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  • यौन हमले का आरोपी बूटकॉम का प्रकाश गुप्ता फरार

    यौन हमले का आरोपी बूटकॉम का प्रकाश गुप्ता फरार


    लालगंज के माफिया परिवार से जुड़े गुप्ता पर यौन हमले के आरोप में पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज


    भोपाल, 23 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर). राजधानी के एमपीनगर में बूटकॉम सिस्टम्स नाम से दूकान चलाने वाले बदनाम व्यापारी प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ पुलिस ने नाबालिग बच्ची से यौन शोषण करने के आरोप में पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इस अपराध में प्रकाश चंद्र गुप्ता को जिंदा रहने तक जेल या फांसी की सजा हो सकती है। प्रकरण दर्ज करने के बाद से वह फरार है और पुलिस उसकी तलाश सरगर्मी से कर रही है।
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार धोखाधड़ी और जालसाजी से अरबों रुपयों की दौलत कमाने वाले कंप्यूटर व्यापारी प्रकाश चंद्र गुप्ता के पापों का घड़ा तेजी से भरता जा रहा है। अदालतों और पुलिस से सांठ गांठ करके लगातार तीस सालों तक सरेआम लूटमार करने वाला ठग प्रकाश चंद्र गुप्ता इस बार नाबालिग का यौन शोषण करने की वजह से पास्को एक्ट में फंस गया है। उसके खिलाफ राजधानी के अयोध्यानगर पुलिस थाने में विगत बीस जून को लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम 2012 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस थाना गोविंदपुरा में सब इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ दीपिका गौतम ने ये शिकायत दर्ज की है। पुलिस थाना अयोध्यानगर को बच्ची के विरुद्ध अपराध की शिकायत प्राप्त होने की वजह से कंट्रोल रूम ने उन्हें वहीं जाकर रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया था।
    फरियादिनी अपने माता पिता के साथ पुलिस थाने पहुंची थी और उसने बताया कि अयोध्या बायपास के कंफर्ट पार्क के मकान नंबर 9 में रहने वाले प्रकाश चंद्र गुप्ता ने उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न किया था जिसे वह दंडित करवाना चाहती है। पुलिस ने फरियादिनी की हस्तलिखित शिकायत पर प्रथम दृष्टया भादवि की धारा 354,354(क), 506, 9(एम),(एन)। 10 पास्को एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। बच्ची ने बताया कि उसके माता पिता के प्रकाश चंद्र गुप्ता के साथ पारिवारिक संबंध रहे हैं । मेरे माता पिता 18से 20 जुलाई 2015 को मेरी बड़ी बहन का एडमीशन दिल्ली विश्विद्यालय में करवाने गए थे इस दौरान उन्होंने उसे प्रकाश गुप्ता के घर छोड़ दिया था। मेरी मम्मी प्रकाश गुप्ता को राखी बांधती थी और पारिवारिक संबंधों की वजह से उन्होंने मुझे सुरक्षित माना था।

    बताते हैं गुप्ता ने सतगढ़ी में सात एकड़ जमीन खरीदी और एक एकड़ में जजों अफसरों की ऐशगाह बनाई है.


    बीस जुलाई 2015 को जब प्रकाश गुप्ता की पत्नी और बेटी ऊपर के कमरे में थे तब मैं खाना खाने के बाद नीचे के कमरे में बैठकर टीवी देख रही थी। टीवी देखते समय मेरी आंख लग गई। इसी दौरान प्रकाश गुप्ता ने आपत्तिजनक स्थिति में आकर मेरे शरीर से खिलवाड़ करना शुरु कर दिया। जब मैंने चिल्लाने की कोशिश की तो उसने मेरा मुंह दबा दिया और धमकाया कि यदि तूने किसी को बताने की कोशिश की तो मैं तुम्हारी मां और बड़ी बहन की हत्या कर दूंगा। इसके बाद जब मेरे माता पिता लौट आए तो उसके बाद भी प्रकाश गुप्ता मुझे जान से मारने की धमकी देता रहता था। मैं डर गई और इसी वजह से मैंने उस घटना के बारे में किसी को नहीं बताया।
    पीड़िता ने बताया कि मैंने इस तरह की घटनाओं के बारे में आनलाईन कई आलेख पढ़े । स्कूल में सैक्सुअल अवेयरनेस के कार्यक्रमों में भी लड़कियों को इस तरह के अपराधों के बारे में बताया गया। मी टू मूवमेंट किस तरह से समाज के काले चेहरे को उजागर करता है ये भी मालूम पड़ा। इससे मुझमें हिम्मत आई और मैंने उस घटना के बारे में अपने मम्मी पापा को जानकारी दी। मैं पुलिस के सामने सहायता की अपेक्षा करके हाजिर हुई हूं ताकि प्रकाश चंद गुप्ता जैसे भेड़ियों को कानून सम्मत सजा दिलवाई जा सके। अयोध्यानगर पुलिस ने दीपिका गौतम की आईडी थाने में न होने की वजह से प्रधान आरक्षक 2928 धर्मेन्द्र सिंह गुर्जर की आईडी से ये प्रकरण कायम किया है।
    गौरतलब है कि प्रकाश चंद्र गुप्ता के विरुद्ध राजधानी के पुलिस थानों में लगभग साढ़े तीन दशकों के दौरान कई आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं। कुछ प्रकरणों में तो उसे जेल भी भेजा गया है। इसके बावजूद बताते हैं कि वह अदालतों में वकीलों और जजों की सांठ गांठ से झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करके बच निकलता है। इस तरह के अपराधों से उसने और उसके सहयोगी वकीलों जजों ने अरबों रुपयों की दौलत एकत्रित कर ली है। सूत्र बताते हैं कि उसने कई गर्ल्स हास्टल भी चला रखे हैं जिनमें वह ऐसी लड़कियां रखता है जिन्हें कथित तौर पर जजों और पुलिस के अफसरों,नेताओं को गिफ्ट के तौर पर पेश किया जाता है। अपने अपराधों को छुपाने के लिए राजधानी में एक टीवी चैनल भी चला रखा है जिसका संचालन एक बड़े टीवी चैनल से निष्कासित पत्रकार करता है। वह और उसकी सहयोगी पत्रकार समाज के प्रभावशाली लोगों को पुरस्कार देकर इस आपराधिक कारोबार पर पर्दा डालने का काम करते हैं। भारतीय जनता पार्टी के एक स्वर्गवासी नेता के संरक्षण में वह करोड़ों रुपयों के ठेके लेता रहा है। पुलिस ने अपनी जांच में ऐसे कई बिंदुओं को भी शामिल किया है जिससे प्रकाश गुप्ता के अपराधों को उजागर किया जा सके और उसे दंडित किया जा सके। प्रकाश गुप्ता इन समय फरार है और उसने अपने अदालती संपर्कों के माध्यम से पुलिस पर दबाव बनाना शुरु कर दिया है।
    पास्को यानि प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रन फ्राम सेक्सुअल अफेंस एक्ट नाम का ये कानून 2012 में लाया गया था। इसमें बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर फैसला किया जाता है। ये कानून 18 साल से कम उम्र के लड़के और लड़कियों दोनों पर लागू होता है। पास्को कानून को 2019 में संशोधित करके मौत की सजा का भी प्रावधान कर दिया गया। इस कानून के तहत यदि आरोपी को उम्रकैद की सजा मिले तो वह जेल से जिंदा बाहर नहीं आ सकता।इसके अलावा दोषी व्यक्ति पर भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया जाता है। बच्चों के खिलाफ पोर्नोग्राफी करने वाले अपराधी को भी तीन से सात साल की जेल और जुर्माने की सजा से दंडित किया जाता है।

  • सिख कत्लेआम के आरोपी कमलनाथ जेल जाएंगेःसारंग

    सिख कत्लेआम के आरोपी कमलनाथ जेल जाएंगेःसारंग

    भोपाल,21मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 के सिखों के कत्लेआम के आरोपी कमलनाथ को जल्दी ही सजा पड़ जाएगी। सीबीआई कोर्ट में दूसरे अभियुक्त जगदीश टाईटलर के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत हो चुका है। प्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सांरग ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को लेकर कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया है कि क्या, कांग्रेस सिख दंगों के आरोपी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनाव लड़ेगी? यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में रविवार को पत्रकार-वार्ता के दौरान कही।


    श्री सारंग ने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि इस देश के इतिहास में 1984 का सिख कत्लेआम काले धब्बों में से एक है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्या के बाद कांग्रेस के नेताओं ने सिख भाई बहनों का कत्लेआम किया था। हजारों भाई बहन उस कत्लेआम में प्रभावित हुए थे। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह थी कि उस कत्लेआम में जिन्होंने भीड़ का नेतृत्व किया था वह कांग्रेस के नेता थे। विशेष रूप से दिल्ली में जो बड़े स्तर पर कत्लेआम किया गया था उसमें तीन कांग्रेस के नेताओं का हिस्सा लेना अलग अलग विषय पर सबूत के साथ जनता के सामने प्रस्तुत हुआ था। एक सज्जन कुमार दूसरे नं पर जगदीश टाईटलर और तीसरे कमलनाथ थे चौथे नेता इस दुनिया में नहीं हैं। यह तीन लोगों का नाम बहुत ही प्रमुखता से उस समय की घटनाओं में लिया गया था।

    नानावटी आयोग एवं जांच एजेंसी के कारण सज्जन जेल में, टाईटलर की बारी
    श्री सारंग ने कहा कि सन् 2000 के बाद इस पूरे विषय पर नानावटी आयोग ने जांच की और इसके बाद सीबीआई में यह मामला गया। परंतु वहीं दुर्भाग्य यह हुआ कि 2004 में कांग्रेस की सरकार आई और उसने इस मामले में लीपा-पोती कर दी और किसी दोषी पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। 2014 के बाद इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों ने काम किया और उसका परिणाम निकला कि सज्जन कुमार जेल में हैं और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। कल भी सीबीआई कोर्ट ने इस पूरे मामले में जिस दूसरे कांग्रेस के बड़े नेता का नाम आता है जगदीश टाईटलर का, उनके खिलाफ भी जार्चशीट प्रस्तुत की है और वो भी जल्द ही जेल में होंगे। तीसरा नाम कमलनाथ है, निश्चित ही आने वाले समय में जो इस पूरे मामले में दोषी हैं, उनपर भी कार्यवाही होगी ऐसी उम्मीद है। जांच एजेंसी अपना काम कर रही हैं।

    गवाहों की किताब में कमलनाथ का जिक्र
    उन्होंने कहा की जो बातें में तथ्य के रूप में बोल रहा हॅू। यह केवल हमने नहीं बोला अलग-अलग स्तर पर इस पूरे मामले में जो चश्मदीद गवाह हैं, उन्होंने भी विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग किताबों में इन दंगों को लेकर वास्तविकता का जिक्र किया है। श्री सारंग ने तत्कालीन क्राइम रिपोर्टर संजय सूरी की बात का जिक्र किया है कि उस दौरान वह गुरूद्वारा रकाबगंज में स्वयं उपस्थित थे। उस समय वहां 4-5 हजार की भीड़ का नेतृत्व कमलनाथ कर रहे थे और उन्होंने उस गुरूद्वारे में पानी की सेवा करने वालो को कमलनाथ के इशारे पर जिंदा जलाया गया था। इस बात का जिक्र एच.एस. फुल्का ने भी अपनी किताब में किया था।

    सिख समाज के विरोध के कारण कमलनाथ को पंजाब प्रभारी पद से हटाया
    कमलनाथ को लेकर सिख समाज में यह बात है कि उन्होंने इस समय सिख दंगों का नेतृत्व किया था। कमलनाथ को जब 2016 में पंजाब का प्रभारी बनाया गया था, तो इसी बात का विद्रोह पंजाब में हुआ था और कांग्रेस नेतृत्व को उन्हें तत्काल प्रभाव से प्रभारी के पद से हटाना पड़ा। उस समय यह बात स्थापित हुई थी कि यदि एक नेता सिख कत्लेआम का दोषी है तो फिर वह राजनीतिक क्षेत्र में काम कैसे कर सकता है। इसी तरह विगत दिनों इंदौर में एक बड़े कीर्तन करने वाले सिख संत मनप्रीत कनपुरिया जब इंदौर पहुंचे थे, तो उन्हांने भी इस चींज का विरोध किया था कि जो व्यक्ति सिख दंगों का दोषी है, वह सिख गुरूद्वारे में या सिख कीर्तन में, गुरू के प्रकाश पर्व में कैसे आ सकता है। यह सब बातें आज जनता के बीच में हैं, दो अभियुक्त जिनकों कांग्रेस सरकार ने 1984 से लेकर अभी तक बचाने का काम किया। चाहे वह सज्जन कुमार हों या जगदीश टाईटलर हों जांच एजेंसियों की तत्परता के कारण उनको सजा मिलना निश्चित हो चुका है। सज्जन कुमार जेल में हैं और और जगदीश टाईटलर को भी जल्दी जेल में जाना होगा, तीसरे अभियुक्त जो कि हर तरह से उनका नाम स्थापित हो चुका है कि वह सिख दंगों में शामिल थे, मैं कांग्रेस के नेतृत्व से यह पूछना चाहता हॅू कि जो सिख कत्लेआम का अभियुक्त है, जिन्होंने सिख कत्लेआम किया। क्या, उनके नेतृत्व में कांग्रेस मध्यप्रदेश विधानसभा का चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस को इस बात का जवाब देना होगा कि जो व्यक्ति सिख कत्लेआम में स्वयं सामने खड़े होकर सिखों के कत्लेआम का दोशी है, जिसके दामन पर सिख दंगों के दाग हैं, क्या वह कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष होने के लायक हैं।

    सिख समाज की उम्मीद तीसरे दोषी कमलनाथ को भी मिले सजा
    श्री सारंग ने कहा कि सिख परिवार इस बात की अपेक्षा करते हैं कि तीसरे अभियुक्त कमलनाथ ने सिख दंगों के समय भीड़ का उकसाने का काम किया था, उन्हें भी सजा मिले। जब हम सार्वजनिक क्षेत्र या राजनीतिक क्षेत्र में काम करते हैं तो किसी भी राजनीतिक दल का यह दायित्व है कि उसके किसी नेता पर इस प्रकार के कत्लेआम के दाग हैं, तो तुरंत प्रभाव से उनपर कार्यवाही होनी चाहिए। अगर कांग्रेस नेतृत्व कमलनाथ को पद से नहीं हटाता है, तो इससे यह स्पष्ट होता है कि उस समय के सिख कत्लेआम में कांग्रेस नेतृत्व का पूरा आशीर्वाद था और उसको करने के पीछे कांग्रेस नेतृत्व की मंशा थी। संपूर्ण देश का सिख समाज और पीड़ित परिवार वह इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि जल्द से जल्द कमलनाथ को भी इसकी सजा मिलेगी।

  • भूमाफिया से सुपारी लेने लगी इंदौर की पुलिस

    भूमाफिया से सुपारी लेने लगी इंदौर की पुलिस


    भोपाल,16 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पुलिस भी भू माफिया का गुर्गा बन सकती है ये पुलिस कमिश्नर प्रणाली के किसी पैरवीकोर ने कभी सोचा नहीं होगा। इंदौर की एक टाऊनशिप के नागरिक इन दिनों पुलिस की भूमिका को लेकर सशंकित हैं और उसकी माफियागिरी का तांडव झेल रहे हैं। माना ये जाता था कि राजस्व अधिकारी अक्सर दबाव में आकर माफिया की काली करतूतों के सामने सरेंडर कर देते हैं तो इन हालात से निपटने में पुलिस प्रभावी हो सकती है। इंदौर पुलिस की वर्तमान कारगुजारियों ने इन कयासों को धूल धूसरित कर दिया है।
    मामला सिल्वर स्प्रिंग्स, बायपास रोड, नायता मुंडला स्थित, सैकड़ों एकड़ में विस्तृत एकीकृत टाउनशिप का है। भूमाफिया ने इस पर अपना आधिपत्य बनाए रखने के लिए उसे अनेक टुकड़ों में बांट दिया है । टाऊनशिप के फेज़ 1 में हाल ही में उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ से मिले आदेश के बाद चुनाव हुए और बिल्डर का विधिवत सफाया हो गया ।टाऊनशिप के फेज़ 2 में रखरखाव के लिए गठित बिल्डर की कंपनी के सहयोगी संगठन की विशेष आमसभा में एकीकृत टाऊनशिप की संघर्ष समिति के वर्तमान अध्यक्ष आलोक जैन और एक अन्य रहवासी सुबोध गुप्ता के बीच मामूली धक्का मुक्की के बाद (1) हीरालाल जोशी (2) सुबोध गुप्ता,(3) अभय कटारे (4) विकास मल्होत्रा (5) सत्यम राठौर (6) ऋषभ विश्वकर्मा व अन्य बाहरी अनधिकृत व्यक्तियों (7) परमजीत सिंह (8) जीतू सोलंकी (9) देवेश्वर द्विवेदी (10) प्रयास द्विवेदी (11) नरेंद्र पाटीदार ने एक तयशुदा रणनीति बनाकर आलोक जैन के ऊपर घातक जानलेवा हमला कर दिया । इस घटना के बाद इन सभी लोगों ने पुलिस थाने में झूठे बयान देकर श्री जैन के ही विरुद्ध शिकायत जमा करा दी। विवाद टालने के लिए आलोक जैन ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। उन्होंने इस मामले को समाप्त समझ लिया। इस समझौते के बाद बिल्डर के गुर्गों ने श्री जैन को निष्कासित करने के लिए जाल बिछाना शुरु कर दिया । इस टाऊनशिप के बिल्डर डेवलपर के कंपनी सचिव नीलेश गुप्ता (12) ने एक पत्र के माध्यम ये कहना शुरु कर दिया कि आलोक जैन को निष्कासित कर दिया गया है। सुबोध गुप्ता की ओर से समिति अध्यक्ष श्री जैन को सोसायटी से बाहर करने संबंधी आवेदन कार्यालय में जमा कराया गया । तभी से ये सभी लोग श्री जैन को डराने धमकाने के निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
    मालूम हो कि सैकड़ों एकड़ में विस्तृत सिल्वर स्प्रिंग्स टाउनशिप के निदेशक अभिषेक झवेरी (13) और मुकेश झवेरी (14) ने सैकड़ों करोड़ रुपयों की शासकीय / रहवासियों की साझा धन संपत्ति पर अवैध कब्जा कर लिया है । रहवासियों के सभागार पर कब्ज़ा कर वहां चलाए जा रहे अवैध शराबखाने व अन्य संदिग्ध गतिविधियों को पुलिस की पहल पर ही बंद किया गया था । हालांकि बताया जाता है कि अभी भी खाली मकानों से बिल्डर और उसके सहयोगी (विपक्षी क्रमांक 1 से 11) अवैध अनैतिक गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं । एकीकृत टाउनशिप के बहुसंख्यक रहवासियों की एकमात्र प्रतिनिधि संगठन यह संघर्ष समिति शासन प्रशासन न्यायालय के हर स्तर पर बिल्डर डेवलपर की अनियमितताओं / गबन / घोटालों को चुनौती दे रही है ।
    WP 5586/2021 उच्च न्यायालय, इंदौर
    CC/114/2022 उपभोक्ता आयोग, इंदौर
    इसी से क्षुब्ध होकर बिल्डर व उसके नियमित कर्मचारियों / प्रायोजित प्रतिनिधियों (विपक्षी क्रमांक 1 से 14) द्वारा समिति के अध्यक्ष पर यह सुनियोजित-निर्धारित जानलेवा हमला किया गया । अन्य उपस्थित रहवासियों के हस्तक्षेप से कोई अनहोनी तो नहीं हो सकी,लेकिन विपक्षी क्रमांक 1 से 14 तक के लोगों से प्रार्थी समिति के अध्यक्ष श्री आलोक जैन व उनके परिवार को जानमाल का खतरा निरंतर बना हुआ है ।
    ज्ञातव्य है कि विपक्षी क्रमांक 3 अभय कटारे के विरुद्ध पहले ही अनेक आपराधिक प्रकरण विचाराधीन हैं. इस टाऊनशिप में भी यह व्यक्ति बिल्डर की ओर से कब्जा जमाने,अतिक्रमण करने, गबन करने और अवैध वसूली करने का काम संभालता है।इसके इशारे पर विपक्षी क्रमांक 1 हीरालाल (पप्पू) जोशी ने सरेआम श्री जैन को जान से मारने की धमकी भी दी है।वर्तमान में टाऊनशिप के सर्वेसर्वा सूत्रधार होने के कारण इन्हीं के पास पूरे घटनाक्रम के आडियो और वीडियो साक्ष्य सुरक्षित हैं । जो दो अन्य वीडियो पक्ष विपक्ष की ओर से प्रस्तुत किए गए वह सुश्री शीतल राय के मोबाइल से बनाए गए, जिसमें से बीच का गंभीर मारपीट / बलवा वाला हिस्सा संपादित कर छुपा दिया गया है ।ये वीडियो दिखाकर बिल्डर के गुर्गे पुलिस को गुमराह कर रहे हैं।

  • गोल्डन सिम के लिए धोखाधड़ी करने वाले धराए

    गोल्डन सिम के लिए धोखाधड़ी करने वाले धराए

    भोपाल, 17 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। थाना गोरखपुर में 15 मार्च को हरजिन्दर सिंह उम्र 53 वर्ष निवासी गुप्तेश्वर वार्ड गुडलक अपार्टमेंट के सामने महानद्दा गोरखपुर ने लिखित शिकायत की थी कि वह स्पेयर पार्टस की दुकान चलाता है। दो फरवरी 22 को एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा उसके साढू भाई हरविन्दर सिंह निवासी प्रेमनगर के मोबाइल में गोल्डन नम्बर सीरीज के लिये टेक्सट मैसेज भेजा गया। जिसमें गोल्डन नम्बर सीरीज के लिये 49 हजार 999 रूपये के आफर में मोबाइल में बात करने तथा व्हाटसएप मैसेज करने के लिये लिखा था। तब हरविंदर सिंह ने इस स्कीम के बारे में मुझे बताया था। हरविंदर सिंह से मेने वह नंबर लेकर उक्त मोबाइल नम्बर के धारक से कॉल एवं व्हाटसएप पर मैसेज से बात की। मोबाइल नम्बर के धारक ने स्वयं को एयरटेल का एजेन्ट बताया एवं एयरटेल के गोल्डन मोबाइल नम्बर 900000000 की सिम के एलाटमेंट के लिये व्हाटसएप में टेक्सट इन्वाइस भेजी। जिसमें अकाउण्ट नम्बर, आईएफएससी कोड देते हुये बैंक खाते नम्बर पर 41 हजार 300 रूपये पेमेण्ट करने के लिये कहा गया था। मेने एयू स्माल फायनेंस बैंक शाखा नेपियर टाउन के खाते से बताये गये बैंक खाते में पेमेण्ट कर दी गई। किंतु अभी तक मुझे गोल्‍डन सिम प्राप्‍त नहीं हुई और न ही मोबाईल धारक उसका फोन उठा रहा है। अज्ञात व्यक्ति द्वारा मेरे साथ 41 हजार 300 रूपये की धोखाधडी की गयी है। शिकायत पर अज्ञात मोबाइल धारक के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया गया।

    पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री सिद्धार्थ बहुगुणा ने घटित हुई घटना को गंभीरता से लेते हुये अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर दक्षिण/अपराध श्री गोपाल खाण्डेल के मार्गदर्शन में नगर पुलिस अधीक्षक गोरखपुर श्री आलोक शर्मा के नेतृत्व में थाना गोरखपुर, क्राइम ब्रांच एवं सायबर सेल की संयुक्त टीम गठित कर अज्ञात आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार करने के निर्देश दिए।

    विवेचना के दौरान ज्ञात हुआ कि भरतीपुर के रहने वाले अशोक तीरथानी के बैंक अकाउंट में शिकायतकर्ता का पैसा ट्रांसफर कराया गया है। जिस पर अशोक तीरथानी को अभिरक्षा में लेते हुये सघन पूछताछ की गयी तो उसने अपने मित्र दिलीप कुकरेजा तथा शुभम उर्फ शिवम राय के साथ कई बैंक अकाउंट खोलकर धोखाधडी का पैसा बैंक अकाउंट में ट्रांजैक्शन करना स्वीकार किया।

    टीम ने दिलीप कुकरेजा एवं शुभम राय को गिरफ्तार कर पूछताछ करने पर जानकारी प्राप्त हुई कि मुम्बई में रहने वाले रवि मिश्रा एवं राज के कहने पर शुभम राय ने जबलपुर शहर में कई लोगों के नाम से विभिन्न बैंकों में कई बैंक अकाउंट खुलवाये हैं। जिसमें रवि मिश्रा एवं राज एयरटेल कम्पनी का एजेंट बताकर लोगों को गोल्डन सिम प्रोवाईड कराने का लालच देकर अपने गिरोह के लोगों के खाते में पैसे ट्रांसफर कराते थे। इन पैसों में से शुभम राय अपना हिस्सा लेकर शेष राशि रवि मिश्रा को ट्रांसफर कर देता था। इस तरह शुभम राय ने अन्य लोगों को भी फर्जी खाता खोलने के लिए प्रेरित किया और 52 बैंक अकाउंट में लगभग तीन करोड रूपये का ट्रांजेक्शन कराया और अपने साथी रवि मिश्रा के साथ शेयर किया।

    आरोपी शुभम राय की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त 52 बैंक अकाउंट के ट्रांजेक्शन, सात नग एटीएम डेबिट कार्ड, एक पासबुक, दो चैक बुक, दो आधार कार्ड, एक पेनकार्ड, एक केवायसी फार्म, आठ मोबाईल फोन, एक स्कूटी जप्त की गयी है। आरोपीगण के बैंक खातो की जानकारी प्राप्त की गयी। जिसके अनुसार लगभग तीन करोड रुपये का धोखाधडी की गयी है। तीनों आरोपियों को प्रकरण में विधिवत गिरफ्तार करते हुये मान्नीय न्यायालय के समक्ष पेश करते हुये आरोपी शुभम राय को रिमाण्ड पर लिया जा रहा है।

    गिरोह का मुख्य आरोपी मुम्बई निवासी रवि मिश्रा मूलतः बिहार पटना का रहने वाला है। वह लोगों को मैसेज एवं काल करके एयरटेल कम्पनी का वीआईपी नम्बर/फैंसी नम्बर देने का लालच देकर पैसों की मांग करता था। शुभम राय जबलपुर में लोगों को प्रति खाता 1000 रुपये का लालच देकर उनसे खाते खुलवाकर चैक बुक, एटीएम अपने पास रख लेता था तथा उक्त खातों में जालसाजी का पैसा डलवाकर शुभम राय अपना हिस्सा रखने के बाद शेष रूपए रवि मिश्रा के अकाउंट में ट्रांसफर कर देता था।

    आरोपी शुभम राय, रवि मिश्रा का दोस्त है जो कि पहले मुम्बई में लगभग पांच साल वर्ष 2007-2012 तक फिल्म सिटी में साथ में काम कर चुका है। पूर्व में शुभम राय इसी प्रकार की जालसाजी में वर्ष 2017 में लखनउ उत्तर प्रदेश में पकड़ा जा चुका है। आरोपी शुभम राय ने महाराष्ट्र, तमिलनाडू, केरल के अलावा कई राज्यों में धोखाधडी करना स्वीकारा किया है। अभी तक की पूछताछ में लगभग 500 से ज्यादा व्यक्तियों के साथ धोखाधडी एवं लगभग 52 बैंक अकाउंट खुलवाने एवं उसमें लगभग तीन करोड रुपये के ट्रांजेक्शन की जानकारी प्राप्त हुई है।

  • राज्यपाल मंगूभाई पटेल बोले साईबर सुरक्षा की मजबूती अनिवार्य

    राज्यपाल मंगूभाई पटेल बोले साईबर सुरक्षा की मजबूती अनिवार्य

    सायबर क्राइम इंवेस्टिगेशन एवं इंटेलिजेंस समिट-2021 का समापन

    भोपाल01 अक्टूबर,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। तेजी से बदलती हुई दुनिया में भूमि, समुद्र, वायु और अंतरिक्ष के साथ ही सायबर डोमेन का भी व्‍यापक एवं महत्‍वपूर्ण स्‍थान हो गया है। इसके असीमित उपयोग की संभावना है। नवीन तकनीक के सदुपयोग से जहाँ आमजन लाभांवित हो रहे हैं वहीं असामाजिक तत्‍व इसके दुरूपयोग से विभिन्‍न अपराधों को भी अंजाम दे रहे हैं। इस तरह की समि‍ट सायबर सुरक्षा और अपराध नियंत्रण का प्रासंगिक और सराहनीय प्रयास है। उक्‍त उद्गार आज मध्‍यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी के सभागार में दस दिवसीय सायबर क्राइम एवं इंटेलिजेंस समिट-2021 के समापन अवसर पर मुख्‍य अतिथि‍ के रूप में मध्‍यप्रदेश के राज्‍यपाल मंगूभाई पटेल ने व्‍यक्‍त किए। उन्‍होंने कहा कि अर्थव्‍यवस्‍था डिजीटल, कैशलेस की ओर अग्रसर है अत: सायबर सुरक्षा की मजबूती अनिवार्य है। इंटरनेट का कल्‍याणकारी कार्यों में सदुपयोग हो। सभी राज्‍यों की सहभागिता तथा अंतर्राष्‍ट्रीय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन निश्चित ही सायबर सुरक्षा और सायबर अपराध नियंत्रण में सहायक होगा। राज्‍यपाल श्री पटेल ने विद्यालयीन/महाविद्यालयीन पाठ्यक्रम में भी सायबर सुरक्षा जागरूकता को शामिल करने की आवश्‍यकता बताई।

          पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कोविड काल में सायबर अपराधों में अत्‍यधिक बढ़ोत्‍तरी देखी गई। शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस तरह के अपराध घटित हुए हैं। इस समिट में सायबर अपराध के निराकरण/विवेचना/नियंत्रण हेतु अधिकतम प्रयास किए गए हैं। विशेषज्ञों और सहभागियों ने अपना ज्ञान और तकनीक साझा की। डीजीपी ने कहा कि ” समिट के प्रतिभागी इस दौरान प्राप्‍त ज्ञान को अपने सहकर्मी/अधीनस्‍थों से भी साझा कर प्रशिक्षित करेंगे ताकि इन अपराधों पर त्‍वरित कार्यवाही संभव हो।

          विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) श्रीमती अरूणा मोहन राव ने बताया कि समिट में तीन हजार से अधिक अधिकारियों ने सहभागिता की है। 56 से अधिक राष्‍ट्रीय/अंतर्राष्‍ट्रीय विषय विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्‍त हुआ है। सभी राज्‍यों में समन्‍वय और तकनीकी जानकारी का आदान-प्रदान त्‍वरित और प्रभावी कार्यवाही में सहयोगी होगा। उन्‍होंने कहा कि समिट आशानुकूल रही। समापन कार्यक्रम में यूनीसेफ की श्रीमती मारग्रेट ने भी सायबर क्राइम एंड द इम‍रजिंग टेक्‍नोलॉजी पर वर्चुअल संबोधन दिया।

    समिट के समापन अवसर पर अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक  प्रशिक्षण श्रीमती अनुराधा शंकर, पुलिस अकादमी के निदेशक राजेश चावला, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक सायबर सेल योगेश देशमुख, सेवानिवृत्‍त पुलिस महानिदेशक मध्‍यप्रदेश ऋषि कुमार शुक्‍ला व क्‍लीयर ट्रेल संस्‍था के वाईस प्रेसीडेंट मनोहर कटोच सहित समिट के आयोजन से जुड़ीं संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं अधिकारी  मौजूद थे। आभार प्रदर्शन उप निदेशक पुलिस अकादमी डॉ विनीत कपूर ने किया।

    समिट में मध्यप्रदेश सहित अन्‍य राज्‍यों के तीन हजार से अधिक पुलिस अधिकारियों ने सायबर क्राइम से निपटने एवं आधुनिक तरीकों से खुफिया जानकारी जुटाने की बारीकियाँ सीखीं।  इस समिट का आयो‍जन मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा सॉफ्ट क्लिक फाउंडेशन, यूनीसेफ व क्‍लीयर ट्रेल कम्‍यूनिकेशन एनालिटिक्‍स के सहयोग से किया गया। समिट में देश एवं दुनिया के विख्‍यात सायबर क्राइम व इंटेलीजेंस विशेषज्ञों द्वारा सायबर क्राइम रोकथाम के गुर सिखाए गए। इस समिट में ऑनलाइन गेमिंग और गेम्बलिंग, किप्टोकरेंसी और क्रिप्‍टो-ट्रेड अपराधों जैसे महत्वपूर्ण विषयों के साथ वित्तीय धोखाधडी, एन्क्रिप्टेड व्हीओआईपी संचार पर अपराध को हल करने, ड्रोन तकनीक इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और अन्य विषयों पर मंथन हुआ। यह समिट महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ होने वाले सायबर अपराध रोकने एवं पुलिस अधिकारियों की कार्य क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से भी आयोजित की गई थी।

  • जन संतोष हमारा दायित्वःविवेक जौहरी

    जन संतोष हमारा दायित्वःविवेक जौहरी

    महिला अपराध अनुसंधान कौशल उन्‍नयन विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्‍पन्‍न

    भोपाल, 23 सिंतबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर). पुलिस मुख्‍यालय में दो दिवसीय महिला अपराध अनुसंधान कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी के मुख्‍य आतिथ्‍य तथा जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश सुश्री गिरीबाला सिंह के विशेष आतिथ्‍य में संपन्‍न हुआ।

          डीजीपी श्री जौहरी ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि महिला अपराध की विवेचना तथा की जाने वाली कार्यवाहियों में संवेदनशीलता अत्‍यावश्‍यक है। पीडि़त के साथ सहानुभूति पूर्ण सद्व्‍यवहार करें। कानून की जानकारी अद्यतन (अपडेट) रखें। सर्वोच्‍च न्‍यायालय, उच्‍च न्‍यायालय के नवीन निर्णयों का अध्‍ययन करें। पीडि़ता को शासन द्वारा उपलब्‍ध कराई जा रही सहायता और सुविधाओं से सुविज्ञ रहें। प्रशिक्षण लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। जनअपेक्षाओं पर खरा उतरना हमारा दायित्‍व है, आदर्श पुलिसिंग करने का प्रयास करें।

          जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश सुश्री गिरीबाला सिंह ने कहा कि न्‍याय होने के साथ-साथ होता हुआ दिखना भी चाहिए। विवेचना में निष्‍पक्षता एवं तथ्‍यात्‍मक दृष्टिकोण होना चाहिए। पीडि़त पक्ष की शिकायत दर्ज करते समय पूर्वागृहों से पूर्णत: मुक्‍त रहें। पीडि़त की आस्‍था और विश्‍वास का केन्‍द्र आप ही होते हैं अत: अपने उत्‍तरदायित्‍व से पूरा न्‍याय करें। अनुसंधान में तथ्‍यों की स्‍पष्‍टता पर पूरा ध्‍यान दें। अपने काम का खुद ऑडिट करें तभी सकारात्‍मक परिवर्तन ला सकेंगें।

          अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक (महिला अपराध) श्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्‍तव ने बताया कि विगत दो वर्षों से पहला ऑफलाईन प्रशिक्षण कार्यक्रम रहा। जिसमें अच्‍छी सहभागिता रही है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का फीडबेक उप पुलिस अधीक्षक आशुतोष पटेल तथा निरीक्षक सुश्री ज्‍योति सिंह ने दिया। प्रशिक्षुओं में उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों में निरीक्षक सुश्री प्रियंका पाठक, उप पुलिस अधीक्षक संदीप मालवीय, सुश्री यशस्‍वी शिंदे, सुश्री कीर्ति बघेल तथा अनिल कुमार को अतिथियों द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।

  • क्रिप्टो करंसी के अपराधों पर पुलिस की नजर

    क्रिप्टो करंसी के अपराधों पर पुलिस की नजर

    साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एंड इंटेलिजेंस समिट 2021

    भोपाल, 23 सितंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। तीसरे दिन के उद्घाटन सत्र में उपस्थित पैनल मेंबर्स ने बताया कि कैसे क्रिप्टोकरेंसी और क्रिप्टो-लेन-देन ने साइबर अपराध परिदृश्य और डार्कवेब पर उनके उपयोग को प्रभावित किया है। इस सत्र का संचालन सहायक पुलिस महानिरीक्षक सायबर सेल रियाज इकबाल ने किया। इस सत्र में पुलिस महानिरीक्षक महाराष्‍ट्र पुलिस बृजेश सिंह, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक विशेष शाखा योगेश चौधरी और सायबर एक्सपर्ट जितेंद्र सिंह पैनलिस्ट के रूप में उपस्थित रहे। चर्चा में विभिन्न प्रकार के लेन-देन के हस्ताक्षर, आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले टर्म्स और शब्दावली, इंटरनेट पर क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग – डार्क वेब में ख़रीद फरोख्‍त से लेकर शुल्क और सेवाएं शामिल थे।

    दूसरा सत्र क्रिप्टोकरेंसी से सम्बंधित साइबर अपराध की जांच के इर्द-गिर्द रहा जिसमें इंटरनेट ऑडियंस ने कई सवाल पूछे। सत्र की अध्यक्षता अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक विशेष शाखा योगेश चौधरी ने की। श्री चौधरी ने क्रिप्टोकरेंसी से सम्बंधित एक केस पर चर्चा की जिसमें एक निवेशक के साथ लगभग एक करोड़ रुपये (136,000 अमरीकी डॉलर) की धोखाधड़ी की गई। इस धोखाधड़ी में पाकिस्तान, चीन और अन्य देशों में स्थित अपराधियों के बीच अंतर्राष्ट्रीय सांठ-गांठ पाई गई।

    अगले दो सत्र में भारतीय दृष्टिकोण से क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य पर विस्तृत चर्चा हुई। इन सत्रों को सीईओ वज़ीरएक्स निश्चल शेट्टी और कॉइनडीसीएक्स के संस्थापक और सीईओ सुमित गुप्ता ने संबोधित किया । सत्रों में ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी की प्रकृति और अन्य पहलुओं के बीच एक विकेन्द्रीकृत वित्तीय प्रणाली की खूबियों पर चर्चा की गई।

    अंतिम सत्र को अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षक संचार डेटा विशेषज्ञ, राष्ट्रीय साइबर अपराध कानून प्रवर्तन यूके पुलिस मार्क बेंटले ने संबोधित किया। यह सत्र क्रिप्टोकोरेंसी की जांच और डार्कवेब पर क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग से सम्बंधित रहा |

  • डीजीपी जौहरी बोले तो बेखौफ अपराधियों पर बरसी एमपी पुलिस

    डीजीपी जौहरी बोले तो बेखौफ अपराधियों पर बरसी एमपी पुलिस

    दो माह में 733 चिन्हित गुण्‍डों पर कार्यवाही, चार हजार से अधिक ईनामी बदमाशों की गिरफ्तारी

    भोपाल। पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी के नेतृत्‍व में विगत दो माह जून-जुलाई में प्रदेश की पुलिस ने गुण्‍डों-माफियाओं और आपराधिक तत्‍वों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही की है। डीजीपी ने अपने मैदानी अफसरों को निर्देश दिए थे कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रदेश में आपराधिक तत्‍वों का समूल सफाया करें और प्रदेश को अपराध मुक्‍त बनाने के लिये कार्य करें। समाज विरोधी गैर कानूनी गतिविधियों को अंजाम देने वाला व्‍यक्ति चाहे कितना भी रसूखदार हो, उसके विरूद्ध कानूनी कार्यवाही करें। संगठित अपराध करने वाले आपराधिक लोगों का सिंडीकेट तहस-नहस कर दें।

    कोविड- 19 अनलॉक की प्रक्रिया प्रारम्भ होने के बाद म.प्र. पुलिस द्वारा आधारभूत पुलिसिंग पर कार्य करना प्रारम्भ किया गया है। अपराध एवं अपराधियों पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से पुलिस महानिदेशक जौहरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करके ये विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। अभियान के दौरान प्रत्येक जिले में शीर्ष आपराधिक तत्वों को सूचीबद्ध कर उनके विरूद्ध उचित वैधानिक कार्यवाही करने के निर्देशों के फलस्वरूप 733 आपराधिक तत्वों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध 133 एनएसए, 350 जिला बदर एवं 140 धारा 110 द.प्र.सं. के प्रकरण पंजीबद्ध कर न्यायालय में प्रस्तुत किये गये।

    माह जून-2020 में चलाए गए विशेष अभियान में 1980 नई हिस्ट्रीशीट फाईल एवं 88 नई गैंग हिस्ट्रीशीटर फाईल तैयार की गई। माह जून-2020 में चलाए गए विशेष अभियान में 137 पैरोल पर छूटे अपराधियों की पैरोल निरस्त कराने की कार्यवाही की गई। माह जून-2020 में चलाए गए विशेष अभियान में संपत्ति संबंधी अपराधों के 2564 स्थाई वारंटी एवं 375 गिरफ्तारी वारंट तामील कराये गये। इसी प्रकार माह जुलाई में 3914 स्थाई वारण्ट एवं 477 गिरफ्तारी वारण्ट तामील कराने गये।

    विगत माहों में कुल 4386 ईनामी बदमाशों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त हुई। पोर्टल के माध्यम से वाहन चैकिंग एवं थानों में रखे वाहनों की सर्चिंग के दौरान माह जुलाई में 3,45,182 वाहनों को सर्च किया गया। जिसमें 228 अपराधियों से 251 चोरी के वाहन जप्त करने में सफलता प्राप्त की।

    गुम बालक/बालिकाओं की दस्तयाबी के लिए माह जुलाई में 1,628 बालक/बालिकाओं को दस्तयाब करने में सफलता प्राप्त की है। चिटफण्ड कंपनियों के विरूद्ध शिविर लगाकर शिकायतें प्राप्त कर निराकरण कराने के निर्देश दिये गये थे 275 प्रकरण कायम किये जाकर शिकायतों का निराकरण कराया जा रहा है। जिला रतलाम, कटनी, इंदौर एवं नीमच में निवेशकों के रूपये वापस कराने की अच्छी कार्यवाही की गई है। करोड़ों रुपये आवेदकों को दिलाए गए। बदमाशों द्वारा अवैध तरीके से अर्जित की गई सम्पत्ति एवं शासकीय जमीनों पर अतिक्रमण करने के मामलों में इन सम्‍पत्तियों को नष्ट करना एवं शासकीय जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। इसी तरह जिला इंदौर, भोपाल में भू-माफियाओं के विरुद्ध भी प्रभावी कार्यवाही की गई है।