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  • जनगणना कार्य में एमपी ने लगाया अड़ंगा

    जनगणना कार्य में एमपी ने लगाया अड़ंगा

    मंत्रि-परिषद के निर्णय

    भोपाल,5 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)।मुख्यमंत्री कमल नाथ की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में ‘मध्यप्रदेश हाइब्रिड नवकरणीय ऊर्जा एवं एनर्जी स्टोरेज नीति’ लागू करने का निर्णय लिया। यह नीति मध्यप्रदेश राज्य में 3 परियोजनाओं के विकास के लिए लागू की जायेगी। इसमें हायब्रिड पॉवर परियोजना (एच.पी.पी.) में एक परियोजना स्थल पर दो या दो से अधिक नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों से विद्युत उत्पादन होगा, जिसमें ऊर्जा भण्डारण भी शामिल हो सकता है।

    मंत्रि-परिषद ने शासकीय संकल्प पारित कर भारत सरकार से नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 को निरसित करने का आग्रह किया तथा ऐसी नयी सूचनाओं, जिन्हें राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) 2020 में अद्यतन करने के लिए चाहा गया है, को वापस लेने एवं उसके पश्चात ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के अधीन गणना करने का कार्य करने का भी आग्रह किया।

    ‘मध्यप्रदेश हाइब्रिड नवकरणीय ऊर्जा एवं एनर्जी स्टोरेज नीति’ के अंतर्गत इसके अलावा, नवकरणीय ऊर्जा के मौजूदा परियोजना स्थलों के सह-स्थित या स्टैंड-अलोन एनर्जी स्टोरेज संयंत्र स्थापित किये जा सकते हैं ताकि नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों का समुचित उपयोग किया जा सके एवं ग्रिड स्थिरता की दिशा में प्रयास किये जा सकें। उपलब्ध अधोसंरचनाओं और नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों की क्षमताओं के दोहन करने के लिए विभिन्न नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों के हायब्रिडाईजेशन और विभिन्न प्रकार के ऊर्जा भण्डारण को बढ़ावा देने के लिए एक प्रगतिशील नीति की आवश्यकता प्रतिपादित की गई।

    मंत्रि-परिषद ने सामाजिक क्षेत्र में नि:शक्त, निर्धनों के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं को पुरस्कार के लिए इन्दिरा गाँधी समाजसेवा पुरस्कार 1992 में संशोधन कर पुरस्कार की राशि को एक लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने का अनुसमर्थन किया।

    मंत्रि-परिषद ने मंत्रियों द्वारा दिये जाने वाले स्वेच्छानुदान की राशि में किसी एक प्रकरण के लिए वर्तमान में निर्धारित सीमा राशि 20 हजार रूपये को बढ़ाकर 40 हजार रूपये करने का निर्णय लिया गया। मंत्रि-परिषद ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग की योजना ‘विधानसभा भवन एवं विधायक विश्राम गृह का विस्तारण ‘ को निरंतर रखने के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति देने की मंजूरी दी।

    मंत्रि-परिषद ने स्कूल शिक्षा विभाग के अन्तर्गत राज्य स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक संवर्ग) शर्तें एवं भर्ती नियम 2018 में परिवीक्षा अवधि, परिवीक्षा अवधि के वेतनमान एवं आरक्षण नियमों में किये गये संशोधन के प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया। इसी प्रकार मध्यप्रदेश जनजातीय एवं अनुसूचित जाति शिक्षण संवर्ग, सेवा एवं भर्ती नियम 2018 में संशोधन करने का निर्णय भी लिया गया।

    मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राज्य सेवा परीक्षा में संबंधित राज्य सेवा परीक्षा नियम 2015 में भर्ती की प्रक्रिया के संबंध में संशोधन करने का निर्णय लिया और यह संशोधन राज्य सेवा परीक्षा 2019 से लागू करने की मंजूरी दी।

    मंत्रि-परिषद ने शासन के विभिन्न विभागों द्वारा क्रियान्वित की जाने वाली योजनाओं एवं परियोजनाओं, सतत विकास के लक्ष्य, आकांक्षी जिलों तथा विकासखण्डों की निरंतर प्रभावी मॉनीटरिंग के लिए राज्य योजना आयोग में क्रियाशील प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग यूनिट का कार्यकाल अगले 5 वर्षों के लिए निरंतर रखने की मंजूरी दी। यूनिट में वर्तमान में कार्यरत सलाहकार एवं कार्यकारी पूर्व में स्वीकृत अवधि 31 मार्च 2020 तक कार्यरत रहेंगे। बैठक में एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2023 तक की अवधि के लिए 31 पदों पर संविदा आधार पर नियुक्ति करने की मंजूरी दी गयी । इसमें प्रिंसिपल कंसलटेंट का एक, सीनियर कंसलटेंट के 10 और कंसलटेंट के 20 पद शामिल हैं। संविदा आधार पर चयन की प्रक्रिया योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा निर्धारित की जायेगी।

    मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी परियोजनाओं के विकास एवं रख-रखाव करने के लिए राज्य स्तर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन मैप-आई.टी. अन्तर्गत गठित सेन्टर ऑफ एक्सिलेंस के लिए बढ़ती चुनौतियों एवं इसके सुदृढ़ीकरण को ध्यान में रखते हुये कुल 16 नये पदों के सृजन की मंजूरी दी । सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा जिन विभागों के लिए कार्य किया जायेगा, उन विभागों से मैप-आई.टी. द्वारा निर्धारित मापदंड अनुसार शुल्क दिये जाने का अनुमोदन किया गया।

  • कमलनाथ की राजनीति को नसीहत की दरकार

    कमलनाथ की राजनीति को नसीहत की दरकार

    गुलाम भारत में अंग्रेजों के ऊटपटांग कानूनों के विरोध में तरह तरह से विरोध किया जाता रहा है। उसकी वजह ये थी कि अंग्रेजी सल्तनत ने भारत को लूटने के लिए वे कानून बनाए थे। बाद में जब एओ ह्यूम की कांग्रेस को गांधीजी ने अंग्रेजों से संवाद का माध्यम बनाया तब कानूनों का विरोध अदालतों में भी किया जाने लगा। आजाद हिंदुस्तान में गांधी कांग्रेस की नकलची इंदिरा कांग्रेस संसद में पारित कानूनों को लेकर जनता को भड़काने में लगी है। इंदिरा कांग्रेस के नेता अपनी इस शैली से खुद को महात्मा गांधी की कांग्रेस बताना चाह रहे हैं। वो ये तब कर रहे हैं जब पूरा देश एक नई दिशा में चल पड़ा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मेक इन इंडिया उत्पादन बढ़ाकर पूंजी का उत्पादन करना चाहता है जबकि कांग्रेस का मानस आज तक थानेदारी के माहौल से आगे नहीं बढ़ पाया है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कार्यशैली की लाखों आलोचनाएं की जा सकती है। बेशक वे एक सफल शासक नहीं साबित हो पाए। इसके बावजूद वे एक ऐसे मुख्यमंत्री जरूर साबित हुए जिसने प्रदेश को आगे बढ़ने का अवसर दिया। जिसने प्रदेश के लोगों के कामकाज में बेवजह अड़ंगे नहीं लगाए। इसके विपरीत मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार आपातकाल की मनःस्थिति से बाहर नहीं आ पा रही है। सरकार का शुद्ध के लिए युद्ध अभियान हो या बजट की कैपिंग करने की कार्यशैली ये दोनों ही चौकीदारी के मानस से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह चिल्ला चिल्लाकर बोलते रहे कि देश में अब इंस्पेक्टर राज की वापिसी नहीं होगी। इसके बावजूद उनकी ही पार्टी की सरकार ने मध्यप्रदेश को थानेदारी के जाल में उलझा दिया है। ये थानेदारी भी छुप छुपकर की जा रही है। जिस नागरिकता कानून को संसद ने बहुमत से पारित किया उसके खिलाफ राज्य सरकार कुछ ऐसा माहौल बना रही है जैसे संसद में बैठे लोग अंग्रेज हों और उनकी नियत देश का शोषण करने की है। जबकि हकीकत ठीक विपरीत है। खुद को उद्योगपति कहलाने वाले कमलनाथ बेहद कमजोर व्यवस्थापक साबित हो रहे हैं। पिछली सरकार की देखासीखी करके उनके वित्तमंत्री तरुण भानोट ने भले ही दो लाख 14 हजार करोड़ का बजट बना दिया हो लेकिन कमोबेश सभी विभागों को बजट की राशि देने में कटौती कर दी है। हर विभाग को कम से कम चालीस फीसदी बजट कम दिया जा रहा है। बजट की इस कटौती से हाहाकार मचा है। इससे निपटने के लिए उन्होंने मुस्लिमों को नागरिकता कानून के विरोध में भड़काना जारी रखा है। उनके एक विधायक आरिफ मसूद इस अभियान के सूत्रधार हैं। उन्होंने पुराने भोपाल के इलाकों में इतनी दहशत फैलाई कि लोगों ने अपनी दूकानें बंद रखने में ही भलाई समझी। विधायक आरिफ अकील के क्षेत्र में व्यापारियों ने बेखौफ होकर अपना कारोबार जारी रखा लेकिन आरिफ मसूद के इलाके में भारत बंद को सफल दिखाने के लिए दूकानें बंद कराई गईं। सरकार की शह इतनी दबी छुपी है कि पूरे प्रदेश में पुलिस तंत्र का एक हिस्सा बंद का समर्थन करते नजर आया। पुलिस के कुछ आला अधिकारियों का तो कहना था कि लोग यदि कानून का विरोध कर रहे हैं तो फिर उन्हें क्यों रोका जाए। ये पहली बार हो रहा है कि कोई सरकार अपने ही देश के कानून के विरोध को शह दे रही हो। निश्चित रूप से ये समझदारी भरा कदम नहीं है। इससे केन्द्र राज्य के बीच बेवजह कटुता का माहौल बन रहा है। मध्यप्रदेश की जनता के एक हिस्से ने कांग्रेस को सत्ता में काम करने का अवसर दिया है। उसका भी सोच प्रदेश का विकास करना है। जबकि राज्य सरकार इस सत्ता का उपयोग केन्द्र से टकराव के लिए कर रही है। उसकी इस खुन्नस से राज्य के हित प्रभावित हो रहे हैं। प्रदेश के लोगों की जीवचर्या में सहयोग देने की बात आती है तो कमलनाथ और उनके मंत्री कहने लगते हैं कि खजाना खाली है। जबकि राज्य को हर महीने उतनी ही आय हो रही है जितनी पिछली सरकार के कार्यकाल में हो रही थी। राज्य सरकार जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने का माहौल भी नहीं बना पा रही है। मुख्यमंत्री अपने सचिवालय में मैराथन बैठकें करते रहते हैं। वे अधिकारियों पर अधिक राजस्व जुटाने के लिए दबाव बनाते हैं जबकि इसके बावजूद खजाने की आय नहीं बढ़ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि तबादले और पोस्टिंग के धंधों की वजह से राज्य की आय का एक बड़ा हिस्सा काला धन बना रहा है। उसे रोकने के लिए सरकारी तंत्र छापेमारी कर रहा है। इस पूरी कवायद ने प्रदेश में तनाव के हालात बना दिए हैं। राज्य सरकार की इस अज्ञानता भरी कवायद की वजह से राज्य का माहौल तनावपूर्ण है। सीएए का विरोध करके राज्य सरकार ने खुद को फिजूल की उलझन में फंसा लिया है। प्रदेश के जिम्मेदार लोगों को चाहिए कि वे सरकार को नसीहत दें और प्रदेश की विकास यात्रा प्रशस्त करें।