Tag: #Mohan_Yadav

  • आएंगे उद्योग बढ़ेगा रोजगार बोले डाक्टर मोहन यादव

    आएंगे उद्योग बढ़ेगा रोजगार बोले डाक्टर मोहन यादव


    भोपाल,25 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। दो दिवसीय ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट के दूसरे दिन सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम तथा स्टार्ट-अप समिट सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी का अभिवादन करते हुए संबोधन में कहा कि यह दो दिवसीय समिट सकारात्मक भावना और योजनाबद्ध तरीके से आयोजित की गई है। संभागवार रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन कर हमने प्रदेश में एक सकारात्मक औद्योगिक वातावरण तैयार करने का प्रयास किया है। जिससे व्यापक संवाद हुआ है, और इसके उत्साहजनक परिणाम एमएसएमई क्षेत्र में देखने को मिले है। उन्होंने कहा कि उद्योग और निवेश को प्रोत्साहित किए बिना आर्थिक आधार मजबूत नहीं हो सकता। उद्योगों के विकास से ही रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और प्रदेश समृद्ध होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र बहुत विस्तृत है और इससे नई संभावनाओं के द्वार खुले है। उन्होंने प्रदेश के मंत्री श्री चैतन्य काश्यप की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में लागू की गई नई एमएसएमई नीति में सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को समाहित किया गया है, जिससे यह क्षेत्र और अधिक सशक्त बनेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि समिट के अंत में जब आंकड़े आएंगे तब तक यह स्पष्ट हो जाएगा कि एमएसएमई सेक्टर को अभूतपूर्व उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार जो भी कमिटमेंट कर रही है और जिस पारदर्शिता के साथ नीतियों को लागू कर रही है, वह प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने एमएसएमई विभाग की सराहना की और कहा कि सरकार की नीतियां स्पष्ट हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश अब उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार है। हमारी सरकार और उद्यमी मिलकर सफलता के नए आयाम स्थापित करेंगे।

    सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य काश्यप ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव और उद्योग जगत के सभी साथियों का अभिनंदन किया। उन्होंने बताया कि सरकार ने उद्यमियों के प्री-प्रोडक्शन से पोस्ट-प्रोडक्शन तक की हर प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए नई 18 नीतियां लागू की हैं। भूमि आवंटन प्रक्रिया को भी सरल किया गया है ताकि उद्यमियों को सरकारी सुविधाओं का लाभ आसानी से और निश्चित समय में मिले। मंत्री श्री काश्यप ने कहा कि सरकार उद्यमशीलता को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन के दो मुख्य लक्ष्यों पर कार्य कर रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि यदि नई नीतियों की आवश्यकता हुई तो सरकार उद्यमियों के साथ पूरी पारदर्शिता से काम कर उसे भी लागू करेगी। उन्होंने समिट से प्रदेश के सुनहरे भविष्य की कल्पना करते हुए कहा कि नवाचारों और निवेश से लाखों रोजगार सृजित होंगे, इससे देश विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर होगा।

    सत्र के आरंभ अवसर पर एमएसएमई सचिव श्रीमती प्रियंका दास द्वारा एमएसएमई और स्टार्ट-अप इको सिस्टम के संदर्भ में विस्तार से जानकारी दी।

    एमएसएमई मंत्रालय भारत सरकार की अपर विकास आयुक्त सुश्री अश्विनी लाल ने बताया कि एमएसएमई सेक्टर के माध्यम से ग्रामीण, शहरी और हैंडीक्राफ्ट उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स के जरिए युवाओं को आंत्रप्रेन्योरशिप के लिए तैयार किया जा रहा है।

    उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने की मध्यप्रदेश सरकार की नीतियों की सराहना

    एसएवी, दुबई की फाउंडर सुश्री पूर्वी मुनोट ने कहा कि एमपी सरकार ने उद्योगों और युवाओं के लिए सकारात्मक परिवेश तैयार किया है। राज्य एआई, ग्रीन एनर्जी और लॉजिस्टिक सप्लाई चेन के माध्यम से ग्लोबल हब बन रहा है।

    इन एंड ब्रेडस्ट्रीट, मुंबई के एमडी व सीईओ श्री अविनाश गुप्ता ने कहा कि नवाचारों से भारत जल्द ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। एशियाई विकास बैंक की डिप्टी कंट्री डायरेक्टर सुश्री आरती मेहरा ने कृषि, ऑर्गेनिक फार्मिंग और उद्यमियों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता की प्रशंसा की।

    नेशनल एमएसएमई बोर्ड के चेयरमैन श्री सुनील ने एमपी सरकार की 18 नई नीतियों को सराहा और कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में सहायक होंगी।

    सत्र के अंत में स्टार्ट-अप और इको सिस्टम पर आधारित शॉर्ट फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसमें मध्यप्रदेश सरकार की उपलब्धियों और आसान नीतियों को दर्शाया गया। सत्र में अन्य उद्योगपति एवं विभागीय अधिकारी भी उपस्थित रहे।

  • खुद को महाराजा साबित करने पर क्यों तुले हैं शिवराज सिंह

    खुद को महाराजा साबित करने पर क्यों तुले हैं शिवराज सिंह


    अटल आडवाणी के खास सिपहसालार प्रमोद महाजन ने जब मध्यप्रदेश पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाकर भेजा था तब तक वे एक संघर्षरत नेता के रूप में ही पहचाने जाते थे। उमा भारती के तूफानी नेतृत्व के सामने शिवराज सिंह एक टिमटिमाते दिए की भांति थे। बाबूलाल गौर महज केयर टेकर के रूप में थे और उन्हें किनारे खिसका दिया गया था।भाजपा की लगभग डेढ़ दो दशक की सत्ता संभालने के बाद राज्य भले ही साढ़े तीन लाख करोड़ के कर्जे में डूब गया हो लेकिन शिवराज सिंह चौहान आज महाराजा बनकर सामने उपस्थित हैं। वे बार बार ये अहसास कराने का प्रयास भी करते रहते हैं कि आज भी राज्य में उनकी हैसियत कम नहीं हुई है। उनके बेटे की शादी में राजधानी भोपाल में जो रिसेप्शन हुआ वह उनके इन्हीं तेवरों का प्रदर्शन था। साल भर पहले मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव के बेटे की शादी तो इस जश्न के सामने फीकी नजर आती है। शादी के इस जश्न ने भाजपा की रीति नीति और सोच को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए डाक्टर मोहन यादव ने जिस पारिवारिक आयोजन को सादगीपूर्ण तरीके से मनाया उसे शिवराज सिंह ने आखिर क्यों अपनी शान की कुतुब मीनार बनाकर पेश किया।

    मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने बेटे की शादी को केवल पारिवारिक आयोजन बनाया


    लगभग साल भर पहले मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव के बेटे की शादी राजस्थान के पुष्कर स्थित पुष्करा रिसोर्ट से हुई थी।पुत्र वैभव की शादी में शामिल होने के लिए सीएम डाक्टर मोहन यादव भी पहुंचे थे। दो दिनों के इस आयोजन में ध्यान रखा गया था कि लोगों को कोई परेशानी न हो। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने आयोजन के आधे घंटे पहले पुष्कर सरोवर और ब्र्हमा मंदिर खाली करा दिया था। बाद में रिसोर्ट में पुत्र वैभव और पुत्र वधू शालिनी यादव का पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुआ। इस आयोजन में पूजा अर्चना के बाद मोहन यादव की पत्नी सीमा यादव ने अपने पति के चरण धोए और आशीर्वाद लिया।
    इसके विपरीत शिवराज सिंह चौहान के बेटे की शादी का आयोजन तीन चरणों में और भव्यता के बीच संपन्न किया जा रहा है। पहले चरण में जैत गांव में नगर भोज दिया गया जिसमें आसपास के गांवों के करीब एक लाख लोग शामिल हुए। राजधानी के भव्य समारोह में लगभग बीस हजार से अधिक लोगों ने नगर भोज में हिस्सा लिया। इसी तरह दिल्ली का आयोजन भी भव्य रखा गया है। शिवराज सिंह के करीबी बताते हैं कि ये आयोजन जन सहयोग से विशाल बन गया है। टेंट और भोजन की व्यवस्था माजिद भाई संभाले हुए थे। उनके पिता कंजे मियां राजधानी के नामी गिरामी टैंट हाऊस के मालिक थे। अपने कार्यकाल में शिवराज सिंह चौहान उन्हें लगभग पांच हजार करोड़ रुपयों से अधिक का भुगतान कर चुके हैं। इसी तरह सत्ता में रहते हुए उन्होंने जिन अफसरों और ठेकेदारों को भरपूर कमाई कराई वे सभी उनकी कृषि मंत्री की भूमिका से आशान्वित हैं।
    इस आयोजन की भव्यता राजनेताओं के सामने कई सवाल खड़े कर रही है। भाजपा खुद को आरएसएस की राजनीतिक उत्तराधिकारी मानती है। उसके पूर्वज चना चबेना खाकर संगठन को गढ़ने का कार्य करते रहे हैं। जबकि उसी भाजपा के वर्तमान राजनेता खुद को महाराजा साबित करने में जुटे हुए हैं। खुद को किसान पुत्र बताकर शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश की सत्ता में लंबी पारी खेली और वे अब इसी छवि को लेकर केन्द्रीय कृषि मंत्री भी हैं। उनके बेटे की हैसियत इतनी बड़ी नहीं कि इतना विशाल आयोजन कर सके। खुद शिवराज सिंह चौहान की घोषित आय भी इतनी नहीं कि वे इतना बडा आयोजन कर सकें। इसके बावजूद उनके आयोजन की भव्यता बताती है कि इसमें आय से अधिक काले धन का इस्तेमाल किया गया है।


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भाजपा, दिल्ली की आप सरकार पर घोटालों और कुप्रबंधन के आरोप लगाकर सत्ता में पहुंची है। मोदी स्वयं केजरीवाल को अनुभवी चोर की संज्ञा देते रहे हैं। सरकार बनाने के बाद भाजपा वहां केजरीवाल सरकार के घोटालों की जांच कराए जाने की बात भी कह रही है। ऐसे में क्या मोदी अपनी ही कैबिनेट के मंत्री शिवराज सिह चौहान की संपत्तियों की जांच कराने का साहस दिखा पाएंगे। क्या वे उस काले धन के नेटवर्क का पर्दाफाश करने की पहल करवा पाएंगे जिसकी वजह से आज मध्यप्रदेश साढ़े तीन लाख करोड़ रुपयों के कर्ज में डूबा हुआ है।

  • मुख्यमंत्री से बोले अन्नू कपूर एम पी सबसे प्यारा

    मुख्यमंत्री से बोले अन्नू कपूर एम पी सबसे प्यारा

    भोपाल,11 फरवरी( प्रेस इन्फॉर्मेशन सेंटर),।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आज समत्व भवन मुख्यमंत्री निवास में अभिनेता श्री अन्नू कपूर ने सौजन्य भेंट की। श्री अन्नू कपूर ने कहा कि वे मध्यप्रदेश से हैं और यहां आकर उन्हें आनंद का अनुभव होता है। विशेष रूप से मालवा अंचल की संस्कृति से वे बहुत प्रभावित हैं। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से उनका आत्मीय लगाव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मालवा, मध्यप्रदेश के साथ ही राष्ट्र के गौरव हैं।
    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने श्री अन्नू कपूर द्वारा भारतीय सिने जगत और दूरदर्शन पर अंताक्षरी के माध्यम से राष्ट्र भाषा हिन्दी की सुदीर्घ सेवा के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्री अन्नू कपूर ने शिव तांडव स्रोत एवं अन्य संस्कृत भाषा की रचनाओं की सैकड़ों मंचों पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी है। भारतीय संस्कृति की प्राचीनतम देव भाषा कई भाषाओं की जननी है। इस नाते श्री अन्नू कपूर का योगदान महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आग्रह पर अभिनेता श्री कपूर ने संस्कृत के कुछ श्लोक भी सुनाए। इस अवसर पर श्री अन्नू कपूर ने अपनी कला यात्रा और मध्यप्रदेश के नगरों -कस्बों से उनके संबंध के बारे में भी जानकारी दी। प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री अन्नू कपूर एवं उनके साथी श्री देव कुमार का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया।

  • सत्ता के लुटेरों को क्यों पनाह दे रही अफसरशाही

    सत्ता के लुटेरों को क्यों पनाह दे रही अफसरशाही

    भारत से अंग्रेजों को विदा हुए सतत्तर साल हो चुके हैं लेकिन उनका लूट का तंत्र आज भी बदस्तूर जारी है। आज भी आला अफसरों में एक वर्ग ऐसा है जो सरकारी संसाधनों को लूटने वालों को पनाह देता रहता है। सैडमैप के संसाधनों की लूटमार में ये कहानी स्पष्ट रूप से सामने आ रही है।सरकारी नौकरियां बेचने वालों के लिए सैडमैप आज एक मुफीद अखाड़ा बन गया है।नौकरशाही के ही एक वर्ग ने गुणवत्ता पूर्ण कार्य बल उपलब्ध कराने के लिए एक कंपनी सेक्रेटरी अनुराधा सिंघई को यहां का एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनाया था। उन्हें पांच सालों के लिए नियुक्ति दी गई थी। उन्होंने अपना काम संभालते ही सैडमैप में जुटे नौकरी माफिया और रिश्वत देकर नौकरी में आए फोकटियों की छुट्टी करनी शुरु कर दी। इससे हड़कंप मच गया और नौकरी माफिया ने कुछ निकाले गए कर्मचारियों को आगे करके ईडी अनुराधा सिंघई पर कथित अनियमितताओं को लेकर प्राथमिकी दर्ज करवा दी। मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो विद्वान न्यायाधीशों ने अनुराधा सिंघई को क्लीनचिट दे दी। उन्होंने अपना काम फिर चालू किया और सैडमैप को भंडार क्रय नियमों के अधिकार दिलाकर संस्थान की आय और बढ़ा दी। जब उन्होंने कार्यभार संभाला था तब सैडमैप की आय लगभग बीस करोड़ रुपए थी, कर्मचारियों को लगभग दस महीनों से तनख्वाह नहीं मिली थी। संस्थान लगभग बंद होने की कगार पर पहुंच गया था। विभिन्न कंपनियों और सरकारी प्रतिष्ठानों से कारोबार लेकर उन्होंने सैडमैप का टर्नओवर बीस करोड़ रुपयों से बढ़ाकर एक सौ तीस करोड़ रुपए कर दिया। जैसे ही ये चमत्कार लोगों की निगाह में आया वैसे ही लुटेरे सत्ता माफिया की लार टपकने लगी। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कुछ सत्ता के दलालों से सांठगांठ करके उन्होंने इस बार ईडी अनुराधा सिंघई को निलंबित करा दिया।

    इस अन्याय के खिलाफ जब वे हाईकोर्ट गईं तो शासन ने सैडमैप के फंड से ही लगभग नौ लाख रुपए निकालकर वकीलों की फौज पर खर्च कर दिए। हाईकोर्ट जबलपुर में जब शासन की ओर से महाधिवक्ता और उनके सहयोगी दर्जन भर वकीलों ने कहा कि निलंबन कोई सजा थोड़ी है। हमने तो केवल दस्तावेजों की जांच करने के लिए ईडी को निलंबित किया है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि ठीक है अभी मामला पूरी तरह पका नहीं है इसलिए शासन को जांच कर लेने दी जाए। जिस तरह इकतरफा निलंबन की कार्यवाही की गई वह प्राकृतिक न्याय सिद्धांत के विरुद्ध थी। सैडमैप एक स्वायत्तशासी निकाय है और उद्योग विभाग के सचिव केवल इसके संरक्षक होते हैं। शासन इस संस्थान को कोई अनुदान भी नहीं देता है। ईडी, उद्योग विभाग का भी अधिकारी नहीं होता है इसके बावजूद श्रीमती सिंघई को उद्योग विभाग में हाजिरी देने के निर्देश दिए गए. संस्थान के लिए करोड़ों रुपए कमाने वाली इस कंपनी सेक्रेटरी को गुजारे भत्ते के रूप निलंबन के बाद मात्र आठ हजार रुपए दिए गए।

    इस अन्याय के विरुद्ध अनुराधा सिंघई ने मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव को पत्र लिखा जिसमें कहा गया कि उन्हें उद्योग विभाग के सचिव आईएएस नवनीत मोहन कोठारी अनावश्यक रूप से प्रताडि़त कर रहे हैं। अपने पत्र में उन्होंने न्याय के लिए अनुरोध करते हुए लिखा कि सैडमैप के अध्यक्ष और सचिव नवनीत मोहन कोठारी अपनी शक्ति और पद का दुरुपयोग करते हुए एक वरिष्ठ महिला अधिकारी का उत्पीड़न, दुर्व्यवहार, मानसिक यातना, अपमान,गलत निलंबन और अब जीवन भत्ता निर्वाह रोक रहे हैं । ऐसे में मुख्यमंत्री और जनप्रतिनिधि होने के नाते आप मामले में हस्तक्षेप करें और न्याय दिलाएं।

    उद्योग विभाग के सचिव ने मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम के कार्यकारी निदेशक सीएस धुर्वे के माध्यम से बीस अगस्त को एक पत्र भेजा और 21 अगस्त तक एक दिन में लगभग डेढ़ लाख पृष्ठों की जानकारी देने का दबाव बनाया। इसके जवाब में ईडी ने पत्र लिखकर निवेदन किया इस इस डेटा को संग्रहित करने में लगभग एक महीने का समय लगेगा इसलिए कृपया जवाब देने की समय सीमा बढ़ाने की कृपा करें। इस पत्र पर उद्योग विभाग ने कोई फैसला नहीं लिया और तीन सितंबर को ईडी को इकतरफा निलंबित कर दिया गया।
    उद्योग विभाग ने एक छोटे अफसर अंबरीश अधिकारी को भेजकर इकतरफा ईडी का कार्यभार हथिया लिया। श्री अंबरीश को विभाग के कुछ कर्मचारियों के साथ ईडी के दफ्तर भेजा गया और जबर्दस्ती ईडी की कुर्सी हथिया ली गई। ईडी को कार्यालय में मौजूद अपना निजी सामान भी नहीं उठाने दिया गया और सुरक्षा के लिए लगाए गए सभी कैमरे बंद कर दिए गए। उद्योग विभाग ने हाईकोर्ट को कहा कि कर्मचारियों के पीएफ, ईसआईसी चालान और फार्म 16 मे कोई छेड़छाड़ न हो सके इसके लिए श्रीमती सिंघई को निलंबित किया गया है जो कि कोई सजा नहीं है। एक स्वायत्तशासी निकाय की ईडी को पद से हटाने के इस षड़यंत्र में सैडमैप के ही फंड से लाखों रुपए निकाले गए और महाधिवक्ता समेत सचिव ने आठ प्रमुख वकीलों को खड़ा करके ऐसा माहौल बनाया कि हाईकोर्ट कोई राहत न दे पाए। यही नहीं अनुकूल रोस्टर का इंतजार करने के नाम पर भी मामले को कई दिनों तक लटकाया गया।

    श्रीमती अनुराधा सिंघई की कार और ड्राईवर छीन लिए गए। गौरतलब ये है कि जिस जानकारी को इकट्ठा करने के लिए उद्योग विभाग उन्हें एक महीने का वक्त नहीं दे रहा था उस जानकारी को अब तक उद्योग विभाग का अमला भी एकत्रित नहीं कर पाया है।फिर वो जानकारियां केंद्र या अन्य विभागों के पास संरक्षित है।जब सैडमैप के कर्मचारियों को दस दस महीनों तक वेतन नहीं मिल पा रहा था तब तो सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग कभी सामने नहीं आया। जिस स्ववित्त पोषित संगठन को अनुराधा सिंघई ने पैरों पर खड़ा किया उनके विरुद्ध कर्मचारियों को मानव ढाल बनाकर हमले किए जा रहे हैं। जिस नौकरी माफिया को सैडमैप से निकाल बाहर किया गया था उसने एक होनहार महिला अधिकारी का चरित्र हनन करने के लिए फर्जी मोबाईल चैट बनाया को पुलिस जांच में सामने आ गया। इस कूटरचना के आरोपी सिक्योरिटी एजेंसी के संचालक और उसके कर्मचारी का अपराध भी पुलिस ने उजागर कर दिया जिससे षड़यंत्र का पूरा खुलासा हो गया है। तब भी उद्योग विभाग ने आगे आकर कभी नौकरी माफिया के विरुद्ध सैडमैप को सहयोग नहीं किया।

    उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि एक महिला अधिकारी ने अपने पसीने और परिश्रम से मृत संगठन को पुर्नजीवित किया तो लोग फसल काटने आ गए और बीज बोने वाले को कुचलने लगे। इन लोगों को पुरुष भी कैसे कहा जा सकता है। एक झुंड में आकर ये एक महिला का शिकार करने में जुटे हुए हैं। ईडी ने अपने जिन सहयोगियों को संविदा आधार पर नियुक्त किया था उन्हें तोड़ने के लिए सचिव ने अध्यक्ष के रूप में फैसला लिया कि उन्हें सैडमेप में नहीं बल्कि किन्हीं अन्य सूचीबद्ध एजेंसियों के पेरोल पर रखा जाए। इसके लिए एक मानव संसाधन समिति का गठन किया जाए। ईडी ने सचिव को संभावित अधिकारियों की सूची भेजकर कहा कि आप आपने स्तर पर इस सूची को तय कर दीजिए । इसके बावजूद किसी समिति को गठित नहीं किया गया ताकि ईडी अपने सहयोगियों की टीम बढ़ाकर लंबित कार्यों का निपटारा न कर पाएं।

    लगभग तीन सालों में श्रीमती सिंघई ने सैडमेप का टर्नओवर चार गुना तक बढ़ा दिया है। नौकरियां बेचने वाले गिरोह को निकाल बाहर किया गया। मैनपावर आऊटसोर्सिंग उद्योग को साफ सुथरा बनाकर सरकारी कार्यालयों में संविदा के आधार पर नियुक्तियां सरल बना दी गईं। यही वजह थी कि सैडमेप को मध्यप्रदेश भंडार क्रय नियम अंतर्गत नैमेत्तिक नोडल एजेंसी बनाया गया।

    श्रीमती अनुराधा सिंघई ने अपने पत्र में लिखा है कि उन्होंने अगले दो सालों में लगभग पचास लाख नौकरियां सृजित करके रोजगार समस्या का समाधान करने का बीड़ा उठाया है। इस लक्ष्य को वे लगातार हासिल करती जा रहीं हैं जबकि नौकरी माफिया के लोग इन बेरोजगारों से नौकरी के एवज में रिश्वत लेकर बेरोजगारों और राज्य के साथ गद्दारी करने का षड़यंत्र कर कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि उनका गलत निलंबन रद्द किया जाए और उन्हें सम्मान के साथ बहाल किया जाए। उनके वित्तीय नुक्सान की भरपाई की जाए और वास्तविक दोषी को दंडित किया जाए।

    इस पत्र के जवाब में आईएएस और सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग के सचिव नवनीत कोठारी का कहना है कि श्रीमती सिंघई कई छोटे कर्मचारियों का वेतन नहीं दे रहीं थीं इसलिए उन्हें निलंबित किया गया है। जब उनसे कहा गया कि जिन कर्मचारियों की नौकरियां संदिग्ध हैं तो उन्हें वेतन क्यों दिया जाना चाहिए तो उन्होंने कहा कि हम मामले की जांच करा रहे हैं। उनके हटाए गए नौकरी माफिया को दुबारा सैडमैप में जगह दिए जाने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मैं पिछले सात महीनों से सचिव पद पर आया हूं इससे पुराने मामलों के बारे में मैं कुछ नहीं बोल सकता।

    पाकिस्तान में सेना ने जिस तरह हर कमाई के तंत्र पर अपना कब्जा जमा लिया है और वहां कि अर्थव्यवस्था छिन्न भिन्न कर दी है उसी प्रकार मध्यप्रदेश में नौकरशाही ने हर कमाई के तंत्र पर अपना सिक्का जमा लिया है। लगभग अस्सी हजार करोड़ का स्थापना व्यय हड़प जाने वाला सरकारी तंत्र जनता की समस्याओं का समाधान देने में असफल साबित हो रहा है। उत्पादकता बढ़ाने के स्थान पर उद्यमियों से लूटमार की जाने लगी है।मोदी सरकार ने राज्य की आय बढ़ाने का लक्ष्य तय करके डाक्टर मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर भेजा है। चेतन काश्यप जैसे हुनरमंद उद्योगपति सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग के मंत्री बनाए गए हैं इसके बावजूद उनकी नाक तले नौकरी माफिया का षड़ंयत्र बदस्तूर जारी है।व्यापम भर्ती घोटाले की कहानियों की स्याही अभी सूखी नहीं है और एक बार फिर सेडमैप से नौकरियां बेचे जाने की नींव रखी जाने लगी है।उम्मीद की जानी चाहिए कि इस विषय पर राज्य के नीति निर्धारक एक बार गंभीरता से विचार करेंगे और समस्या का समाधान ढूंढ़ने में अपने हुनर का प्रयोग करेंगे। प्रशासनिक प्रमुख को बदलकर राज्य सरकार ने सुशासन की अपनी मंशा तो जाहिर कर दी है देखना है कि इसका असर कितने दिनों में साकार होता नजर आता है।

  • प्रभावी रही डॉ.मोहन यादव की अपील

    प्रभावी रही डॉ.मोहन यादव की अपील


    भोपाल,08 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने जम्मू कश्मीर और हरियाणा, राज्यों के चुनावों में जिन छह विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार किया था उनमें बीजेपी को अच्छा समर्थन मिला है। जम्मू कश्मीर के साम्बा में बीजेपी के सुरजीत सिंह को तीस हजार वोटो से जीत मिली है।दादरी विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी के सुनील सतपाल सांगवान जीत गए है। भिवानी में बीजेपी के घनश्याम सराफ बत्तीस हजार से अधिक मतों से जीते है। बावनी खेड़ा में बीजेपी के कपूर सिंह लगभग बाईस हजार मतों से जीते है।तोसम विधानसभा में बीजेपी की श्रुति चौधरी चौदह हजार से अधिक मतों से जीतीं हैं।

  • डॉ.मोहन यादव सरकार नहीं तो कौन चला रहा है मध्यप्रदेश

    डॉ.मोहन यादव सरकार नहीं तो कौन चला रहा है मध्यप्रदेश


    भोपाल,23 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पचास लाख युवाओं को नौकरी दिलाने का अभियान चला रहे सैडमैप की कार्यकारी निदेशक अनुराधा सिंघई(शर्मा) को इकतरफा आदेश से सस्पेंड करने वाला मामला गहराता जा रहा है। ईडी ने इस अन्याय की शिकायत मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से की तो मध्यप्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता समेत आठ कानूनविद हाईकोर्ट में कैविएट का जवाब लेकर पहुंच गए। हाईकोर्ट ने लताड़ लगाई तो जजों को मैनेज करने के लिए सैडमैप से ही नौ लाख रुपए निकालकर मुकदमेबाजी पर खर्च कर दिए गए। मजेदार बात तो ये है कि इस अवैधानिक कार्रवाई के बारे में सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री को भी विश्वास में नहीं लिया गया। मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव के सुशासन की जवाबदारी संभालने वालों को इस मामले में कुछ पता नहीं। सचिव नवनीत कोठारी कहते हैं मैं बता नहीं सकता। जब किसी को कुछ पता नहीं तो आखिर प्रदेश सरकार को चला कौन रहा है।


    जब सैडमैप घाटे की घाटी पर लुढ़क रहा था कर्मचारियों को दस दस महीने क तनख्वाह नहीं मिल रही थी सरकार इसे बंद करने का विचार कर रही थी तब एक कंपनी सेक्रेटरी अनुराधा सिंघई ने अपनी हिकमतअमली से संस्थान को अपने पैरों पर खड़ा कर दिया। आते ही उन्होंने जब संस्थान में जोंक की तरह लिपटे नौकरी माफिया को निकाल बाहर किया तो इन लोगों नेऊटपटांग कहानियां गढ़कर ईडी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करवा दी। अदालत और सरकार को गुमराह करके की गई इस शिकायत की पोल हाईकोर्ट में खुल गई और श्रीमती सिंघई को बेदाग बरी कर दिया गया। उसी नौकरी माफिया ने इस बार सरकार के चोर दरवाजे से घुसकर संस्थान के निकाले गए भ्रष्ट अफसरों को दुबारा नौकरी में लाने की मुहिम चला दी है। इकतरफा सस्पेंशन के आदेश के माध्यम से सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग के एक जूनियर अधिकारी को यहां बिठा दिया गया उसने न तो विधिवत चार्ज लिया और न ही श्रीमती सिंघई के सस्पेंशन की प्रक्रिया पूरी की गई।


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान को सफल बनाने के लिए धड़ाधड़ नौकरियां जनरेट कर रहीं श्रीमती अनुराधा सिंघई को ये कहकर सस्पेंड किया गया कि वे आला अधिकारियों की बात नहीं मानती हैं। जबकि यही माईबाप संस्थान को कभी ठीक से नहीं चला सके । पिछले तीस सालों में संस्थान ने कोई करिश्मा नहीं किया। यहां पदस्थ ईडी और अन्य अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त रहे। लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू जैसे संस्थानों को छापे मारकर जांच करनी पड़ी। जब प्रदेश की एक हुनरमंद कंपनी सेक्रेटरी ने राज्य की पूंजी बनाने का पारदर्शी अभियान शुरु किया तो नौकरी माफिया ने तरह तरह के षड़यंत्र रचकर युवाओं की राह अवरुद्ध करने की मुहिम छेड़ दी है।


    हाईकोर्ट के पीठासीन जजों ने याचिका के निपटारे के लिए सरकार से जो सवाल जवाब किए उससे महाधिवक्ता समेत तमाम कानूनविद हकला गए। उन्होंने कई तरह के तर्क जुटाकर अदालत में रखे हैं इसके बावजूद वे किसी न्यायाधीश का सामना नहीं कर पा रहे हैं। नतीजतन रोटेशन के आधार पर किसी ऐसे जज का इंतजार किया जा रहा है जिसके माध्यम से शासन की काली करतूतों पर पर्दा डाला जा सके।


    सवाल तो ये है कि आखिर क्या वजह है कि राज्य सरकार स्वयं युवाओं को रोजगार दिलाने के अभियान में टांग फंसा रही है। सरकार में बैठे वो कौन लोग है जो राज्य की उत्पादकता बढ़ाने के अभियान में रोड़े अटका रहे हैं। यदि सैडमैप की ईडी कोई गलती कर रहीं थीं या कोई भ्रष्टाचार कर रहीं थीं तो राज्य मंत्रालय में बैठे आईएएस अफसरों में से ही कई अधिकारी उपलब्ध हैं जिनसे जांच करवाकर ईडी की गलतियां उजागर की जा सकतीं थीं। जिस नौकरी माफिया ने लोकायुक्त में शिकायत की उसी की जांच करवाकर ईडी के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती थी। ये न करते हुए शासन के विधि एवं न्याय विभाग ने मुकदमेबाजी पर मोटी फीस खर्च करने का फैसला ले लिया। सूत्र बताते हैं कि अपनी आत्मनिर्भरता की राह खोज रहे सैडमैप के ही फंड से नौ लाख रुपए वकीलों की फीस निकाली गई है।


    इस षड़यंत्र की भी पोल खुल गई है। कथित तौर पर शासन में सक्रिय जिस मंच के माध्यम से ये अभियान चलाया जा रहा है वह नौकरी माफिया का अड्डा बन गया है। सवा तीन लाख करोड़ रुपयों का बजट खर्च करने वाली मोहन यादव की भाजपा को पार्टी फंड के लिए कोई चंदे की जरूरत तो नहीं जो वह दिन को रात करने के लिए वकीलों और जजों की नाव पर डोल रही है।


    गौरतलब है कि प्रदेश के युवाओं में नौकरी की आकांक्षा होते हुए भी सरकार उन्हें रोजगार मुहैया नहीं करा पा रही है। लगभग अस्सी हजार करोड़ रुपयों के बजट से दस लाख अनुत्पादक सरकारी अमले को पाला पोसा जा रहा है। इसके विपरीत जब सरकार का ही एक संस्थान सरकारी के साथ कार्पोरेट,कोआपरेटिव, सेक्टर और उद्यमिता को बढ़ावा देकर रोजगार संवर्धन का पथ प्रशस्त कर रहा हो तो आखिर वो कौन है जो सरकार के इस अभियान में पलीता लगा रहा है। डाक्टर मोहन यादव की सरकार के नुमाईंदों को इसकी पड़ताल करनी होगी ताकि युवाओं को न्याय मिल सके और मोदी सरकार के राष्ट्रीय अनुष्ठान की आहूतियां बेरोकटोक जारी रह सकें।

    भारतीय जनता पार्टी स्वयं को विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन होने का दावा करती है। कहा जाता है कि उसके नेतागण देश को सबसे तेज बढ़ती इकानामी बनाना चाहते हैं। ऐसे में जब कोई संस्थान उसके ही वोटरों को रोजगार दिलाने का बीड़ा उठाए हुए है तब उसे अस्थिर करने से आखिर किसे लाभ होने वाला है। ये षड़यंत्र भी तब चल रहा है जब सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री चेतन काश्यप स्वयं उद्यमिता को बढ़ावा देने की मुहिम चलाए हुए हैं। वे खुद उद्योगपति हैं और सरकार से कोई वेतन भत्ते नहीं लेते हैं। भाजपा को सोचना होगा कि वह वित्तीय संरचनाओं में देश को आगे ले जाने वाले युवाओं को भर्ती करना चाहते हैं या फिर भेड़िया धसान युवाओं के सहारे शेखचिल्ली ख्वाब देखते रहना चाहेंगे।भारत माता की आराधना सुपुत्रों से होती है माफियागिरी से तो केवल पप्पू पैदा होते हैं।

  • संविधान से सदियों पुराना कर्म सिद्धांत

    संविधान से सदियों पुराना कर्म सिद्धांत


    देश और दुनिया के दूर दराज के देशों में भी आज भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में जबसे मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने आव्हान किया उसके बाद से तो गली गली और गांव गांव में जन्माष्टमी का माहौल सुरम्य बन चला है। हमेशा की तरह इस बार भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर प्रदेश भर में बारिश के छींटे पड़ रहे हैं। कई इलाकों में तो इतना अधिक पानी गिर रहा है कि मानों भगवान स्वयं नंदलाला के जन्म से आल्हादित हैं। ऐसे में कई विपक्षी नेताओं ने सरकार के आव्हान से असहमति जताते हुए बेसुरा राग अलापना शुरु कर दिया है। उन नेताओं का कहना है कि जन्माष्टमी जनता मनाए, धार्मिक संगठन मनाएं तो ठीक है लेकिन सरकार क्यों आव्हान कर रही है। दरअसल ये सभी वे आवाजें हैं जो विदेशी धर्मों की गोद में फलती फूलती रहीं हैं। आयातित सोच में रंगे इन नेताओं ने हमेशा सनातन को निशाना बनाया है। विदेशी सोच की नकल करने वाले ये नादान कहते हैं कि देश को आगे बढ़ना है तो किसी एक धर्म को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। उन लोगों को ये नहीं मालूम कि समूची वसुधा को अपना कुटुंब मानने वाला सनातन किसी भी खंडशः सोच से मीलों आगे सोचता है। आक्रांता बनकर भारत में आए जो विदेशी सोच कभी भी भारत के अस्तित्व को कुचल नहीं पाए वे आज संविधान की दुहाई देकर कह रहे हैं कि कृष्ण जनमाष्टमी मनाने से अन्य धर्मों को असमानता भरे माहौल का सामना करना पड़ेगा। ऐसे बयान देने वालों को श्रीमद भगवत गीता के उपदेशों की जानकारी मिल सके इसीलिए तो जन्माष्टमी का आयोजन धूमधाम से मनाया जा रहा है। जब युद्ध की तलवारें खिंची हुई हों तब कर्म का उपदेश देने वाले देवकीनंदन के मंत्र और भी ज्यादा सार्थक हो जाते हैं। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के दौरान यही ज्ञान देने के लिए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी युद्धभूमि तक गए थे। हठी जेलेंस्की यदि इस भाषा को समझ जाते तो यूक्रेन एक बार फिर खुशहाल देश बन सकता था। रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन ने तो भारत के प्रयासों का समर्थन करते हुए युद्ध रोक दिया। रूस भी चाहता है कि शांति का कोई मार्ग निकले। ये संभव इसलिए नहीं हो सका कि किसी ने यूक्रेन या अमेरिका को पहले कभी गीता के उपदेश नहीं सुनाए। युद्ध भूमि की हुंकार के बीच उन उपदेशों को समझने का सामर्थ्य आम योद्धा में नहीं होता। यदि श्रीकृष्ण दुर्योधन से कहते कि अनीति और अधर्म की राह पर चलोगे तो कर्म फल तुम्हें छोड़ेगा नहीं ऐसे में तुम्हारा नाश हो जाएगा,तो वो नहीं मानता। । कुछ ऐसी ही चुनौतियों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत का दर्शन युद्धभूमि तक पहुंचाकर अपना दायित्व निभाया। कमोबेश यही प्रयास मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव कर रहे हैं। जब विदेशी घुसपैठियों, आक्रांताओं और षड़यंत्रों के साथ कांग्रेस की पारिवारिक परंपरा के अध्यक्ष राहुल गांधी देश में जातिगत जनगणना का वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रहे हैं तब उन्हें गीता के उपदेश अवश्य पढ़ने चाहिए। मध्यप्रदेश की धरती से गीता का कर्म सिद्धांत पूरे विश्व को एक बार फिर सत्य के मार्ग पर चलने का आग्रह कर रहा है। चाहे असददुद्दीन औवेसी हों या फिर कांग्रेस के चंपू टाईप नेता उन सभी को समझना होगा कि भारत का संविधान लागू हुए तो मात्र 74 वर्ष हुए हैं। ये देश तो हजारों सालों से भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्री राम के बनाए आदर्शों पर चल रहा है। तबसे यहां कभी किसी अन्य धर्म या विचार को पद दलित करने का विचार नहीं फैला। चंद लुटेरों ने भले ही भारत की अस्मिता को कुचलने का प्रयास किया हो पर भारत आज भी अविचल और अडिग है। स्थिर है और संपूर्ण है। कितने ही आक्रांता आए और आकर चले गए। हम अपने शाश्वत सिद्धांतों पर लगातार चलते जा रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार भी तो यही समझाने का प्रयास कर रही है कि केवल और केवल सत्य के मार्ग पर चलिए। अन्य विचारों से गुमराह होकर सत्कर्म के मार्ग से विमुख होंगे तो फिर दंड भी आपको ही भोगना पड़ेगा। भारत अभी घोषित युद्ध के दौर में नहीं पहुंचा है इसलिए शायद नंदलाला के जीवनदर्शन की ये पुकार भटके हुए नौजवानों और नागरिकों का पुण्य मार्ग प्रशस्त करेगी।

  • विकास की मुख्यधारा में बढ़ चला मध्यप्रदेश

    विकास की मुख्यधारा में बढ़ चला मध्यप्रदेश


    डॉ. मयंक चतुर्वेदी

    मध्य प्रदेश में नई सरकार के गठन और उसके बाद प्रदेश को मुखिया के रूप में मिले डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री के पद पर रहते अभी पूरे छह माह भी नहीं बीते हैं कि एक के बाद एक उनके निर्णयों ने हर क्षेत्र में राज्य की गति को ऊंचाईयों तक पहुंचा दिया है।

    यह स्वभाविक है कि किसी भी राज्य के विकास में सबसे अहम भूमिका, शासन, प्रशासन और जनता के बीच के समन्वय की होती है । लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा तब तक सफल नहीं होती, जब तक कि ये तीनों ही आपस में समन्वय के साथ कार्य करते हुए नहीं दिखते हैं । जब ये तीनों के बीच समन्वय होता है तो देश एवं प्रदेश की आर्थिक उन्नति होती है और आर्थिक गति आने से राज्य के हर नागरिक के जीवन में भौतिक सुख एवं उससे मिलनेवाले आध्यात्मिक सुख की वृद्धि होती है।

    मध्य प्रदेश में आज जो नई भाजपा की मोहन सरकार में दृश्य उभरा है, वह राज्य के नागरिक की जेब से जुड़ा हुआ है, बाजार से आप कोई वस्तु एक उपभोक्ता के रूप में तभी खरीदते हैं, जब आपकी पॉकेट इसकी अनुमति देती है। यदि आपका कोई आर्थिक संग्रह नहीं या आपकी आय पर्याप्त नहीं है तब आप चाहकर भी कोई वस्तु स्वयं के लिए और अपने परिवार जन, कुटुम्ब, बन्धु-बान्धवों के लिए नहीं खरीद पाते हैं, किंतु इस संदर्भ में मध्य प्रदेश में जो खुशी की बात वर्तमान में है, वह यह है कि राज्य में निवास कर रहे लोग खुलकर बाजार से खरीदारी कर रहे हैं और प्रदेश की सकल घरेलू आय (जीडीपी) बढ़ाने में अपना भरपूर योगदान दे रहे हैं ।

    स्वभाविक है यदि राज्य में सरकार की सोच एवं कार्य लोककल्याणकारी नहीं होते तथा रोजगार के पर्याप्त अवसर मुहैया कराने के साथ लगातार नवाचार करने में यदि भाजपा की मोहन सरकार कहीं कमजोर होती तो आज यह दृष्य उभरकर कभी सामने नहीं आता। यही कारण है कि देश में आज मध्य प्रदेश अपनी बड़ी आबादी के बाद भी उच्च पूंजीगत व्यय में या कहना होगा कि लग्जरी वस्तुओं की अधिक खपत के कारण राज्य माल और सेवा कर (एसजीएसटी) संग्रह में, कहीं अधिक वृद्धि करने में भारत के सभी राज्यों में सबसे आगे रहने में कामयाब हुआ है ।

    भारत में विनिर्माण के लिए पीएलआई, राज्य प्रोत्साहन, विदेशी व्यापार नीति के तहत लाभ जीएसटी, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट कानूनों सहित अधिकांश करों पर ग्राहकों को पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से सलाह दे रहे केपीएमजी संस्थान के राष्ट्रीय प्रमुख अभिषेक जैन की इस संबंध में कही बातों पर हमें गौर करना चाहिए, वे कहते है कि किसी राज्य के जीएसटी की वृद्धि और गिरावट का सटीक कारण बताना कठिन है, कर संग्रह दरों को प्रभावित करने के लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। चूंकि जीएसटी एक उपभोग-आधारित कर है, इसलिए एसजीएसटी दरें उपभोग पैटर्न में बदलाव से प्रभावित हो सकती हैं। उच्च आर्थिक क्रय शक्ति वाले राज्य और जनसंख्या आमतौर पर एसजीएसटी संग्रह को प्रभावित करने वाले कारक हैं। कई अन्य कारक भी एसजीएसटी में योगदान दे सकते हैं, जैसे सरकारी नीतियों या विनियमों में बदलाव जो राज्य में निवेश को गति देता है। अन्य प्रकार के सरकारों के सफल आर्थिक प्रयास अधिकांशत: जीएसटी की वृद्धि के कारण बनते हैं।

    इस दिशा में कहना होगा कि यह मोहन सरकार की आर्थिक क्षेत्र में सकारात्मक और सही निर्णयों का ही प्रतिफल है जोकि मध्य प्रदेश ने वित्त वर्ष 24 में साल-दर-साल सबसे अधिक एसजीएसटी संग्रह में सफलता हासिल की है। पिछले वित्तीय वर्ष में दर्ज की गई 15.93 प्रतिशत की वृद्धि जहां मप्र ने अपने खाते में दर्ज की थी, वहीं, अभी उसने 19.53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर न सिर्फ अपने ही रिकार्ड को तोड़ा है, बल्कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल जनसंख्यावाले राज्य जहां माल की खपत भी स्वभाविक तौर पर अधिक हैै, उसे भी पीछे छोड़ दिया है।

    आंकड़ों को देखें तो मध्य प्रदेश के बाद दूसरे नंबर पर वित्त वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश में 18.88 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज में यूपी ने भी बीते एक वर्ष में एकदम से लगभग चार पायदान की छलांग लगाई है। 18.58 प्रतिशत की वृद्धि के साथ तेलंगाना अगले क्रम में है। सूची में चौथे स्थान पर महाराष्ट्र है, जिसका वास्तविक रूप से एक लाख करोड़ रुपये का सबसे अधिक एसजीएसटी संग्रह रहा है और वित्त वर्ष 24 में 17.9 प्रतिशत की वृद्धि दर दिखी है। दूसरी ओर गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, हरियाणा और कर्नाटक जैसे कई अन्य राज्यों में 15 प्रतिशत से कम वृद्धि दर्ज होते दिख रही है।

    इसके साथ मध्य प्रदेश ने वित्त वर्ष 24 में अपने पूंजीगत व्यय में 97 प्रतिशत की वृद्धि की है, जो आंशिक रूप से एसजीएसटी संग्रह में उछाल आगे ले जाने में सहायक रहा है। राज्य में बड़ी आबादी को रोजगार पाने एवं उन्हें मिलनेवाले वेतन में बढ़ोत्तरी को भी इससे जोड़कर देखा जा सकता है, प्रत्येक व्यक्ति और परिवार की क्रय क्षमता इसके कारण से बढ़ जाती है । इससे किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था को बहुत मदद मिलती है। मध्य प्रदेश के शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्र ने भी इस बार कर संग्रह में एक बड़ी भूमिका निभाई है। जोकि यह समझता है कि राज्य में न सिर्फ शहरों में बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में प्रति व्यक्ति आय में लगातार अच्छी वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही पिछले दिनों मध्य प्रदेश ने वाहन खरीदी में भी अपना एक नया रिकार्ड बनाया, यह भी आज प्रत्येक परिवार की आर्थिक समृद्धि को दर्शा रहा है।

    वस्तुत: इस मामले में आज ”बिजनेसलाइन” द्वारा देश के शीर्ष 15 राज्यों का तुलनात्मक अध्ययन एवं उसकी रिपोर्ट मध्य प्रदेश के संदर्भ में एक उत्साह जगा रही है। यदि इसी तरह से मध्य प्रदेश आगे बढ़ता रहा तो जैसा अभी कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक सभा के दौरान कहा था कि भाजपा की सरकार मप्र को देश का सबसे विकसित राज्य बनाएगी और इसके लिए हम संकल्पित हैं, तो कहना होगा कि उनका यह संकल्प साकार होने की दिशा में जरूर सफलता से आगे बढ़ता हुआ दिख रहा है।
    (लेखक, फ‍िल्‍म सेंसर बोर्ड एडवाइजरी कमेटी के सदस्‍य एवं पत्रकार हैं) 

  • सुशासन, संस्कृति, सेवा और सतत विकास हमारा मंत्रःमोहन यादव

    सुशासन, संस्कृति, सेवा और सतत विकास हमारा मंत्रःमोहन यादव


    भोपाल, 12 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा है कि सुशासन, संस्कृति, सेवा और सतत विकास हमारा मूल मंत्र है। हम राजा विक्रमादित्य की सुशासन की परंपरा को आगे ले जाना चाहते हैं। इसके लिए निरंतर प्रयास भी कर रहे हैं। प्रदेश विधानसभा में सोमवार को 2024-25 के आय व्यय का लेखानुदान पेश होने के बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर रखे गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में उन्होंने यह वक्तव्य दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर बनना हमारा सौभाग्य है। उज्जैन से भी भगवान राम का खास रिश्ता है।
    उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पांच भारत रत्न दिए। उसके लिए मैं पीएम मोदी जी का आभार व्यक्त करता हूं। कांग्रेस ने तो पूर्व पीएम स्व. नरसिंम्हा राव को कभी सम्मान नहीं दिया। पीएम मोदी राव जैसे योग्य व्यक्तियों को ढूंढ ढूंढ़ कर भारत रत्न से सम्मानित कर रहे हैं। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने टिप्पणी की। जिस पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताते हुए हंगामा शुरु कर दिया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने नेता प्रतिपक्ष के बयान को विलोपित करवा दिया।
    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर महापुरुषों के अपमान का आरोप लगाया। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कांग्रेस ने टंट्या मामा ,वीर शिवाजी समेत अन्य महापुरुषों को लुटेरा कहा था। इस पर ओमकार सिंह मरकाम ने आरोप लगाया कि भाजपा देश को गुमराह कर रही है। कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत बोले किस इतिहास में लिखा है कि कांग्रस ने टंट्या मामा को लुटेरा कहा है। इसी बात पर विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया और प्रमाण मांगा। अध्यक्ष ने दोनों पक्षों को बैठने को कहा और बोले मैं तथ्यों को दिखवाऊंगा। इस पर भाजपा विधायकों ने एनसीईआरटी की बुक का संदर्भ दिया। विपक्ष ने विजयवर्गीय के शब्द को विलोपित करने की मांग कर सदन से वॉकआउट कर दिया। इसके बाद राज्यपाल का अभिभाषण स्वीकार कर सदन की कार्रवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
    सीएम ने कहा कि मध्य प्रदेश के पांच व्यक्तियों को पद्मश्री दिया गया है। ऐसा कोई सोच भी सकता था क्या। डॉक्टर राजपुरोहित जी का बहुत महत्वपूर्ण योगदान था। अपनी संस्कृति को जिंदा रखने के लिए माच कला के बारे किताबें लिखी। हर भाषा का पर्याय हो सकता है, लेकिन मोदी जी का कोई पर्याय नहीं है। अटक से कटक तक सभी दिशाओं में हमारे नेता पीएम नरेंद्र मोदी जी का गुणगान हो रहा है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 माह की सरकार में आपने कुछ किया नहीं। अब मेरी दो महीने में परीक्षा ले रहे हो तो पूरा उत्तर भी सुनो। उन्होंने कहा कि संकल्प पत्र के 40 से अधिक बिंदु पूरे कर दिए हैं। कई तो वो काम भी कर दिए जो संकल्प पत्र में नही थे। सीएम ने कहा कि हमारा संकल्प पत्र कागज का टुकड़ा नहीं, धर्म ग्रंथ गीता, भागवत की तरह है, जो पांच साल में पूरा किया जाएगा। सीएम ने कहा कि स्वच्छता, खनिज निविदा में मध्य प्रदेश अग्रणी है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की सभी लोकसभा सीटें भाजपा जीतेगी। एनडीए 400 पार होगा।
    मुख्यमंत्री ने धार्मिक स्थलों पर हेलीकॉप्टर और हवाई यात्रा की सुविधा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इंदौर से महाकालेश्वर इंदौर से ओंकारेश्वर, ग्वालियर से ओरछा ग्वालियर से दतिया ऐसे कई सारे स्थलों पर हवाई सुविधा शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि कोशिश कर रहे हैं कि चुनाव से पहले टेंडर हो जाए। सीएम ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार अयोध्या जाएगी। सरकार मंत्रियों के साथ विधायकों को भी अयोध्या लेकर जाएगी।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा प्रदेश के विकास की नई इबादत लिखेंगे। इस वर्ष गुड़ी पड़वा पूरे प्रदेश में मनाएंगे। प्रदेश सरकार गरीबों का युवाओं का कल्याण किसानों की भलाई और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कार्य करेगी। जननी एक्सप्रेस योजना में वाहन बढ़ाए जाएंगे। अग्नि वीर योजना में 360 घंटे प्रशिक्षण योजना संचालित करेंगे। वीर भारत संग्रहालय के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहर से जनता को अवगत करवाएंगे। वर्ष 2028 के सिंहस्थ में दुनिया भर के तीर्थयात्री आएंगे। इस आयोजन को अधिक से अधिक सफल बने इस दिशा में भी सरकार काम कर रही है।

  • जनादेश की बेहतर डिलीवरी के लिए शिवराज की विदाई उचित फैसला

    जनादेश की बेहतर डिलीवरी के लिए शिवराज की विदाई उचित फैसला


    -आलोक सिंघई-
    भारतीय जनता पार्टी की डॉक्टर मोहन यादव सरकार ने अभी तक अपना मंत्रिमंडल घोषित नहीं किया है। चुनाव नतीजों के इक्कीस दिन बीत चुके हैं लेकिन आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा कोई चूक नहीं करना चाह रही है। शिवराज की सत्ता के नजदीक रहकर उपकृत होता रहा एक बड़ा धड़ा ये कह रहा है कि शिवराज जी जैसे राजनेता को कमतर आंकना उचित नहीं है। वे एक आलराऊंडर खिलाड़ी थे उन्हें जबरन पेवेलियन में भेज दिया गया है। कांग्रेस के गुंडों की तरह शिवराज और उनके गुंडे बन चुके मंत्रियों ने भाजपा संगठन को आंखें दिखाना शुरु भी कर दी हैं। जबकि भाजपा का राष्ट्रीय संगठन जिस कार्पोरेट संस्कृति का अनुसरण कर रहा है उसमें चेहरे से ज्यादा अंकों का महत्व है । जिसने सेवा कार्य में ज्यादा अंक जीते हैं उसे कमान थमाई जा रही है। यही फार्मूला अपनाकर तीनों राज्यों में नए नेतृत्व को अवसर दिया गया है। कांग्रेस संस्कृति की घिसी पिटी परिवारवादी अवधारणा को छोड़कर ही भाजपा आज कार्यकर्ताओं की आशा का दल बनकर उभरी है। मध्यप्रदेश में तो कार्यकर्ताओं की एक बड़ी जमात बरसों से सत्ता की बाट जोह रही है ऐसे में शिवराज की विदाई हो या मंत्रियों की संभावित विदाई उसे देखने की दृष्टि बदलने का समय आ गया है।


    दरअसल जब हम मानना शुरु कर देते हैं जो जानने की वैज्ञानिक दृष्टि लुप्त प्राय हो जाती है। महाभारत युद्ध में श्रीकृष्ण के कहने पर अर्जुन ने हनुमानजी का आवाहन कर उनको रथ के ऊपर पताका के साथ विराजित किया। अर्जुन का रथ श्रीकृष्ण चला रहे थे और शेषनाग ने पृथ्वी के नीचे से अर्जुन के रथ के पहियों को पकड़ा था, जिससे रथ पीछे न जाए। इतना सब कुछ अर्जुन के रथ की रक्षा के लिए भगवान ने व्यवस्था की थी।


    महाभारत युद्ध समाप्ति के बाद अर्जुन ने भगवान से कहा पहले आप उतरिए मैं बाद में उतरता हूं, इस पर भगवान बोले नहीं अर्जुन पहले तुम उतरो। भगवान के आदेशनुसार अर्जुन रथ से उतर गए, थोड़ी देर बाद श्रीकृष्ण भी रथ से उतर गए, तभी शेषनाग पाताल लोक चले गए। हनुमानजी भी तुरंत अंतर्ध्यान हो गए। रथ से उतरते ही श्रीकृष्ण अर्जुन को कुछ दूर ले गए। इतने में ही अर्जुन का रथ तेज अग्नि की लपटों से धूं-धूं कर जलने लगा। अर्जुन बड़े हैरान हुए और श्रीकृष्ण से पूछा, भगवान ये क्या हुआ!


    कृष्ण बोले- ‘हे अर्जुन- ये रथ तो भीष्मपितामह, द्रोणाचार्य और कर्ण के दिव्यास्त्रों के वार से बहुत पहले ही जल गया था, क्योंकि पताका लिए हनुमानजी और मैं स्वयं रथ पर बैठा था, इसलिए यह रथ मेरे संकल्प से चल रहा था। अब जब कि तुम्हारा काम पूरा हो चुका है, तब मैंने उसे छोड़ दिया, इसलिए अब ये रथ भस्म हो गया।’


    व्यक्ति को लगता है कि उसके प्रभाव, बल, बुद्धि से सब हो रहा है, लेकिन जीवन में ऐसा बहुत कुछ होता है जो प्रभु कृपा या गुरु कृपा से हो रहा है, पर हमारा अहंकार कृपा को मानने को तैयार नहीं होता, जिस कारण अहंकार बढ़ता जाता है।ऐसा ही कुछ शिवराज सिंह चौहान और उनके समर्थकों के साथ हो रहा है। शिवराज जी के नेतृत्व में तो भाजपा सरकार पिछला चुनाव हार चुकी थी। खुद शिवराज जी सार्वजनिक तौर पर बोल चुके थे कि मैं मुक्त हुआ। ये अलग बात है कि किसी नए ब्रांड की तैयारी न होने की वजह से कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद शिवराज जी को जवाबदारी सौंपी गई थी। ये शिवराज जी भी अच्छी तरह जानते थे कि उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा जरूर जा रहा है लेकिन उन्हें सत्ता की बागडोर पार्टी के सुपुर्द करनी है। यही वजह है कि वे प्रदेश के कर्ज लिए धन से चलाई जा रहीं योजनाओं का श्रेय बटोरने का प्रयास करने लगे थे उन्हें लगता था कि जनता में उनकी लोकप्रियता को देखकर भाजपा हाईकमान हमेशा की तरह एक बार फिर लाचार हो जाएगा और मजबूर होकर उन्हें ही एक बार फिर प्रदेश की बागडोर सौंप देगा।


    यथार्थ तो ये है कि शिवराज की सत्ता काफी पहले ही विदा हो चुकी थी। वे तो सत्ता माफिया और चमचों की फौज के सहारे जैसे तैसे अपना काम चला रहे थे। शिवराज का कार्यकाल राज्य के इतिहास में मजबूरी का काल कहा जाएगा। जिस तरह से सत्ता पर शिव राज की ताजपोशी हुई और जिस तरह उन्होंने अपना एकछत्र साम्राज्य स्थापित करने के लिए पार्टी के स्वाभाविक नेतृत्व की नर्सरी को मटियामेट किया उससे पार्टी के भीतर बड़ा आक्रोश फैला चुका था।चुनाव जीतने की मजबूरी के चलते कार्यकर्ताओं ने चुप्पी साध रखी थी। भाजपा संगठन के सख्त तेवरों और उमा भारती की राजनीतिक दुर्दशा को देखकर कोई भी नया क्षत्रप खड़ा नहीं हो सका था। खुद मोहन यादव भी सत्ता सिंहासन के लिए अपनी जमात नहीं खड़ी कर पाए। आज भी उन्हें मालूम है कि यदि उन्होंने किसी लाबी का सहारा लेकर अपनी मनमानी की तो पार्टी के भीतर मजबूत हो चुके कई कार्यकर्ता उन्हें बर्दाश्त नहीं करेंगे। यही वजह है कि उन्हें अपना मंत्रिमंडल घोषित करने में देरी हो रही है। भाजपा हाईकमान ने राज्यों की सत्ता में मनमानी रोकने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर प्रशासनिक अफसरों और पुलिस अफसरों की सत्ता का विकेन्द्रीकरण किया है। यही कुछ वह अपने मंत्रिमंडल में भी करने जा रही है। शिवराज और उनके मंत्रियों को सत्ता के मार्गदर्शन का अवसर जरूर मिलेगा। इससे ज्यादा की उम्मीद वे न रखें तो अच्छा होगा क्योंकि अब प्रदेश को सख्त सर्जरी की जरूरत भी है।

  • सरकारी कालेजों को दुबारा बजट देकर किसने किया भ्रष्टाचार

    सरकारी कालेजों को दुबारा बजट देकर किसने किया भ्रष्टाचार

    भोपाल, 21 जुलाई,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) उच्च शिक्षा विभाग के महाविद्यालय जोकि शिक्षा की सबसे ऊंची इकाई मानी जाती है,उनकी गरिमा ताक पर रखकर नियम विरुद्ध प्रक्रियाओं से उन्हें भ्रष्टाचार का केंद्र बनाया जा रहा है | उच्च शिक्षा विभाग ने अपने पत्र क्रमांक 291/272/आउशि/योजना/2023 दिनांक 6.6.23से महाविद्यालयों की एक सूची प्रकाशित की थी जिसमें यह निर्देश दिए गए थे की जो महाविद्यालय विश्व बैंक पोषित योजना ऑब्लिक रूसा योजना अंतर्गत आ रहे हैं उन कॉलेजों को प्रस्ताव नहीं भेजना है इन महाविद्यालयों को सम्मिलित नहीं किया जाएगा इसका प्रमाण पत्र भी कॉलेजों से मंगवाया गया था उसके बावजूद उन्हीं कॉलेजों को दुबारा बजट आवंटन कर दिया गया I जिन कॉलेजों पिपरई, मंदसौर पी जी कॉलेज , मंदसौर गर्ल्स ,नलखेडा , दालोदा को पिछले साल बजट आवंटित हुआ था उन्हें इस बार फिर बजट आबंटित कर दिया गया। उच्च अधिकारियों ने ही इस प्रक्रिया को डबल अपनाने के आदेश जारी किए हैं।
    यह प्रक्रिया प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के अधिकांश महाविद्यालयों में एक जैसी की जा रही है और एक ही व्यक्ति विशेष फर्म एवं अधिकारियों को लाभ दिलाने की दृष्टि से यह कार्य किया जा रहा है| उच्च शिक्षा विभाग द्वारा वर्तमान में नामली ,जीरन,रावती ,अजयगढ़,मंदसौर , पवई,पिपरई , जैतवारा ,नलखेडा ,दलोदा एवं अन्य महाविद्यालयों को बजट आवंटित किया गया है निविदा की शर्त निम्नानुसार है :-

    1.सभी महाविद्यालय की निविदा में निविदाकारो से समस्त उत्पादों कि टेस्ट रिपोर्ट थर्ड पार्टी अन्य लैब से चाही गयी है, जबकि निर्माता द्वारा प्रदाय किये जा रहे उत्पादों को निर्माता कंपनी द्वारा अपनी टेस्टिंग लैब में टेस्ट करवाकर ही सप्लाई कर दिया गया। निविदा में न्यूनतम दर आने वाली फर्म को सामान देने के पूर्व थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन/विभाग की तकनीकी समिति से कराना होता है I

    2.सभी महाविद्यालय कि निविदा में निविदाकार का पास्ट एक्सपीरियंस 50% मांगा गया है जिसमे बिड वैल्यू नहीं दर्शायी गई है। जिससे निविदाकार का पास्ट एक्सपीरियंस 50% उपकरणों कि संख्या के आधार पर आकलन होना है I जबकि आश्चर्य की बात यह है कि निविदा कि अतिरिक्त निविदा बिंदु क़ 6 की शर्तो में निविदाकार द्वारा पिछले 3 वर्षों में ₹ 1 करोड़ का एकल ऑर्डर एवं ₹ 47- 47 लाख रुपए के पृथक – पृथक दो आर्डर उपलब्ध कराने होंगे नहीं तो निविदा पत्रक के अभाव में अमान्य कर दी जावेगीI

    1. जेम पोर्टल पर उपलब्ध निविदा क्रमांक GEM/2023/B/3669315 DT. 11.7.23, GEM/2023/B/3669485, DT. 11.7.23, GEM/2023/B/3668564 DT.10.7.23 , GEM/2023/B/3667558 DT.11.7.23 , GEM/2023/B/3667559 Dt.11.7.2023 को प्रकाशित हुई | जिसमें GEM/2023/B/3669315 DT. 11.7.23 निविदा में विभाग का नाम डिपार्टमेंट ऑफ हायर एजुकेशन प्रदर्शित हो रहा है एवं निविदा में ऑर्गेनाइजेशन का नाम गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ मध्य प्रदेश प्रदर्शित है, निविदा के प्रपत्र में कहीं भी महाविद्यालय का नाम प्रदर्शित नहीं हो रहा है और उच्च शिक्षा विभाग में कोई भी ऐसा महाविद्यालय नहीं है जिसका नाम गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ मध्य प्रदेश हैI निविदा में धरोहर राशि की मांग की गई है जिसमें बेनेफिशरी के नाम के लिए गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ मध्य प्रदेश के नाम पर धरोहर राशि जमा करनी है , निविदा में महाविद्यालय का ऐसा कोई भी खाता नंबर नहीं है जिसमें यह राशि जमा की जा सके निविदाकारों के साथ मिलकर महाविद्यालय के अधिकारी/कर्मचारी एवं संस्था विशेष लोगो द्वारा राशी कि बंदरबांट करने का प्रयास किया जा रहा है |