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  • नाकामी पर पर्दा ढांकने रजिस्ट्रार ने छोटे मंत्री को ढाल बनाया

    नाकामी पर पर्दा ढांकने रजिस्ट्रार ने छोटे मंत्री को ढाल बनाया


    भोपाल, 11 अप्रैल,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल की प्रभारी रजिस्ट्रार माया अवस्थी ने काऊंसिल में चल रही अनियमिताओं पर पर्दा ढांकने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री को इस बार एक टूल की तरह इस्तेमाल किया है। लंबे समय से पंजीयन के लिए भटक रहे फार्मासिस्टों की शिकायतों पर अखबारी खबरों से परेशान प्रभारी रजिस्ट्रार ने इस बार राज्यमंत्री को अपनी ढाल बनाया। छोटे मंत्री के पास काऊंसिल का प्रभार भी नहीं है इसके बावजूद उन्होंने दौरा करके स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन कर डाला है।


    पिछले लंबे समय से प्रदेश के फार्मासिस्टों और केमिस्टों के बीच पंजीयन को लेकर मारामारी चल रही है।प्रदेश के फार्मेसी कालेजों से हर साल लगभग तीस हजार विद्यार्थी डिग्री लेकर निकलते हैं। फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकृत होने के बाद वे देश और दुनिया के विभिन्न फार्मा संस्थानों में नौकरी पा सकते हैं। इस लिहाज से ये पंजीयन उनके जीवन के लिए सुनहरा मोड़ साबित होता है। फार्मासिस्टों की इसी चाहत का फायदा उठाकर काऊंसिल में लंबे समय से हेराफेरी चलती रही है। प्रभारी रजिस्ट्रार माया अवस्थी का कहना है कि फार्मेसी की डिग्री लेकर आवारा किस्म के लोग खुद को फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकृत करवा लेते हैं और अपने पंजीयन प्रमाण पत्र के नाम पर मेडीकल दूकान खोलकर किराए पर दे देते हैं। इसीलिए हमारा प्रयास रहता है कि कम से कम फार्मेसिस्टों का पंजीयन हो ताकि अराजकता न फैले।


    यही तर्क देकर उन्होंने आज छोटे मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल का दौरा काऊंसिल में कराया। यहां मंत्रीजी के निर्देश पर फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन को बुला लिया गया। रजिस्ट्रार ने मंत्रीजी से कहा कि अध्यक्ष महोदय उन पर वाजिब पंजीयन जारी करने का दबाव बनाते हैं। इस पर अध्यक्ष ने मंत्रीजी को बताया कि हजारों विद्यार्थी परेशान घूमते रहते हैं इसीलिए वे रजिस्ट्रार को काऊंसिल में बैठने और प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश देते रहते हैं। फूड एवं ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की रजिस्ट्रार और काऊंसिल की प्रभारी रजिस्ट्रार माया अवस्थी ने शिकायती लहजे में मंत्री जी से कहा कि अध्यक्ष महोदय यहां पदस्थ रजिस्ट्रार कुमारी दिव्या पटेल को भी जांच उपरांत पंजीयन जारी करने का निर्देश देते रहे हैं। कुमारी पटेल इन दिनों मातृत्व अवकाश पर गई हुईं हैं इसलिए मुझे काऊंसिल का प्रभार दिया गया है। मेरे पर इतना समय नहीं है कि मैं यहां बैठकर पंजीयन जारी करूं।


    गौरतलब है कि मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल राज्य सरकार के निर्देश पर पंजीकृत संस्था है। इस संस्था में फार्मा क्षेत्र के चुने हुए जन प्रतिनिधियों को चुनाव के बाद पदस्थ किया जाता है। इसी संस्था के फंड से रजिस्ट्रार और स्टाफ का वेतन दिया जाता है। चुनी हुई काऊंसिल संस्था के फंड प्रबंधन और जनता की सुविधाओं के लिए प्रयास करती है। फंड का प्रबंधन रजिस्ट्रार के हाथ में होता है । राज्य प्रशासनिक सेवा से भेजे गए रजिस्ट्रार की नाकामियों का खमियाजा सरकार और काऊंसिल दोनों को भुगतना पड़ता है।


    फार्मा क्षेत्र को मजबूती देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान के अंतर्गत युवाओं को अवसर दिए जा रहे हैं. इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए ही काऊंसिल की चुनी हुई परिषद रजिस्ट्रार पर युवाओं के हित में जांच उपरांत पजीयन जारी करने के निर्देश देती रहती है। पिछले कुछ सालों से गड़बड़ियों को लेकर शिकायतें सामने आती रहीं हैं लेकिन सरकारी अमला अपना भ्रष्टाचार और नाकामी छुपाने के लिए तरह तरह के बहाने बनाता रहा है।


    विधानसभा चुनावों के पहले इंदौर की विजय नगर पुलिस ने जिस फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह को गिरफ्तार किया था उसमें फार्मेसी काऊंसिल के तीन बाबू संजय तिलकवार, विजय शर्मा और आरएन पांडे भी धरे गए थे। उन्हें तो तभी निलंबित कर दिया गया था पर उन्होंने जिन फर्जी मार्कशीटों पर फार्मासिस्टों का पंजीयन कराया था उन्हें तत्कालीन रजिस्ट्रार शैलेन्द्र हिनोतिया ने मंजूरी दी थी। शैलेन्द्र हिनोतिया को बगैर जांच किए पंजीयन जारी करने का दोषी पाया गया था लेकिन उन्होंने अपनी ऊंची पहुंच का उपयोग करके खुद को गिरफ्तारी से बचा लिया। चुनावों की बेला में सरकारी असफलता की पोल न खुले इसके लिए काऊंसिल के पदाधिकारियों ने पूर्व की परिषद की गलतियों को नजरंदाज करने का अनुरोध करके मीडिया और विपक्षी दलों के लोगों को शांत किया था।


    माया अवस्थी को भी भय है कि वे बाबुओं की नोटशीट पर दस्तखत करके पंजीयन जारी करेंगी तो भविष्य मे उन पर भी घोटाले में शामिल होने के आरोप लग सकते हैं। दिव्या पटेल ने भी अपने कार्यकाल में गिने चुने पंजीयन जारी किए । ये प्रमाण पत्र भी भारी ऊहापोह के बीच बाबुओं की सिफारिश पर जारी किए गए थे। यहां भेजे जाने वाले रजिस्ट्रार असली नकली अभ्यर्थियों की छानबीन नहीं करना चाहते वे तो बाबुओं की नोटशीट को ही आधार बनाते हैं । इसकी वजह से काऊंसिल में लंबे समय से भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है। वर्तमान परिषद फार्मा सेक्टर के प्रतिभाशाली लोगों के बीच से आई है इसलिए रजिस्ट्रार के स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों पर लगाम कसी गई है।


    काऊंसिल की परिषद के सदस्यों का कहना है कि राज्य के फार्मा सेक्टर को बल देने के लिए बड़ा वर्क फोर्स चाहिए। राज्य और केन्द्र सरकार की भी यही मंशा है। पंजीयन जारी करने की प्रक्रिया बड़ी पारदर्शी होती है। कालेजों से डिग्री पाने वाले विद्यार्थी यदि सभी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते हैं तो उन्हें पंजीयन जारी कर दिया जाना चाहिए। शासन को कई बार इसकी सूचना दी जा चुकी है कि फार्मा सेक्टर से जुड़ा पूर्णकालिक रजिस्ट्रार यहां पदस्थ किया जाए ताकि वह आवश्यक जांच उपरांत फार्मासिस्टों को पंजीकृत कर सके। अब सारी प्रक्रिया आनलाईन हो गई है इसलिए इसमें गड़बड़ी की संभावना नहीं है। इसके बावजूद प्रभारी रजिस्ट्रार न तो खुद दस्तावेंजों की जांच करवाने में इच्छुक हैं और न ही वे पंजीयन जारी करने मे रुचि लेती हैं। इससे सरकार को मिलने वाली फीस भी नहीं मिल पाती और युवाओं को चक्कर काटना पड़ते हैं जिससे वे दलालों के चंगुल में फंस जाते हैं। काऊंसिल इन्हीं गड़बड़ियों का निराकरण करने का प्रयास कर रही है।


    माया अवस्थी ने अपनी जवाबदारियों से पल्ला झाड़ने के लिए ही इस बार छोटे मंत्री को सामने ला खड़ा किया है। उनके पास फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन का प्रभार भी है। यहां फूड ड्रग के नमूनों की जांचें भी लंबित पड़ी हैं। ड्रग निर्माण की अनुमतियां जारी करने में भी भारी हेराफेरी की शिकायतें आ रहीं हैं। शायद यही वजह है कि छोटे मंत्रीजी को रजिस्ट्रार का पक्ष लेना न्याय जान पड़ रहा है। आज के दौरे में मंत्रीजी के साथ प्रभारी रजिस्ट्रार श्रीमती माया अवस्थी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी भी उपस्थित थे।

  • स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा का विलय मंजूर

    स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा का विलय मंजूर

    भोपाल,23 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के विलय की स्वीकृति दी गई। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग का विलय कर “लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग” के रूप में पुनर्गठित किया जायेगा। मेडिकल कॉलेज रूटीन चिकित्सा सेवाएं देने के बजाय अति गंभीर/विशिष्ट उपचार, चिकित्सा शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर सकेंगे। शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर की प्रभावी निगरानी हो सकेगी। मेडिकल कॉलेजों की बेस्ट प्रेक्टिसेस का स्वास्थ्य केन्द्रों में उपयोग किया जा सकेगा। मेडिकल कॉलेजों से जिला चिकित्सालयों को संबद्ध करना आसान हो जाएगा। स्वास्थ्य नीति और विभागीय योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन एवं नियंत्रण में सुविधा मिलेगी। आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप में दोनों विभागों के विलय की अनुशंसा की गई थी।

    मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय अधिनियम, 2011 के प्रावधानों में संशोधन

    मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय अधिनियम, 2011 के प्रावधानों में संशोधन की स्वीकृति दी गई है। वर्तमान में आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय चिकित्सा, दंत चिकित्सा, नर्सिंग, आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, नेचरोपैथी आदि में पाठ्यक्रम संचालित करता है। नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थाओं और छात्र-छात्राओं की संख्या में वृद्धि को देखते हुए आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय को नर्सिंग एवं पैरामेडिकल को छोड़कर अन्य विषयों के पाठ्यक्रम संचालित करने का दायित्व दिया जायेगा। नर्सिंग एवं पैरामेडिकल विषयो से संबंधित पाठ्यक्रम का संचालन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा स्थापित अन्य विश्व विद्यालयों के माध्यम से किया जायेगा।

    मल्हारगढ़ उद्वहन सिंचाई परियोजना के लिए 87 करोड़ 25 लाख रूपये से अधिक की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद द्वारा अशोकनगर की तहसील मुंगावली में बेतवा नदी पर 87 करोड़ 25 लाख रूपये लागत की मल्हारगढ़ उद्वहन सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति दी गयी है। परियोजना से मुंगावली तहसील के 26 ग्रामों के 7500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी।

    रतलाम जिले में तलावड़ा बैराज के निर्माण के लिये 264 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने रतलाम जिले में पेयजल आपूर्ति विस्तारित करने के लिए माही एवं मझोडिया समूह जल प्रदाय योजना अंतर्गत तलावड़ा बैराज (बांध) लागत रुपए 264 करोड़ 1 लाख रूपए की स्वीकृति दी है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत परियोजना से रतलाम जिले के 1011 ग्राम लाभान्वित होंगे। इसका निर्माण एवं रखरखाव जल संसाधन विभाग द्वारा किया जायेगा।

    जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 में संशोधन

    मंत्रि-परिषद ने जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 में संशोधन के लिए संसद को भेजे जाने वाले प्रस्ताव का अनुमोदन किया है। कानून में जल प्रदूषण से जुड़े छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने और जुर्माने का प्रावधान करने जैसे संशोधन प्रस्तावित है।

    सभी जिलों में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेन्स की स्थापना का निर्णय

    मंत्रि-परिषद द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अतंर्गत प्रदेश के सभी जिलों में 1-1 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेन्स स्थापित करने की स्वीकृति दी है। प्रदेश के 55 जिलों में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेन्स स्थापित किया जायेगा। चयनित महाविद्यालयों में अतिरिक्त 1845 शैक्षणिक पदों व 387 अशैक्षणिक पदों की स्वीकृति दी गयी है। इसके लिए कुल 485 करोड़ रूपये के व्यय की स्वीकृति दी गयी।

    छठवें वेतनमान की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद द्वारा जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत अनुदान प्राप्त अशासकीय संस्थाओं के शिक्षकों/कर्मचारियों को 1 जनवरी 2006 से छठवें वेतनमान का लाभ देने एवं 206 करोड़ 80 लाख रूपये के अनुमानित व्यय का अनुमोदन दिया गया है।

    अन्य निर्णय

    मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश माल एवं सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2024 में संशोधन की स्वीकृति दी गई।

  • आसव और अरिष्ट से संवारें स्वास्थ्य

    आसव और अरिष्ट से संवारें स्वास्थ्य

    अर्जुनारिष्ट : शरीर में वायु अधिक होने से हृदय की धड़कन बढ़ना, पसीना अधिक आना, मुँह सूखना, नींद कम आना, दिल घबराना, फेफड़े के रोग तथा हृदय रोगों में लाभकारी।

    अभ्रयारिष्ट : सभी प्रकार के बवासीर की प्रसिद्ध दवा है। कब्जियत, मंदाग्नि आदि उदर रोगों को नष्ट कर अग्नि को बढ़ता है। पीलिया, तिल्ली, उदर रोग, झांई, अर्बुद, ग्रहणी तथा ज्वरनाशक है।

    अमृतारिष्ट : सब तरह के बुखार में लाभकारी। विषम ज्वर, जीर्ण ज्वर व पित्त ज्वर में विशेष लाभ करता है। बालकों के यकृत बढ़ने पर लाभकारी।

    अरविन्दासव : बालकों को सूखा रोग, अतिसार, दूध न पचना आदि रोगों को दूर कर उन्हें हृष्ट-पुष्ट, बलवान बनाता है। पाचन क्रिया ठीक होकर रक्त, मांस व बल वृद्धि होती है। बुद्धि वर्द्धक व रक्त शुद्धि कारक है।

    अशोकारिष्ट : स्त्रियों के सब प्रकार के रोग, प्रदर, (लाल, पीला, सफेद पानी), मासिक धर्म के विकार, सिर पेडू व कमर वगैरह के दर्द, पित्त दाह (हाथ व पाँव के तलवों की जलन), प्रमेह, अरुचि, उदरशूल आदि इसके सेवन से नष्ट होते हैं। शरीर की शक्ति व मुख की कांति बढ़ती है।

    अश्वगंधारिष्ट : दिमागी ताकत बढ़ाने और शरीर को पुष्ट करने में विशेष लाभकारी है। मूर्छा (बेहोशी), अकारण भय, दिल की घबराहट, चित्त भ्रम, अनिद्रा, याददाश्त की कमी, मंदाग्नि, बवासीर, कब्जियत, काम में चित्त न लगना, स्नायु दुर्बलता व कमजोरी दूर करता है, बुद्धि, बल-वीर्य बढ़ाता है।

    उशीरासव : समस्त पित्त विकारों में लाभदायक। रक्तपित्त, प्रमेह, बवासीर आदि में विशेष लाभकारी। पांडू रोग, कोढ़, सूजन आदि में लाभप्रद।

    कनकासव : नए- पुराने दमा (श्वास), खाँसी, कुकर खाँसी, क्षय रोग आदि में अत्यंत लाभकारी। पुराना बुखार, रक्तपित्त और उरुक्षत रोगों में लाभदायक।

    पुटजारिष्ट : खून के दस्त, संग्रहणी, खूनी बवासीर, आमांश, रक्तातिसार व जीर्ण ज्वर आदि रोगों में अत्यंत लाभदायक ।
    कुमारी असाव : सब प्रकार के उदर रोग, तिल्ली व जिगर बढ़ना, गुल्म (वायु गोला), भोजन के बाद पेट का दर्द आदि उदर रोग नष्ट होते हैं। भोजन ठीक से पचता है तथा अरुचि दूर होती है। श्वास, खाँसी, बवासीर, पीलिया, धातुक्षय, हृदय रोग, कब्जियत व वात व्याधि को नष्ट करता है। यकृत रोग में विशेष लाभकारी।

    कुमारी आसव (लौह युक्त) : ऊपर लिखे गुणों के अतिरिक्त पथरी, अपस्मार, प्रमेह व शूल रोग नष्ट करता है तथा खून बढ़ाता है। मूत्र कृच्छ, अपस्मार, कृमि रोग, शुक्रदोष आदि में लाभकारी है।

    खदिरादिष्ट : सब प्रकार के चर्म रोग (फोड़े-फुंसी, खुजली आदि) गण्डमाला एवं खून की तमाम खराबियों आदि में विशेष लाभकारी है।

    चन्दनासव : शुक्रमेह (सुजाक), प्रमेह, पेशाब की जलन, धातु का जाना, पथरी आदि मूत्र विकारों में अत्यंत लाभदायक। पित्त शामक, पुष्टिकारक व हृदय को ताकत देता है। बल- वीर्य वर्द्धक।

    जीरकाद्यरिष्ट : हाथ-पैरों की जलन, भूख कम लगना व उदर विकारों पर अतिसार, संग्रहणी व सूतिका रोगों पर लाभकारी।

    दशमूलारिष्ट : बल, वीर्य व तेज बढ़ाता है तथा बाजीकारक है। स्त्रियों के प्रसूत रोग, अरुचि, शूल सूतिका, संग्रहणी, मंदाग्नि, प्रदर रोग, श्वास, खांसी वात व्याधि, कमजोरी आदि रोगों की प्रसिद्ध दवा है। शरीर पुष्ट करता है। प्रसूता स्त्रियों तथा प्रसूति के बाद इसका सेवन अवश्य करना चाहिए।

    दयाल द्राक्षासव : ताकत और ताजगी से भरा सुमधुर टॉनिक है। यह भूख बढ़ाता है। दस्त साफ लाता है, खून में तेजी लाता है, काम की थकावट दूर करता है तथा नींद लाता है। दिल व दिमाग में ताजगी पैदा करता है। बल, वीर्य, रक्त मांस बढ़ाता है। कफ, खाँसी, सर्दी-जुकाम, क्षय की खाँसी, कमजोरी में लाभदायक। सब ऋतुओं में बाल, वृद्ध, स्त्री, पुरुष सभी सेवन कर सकते हैं।

    द्राक्षारिष्ट : उरक्षत छाती में दर्द होना, कुकर खाँसी, गले के रोग, श्वास, काँस, क्षय, फेफड़ों की कमजोर व कब्जियत में लाभकारी तथा बलवर्द्धक है।
    देवदार्व्यारिष्ट : प्रमेह, वातरोग, ग्रहणी, अर्श, मूत्र, कृच्छ, दद्रु व कुष्ठ नाशक।

    पत्रांगासव : सब तरह के प्रदर रोग, गर्भाशय की शिथिलता, सोमरस, ज्वर, पांडू, सूजन मंदाग्नि, अरुचि आदि रोगों को दूर करता है। वेदनायुक्त रक्त प्रदर व श्वेत प्रदर पर लाभकारी।

    पिपल्यासव : मंदाग्नि, क्षय, कफ, खांसी, गुल्म, उदर रोग, ग्रहणी तथा अर्श नाशक। शोथ, यकृत व प्लीहा वृद्धि, ज्वर व अतिसार में लाभप्रद।

    पुनर्नवारिष्ट : शोथ (सूजन) रोग, उदर रोग, प्लीहा वृद्धि, यकृत, जिगर बढ़ना, अम्लपित्त गुल्म आदि रोगों को नष्ट करता है तथा अधिक पेशाब लाता है। शोथ, यकृत तथा गुर्दों को विशेष लाभकारी है।

    बबूलारिष्ट : रक्त विकार, अतिसार, खांसी, दमा, तपेदिक, बहुमूत्र, प्रमेह, प्रदर, उरक्षत, सोम रोग आदि में लाभकारी। छाती का दर्द, पेशाब में जलन व पीड़ा होना, धातु क्षय व सूखी खांसी में लाभकारी है।

    वासारिष्ट : पुरानी खाँसी, श्वास, रक्तपित्त, बुखार में खाँसी के साथ कफ और खून का निकलना, सूखी खाँसी, गले के रोग आदि रोगों में अत्यंत लाभकारी है।

    भृंगराजासव : धातु क्षय, कमजोरी, स्मरण शक्ति की कमी, नेत्र रोग, बालों का सफेद होना, प्रमेह, खाँसी आदि रोग नष्ट करता है। बलकारक व कामोद्दीपक है तथा बन्ध्यापन नष्ट करता है व खून साफ करता है।
    मुस्तकारिष्ट : अग्निमांद्य, संग्रहणी, अजीर्ण, अतिसार, आदि अनेक रोगों को नष्ट करता है तथा भूख बढ़ाता है।

    महामंजिष्ठाद्यरिष्ट : सब प्रकार के कुष्ठ रोग, खून की खराबियाँ, उपदंश (गर्मी), फोड़े-फुंसी चकत्ते आदि रोगों पर लाभकारी तथा चर्म रोग नष्ट करता है।

    रोहितकारिष्ट : तिल्ली, जिगर (लीवर), गुल्म (वायु गोला), अग्निमांद्य, पांडू, संग्रहणी आदि रोगों को दूर करता है। जिगर व तिल्ली के बढ़ जाने पर इसके उपयोग से विशेष लाभ होता है।

    लोध्रासव : कफ तथा पित्त जनक प्रमेह, पेशाब की जलन, मूत्राशय में दर्द, पेशाब के रास्ते में सूजन, प्रदर आदि स्त्रियों के रोगों पर विशेष लाभकारी है। गर्भाशय की शुद्धि करता है। पांडू, बवासीर, ग्रहणी, खांसी, चक्कर आना आदि नष्ट करता है।

    लोहासव : खून बढ़ाने की सुप्रसिद्ध औषधि। खून की कमी, पीलिया, गुल्म रोग, बवासीर, भगंदर संग्रहणी, बढ़े हुए जिगर और तिल्ली में विशेष लाभदायक है। दमा, खाँसी, क्षय, जीर्ण ज्वर, हृदय रोग आदि में लाभप्रद तथा बलवर्धक।

    विडंगारिष्ट व विडंगासव : सब प्रकार के पेट के कृमि (कीड़ों) को नष्ट करता है तथा भगंदर, गण्डमाला, गुल्म, अश्मीर, विद्रधि, कफ, खांसी, श्वास आदि रोगों में भी लाभदायक है।

    सारस्वतारिष्ट : बुद्धिवर्द्धक, आयु, वीर्य एवं कांतिवर्धक है। स्मरण शक्ति बढ़ाता है तथा मज्जान्तु हृदय व दिमाग को ताकत पहुँचाता है। मानसिक एवं शारीरिक दुर्बलता, आवाज भारी होना, नींद न आना, स्वर भंग, रुक-रुककर बोलना, (तोतलापन), हकलाना, कानों में तरह-तरह की आवाजों का होना, कम सुनाई देना आदि में अच्छा लाभ होता है। दिमागी काम करने वालों के लिए उत्तम ब्रेन टॉनिक है। उन्माद ऋतु दोष, वीर्य रोग, मूर्च्छा व अपस्मार को नष्ट करता है और बच्चों के तोतलेपन व मंदबुद्धि में लाभकारी।

    सरिवाद्यासव : खून साफ करने की प्रसिद्ध दवा है। यह खून और पित्त की खराबी को मिटाता है। फोड़ा-फुंसी, खाज-खुजली, चकत्ते, वातरक्त आदि रक्त विकार, सुजाक, भगंदर, हाथ-पैर, आँख, छाती की जलन, गठिया, आमवात, वात व्याधि सभी प्रकार के रक्त दोष उपद्रव, कब्जियत, रक्त संचार की अनियमितता आदि की उत्तम औषधि है।

    नोट : अधिकांश आसव-आरिष्ट 10 से 25 मिलीलीटर तक बराबर पानी मिलाकर भोजन करने के बाद दोनों समय पिए जाते हैं।

  • भाजपा जन स्वास्थ्य बढ़ाने में फेल – यश भारतीय 

    भाजपा जन स्वास्थ्य बढ़ाने में फेल – यश भारतीय 

    भोपाल,19 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) समाजवादी पार्टी मप्र युवजन सभा प्रदेश अध्यक्ष यश भारतीय ने आरोप लगाया है, भाजपा की केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर शासकीय स्वास्थ्य व्यवस्था चौपट करते हुए निजी और महंगी स्वास्थ्य सेवाओं को फायदा पहुंचाया है । भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल(बीएमएचआरसी) को पूरी तरह से बर्बाद किया, एम्स में भी व्यवस्था चौपट है ,राज्य चिकित्सालय के हालत ये है की मुख्यमंत्री एवं उनके मंत्री , बड़े अधिकारी सभी निजी स्वास्थ्य व्यवस्था पर ही विश्वास दिखाते है ।

    पूर्व में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री रहते दौरा कर चुके है एम्स का, जिसमे तमाम कमियां विधार्थियो ने बताई थी लेकिन वह आज भी वैसे की वैसे ही बनी हुई है, नए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मंडाविया जी के आने के बाद भी । एम्स में आज भी पूरी फैकल्टी नही है, न ही मरीजों को पूरा इलाज मिल रहा है और न ही विधार्थियो को सही चिकित्सा शिक्षा प्राप्त हो रही है ऐसे में बीएमएचआरसी को मेडिकल कॉलेज बनाने जैसी बातें साफ तौर पर बेमानी है । 

    राज्य चिकत्सा मंत्री विश्वास सारंग जी भोपाल में रहते हुए इतने लापरवाह है की हमीदिया अस्पताल,जय प्रकाश नारायण अस्पताल, काटजू अस्पताल की व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित  नही करवा पा रहे है । प्रदेश और राजधानी वासियों को अभी भी बच्चों के वार्ड में लगी आग का मंजर अभी भी भूले नहीं भूलता जिसमें न मुख्यमंत्री सक्रिय थे और न ही उनके मंत्री ।

    भाजपा के लोग केवल झूठे बयान,झ्ठे वादों से जनता को भ्रमित कर रहे है, आमजन की धार्मिक भावना उकसा कर सत्ता पर काबिज है। अब जनता इनसे इनकी ही योजना का हिसाब मांग रही है, वो चाहे कृषि कानून हो या अग्निवीर । भाजपा के लोग अपनी योजनाओं को ही सही तरीके से जनता को नही बता पाते क्योंकि तानाशाही तरीके से जनता के ऊपर निर्णय थोप दिए जा रहे है बिना किसी तैयारी के ,बिना किसी विरोधी दलों से चर्चा करते हुए ।

  • बीमा योजना से कर्मचारियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति बंद

    बीमा योजना से कर्मचारियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति बंद


    मंत्रि-परिषद के निर्णय 

    भोपाल,4 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमल नाथ की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना को लागू करने का निर्णय लिया गया। योजना से लगभग 12 लाख 55 हजार कर्मचारी/अधिकारी लाभांवित होंगे।बीमा योजना लागू होने से कर्मचारियों को दी जाने वाली चिकित्सा प्रतिपूर्ति की व्यवस्था बंद कर दी जाएगी।

    इस योजना का लाभ प्रदेश के सभी नियमित शासकीय कर्मचारी, सभी संविदा कर्मचारी, शिक्षक संवर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, नगर सैनिक, आकस्मिक निधि से वेतन पाने वाले पूर्ण कालिक कर्मचारियों और राज्य की स्वशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को मिलेगा। इसके अलावा निगम/मण्डलों में कार्यरत कर्मचारियों एवं अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के लिए योजना वैकल्पिक होगी।

    मुख्यमंत्री कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना में बाहय रोगी ओपीडी के रूप में प्रतिवर्ष 10 हजार रूपये तक का नि:शुल्क उपचार अथवा नि:शुल्क दवाओं का वितरण किया जाएगा। सामान्य उपचारों के लिए प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 5 लाख रूपये और गंभीर उपचारों के लिए 10 लाख रूपये तक की नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा प्राप्त होगी। दस लाख से अधिक के उपचार के लिए राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड द्वारा विशेष अनुमति दी जा सकेगी।

    मंत्रि-परिषद ने महिला-बाल विकास विभाग द्वारा शत-प्रतिशत सहायित भारत सरकार की योजना वन स्टाप सेन्टर को प्रदेश के 51 जिलों में संचालित एवं निरंतर रखने की मंजूरी दी। इसके लिये 560 नये पद सृजित करने की भी मंजूरी दी गयी।

    मंत्रियों का स्वेच्छानुदान अब एक करोड़

    मंत्रि-परिषद ने मंत्रियों की वार्षिक स्वेच्छानुदान की राशि 50 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ रूपये करने की मंजूरी दी। इसी प्रकार, राज्य मंत्रियों की वार्षिक स्वेच्छानुदान राशि को 35 लाख से बढ़ाकर 60 लाख किया गया है।