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  • छोटे अखबारों को साल में छह विज्ञापन मिलेंगे

    छोटे अखबारों को साल में छह विज्ञापन मिलेंगे

    70 वर्ष से अधिक आयु के पत्रकारों को स्थायी अधिमान्यता कार्ड मिलेगा
    महिला पत्रकारों को महिला कल्याण कार्यों के अध्ययन के लिए मिलेगी फैलोशिप
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आधुनिक और देश में अनूठे भोपाल स्टेट मीडिया सेंटर के निर्माण के लिए किया भूमिपूजन

    भोपाल 3अक्टूबर(अशोक मनवानी) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पत्रकार समाज और सरकार के मध्य सेतु की भूमिका निभाते हैं। पत्रकार समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति की आवाज होते हैं। पत्रकारिता एक धर्म है, जिसके निर्वहन के लिए पत्रकार युद्ध, बाढ़, भूकम्प जैसी विपरीत स्थितियों में भी जीवन दांव पर लगाकर कार्य करते हैं। जब विपत्तियों में लोग सुरक्षित स्थान खोजते हैं, तब पत्रकार समाधान खोजते हैं। स्टेट मीडिया सेंटर भविष्य के ऐसे वृट वृक्ष के बीज रोपे जा रहे हैं, जिनसे अनुभवों की शाखाओं पर अनंत आशाएं साकार होंगी।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मालवीय नगर भोपाल में स्टेट मीडिया सेंटर के लिए भूमि पूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर जनसंपर्क मंत्री राजेंद्र शुक्ला, आयुक्त जनसंपर्क मनीष सिंह उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने लघु समाचार पत्रों को एक माह के अंतराल से विज्ञापन जारी करने और 70 वर्ष से अधिक आयु के पत्रकारों को स्थायी अधिमान्यता कार्ड प्रदान करने की घोषणा की। हर साल पांच महिला पत्रकारों को महिला विकास कार्यों पर अध्ययन के लिए फैलोशिप प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पत्रकार समाज को प्राप्त वो आश्वासन है, जिनके होने से सुनवाई सुनिश्चित है। राष्ट्र निर्माण में पत्रकारों के स्याही का अमूल्य योगदान है।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पत्रकार और पत्रकारिता लोकतंत्र के प्राण हैं। मध्यप्रदेश की भूमि से पंडित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता के पुरोधा बने। इसी धरती पर श्री हरिशंकर परसाई जैसे व्यंग्यकार हुए जिन्होंने समाज को आईना दिखाने का कार्य किया। स्व. श्री वेदप्रताप वैदिक ने हिंदी की प्रतिष्ठा के लिए कार्य किया। स्व. श्री प्रभाष जोशी ने नई भाषा दी। एक दौर था जब स्वतंत्रता आंदोलन में पत्रकारों ने भागीदारी की और परतंत्रता की बेड़ियां तोड़ने का कार्य किया। आपातकाल के खिलाफ भी पत्रकार लड़े। कोविड के कठिन दौर में पत्रकारों ने अपना दायित्व निभाया। पत्रकार समाजसेवी भी होते हैं, उनका सरोकारों से ऐसा रिश्ता होता है, जैसे शरीर और आत्मा का रिश्ता।

    मीडिया सेंटर बनेगा पत्रकारिता के छात्रों का गुरूकुल

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया के दौर में कहीं-कहीं विश्वसनीयता का संकट देखने को मिलता है। संवाद, संचार और सम्पर्क पत्रकारिता के प्राण होते हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आशा व्यक्त की कि स्टेट मीडिया सेंटर इन पत्रकारों के संवाद, खबरों के संचार और हमारे सम्पर्क का केन्द्र बनेगा। यह केन्द्र पत्रकारिता के छात्रों का गुरूकुल बनेगा। यह केन्द्र वरिष्ठों के अनुभवों और युवाओं की ऊर्जा का उपयोग करेगा। साथ ही पुराने घर की स्मृतियां भी संजोएगा।

    पुराने भवन की यादों के साथ नए आंगन में प्रवेश

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पत्रकार भवन की नींव रखने वाले पुरोधा पत्रकारों का स्मरण भी किया और इस पत्रकार भवन में एक युग में पत्रकारों से भेंट और पत्रकार वार्ता आयोजित करने के अपने अनुभव भी साझा किए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गत 7 सितम्बर को उन्होंने मुख्यमंत्री निवास में पत्रकार समागम में इस मीडिया सेंटर के संबंध में घोषणा की थी जिसे आज मूर्त रूप देते हुए भूमिपूजन का कार्य सम्पन्न हुआ है। अब पत्रकार बंधु इस मीडिया सेंटर के रूप में पुराने पत्रकार के भवन की यादों के साथ नए आंगन में प्रवेश करेंगे। पत्रकार भवन के पुनर्निर्माण का सपना पूरा होगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेशभर से पधारे पत्रकारों को स्टेट मीडिया सेंटर के शिलान्यास अवसर पर बधाई और शुभकामनाएं दीं।

    जिलों में पत्रकारों को भूखंड प्रदान करने की चल रही है कार्रवाई- जनसंपर्क मंत्री श्री शुक्ल

    जनसंपर्क मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि आज स्टेट मीडिया सेंटर के शिलान्यास में प्रदेश भर से पत्रकार आए हैं। पत्रकार लोकतंत्र को वरदान बनाने का कार्य करते हैं। उन्हें मूलभूत सुविधाएं प्राप्त होना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश को बीमारू प्रदेश होने की पहचान को समाप्त कर तेजी से विकास कर रहे प्रदेश की पहचान दी है। अब हम नहीं जमाना कहता है कि मध्यप्रदेश विकसित प्रदेश में शामिल हो रहा है। उन्होंने समय-समय पर सभी वर्गों के हित में कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पत्रकारों के लिए भी स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की जिससे अनेक परिवारों को राहत मिली। गत 7 सितंबर को मुख्यमंत्री निवास में पत्रकार समागम में स्टेट मीडिया सेंटर प्रारंभ करने के साथ पत्रकारों कोजिला स्तर पर भूखंड प्रदान करने की घोषणा की थी। जिलों में पत्रकारों को भूखंड प्रदान करने के लिए आवश्यक कार्यवाही भी प्रारंभ हो गई है। जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों को भी लंबे समय से उच्च पद के प्रभार के लिए पात्र अधिकारियों और नये सहायक संचालकों को लंबित वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ दिया जायेगा।

    वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मान निधि

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज स्टेट मीडिया सेंटर के शिलान्यास समारोह में प्रदेश के 10 वरिष्ठ पत्रकारों को बढ़ी हुई सम्मान निधि प्रतीक स्वरूप प्रदान की। उल्लेखनीय है कि प्रतिमाह 10,000 के स्थान पर अब 20,000 की राशि का भुगतान सम्मान निधि के अंतर्गत जनसंपर्क विभाग द्वारा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज स्टेट मीडिया सेंटर के शिलान्यास समारोह में प्रदेश के जिन वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मान निधि प्रदान की उनमें श्री विजय दत्त श्रीधर भोपाल, श्री ओम प्रकाश फरक्या इंदौर, श्री परमानंद तिवारी जबलपुर, श्री देव श्रीमाली ग्वालियर, श्री अंजनी कुमार शास्त्री रीवा, श्री राजेंद्र पुरोहित उज्जैन, श्री सिद्ध गोपाल तिवारी सागर, श्री कमलेश सिंह परिहार चंबल, श्री पंकज पटेरिया नर्मदापुरम और श्री रामावतार गुप्ता शहडोल शामिल हैं।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पत्रकार भवन परिसर में अनुष्ठान और विधि-विधान पूर्वक स्टेट मीडिया सेंटर के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया। उन्होंने शिला पट्टिका का अनावरण भी किया। मंचीय कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या पूजन से हुआ। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मंच पर आते ही प्रदेश के सभी जिलों से आये समस्त पत्रकार बंधुओं का स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पौधा भेंट कर वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में स्टेट मीडिया सेंटर की विशेषताओं और पत्रकार कल्याण पर केन्द्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।

    प्रत्येक जिले के पत्रकारों से मिले मुख्यमंत्री श्री चौहान

    स्टेट मीडिया सेंटर के भूमिपूजन के औपचारिक कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश के जिलों से पधारे प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया, सोशल मीडिया से जुड़े पत्रकारों, टी.वी. कैमरा पर्सन और प्रेस छायाकारों से भेंट कर संवाद किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान पत्रकारों के साथ भोजन में शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अहम घोषणाएं

    • मध्य प्रदेश में महिला विकास एवं कल्याण के कार्यों पर अध्ययन करने के लिए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय एवं संस्थान द्वारा जनसम्पर्क विभाग के सहयोग से प्रतिवर्ष 5 महिला पत्रकारों को फैलोशिप दी जाएगी।
    • प्रदेश में अब 1 महीने के अंतराल से हर छोटे समाचार-पत्र को विज्ञापन देने की व्यवस्था की जाएगी।
    • प्रदेश के 70 साल से अधिक की आयु वाले वरिष्ठ पत्रकारों को स्थायी अधिमान्यता कार्ड दिया जायेगा।
    • जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों को वरिष्ठ पद के प्रभार के आदेश जारी किए जा रहे हैं।
    • सहायक संचालक पद पर कार्य कर रहे अधिकारियों की जो वेतन वृद्धि देय है उसके भी आदेश जारी किये जा रहे हैं।

    कैसा होगा स्टेट मीडिया सेंटर

    भोपाल में स्टेट मीडिया सेंटर का निर्माण 28 करोड़ रुपए की लागत से होगा। यह सर्व सुविधा युक्त मीडिया सेंटर होगा। इस सेंटर में निर्माण एजेंसी मध्यप्रदेश भवन विकास निगम है। अगले दो वर्ष में निर्माण पूर्ण करने का लक्ष्य है। कुल 66 हजार 981 वर्गफीट में तीन मंजिल के भवन में लोअर ग्राउण्ड फ्लोर पर वाहन पार्किंग, ड्रायवर्स रूम, मेंटेनेंस रूम, बैंक, शॉप्स और डिस्पेंसरी निर्माण होगा। ग्राउण्ड फ्लोरपर एक्जीबिशन हॉल, आर्ट गैलरी, मिनी ऑडिटोरियम, प्रेस कॉन्फ्रेंस कक्ष, प्रशासनिक कक्ष, रिसेप्शन कक्ष, कॉरीडोर, बैंक्वेट हॉल, बैंडमिंटन कोर्ट, रेस्टारेंट, टेरिस गार्डन होंगे। प्रथम मंजिल पर लायब्रेरी, प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल, मल्टी मीडिया रूम, लाउन्ज, जिम्नेशियम और इन्डोर गेम हॉल होगा। दूसरे मंजिल पर ओपन टेरिस, वर्किंग स्पेस, केबिन मिनी मीटिंग रूम, क्यूबिकल वर्क स्टेशन होंगे। तीसरी मंजिल पर पत्रकारों के लिए वर्क स्पेस, न्यूज और मीडिया के ऑफिस स्पेस रहेगा।

  • जरूरत थी संजीवनी की पूरा पहाड़ उठा लाए सरकार

    जरूरत थी संजीवनी की पूरा पहाड़ उठा लाए सरकार


    आलोक सिंघई
    चुनाव की बेला में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भोपाल में मीडिया सेंटर की आधारशिला रखने जा रहे हैं। भूमिपूजन के इस विशाल समागम में प्रदेश भर से पत्रकारों को ढो ढोकर लाया गया है। होटलों में ठहराया गया है। सरकार ये दर्शाने का जतन कर रही है कि कांग्रेस के बदमिजाज कमलनाथ की तुलना में मौजूदा सरकार पत्रकार हितैषी है।कमलनाथ कांग्रेस के छोटे से कार्यकाल को देखकर ये बात गले भी उतरती है। कमलनाथ ने जिस तरह मीडिया पर लांछन लगाए उसे देखते हुए तो शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार पत्रकारों को सम्मान देने वाली सरकार ही नजर आती है। इसके बावजूद उसे चुनाव की बेला में पत्रकार भवन का प्रहसन क्यों खेलना पड़ रहा है। लगातार साढ़े अठारह सालों तक मीडिया पर मोटा बजट खर्च करने वाली भाजपा सरकार को दूरदराज के छोटे पत्रकारों तक का आशीर्वाद क्यों बटोरना पड़ रहा है।पत्रकार खुद हतप्रभ हैं कि अचानक सरकार उन पर क्यों मेहरबान हो गई है।
    सत्ताधीशों का लंबा अनुभव रहा है कि चुनाव जिताने वाले अलग होते हैं और सत्ता का सुख लूटने वाले अलग हैं। भाजपा को लंबा शासन करने का अवसर मिला है। इसके बावजूद पिछले चुनावों में कांग्रेस को मिला मत प्रतिशत बताता है कि संगठन, जनता और पत्रकार कोई भी मतदान की आंधी की दिशा नहीं बदल सकते हैं। जनता के बीच से उठने वाली मनोभावों की आंधी जनमत बनाती है और वही सत्ता की असली कुंजी है। पिछले चार कार्यकालों में भाजपा सरकार ने पत्रकारों को कल्पनातीत तरीके से उपकृत किया है। उसका उपकार पाने वाले पत्रकारों की तादाद भी बहुत ज्यादा है। जब मनीष सिंह को जनसंपर्क आयुक्त बनाया गया तो उन्हें आश्चर्य हुआ कि सरकार इतना बडा बजट पत्रकारों पर खर्च करती है फिर भी सरकार के कार्यकलापों को सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने वाला कंटेट नदारद है। पिछली सरकारों के मंत्रियों, प्रशासकों ने इतने बोगस पत्रकार पाल रखे हैं जिनकी बुद्दि केवल चापलूसी की योग्यता रखती है। जनसंपर्क की भाषा बोलने वाले इन पत्रकारों ने दो दशकों में जन संवाद को इतना भौंथरा बना दिया है कि सरकार पर जनता का नजला गिरना सुनिश्चित है।


    चमचों की इस फौज में से असली पत्रकारों को तलाशना और फिर जनहित में उनका उपयोग करना भूसे में सुई तलाशने जैसा कठिन कार्य है। यही सोचकर आयुक्त महोदय ने हनुमान जी वाला फार्मूला अपना लिया। संजीवनी लाने के साथ साथ वे पूरा पर्वत ही उठा लाए हैं । सरकार ने उनके प्रयासों को हरी झंडी दिखाई क्योंकि वह पिछले चुनावों में मिली बारीक हार का जोखिम दुबारा नहीं उठाना चाहती थी। शिवराज जी आज आलोचना का केन्द्र बिंदु बने हुए हैं। उन्होंने भाग भागकर प्रचार किया और जनता से सीधा संवाद करने की कोशिश की । इस आपाधापी में वे भूल गए थे कि नौकरशाही कभी विधायिका का रूप नहीं ले सकती है। मोटी तनख्वाह पाने वाले अफसरों को इस बात से क्या लेना देना कि वे जिन पत्रकारों को पाल रहे हैं वे असरकारी संवाद कर रहे हैं या कि सिर्फ खानापूरी।


    राजधानी का पत्रकार भवन पिछले तीन दशकों से समस्या ग्रस्त रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने अपनी मनमानी को मीडिया के माध्यम से सही दर्शाने के लिए जिस ढांचे का गठन किया था वह आज खलनायक बन चुका है। एडीजी इंटेलीजेंस ए.एन सिंह के घिसे पिटे फार्मूले ने प्रदेश की पूरी पत्रकारिता को धूल धूसरित कर दिया है। कोई भी सैन्य या पुलिसिया सोच जन संवाद की भूमिका नहीं निभा सकता है। इसके बावजूद सत्ता माफिया ने अपने काले कारनामों को छुपाने के लिए इस ढांचे को बरकार रखा। एएन सिंह की सलाह पर तत्कालीन अर्जुनसिंह सरकार ने कम्युनिस्ट ढांचे में रंगे श्रमजीवी पत्रकार संघ का प्रोजेक्ट चलाया था। इसकी फंडिंग जनसंपर्क विभाग के बजट और पुलिस के मुखबिर तंत्र के लिए मिलने वाले एसएस फंड से की जानी थी। यही वजह थी कि प्रदेश की पत्रकारिता नागरिकों को नक्सली ,चरित्रहीन, भ्रष्टाचारी और शराबी के तौर पर पहचानने लगी।


    भाजपा सरकार के सत्ता में आते ही उमा भारती ने इस आततायी संगठन को उखाड़ फेंका। तभी उनके इर्द गिर्द जुट रहे लोधियों को निशाना बनाकर उमा भारती को कुर्सी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया। इसके बाद वही ढाक के तीन पात वाली पुरानी कहानी चल पड़ी। बाबूलाल गौर तो अघोषित तरीके से अर्जुनसिंह जी के ही प्यादे थे। उन्होंने उमा भारती सरकार के फैसलों को पलट दिया। सरकार से वे सभी फाईलें गायब हो गईं जिन्हें लौह महिला और आयुक्त जनसंपर्क अरुणा शर्मा ने विशेष परिश्रम से तैयार किया था। इसके बाद आई शिवराज सरकार ने यही नीति जारी रखी। शिवराज सिंह के गुरु सुंदरलाल पटवा भाजपा में अर्जुनसिंह गुट के ही खासमखास माने जाते थे सो उन्होंने पत्रकार भवन पर वही पत्रकार विरोधी व्यवस्था कायम रखी। लगभग डेढ़ दशक के शासनकाल में पत्रकारों की तमाम मांगों पर सहमति जताने के बावजूद शिवराज सिंह ने इस व्यवस्था पर कोई प्रहार नहीं किया बल्कि पर्दे के पीछे वे इस बदनाम संगठन के पदाधिकारियों को उपकृत करते रहे।


    जनता ने पिछली बार जब इस व्यवस्था को पलटने का जनादेश दिया तो कमलनाथ सरकार ने आते ही पत्रकार भवन को जमींदोज करके पत्रकारों की बरसों पुरानी मांग पूरी कर दी थी। उनके इर्द गिर्द भी किताबी पत्रकारों का जमावड़ा हो गया था सो उन्होंने इन बदमाशों के साथ पूरी पत्रकार बिरादरी को लांछित करना शुरु कर दिया। यही वजह थी कि कमलनाथ की भ्रष्ट सरकार के उखाड़ फेंकने में मीडिया के सभी वर्गों ने भाजपा को भरपूर साथ दिया। भाजपा ने दुबारा सत्ता में आने के बाद कमलनाथ की नीति को जारी ऱखा और पत्रकारों से दूरियां बनाए रखीं। ये भी महज दिखावा साबित हुआ। लुटेरे पत्रकारों की फौज को जनसंपर्क के भ्रष्ट अधिकारियों ने दुबारा सरकार के गले में लटका दिया। नतीजतन असली पत्रकार फिर भी वंचित ही रहे। बल्कि वे खामखां जनता के निशाने पर आते रहे जबकि मलाई खाने वाला तबका तो सरकार के साथ मजे लूटता रहा।

    दरअसल स्व. माखनलाल चतुर्वेदी के एक बदमाश रिश्तेदार ने जनसंपर्क विभाग में रहते हुए दिग्विजय सिंह की सामंती सरकार की आंखों में धूल झोंककर जो विश्विद्यालय सरकार के गले में बांध दिया वह उसे डुबाने वाला बोझा साबित हो रहा है। बरसों से सरकारें अपने चमचों को इस विवि में उपकृत करती रहीं हैं। कभी दिग्विजय सिंह सरकार जो करती थी उसे भाजपा सरकार ने कई सौ गुना तरीके से किया। अन्य प्रदेशों से लाए गए हवा हवाई पत्रकारों को यहां पत्रकारिता का शिक्षक बनाया गया और उन्हें यूजीसी के निर्धारित वेतनमानों से उपकृत किया जाने लगा। वास्तव में पत्रकारिता की आड़ में एक ऐसे चरोखर खुल गई जिस पर पत्रकार भी खामोश थे।


    यही वजह है कि आज ऐसा लगता है कि सरकार पत्रकारों पर भारी बजट खर्च कर रही है लेकिन वह वास्तव में सरकार का जेबी प्रचार तंत्र है जो हर बार बोगस साबित होता रहा है।असली पत्रकार तो आज भी झुनझुना पकड़कर घूम रहा है। इस बार जब भाजपा सरकार को बिजली सड़क और पानी के नाम पर भारी बजट खर्च करने मिला तो निर्माण माफिया को लगने लगा है कि ये व्यवस्था जारी रहनी चाहिए। भ्रष्ट अफसरशाही के लिए इससे अनुकूल सरकार दूसरी कोई हो नहीं सकती। यही वजह है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मैं हूं का नारा देते हुए भाजपा हाईकमान के निशाने पर आ गए हैं। बजट का आंकड़ा तो जारी करने वाली संस्थाओं की बैलेंस शीट से पढ़ा जा सकता है। जो रकम प्रदेश पर खर्च की गई उसकी तुलना में उत्पादकता कितनी बढ़ी। ये आंकड़े कितने असली और कितने फर्जी हैं इसे जांचना आज तकनीकी के दौर में कठिन नहीं है। सरकार के बजट का कितना हिस्सा माफिया की भेंट चढ़ गया इसका आकलन अच्छी तरह कर लिया गया है। यही वजह है कि शिवराज जी के शासनकाल को जनता की कसौटी पर तो बाद में परखा जाएगा अभी तो पार्टी के अंदरूनी आडिट ने इसका अध्ययन अच्छी तरह कर लिया है। जाहिर है कि सरकार ने अब पत्रकार भवन का नाम मीडिया सेंटर रखा है। वह नहीं चाहती कि फिर कोई माफिया इस पर कब्जा जमा ले और प्रदेश के विकास की कहानी को पटरी से उतार कर चलता बने।उम्मीद की जानी चाहिए कि इस बार मीडिया सेंटर मध्यप्रदेश में प्रोफेशनल जनसंवाद कायम करेगा। हां यदि कोई जनहितैषी व्यक्ति सत्ता के शीर्ष पर आ जाए तो फिर जनधन लूटकर भागने वाले माफिया को भी जमींदोज किया जा सकेगा।