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  • सत्ता माफिया से मुक्ति दिलाने एमपी आया जाणता राजा

    सत्ता माफिया से मुक्ति दिलाने एमपी आया जाणता राजा


    कांग्रेस की अराजक सरकारों से मुक्ति के दो दशक बाद तक मध्यप्रदेश किताबी प्रयोगों से गुजरता रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने जिस पंच ज अभियान की नींव रखी थी वह साकार हो पाती इसके पहले ही अंतर्राष्ट्रीय सूदखोरों के एजेंटों ने मध्यप्रदेश की सत्ता हथिया ली थी। बाबूलाल गौर हों या शिवराज सिंह चौहान और थोड़े समय के लिए आए कांग्रेस के कमलनाथ सभी कर्ज आधारित अर्थव्यवस्था के पक्षधर रहे हैं। यही वजह है कि सरकारों का आकलन करने में जनता को खासी परेशानी महसूस होती थी। भाजपाई उन्हें एक तरह से कांग्रेसी ही नजर आते थे। जाहिर है कि जब विकास की अवधारणा कर्ज लेकर घी पीने के सूत्रवाक्य पर टिकी हो तो राज्य की उत्पादकता बढ़ाने की ओर किसका ध्यान जाता।कर्ज लेना और फिर सत्ता के इर्द गिर्द जुटे माफिया के माध्यम से उसे हड़प लेना सरकार की शैली बन गई थी। पहली बार महाकाल ने एमपी में सुशासन के लिए अपने ऐसे भक्त को भेजा है जो सुशासन की पाठशाला में तपकर सामने आया है।


    मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज सिंह चौहान ने किसानों का नाम जपना शुरु किया था। एमपी की कृषि ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जो बगैर निवेश किए खासी उत्पादकता देता है। औद्योगिक विकास में तो भारी निवेश करने के बाद भी उत्पादकता की कोई गारंटी नहीं होती। फिर जब उद्योगों को जबरिया थोपा गया हो तब तो वे अपनी स्थापना के समय ही उपसंहार का अध्याय भी लिख देते हैं। ऐसे में प्रदेश को आत्मनिर्भरता की परंपरा की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। शिवराज सिंह चौहान के होनोलुलु शासन से हर कोई खफा था लेकिन कांग्रेस न आ जाए इस भय से सभी खामोश रहते थे। हवाई जहाजों में फुदककर गांव खेड़ों में जाना और मैं हूं न कहकर लोगों को हूल देना कोई शिवराज सिंह चौहान से सीख सकता है।अभी ये भ्रम फैलाया जा रहा है कि मामा के जाने से लाड़ली बहना योजना बंद कर दी जाएगी,जबकि ये तो शासन की योजना है। ये बात लाड़ली बहनों को थोड़े दिनों में जरूर समझ में आ जाएगी।


    भाजपा के नेता रघुनंदन शर्मा ने तो शिवराज जी को घोषणावीर का तमगा देकर उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया था लेकिन अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के समर्थन से उनकी नैया चलती रही। क्या भाजपा और क्या कांग्रेसी सभी उनके समर्थन में खामोश रहे। शिवराज सिंह चौहान विनम्र शासक रहे हैं और बीस सालों बाद भी उनमें अहंकार नहीं पनप पाया है इसी वजह से उनकी सारी नाकामियों पर पार्टी और संगठन दोनों परदा डालते रहे। खोखली ललकार के सहारे उन्होंने सत्ता चलाने की कोशिश जरूर की लेकिन वे शुरु से लेकर अंत तक नौकरशाही और पुलिस प्रशासन पर लगाम नहीं लगा सके।


    भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में जब विधायक दलकी बैठक हो रही थी तब पार्टी का संगठन और सरकार के नुमाइंदे सभी अपनी नाकामियों का सबूत पेश कर रहे थे। भारतीय जनता पार्टी संगठन ने कोई प्लान नहीं बनाया था कि जब नए नेता की घोषणा होगी तो किस तरह वो आने वाले नागरिकों, पदाधिकारियों या प्रेस को संबोधित करेंगे। बैठक समाप्त होते ही प्रेस के प्रतिनिधियों को जब फैसले की जानकारी मिली तो वे पार्टी कार्यालय में भीतर घुस गए। भारी धक्कामुक्की और अव्यवस्था के बीच जनता तक जानकारी पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं थी।

    नए नेता के चयन की सूचना जनता तक पहुंचाने के लिए प्रेस मीडिया को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।


    ऐसा लगता है कि ये अराजकता पार्टी के प्रदेश हाईकमान के निर्देश पर ही की गई थी। व्यवस्थित चुनाव प्रचार अभियान चलाने वाला भाजपा का संगठन फैसला सुनने के बाद ऐसा शून्य हो गया था कि उसने अव्यवस्था का लांछन नए नेता पर थोपने की तैयारी पहले से ही कर रखी थी। महिलाएं और युवा पत्रकार इसी धक्कामुक्की के बीच जनता को जानकारियां पहुंचा रहे थे। नाकाम पुलिस प्रशासन भी तैयार नहीं था। वह तय ही नहीं कर पाया कि किस तरह वह उत्साहित कार्यकर्ताओं के इस सैलाब का प्रबंधन कर पाएगा। माईक संभाले पुलिस के अधिकारी स्वयं अपनी अव्यवस्था के शिकार बने और भीड़ ने उन्हें धकेलकर गिरा दिया।

    विदा होती सत्ता ने नए मुख्यमंत्री के चयन की सूचना के मार्ग में दरवाजा बंद करके कई बाधाएं खड़ी कर दीं थीं.


    डॉ.मोहन यादव सख्त प्रशासक माने जाते हैं। वे स्वर्गीय वीरेन्द्र सखलेचा की तरह आदर्शवाद के तले दबने वाले व्यक्ति भी नहीं हैं। उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि समाज और भीड़ का प्रबंधन कैसे करना होता है। उज्जैन में लगने वाले कुंभ की व्यवस्था संभालने का उन्हें लंबा अनुभव है। ऐसे में जनता को क्या सुविधाएं कब उपलब्ध करवाना है वे अच्छी तरह जानते हैं। किन पाखंडियों की सत्ता में घुसपैठ रोकना है वे ये भी अच्छी तरह समझते हैं।समर्पित भाव से जनसेवा करने का उनका लंबा इतिहास है। पार्टी को जाति या वर्ग के दायरे से बाहर निकलकर व्यवस्था संभालने में भी उनकी युक्तियां सदैव से चर्चित रहीं हैं।

    भारत सरकार की योजनाएं हों या फिर राज्य सरकार की उन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों को मुहैया कराने में रिकार्ड स्थापित किया है। योजनाओं को जरूरतमंदों तक पहुंचाना और इनमें घोटाला करने वालों को उनकी हैसियत बताना उनका प्रिय शगल है। इसलिए अराजकता के दौर के आदी हो चुके मध्यप्रदेश के सत्ता माफिया को अब सावधान हो जाना चाहिए। सत्ता की आड़ में बजट की चोरी करने वालों का गिरोह भी अब सावधान हो जाए तो ही बेहतर होगा क्योंकि सत्ता के लुटेरों की खाल खींचने वाला जांबाज अब मैदान पर आ गया है। ऐसे ठग समझ लें कि उनका सामना अब तक शिवराज जी जैसे भलेमानस से पड़ा था। पहली बार उन्हें जाणता राजा मिला है। जो एमपी को नई ऊंचाईयों पर ले जाने के लिए कमर कसकर तैयार है।फिर मोदीजी का डबल इंजन तो पहले ही उनके साथ मौजूद है।

  • यौन हमले का आरोपी बूटकॉम का प्रकाश गुप्ता फरार

    यौन हमले का आरोपी बूटकॉम का प्रकाश गुप्ता फरार


    लालगंज के माफिया परिवार से जुड़े गुप्ता पर यौन हमले के आरोप में पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज


    भोपाल, 23 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर). राजधानी के एमपीनगर में बूटकॉम सिस्टम्स नाम से दूकान चलाने वाले बदनाम व्यापारी प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ पुलिस ने नाबालिग बच्ची से यौन शोषण करने के आरोप में पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इस अपराध में प्रकाश चंद्र गुप्ता को जिंदा रहने तक जेल या फांसी की सजा हो सकती है। प्रकरण दर्ज करने के बाद से वह फरार है और पुलिस उसकी तलाश सरगर्मी से कर रही है।
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार धोखाधड़ी और जालसाजी से अरबों रुपयों की दौलत कमाने वाले कंप्यूटर व्यापारी प्रकाश चंद्र गुप्ता के पापों का घड़ा तेजी से भरता जा रहा है। अदालतों और पुलिस से सांठ गांठ करके लगातार तीस सालों तक सरेआम लूटमार करने वाला ठग प्रकाश चंद्र गुप्ता इस बार नाबालिग का यौन शोषण करने की वजह से पास्को एक्ट में फंस गया है। उसके खिलाफ राजधानी के अयोध्यानगर पुलिस थाने में विगत बीस जून को लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम 2012 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस थाना गोविंदपुरा में सब इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ दीपिका गौतम ने ये शिकायत दर्ज की है। पुलिस थाना अयोध्यानगर को बच्ची के विरुद्ध अपराध की शिकायत प्राप्त होने की वजह से कंट्रोल रूम ने उन्हें वहीं जाकर रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया था।
    फरियादिनी अपने माता पिता के साथ पुलिस थाने पहुंची थी और उसने बताया कि अयोध्या बायपास के कंफर्ट पार्क के मकान नंबर 9 में रहने वाले प्रकाश चंद्र गुप्ता ने उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न किया था जिसे वह दंडित करवाना चाहती है। पुलिस ने फरियादिनी की हस्तलिखित शिकायत पर प्रथम दृष्टया भादवि की धारा 354,354(क), 506, 9(एम),(एन)। 10 पास्को एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। बच्ची ने बताया कि उसके माता पिता के प्रकाश चंद्र गुप्ता के साथ पारिवारिक संबंध रहे हैं । मेरे माता पिता 18से 20 जुलाई 2015 को मेरी बड़ी बहन का एडमीशन दिल्ली विश्विद्यालय में करवाने गए थे इस दौरान उन्होंने उसे प्रकाश गुप्ता के घर छोड़ दिया था। मेरी मम्मी प्रकाश गुप्ता को राखी बांधती थी और पारिवारिक संबंधों की वजह से उन्होंने मुझे सुरक्षित माना था।

    बताते हैं गुप्ता ने सतगढ़ी में सात एकड़ जमीन खरीदी और एक एकड़ में जजों अफसरों की ऐशगाह बनाई है.


    बीस जुलाई 2015 को जब प्रकाश गुप्ता की पत्नी और बेटी ऊपर के कमरे में थे तब मैं खाना खाने के बाद नीचे के कमरे में बैठकर टीवी देख रही थी। टीवी देखते समय मेरी आंख लग गई। इसी दौरान प्रकाश गुप्ता ने आपत्तिजनक स्थिति में आकर मेरे शरीर से खिलवाड़ करना शुरु कर दिया। जब मैंने चिल्लाने की कोशिश की तो उसने मेरा मुंह दबा दिया और धमकाया कि यदि तूने किसी को बताने की कोशिश की तो मैं तुम्हारी मां और बड़ी बहन की हत्या कर दूंगा। इसके बाद जब मेरे माता पिता लौट आए तो उसके बाद भी प्रकाश गुप्ता मुझे जान से मारने की धमकी देता रहता था। मैं डर गई और इसी वजह से मैंने उस घटना के बारे में किसी को नहीं बताया।
    पीड़िता ने बताया कि मैंने इस तरह की घटनाओं के बारे में आनलाईन कई आलेख पढ़े । स्कूल में सैक्सुअल अवेयरनेस के कार्यक्रमों में भी लड़कियों को इस तरह के अपराधों के बारे में बताया गया। मी टू मूवमेंट किस तरह से समाज के काले चेहरे को उजागर करता है ये भी मालूम पड़ा। इससे मुझमें हिम्मत आई और मैंने उस घटना के बारे में अपने मम्मी पापा को जानकारी दी। मैं पुलिस के सामने सहायता की अपेक्षा करके हाजिर हुई हूं ताकि प्रकाश चंद गुप्ता जैसे भेड़ियों को कानून सम्मत सजा दिलवाई जा सके। अयोध्यानगर पुलिस ने दीपिका गौतम की आईडी थाने में न होने की वजह से प्रधान आरक्षक 2928 धर्मेन्द्र सिंह गुर्जर की आईडी से ये प्रकरण कायम किया है।
    गौरतलब है कि प्रकाश चंद्र गुप्ता के विरुद्ध राजधानी के पुलिस थानों में लगभग साढ़े तीन दशकों के दौरान कई आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं। कुछ प्रकरणों में तो उसे जेल भी भेजा गया है। इसके बावजूद बताते हैं कि वह अदालतों में वकीलों और जजों की सांठ गांठ से झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करके बच निकलता है। इस तरह के अपराधों से उसने और उसके सहयोगी वकीलों जजों ने अरबों रुपयों की दौलत एकत्रित कर ली है। सूत्र बताते हैं कि उसने कई गर्ल्स हास्टल भी चला रखे हैं जिनमें वह ऐसी लड़कियां रखता है जिन्हें कथित तौर पर जजों और पुलिस के अफसरों,नेताओं को गिफ्ट के तौर पर पेश किया जाता है। अपने अपराधों को छुपाने के लिए राजधानी में एक टीवी चैनल भी चला रखा है जिसका संचालन एक बड़े टीवी चैनल से निष्कासित पत्रकार करता है। वह और उसकी सहयोगी पत्रकार समाज के प्रभावशाली लोगों को पुरस्कार देकर इस आपराधिक कारोबार पर पर्दा डालने का काम करते हैं। भारतीय जनता पार्टी के एक स्वर्गवासी नेता के संरक्षण में वह करोड़ों रुपयों के ठेके लेता रहा है। पुलिस ने अपनी जांच में ऐसे कई बिंदुओं को भी शामिल किया है जिससे प्रकाश गुप्ता के अपराधों को उजागर किया जा सके और उसे दंडित किया जा सके। प्रकाश गुप्ता इन समय फरार है और उसने अपने अदालती संपर्कों के माध्यम से पुलिस पर दबाव बनाना शुरु कर दिया है।
    पास्को यानि प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रन फ्राम सेक्सुअल अफेंस एक्ट नाम का ये कानून 2012 में लाया गया था। इसमें बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर फैसला किया जाता है। ये कानून 18 साल से कम उम्र के लड़के और लड़कियों दोनों पर लागू होता है। पास्को कानून को 2019 में संशोधित करके मौत की सजा का भी प्रावधान कर दिया गया। इस कानून के तहत यदि आरोपी को उम्रकैद की सजा मिले तो वह जेल से जिंदा बाहर नहीं आ सकता।इसके अलावा दोषी व्यक्ति पर भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया जाता है। बच्चों के खिलाफ पोर्नोग्राफी करने वाले अपराधी को भी तीन से सात साल की जेल और जुर्माने की सजा से दंडित किया जाता है।

  • भूमाफिया से सुपारी लेने लगी इंदौर की पुलिस

    भूमाफिया से सुपारी लेने लगी इंदौर की पुलिस


    भोपाल,16 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पुलिस भी भू माफिया का गुर्गा बन सकती है ये पुलिस कमिश्नर प्रणाली के किसी पैरवीकोर ने कभी सोचा नहीं होगा। इंदौर की एक टाऊनशिप के नागरिक इन दिनों पुलिस की भूमिका को लेकर सशंकित हैं और उसकी माफियागिरी का तांडव झेल रहे हैं। माना ये जाता था कि राजस्व अधिकारी अक्सर दबाव में आकर माफिया की काली करतूतों के सामने सरेंडर कर देते हैं तो इन हालात से निपटने में पुलिस प्रभावी हो सकती है। इंदौर पुलिस की वर्तमान कारगुजारियों ने इन कयासों को धूल धूसरित कर दिया है।
    मामला सिल्वर स्प्रिंग्स, बायपास रोड, नायता मुंडला स्थित, सैकड़ों एकड़ में विस्तृत एकीकृत टाउनशिप का है। भूमाफिया ने इस पर अपना आधिपत्य बनाए रखने के लिए उसे अनेक टुकड़ों में बांट दिया है । टाऊनशिप के फेज़ 1 में हाल ही में उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ से मिले आदेश के बाद चुनाव हुए और बिल्डर का विधिवत सफाया हो गया ।टाऊनशिप के फेज़ 2 में रखरखाव के लिए गठित बिल्डर की कंपनी के सहयोगी संगठन की विशेष आमसभा में एकीकृत टाऊनशिप की संघर्ष समिति के वर्तमान अध्यक्ष आलोक जैन और एक अन्य रहवासी सुबोध गुप्ता के बीच मामूली धक्का मुक्की के बाद (1) हीरालाल जोशी (2) सुबोध गुप्ता,(3) अभय कटारे (4) विकास मल्होत्रा (5) सत्यम राठौर (6) ऋषभ विश्वकर्मा व अन्य बाहरी अनधिकृत व्यक्तियों (7) परमजीत सिंह (8) जीतू सोलंकी (9) देवेश्वर द्विवेदी (10) प्रयास द्विवेदी (11) नरेंद्र पाटीदार ने एक तयशुदा रणनीति बनाकर आलोक जैन के ऊपर घातक जानलेवा हमला कर दिया । इस घटना के बाद इन सभी लोगों ने पुलिस थाने में झूठे बयान देकर श्री जैन के ही विरुद्ध शिकायत जमा करा दी। विवाद टालने के लिए आलोक जैन ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। उन्होंने इस मामले को समाप्त समझ लिया। इस समझौते के बाद बिल्डर के गुर्गों ने श्री जैन को निष्कासित करने के लिए जाल बिछाना शुरु कर दिया । इस टाऊनशिप के बिल्डर डेवलपर के कंपनी सचिव नीलेश गुप्ता (12) ने एक पत्र के माध्यम ये कहना शुरु कर दिया कि आलोक जैन को निष्कासित कर दिया गया है। सुबोध गुप्ता की ओर से समिति अध्यक्ष श्री जैन को सोसायटी से बाहर करने संबंधी आवेदन कार्यालय में जमा कराया गया । तभी से ये सभी लोग श्री जैन को डराने धमकाने के निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
    मालूम हो कि सैकड़ों एकड़ में विस्तृत सिल्वर स्प्रिंग्स टाउनशिप के निदेशक अभिषेक झवेरी (13) और मुकेश झवेरी (14) ने सैकड़ों करोड़ रुपयों की शासकीय / रहवासियों की साझा धन संपत्ति पर अवैध कब्जा कर लिया है । रहवासियों के सभागार पर कब्ज़ा कर वहां चलाए जा रहे अवैध शराबखाने व अन्य संदिग्ध गतिविधियों को पुलिस की पहल पर ही बंद किया गया था । हालांकि बताया जाता है कि अभी भी खाली मकानों से बिल्डर और उसके सहयोगी (विपक्षी क्रमांक 1 से 11) अवैध अनैतिक गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं । एकीकृत टाउनशिप के बहुसंख्यक रहवासियों की एकमात्र प्रतिनिधि संगठन यह संघर्ष समिति शासन प्रशासन न्यायालय के हर स्तर पर बिल्डर डेवलपर की अनियमितताओं / गबन / घोटालों को चुनौती दे रही है ।
    WP 5586/2021 उच्च न्यायालय, इंदौर
    CC/114/2022 उपभोक्ता आयोग, इंदौर
    इसी से क्षुब्ध होकर बिल्डर व उसके नियमित कर्मचारियों / प्रायोजित प्रतिनिधियों (विपक्षी क्रमांक 1 से 14) द्वारा समिति के अध्यक्ष पर यह सुनियोजित-निर्धारित जानलेवा हमला किया गया । अन्य उपस्थित रहवासियों के हस्तक्षेप से कोई अनहोनी तो नहीं हो सकी,लेकिन विपक्षी क्रमांक 1 से 14 तक के लोगों से प्रार्थी समिति के अध्यक्ष श्री आलोक जैन व उनके परिवार को जानमाल का खतरा निरंतर बना हुआ है ।
    ज्ञातव्य है कि विपक्षी क्रमांक 3 अभय कटारे के विरुद्ध पहले ही अनेक आपराधिक प्रकरण विचाराधीन हैं. इस टाऊनशिप में भी यह व्यक्ति बिल्डर की ओर से कब्जा जमाने,अतिक्रमण करने, गबन करने और अवैध वसूली करने का काम संभालता है।इसके इशारे पर विपक्षी क्रमांक 1 हीरालाल (पप्पू) जोशी ने सरेआम श्री जैन को जान से मारने की धमकी भी दी है।वर्तमान में टाऊनशिप के सर्वेसर्वा सूत्रधार होने के कारण इन्हीं के पास पूरे घटनाक्रम के आडियो और वीडियो साक्ष्य सुरक्षित हैं । जो दो अन्य वीडियो पक्ष विपक्ष की ओर से प्रस्तुत किए गए वह सुश्री शीतल राय के मोबाइल से बनाए गए, जिसमें से बीच का गंभीर मारपीट / बलवा वाला हिस्सा संपादित कर छुपा दिया गया है ।ये वीडियो दिखाकर बिल्डर के गुर्गे पुलिस को गुमराह कर रहे हैं।

  • माफिया से गलबहियां और मुक्ति की लबरयाई

    माफिया से गलबहियां और मुक्ति की लबरयाई

    भारत पर 514 अरब डॉलर का कर्ज है और इस कर्ज का अधिकतर हिस्सा या तो अनुत्पादक है या फिर उसके मुनाफे पर चंद लोग ऐश कर रहे हैं। इस कर्ज का अधिकांश हिस्सा विदेशी बैंकों में छिपाकर रखा गया है।विदेशी धन वापस लाने का वायदा करके सत्ता में आई भाजपा की मोदी सरकार के लिए यह विदेशी कर्ज एक अबूझ पहेली बन गया है। पहले कार्यकाल में तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने टैक्स हैवन देशों से नई संधियां करके विदेशी बैंकों में रखे धन के मालिकों को ढूंढ़ने का भरपूर जतन किया। इसके बावजूद सरकार को अधिक सफलता नहीं मिली। ये जरूर पता चल गया कि बैंकों की 85 फीसदी कर्ज की रकम जिन उद्योपतियों ने गड़प ली है वे भारत में ही सक्रिय हैं और फर्जी कंपनियों से धन का उपयोग कर रहे हैं। सरकार ने फर्जी कंपनियों को भी ढूंढ़ निकाला और उनका धन बरामद कर लिया। इसके बावजूद जिस धन को शोधन के बाद बाकायदा सीए की मंजूरी के बाद कंपनियों में निवेश किया गया है उनसे धन की वसूली की प्रक्रिया देश भर में अपनाई जा रही है। कमलनाथ सरकार भी उस व्यवस्था का हिस्सा हैं जो देश में काले धन की खोजबीन में जुटे हैं। उनसे ये उम्मीद की जाती रही है कि वे अपना काम जिम्मेदारी से करेंगे और काला धन उजागर करने में सहयोगी की भूमिका निभाएंगे।

    इसके विपरीत कमलनाथ की भूमिका प्रोपेगंडा से अधिक साबित नहीं हो रही है। वे शुद्द के लिए युद्ध और भू माफिया के विरुद्ध जिस तरह से अभियान चला रहे हैं उसे लेकर वे ये जताने का प्रयास कर रहे हैं कि वे काले धन की वसूली के प्रयास कर रहे हैं। वास्तव में उनकी भूमिका देश से काला धन उजागर करने की मुहिम को पंचर करना अधिक नजर आ रहा है। उन्होंने जिस तरह रेत के ठेकों में देश की पूंजी हड़पने वाले फर्जी उद्योगपतियों की भीड़ जुटाई है उसे देखकर उनकी भूमिका की असलियत आसानी से समझी जा सकती है। जिस रेत कारोबार से प्रदेश को 250 करोड़ रुपए की आय होती थी और बाद में इसे शिवराज सरकार ने मुक्त कर दिया उससे कमलनाथ 1200 करोड़ रुपए की आय होने की कहानियां सुना रहे हैं। उनकी सरकार का कहना है कि रेत माफिया पर अंकुश लगाकर ये आय की जा रही है। इस कारोबार के पुराने खिलाड़ी धंधे से बाहर कर दिए गए हैं और जिला स्तर पर नए ठेकेदारों को खदानें आबंटित की गई हैं। रेत खदानों के ठेके लेने वालों में वे लोग शामिल हैं जिन पर देश का अरबों रुपया जीम जाने का आरोप है।

    सरकार ने जिन रेड्डी बंधुओं को रेत कारोबार का सहयोगी बनाया है और राज्य के लिए आय देने वाला बताया जा रहा है उन रेड्डी बंधुओं की असलियत कुछ और है। मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की पुलिस उन्हें सरगर्मी से तलाश रही है। उन पर हजारों लोगों को झांसा देकर उनके साथ बैंक धोखाघड़ी करने का आरोप है।इसके बावजूद कमलनाथ सरकार उन्हें राज्य को आय कराने वाला निवेशक बता डाला है। जो लोग बैंकों का हजारों करोड़ रुपया पौंजी स्कीमों से हड़प चुके हैं वे प्रदेश को कितनी और कैसी आय कराएंगे ये तो आने वाले समय में पता चलेगा लेकिन तब तक कमलनाथ सरकार ने उन्हें पुलिस से रक्षा कवच जरूर उपलब्ध करा दिया है।

    इसके विपरीत भारत सरकार का ध्यान बंटाने के लिए राज्य सरकार माफिया को ध्वस्त करने की मुहिम चला रही है। इस मुहिम में सैकड़ों निर्दोष व्यापारियों और बिल्डरों की बलि चढ़ाई जा रही है। राज्य सरकार की इस मुहिम में अफसर, जज और पुलिस सभी शामिल हैं। जिस तरह की रिपोर्ट के आधार पर आम नागरिकों को भयंकर माफिया, मिलावटखोर, जमाखोर बताया जा रहा है वे आने वाले समय में आपातकाल से भी ज्यादा भयावह प्रताड़ना की असलियत सामने लाने लाएंगे। लेकिन इससे प्रदेश की विकास यात्रा बुरी तरह तहस नहस हो रही है। जो लोग छुटपुट कारोबार करके हजारों लोगों को रोजगार देने का काम कर रहे थे वे भी खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। सरकार की मुहिम से बचने के लिए व्यापारियों ने न केवल भारी भरकम टैक्स चुकाना जारी रखा है बल्कि वे राजनीतिक चंदे की मुंहमांगी रकम भी देने को मजबूर किए जा रहे हैं। जिन लोगों को माफिया बताकर प्रशासन ने उनके ठिकाने तहस नहस कर डाले हैं उनमें से अधिकतर केवल दस्तावेजों की कमी की वजह से निशाना बने हैं। जिन अफसरों और दलालों ने उन्हें झांसा देकर कारोबार बढ़ाने में मदद की अब वही लोग उन्हें माफिया साबित करने में जुटे हुए हैं।

    सरकार की इस मुहिम से आम जनता परेशान है और काला धन बनाने वाला माफिया अपनी बुलंदियां छू रहा है। वह न केवल काला धन बचाने में सफल हो रहा है बल्कि निर्दोष लोगों को डरा धमकाकर उनसे अवैध वसूलियां भी कर रहा है। ये हालत कमोबेश वैसी ही है जैसे कभी इंदिरा गांधी के आपातकाल के दौरान सामने आई थी। बेशक कमलनाथ कह रहे हैं कि निर्दोष लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन जब प्रशासन और तंत्र उन्हें आरोपी बना देता है तब वे अपनी बेगुनाही साबित ही नहीं कर पाते और सरकार के दमनचक्र का शिकार हो जाते हैं।

    ऐसे ही एक पनीर कारोबारी के विरुद्ध हाईकोर्ट ने बाईस पेज का फैसला दिया और उसे दोषी बताते हुए मामले की सुनवाई अधिक जजों की खंडपीठ से कराने का निर्देश दिया। जिस मामले को कोई बच्चा भी षड़यंत्र पूर्वक रचा गया बता सकता है उसे हाईकोर्ट मानने तैयार नहीं है। हाईकोर्ट के ही एक विद्वान न्यायाधीश कह रहे हैं कि वह व्यक्ति निर्दोष है और उसे बरी किया जाना चाहिए लेकिन दूसरे जज केवल अपना तमगा बढवाने और कमलनाथ की गुड बुक में आने के लिए अपनी विद्वत्ता का प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

    वास्तव में समय आ गया है जब देश की सर्वोच्च संस्थाएं इन मामलों पर गौर करें और राज्य सरकार की पक्षपातपूर्ण नीतियों पर लगाम लगाएं। ये तो साफ हो चुका है कि मध्यप्रदेश एक बार फिर आपातकाल दो के दौर से गुजर रहा है लेकिन ये आपातकाल भारत की मानवता के लिए कलंक न बन जाए इसके लिए आगे बढ़कर इस पर रोक लगाना समय की मांग बन गई है।

  • माफिया से संग्राम का डरावना अध्याय

    माफिया से संग्राम का डरावना अध्याय

    मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार किन हालात में आई सभी जानते हैं। प्रदेश के लोग शिवराज सिंह चौहान की प्रशासनिक असफलताओं से खफा थे और उन्होंने विकास के नाम पर लूट करने वाले फोकटियों को अपने पड़ौस में देखा था। नतीजतन वे खफा हुए और शिवराज सिंह चौहान की खरीदी हुई अतिलोकप्रियता धराशायी हो गई। अब कांग्रेस के गुटीय संतुलन को साधकर सत्ता में आए कमलनाथ ने शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में जड़ विहीन कर दी गई भारतीय जनता पार्टी को फुटबाल बना दिया है। खुद भाजपा के नेता आश्चर्य से देख रहे हैं कि आखिर कमलनाथ की शक्ति का आधार क्या है। ऐसा क्या हो गया कि कमलनाथ कथित कैडर आधारित पार्टी को आए दिन ठोक रहे हैं और कोई बोलने वाला तक नहीं है। दरअसल शिवराज सिंह चौहान ने अपने नजदीक जैसै भ्रष्ट और नपुंसक लोगों की भीड़ जमा कर ली थी उनकी शक्ति का आधार केवल सरकार थी। सरकारी तंत्र का लाभ लेकर वे भ्रष्ट मंत्री अफसर विकास के नाम पर लिए गए कर्ज को जीमने में जुटे रहे। धनागमन के इस आंकड़े को बाहर बैठा कोई सामान्य शख्स भी अच्छी तरह समझ सकता है। शुरुआती दौर में उमा भारती ने जब राघवजी भाई को वित्तीय प्रबंधन की कमान थमाई तो उन्होंने प्रदेश की आय बढ़ाने में व्यावसायिक प्रबंधन का सहारा लिया। वे स्वयं टैक्स सलाहकार थे सो उन्होंने टैक्स प्रदाताओं से धन जुटाकर प्रदेश की बैलेंस शीट मजबूत की। जिससे भाजपा सरकार केन्द्र से अधिक धन प्राप्त कर सकी। मैचिंग ग्रांट भरपूर होने की वजह से तरह तरह की योजनाएं बनाईं गईं और प्रदेश के लिए वित्तीय प्रबंधन मजबूत किया गया। शिवराज सिंह चौहान इस वित्तीय प्रबंधन की वजह से भरपूर धन लुटाते रहे। हितग्राहियों के जो सम्मेलन भाजपा कर रही थी वह वास्तव में फुगावा था। दरअसल सत्ता के अंतिम मुहाने पर पंचायतों में बैठे दिग्विजय सिंह के समर्थक उस धन को आहरित कर रहे थे। वे गांव के लोगों को ठेलकर हितग्राही सम्मेलनों में भेज रहे थे और भाजपा उन्हें प्रदेश के विकास की धुरी मान रही थी। राजीव गांधी के पंचायती राज को माफिया राज में बदलने वाले इस षड़यंत्र की आहट जब पंचायत सचिव रहे आईएएस आरएस जुलानिया को लगी तो उन्होंने पंचायतों को जाने वाला फंड रोक दिया। इसके बावजूद इस दौरान जन धन का भारी अपव्यय हो चुका था। ठेकेदारों और अफसरों के जिस गठजोड़ ने राजनेताओं का संरक्षण पाकर विकास की कहानियां सुनाईं वे भी इस प्रक्रिया में भरपूर मजबूत हो चले थे। अब सत्ता की मलाई चाटने वाला ये माफिया इस बार कांग्रेस के साथ है, और कमलनाथ सरकार माफिया के विरुद्ध संग्राम का उद्घोष कर रही है। सरकार की निगाह में माफिया वो है जो टैक्स नहीं देता और कानूनी इबारतों को अनदेखा करके अनगढ़ तरीके से धन बनाने का काम कर रहा है। दरअसल प्रदेश और देश में धन बनाने वाला बड़ा वर्ग वो है जो बगैर किसी सरकारी मदद के अपना कारोबार करके धनार्जन करता है। निश्चित रूप से सरकारी तंत्र उसे अवैध कारोबारी कहता है। इसीलिए सरकार ने शुद्द के लिए युद्ध नाम का जो अभियान चलाया उसमें निरीह व्यापारियों की मौत हो गई। उन पर रासुका लाद दी गई और जेलों में ठूंस दिया गया। उनके उद्योग से जुड़े हजारों कर्माचारी बेरोजगार हो गए। इसके बावजूद कमलनाथ सरकार और उससे पोषित मीडिया इसे बेईमानों के विरुद्ध संग्राम बताता रहा। आज जब कमलनाथ माफिया के विरुद्ध शंखनाद करने के लिए सरकारी तंत्र को छूट दे रहे हैं तो वो कहर कांग्रेस के विरोधियों पर टूटने वाला है। जो अवैध कारोबार करने वाले कांग्रेस की गोदी में बैठे हैं या बैठ चुके हैं उन पर इस युद्ध का कोई असर पड़ने वाला नहीं है। इसके साफ संकेत कमलनाथ सरकार की कार्यप्रणाली को देखकर मिल जाता है। तबादले पोस्टिंग के कारोबार में जिस तरह खुलेआम नौकरियों की बोलियां लगाईँ गईं उससे साफ पता चलता है कि सरकार अपने विरोधियों को अपराधी बताने में कोई गुरेज नहीं कर रही है। जिस तरह कांग्रेस ने चुनाव के दौरान कर्ज माफी या सस्ती बिजली के वादे किए उसके लिए धन की जरूरत थी। ये धन इसी तरह बेरहमी से टैक्स वसूली से उगाया जा सकता है। साथ में बंदर हीरा खदान को नीलाम करके सरकार ने अपने धन की उगाही का एक अजस्र स्रोत भी तलाश लिया है। चुनावों को देखकर शिवराज सिंह चौहान ने रेत को टैक्स मुक्त करके अपने समर्थकों को खुश करने का खेल खेला था उसे भी कमलनाथ माफिया के विरुद्ध युद्ध बता रहे हैं। निश्चित रूप से सरकार और प्रदेश को चलाने के लिए धन की जरूरत होती है। यह धन टैक्स से ही जुटाया जाता है। जो सरकार अपनी आय का अस्सी फीसदी हिस्सा स्थापना खर्च में ही लुटा देती हो वह प्रदेश के लिए धन बनाने वाले कारोबारियों को माफिया कहे तो ये वास्तव में क्रूरता होगी। इसके बावजूद सरकार धड़ल्ले से फोकटियों को ये अधिकार दे रही है कि वे प्रदेश के लिए पैसा उत्पादन करने वाले या सेवाएं उपलब्ध कराने वालों को माफिया कहे क्योंकि वे सरकार से सहमत नहीं हैं। ये आपातकाल से भी ज्यादा नृशंस और निंदनीय कार्य कहा जाएगा। इतिहास में आपातकाल को इंदिराजी का सबसे घिनौना अत्याचार बताया जाता है लेकिन कमलनाथ का ये माफिया संग्राम सदियों तक डरावने अध्याय के रूप में जाना जाएगा।

  • माफिया से युद्ध को कमलनाथ ने दी खुली छूट

    माफिया से युद्ध को कमलनाथ ने दी खुली छूट

    मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय बैठक कल

    भोपाल 11 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमल नाथ सरकार ने अपने मात्र एक साल के कार्यकाल में वर्षों से माफिया राज के आतंक का दंश झेल रही आम जनता को इससे मुक्त कराने की मुहिम को तेज करने के लिए 12 दिसंबर को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। जनसम्पर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि अब प्रदेश में ‘लोगों के लिए लोगों की सरकार’ चलेगी न कि माफिया राज।

    जनसम्पर्क मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि मात्र एक साल में माफिया राज की कमर तोड़ने का जो साहस मुख्यमंत्री ने दिखाया है, उससे जनता को राहत मिली है। उन्होंने कहा कि माफिया, शासन-प्रशासन को ताक पर रखकर पूरे प्रदेश में दशकों से  समानांतर सरकार चला रहे थे, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही थी और विकास अवरूद्ध हो रहा था।

    श्री शर्मा ने कहा कि माफिया के खिलाफ जनमानस के साथ कमर कसकर खड़ी कमल नाथ सरकार ने मिलावटखोरों के खिलाफ ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ की शुरुआत की। आम जनता को जहर परोस रहे मिलावटखोर माफियाओं की धर-पकड़ से पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर कार्यवाही हुई। अभियान के दौरान मिलावटखोरों के खिलाफ 94 एफआईआर दर्ज की गई और 31 कारोबारियों के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई हुई।

    मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार की नई रेत नीति बन जाने से अभी तक प्रदेश की रेत संपदा लूटने और प्रदेश की जनता के हितों से कुठाराघात करने वाले माफिया के हौसले पस्त हो गए हैं। शासन-प्रशासन पर हमले कर और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कर बेखौफ रेत माफिया को एक ही फैसले से मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने ध्वस्त कर दिया है। यही नहीं, नई रेत नीति से प्रदेश को जो राजस्व करीब 200 करोड़ मिलता था, वह इस वर्ष बढ़कर 1234 करोड़ तक पहुँच गया है। पिछले 15 साल से 15 हजार करोड़ रुपए किसकी जेब में जा रहे थे, इसका खुलासा भी मुख्यमंत्री ने नई रेत नीति बनाकर किया है। अब ये पैसा निजी हाथों में जाने के बजाए प्रदेश के विकास और जनता के हितों के लिए उपयोग होगा। 

    जनसम्पर्क मंत्री ने कहा कि किसानों को मिलावटी खाद बेचने वाले माफियाओं से मुक्त कराने के लिए भी मुहिम पूरे प्रदेश में चल रही है। पिछले एक माह में 1313 उर्वरक विक्रेताओं और गोदामों का निरीक्षण कर लिए गए नमूनों में 110 प्रकरणों में मिलावट पाए जाने पर कार्रवाई की गई है।

    श्री पी.सी. शर्मा ने कहा कि इतना ही नहीं, कमल नाथ सरकार ने विभिन्न शहरों में अपने रसूख और माध्यमों का दुरुपयोग करके अनैतिक गतिविधियाँ चलाने, सरकारी और निजी जमीनों पर कब्जे कर अपना साम्राज्य बनाने वाले तथा इंदौर और ग्वालियर में भी माफिया के खिलाफ सारे दबावों के बावजूद सख्ती दिखाई है और कठोर कार्यवाही भी सुनिश्चित की है। इस दृढ़तापूर्ण कार्रवाई के पीछे एक ही लक्ष्य था कि अब माफिया को प्रदेश की जनता और यहाँ की सरकारी संपदा को लूटने की इजाजत नहीं होगी। 

    मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि जो नेता प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से माफिया के समर्थन में बयान देकर उनका संरक्षण कर रहे हैं, उनकी गतिविधियों से यह स्पष्ट है कि 15 साल में ये माफिया किनके संरक्षण में पनपे हैं। श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश में माफिया राज को जड़ से उखाड़ फेकने के लिए मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ की अध्यक्षता में 12 दिसंबर को उच्च स्तरीय बैठक होने जा रही है। इस बैठक में गृह मंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्त वार्ता) एवं एसआईटी, आईजी एवं कमिश्नर जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर, भोपाल, कलेक्टर इंदौर एवं कमिश्नर इंदौर नगर निगम उपस्थित रहेंगे। 

  • माफिया के कब्जे में कमलनाथ सरकार

    माफिया के कब्जे में कमलनाथ सरकार

    लगभग चौदह साल का शिव राज प्रशासनिक तौर पर प्रदेश का सबसे लचर शासनकाल कहा जा रहा है। जबकि शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश को परिवार की तरह चलाया। सबको काम करने और आगे बढ़ने का अवसर दिया। शिवराज की इस शासनशैली से आम नागरिकों ने तो संतोष महसूस किया लेकिन कांग्रेस का कहना है कि शिव के राज में माफिया ताकतों ने अपना आतंक फैला रखा था । अब मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार ने प्रदेश के लगभग बीस माफिया ताकतों को कथित तौर पर पहचाना है। वह अब माफिया के विरुद्ध संघर्ष का ऐलान कर रही है। इस कड़ी में उसने इंदौर से लोकस्वामी अखबार के संपादक जीतू सोनी को खलनायक की तरह पेश करने का अभियान चलाया है। उसके जीतू सोनी के लगभग छह ठिकाने धराशायी कर दिये गए हैं। होटल से लेकर घर और ऐसे तमाम परिसरों पर तोड़फोड़ की गई जिन पर जीतू सोनी का दावा रहा है। सरकार की इस कार्रवाई से प्रदेश के लोग हैरान हैं। प्रेस जगत के लोग भी खासे खफा हैं। जिन्होंने जीतू सोनी की कार्यशैली देखी है वे उसे एक सदाशयी पत्रकार के रूप में जानते हैं। ऐसा बहादुर जिसने सत्ता के बुलंद बुर्जों की काली करतूतें भी ठप्पे से अपने अखबार में प्रकाशित कीं। जीतू सोनी का साम्राज्य पिछले तीस सालों में तमाम झंझावातों के बीच लगातार बढ़ता चला। कांग्रेस की सरकारें हों या भाजपा की सभी ने उनकी पत्रकारिता को सलाम किया और उनके डांसबार को एक उपयोगी कारोबार माना। उनके होटल माईहोम को शराब पिलाने का लाईसेंस प्राप्त था। वह होटल पुलिस प्रशासन,अफसरों और अपराधियों सभी का लोकप्रिय स्थान रहा है। मुंबई की तर्ज पर न केवल इंदौर बल्कि प्रदेश और देश भर के बिगड़े नवाब इस डांस बार में आते रहे हैं। जीतू सोनी अच्छे व्यवस्थापक रहे और उन्होंने बार बालाओं समेत इस कारोबार से जुड़े लोगों को सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराया। शराबखोरी के बीच होने वाली गुंडागर्दी को नियंत्रित करने के लिए उनके पास बाऊंसर्स की टीम थी। इसके बावजूद उन्होंने कभी प्रशासन से टकराव नहीं लिया। अब कमलनाथ सरकार खजाना खाली होने का शोर मचाकर समाज के सभी तबकों से वसूली अभियान चला रही है। शुद्ध के लिए युद्ध अभियान की आड़ में व्यापारियों के चंदा और टैक्स वसूली का अभियान चलाया गया। इसके बाद अब सरकार कथित तौर पर माफिया के विरुद्ध अभियान चला रही है। दरअसल सरकार का लक्ष्य प्रदेश से राजस्व संग्रहण की उगाही बढ़ाना तो है ही साथ में कांग्रेस का पार्टी फंड भी जुटाया जा रहा है। यह काम गुंडागर्दी के किया जा रहा है और इसके लिए आड़ जनता की ली गई है। शुद्ध के लिए युद्ध अभियान में जिन्होंने चंदा दिया और टैक्स भरना शुरु कर दिया उनके विरुद्ध तो कोई कार्रवाई नहीं की गई लेकिन जिन्होंने न चंदा दिया और न ही टैक्स भरने का तंत्र विकसित किया उनके विरुद्ध रासुका जैसी कार्रवाईयां की गईं। इस दौरान कई व्यापारियों के तो कारोबार बंद हो गए और उससे जुड़े कर्मचारी भी बेरोजगार हो गए। जीतू सोनी को पुलिस और प्रशासन गुंडातत्वों पर नियंत्रण पाने के लिए इस्तेमाल करता रहा है। जो काम पुलिस या निगम प्रशासन नहीं कर पाता वह जीतू सोनी के बाऊंसर्स की मदद से पूरे कराए जाते थे।पहली बार पुलिस ने अपने ही पाले पोसे इस तंत्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है। जीतू सोनी पर तेईस मुकदमे लाद दिए गए हैं,तीस हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया गया है,विदेश भागने पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी चल रही है। ऐसा करके कमलनाथ सरकार कानून के सहारे अपना आतंक का राज स्थापित करना चाह रही है। जीतू सोनी के अखबार लोकस्वामी ने हनी ट्रेप कांड की किस्तें छापनी शुरु कीं थीं। अफसरों और नेताओं के जिस गठजोड़ ने सरकार में रहकर प्रदेश के कर्ज के दलदल में धकेला और भ्रष्टाचार के माध्यम से भारी धन जुटाया वे अय्याशी में लिप्त हो गए। जीतू सोनी को पुलिस और प्रशासन ने जिस जिम्मेदारी के लिए तैयार किया था उन्होंने वह बखूबी निभाई। अय्याशियों की ये खबर उनके अखबार ने जैसे ही छापना शुरु की सत्ता शीर्ष के इंद्र का सिंहासन डोल गया। मंत्रालय के कई अफसरों को लगा कि यदि वे चुप रहे तो उनकी तो भद पिट जाएगी। नतीजतन उन्होंने पुलिस का इस्तेमाल करके जीतू सोनी को धराशायी करने की मुहिम चला दी। पिछले तीस सालों से जो जीतू सोनी समाज का उपयोगी उपकरण था वो आज कुख्यात माफिया बना दिया गया है। अखबारों के बीच भी आतंक फैल गया है। भारत सरकार के कार्पोरेट कार्य मंत्रालय से अरबों रुपयों का लोन जुटाकर जो कथित बड़े अखबार प्रकाशित हो रहे हैं उनकी तो औकात भी नहीं थी कि वे अपने समान भ्रष्टाचार की गंगा में नहाने वाले सत्ताधीशों पर कीचड़ उछाल सकें। यही वजह है कि वे कथित बड़े अखबार सरकार की कार्रवाई को सही ठहराने में जुट गए। अवसरवादी पत्रकारों के एक समूह ने भी इस अवसर को लपक लिया और वे जीतू सोनी को खलनायक बताने वाली कहानियां छापने दिखाने लगे। इसके बावजूद आज पत्रकारों का बड़ा तबका सरकार की कार्रवाई से खफा है। वह जानता है कि सरकार उन भ्रष्ट और अय्याश अफसरों नेताओं के नेटवर्क को बचाने का काम कर रही है जिन्होंने विकास के नाम पर प्रदेश को बेचने का काम किया है। जीतू सोनी को अपराधी बताने वालों को तय करना होगा कि समाज की वैचारिक गंदगी को साफ करने वाला लोकस्वामी ज्यादा बड़ा अपराधी है या फिर प्रदेश को अरबों रुपयों के कर्ज में डुबाने वाले गद्दार नेता, अफसर या ठेकेदार । आज मध्यप्रदेश विकास के पथ पर दौड़ रहा है। उसे काली अर्थव्यवस्था के पथ पर दौड़ाने वाले नेता, अफसर,ठेकेदार न केवल प्रदेश बल्कि देश की विकास यात्रा को भी क्षति पहुंचा रहे हैं। जब हिंदुस्तान पांच ट्रिलियन डालर की इकानामी बनने को अग्रसर है तब सत्ता माफिया प्रदेश के आय के संसाधनों पर कब्जा जमाने की जंग लड़ रहा है। कमलनाथ सरकार जाने अनजाने में इस वैश्विक माफिया का औजार बन रही है। सरकार के ये कार्यकलाप अवश्य ही निंदनीय हैं। कमलनाथ सरकार तब समानांतर अर्थव्यवस्था को फूलने फलने का अवसर दे रही है जब नोटबंदी के बाद भारत सरकार ने रुपये की ताकत बढ़ाने का अभियान चलाया था। देश की नीतियों से इस टकराव के बीच प्रदेश की विकास यात्रा क्षतिग्रस्त हो रही है। सरकार को अपने फैसले पर फिरसे चिंतन करना चाहिए। सरकार पर माफिया का शिकंजा इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में ब्राजील या इटली की तरह माफिया सरकार से भी बड़ी ताकत बन जाएगा जो घातक सिद्ध होगा।