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  • संविधान को जनता का रोड़ा बनाने वालों को दंडित कौन करेगा

    संविधान को जनता का रोड़ा बनाने वालों को दंडित कौन करेगा


    संविधान दिवस पर देश में खूब चर्चाएं हो रहीं हैं। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के अभिभाषण पर विपक्ष के कई नेता उछल पड़े हैं। समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता जैसे शब्दों के तिरोहित होने की संभावना पर वे बौखलाए घूम रहे हैं.कांग्रेस के नेता गण सवाल उठा रहे हैं कि क्या देश के आम नागरिकों को न्याय और स्वतंत्रता मिल पा रही है। यदि नहीं तो संविधान के आगे झुकने से क्या होने वाला है। संविधान दिवस मनाकर सरकार आम नागरिकों के दिलों में दायित्वबोध जगाने का प्रयास कर रही है। विपक्ष सरकार के कार्य को कटघरे में खड़ा कर रहा है । ये वही विपक्ष है जिसने लगभग सात दशकों तक देश पर शासन किया है। इसके बावजूद संविधान की उपयोगिता पर वह आज सवाल उठा रहा है। संविधान को अपना उल्लू सीधा करने का उपकरण बनाकर एक बड़े वर्ग ने इसे विकास की राह में सबसे बड़ा अडंगा बनाकर रख दिया है। उन लोगों का प्रयास रहता है कि वह अपने गैरकानूनी कार्यों को संविधान सम्मत बताने के लिए तरह तरह के शिगूफे छोड़ें और संविधान की इबारतों का उल्लेख करके सब तक न्याय और विकास का लाभ न पहुंचने दें।देश में कभी राजतंत्र और जमींदारी प्रथा शोषण का माध्यम बनी हुई थी। तब भी मलाईदार तबका विकास का लाभ सभी तक नहीं पहुंचने देता था। आज लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी कमोबेश वही हालात बने हुए हैं। जिन्हें लोकतंत्र का लाभ मिल रहा है वे दूसरों से इसकी सहभागिता की राह में रोड़ा बन गए हैं। अफसरशाही इस शोषण कारी व्यवस्था की सबसे बड़ी खलनायक बनकर उभरी है। देश और राज्य के संसाधनों का लगभग अस्सी फीसदी हिस्सा गड़प कर जाने वाली नौकरशाही लोकतंत्र में जनता की सहभागिता रोकने में जुटी हुई है। नौकरशाही अपने दायित्व का निर्वहन तो करती नहीं और यदि कोई व्यक्ति या संस्था जनसहभागिता के आधार पर कोई प्रयास करता है तो उसमें अडंगा जरूर लगा देती है। जिस सहकारिता को जनता के विकास की सीढ़ी माना जाता रहा है उसमें भी लोकसेवक ही प्रावधानों की परिभाषा को तोड़ मरोड़कर अडंगा लगाकर खड़े हो जाते हैं।यदि कोई व्यक्ति सहकार भाव से संस्था बनाने पहुंचे तो तरह तरह के कुतर्क देकर यहां के अफसर ही अडंगा लगान लगते है। जिस सहकारिता को जन भागीदारी का ढांचा समझा जाता है उसमें भी नियम कानूनों का जाल बिछाकर वे सहकारी आंदोलन में पलीता लगा देते हैं। यही वजह है कि आज तक देश में सहकारिता आंदोलन का प्रसार नहीं हो पाया है। भारत में एक भी सार्वजनिक या निजी बैंक नहीं डूबा है ,लेकिन जितने भी बैंक डूबे हैं वे सभी सहकारी हैं। यदि नियम कानूनों का पुख्ता जाल मौजूद है तो फिर क्यों सहकारी संस्थाएं धराशायी हो जाती हैं।आडिट की पुख्ता दीवार होने के बावजूद माफिया ताकतें कैसे जन धन को गड़प करने में सफल हो जाती हैं। इस बात पर कानून का पुलिंदा लेकर चलने वाले अफसर मौन हो जाते हैं। निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठान हों या कार्पोरेट क्षेत्र की कंपनियां , वे सभी अपने टारगेट पा लेते हैं लेकिन सहकारी संस्थाएं ढप हो जाती हैं। जब तक कोई सख्त प्रशासक बदमाशों से पंगा लेकर सहकारी संस्था को संभाले रहता है तब तक तो वह संस्था चलती रहती है जैसे ही वह हटता है उसके सहयोगी ही संस्था को खा जाते हैं। प्रशासनिक तंत्र में मौजूद अफसर भी संविधान की दुहाई देकर जनता को इधर उधर दौडाते रहते हैं। जब अतिक्रमण और स्वामित्व को लेकर संवैधानिक प्रावधान मौजूद हैं तो फिर राजस्व विभाग के अफसर अपना दायित्व निर्वहन न करके लोगों को अदालतों की ओर क्यों ठेल देते हैं। यदि हर समस्या का समाधान अदालती फीस चुकाकर ही प्राप्त करना है तो फिर इस अफसरशाही की जरूरत ही क्या है। राज्य के मुख्य सचिव अनुराग जैन कहते हैं कि यदि जिलों की समस्याएं राज्य स्तर तक पहुंची उनके समाधान नहीं किए गए तो अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी। समस्या तो ये है कि कार्रवाई करेगा कौन। यदि अकुशल अफसरों को दंड दिया जाए तो अदालतें उन्हें राहत देने सामने आ जाती हैं। विधायिका में बैठे गैर जिम्मेदार नेतागण इस कार्रवाई में अडंगा बनकर सामने आ जाते हैं.। कर्मचारी संगठन मिलकर उस भ्रष्ट या अकुशल कर्मचारी को बचाने लगते हैं। इसके विपरीत यदि कोई अफसर अपने दायित्व का निर्वहन ठीक तरह से करे तो उसे तरह तरह के फर्जी मामलों में फंसाकर दंडित किया जाता है। तब भी इसी संविधान को हथियार बनाकर इस्तेमाल किया जाता है। हमें सोचना होगा कि हम संविधान बचाने के लिए जी रहे हैं या फिर संविधान को हमें लोक कल्याण के लिए उपयोग करना है। यदि कोई व्यक्ति किसी निर्धारित फार्मेट में अपनी पीड़ा प्रस्तुत नहीं करता है या फिर वह किसी सामाजिक दवाब में पीछे हटने को मजबूर है तो क्या ये जवाबदारी लोकसेवकों की नहीं है कि वे समस्या का समाधान करने की पहल स्वयं करें। यदि कोई अकुशल नागरिक मिलकर सहकारिता के माध्यम से पूंजी उत्पादन करना चाहते हैं तो अफसरशाही उनका मार्गदर्शन करे और देश के लिए पूंजी निर्माण की राह प्रशस्त करे। समाजवाद के नारे लगाना हो या धर्मनिरपेक्षता की लोरियां सुनाना इन सबके बीच क्या हम आम नागरिक की पीड़ा को अनसुना करते रहेंगे। आखिर हम किस समाजवाद की बात कर रहे हैं। क्या इंसानियत का धर्म किसी भी पाखंडी धर्म के सामने रद्दी की टोकरी में फेंक दिया जाएगा। जिस तरह मुगल शासक अपनी अय्याशी की वजह से भुला दिए गए। अंग्रेज अपनी दमनकारी नीतियों की वजह से भगा दिए गए। जमींदार अपनी शोषण कारी नीतियों की वजह से विदा कर दिए गए। उसी तरह ये लोकतंत्र भी अपनी गैर जिम्मेदारी और पाखंडी लोकसेवा के कारण जल्दी ही विदा कर दिया जाएगा। प्रशासनिक नाकामियों की इसी वजह से आज देश में कार्पोरेट सेक्टर का बड़ा तंत्र खड़ा हो चुका है। सरकारी क्षेत्र तो अब केवल लोकतंत्र के नाम पर कचरा ढोने वाली व्यवस्था बनकर रह गई है। यदि अफसरशाही ने अब भी अपने गिरेबान में नहीं झांका। नेता नगरी ने रिश्वत देकर सत्ता पाने की अपनी नीति जारी रखी तो जाहिर है कि लोग अपनी राह खुद तलाश लेंगे। जिस लोकतंत्र को आज सर्वश्रेष्ठ शासनशैली माना जाता है वह देखते ही देखते अजायबघर की वस्तु बनकर रह जाएगी। इसके लिए गैर जिम्मेदार अफसरों को सख्ती से विदा करना होगा और तंत्र से बाहर करना होगा तभी लोकतंत्र की भावना को बचाया जा सकता है। शायद संविधान दिवस मनाने का आशय भी यही है।

  • सरकारी खजाने से 162 करोड़ चुराने वाले धराए

    सरकारी खजाने से 162 करोड़ चुराने वाले धराए

    भोपाल,16 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। वित्त विभाग के आईएफएमआईएस (IFMIS) साफ्टवेयर की मदद से शासन ने फर्जी भुगतानों पर कार्रवाई करते हुए करीबन 162 करोड़ रुपयों का घोटाला उजागर किया है। अब तक इन मामलों पर आडिटर्स ही निगाह रखते थे। ये घोटाला आडिटर्स की ओके रिपोर्ट के बाद निगाह में आया है। साफ्टवेयर के माध्यम से मध्य प्रदेश शासन के लगभग 5600 आहरण एवं संवितरण अधिकारियों के कार्यालय के समस्त देयकों के भुगतान किये जाते हैं। इसमें मध्य प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों के वेतन एवं विभिन्न स्वत्वों के भुगतान, कार्यालयीन व्यय, अनुदान, स्कालरशिप आदि के भुगतान सम्मिलित हैं।

    आयुक्त कोष एवं लेखा ज्ञानेश्वर पाटिल की सक्रियता से ये मामला उजागर हुआ है। विगत माहों में कुछ कार्यालयों में फ्राड भुगतान के गंभीर प्रकरण आयुक्त, कोष एवं लेखा कार्यालय के संज्ञान में आये थे। अधिकांश स्थानों से यह जानकारी प्राप्त हुई थी कि DDO के द्वारा Login Password अपने अधीनस्थ बाबू को Share किये जा चुके हैं एवं DDO कार्यालय में Bill Creator एवं Approver का कार्य बाबू के द्वारा किया जाता है। इसी वजह से अधीनस्थ कर्मचारी द्वारा स्वयं के या परिवार के खाते में राशि जमा कर गबन किये गये, जिसकी सूचना सिवनी एवं अन्य जिले से प्राप्त हुई।

    विगत वर्षों में करोड़ों ट्रांजैक्‍शन्‍स में मानवीय हस्तक्षेप से इस तरह के गबन को पकड़ने में कठिनाई थी। अतः यह निर्णय लिया गया कि IFMIS में इस समस्त जानकारी की उपलब्धता को देखते हुए Data Analysis कर यह जानकारी प्राप्त की जावे कि राशि कौन-से खाते में जमा की जा रही है। इसी Data Analysis हेतु एक State Financial Intelligence Cell (SFIC) का गठन किया गया। SFIC द्वारा IFMIS के गत 5 वित्त वर्षों के 85 लाख देयकों से हुए लगभग 15 करोड़ ट्रांजैक्शन का विश्लेषण करने का कार्य प्रारंभ किया गया। अनियमितताओं की संभावनाओं वाले क्षेत्रों को चिह्नित किया गया एवं डाटा के विश्लेषण हेतु अनेक क्वेरीज बनाई गईं।

    Data Analysis के माध्यम से पहला गबन कार्यालय कलेक्टर, इंदौर में पकड़ा गया। इसी Data Analysis को और Strengthen करते हुए आज दिनांक तक लगभग 162 करोड़ रुपये के गबन पकड़े गये हैं, 170 संदिग्धों पर FIR की गयी है एवं 15 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। अनेक प्रकरणों में उत्‍तरदायी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर विभागीय जांच संस्थित की गई हैं।

    निर्धारित प्रक्रिया अनुसार SFIC द्वारा संदिग्‍ध भुगतानों को चिह्नांकित किया जाता है, एवं इनकी विस्तृत जाँच के लिये संबंधित संभागीय संयुक्त संचालक, कोष एवं लेखा को जाँच करने के लिये आदेशित किया जाता है। अनियमितताओं, अधिक भुगतान तथा गबन की पुष्टि होने पर जिला कलेक्टर के संज्ञान में लाते हुए तुरंत वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाती है। इस प्रक्रिया में प्राप्‍त प्रत्येक जाँच निष्कर्ष के आधार पर IFMIS सिस्टम में त्वरित गति से सुधार किये जा रहे हैं।

    आज दिनांक तक SFIC द्वारा निम्नलिखित अधिक भुगतान एवं गबन का पर्दाफाश किया गया है :-

    क्र. संभाग का नाम कोषालय का नाम कार्यालय का नाम हानि/गबन की राशि वसूली की गई राशि क्‍या FIR की गई है? FIR में आरोपियों की संख्‍या
    1 उज्‍जैन उज्‍जैन केंद्रीय जेल, भैरूगढ़, जिला उज्‍जैन 135048325 0 YES 10
    पुन: जांच —-”—– 66199128 0
    2 उज्‍जैन देवास शासकीय महाविद्यालय बागली 37239107 0 YES 8
    3 उज्‍जैन देवास शासकीय महाविद्यालय हाटपिपल्‍या 785607 0 YES 2
    4 उज्‍जैन आगर मालवा DD Veterinary Services Agar Malwa 5477460 58514 Yes 9
    5 उज्‍जैन आगर मालवा उप संचालक पशु चिकित्‍सा गो अभ्‍यारण (सुसनेर) Agar Malwa 196942 0 Yes 6
    6 उज्‍जैन शाजापुर DD Veterinary Services शाजापुर 416244 0 YES 3
    7 उज्‍जैन शाजापुर BEO शाजापुर 936692 971918 No 0
    8 उज्‍जैन शाजापुर BEO Kalapipal 1011726 1336459 NO 0
    9 इन्‍दौर इन्‍दौर कलेक्‍टर इन्‍दौर 92431697 17036025 Yes 54
    10 इन्‍दौर खरगोन BEO, कसरावद 20400000 13800000 YES 1
    11 इन्‍दौर खरगोन EE, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण डिवीजन क्र 21 सनावद, खरगौन 28310524 5200000 No 0
    12 इन्‍दौर खण्‍डवा DFO Khandwa (G) 1232577 1232577 YES 1
    13 इन्‍दौर धार SAF, धार 4285167 0 YES 1
    14 इन्‍दौर धार BEO Nisarpur 11823031 11823031 YES 7
    15 इन्‍दौर अलीराजपुर BEO कट्ठीवाड़ा 204712747 6886843 Yes 6
    16 इन्‍दौर इन्‍दौर DSP, Police Training School, Indore 10431268 0 No 0
    17 सागर सागर EE, WR Div 2 केसली 6010405 4614881 No 0
    18 सागर सागर SE PWD Sagar 2940379 700000 No 0
    19 रीवा अनूपपुर ASCO, पुष्‍पराजगढ़ 13786154 1000000 Yes 7
    20 रीवा सीधी BEO SIDHI 375396 0 NO 0
    21 रीवा सीधी PRINCIPAL G.H.S.S 2734323 0 NO 0
    22 रीवा सीधी EXECUTIV ENGINEER P.H.E DIVN 1576779 0 NO 0
    23 भोपाल भोपाल BEO, फंदा 1447307 581630 NO 0
    24 भोपाल नर्मदापुरम तहसीलदार, डोलारिया 22333863 1500000 YES 2
    25 भोपाल नर्मदापुरम SP नर्मदापुरम 2112194 2112194 YES 1
    26 भोपाल वल्लभ भवन Conservator of Forest, Social Forestry, Bhopal 1632000 0 YES 1
    27 भोपाल रायसेन CMHO, रायसेन 19232727 12400583 Yes 12
    28 जबलपुर छिंदवाड़ा BEO, छिंदवाड़ा 6371516 4132214 YES 8
    29 जबलपुर छिंदवाड़ा BEO, मोहखेड 1997739 987037 No 0
    30 जबलपुर छिंदवाड़ा BEO Tamia 4355307 0 Yes 5
    31 जबलपुर बालाघाट BEO Balaghat 8644323 8644323 Yes 15
    32 ग्‍वालियर भिण्‍ड BEO भिण्‍ड 20626794 13337080 Yes 6
    33 ग्‍वालियर भिण्‍ड ASCO, Bhind 5833475 1025967 No 1
    34 ग्‍वालियर भिण्‍ड BEO Mehgaon 7351476 12160 Yes 1
    35 ग्‍वालियर भिण्‍ड BEO Lahar 882800 917467 No 0
    36 ग्‍वालियर दतिया BEO Bhander 23589509 0 No 0
    37 ग्‍वालियर शिवपुरी तहसीलदार, पोहरी 6266660 1222620 Yes 1
    38 ग्‍वालियर शिवपुरी SP Shivpuri 934500 443275 YES 1
    39 ग्‍वालियर ग्‍वालियर EE, PHE, Section-1 Gwalior 812776308 26380753 Yes 1
    40 ग्‍वालियर गुना BEO Chachoda 14342224 8204249 No 0
    41 ग्‍वालियर गुना BEO GUNA
    BEO BAMORI
    Joint Enquiry 14796896 7734410 No 0
    42 ग्‍वालियर गुना 0 0 No 0
    43 ग्‍वालियर मुरैना BEO PHARGHAR 522416 522416 No 0
    Total 1624411712 154818626 170
    नोट – हानि/गबन की राशि प्रारंभिक अनुमान हैं, जिनमें वृद्धि या कमी हो सकती है।

    कोष एवं लेखा द्वारा मार्च 2023 में केंद्रीय जेल, भेरूगढ़ जिला उज्जैन में कर्मचारियों की विभागीय भविष्य निधि के भुगतानों में कार्यालय के विभिन्न कर्मचारियों के विभागीय भविष्य निधि खाते में से राशि निकालकर श्री रिपुदमन सिंह रघुवंशी, प्रहरी, श्री शैलेन्द्र सिंह सिकरवार, प्रहरी एवं श्री सोनू मालवीय के खातों में भुगतान को चिह्नित किया गया। प्रकरण का परीक्षण होने पर इस कार्यालय में इसके अलावा गृह भाड़ा भत्ता, वर्दी धुलाई भत्ता में श्री रिपुदमन सिंह रघुवंशी के वेतन में विभिन्न माहों में लाखों रुपये के भुगतान दर्शित हुए। समस्त अनियमितताओं को शामिल करते हुए इस जेल कार्यालय में लगभग 20 करोड़ का गबन प्रकाश में आया है। उक्त तीनों आरोपियों के विरुद्ध FIR दर्ज की गई है।
    
    इस प्रकरण में कर्मचारियों के बैंक खाता क्रमांक परिवर्तन के लिये आहरण अधिकारियों को दिये गये अधिकारों का व्यापक दुरुपयोग दर्शित हुआ, जिसके द्वारा कर्मचारियों के खाता क्रमांकों में बार-बार परिवर्तन कर उनके विभागीय भविष्य निधि खातों से राशि का आहरण किया गया। साथ ही विभागीय भविष्य निधि खातों के बैलेंस में परिवर्तन किया जाकर अधिक राशि का आहरण किया जाना दर्शित हुआ। आयुक्त कोष एवं लेखा द्वारा IFMIS में तुरंत प्रक्रिया में परिवर्तन किया गया एवं कर्मचारियों के बैंक खाते में परिवर्तन एवं विभागीय भविष्य निधि के बैलेंस में परिवर्तन अब कोषालय अधिकारी के अनुमोदन उपरांत ही संभव है। गृह भाड़ा भत्ता एवं वर्दी धुलाई भत्तों के साथ वेतन के अन्य भत्तों में अधिकतम संभव राशि की सीमा लगाई गई है।
    
    मार्च 2023 में ही आयुक्त कोष एवं लेखा के जिला कोषालय इंदौर के निरीक्षण के दौरान कलेक्ट्रेट कार्यालय इंदौर में लगभग 9 करोड़ रुपये का गबन प्रकाश में आया। मुख्यतः असफल भुगतानों एवं कार्यालयीन व्यय के देयकों को श्री मिलाप सिंह चौहान, सहायक वर्ग 3 के द्वारा स्वयं के एवं पत्नी के खाते में एवं अन्य मित्रों के खाते में राशि का अवैध ट्रांसफर किया जाना पाया गया। प्रकरण में 54 व्यक्तियों पर FIR की जा चुकी है। यह दर्शित हुआ कि असफल भुगतान में दूसरे कार्यालयों के चालान से भी भुगतान किया गया है। आयुक्त कोष एवं लेखा ने इस संबंध में पूर्व से ही प्रक्रिया में परिवर्तन किया गया था एवं ई-कुबेर से असफल भुगतान में मैन्युअल प्रक्रिया के स्थान पर आनलाइन प्रक्रिया बनाई गई है, जिसमें संबंधित कार्यालय को आटोमेटिकली असफल भुगतान व्यक्ति या संस्था के नाम सहित दर्शित होते हैं।
    
    अप्रैल 2023 में देवास जिले के शासकीय महाविद्यालय, बागली एवं शासकीय महाविद्यालय हाटपिपल्या में 3.8 करोड़ का गबन प्रकाश में आया। श्री विजय शंकर त्रिपाठी, सहायक वर्ग 3 एवं श्री रोहित दुबे, सहायक वर्ग 3 के द्वारा कर्मचारियों के एरियर एवं छात्रों की स्कालरशिप की राशि को अपने खातों में ट्रांसफर किया गया। स्वीकृति के रूप में खाली कागज की इमेज साफ्टवेयर में संलग्न होने पर भी देयक उपकोषालय बागली से अनुमोदित होने से उपकोषालय के कर्मचारी श्री हरी सिंह चौहान को भी निलंबित किया गया है। इस प्रकरण में FIR दर्ज की गई है एवं अन्य संदिग्धों के नाम जोड़े जाने के लिये प्रकरण पुलिस विवेचना में है।
    
    इन सभी प्रकरणों में अधिकारियों के द्वारा पासवर्ड शेयर करना एवं भुगतानों की मानीटरिंग में लापरवाही प्रकाश में आयी है। इसे रोकने के लिये ई-साइन को देयक को एप्रूव करने के लिये अनिवार्य किया गया है। आधार आधारित भुगतान प्रणाली की शुरुआत की गई है, ताकि वास्तविक भुगतानप्राप्तकर्ता की पहचान सुनिश्चित की जा सके।
    
    इन समस्त प्रकरणों के विश्लेषण पर यह भी दर्शित हुआ कि आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को कोषालय में न आना पड़े, इसके लिये उनके कार्यालय के कर्मचारियों के बैंक खाता क्रमांक का सुधार करना, मोबाइल क्रमांक सुधारना, ई-मेल परिवर्तित करना, विभागीय भविष्य निधि के बैलेंस को अपडेट करना आदि की सुविधायें प्रदान की गई। आहरण एवं संवितरण अधिकारी द्वारा पासवर्ड एवं डिजिटल हस्ताक्षरों के डिटेल्स अपने अधीनस्थ कर्मचारी को विश्वास कर शेयर करने से दुरुपयोग के प्रकरण सामने आये हैं। DDO द्वारा सतर्कता दिखाते तो गबन की स्थिति निर्मित नहीं होती। अब बैंक खाता विवरण सुधार एवं विभागीय भविष्य निधि के बैलेंस के सुधार तो कोषालय अधिकारी से किया जाना सुनिश्चित किया ही गया है, साथ ही मोबाइल क्रमांक के अपडेशन की मिशन मोड में कार्यवाही जारी है, जिसके पूर्ण होने के उपरांत मोबाइल नंबर सुधारने का उत्तरदायित्व भी कोषालय अधिकारी को प्रदान किये जावेंगे।
    
    वेतन निर्धारण में सेवा-पुस्तिका को स्कैन कर IFMIS में अपलोड करने एवं उसके आधार पर वेतन निर्धारण किया जावेगा। इससे सेवा-पुस्तिका के कोष एवं लेखा कार्यालयों में नहीं भेजने या बाद में एंट्री को अनुचित रूप से सुधारने की वृत्ति को नियंत्रित किया गया है।
  • छोटे उद्यमों से दूर होगी देश की बेरोजगारी

    छोटे उद्यमों से दूर होगी देश की बेरोजगारी


    समावेशी विकास के लिए एमएसएमई ही सबसे बेहतर विकल्प है। उसमें आ रही समस्याओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते।डॉ. अरुणा शर्मा,प्रैक्टिशनर डेवलपमेंट इकोनॉमिस्ट और इस्पात मंत्रालय की पूर्व सचिव

    मध्यप्रदेश और भारत में अपने फौलादी इरादों से बदलाव की इबारत लिखने वाली देश की प्रख्यात आईएएस अरुणा शर्मा आर्थिक मुद्दों पर देश का मार्गदर्शन कर रहीं हैं। उन्होंने पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में भारत के आर्थिक सुधारों पर गहरा अध्ययन किया है। उनका कहना है कि भारत के कुल एमएसएमई में से 50% ग्रामीण क्षेत्र में संचालित होते हैं और वे कुल रोजगारों में 45% का योगदान देते हैं। एमएसएमई मंत्रालय के डाटा के अनुसार इस सेक्टर के कुल रोजगार का 97% हिस्सा माइक्रो सेगमेंट से प्राप्त होता है। एमएसएमई पर फोकस करने से देश की ग्रोथ बढ़ेगी।
    भारत की आबादी 1.4 अरब है, जिसमें से 65% आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की 1 मार्च 2023 की रिपोर्ट के अनुसार 7.45% युवा ऐसे हैं, जिन्हें नौकरियां नहीं मिल रही हैं। इस कारण भारत की 3.7 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी की ग्रोथ समावेशी नहीं रह जाती है। हमारे सामने चुनौती है कि न केवल इस ग्रोथ स्टोरी को जारी रखें, बल्कि साथ ही रोजगार के अवसर भी पैदा करें। यह एमएसएमई यानी छोटे और मंझोले उद्योगों द्वारा ही किया जा सकता है। भारत में रोजगारों का जो परिदृश्य है, उसमें आज भी कृषि क्षेत्र द्वारा सबसे ज्यादा 42% रोजगार सृजित किए जाते हैं, सेवा क्षेत्र का योगदान 32% और उद्योग क्षेत्र का 25% का है। लेकिन केवल कृषि और सेवा से दीर्घकालीन और गुणवत्तापूर्ण रोजगार नहीं मिल सकते, इसके लिए उद्योग पर फोकस जरूरी है।
    बड़ी संख्या में एमएसएमई के बंद होने की समस्या : उद्यम पोर्टल में रजिस्टर्ड एमएसएमई की बात करें तो मौजूदा वित्त वर्ष में यह 18.04 लाख पंजीयनों तक पहुंच गई है, जबकि विगत वित्त वर्ष में कोई 10 हजार एमएसएमई बंद हुए हैं। मौजूदा वित्त वर्ष में बंद होने वाली एमएसएमई की संख्या 2016 से 2022 के दौरान बंद हुए एमएसएमई की कुल संख्या से भी अधिक है। सरकार द्वारा अनेक कदम उठाए जाने के बावजूद महामारी के उपरांत एमएसएमई को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। कुल पंजीयनों में से 0.59% यानी 30,997 ने रजिस्ट्रेशन रद्द करवा दिए, 67% ने अनियतकालीन रूप से अपने उद्यम को बंद कर दिया और एसआईडीबीआई के एक सर्वेक्षण के मुताबिक 50 हजार से ज्यादा ने नौकरियां गंवाईं। जो सेक्टर देश में युवाओं को रोजगार देने में सबसे ज्यादा सक्षम है, वही ऐसी समस्याओं से जूझ रहा है, जिनका सामना नहीं किया गया है।
    ऑटो मोड में एनपीए घोषित करने की समस्या : बड़ी कम्पनियों को कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती का लाभ मिल जाता है, लेकिन एमएसएमई को करों में छूट नहीं दी जाती। महामारी के दौरान और उसके बाद कार्यशील पूंजी बड़ी समस्या बन गई थी और एक छोटे प्रतिशत को यह प्रदान की गई थी, लेकिन मौजूदा पूंजी/कार्यशील पूंजी ऋण और इस नए अतिरिक्त कर्ज की प्रणाली को सुधारने के बजाय एमएसएमई पर पुराने और नए कर्जों की किश्तों के भुगतान का बोझ लाद दिया गया। समस्या तब और बढ़ गई, जब रिटेलरों, सेलरों, ट्रेडरों आदि के 90 दिनों के अनपेड लोड को डिफॉल्टर्स घोषित करने के बजाय ऑटो मोड में एनपीए घोषित कर दिया गया।
    जीएसटी से सम्बंधित समस्याएं : जीएसटी के पांच वर्ष पूर्ण होने पर गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स नेटवर्क की वित्त वर्ष 2021-22 की एक रिपोर्ट के मुताबिक जीएसटी के लिए रजिस्टर की गई कुल कम्पनियां 1.45 करोड़ हैं, जिनमें से 78% राजस्व संग्रह निजी और सार्वजनिक कम्पनियों, न्यासों, विदेशी और अन्य शासकीय संस्थाओं से प्राप्त होता है, जबकि स्वामित्व वाली फर्मों से प्राप्त होने वाला जीएसटी राजस्व संग्रह 13.28% और साझेदारी फर्मों से प्राप्त होने वाला जीएसटी राजस्व संग्रह 7.29% है। वहीं 69.80% कुल कर-संग्रह मंझोले और बड़े उद्योगों से प्राप्त होता है, 16.67% छोटे उद्योगों से और केवल 13.53% जीएसटी माइक्रो एंटरप्राइजेस से प्राप्त होता है। ऐसे में यह सुझाव दिया गया है कि माइक्रो और छोटी इकाइयों के लिए जीएसटी दरों में राहत दी जाए।
    डिजिटल भुगतान को हतोत्साहित करना : डिजिटल भुगतान की ओर शिफ्ट सुरक्षा कारणों से हुआ है, लेकिन आरटीजीएस और एनआईएफटी पर सेवा शुल्क लेकर इसे हतोत्साहित किया जा रहा है। एनपीसीआई का कहना है कि यूपीआई नि:शुल्क है, तब तो यही सिद्धांत किसी भी तरह के डिजिटल भुगतान पर लागू होना चाहिए, फिर वह आईएमपीएस हो, आरटीजीएस या एनआईएफटी हो। वैसे भी ये मुद्रा की छपाई में आरबीआई का लगने वाला पैसा बचा रहे हैं और नगदी के आदान-प्रदान में बैंकों का होने वाला व्यय भी कम कर रहे हैं। देश में समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए एमएसएमई ही सबसे बेहतर विकल्प है। उसमें आ रही समस्याओं को नजरअंदाज करने से विकास एकतरफा होकर रह जाएगा। (ये लेखिका के अपने विचार हैं)

  • अफसरशाही की काली भेड़ें

    अफसरशाही की काली भेड़ें


    पी.नरहरि,सचिव जनसंपर्कः अफसरशाही को लांछन से बचाने का प्रयास

    कोरोना वायरस के हमले ने पूरी दुनिया को भयाक्रांत कर दिया है।एक अदृश्य शत्रु के हमले से चीन से लेकर अमेरिका, इटली, फ्रांस, ब्रिटेन,स्पेन जैसे मुल्क तबाही के दौर में पहुंच गए हैं। कोरोना ने भारत में भी अपने पैर पसार लिए हैं। संकट के इस दौर में कई समाजों,वर्गों और विचारों के लोगों का चरित्र भी उजागर होने लगा है। कहा भी गया है धीरज,धर्म,मित्र अरु नारी आपतकाल परखिए चारी।वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील के बाद पूरा देश लॉक डाऊन से गुजर रहा है। ऐसा पहली बार हुआ है कि हवाई और रेल सेवाएं भी पूरी तरह बंद कर दी गईं हैं। केवल परिवहन के लिए इन संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। देश भर में खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति जारी रहे इसके लिए सरकार युद्ध स्तर पर जुटी हुई है। पूरा देश प्रधानमंत्री के आव्हान पर कोरोना महामारी को परास्त करने के उपाय ढूंढ रहा है और अपने स्तर पर अमल भी कर रहा है।इन हालात में राज्य सरकारें और उनके प्रशासनिक अमले पर काम का दबाव बढ़ता जा रहा है। किसी भी युद्ध में जिस तरह फौजों के सामने जीने और मरने की जद्दोजहद होती है उसी प्रकार इस समय सरकारी अमला भी चुनौतियों से गुजर रहा है। कई बहादुर अफसर अपनी हिकमत अमली से परिस्थितियों को नियंत्रित कर रहे हैं। कोरोना वायरस की कोई वैक्सीन अभी तक ईजाद नहीं हो पाई है। वैज्ञानिक जुटे हैं और यदि किसी देश का कोई दल वैक्सीन ईजाद भी कर लेता है तो वैक्सीन को बाजार में उतारने में लंबा समय लगने का अनुमान है। यही वजह है कि पूरी दुनिया में खौफ का माहौल है, लोगों को लगता है कि इस अदृश्य शत्रु के सामने उनकी बहादुरी टिक नहीं पाएगी। सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों में रहें और संक्रमण फैलाने वाले वाहक न बनें। घरों में सफाई रखी जाए और वायरस के वसा से बने खोल को नष्ट करने के लिए डिटर्जेंट, साबुन, अल्कोहल युक्त हैंडवाश, ब्लीचिंग पाऊडर जैसे क्लोरीनीकरण करने वाले रसायनों, पोटेशियम परमेंगनेट जैसे आक्सीकरण एजेंटों का इस्तेमाल करके सफाई रखें। सरकारी दफ्तरों में भी इन रसायनों का प्रयोग करके सफाई रखी जा रही है। इसके बावजूद कई अफसर कोरोना की चपेट में आ गए हैं। उन्हें कोरोंटाईन करके घरों में और अस्पतालों में रखा जा रहा है उनका उपचार किया जा रहा है। शासन ने उन अफसरों की सैकेन्ड लाईन भी तैयार कर दी है। प्रथम पंक्ति के बीमार होने पर दूसरी पंक्ति जवाबदारी संभालेगी। ये व्यवस्था प्राचीन काल से हर युद्ध की परिस्थिति में अपनाई जाती है। इसके बावजूद पहली बार देखा जा रहा है कि कई अफसरों ने खुद को ड्यूटी से बचाने के लिए खुद को कोरोन्टाईन कर लिया है। वे भयभीत हैं और अपने ही घरों में रहकर जवाबदारी संभालने की बात कह रहे हैं। देश में कई स्थानों से अफसरों के आत्महत्या करने की खबरें भी आ रहीं हैं।अपनी चिट्ठियों में उन्होंने लिखा है कि काम का दबाव अहसनीय है।बेशक ये दौर बड़ा वेदनाभरा है। कोई भरोसा नहीं कि कोई व्यक्ति कब संक्रमण की चपेट में आ जाए और उसकी मौत की वजह बन जाए। संक्रमित व्यक्तियों के ठीक होने की दर भी बहुत अधिक है इसके बावजूद वैज्ञानिक इलाज न मालूम होने के कारण गारंटी नहीं है कि हर संक्रमित व्यक्ति बच ही जाएगा। अब इन हालात में अफसरों का जिम्मेदारियों से भागना कोई अचंभा नहीं है। इसके बावजूद बहाने बनाकर फर्जी सर्टिफिकेट लेकर खुद कोरेंटाईन कर लेना किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं हो सकता। हमारे देश की सरकारें अपने संसाधनों से जो आय अर्जित करती हैं उनका तीन चौथाई से भी अधिक हिस्सा सरकारी अमले को पालने पर खर्च किया जाता है। विकास योजनाओं को पूरा करने के लिए सरकारें कर्ज लेती हैं और जिसका ब्याज जनता को चुकाना पड़ता है। इसलिए जनता के खजाने से वेतन लेने वाले अफसरों की जवाबदारी और भी अधिक बढ़ जाती है। वे घरों में घुसकर इस युद्ध को नहीं जीत सकते। बेशक उन्हें शहादत देनी पड़ सकती है पर इसकी चिंता करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है। आम जनता का पेट काटकर अब तक उन्हें पाला जाता रहा है। न उत्पादकता बढ़ाने का दबाव और न ही धंधे में घाटे का खौफ,दिन भर की अफसरी और शाम को क्लब हाऊसों में मजा मौज इन अफसरों की जिंदगानी रही है। अब जबकि 21 दिनों के लॉक डाऊन में आम जनता मूलभूत जरूरतों के लिए वंचित है तब अफसरों का तंत्र यदि मैदान से रफूचक्कर हो जाएगा तो फिर जन समस्याओं का निवारण कैसे हो पाएगा।प्रदेश के जनसंपर्क सचिव पी.नरहरि ने इस मुद्दे पर चल रहीं खबरों को देखते हुए बाकायदा अपील की है कि अफसरों की बहानेबाजी की खबरें भ्रामक हैं। सभी अफसर अपना काम मुस्तैदी से कर रहे हैं। यदि वे बीमार हो जाते हैं तो इसे उनकी गैरजिम्मेदारी न बताया जाए। उनकी बात सही है अफसरों पर बेवजह लांछन लगाना उचित नहीं है। अब तक केवल सरकारी तंत्र ही तो है जो कानून और व्यवस्था संभाले हुए है। संकट के इस दौर में समस्या को समझना जरूरी है। तभी समाधान खोजा जा सकता है।अब तक सरकारी तंत्र में चापलूसों को जो महत्व दिया जाता रहा है उनकी वजह से ही सरकारी तंत्र पर अंगुलियां उठ रहीं हैं। ये समय कसावट का है। चापलूसों की भीड़ भले ही घरों में छुप जाए पर योद्धा अफसर तो मैदान में डटे ही हैं। इसलिए सिरे से सरकारी व्यवस्था को खारिज करना नाइंसाफी होगी,इसके बावजूद अफसरशाही में घुसी काली भेड़ों की पहचान तो उजागर होनी ही चाहिए।

  • आपमें काम शुरु करने की ताकत होती तो आईएएस अफसर बनकर नौकरी नहीं करते-गडकरी

    आपमें काम शुरु करने की ताकत होती तो आईएएस अफसर बनकर नौकरी नहीं करते-गडकरी

    नागपुर 20 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने आईएएस अफसरों के काम पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा- ‘मैं आपको सच बताता हूं, पैसे की कोई कमी नहीं है, जो कुछ कमी है वो सरकार में काम करने वाली मानसिकता की है। जो निगेटिव एटीट्यूड है, निर्णय करने में जो हिम्मत चाहिए, वो नहीं है।’ केंद्रीय मंत्री रविवार को नागपुर में विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के हीरक जयंती समारोह के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे।

    नितिन गडकरी ने आगे कहा- ‘परसों मैं एक बड़े फोरम में था, वे(आईएएस अफसर) कह रहे थे- हम यह शुरू करेंगे, वो शुरू करेंगे, तो मैंने उनको कहा- आप क्यों शुरू करेंगे? आपकी अगर शुरू करने की ताकत होती तो आप आईएएस अफसर बनकर यहां नौकरी नहीं करते। उन्होंने आगे कहा कि आप जाकर कोई बड़ा उद्योग कर सकते थे, आपका यह काम नहीं है, जो कर सकता है उसकी आप ज्यादा मदद करो, आप इस लफड़े में मत पड़ो। वी आर ओनली फैसिलिटेटर।’

    इस दौरान गडकरी ने अपने लक्ष्यों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में हमने 17 लाख करोड़ रुपए के काम करवाए हैं। इस साल वह 5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचना चाहते हैं।

    केंद्रीय मंत्री गडकरी ने यह भी कहा कि लोगों को उस क्षेत्र में काम करना चाहिए, जिसमें वे अच्छा कर सकते हैं। इससे पहले गडकरी ने रविवार को छत्रपति नगर के एक ग्राउंड में क्रिकेट भी खेला। उन्होंने शहर के कई ग्राउंड्स का दौरा किया। साथ ही खासदर क्रीड़ा महोत्सव के खिलाड़ियों की हौसला अफजाई भी की। केंद्रीय मंत्री ने एक ने एक ट्वीट में कहा- मैंने शहर की कई जगहों पर खिलाड़ियों के साथ अच्छा वक्त बिताया। छत्रपति नगर में मैं खुद को खिलाड़ियों के साथ खेलने से नहीं रोक सका।

  • प्रदेश को आर्थिक शक्ति बनाएं अफसरों से बोले कमलनाथ

    प्रदेश को आर्थिक शक्ति बनाएं अफसरों से बोले कमलनाथ

    तीन दिवसीय आईएएस सर्विस मीट 2020

    भोपाल 17 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि देश में मध्यप्रदेश ही ऐसा प्रदेश है, जो विविधताओं से सम्पन्न है और पूरे विश्व में भारत ही ऐसा देश है, जो विविधताओं से पूर्ण है। इस विविधता को सकारात्मक ऊर्जा में बदलना होगा। उन्होंने कहा कि विविधता में भारत की बराबरी करने वाला देश सिर्फ सोवियत संघ था। आज वह अस्तित्व में नहीं है क्योंकि उसमें भारत जैसी सोच-समझ और सहिष्णुता की संस्कृति नहीं थी। यही भारत की पहचान है। मुख्यमंत्री आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में आईएएस सर्विस मीट 2020 के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि जो आईएएस अधिकारी अपनी सेवा यात्रा के मध्य में हैं और जो सेवा पूरी करने वाले हैं, वे चिंतन करें कि मध्यप्रदेश को वे कहाँ छोड़कर जाना चाहते हैं। जो अधिकारी अपनी सेवा यात्रा की शुरूआत कर रहे हैं, वे सोचें कि मध्यप्रदेश को कहाँ देखना चाहते हैं। श्री कमल नाथ ने प्रशासनिक अधिकारियों को न्याय देने वाला बताते हुए कहा कि संविधान में उल्लेखित स्वतंत्रता और समानता जैसे मूल्यों की सीमाएँ हो सकती हैं लेकिन न्याय की कोई सीमा नहीं है। यह हर समय और परिस्थिति में दिया जा सकता है। दृष्टिकोण में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के पास जो क्षमता और कौशल है, वह सामान्यत: राजनैतिक नेतृत्व के पास नहीं रहता। राजनैतिक नेतृत्व बदलते ही प्रशासनिक तंत्र का भी नया जन्म होता है लेकिन ज्ञान, कला, कौशल नहीं बदलते।

    मुख्यमंत्री ने नए परिवर्तनकारी विचारों (न्यू आइडिया आफ चेंज) के लिए तीन पुरस्कार देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसके लिए पूर्व मुख्य सचिवों की एक ज्यूरी बनाई जाएगी, जो सर्वोत्कृष्ट आईडिया चुनेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हर राज्य की अपना प्रोफाईल होती है। सबको मिलकर मध्यप्रदेश का प्रोफाईल बनाना होगा। वर्तमान प्रोफाईल को बदलना होगा। मध्यप्रदेश की नई पहचान बनानी होगी। इसके लिए जरूरी है कि प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा आर्थिक गतिविधियाँ उत्पन्न हों। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी हर पल बदल रही है। पूरा भारत बदल रहा है। ज्ञान और सूचना के भंडार तक आज जो पहुँच बढ़ी है, वह पहले नहीं थी। उन्होंने कहा कि विश्व में सबसे ज्यादा महत्वाकांक्षी जनसंख्या भारत में है। ये जनसंख्या युवाओं की है। बदलते समय में महत्वाकांक्षाएँ भी बदल रही हैं। अब यह देखना है कि इन्हें कैसे अपनाएं।

    श्री कमल नाथ ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि आधारित अर्थ-व्यवस्था का प्रदेश है। वर्तमान समय में अधिक उत्पादन की चुनौती है। खाद्यान्न की कमी अब चुनौती नहीं रही। उन्होंने कहा कि परिवर्तन तब दिखेगा, जब धोती-पायजामा पहनने वाला किसान आधुनिक खेती करते हुए जींस और शर्ट वाला किसान बन जाये।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती हमारी नई पीढ़ी की है। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में कौशल सम्पन्न युवा तैयार होते हैं। उन्हें रोजगार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रोजगार आर्थिक गतिविधियों का एक घटक है। इसलिए आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ाना चुनौतीपूर्ण काम है। उन्होंने कहा कि हर सरकार की अपनी कार्य-शैली होती है। अपनी अच्छाईयाँ और कमजोरियाँ होती हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की नई पीढ़ी को यह देखना होगा कि मध्यप्रदेश को किस दिशा में जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश एक आर्थिक शक्ति बनने की संभावना रखता है। मध्यप्रदेश के पास लॉजिस्टिक लाभ है। यहाँ का बाजार और व्यापार पूरे देश से जुड़ सकता है। सिर्फ नजरिए में परिवर्तन लाने की देर है। इसके लिए नया सीखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि क्या सीखते हैं, इससे ज्यादा जरूरी है कि कैसे सीखते हैं।

    मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती ने आईएएस मीट के आयोजन की पृष्ठभूमि की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह नई ऊर्जा और अनुभव को एक साथ लाने का अवसर है ताकि यह कार्य-शैली में भी बना रहे और इसका भरपूर लाभ समाज को मिले।

    अपर मुख्य सचिव सर्वश्री एम.गोपाल रेड्डी, मनोज श्रीवास्तव एवं प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव ने अतिथियों को स्मृति-चिन्ह भेंट किये। प्रारंभ में मध्यप्रदेश आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष आई.सी.पी. केशरी ने अपने स्वागत भाषण में मुख्यमंत्री को आधुनिक, उदार, डॉयनामिक और विश्व-दृष्टि से सम्पन्न नेता बताते हुए कहा कि वे 159 देशों का भ्रमण कर चुके हैं । वे किसानों के हित में 19 मंत्रियों के साथ विश्व व्यापार संगठन की बैठक का विरोध करने वाले नेता हैं। उनके नेतृत्व में देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर में क्रांतिकारी परिवर्तन आया।

    इस अवसर पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं प्रख्यात लेखक पवन वर्मा और प्रशासन अकादमी की महानिदेशक सुश्री वीरा राणा उपस्थित थी।