आदिवासियों को कुत्ता कहकर उनकी औकात बताने वाले एसपी अरविंद तिवारी को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हड़बड़ाहट में हटा दिया है। झाबुआ के कलेक्टर सोमेश मिश्रा को भी हटाया गया है। उन पर आरोप था कि वे सरकारी योजनाओं की डिलीवरी नहीं कर पा रहे थे। पिछले विधानसभा चुनावों में आदिवासियों की नाराजगी से भाजपा अपनी सरकार खोने का दंश झेल चुकी है। इस बार भी भाजपा चिंतित है। यदि आदिवासियों के आक्रोश को न थामा गया तो उसे इस बार भी सरकार बनाना कठिन हो जाएगा। आदिवासी ही नहीं भाजपा के सबसे बड़े जनाधार पिछड़ा वर्ग की बेचैनी भी भाजपा के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। पिछले चुनाव में ब्राह्रण मतदाताओं ने जिस तरह अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए भाजपा से विद्रोह किया वह भी भाजपा के लिए भय की एक वजह बनी हुई है। यही कारण था कि भाजपा ने ब्राह्मण अफसरों ,नेताओं और ठेकेदारों को भरपूर लूट की छूट दी। अब भाजपा इस मुहाने पर आ गई है जहां सभी तबके उसे ब्लैकमेल कर रहे हैं। कमलनाथ कांग्रेस विद्रोह की इस खेती को करने में पूरी शिद्दत से जुटी हुई है।हालत ये है कि कमलनाथ राहुल गांधी की पदयात्रा और विधानसभा जैसे मौकों में भी उलझने से बच रहे हैं। भाजपा की स्थिति भई गति सांप छछूंदर जैसी हो गई है। तमाम हितग्राही मूलक योजनाएं बनाने और कांग्रेस से जनता की सहज नफरत के बावजूद भाजपा को चुनावी दौड़ में हांफी आ रही है।मध्यप्रदेश के शासकों की अकुशलता इसकी सबसे बड़ी वजह रही है।शिवराज सरकार को लगभग अठारह साल काम करने का मौका मिला। अथाह बहुमत ने उन्हें भरपूर आजादी दी। इसके बावजूद उनकी सरकार अब तक जनता की कसौटी पर खरी नहीं उतर पाई है। दिग्विजय सिंह की भ्रष्ट सरकार 2003 में सत्ताच्युत हुई थी। उन्होंने पंचायती राज के माध्यम से सत्ता के समानांतर तंत्र खड़ा करने का असफल प्रयास किया था। वह प्रयास बुरी तरह औंधे मुंह गिरा। इसकी पृष्ठभूमि में पंचायतों और प्रतिनिधियों का भ्रष्टाचार प्रमुख वजह रही थी। अफसरशाही को उन्होंने जिस तरह गली का कुत्ता बनाया उससे अफसरशाही ने भाजपा के प्रतिनिधि बनकर उमा भारती की सरकार को रिकार्डतोड़ सफलता दिलाई थी। उमा भारती ने तो अफसरशाही को उत्पादकता के लिए कसा लेकिन उनके बाद बाबूलाल गौर और फिर शिवराज दोनों ने अफसरशाही के इस अहसानों के बदले में सत्ता की बागडोर उसे ही थमा दी। शुरु से भाजपा के नेता और मंत्री बोलते रहे हैं कि अफसर उनकी नहीं सुनते। वे जो प्रस्ताव अफसरों के पास बनाकर देते हैं उन्हें वे रद्दी की टोकरी में फेंक देते हैं। भाजपा के नेताओं का ये दर्द सही था और आज भी बरकरार है। अफसरशाही ने शिवराज के कार्यकाल में जो मलाई कूटी है उसे अफसरों पर पड़े छापों और रंगे हाथों पकड़े गए अफसरों की संख्या देखकर आसानी से समझा जा सकता है। भाजपा ने खुद अफसरशाही की गोदी में बैठकर हितग्राही मूलक योजनाओं का भरपूर लाभ उठाया है। अपने कार्यकर्ताओं को दोनों हाथों में लड्डू थमाए। संघ के नाम पर तो चिरकुटों तक ने सरकारी खजाने को मनचाहे ढंग से उलीचा। अफसरशाही और भाजपा की इस लूट में जनता उपेक्षित होती रही। यदा कदा जनता के बीच भी योजनाओं का लाभ पहुंचा जिससे असंतोष अब तक हिंसक विद्रोह का रूप नहीं ले सका है।लोगों को अब भी लगता है कि शायद कभी उनकी भी लाटरी लग जाए, जो अब संभव नहीं है। कमलनाथ इसी असंतोष को उभारने का जतन कर रहे हैं। दिल्ली के बाद पंजाब में आप पार्टी ने भाजपा की धन बटोरने वाली शैली को मुफ्त बिजली के वादे से धराशायी किया है। राहुल गांधी भी अपनी यात्रा में भाजपा को अडानी अंबानी की सरकार कह रहे हैं।कांग्रेस वैसे भी पूंजीपतियों को शैतान बताकर उन पर कंकर फेंककर तालियां बजवाती रही है। कांग्रेस का ये पुराना तरीका उसे एक बार फिर जीवन दे रहा है। भाजपा के नेतागण असहाय हैं वे अपने लिए धन जुटाने वाले अफसरों उद्योगपतियों और ठेकेदारों पर आखिर कैसे प्रहार कर सकते हैं। झाबुआ के कलेक्टर एसपी को हटाकर शिवराज सिंह ने आदिवासियों को खुश करने का फौरी प्रयास किया है। भाजपा के मुख्यमंत्री जिनमें शिवराज सिंह चौहान सबसे अव्वल हैं वे चोरी छिपे मोदी सरकार की नीतियों को जन असंतोष की वजह बताते रहे हैं। ये बात बहुत हद तक सही भी है। मोदी सरकार ने टैक्स वसूलने और सब्सिडी बंद करने में जो तेजी दिखाई है उससे जनता में असंतोष फैला है। इसके बावजूद शिवराज सिंह चौहान और अन्य राज्यों की सरकारें जनता को इन बदली परिस्थितियों के बीच जिंदा रहने की कला नहीं सिखा पाई हैं। कांग्रेस की मुफ्तखोरी वाली राजनीति को बंद कभी न कभी तो होना ही था लेकिन भाजपा ने अधूरे प्रहार किए हैं। वह न तो मुफ्तखोरी की नीतियां पूरी तरह बंद कर पाई है और न ही जनता को धन बनाने की कला सिखा पाई है। जाहिर है इससे असंतोष बढ़ रहा है। उस पर झाबुआ एसपी अरविंद तिवारी की नशे में धुत्त बदतमीजी और प्रशासनिक अकुशलता की वजह से कलेक्टर सोमेश मिश्र ने आदिवासियों के असंतोष को हवा दे दी है। जाहिर है मुख्यमंत्री ने मजबूरी में उन्हें हटाया है। सोमेश मिश्र ने कलेक्टरी से पहले आयुष्मान मिशन के सीईओ की जवाबदारी संभाली थी। कलेक्टरी भी उन्हें इनाम के तौर पर मिली थी। जब भाजपा की शिवराज सरकार अफसरों की मैदानी पोस्टिंग उपकृत करने के अंदाज में करती रही है तो फिर अफसर मैदान में जाकर अपना करिश्मा आखिर क्यों न दिखाएंगे। जाहिर है मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार को अपने किए कर्मों का फल मिलना शुरु हो गया है। भाजपा की अकुशलता कांग्रेस के लिए भाग्य से छींका टूटने वाली साबित हो रही है। पिछले चुनाव में भी कांग्रेस के भाग्य से छींका टूटा था उसने सत्ता में आकर यही लूट का दौर चलाया था। अब यदि जनता भाजपा से नाराज होती है तो उसे एक बार फिर कमलनाथ जैसा नागनाथ सौगात में मिलेगा।अफसरशाही तो मदमस्त है ही।
Tag: #Panchayat
-

अफसरशाही की गर्राहट
-

पंचायत चुनाव नहीं कराए तो आंदोलन करेगी कांग्रेस,कमलनाथ ने धमकाया
भोपाल,10 जनवरी(प्रेस इँफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार को चेतावनी देकर कहा है कि सरकार दो महीने के अंदर परिसीमन, रोटेशन और ओबीसी आरक्षण के साथ पंचायत चुनाव कराए, नहीं तो कांग्रेस आंदोलन करेगी।
सोमवार को भोपाल में मीडियाकर्मियों से बातचीत में कमलनाथ ने बीजेपी को ओबीसी विरोधी बताया।उन्होंने कहा कि सरकार की ओबीसी और आरक्षण विरोधी नीति के कारण प्रदेश में सात साल से पंचायत चुनाव नहीं हो पा रहे हैं। कुछ महीने पहले शिवराज सरकार इसके लिए अध्यादेश लेकर आई थी। उन्होंने अध्यादेश को काला कानून बताते हुए कहा कि इसमें न रोटेशन का पालन किया गया, न परिसीमन का और न आरक्षण का। इसी वजह से चुनाव रद्द हो गए। अगर सरकार दो महीने के भीतर परिसीमन, रोटेशन और ओबीसी आरक्षण के साथ ग्राम पंचायत चुनाव नहीं कराएगी तो कांग्रेस पार्टी जिला से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक आंदोलन करेगी ।
कमलनाथ ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान 15 साल से मुख्यमंत्री हैं, लेकिन कभी ओबीसी को 27% आरक्षण देने का प्रस्ताव सदन में नहीं रखा। पिछले दो साल से ओबीसी स्कॉलरशिप का 1210 करोड़ रुपये बकाया है। छात्र परेशान हैं, लेकिन सरकार को कोई चिंता नहीं है।
हाल में हुई ओलावृष्टि के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार को तत्काल किसानों को मुआवजा देना चाहिए। इस बारे में मुख्यमंत्री शिवराज की घोषणा को धूठा बताते हुए कमलनाथ ने कहा कि किसानों को हुए नुकसान का आकलन अब तक शुरू नहीं हुआ। फसल बीमा की राशि के भुगतान में हुई देरी के लिए भी उन्होंने बीजेपी सरकार को जिम्मेदार ठहराया। -

ग्रेडिंग के आधार पर पुरस्कृत होंगी प्रदेश की पंचायतें
भोपाल,10 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश की पंचायतों के कार्य की ग्रेडिंग की जायेगी तथा जो पंचायतें अच्छा कार्य कर रही हैं, उन्हें पुरस्कृत किया जायेगा। हर पंचायत की विकास योजना बनाई गई है, उस पर अमल कर ‘स्मार्ट विलेज’ बनाये जायेंगे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने विभाग द्वारा गाँव-गाँव में कचरा संग्रहण एवं परिवहन के लिये बनाये गये ‘मोबाइल एप’ का लोकार्पण भी किया।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री रामखेलावन पटेल, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, सीईओ मध्यप्रदेश डे राज्य आजीविका मिशन एल.एम. बेलवाल तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में स्व-सहायता समूहों द्वारा 127 “दीदी कैफे” संचालित किये जा रहे हैं। ये स्वल्पाहार केन्द्रों के रूप में सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। आने वाले समय में वल्लभ भवन, विंध्याचल, सतपुड़ा आदि स्थानों पर भी “दीदी कैफे” खोले जायेंगे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में प्लास्टिक कचरा निपटान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हो रहा है। गाँव-गाँव से प्लास्टिक कचरा संग्रहण की व्यवस्था की गई है, जहाँ से प्लास्टिक कचरा संग्रहण केन्द्रों तक पहुँचेगा और वहीं से इसकी बिक्री होगी। प्रदेश में 28 प्लास्टिक संग्रहण केन्द्र खोले जा रहे हैं, जिनका संचालन स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा किया जायेगा। प्रदेश में लगभग 9 हजार किलोमीटर सड़कों के निर्माण में वेस्ट प्लास्टिक का उपयोग किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में 42 हजार से अधिक पुरानी जल-संरचनाओं के पुनउर्द्वार का कार्य प्रारंभ किया गया है। यह कार्य मनरेगा एवं अन्य योजनाओं से कराया जा रहा है। इससे बड़े क्षेत्र में सिंचाई, मछली-पालन, सिंघाड़ा उत्पादन आदि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में समुदाय आधारित ग्रामीण पर्यटन में “होम-स्टे” योजना सफलता से संचालित की जा रही है। योजना के प्रति पर्यटकों में अच्छा उत्साह दिख रहा है। निवाड़ी जिले के लदपुरा ग्राम तथा पन्ना जिले के मदला ग्रामों में ‘होम-स्टे’ में बड़ी संख्या में पर्यटक रुक रहे हैं। योजना की सफलता के लिये मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सभी संबंधितों को बधाई दी गई।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हर गाँव के इतिहास, गौरव, पहचान, संस्कृति, महापुरुषों आदि को पुन: स्थापित करने के लिये सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है कि प्रत्येक गाँव में हर वर्ष “ग्राम स्थापना दिवस” मनाया जायेगा। उन्होंने आगामी अप्रैल माह से इस संबंध में कार्यवाही के निर्देश दिये।
हमारे उत्पाद “जैम” और “अमेजन” पर बिकें
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि प्रदेश में महिला स्व-सहायता समूहों एवं अन्य द्वारा तैयार किये गये उत्पाद जैम पोर्टल एवं अमेजन जैसे मार्केटिंग प्लेटफार्म पर बिकें, इसके लिये सघन प्रयास किये जायें।
समूहों को ऋण स्वीकृति में प्रदेश देश में प्रथम
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि स्व-सहायता समूहों को ऑनलाइन माध्यम से ऋण प्रकरण प्रस्तुत करने तथा ऋण स्वीकृति में मध्यप्रदेश देश में प्रथम रहा है। वर्ष 2021-22 में एक लाख 40 हजार 576 ऋण प्रकरण स्वीकृत किये गये। स्वीकृत प्रकरणों में ऋण वितरण की त्वरित कार्यवाही के लिये मुख्यमंत्री द्वारा निर्देश दिये।
हर गाँव में हो ग्राम संगठन
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में हर गाँव में ग्राम संगठन बनें। वर्तमान में प्रदेश में 32 हजार 874 ग्राम संगठन हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सभी 45 हजार गाँवों में ग्राम संगठन बनाने के निर्देश दिये।
74 प्रतिशत प्रधानमंत्री आवास पूर्ण
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना में वर्ष 2024 तक सभी को आवास दिये जाने का लक्ष्य है। योजना में प्रदेश को 30 लाख 39 हजार आवास का लक्ष्य मिला है, जिसके विरुद्ध प्रदेश में 29 लाख 78 हजार (97.3 प्रतिशत) आवास स्वीकृत किये जा चुके हैं तथा 22 लाख 65 हजार (74 प्रतिशत) आवास पूर्ण किये जा चुके हैं। प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों को शासन की 36 प्रकार की योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इनमें राशन प्रदाय, नल-बिजली कनेक्शन, गैस कनेक्शन, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि योजनाएँ शामिल हैं।
सभी गाँवों को ‘ओडीएफ-प्लस’ बनाना है
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन में वर्ष 2024-25 तक प्रदेश के सभी गाँवों को ‘ओडीएफ-प्लस’ बनाना है। इसमें सभी घरों में शौचालय, 80 प्रतिशत घरों में कम्पोस्ट पिट, 80 प्रतिशत घरों में तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा सभी ग्रामों में प्लास्टिक अपशिष्ट संग्रहण एवं पृथकीकरण कार्य किये जाने हैं। प्रदेश के 1154 गाँव को अभी तक ‘ओडीएफ-प्लस’ बनाया जा चुका है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये हैं कि इस बात का पूरा ध्यान रखा जाये कि नये बनने वाले घर बिना शौचालय के न हो।
ग्राम सड़क निर्माण में प्रदेश देश में प्रथम
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के क्रियान्वयन एवं गुणवत्तापूर्ण सड़कों के निर्माण में मध्यप्रदेश देश में शीर्ष पर है। योजना से प्रदेश की 17 हजार 541 बसाहटों को जोड़ा जाना था, जिसके विरुद्ध 17 हजार 506 (99.80 प्रतिशत) बसाहटों को सड़क से जोड़ा जा चुका है। प्रदेश के 250 एवं इससे अधिक जनसंख्या के जनजातीय ग्राम तथा 500 एवं अधिक जनसंख्या के अन्य सभी ग्राम प्रधानमंत्री सड़क से जुड़ गये हैं।
मनरेगा के भुगतान में न हो विलंब
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि मनरेगा में कराये गये कार्यों के भुगतान में विलंब नहीं होना चाहिये। उन्होंने इस संबंध में केन्द्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह से बातचीत कर लंबित भुगतान के लिये बजट की माँग की। केन्द्रीय मंत्री ने अश्वस्त कराया कि शीघ्र ही बजट दिया जायेगा।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मुख्यमंत्री भू-अधिकार योजना, पेसा अधिनियम के क्रियान्वयन, सॉलिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट, देवारण्य योजना के संचालन, पोषण-आहार संयंत्रों के हस्तांतरण आदि के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देश दिये।
