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  • राम सीता की तरह समर्पित युवाओं को हमारा शुभाशीष बोले किशन सूर्यवंशी

    राम सीता की तरह समर्पित युवाओं को हमारा शुभाशीष बोले किशन सूर्यवंशी

    अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन परिचय सम्मेलन का शुभारंभ

    विदेशों से आए युवाओं ने कहा हमें संस्कारित जीवनसाथी चाहिेए,दो दिन चलेगी परिचय की बेला

    भोपाल,03 दिसंबर,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर ).नगर निगम भोपाल में सभापति किशन सूर्यवंशी का कहना है कि जिस तरह भगवान राम और माता सीता की जोड़ी आदर्श मानी जाती है उसी तरह भारतीय संस्कृति में संस्कारित युवा भी हमारे आदर्श हैं। चाहे परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हों जीवनसाथी का हाथ पकड़कर चलने वाले युवाओं को हम ह्दय से आशीर्वाद देते हैं और उनके सफल जीवन की कामना करते हैं। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन समाज के परिचय सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर पहुंचे श्री सूर्यवंशी ने कहा कि जैन संतों की त्याग और तपस्या की आराधना करने वाला जैन समाज अपने नवाचारों के लिए पहचाना जाता है। जैन समाज ने परिचय की श्रंखला शुरु करके युवाओं की बड़ी समस्या का समाधान खोज निकाला है। इस परंपरा का अनुकरण समाज के हर तबके को करना चाहिए।

     परिचय सम्मेलन का आज राजधानी भोपाल में भव्य शुभारंभ हुआ। देश विदेश और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए युवाओं ने इस प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन में अपने जीवन साथी की तलाश करते हुए परिचय की प्रक्रिया शुरु कर दी है। ये आयोजन आज और कल दो दिन चलेगा। रविवार को अवकाश होने और भोपाल में आज गैस त्रासदी दिवस पर स्थानीय अवकाश होने से आयोजन स्थल पर खासी चहल पहल देखी जा रही है।सकल दिगंबर जैन समाज भोपाल का ये आयोजन तात्याटोपे नगर खेल परिसर के नजदीक श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर,स्मार्ट सिटी,टिन शेड भोपाल में चल रहा है।इस अवसर पर प्रकाशित चयन पत्रिका के विमोचन के अवसर पर श्री सूर्यवंशी के साथ पूर्व आईएएस श्री सुरेश जैन,पूर्व आईपीएस श्री आर.के.दिवाकर भी उपस्थित थे।सभी अतिथियों का शाल और श्रीफल से अभिनंदन भी किया गया।

        श्री सूर्यवंशी ने कहा कि आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो.एन.सी.जैन कॉलेज में उनके शिक्षक रहे हैं।उनके दिए संस्कारों ने हमारी जीवनराह प्रशस्त की है। वे अब जैन युवक युवतियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।जाहिर है कि उनके मार्गदर्शन में हो रहा ये परिचय सम्मेलन समाज में नए प्रतिमान गढ़ेगा। उन्होंने कहा कि आमतौर पर शादियों को व्यक्तिगत आयोजन माना जाता है लेकिन ऐसे कुशल मार्गदर्शन में जुड़ने वाले परिवार, समाज का ताना बाना मजबूत करते हैं। ये परिचय सम्मेलन जिस तरह के संस्कार लेकर चल रहा है उसे देखकर मुझे पूरा विश्वास है कि यहां भगवान राम और माता सीता की तरह आदर्श जोड़ियां ही बनेंगी।इस तरह के आदर्श परिवार गढ़ने वाले समाजसेवी भी निश्चित रूप से आदर के पात्र हैं। समाज में बंधुत्व फैलाने वाला यह सम्मेलन नित नई ऊंचाईयां छुए हम यही कामना करते हैं।

    परिचय सम्मेलन में आज युवक युवतियों के बायोडाटा वाली चयन पत्रिका का विमोचन किया गया.

        आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो.डॉ.एन.सी.जैन ने बताया कि इस आयोजन में विदेशों में कारोबार और नौकरी करने वाले युवाओं ने अब तक की सर्वाधिक भागीदारी दर्ज कराई है। मध्यप्रदेश के भी विभिन्न इलाकों से युवाओं ने अपना बायोडाटा भेजकर स्वयं को उत्कृष्ट जीवनसाथी के रूप में रेखांकित किया है। युवाओं के बायोडाटा वाली परिचय पत्रिका में जिन युवाओं ने अपनी प्रविष्टियां भेजी हैं वे सभी ऊंची पढ़ाई करके सफल नागरिक के रूप में स्थापित हो चुके हैं। कई तो देश विदेश के प्रख्यात डॉक्टर,इंजीनियर और विदेशों में कारोबार करने वाले उद्यमी हैं। युवाओं का कहना है कि हम विदेशी मुद्रा भारत भेजते हैं लेकिन हमें भारतीय संस्कृति में पले बढ़े जीवनसाथी ही चाहिए।

         राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में बसे जैन कारोबारी और नागरिक इस आयोजन की व्यवस्था संभाल रहे हैं। आगंतुकों के ठहरने, भोजन और अमानती सामानगृह रखने की व्यवस्था टिन शेड जैन मंदिर में की गई है। कई आगंतुक शहर के होटलों में और रिश्तेदारों के घरों पर भी रुके हुए हैं। आयोजन स्थल पर युवाओं का मेला सा लगा हुआ है।युवा लड़के और लड़कियां अपने परिजनों के साथ परिचय के इस दौर में शामिल हैं। रिश्तेदारों के सहयोग से युवाओं के व्यक्तित्व,पारिवारिक पृष्ठभूमि, कारोबारी उपलब्धियों,और युवाओं के भावी जीवन के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

    कोषाध्यक्ष प्रो.डॉ.विजय जैन ने बताया कि हमें इस बार पत्रिका के लिए 1624 प्रविष्टियां मिली हैं।युवाओं के बायोडाटा का प्रारंभिक विश्लेषण करने पर पाया गया कि डॉक्टर युवक 36 युवती 41,इंजीनियर युवक 298 युवती 189,प्रोफे/एडवोकेट युवक 17 युवती 14,सी ए/सी एस युवक 28 युवती 30 ,Govt युवक 21 प्राइवेट नौकरियां करने वाले युवक 99 युवती 146 ,व्यवसाय करने वाले युवक 318 युवती 39 ,अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार या नौकरी करने वाले युवक 20, युवती 12, व अन्य युवती 198 से अधिक हैं। परिचय की पत्रिका प्रकाशन होने के बाद आयोजन स्थल तक पहुंचने वाले इससे भी अधिक युवाओं की भागीदारी भी देखी जा रही है। पत्रिका में प्रकाशन के बाद भी जिन युवक युवतियों की जानकारियां प्राप्त हो रहीं हैं उऩ्हें अब आन लाईन जारी किया जाएगा। जो युवा अपनी प्रविष्टियां समय सीमा में नहीं भेज पाए हैं उनके लिए परिचय सम्मेलन का आयोजन एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है।

    आयोजन की व्यवस्था संभाल रहे मुख्य संयोजक अनिल जैन नयापुरा ने बताया कि पिछले 27 साल से जैन समाज के युवाओं के परिवार बसा रहे समिति सदस्यों ने इस बार कई तकनीकी सुधार किए हैं। चयन पत्रिका में युवाओं की सहूलियत के लिए रिश्तों को व्यवसायगत आधार पर पहले से छांट दिया गया है।ये सम्मेलन समाज का है इसे किसी व्यक्ति की बपौती नहीं बनाया जा सकेगा। हम आयोजन के पूरे आय व्यय का ब्यौरा शीघ्र ही सार्वजनिक कर देंगे। भविष्य में युवाओं के लिए और क्या सुविधाएं दिला सकते हैं इस पर भी विचार किया जाएगा।

       अ भा दि जैन परिचय सम्मेलन में 3 व 4 दिसम्बर में ऑनलाइन जुड़ने के लिए फेस बुक लाइव https://m.facebook.com/100086714492304/

    और you tube channel पर लाइव देखे https://youtube.com/@muktajain

    प्रवक्ता आलोक सिंघई ने बताया कि आयोजन में अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ.एन.सी.जैन,कार्याध्यक्ष और जैन समाज की सबसे पुरानी चौक जैन मंदिर कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री मनोज जैन बांगा,मुख्य संयोजक श्री अनिल जैन नयापुरा,स्वागताध्यक्ष और चौक मंदिर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष श्री अशोक जैन पंचरत्न,इंजी.वीरेन्द्र जैन मंदाकिनी, श्री धीरेन्द्र जैन निवेश नगर, महामंत्री इंजी.राकेश लहरी,महामंत्री श्री जिनेन्द्र जैन, जैन रोडवेज, महामंत्री श्री चक्रेश शास्त्री, प्रधान संपादक मुकेश चौधरी,कोषाध्यक्ष प्रो.डॉ.विजय कुमार जैन,सह कोषाध्यक्ष श्री विनोद जैन भिंड, मीडिया प्रभारी श्री अखिलेश सेठी,संपादक प्रो.डॉ.प्रसन्न जैन,श्री विकास जैन(नितिन),त्रिशला महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती विजय लक्ष्मी भारिल्ल,श्री आलोक जैन मेरठ,इंजी.सुरेश जैन, राजेन्द्र जैन(शाहगढ़), विकास गोधा, सेठ कमल टड़ैया, अमन जैन काला, निशंक जैन, समेत कई अन्य पदाधिकारी और देश विदेश से आए जैन युवाओं के अभिभावकगण भी उपस्थित थे।

  • त्रिशला महिला मंडल की कव्वाली ने देव दर्शन सिखाया

    त्रिशला महिला मंडल की कव्वाली ने देव दर्शन सिखाया


    अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन परिचय सम्मेलन भोपाल

    भोपाल,3 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर )। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन परिचय सम्मेलन के पहले दिन आज शाम को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने देश विदेश से आए युवाओं में उमंग और उल्लास का संचार कर दिया।आयोजन स्थल और सुदूर देशों में बैठे युवाओं के रिश्तेदारों ने भी इस कार्यक्रम का आनंद लिया।यह प्रस्तुति आयोजन की व्यवस्था संभाल रही त्रिशला महिला मंडल की ओर से दी गई थी।
    त्रिशला महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती विजय लक्ष्मी भारिल्ल ने बताया कि लगभग एक महीने से आयोजन की व्यवस्थाओं में जुड़ी महिलाओं और युवतियों ने अपने कार्य के बीच समय निकालकर ये प्रस्तुतियां तैयार की थीं।इन कार्यक्रमों को जिस खूबसूरती के साथ लड़ी में पिरोया गया था उससे परिचय सम्मेलन में आए युवा भी आल्हादित हो उठे।
    आयोजन की व्यवस्थाएं संभाल रही गुणाली जैन ने …रेशम की है डोरी.. नृत्य से सभी का मन मोह लिया। एक नृत्य ….बड़े बाबा मेरे आदिनाथ…की प्रस्तुति से सुश्री शिवाली जैन ने पंडाल में मौजूद लोगों को भाव विभोर कर दिया। श्रीमती आरती जैन और नितिका ने जय हो रामेश्वरा नृत्य प्रस्तुत करके ओज भरा माहौल निर्मित कर दिया। मनस्वी जैन ने नमोकार मंत्र है प्यारा से जैन सांस्कृतिक चेतना का उद्घोष किया। इस बीच मंच संचालन में सहयोग दे रहे प्रसन्न जैन ने चुटकुले सुनाकर लोगों को लोटपोट कर दिया।
    त्रिशला महिला मंडल की सदस्य महिलाओं के बच्चों ने हम याद करें सती ब्राह्मी भजन पर भावपूर्ण प्रस्तुति दी। श्रीमती सोना विमित जैन ने बुंदेलखंडी विदाई गीत गाकर युवक युवतियों और उनके अभिभावकों की आंखें नम कर दीं। बुंदेलखंडी परिवेश में कन्या के जन्म से लेकर विदाई तक के विभिन्न पहलुओं को उन्होंने ढपली बजाकर बहुत सुंदर अंदाज में प्रस्तुत किया। श्रीमती आरती, नितिका, प्रिया और नेहा जी ने एक समूह नृत्य करके पनघट की संस्कृति को मनोहारी अंदाज में प्रस्तुत किया। नयापुरा जैन मंदिर से जुड़ी त्रिशला महिला मंडल की सदस्यों ने लुक छुप न जाओ जी की प्रस्तुति दी।
    त्रिशला महिला मंडल की सदस्यों ने अरे माता बहनों जरा ये तो बता दो कि मंदिर में श्रंगार भला किसलिए है कव्वाली गाकर जैन समाज में नियमित दर्शन जाने की प्रेरणा दी। उन्होंने मंदिर को ध्यान स्थल बताते हुए यहां होने वाली लापरवाहियों को भी रेखांकित किया। महिलाओं ने बताया कि मंदिर में जाकर शास्त्र पढ़े जाते हैं , कुछ लोग जिस तरह मंहगे वस्त्रों, आभूषणों के प्रदर्शन तक स्वयं को सीमित कर लेते हैं वह जैन आगम में भी निषिद्ध है और स्वयं के व्यक्तित्व विकास में भी बाधक होता है। कव्वाली के व्यंगात्मक लहजे के बीच उन्होंने बताया कि जैन धर्म ईश्वर के दर्शन और आराधना से अपनी इंद्रियों पर विजय का मार्ग प्रशस्त करना सिखाता है।
    अनुशासन ग्रुप की छात्राओं ने लव जिहाद नाटक की प्रस्तुति देकर जैन युवक युवतियों को जीवन साथी के चयन में सावधानी बरतने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि जो युवक युवतियां जवानी के उल्लास में पथ भ्रष्ट हो जाते हैं और अपने माता पिता का मार्गदर्शन ठुकरा देते हैं उन्हें कई अप्रिय परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ये सभी छात्राएं विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से अपना जीवन संवारने का प्रयास कर रहीं हैं।
    नाटिका की लेखक और निर्देशक सुश्री प्राची जैन ने बताया कि लव जिहाद बनाम चक्रवर्ती विवाह नामक इस लघु नाटिका के माध्यम से हमने दो परिवारों के संस्कारों के अंतर को समझाने का प्रयास किया है। एक जैन परिवार है जिसमें माता पिता की परवरिश और जैन संस्कारों के महत्व को रेखांकित किया गया है। जबकि दूसरे परिवार में एक पथ भ्रष्ट विजातीय परिवार है जिसके सदस्य अपनी चालबाजियों से धार्मिक ग्रंथों की आड़ में अनाचार और धोखाघड़ी करते हैं।
    उन्होंने कहा कि हम भारत के लोग अल्लाह ईशु सबको मानते हैं। कोई धर्म बुरा नहीं है जरूरत है कि हम अच्छाई और बुराई के मर्म को पहचानें। अनुशासन समूह की छात्राओं का यह संदेश महिला सशक्तिकरण में नई पीढ़ी की भूमिका को संबल प्रदान करता है। छात्राओं ने देश की जैन लड़कियों को नाटिका के माध्यम से संदेश देने का प्रयास किया है कि ….नहीं बचे अब देश में कोई ,लव जिहाद का भोगी। हर बेटे बेटी की शादी ,चक्रवर्ती विवाह से होगी।

  • सूरज रे जलते रहना

    सूरज रे जलते रहना


    प्रिय युवा साथियो
    दिगंबर जैन समाज की नई पीढ़ी के युवक युवतियों का परिचय सम्मेलन में स्वागत करते हुए हमें बहुत प्रसन्नता हो रही है। जो बच्चे हमारे देखते देखते दुनिया में आए वे आज विभिन्न क्षेत्रों में अपना परचम फहरा रहे हैं। हमें साल दर साल उनके लिए योग्य जीवनसाथी तलाशने का अवसर मिला है। अपने हिस्््से में आए इस पवित्र कार्य के लिए हम स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस करते हैं। जो बात कुछ समय से मन को बैचेन कर रही है वह ये कि आज के युवाओं में अहम और संवादहीनता की वजह से परिवार के प्रति श्रद्धा का भाव घट रहा है। उनमें परिवार की गाड़ी को पटरियों पर चलाने का धैर्य कम होता जा रहा है। उपभोक्तावाद ने माईक्रोफैमिली बनाने की जो मुहिम छेड़ रखी है उसकी वजह से परिवार टूट रहे हैं। कहा जाता है ….सा विद्या या विमुक्तये…यानि विद्या वो जो मुक्ति प्रदान करती हो। जाहिर है कि ज्ञान के प्रसार के बाद बंधनों से आजादी की ललक परवान चढ़ती ही है। आज युवतियां जाति,राष्ट्रवाद और पुरुषवाद के घेरे से आजादी की तरफ भाग रहीं हैं । वे पितृसत्ता की गुलामी से आजादी की ओर भी भाग रहीं हैं।उन्हें कानून से मिले अधिकार बहुत लुभा रहे हैं। इन सबके बीच वे अपना कर्तव्यबोध भूल चली हैं।युवा लड़के परिवार की जिम्मेदारियों से बचने का हुनर तलाश रहे हैं। इन सब विकृतियों का कारण वोट की राजनीति के लिए परिवारवादी चिंतन को बढ़ावा देना रहा है। हमारी सामाजिक गतिविधियां भी व्यक्तिवाद के इर्द गिर्द सिमटी रहीं हैं। लोगों ने सामाजिक गतिविधियों को किन्हीं परिवार या व्यक्ति की बपौती बताना शुरु कर दिया।संस्थाओं में किसी व्यक्ति के नाम का लेबल लगाकर भरपूर अनियमितताएं की जाती हैं। गड़बड़ियों को छुपाने के लिए धर्म या धर्म गुरुओं के नाम की आड़ ले ली जाती है। फर्जी बिल लगाकर सामाजिक गतिविधियों को इस तरह एहसान थोपते हुए अंजाम दिया जाता है मानों वे महान दानी और भामाशाह हों। ये सब गतिविधियां युवा मन बड़ी जल्दी पकड़ लेता है। इसके बाद अनैतिकता के विचार धीरे धीरे अपनी जगह बनाने लगते हैं। नई पीढ़ी बराबरी चाहती है सौंदर्य चाहती है, प्रेम चाहती है यहां तक तो ठीक है लेकिन वह इसके लिए जब गैर जिम्मेदार हो जाती है तो निंदनीय हो जाती है। समाज को सुंदर और न्यायप्रिय बनाने के लिए विद्रोह जरूरी है। समाज को ढर्रे से आजाद करना जरूरी है। इंसानियत तभी खूबसूरत बनेगी जब हम गलत बातों का प्रतिकार करेंगे। परिवार के दायरे को आगे बढ़ाकर जब राष्ट्र और विश्व के स्तर पर ले जाया जाता है तभी चिंतन की व्यापकता सार्थक होती है। हमें सोचना होगा कि हम व्यापक तो हों पर धरातल पर भी अपने पैर जमाए रख सकें । युवाओं का एक बड़ा वर्ग अधिकार की आड़ में सब कुछ मुफ्त हड़पने की नियत रखता है। सामाजिक नियंत्रण और दंड विधान की निष्क्रियता या अक्षमता वजह से इस पाखंड को कई बार प्रश्रय भी मिल जाता है। इसके बावजूद दूरगामी परिणाम विषदायी साबित होते हैं। युवाओं को समझना होगा कि वे अपने जीवनसाथी का आकलन पैकेज के आधार पर नहीं बल्कि व्यक्तित्व की व्यापकता के आधार पर करें। जब वे आत्मनिर्भर सोच से निर्णय करेंगे तो फिर उन्हें हताशा नहीं होगी। जैन समाज को जागरूक माना जाता है। उसके ऊपर बड़ी जिम्मेदारी भी है। आईए हम प्रयास करें कि हमारे परिवार आदर्श बनें, हम समाज के उन घरों का अंधेरा दूर कर सकें जिनके घरों को दीपक भी मुश्किल से नसीब होता हो। जगत कल्याण के लिए हमें सूरज बनकर निरंतर जलते रहना होगा।
    निवेदक
    आभा जैन गोहिल,
    त्रिशला महिला मंडल,9424966247