब कल्याण के पुरोधा बन गए और उनकी योजनाओं का लाभ मध्यप्रदेश को भी मिला। बंटाढार सरकार ने राज्य के बजट को 23000 करोड़ पर छोड़ दिया था, जिसे शिवराज जी की सरकार ने 3.14 लाख करोड़ तक पहुंचाया है। बंटाढार के समय शिक्षा का बजट 2456 करोड़ था, जिसे 38000 करोड़ तक पहुंचाया। स्वास्थ्य का बजट 580 करोड़ था, जिसे 16 हजार करोड़ तथा सर्व शिक्षा अभियान का बजट जो 844 करोड़ था, उसे 66 हजार करोड़ तक पहुंचाया। मि. बंटाढार और कमलनाथ को यह बताना चाहिए कि प्रदेश की आबादी का बड़ा हिस्सा एससी, एसटी और ओबीसी का है, इनके बजट को क्यों 1056 करोड़ पर छोड़ दिया था? भाजपा सरकार ने इसे 64390 करोड़ तक पहुंचाया। प्रति व्यक्ति आय 11700 से बढ़कर 1.40 लाख रुपये हो गई। बंटाढार सरकार के समय प्रदेश की सड़कें बदनाम थीं, भाजपा की सरकार ने 5.10 लाख कि.मी. अच्छी क्वालिटी की सड़कें बनाईं और राष्ट्रीय राजमार्ग जो सिर्फ 4800 किलोमीटर थे, उन्हें 13000 किलोमीटर तक पहुंचाया। श्री शाह ने कहा कि कमलनाथ जैसे जिन नेताओं ने कभी हाथों में हल नहीं पकड़ा, वो हमारी सरकार पर सवाल उठाते हैं। जबकि उनकी सरकार के समय समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी सिर्फ 4.38 लाख थी, जिसे हमारी सरकार ने 77.96 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचाया। धान की खरीदी सिर्फ 95 हजार मीट्रिक टन होती थी, जिसे 46.30 लाख टन तक पहुंचाया। प्रदेश में हुए इस रिकॉर्ड तोड़ विकास के लिए मैं शिवराज जी को साधुवाद देता हूं।

    श्री शाह ने कहा कि पहले की सरकारें टुकड़े-टुकड़े विकास पर विश्वास करती थीं। 20 हजार घर, 30 हजार शौचालय जैसे लक्ष्य हुआ करते थे। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी जी ने देश में पहली बार संपूर्ण सेचुरेशन का कांसेप्ट दिया। हर घर में शौचालय, हर जरूरतमंद माता-बहन को गैस कनेक्शन, हर घर में नल से जल जैसी योजनाएं संपूर्ण सेचुरेशन की ही उदाहरण हैं। संपूर्ण सेचुरेशन को हासिल करने के लिए ही मोदी सरकार ने प्रदेश के 80 लाख घरों में शौचालय बनाए हैं, तो 1.2 करोड़ प्रधानमंत्री अन्न योजना के कॉर्ड बनाए हैं। 10.87 लाख गैस सिलेंडर बांटे गए हैं। 42 लाख प्रधानमंत्री आवास बनाए गए हैं। 4000 कि.मी. नए राजमार्ग बनाए जा रहे हैं। रीवा, ग्वालियर और जबलपुर एयरपोर्ट का विकास हो रहा है, 35 रेल्वे स्टेशन विश्वस्तरीय बनाए जा रहे हैं। प्रदेश की विकास दर 16 प्रतिशत हो गई है और सिंचाई क्षमता 47 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गई है। प्रदेश की 46 लाख बेटियां लाडली लक्ष्मी बन चुकी हैं। प्रदेश में 24 मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं और मेडिकल, इंजीनियरिंग तथा पॉलीटेक्निक की पढ़ाई हिंदी में शुरू कराई जा रही है। भोपाल और इंदौर शहरों में मेट्रो रेल का काम तेजी से चल रहा है। ओंकारेश्वर में 2400 करोड़ की लागत से आदि शंकराचार्य अद्वैत स्मारक बनाया जा रहा है, तो उज्जैन में महाकाल महालोक बनकर तैयार हो चुका है। श्री शाह ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने आदिवासियों को उनके अधिकार देने के लिए पेसा एक्ट लागू किया है तथा जनजातीय इतिहास को संजोने के लिए संग्रहालय बनाए जा रहे हैं। जनजातीय क्रांतिवीरों और जननायकों की स्मृतियों को संजोने के लिए रेलवे स्टेशनों के नाम उनके नाम पर रखे जा रहे हैं।

    श्री शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने जवाबदेही की एक नई परंपरा शुरू की है, जिसके अंतर्गत हर सरकार अपने कार्यकाल में किए गए कामों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करती है। हमने अपना रिपोर्ट कॉर्ड प्रस्तुत किया है और गलत आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने वाली कांग्रेस को इस रिपोर्ट कॉर्ड का जवाब देना चाहिए। कांग्रेस ने प्रदेश की जनता के साथ जो अन्याय किया है, उसका जवाब देना चाहिए और अगर उसमें हिम्मत है, तो अपने 53 सालों के शासन का रिपोर्ट कॉर्ड प्रस्तुत करे। श्री शाह ने कहा कि मध्यप्रदेश में 15 महीनों के लिए कमलनाथ की सरकार बनी थी, जिन्हें करप्शन नाथ कहा जाता है। बंटाढार और कमलनाथ की उस सरकार ने भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई गरीब कल्याण की सारी योजनाएं बंद कर दीं थी और गरीब कल्याण अभियान को अपाहिज बना दिया था। उस सरकार ने सहरिया, भारिया और बैगा बहनों को मिलने वाला पोषण अनुदान बंद कर दिया था। श्री शाह ने कहा कि इस्तीफा देते समय कोई मुख्यमंत्री काम नहीं करता, लेकिन करप्शननाथ ने अपने इस्तीफे से 15 मिनट पहले मोबाइल घोटाले से संबंधित दस्तावेजों पर साइन किए। करप्शन नाथ ने 350 करोड़ का मोजर बियर घोटाला किया और 2400 करोड़ के अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले से उनका संबंध है। करप्शन नाथ ने 600 करोड़ का इफ्को घोटाला, कर्जमाफी में 25000 करोड़ का हेरफेर किया। उस सरकार ने 800 ट्रांसफर करके नया तबादला उद्योग शुरू कर दिया था। श्री शाह ने कहा कि कमलनाथ को अपनी सरकार के डेढ़ सालों में हुए घोटालों का जवाब देना चाहिए।
    जनता तय करे, वह घोटालों के साथ है या विकास के साथ
    श्री शाह ने कहा कि मोदी जी ने देश के प्रधानमंत्री बनते ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का बीड़ा उठाया। देश को दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था, 5 ट्रिलियन इकॉनॉमी और आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया। आज भारत क्लाइमेट चेंज और आतंकवाद पर जीरो टालरेंस के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। जी-20 समिट सारी दुनिया में भारत की संस्कृति, विकास और उसके भविष्य के प्रसार का माध्यम बन रही है। पहली बार जी-20 समिट देश के सभी राज्यों के 59 स्थानों पर हो रही है। 14 देशों ने प्रधानमंत्री मोदी जी को अपना सर्वोच्च सम्मान दिया है। भारत आज डिजिटल लेनदेन, एलईडी वल्ब के वितरण, स्वच्छता, टीकाकरण तथा दाल, दलहन, दूध,जूट और रेल इंजन के उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर है। मोबाइल, सीमेंट, स्टील, कॉटन, चाय के उत्पादन में दूसरे स्थान पर तथा स्टार्टअप और वाहन उद्योग में तीसरे स्थान पर है। दूसरी तरफ कांग्रेस अपने शासन में सिर्फ घोटाले करती रही। बोफोर्स घोटाला, टूजी घोटाला, सत्यम घोटाला, कॉमनवेल्थ घोटाला, कोयला घोटाला, चॉपर घोटाला, टेट्रा ट्रक घोटाला, वोट के बदले नोट घोटाला, आदर्श हाउसिंग घोटाला, डीएलएफ घोटाला, नेशनल हेराल्ड घोटाला, खाद्य सुरक्षा बिल घोटाला, शेयर बाजार घोटाला, आईपीएल घोटाला, एलआईसी हाउसिंग घोटाला, मधु कोड़ा कांड, राफेल खरीदी घोटाला, सबमरीन घोटाला, मंदिर कलेक्शन घोटाला और वॉक्स वैगन इक्विटी घोटाले जैसे 24 से अधिक घोटालों में लिप्त रही है। श्री शाह ने कहा कि अब यह मध्यप्रदेश की जनता को तय करना है कि वह विकास के साथ है या घोटालों के साथ। अगर वो विकास के साथ है, तो उसे 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को अपना समर्थन देना है।

    केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि 2003 से पहले मध्यप्रदेश बीमारू राज्यों में शामिल था और यहां डकैतों, नक्सलियों का आतंक था। हमारी सरकार ने प्रदेश को बीमारू राज्य के ठप्पे से मुक्ति दिलाई। वर्ष 2002-03 में प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आकार 71000 करोड़ रुपये हुआ करता था, वह अब 13.5 लाख करोड़ के पार हो गया है। देश की जीडीपी में पहले प्रदेश का योगदान सिर्फ 3.6 प्रतिशत था, जो अब 4.8 प्रतिशत हो गया है। हमने प्रदेश में सड़कों का जाल बिछाया है और सिंचाई के क्षेत्र में तो चमत्कार हो गया है। श्री चौहान ने कहा कि 2014 में श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रदेश की प्रगति को नई दिशा और गति मिली है। डबल इंजन वाली सरकार ने विकास के नए प्रतिमान गढ़ दिए हैं। पहले जहां एक पंचायत को गिनती के ही आवास मिला करते थे, वहीं अब हर पंचायत औसत 122-23 प्रधानमंत्री आवास मिल रहे हैं। महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में प्रदेश में अभूतपूर्व काम हुआ है। प्रदेश की विकास दर 16 प्रतिशत से ऊपर है, लेकिन हम इससे संतुष्ट नहीं हैं। श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश को 2047 तक देश को दुनिया को सबसे समृद्ध, गौरवशाली, वैभवशाली और शक्तिशाली राष्ट्र बनाने तथा देश को पांच ट्रिलियन इकॉनॉमी बनाने का संकल्प लिया है। इसे पूरा करने में मध्यप्रदेश कोई कसर नहीं छोड़ेगा और हमने भी इसमें भागीदारी करते हुए प्रदेश को 550 बिलियन की इकॉनॉमी बनाने का लक्ष्य तय किया है।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि प्रदेश के लिए यह गर्व की बात है कि भाजपा सरकार के 20 सालों के गरीब कल्याण के रिपोर्ट कॉर्ड का लोकार्पण केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हाथों किया जा रहा है, मैं प्रदेश की जनता की ओर से तथा पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से उनका स्वागत करता हूं, आभार जताता हूं। उन्होंने कहा कि भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार देश और प्रदेश को लगातार विकास के रास्ते पर आगे बढ़ा रही है और यह हमारा सौभाग्य है कि हमारे पास ऐसी सशक्त सरकार है, जो अपने निर्णयों को लागू करने में सक्षम है।

  • खेती का नया सहकारी मॉडल लागू होगाःअमित शाह

    खेती का नया सहकारी मॉडल लागू होगाःअमित शाह

    भोपाल,22 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि भारत में शीघ्र ही कॉरपोरेट खेती के स्थान पर कोऑपरेटिव खेती होगी। केन्द्र सरकार शीघ्र ही नई सहकारिता नीति ला रही है। देश में सहकारिता विश्वविद्यालय खोला जायेगा। पैक्स (प्राथमिक कृषि सहकारी समिति) को बहुउद्देशीय बनाया जायेगा। मार्केटिंग के क्षेत्र में भारत सरकार आगामी एक माह में एक्सपोर्ट हाउस बनाने जा रही है। अमूल कुछ ही समय में देश में मिट्टी का परीक्षण एवं किसानों के उत्पाद का परीक्षण कर उन्हें जैविक प्रमाण-पत्र ‘अमूल’ के नाम से देगा। इससे किसानों को अपनी फसलों का अधिक मूल्य मिलेगा और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा।
    केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज भोपाल के होटल ताज में नाफेड द्वारा आयोजित “कृषि विपणन में सहकारी संस्थाओं की भूमिका” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल हुए। उन्होंने “एक जिला-एक उत्पाद योजना” में मध्यप्रदेश के 11 जिलों के 11 उत्पादों के साथ देश के 6 अन्य राज्यों के उत्पादों का भी प्रमोशन किया। श्री शाह ने “सहकार से समृद्धि-51 कहानियाँ” पुस्तक एवं “सहकारी पुस्तक परिपत्र भाग-1 एवं 2” का विमोचन भी किया।
    केन्द्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को बहुउद्देशीय बनाने के उद्देश्य से एक माह में मॉडल एक्ट लेकर आयेंगे, जो इन्हें मजबूत एवं बहुआयामी बनायेगा। हर पैक्स को एफपीओ बनने की योग्यता प्राप्त हो जायेगी। वे मार्केटिंग के साथ ही भण्डारण, परिवहन सहित 22 प्रकार की गतिविधियाँ कर सकेंगी। पैक्स से अपेक्स तक मजबूत मार्केटिंग व्यवस्था होगी।
    केन्द्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में किसानों की आय को दोगुना करने के सराहनीय प्रयास हुए हैं। भारत दलहन एवं तिलहन को छोड़ कर अन्य उत्पादों में आत्म-निर्भर हो चुका है। किसानों को अच्छा एमएसपी मूल्य दिलवाया जा रहा है। ई-नाम पोर्टल से 2 करोड़ रूपये से अधिक का व्यापार हो चुका है। हमारा कृषि निर्यात 50 विलियन डालर को पार कर चुका है। अब सहकारी संस्थाएँ जेम पोर्टल से न केवल खरीदी कर सकेंगी, बल्कि उत्पादों को बेच भी सकेंगी।
    केन्द्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि नाफेड किसान और सरकार के बीच में मजबूत कड़ी है, जो सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने का सशक्त माध्यम है। यह विपणन का शीर्ष संगठन है। नाफेड अपने कार्य को विस्तृत करे। ऐसी व्यवस्था हो कि निजी कम्पनियाँ भी नाफेड से उत्पाद खरीदें। मार्केटिंग की व्यवस्था से नाफेड आत्म-निर्भर बने।
    मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “सबको साख-सबका विकास” मध्यप्रदेश में सहकारिता का मूल मंत्र है। इस दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। सहकारिता भारत की मिट्टी एवं जड़ों में है। सर्वे भवन्तु सुखिन:, वसुधैव कुटुम्बकम यह सभी हमारे मंत्र है, जो सहकार की भावना को व्यक्त करते हैं। भारत सहकारिता के इतिहास में 6 जुलाई का दिन स्वर्ण अक्षर में लिखा जायेगा। इस दिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में पृथक सहकारिता मंत्रालय बनाया और श्री अमित शाह को इसकी बागडोर सौंपी। श्री अमित शाह ने सहकारिता को भारत में नई दिशा एवं गति दी है। उनके शब्दा कोष में असंभव शब्द नहीं है।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में सहकारिता का इतिहास 118 वर्ष पुराना है। वर्ष 2012-13 से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण दिया जा रहा है। श्री अमित शाह ने फैसला किया है कि शीघ्र ही 3 लाख रूपये तक अल्पावधि फसल ऋण पर डेढ़ प्रतिशत अधिक ब्याज अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए हम उनके आभारी हैं। सरकार नई सहकारिता नीति बनाने जा रही है। प्रदेश में सहकारिता को स्व-रोजगार दिलाने का साधन बनाया जा रहा है। परम्परागत कारीगरों को सहकारी समिति के रूप में संगठित कर उनका कौशल संवर्धन किया जा रहा है। सहकारिता कानूनों में बदलाव एवं सरलीकरण किया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के भारत को 5 ट्रिलियन डालर की अर्थ-व्यवस्था बनाने के संकल्प को पूरा करने में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है।
    केंद्रीय कृषि और किसान-कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि भारत के संस्कार में सहकार शामिल है। जितना सहकार बढ़ेगा उतनी ही देश प्रगति करेगा औरदेश की ताकत बढ़ेगी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत में सहकारिता को नए आयाम दिए हैं। उन्होंने भारत में पृथक सहकारिता मंत्रालय का गठन किया औरनाफेड को कर्ज से बाहर निकाला। इफको एवं अमूल दुनिया के सबसे बड़े सहकारिता संगठन है। सहकारिता से जुड़ कर हम स्वयं एवं भारत को आत्म-निर्भर बनाये।
    केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि और किसान-कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने दीप जला कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। नाफेड के अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह ने स्वागत भाषण दिया। केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा, म.प्र. केकृषि मंत्री कमल पटेल, सहकारिता मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया, इफको के अध्यक्ष दिलीप सिंघानी, अध्यक्ष कृभको डॉ. चंद्रपाल सिंह सहित जन-प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में सहकारिता से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे।

  • जंगलों से समृद्ध जनजीवन

    जंगलों से समृद्ध जनजीवन

    ऋषभ जैन

    मध्यप्रदेश में सामुदायिक भागीदारी से वन प्रबंधन, संरक्षण एवं सुधार की दिशा में वन समितियों के माध्यम से शानदार काम किया गया है जो पूरे देश में अनूठा है। इन वन समितियों से जुड़े परिवार आर्थिक रूप से भी सशक्त हुए हैं।

    वन समितियों के उल्लेखनीय कामसतना की ग्राम वन समिति गोदीन ने गोंड जनजाति की महिलाओं को सॉफ्ट टॉय बनाने का प्रशिक्षण ग्रीन इंडिया मिशन में दिया है। इसी प्रकार सीधी वन मंडल की ग्राम वन समिति बम्हनमरा ने बिगड़े वन क्षेत्र में काम करना शुरू किया और अवैध कटाई, चराई, अतिक्रमण से जंगलों की सुरक्षा की। समिति को महुआ फूल, गुल्ली, अचार, जलाऊ लकड़ी मिल रही है।बालाघाट की ग्राम समिति अचानकपुर ने बाँस-रोपण क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की। बाँस के दोहन से समिति को एक लाख रूपये का शुद्ध मुनाफा हुआ। वन मंडल सीधी की ग्राम वन समिति ने वन विहीन पहाड़ी में काम करना शुरू किया और अपने परिश्रम से इसे सघन सागौन वन में बदल दिया। समिति को सागौन की बल्लियों से आर्थिक लाभ भी हुआ। वन मंडल पश्चिम मंडला की ग्राम वन समिति मनेरी ने वन विहीन पहाड़ी को हरा-भरा बना दिया। इसी प्रकार अन्य समितियाँ भी अपने-अपने क्षेत्रों में सरकार के सहयोग से शानदार काम कर रही हैं।

    प्रदेश का वनक्षेत्र 94 हजार 689 वर्ग किलोमीटर है जो अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक है। यह देश के कुल वन क्षेत्र का 12.3% है। प्रदेश के 79 लाख 70 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र के प्रबंधन में जन-भागीदारी के लिये 15 हजार 608 गाँवों में वन समितियाँ काम कर रही हैं। पिछले एक दशक में 1552 गाँवों में वन समितियों ने 4 लाख 31 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र में सुधार किया है। जब पूरी दुनिया में वनों पर खतरा मंडरा रहा है, ऐसे समय इन समितियों ने वन विभाग के साथ मिलकर शानदार काम किया है।

    राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ, वनोपज संग्रह करने वाले परिवारों को उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से काम कर रहा है। संघ के नवाचारी उपायों से तेंदूपत्ता संग्राहकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। तेंदूपत्ता सीजन में 2021 कोविड-19 के कारण लॉक-डाउन के बाद भी तेंदूपत्ता संग्रहण कराकर दूरदराज के क्षेत्रों में रह रहे जनजातीय परिवारों को 415 करोड़ रूपये का पारिश्रमिक दिलाया गया और 192 करोड़ का लाभांश भी वितरित किया गया।

    पुरानी नीति में 70 फीसदी लाभांश संग्राहकों को बोनस के रूप में दिया जाता था। साथ ही 15% राशि संग्राहकों के सामाजिक एवं आर्थिक कल्याण के लिए और 15% राशि वन क्षेत्रों में लघु वन उपज देने वाली प्रजातियों के संरक्षण एवं विकास पर खर्च की जाती थी। अब “पेसा अधिनियम” की भावना के अनुसार तेंदूपत्ता के व्यापार से होने वाले लाभ का 75% संग्राहकों को, 10% राशि संग्राहकों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण के लिए और 10% राशि वन क्षेत्रों में लघु वनोपज प्रजातियों के संरक्षण तथा 5 प्रतिशत ग्राम सभाओं को दी जाएगी।

    वन विभाग द्वारा नए संकल्प में राष्ट्रीय उद्यानों में पर्यटकों के प्रवेश से मिलने वाली राशि का 33% वन समितियों को देने का प्रावधान किया गया है । समितियों को आवंटित क्षेत्र में ईको पर्यटन का कार्य संचालित करने के लिए सशक्त किया गया है। इससे होने वाली आय वन समिति को मिलेगी। इससे स्थानीय युवाओं को आर्थिक गतिविधियाँ शुरू करने के अवसर मिलेंगे।

    वन समितियों का माइक्रो प्लान

    प्रदेश के एक तिहाई गाँव वन क्षेत्रों के अंदर या उसके आसपास बसे हैं। वहाँ के निवासियों की आजीविका वनों पर आधारित है।

    आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश में इस साल के आखिर तक 5 हजार वन समितियों का माइक्रो प्लान तैयार करने का लक्ष्य है। इससे रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही ग्राम समुदाय अपनी आवश्यकता की वनोपज का उत्पादन कर अपने पैरों पर खड़े हो सकेंगे।

    लाभांश में वृद्धि

    वन समितियों को दिए जाने वाले लाभांश में वृद्धि की गई है। पहले जिला स्तर पर शुद्ध लाभ की राशि का 20 फीसदी मिलता था, जिसकी वजह से राशि का वितरण केवल कुछ ही जिलों में हो पाता था। अधिकांश समितियाँ लाभ से वंचित रह जाती थी। नए संकल्प के अनुसार प्रत्येक समिति को उसके क्षेत्र में से किए गए दोहन से प्राप्त राजस्व का 20 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। पहले काष्ठ एवं बाँस का 50 करोड़ रूपए तक का लाभांश वितरण होता था। अब लगभग 160 करोड़ प्रति वर्ष हो रहा है।

    ग्राम सभाओं को सौंपा अधिकार

    वन समितियों के गठन एवं पुनर्गठन करने का अधिकार अब ग्राम सभाओं को सौंपा गया है। वन समिति की कार्यकारिणी में महिलाओं एवं कमजोर वर्गों के लोगों को शामिल करने की व्यवस्था भी की गई है। प्रदेश में अनेक प्रकार की वनोपज का उत्पादन होता है। इसमें महुआ, तेंदूपत्ता, हर्रा, बहेड़ा, आंवला और चिरौंजी प्रमुख है। पेसा कानून की भावना के अनुरूप ग्राम सभाओं को लघु वनोपजों का पूरा अधिकार सौंपा गया है।

    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ऐसे निर्णय लिये गये हैं, जो वन समितियों से जुड़े संग्राहक परिवारों के लिये परिवर्तनकारी साबित हुए हैं। वन समितियों को भरपूर आर्थ‍िक लाभ हुआ है। उदाहरण के लिये 32 वनोपजों का समर्थन मूल्य निर्धारित करने से करीब 17 लाख परिवारों को लाभ हुआ है। तेंदूपत्ता व्यापार के शुद्ध लाभ का 70 प्रतिशत के स्थान पर 75 प्रतिशत देने से 17 लाख परिवारों को लाभ हुआ है।

    तेंदूपत्ता संग्रहण दर में वृद्धि

    तेंदूपत्ता संग्रहण दर में लगातार वृद्धि की गई है। इसी के अनुपात में पारिश्रमिक और बोनस का भुगतान भी किया गया है। तेंदूपत्ता संग्रहण दर वर्ष 2005 में प्रति मानक बोरा ₹400 थी, जो अब बढ़कर 2500 सौ रूपये प्रति मानक बोरा हो गई है। पारिश्रमिक का भुगतान वर्ष 2005 में ₹67 करोड़ रूपये होता था, जो वर्ष 2021 में बढ़कर 415 करोड़ रूपये हो गया है। संग्राहकों के बच्चों के लिए एकलव्य शिक्षा योजना पिछले ग्यारह साल से चल रही है, जिससे अब तक 1712 बच्चों को शिक्षा के लिये 2 करोड़ एक लाख रूपये की राशि उपलब्ध कराई गई है।