भोपाल,16 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। 10वां अंतर्राष्ट्रीय वन मेला 17 से 23 दिसंबर तक लाल परेड मैदान में आयोजित होने जा रहा है। मेले का उद्घाटन शाम पांच बजे राज्यपाल मंगूभाई पटेल करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे, विशिष्ट अतिथि के रूप में वन एवं पर्यावरण, राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार भी उपस्थित रहेंगे। मंत्री दिलीप अहिरवार ने आज एक भीड़ भरी पत्रकार वार्ता में बताया कि मेले की थीम ‘लघु वनोपज से महिला सशक्तिकरण’ रखी गई है। लघु वनोपजों के प्रबंधन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, प्रदेश में लघु वनोपज संग्रहण कार्य में लगभग 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी है।
मंत्री दिलीप अहिरवार ने बताया कि मेले में 300 स्टाल्स लगाए जाएंगे। प्रदेश के जिला यूनियन, वन धन केंद्र, जड़ी-बूटी संग्राहक, उत्पादक, कृषक, आयुर्वेदिक औषधि निर्माता, परंपरागत भोजन सामग्री के निर्माता एवं विक्रेतागण अपने उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय करेंगे। उन्होंने कहा कि मेले में लघु वनोपज एवं औषधीय पौधों के क्षेत्र की गतिविधियों, उत्पादों एवं अवसरों को प्रदर्शित करने एवं इससे जुड़े संग्राहकों, उत्पादकों, व्यापारियों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों, प्रशासकों एवं नीति निर्धारकों के बीच संवाद स्थापित करने के लिए एक व्यापक मंच उपलब्ध कराया जाएगा।
मेले में विभिन्न शासकीय विभागों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। साथ ही 19 एवं 20 दिसंबर को मेला स्थल पर ‘लघु वनोपज से महिला सशक्तिकरण’ पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। जिसमें श्रीलंका, नेपाल एवं ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधिगण भाग लेंगे। 21 दिसंबर को क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित होगा,जिसमें उच्च गुणवत्ता युक्त लघु वनोपजों (औषधीय पौधों ) कच्ची जड़ी-बूटियों एवं एमएफपी-पार्क की बनाईं हुईं आयुर्वेदिक औषधियों के क्रय-विक्रय के लिए अनुबंध किए जाएंगे।
मंत्री दिलीप अहिरवार ने बताया कि मेले में ओपीडी संचालन किया जाएगा। जिसमें आयुर्वेदिक पद्धति के चिकित्सकों, उपचार करने वाले विशेषज्ञों द्वारा निशुल्क चिकित्सा परामर्श दिया जाएगा। जिसमें 25 हजार लोगों के उपचार कराने की संभावना है।
वन राज्य मंत्री ने बताया कि मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिसमें आर्केस्टा, नुक्कड़ नाटक एवं लोक नृत्य, स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए चित्रकला, फैंसी ड्रेस, गाय कार्यक्रम आयोजित होंगे, साथ ही 18 दिसंबर को लोक गायिका मालिनी अवस्थी एवं 19 को हास्य कलाकार एहसान कुरैशी, 20 को सूफी बैंड, 21 फिडली क्राफ्ट और 22 को ‘एक शाम वन विभाग के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन होगा।
अंतर्राष्ट्रीय वन मेला, 2024, प्रदेश की वन संपदा और महिला सशक्तिकरण को समर्पित एक ऐसा मंच है, जो पर्यावरण, संस्कृति और अर्थव्यवस्था के सामंजस्य को प्रदर्शित करता है।
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राजधानी में अंतर्राष्ट्रीय वनमेले का शुभारंभ
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जंगलों का कवच हैं जड़ी बूटियां बोले उत्तराखंड के वनमंत्री
भोपाल,22 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।उत्तराखण्ड के वन मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि आज के वन हमारी सामुदायिक सहभागिता से विकसित हो रहे हैं। जरूरी है कि इन वनों को वनवासियों की आत्मनिर्भरता का साधन भी बनाया जाए ताकि वनों का विनाश रुक सके और घने जंगल हमारी परिस्थितिकी को संवारने का साधन बन सकें। राजधानी के लाल परेड मैदान में चल रही दो दिवसीय कार्यशाला में श्री उनियाल ने वनसंपदा को जंगलों का रक्षा कवच बताया है। ये दो दिवसीय कार्यशाला ‘लघु वनोपज से आत्म-निर्भरता’ विषय पर आयोजित हो रही है जिसमें वनमेले में आए कई प्रकृति प्रेमी भी शामिल हो रहे हैं।
श्री उनियाल ने कान्फ्रेंस में विभिन्न आयुर्वेदिक और वन-शिक्षण संस्थाओं से शामिल हुए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि दुनिया का कोई लक्ष्य आपकी हिम्मत से बड़ा नहीं हो सकता। आप ये न सोचों कि इतने विशाल जंगलों को हम कैसे बचा सकते हैं। वनोपज से होने वाली आय जंगलों के रक्षकों की इतनी बड़ी फौज खड़ी कर सकती है जो सीमित संसाधनों में भी सफलता दिला सकती है।जंगलों की उपयोगिता से जुड़ी यह मानव शक्ति बगैर वेतन पर्यावरण बचा सकती है। जरूरत है कि हम लोगों को जड़ी बूटियों का महत्व समझाएं। देशी चिकित्सा के तौर तरीके उन्हें पेड़ों का महत्व आसानी से बता सकते हैं।
राज्य लघु वनोपज संघ के एमडी पुष्कर सिंह ने बताया कि दो दिन तक चलने वाली कार्यशाला में देश-विदेश में हुए विभिन्न अनुसंधानों की जानकारी मिलेगी, जो आयुर्वेद के विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक साबित होगी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री आर.के. गुप्ता ने बताया कि वन मेले में लगे स्टालों से प्रदेश की जैव विविधता झलकती है। यहाँ एक ओर पातालकोट का विश्व विख्यात शहद, झाबुआ का लाल चावल, महाकौशल क्षेत्र का कोदो-कुटकी और कई तरह के पारम्परिक औषधीय पौधों की प्रचुरता है।
कार्यशाला में नेपाल, इंडोनेशिया, भूटान के विशेषज्ञों के साथ मध्यप्रदेश सहित उत्तराखण्ड, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश के विषय-विशेषज्ञ, अधिकारी और इंडस्ट्री एक्सपर्ट शामिल हुए।नेपाल सरकार के जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण सलाहकार डॉ. माधव कर्की वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शामिल हुए। उन्होंने मध्यप्रदेश और उत्तराखण्ड राज्य के संसाधनों के सतत प्रबंधन और संवर्धन की तारीफ करते हुए कहा कि नेपाल को इस संदर्भ में सीखना होगा।
वन मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने लाल परेड ग्राउंड में लगे वन मेले में लगी विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया और प्रदर्शित उत्पादों की जानकारी भी प्राप्त की। वन बल प्रमुख आर.के. गुप्ता ने वन मंत्री को प्रतीक-चिन्ह भेंट किया। इस मौके पर भारतीय वन प्रबंध संस्थान (आईआईएफएम भोपाल) के डायरेक्टर डॉ. के. रविचंद्रन की मौजूदगी विशेष रही। अपर प्रबंध संचालक (व्यापार) श्री विभाष ठाकुर ने सभी आगंतुकों का आभार माना।
