Category: राज्य मंत्रालय

  • सैडमैप में ठगों का जंजाल काटने से क्यों तिलमिलाए कोठारी

    सैडमैप में ठगों का जंजाल काटने से क्यों तिलमिलाए कोठारी


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के पूंजी निर्माण अनुष्ठान से मक्कारी का तिलिस्म रचने वाला कांग्रेस का कैडर बौखलाया हुआ है। कल्याणकारी राज्य की अवधारणा तले काली अर्थव्यवस्था निर्मित करने का जो पाप नेहरू इंदिरा परिवार ने शुरु किया था उसके वंशज राहुल गांधी कुतर्कों से उसे सही साबित करने का प्रयास कर रहे हैं। सैडमैप जैसे स्वायत्तशासी निकाय के माध्यम से भाजपा सरकार ने पूंजी निर्माण और रोजगार सृजन का अभियान शुरु किया था। इसे ध्वस्त करने के लिए कांग्रेसियों के सुर में सुर मिलाकर सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग के वर्तमान सचिव नवनीत कोठारी ने जो षड़यंत्र रचा वह आज उनके जी का जंजाल बन गया है।डाक्टर मोहन यादव सरकार ने माफिया के इशारे पर सैडमैप की कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई को निलंबित करने के मामले को गंभीरता से लिया है। इससे सचिव नवनीत कोठारी अलग थलग पड़ गए हैं। उनके प्रशासनिक इतिहास की स्याह परतें भी खुलनी शुरु हो गईं हैं। आयुष विभाग के उनके इतिहास से भी इस कहानी को जोड़कर देखा जा रहा है।


    कंपनी सेक्रेटरी श्रीमती अनुराधा सिंघई को जब सैडमैप की कमान सौंपी गई थी तब सरकार के संरक्षण में चलने वाला ये निकाय भारी घाटे से जूझ रहा था। यहां के कर्मचारियों को लगभग दस महीनों से तनख्वाह नहीं मिल पा रही थी। ये निकाय सरकारी नहीं है इसलिए वेतन का भुगतान भी इसे अपने ही प्रशासनिक प्रबंधन से करना था। प्रबंधन में दखल रखने वाला कंप्यूटर प्रोग्रामर राजेन्द्र देवीदास मांडवकर झूठे दस्तावेज रचने में कुशलता के कारण मैनपावर विभाग का नोडल अधिकारी बन बैठा था। खुद की काली कमाई छुपाने के लिए इसने कभी अपनी वार्षिक संपत्ति का ब्यौरा प्रस्तुत नहीं किया।बेरोजगारों को नौकरी दिलाने के नाम पर ये दो महीने की तनख्वाह रिश्वत के रूप में वसूल करता था।संस्थान को मिलने वाला दस फीसदी सेवा शुल्क वह रिकार्ड पर नहीं लेता था ।रतन इंपोरियम के संचालक रमनवीर अरोरा और सुरभि सिक्योरिटीज के अरुण शर्मा को वह कई बार इसमें से आठ प्रतिशत तक रिश्वत दे देता था। ये दोनों एजेंसियां फर्जी दरवाजे से सैडमैप में दाखिल कराई गईं थीं। रमन अरोरा कांग्रेस के नेता अजय सिंह राहुल के निजी होटल का संचालक भी है। इन दिनों उसने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एक मंच का पद भी खरीद रखा है। जिन एजेंसियों को वैधानिक तौर पर सूचीबद्ध नहीं किया गया था उनके माध्यम से ही लगभग अस्सी फीसदी व्यवसाय कराया जा रहा था। जिन्हें नौकरी पर भेजा जाता था वे कर्मचारी उनके पेरोल पर नहीं थे और उनका वेतन ,पीएफ, ईएसआईसी आदि नहीं भरा जा रहा था। ये एजेंसियां जीएसटी का भुगतान भी नहीं कर रहीं थीं । आरजीएसवाई पंचायत में 1141 पदों पर भर्ती के लिए आर डी मांडवकर ने प्रति पद पचास हजार रुपए रिश्वत लेकर नौकरी दिलाने का अनुबंध किया था। इससे वह लगभग 57 करोड़ रुपए की काली कमाई होने का अनुमान लगा रहा था। बताते हैं कि इसीलिए गिरोह के सदस्यों ने सचिव नवनीत कोठारी को कथित तौर पर पांच करोड़ रुपयों की रिश्वत देकर ईडी अनुराधा सिंघई को निलंबित करके पद से हटाने का सौदा कर लिया। उनका अभी दो साल का कार्यकाल शेष है जाहिर है कि उनके रहते ये गड़बड़झाला संभव नहीं था।


    मांडवकर गिरोह के कुप्रबंधन का तरीका ये था कि आऊटसोर्स कर्मचारियों का वेतन, पीएफ और ईएसआईसी गड़प लिया जाता था। सैडमैप को दस फीसदी सेवा शुल्क मिलता था लेकिन वह पंद्रह प्रतिशत से अधिक राशि इस पर खर्च कर देता था। इससे संस्थान लगातार घाटे की घाटी पर लुढ़कता रहा। अनुराधा सिंघई ने जिन चार्टर्ड एकाऊंटेंटों को इस मामले की जांच में लगाया उन्होंने फोरेंसिक आडिट करके भ्रष्टाचार के ठोस सबूत उजागर कर दिए। पंचायत पदों की भर्ती के लिए एमपी आनलाईन से आवेदन बुलाए गए, शर्त लगाई गई कि नौकरी के लिए उन्होंने किसे रिश्वत दी है। इससे मांडवकर का घोटाला सामने आ गया। श्रीमती सिंघई ने जान से मारने की धमकी देने वाले जिन शरद मिश्रा,मनोज शर्मा, रमनवीर अरोरा, अनिल श्रीवास्तव, प्रशांत श्रीवास्तव, अनम इब्राहिम, राजेश मिश्रा और उनके जिन सहयोगियों के नाम पुलिस को दिए उनमें मांडवकर का भी नाम शामिल है।


    सैडमैप का ही ट्रेनिंग फेकल्टी शरद मिश्रा भी फोरेंसिक आडिट से ही पकड़ा गया। इसने एजेंसियों को पांच करोड़ चौबीस लाख उनतीस हजार सात सौ अड़तालीस रुपयों के भुगतान में से लगभग तीन करोड़ रुपए बगैर भुगतान विवरण मांगे थमा दिए। जिन्हें ये भुगतान किया गया उन्होंने न तो कभी कोटेशन दिया और न ही किसी प्रतिस्पर्धी बोली में भाग लिया था।जिला समन्वयकों को भी लगभग पचहत्तर प्रतिशत अधिक व्यय दर्शाकर संस्थान का खजाना खाली कर दिया। एक करोड़ छियासठ लाख रुपयों का तो नकद भुगतान कर दिया गया ये राशि किसे दी गई इसका कोई रिकार्ड नहीं है। भोजन आदि के आयोजनों पर भी ये फर्जी भुगतान निकाल लेता था जिसके सबूत जांच कमेटी के पास मौजूद हैं।
    सैडमेप का परियोजना समन्वयक राजीव सिंघई के खिलाफ भ्रष्टाचार के जो सबूत सामने आए तो वह जवाब देने के बजाए छुट्टी पर चला गया। इसने तो लाकडाऊन के दौरान भी सत्र आयोजित करने के बिल भुगतान कर दिए जो जांच में उजागर हो गए। प्रमाणित दस्तावेजों से पकड़ी गई इस धोखाघड़ी के बाद से वह गायब हो गया और अपना पक्ष रखने भी सामने नहीं आया। बताते हैं कि इन सभी लोगों ने चंदा करके कथित तौर पर ये पांच करोड़ रुपयों की रिश्वत राशि जमा की है जिसके बाद नवनीत कोठारी ने अपने विभागीय अधिकारियों पर दबाव डालकर श्रीमती अनुराधा सिंघई को निलंबित करवाया और मनगढ़ंत आरोपपत्र बनवाकर शासन व सरकार को गुमराह करना शुरु कर दिया।


    एक और मैनपावर नोडल अधिकारी दिनेश खरे भी अपने भ्रष्टाचार पर जवाब देने के बजाय बाहर गिरोहबंद होकर सरकार को गुमराह कर रहा है। जिन संविदा कर्मचारियों को वेतन न देने और देरी से भुगतान करने की बात नवनीत कोठारी लोगों को सुनाते हैं वे प्रकरण इसी के कार्यकाल के हैं। ये भी संविदा आऊटसोर्स कर्मचारियों के विवरण ईपीएफ ,ईएसआईसी और जीएसटी को नहीं भेजता था जिससे संस्थान को भारी जुर्माना भरना पड़ता था। कई बार कर्मचारियों को दंड के रूप में दुगुना भुगतान करना पड़ता था। ये कर्मचारी यूनियन के माध्यम से लोगों को भड़काता था और मीडिया में अनर्गल तथ्य प्रचारित करके सैडमैप और सरकार की भद पिटवाता रहता था।


    राज सिक्योरिटी सर्विसेज और रतन इंपोरियम जैसी मैनपावर आऊसोर्सिंग फर्मो के घोटाले पर भी जांच कमेटी ने सभी तथ्य विभाग को और शासन को उपलब्ध करा दिए हैं जिस पर चर्चा अगली किस्त में करेंगे। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव , विभागीय मंत्री चैतन्य काश्यप और शासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है जिस पर कार्रवाई जारी है। जाहिर है कि जल्दी ही इस घोटाले की असलियत सरकार के सामने उजागर हो जाएगी।

  • सैडमैप में सेंध लगाकर सरकार गिराने में जुटा नौकरी माफिया

    सैडमैप में सेंध लगाकर सरकार गिराने में जुटा नौकरी माफिया


    भोपाल,10 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).देश में उद्यमिता को जनांदोलन बनाने में जुटे उद्यमिता विकास केन्द्र मध्यप्रदेश (सेडमैप) में एक बार फिर नौकरी माफिया ने घुसपैठ का प्रयास किया है।इस बार सरकारी तंत्र में सेंध लगाने के लिए सरकार में दखल रखने वाले एक संगठन की आड़ ली गई है।सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री चेतन काश्यप को अंधेरे में रखकर रचा गया ये षड़यंत्र कामयाब भी हो सकता था लेकिन जिस तरह इस प्रयास की परतें खुल रहीं हैं उससे सरकार की बदनामी का एक नया शिलालेख तैयार होने लगा है।


    इस षडयंत्र का सूत्रधार कथित तौर पर रमन सिंह अरोरा नामक नौकरी माफिया बताया जा रहा है।ये व्यक्ति कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह के बेटे अजय सिंह के केरवा डैम स्थित रिसार्ट टचवुड का व्यवस्थापक भी बताया जाता है। इसने खुद की फर्म रतन एम्पोरियम बना रखी है जो सरकारी प्रतिष्ठानों में सिक्योरिटी गार्ड सप्लाई करने का ठेका लेती है। उसकी ये फर्म कथित तौर पर सरकारी दफ्तरों में फाईलें चोरी करवाने और अफसरों को रिश्वत देकर सरकारी धन को साईफन करवाने में जुटी रहती है।इसी वजह से कई सरकारी संस्थानों ने रीढ वाले अफसरों ने इसे ब्लैकलिस्टेड कर दिया है। खुद को उद्योगपति दर्शाने के लिए इसने कुछ समय पहले एक राष्ट्रीय अखबार से खुद को सम्मानित कराया था तभी से ये अफसरों और नेताओं पर दबाव बनाकर ठेके कबाड़ने की जुगाड़ कर रहा है।बताते हैं कि इसने अपने कई चमचों को प्रदेश के प्रमुख अखबारों में पे रोल पर नोकरी दिलवाई है जिनके माध्यम से ये सरकार को धमकाने के लिए उलटी सीधी खबरें प्लांट करवाता रहता है।


    जब इसकी फर्म को फर्जी बिलिंग और सुरक्षा गार्डों के वेतन में चिल्लरचोरी के आरोप में धरा गया तो इसने सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग के एक आला अधिकारी को बदनाम करने के लिए एक महिला अधिकारी से अश्लील चैट बनाकर वायरल किया था। इसकी पुलिस जांच हुई तो इसके कर्मचारी ने स्वीकार किया कि रमनवीर अरोरा ने ही उससे ये फर्जी चैट लिखवाया था।इस मामले में पुलिस जांच में सारे तथ्य उजागर हो गए हैं और संभावित जेल यात्रा से ये बुरी तरह बौखलाया हुआ है। इस षड़यंत्र के सूत्र विपक्ष के नेताओं से भी जुड़ रहे हैं इसलिए खुद को बचाने और सरकार को बदनाम करने के लिए इसने पूरा जाल बिछाया है।


    रमनवीर की रतन एम्परियम समेत जिन फर्मों और व्यक्तियों को एमएसएमई विभाग की निगरानी में चलने वाले सैडमैप संस्थान ने ब्लैकलिस्ट किया था उन्होंने इस बार सरकार को झांसा देने के लिए एक सांस्कृतिक संगठन से कथित तौर पर जुड़े हुए मंच की आड़ ली है।इस कहानी की पोल तब खुली जब एमएसएमई विभाग के सचिव डॉ.नवनीत कोठारी ने अचानक एक आदेश निकाला जिसमें सैडमैप की ईडी श्रीमती अनुराधा सिंघई(शर्मा) से लगभग सवा लाख पृष्ठों की जानकारी दो दिनों में देने का उल्लेख किया गया था। वे जवाब दे पातीं इसके पहले सचिव ने अनुराधा सिंघई को निलंबन का आदेश थमा दिया। एमएसएमई विभाग के एक जूनियर अधिकारी को आनन फानन में कार्यभार भी दिला दिया गया। इस अधिकारी ने सैडमैप पहुंचकर ईडी से कार्यभार छीन लिया और निगरानी के लिए लगाए गए कैमरे बंद करवा दिए। इस बदलाव को लोकप्रिय फैसला दर्शाने के लिए पर्दे के पीछे से सक्रिय रमनवीर और इसके गेंग में शामिल षड़यंत्रकारियों ने कर्मचारियों के बीच मिठाई बंटवाई और फटाके फोड़े। हालांकि इस असंवैधानिक कदम को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया है और केविएट लगाने पहुंचे सरकारी कानूनविदों को जमकर फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि जब सैडमैप ने सारी कार्रवाई पारदर्शी तरीके से की है और अपने पिछले फैसले में हाईकोर्ट तमाम आरोपों की जांच करके ईडी को क्लीनचिट दे चुका है तब इस आपराधिक षड़यंत्र को छुपाने के लिए सरकार क्यों हाईकोर्ट पहुंच गई।


    गौरतलब है कि सैडमैप की ईडी अनुराधा सिंघई एक कुशल कंपनी सेक्रेटरी हैं और उन्होंने मोदी सरकार के मेक इन इंडिया अभियान को सफल बनाने के लिए अपने विभाग की मंशा अनुरूप पचास लाख रोजगार सृजित करने की मुहिम चला रखी है। उन्होंने इतने कम समय में CEDMAP जैसे संगठन को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।उनके नेतृत्व में सैडमैप ने आधुनिक प्रबंधन के पारदर्शी तरीकों को अपनाकर वो कर दिखाया है जो पिछले तैतीस सालों के इतिहास में कभी नहीं हो सका था। उसी स्टाफ और वही अधिकारियों को साथ लेकर उन्होंने निजी क्षेत्र को रोजगार विस्तार के लिए आगे लाने में अभूतपूर्व योगदान दिया है।इस कार्य में उनका कंपनी प्रबंधक और कानूनी सलाहकार होने का सुदीर्घ अनुभव काम आ रहा है। मेक इन इंडिया अभियान हो या स्टार्टअप के माध्यम से देश की पूंजी और रोजगार के अवसर बढ़ाने का तरीका सिखाकर वे उद्यमियों को सफल बनाने में कारगर साबित हो रहीं हैं।उनके प्रयासों की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने अपने ही स्वशासी निकाय सैडमैप को भंडार क्रय नियम के अंतर्गत सरकारी विभागों और उपक्रमों के लिए अनुबंध आधारित सेवा कर्मी उपलब्ध कराने को अधिकृत कर दिया है।


    जब अनुराधा सिंघई की नियुक्ति की गई थी तो फर्जी बिलिंग और ठगी में धरे गए इस नौकरी माफिया ने आरोप लगाया कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज दिए हैं। हाईकोर्ट ने अपनी जांच के बाद आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। जब सैडमैप लगभग बंद होने की कगार पर था और कर्मचारियों को लगभग दस दस महीनों से वेतन नहीं दे पा रहा था तब अनुराधा सिंघई की नियुक्ति की गई थी। इस संगठन को सरकार के बजट में से वेतन और प्रशासनिक खर्च नहीं दिया जाता है। ऐसे में उन्हें एक महीने का वेतन पाने के लिए, पहले पिछले 10 महीनों के लिए सभी कर्मचारियों के लिए राजस्व अर्जित करना था।श्रीमती सिंघई ने कुशल प्रबंधन की तकनीकें अपनाकर नियुक्ति के बाद अगस्त 2021 से ही पूरे स्टाफ को नियमित वेतन दिलवाना शुरु कर दिया। जब तक कर्मचारियों का बकाया भुगतान नहीं हो गया तब तक उन्होंने खुद का वेतन भी नहीं लिया। लगभग चार महीनों बाद उन्होंने खुद का वेतन लेना शुरु किया।


    इंडो यूरोपियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (IECCI) और कंपनी सेक्रेटरी प्रैक्टिस में सुश्री अनुराधा सिंघई के 21 वर्षों से अधिक का अनुभव रहा है। ये संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है और वे खुद संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद की विशेष सलाहकार रहीं हैं। उन्हें डब्ल्यूटीओ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में शामिल होने का अवसर भी मिला। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र कार्यालय की ओर से बनाए गए भ्रष्टाचार विरोधी समीक्षा तंत्र के साथ विभिन्न मंचों पर विदेश में 4 बार भारत का प्रतिनिधित्व भी किया है। कुआलालंपुर, मलेशिया में ड्रग एंड क्राइम (यूएनओडीसी) और आयात संवर्धन केंद्र, हेग, नीदरलैंड। जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में काम कर चुकी इस कंपनी सेक्रेटरी ने न केवल सैडमैप बल्कि प्रदेश के उद्योग जगत में भी सरकार के भरोसे को जीवित करने में योगदान दिया है।


    फिलहाल तो सरकारी जांच एजेंसियां अब ये जानने का प्रयास कर रहीं हैं कि सैडमैप को चूना लगाकर खुद का घर भरने वाले षड़यंत्रकारी आर डी मंडावकर, शरद मिश्रा, दिनेश खरे, मनोज सक्सैना, आर के मिश्रा, प्रमोद श्रीवास्तव की संपत्ति उनकी आय से कई गुना अधिक कैसे हो गई । आरोप लगाया गया कि अनुराधा सिंघई ने कई पदों पर जैन लोगों को नियुक्त कर दिया है।श्रीमती सिंघई खुद जन्मजात ब्राह्रण हैं और वे अपनी टीम में केवल ईमानदार और योग्य लोगों का ही चयन करने पर जोर देती हैं। जब सभी आरोप फर्जी और ओछे साबित हुए और अदालती जांच में ये साबित हो गया कि वे एक कुशल प्रबंधन विशेषज्ञ हैं तो उन्हें पद से हटाने के लिए इस बार नया षड़यंत्र रचा गया है।


    अनुराधा सिंघई एक परिणाम प्रेरित कुशल शख्सियत हैं । उन्होंने भ्रष्टाचारियों के गिरोह में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया।भ्रष्टाचार के सभी रास्ते जब बंद कर दिए तो CEDMAP के कुछ अत्यधिक भ्रष्ट कर्मचारी उन्हें पद से हटाने में घटिया स्तर के नए षड़यंत्र रचने लगे। अब, जब CEDMAP अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंच गया है, तो भ्रष्ट लोगों के इस समूह को काली कमाई का भारी स्कोप नजर आने लग गया है। उन्हें लगता है कि CEDMAP उनकी निजी दुकान है।

    अनुराधा सिंघई ने अपनी कुशल टीम के माध्यम से CEDMAP के इन भ्रष्ट कर्मचारियों के कई घोटालों और उनकी कार्यप्रणाली को बार बार उजागर किया है। घोटालों का खुलासा होने पर बाकायदा निदेशक मंडल की मंजूरी से इन काली भेड़ों की परियोजनाओं का विशेष फोरेंसिक ऑडिट कराया गया, जिसमें करोड़ों रुपये का घोटाला और गबन पाया गया। ये सभी कार्रवाई पूरे पारदर्शी तरीके से कराई गई जिसके मिनिट्स अब सभी जांच एजेंसियों और अदालत के सामने चीख चीखकर सत्ता माफिया की काली करतूतों की पोल खोल रहे हैं।

    कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने कर्मचारियों की हेराफेरी के खिलाफ कई सख्त फैसले लिए थे, कुछ कर्मचारियों को निलंबित और बर्खास्त भी किया गया।सभी भ्रष्टाचारों पर रोक लगायी गई,कर्मचारियों को अपने वेतन के बदले अपना दायित्व पूरा करने के लिए जवाबदेह बनाया गया। इससे नौकरी माफिया को रिश्वत देकर भर्ती हुए मक्कार कर्मचारियों ने कपोल कल्पित बातें करनी शुरु कर दीं।कुछ भ्रष्ट मीडिया कर्मियों को मिलाकर बदनामी का बवंडर खड़ा किया गया जो बार बार जांच की कसौटियों पर औंधे मुंह गिरता रहा है।


    सभी सरकारी एजेंसियों ईओडब्ल्यू, लोकायुक्त और फिर हाईकोर्ट में सवाल उठाए गए,आरोप लगाए गए। जांच में वे निर्दोष और बेदाग पाई गईं। हाईकोर्ट ने 2022 और 2024 में ही नियुक्ति में अनियमितता को लेकर उनकी याचिका खारिज कर दी है। झूठी खबरें छाप चुके मीडिया संस्थानों की जब भद पिटी तो वे चुपके से दाएं बाएं होने लगे हैं। एमएसएमई विभाग के सचिव डॉ.नवनीत कोठारी ने जिस अधिकारी को कार्यभार संभालने भेजा है उसने जाते ही वहां से निकाले गए आरडी मांडवकर एवं अन्य अधिकारियों की फाईल निकलवाईं हैं बताया जाता है कि वे संस्थान से निकाले गए भ्रष्ट अधिकारियों को दुबारा नौकरी पर रखवाने का प्रयास कर रहे हैं।


    गौरतलब है कि सैडमैप उद्यमियों को प्रशिक्षण देकर उनका परिचय औद्योगिक संस्थानों से करवाता है। इस प्रक्रिया में जिन कर्मचारियों को नौकरी पर रखा जाता है उसका एक तयशुदा कमीशन सैडमैप को मिलता है। इस राशि से ही संस्थान के कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन दिया जाता है। अनुराधा सिंघई ने आते ही कर्मचारियों से किसी भी प्रकार का कमीशन लिया जाना निषिद्ध कर दिया था जिसकी वजह से औद्योगिक संस्थानों को अच्छे और प्रशिक्षित कर्मचारी मिलने की राह प्रशस्त हो गई थी।अब सरकारी नौकरियों में भी गुणवत्ता पूर्ण वर्कफोर्स आसानी से उपलब्ध होने लगा है। कंपनियों ने अपने एचआर डिपार्टमेंट में सैडमैप को सहयोगी बनाकर उससे अपने संस्थानों के अन्य कार्य भी करवाने शुरु कर दिए हैं। जिसकी वजह से संस्थान की आय बढ़ी है। ऐसे में कमीशनखोर नियुक्ति माफिया को लगने लगा है कि वह यहां अब अच्छी कमाई कर सकता है। केन्द्र और प्रदेश की सरकार जब युवाओं को रोजगार मुहैया कराने में हैरान परेशान घूम रही है तब सैडमैप उनके लिए आशा की किरण बनकर उभरा है।ऐसे में यदि नौकरी लगवाने के कार्य में रिश्वतखोरी की परंपरा फिर शुरु कर दी जाएगी तो ये सरकार की बदनामी का कारण तो बनेगी ही साथ में रोजगार दिलाने के सरकारी संकल्प पर भी कुठाराघात करेगी। नौकरी माफिया के माध्यम से विपक्ष तो सरकार गिराने के इस षड़यंत्र में खुलकर सामने खड़ा है,लेकिन एमएसएमई विभाग और सरकार दोनों कई महत्वपूर्ण मंचों पर अपनी जग हंसाई किस मजबूरी के तहत करवा रहे हैं, इसका खुलासा होना अभी बाकी है।

  • स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा का विलय मंजूर

    स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा का विलय मंजूर

    भोपाल,23 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के विलय की स्वीकृति दी गई। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग का विलय कर “लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग” के रूप में पुनर्गठित किया जायेगा। मेडिकल कॉलेज रूटीन चिकित्सा सेवाएं देने के बजाय अति गंभीर/विशिष्ट उपचार, चिकित्सा शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर सकेंगे। शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर की प्रभावी निगरानी हो सकेगी। मेडिकल कॉलेजों की बेस्ट प्रेक्टिसेस का स्वास्थ्य केन्द्रों में उपयोग किया जा सकेगा। मेडिकल कॉलेजों से जिला चिकित्सालयों को संबद्ध करना आसान हो जाएगा। स्वास्थ्य नीति और विभागीय योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन एवं नियंत्रण में सुविधा मिलेगी। आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप में दोनों विभागों के विलय की अनुशंसा की गई थी।

    मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय अधिनियम, 2011 के प्रावधानों में संशोधन

    मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय अधिनियम, 2011 के प्रावधानों में संशोधन की स्वीकृति दी गई है। वर्तमान में आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय चिकित्सा, दंत चिकित्सा, नर्सिंग, आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, नेचरोपैथी आदि में पाठ्यक्रम संचालित करता है। नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थाओं और छात्र-छात्राओं की संख्या में वृद्धि को देखते हुए आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय को नर्सिंग एवं पैरामेडिकल को छोड़कर अन्य विषयों के पाठ्यक्रम संचालित करने का दायित्व दिया जायेगा। नर्सिंग एवं पैरामेडिकल विषयो से संबंधित पाठ्यक्रम का संचालन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा स्थापित अन्य विश्व विद्यालयों के माध्यम से किया जायेगा।

    मल्हारगढ़ उद्वहन सिंचाई परियोजना के लिए 87 करोड़ 25 लाख रूपये से अधिक की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद द्वारा अशोकनगर की तहसील मुंगावली में बेतवा नदी पर 87 करोड़ 25 लाख रूपये लागत की मल्हारगढ़ उद्वहन सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति दी गयी है। परियोजना से मुंगावली तहसील के 26 ग्रामों के 7500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी।

    रतलाम जिले में तलावड़ा बैराज के निर्माण के लिये 264 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने रतलाम जिले में पेयजल आपूर्ति विस्तारित करने के लिए माही एवं मझोडिया समूह जल प्रदाय योजना अंतर्गत तलावड़ा बैराज (बांध) लागत रुपए 264 करोड़ 1 लाख रूपए की स्वीकृति दी है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत परियोजना से रतलाम जिले के 1011 ग्राम लाभान्वित होंगे। इसका निर्माण एवं रखरखाव जल संसाधन विभाग द्वारा किया जायेगा।

    जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 में संशोधन

    मंत्रि-परिषद ने जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 में संशोधन के लिए संसद को भेजे जाने वाले प्रस्ताव का अनुमोदन किया है। कानून में जल प्रदूषण से जुड़े छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने और जुर्माने का प्रावधान करने जैसे संशोधन प्रस्तावित है।

    सभी जिलों में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेन्स की स्थापना का निर्णय

    मंत्रि-परिषद द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अतंर्गत प्रदेश के सभी जिलों में 1-1 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेन्स स्थापित करने की स्वीकृति दी है। प्रदेश के 55 जिलों में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेन्स स्थापित किया जायेगा। चयनित महाविद्यालयों में अतिरिक्त 1845 शैक्षणिक पदों व 387 अशैक्षणिक पदों की स्वीकृति दी गयी है। इसके लिए कुल 485 करोड़ रूपये के व्यय की स्वीकृति दी गयी।

    छठवें वेतनमान की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद द्वारा जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत अनुदान प्राप्त अशासकीय संस्थाओं के शिक्षकों/कर्मचारियों को 1 जनवरी 2006 से छठवें वेतनमान का लाभ देने एवं 206 करोड़ 80 लाख रूपये के अनुमानित व्यय का अनुमोदन दिया गया है।

    अन्य निर्णय

    मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश माल एवं सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2024 में संशोधन की स्वीकृति दी गई।

  • मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट से क्यों हटाए गए संजय बंदोपाध्याय

    मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट से क्यों हटाए गए संजय बंदोपाध्याय


    भोपाल,13 जनवरी (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारतीय प्रशासनिक सेवा में मध्यप्रदेश कैडर से 1988 बैच के अधिकारी संजय बंदोपाध्याय केन्द्र सरकार से दिए गए एक हजार करोड़ के काम शुरू भी नहीं कर पाए और उन्हें अचानक मध्यप्रदेश वापस भेज दिया गया।इससे सत्ता के गलियारों में तरह तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं हैं। केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय से अचानक आदेश जारी होने के बाद ही मध्यप्रदेश के लोगों को पता चल सका कि मुख्य सचिव स्तर का कोई अधिकारी प्रदेश भेजा जा रहा है। कहा जाने लगा कि उनका रिटायरमेंट अगस्त महीने में है जबकि उन्हीं के बैच की अधिकारी वीरा राणा वर्तमान में मुख्य सचिव हैं जिनका रिटायरमेंट मार्च में होना है इसलिए चुनावों को संपन्न कराने के लिए बंदोपाध्याय को मुख्य सचिव बनाया जा सकता है।हालांकि इसके बाद जिस तरह की खबरें सत्ता के गलियारों में फैलीं हैं उनसे लगता है कि डाक्टर मोहन यादव सरकार फिलहाल उन्हें कोई दूसरा काम देने जा रही है।


    बताया जाता है कि केन्द्र में सचिव के समकक्ष होने के बावजूद भारत सरकार ने उन्हें सचिव नहीं बनाया है । वे भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण में दिसंबर 2021 से अध्यक्ष थे । यह निगम दरअसल पत्तन पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के ही अधीन आता है। जहाजरानी तथा जलमार्ग मंत्रालय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सबसे प्रिय विभाग रहा है । मोदी सरकार ने जहाजरानी यानी शिपिंग मंत्रालय (Shipping Ministry) का नाम बदलकर मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट्स, शिपिंग और वाटरवेज (Ministry of Ports, Shipping and Waterways) कर दिया था। तभी से यह मंत्रालय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय के नाम से जाना जाने लगा।

    मोदी सरकार ने जैसी कार्यप्रणाली अपनाई है उससे ये विभाग देश का कमाऊ सपूत बन गय़ा है। विदेशी कारोबार बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने दुनिया के व्यस्ततम बंदरगाहों पर अपना दखल बढ़ाया है। पिछले दिनों जलमार्गों पर बढ़ते लुटेरों के हमलों के बाद खुफिया सूत्रों को जानकारी मिली थी कि मंत्रालय के ही कुछ अधिकारी जानकारियां लीक करते थे। भारत के पोत परिवहन में अडंगा लगाने में कई विपक्षी राजनेताओं की गतिविधियां भी उजागर हो गईँ हैं। इन राजनेताओं ने कई जहाजरानी कंपनियों में अपना पैसा लगाया हुआ है और नियम कानूनों का पालन होने से उन्हें खासा टैक्स देना पड़ रहा है। इन जहाज कंपनियों के एजेंट लुटेरों के मुखबिरों के रूप में मंत्रालय में सक्रिय पाए गए थे।


    मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि जब श्री बंदोपाध्याय राज्य में ऊर्जा सचिव थे तब बिरसिंहपुर में 500 मेगावाट का बिजलीघर तैयार किया गया था। अपने वरिष्ठ अफसर राकेश साहनी के निर्देश पर उन्होंने बिजलीघर निर्माण में प्राप्त एक बडी धनराशि का निवेश दुबई के शेयर बाजार में करवाया था। बताते हैं कि ये राशि शेयर बाजार में डूब गई । तभी से उन्होंने किसी संभावित जांच से बचने के लिए भारत सरकार में पोस्टिंग करवा ली।


    पत्तन पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय की कमान सौंपने के लिए जब किसी अधिकारी की खोज की जा रही थी तब बताते हैं कि संजय बंदोपाध्याय की कुंडली खुल गई और भारत सरकार ने उन्हें प्रमोशन देने के बजाए वापस भेज दिया। हालांकि उनके करीबी सूत्र बताते हैं कि श्री बंदोपाध्याय की पत्नी इंडियन इंजीनियरिंग सेवा की अधिकारी हैं और वर्तमान में जबलपुर में जनरल मैनेजर के पद पर पदस्थ हैं। श्री बंदोपाध्याय का रिटायरमेंट नजदीक है इसलिए उन्होंने घर वापिसी का फैसला लिया है।

  • प्रतिबंधित कंपनी को ठेका देने की तैयारी में ग्वालियर नगर निगम

    प्रतिबंधित कंपनी को ठेका देने की तैयारी में ग्वालियर नगर निगम

    भोपाल, 04 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) ग्वालियर नगर पालिक निगम ने अब प्रदेश के स्थापित प्रशासनिक मापदंडों को ताक पर रख दिया है। महल के कथित राजनीतिक हस्तक्षेप से कमिश्नर ने एक ऐसी कंपनी को ठेका देने की तैयारी कर ली है जिसे राजस्थान वाटर सप्लाई एंड सीवरेज मैनेजमेंट बोर्ड जयपुर की फायनेंस कमेटी ने अनियमित लेनदेन और अक्षमता को देखते हुए काली सूची में डाल रखा है।


    नगर निगम कमिश्नर ने बदनाम शुदा एन्विराड प्रोजेक्ट प्राईवेट लिमिटेड और जयंती सुपर के ज्वाईंट वेंचर को न केवल निविदा में भाग लेने का अवसर दिया बल्कि उसे अनियमितताओं के माध्यम से ठेका भी देने की तैयारी कर ली है। निगम ने यह टेंडर चंबल नदी से कच्चा पानी निकालकर देवरी, मुरैना, और आसन नदी पर बने कोटवार बांध के जल ग्रहण क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए निकाला है। इस प्रोजेक्ट में कंपनी मुरैना और ग्वालियर शहर में भी पानी सप्लाई करेगी। निगम ने संदर्भित टेंडर क्रमांक एमपीजीएमसी । 17 आई । अमृत 2.0 । 2023-24 के अंतर्गत जारी टेंडर क्रमांक आईडी 2023-यूएडी-2756126-3 के तहत इस कार्य की प्रक्रिया निर्धारित की है। कानपुर की जयंती सुपर कंपनी को गैर जिम्मेदारी पूर्ण कार्य और अनियमितताओं के चलते राजस्थान की फायनेंस कमेटी ने विगत तीस मई 2023 को ब्लैक लिस्टेड किया है।


    राजस्थान की फायनेंस कमेटी ने जल प्रदाय एवं सीवरेज प्रबंधन बोर्ड की 30.05.2023 को आयोजित 856 वीं बैठक में एजेंडा 17 के अंतर्गत ये फैसला लिया है। बोर्ड ने जयंती सुपर और जीईओ मिलर के संयुक्त उपक्रम को तीम सालों के लिए प्रतिबंधित किया है। इस प्रकार की ब्लैक लिस्टेड संस्था को निविदा में भाग लेने का अधिकार भी नहीं होता है। ऐसी निविदा खोलना भी अनाचरण के दायरे में आता है।


    इसके बावजूद ग्वालियर नगर पालिक निगम की जल प्रदाय योजना की निविदा क्रमांक 2023-यूएडी-275616 -3 में एनिवराड प्रोजेक्ट प्राईवेट लिमिटेड एवं जयंती सुपर ने संयुक्त उपक्रम के रूप में टेंडर प्रस्तुत किया था, जिसे अब ठेका देने की तैयारी की जा रही है।

  • सेडमैप को सफल बनाया तो मिली अग्निपरीक्षा की चुनौती

    सेडमैप को सफल बनाया तो मिली अग्निपरीक्षा की चुनौती


    भोपाल,14 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, हिंदुस्तान को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का जो महा अभियान चला रहे हैं उसे सफल बनाने के लिए मध्यप्रदेश की अनुराधा सिंघई जैसी उद्यमी अपने हुनर का इस्तेमाल करके योग्य मानव बल उपलब्ध करा रहीं हैं। नौकरियां बेचने के गोरखधंधे में शरीक न होने की वजह से सैडमेप की इस एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर को अग्निपरीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसके पीछे कई ऐसे दिग्गज भी अपने गुंताड़े फिट कर रहे हैं जो खुद को महान देशभक्त बताते नहीं थकते।

    तैतीस साल की अपनी यात्रा में सैडमेप को महज एक एचआर मैनेजर की तरह ही इस्तेमाल किया जाता रहा है। इस संस्थान की बेहतरी के लिए किसी ने इसलिए प्रयास नहीं किए क्योंकि उनके लिए तो ये केवल नौकरियां बेचने की आड़ थी। संयुक्त राष्ट्र की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में चार बार देश का नेतृत्व कर चुकीं अनुराधा सिंघई ने दो साल पहले जब मध्य प्रदेश सरकार के एमएसएमई विभाग के तहत इस स्वायत्त शासी निकाय CEDMAP (Centre for Entrepreneurship Development Madhya Pradesh) (उद्यमिता विकास केंद्र मध्य प्रदेश) की कार्यकारी निदेशक का पदभार संभाला तो ये संस्थान लगभग बंद होने की कगार पर पहुंच गया था। आज भी इसे वेतन और प्रशासनिक खर्चों के लिए भी सरकार से कोई धन सहायता नहीं मिलती है। संस्थान में कर्मचारियों का दस महीनों से वेतन नहीं बंटा था।एक महीने का वेतन पाने के लिए, नई ईडी को कार्यभार संभालते ही पिछले 10 महीनों का राजस्व अर्जित करना था । वह अगस्त 2021 से सभी स्टाफ को वेतन दिलवाने लगीं,लेकिन उन्होंने तय किया कि 10 महीने का पूरा वेतन देने से दक्षता हासिल किए बगैर वे अपना वेतन नहीं लेंगी। कार्यभार संभालने के चार महीने बाद उन्होंने पहला वेतन लिया।नतीजतन आज संस्थान अपना बोझ उठाने लगा है।

    जब उन्होंने संस्थान की काया पलटने का प्रमाण दे दिया तब उनकी नियुक्ति पर सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं । प्रदेश की पंद्रह दिग्गज प्रमुख हस्तियों ने जो चयन किया उसे गलत ठहराने से पहले षड़यंत्रकारियों ने सैडमेप के इतिहास को पढ़ने का प्रयास भी नहीं किया। सैडमेप का गठन प्रदेश को प्रशिक्षित और उत्कृष्ट मानव बल मुहैया कराने के लिए किया गया था। संस्थान के संस्थापकों ने लंबी छानबीन के बाद ऐसे फार्मूले तैयार किए जिनके माध्यम से उद्यमी युवाओं की पहचान आसानी से की जा सकती थी। इसके बावजूद सत्ता के कई खिलाडियों के हस्तक्षेप से नौकरियां बेचने वालों का एक गिरोह भी इस प्रक्रिया के इर्दगिर्द इकट्ठा हो गया था। आज वही गिरोह खुद का सूरज अस्त होते देख रहा है।

    वार करने का जब कोई अवसर नहीं दिखा तो कुछ अधूरे दस्तावेजों को आधार बनाकर एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के विरुद्ध अदालती हस्तक्षेप की मुहिम छेड़ दी गई। हालांकि मुहिम चलाने वाले स्वयं जानते हैं कि वे एक हारी लड़ाई लड़ रहे हैं क्योंकि देश अब एक अलग दौर में प्रवेश कर गया है।आज जबकि कॉरपोरेट सेक्टर में नए प्रबंधकों के लिए 25लाख का वेतन पैकेज आम बात हो गई है तब कंगाल सोच वाले षड्यंत्र कारी संस्थान की नई कार पर ही सवाल उठा रहे हैं।

    पहली बार जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार के लघु एवं सूक्ष्म उद्योग विभाग के मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा ने अपने पिता स्वर्गीय वीरेंद्र कुमार सखलेचा की परंपरा को आगे बढ़ाकर अधीनस्थों को तथ्यात्मक कार्य करने की सुविधा उपलब्ध कराई तो एक बार फिर प्रशासनिक दक्षता को घेरा जाने लगा है।वहीं घर की गृहिणी की तरह साज संभाल करने वाली अनुराधा सिंघई ने अपने सुदीर्घ आर्थिक प्रबंधन ज्ञान का उपयोग करके संस्थान को नई राह पर अग्रसर कर दिया है।


    कौन हैं अनुराधा सिंघई

    पहले वह इंडो यूरोपियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की संस्थापक अध्यक्ष रहीं हैं, जो एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विकास क्षेत्र संगठन है, जिसे संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक संगठन की विशेष सलाहकार स्थिति प्राप्त है। वह 21 साल के अनुभव के साथ इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया की फेलो हैं।

    कानूनी, वित्त, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, क्लस्टर विकास, व्यवसाय मॉडलिंग, उद्यमिता, प्रशिक्षण, आजीविका, अनुसंधान और अध्ययन, कॉर्पोरेट समाधान, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और सहित विकास और कॉर्पोरेट क्षेत्र में 21 वर्षों से अधिक के विशाल और बहुमुखी अनुभव के साथ एक अनुभवी उच्च प्रबंधन पेशेवर हैं ।प्रमुख आंदोलन- “पर्पल मार्च” के माध्यम से विकास क्षेत्र में सुधार, लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण में एक अनुभवी शख्सियत हैं । किसी भी क्षेत्र में संकल्पना से लेकर कार्यान्वयन तक अत्यधिक उद्यमशील, परिणामोन्मुखी, समाधान चाहने वाला संगठन उनकी सेवाओं को अव्वल मानता है । वे कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार के लिए कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) की विशेषज्ञ और पर्यटन सलाहकार भी हैं।

    उन्हें भारत के प्रतिनिधि के रूप में तीन बार रॉटरडैम, नीदरलैंड में सीबीआई (आयात संवर्धन केंद्र-नीदरलैंड मंत्रालय का एक निकाय) ने चुना और आमंत्रित किया । उन्होंने भारत से यूरोपीय देशों और संबद्ध विषयों पर निर्यात बाजार विकास पर 2001, 2007 में प्रशिक्षण प्राप्त किया।

    उन्होंने चार बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया, जिसमें 2014 में मलेशिया के कुआलालंपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन और इसके समीक्षा तंत्र पर नशीली दवाओं और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (यूएनओडीसी) में प्रतिनिधित्व भी शामिल है।

    भारतीय ज्ञान प्रणाली और प्राचीन भारतीय विरासत में उनकी गहरी रुचि के कारण, उनके पास भारतीय प्राचीन ज्ञान प्रणाली- “वेद, वेदांग और दर्शन”, “उपनिषद”, “पुराण” और “गीता” और “भारतीय कला और साहित्य” में प्रशिक्षण और प्रमाण पत्र भी है। वास्तुकला”।

    उनके कुछ प्रतिष्ठित पुरस्कार और सम्मान हैं- 2012 में एमपी और सीजी राज्य के लिए दैनिक भास्कर द्वारा “बिजनेस वुमेन ऑफ द ईयर” पुरस्कार, 2019 में “अनहद नाद” सामाजिक कार्यकर्ता पुरस्कार, द इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ लायंस द्वारा “सेवा सम्मान”। 2020 में क्लब, आदि।
    वह विभिन्न मंचों पर अतिथि संकाय और नियमित वक्ता हैं, जैसे – राज्य कृषि शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान (एसआईएईटी), केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी, भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम), भोपाल, पर्यावरण और वन मंत्रालय, भारत सरकार, बैंक ऑफ भारत, स्टाफ ट्रेनिंग कॉलेज, भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (आईसीएसआई), अन्य प्रबंधन कॉलेज, आदि।

    उन्होंने स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम, डेनमार्क, सिंगापुर, मलेशिया, दुबई, थाईलैंड और श्रीलंका का अध्ययन दौरा किया है।

    वह बिजनेस मॉडलिंग में विशेषज्ञ हैं और उन्होंने लगभग 1200 उद्यमियों का मार्गदर्शन किया है जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में सफलतापूर्वक अपने उद्यम स्थापित किए हैं।

    Profile of Ms Anuradha Singhai

    Anuradha Singhai is Executive Director of CEDMAP (Centre for Entrepreneurship Development Madhya Pradesh), an autonomous body under Department of MSME, Government of Madhya Pradesh. 

    Previously she was founder president of Indo European Chamber of Commerce and Industry, an internationally recognized development sector organization having Special Consultative Status of United Nations Economic and Social Organisation.

    She is fellow of the Institute of Company Secretaries of India with 21 years of post qualification experience.

    A seasoned upper management professional with vast and versatile experience of over 21 years in development and corporate sector including legal, finance, Corporate Social Responsibility, Cluster development, business modelling, entrepreneurship, training, livelihood,  research & studies, corporate solutions, international trade and government advisory.

    A veteran in development sector reforms, Gender equality and women empowerment through flagship movement-“Purple March”.  A highly enterprising, result-oriented, solution seeker, right from conceptualization to implementation, in any sector.

    Ms Singhai is also an expert on Corporate Social Responsibility  (CSR) for Ministry of Corporate Affairs, GOI and tourism consultant. 

    She was selected and invited by CBI (Centre for Promotion of Imports- a body of Ministry of Netherlands) at Rotterdam, Netherlands for three times as India representative & received training on Export market development from India to European countries & allied topics in 2001, 2007 and 2009.

    She represented India on international forum for four times, including representation at United Nations Office on Drug and Crime (UNODC) on United Nations Convention against Corruption and its review mechanism at Kualalumpur, Malaysia in 2014.

    Out of her profound interest in Indian Knowledge System and ancient Indian heritage, she also posses training and certificate in Indian ancient knowledge system- “Ved, vedang & Darshan”, “Upanishads”, “Puraan” and “Gita” and “Indian art and architecture”.

    Some of her prestigious awards and honors are-“Business Women of the year”  award by Dainik Bhaskar for the state of MP and CG in 2012, “Anhad Naad” social worker award in 2019, “Sewa Samman” by The International Association of Lions Club in 2020, etc.

    She is guest faculty and regular speaker at various forums like -State Institute of Agriculture Education and Training (SIAET), Central Academy for Police training, Indian Institute of Forest Management (IIFM), Bhopal, Ministry of Environment & Forest, GOI, Bank of India, Staff Training College, Institute of Company Secretaries of India (ICSI), Other Management colleges, etc.

    She has undertaken study visits at Switzerland, Netherlands, Germany, France, Belgium, Denmark, Singapore, Malaysia, Dubai, Thailand and Srilanka.

    She is an expert in business modelling and mentored around 1200 entrepreneurs who have successfully established their ventures in various sectors.

  • तिजारत बने स्कूलों में शासन की सक्रियता से मचा हड़कंप

    तिजारत बने स्कूलों में शासन की सक्रियता से मचा हड़कंप


    अगस्त का महीना हिंदुस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था की उपलब्धियों के मंथन का समय होता है। विकास की हर इबारत बोध के बिना अधूरी है। ज्ञान प्रसारित करने वाले विद्यालयों को लोकतांत्रिक गिरावट ने तिजारत का अड्डा बना दिया है। सरकारी स्कूल और इसके शिक्षक छुटभैये नेताओं तक के सामने नाक रगड़ने को मजबूर हैं। मध्यप्रदेश की स्कूली शिक्षा प्रशासनिक मुखिया ने निजी हनक का इस्तेमाल करके शैक्षणिक तंत्र को सुधारने का उपाय निकाला है। स्कूल शिक्षा प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी एक ऐसी अफसर हैं जो शिक्षा तंत्र को व्यवस्थित करने की कमान खुद संभालती हैं।


    भोपाल,06 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) सरकार का प्रयास है कि वह शासकीय स्कूलों के माध्यम से गांव गांव तक ज्ञान का प्रकाश निशुल्क पहुंचाए । शासन के सिवाय कोई दूसरा इतना बड़ा तंत्र नहीं जो दूर दराज के गांवों तक बच्चों को प्रमाणिक शिक्षा मुहैया कराता हो। लगभग तीन दशक पहले स्कूलों में राजनैतिक आधार पर शिक्षक नियुक्त करने की परंपरा शुरु की गई थी। दिग्विजय सिंह की असफल कांग्रेसी सरकार ने पंचायती राज का शिगूफा छेड़कर सत्ता का समानांतर ढांचा खड़ा करने का प्रयास किया था। तब गुंडे मवालियों तक को पंचायतों की शिक्षा समिति में चयनित कर लिया गया था। तभी से गांव गांव तक सरकारी अमले से चंदा वसूली का खेल शुरु हो गया। लोमड़ी की दाढ़ में इंसानी रक्त की खुशबू लग जाए तो वह आदमखोर हो जाती है।


    सीधी विकासखंड की प्राथमिक शाला बुसिया टोला करवाही की शिक्षिका श्रीमती बबिता गुप्ता ने जब प्रमुख सचिव महोदया से अपनी जान की सुरक्षा करने की गुहार लगाई तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। शिक्षिका की पूरी बात गौर से सुनने के बाद उन्होंने अपने अमले को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक जांच के अलावा उन्होंने पुलिस महकमे को भी जांच में सहयोग करने के लिए ताकीद किया है। पुलिस महकमे के तमाम आला अफसर प्रमुख सचिव महोदया को उनके पद के अलावा व्यवहार के कारण बहुत इज्जत देते हैं। उनके पतिदेव संजीव शमी मध्यप्रदेश कैडर के निर्भीक और प्रतिभाशाली आईपीएस हैं। प्रदेश के दस्यु प्रभावित इलाकों में उनका खौफ इतना ज्यादा रहा है कि डकैत गिरोह और उनकी आड़ में काम करने वाले बदमाश अपनी आपराधिक गतिविधियों से ही तौबा कर लेते हैं। उन्हें अपने कार्य का जुनून है और सूचना मिलते ही वे जूते पहिनकर घटनास्थल पर पहुंच जाते हैं। उनकी इसी पहचान की वजह से आपराधिक चरित्र के लोग खौफ खाते हैं और नहीं चाहते कि वे सीधे टकराव वाली किसी पोस्ट पर मौजूद रहें। हालांकि उनकी इसी खूबी की वजह से पुलिस महकमे में उनकी बहुत इज्जत की जाती है।उनकी इस छवि का लाभ जाने अनजाने में शिक्षा जगत को भी मिल रहा है।


    शिक्षा विभाग में प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी बहुत विनम्र अधिकारी हैं लेकिन शिक्षा माफिया के लोग उनकी सक्रिय भूमिका देखकर अपनी चालबाजियां भूल जाते हैं। जब श्रीमती बबिता गुप्ता ने बताया कि वे अपने स्कूल के बच्चों को अपने वेतन में से ड्रेस खरीदकर देती हैं पढाई का सामान देती हैं इस वजह से कलेक्टर महोदय उन्हें सम्मानित भी कर चुके हैं। उन्होंने पहल करके स्कूल की दीवारों पर रंगरोगन करवाया है और बच्चों की पढ़ाई को रुचिकर बना रहीं हैं। इसके विपरीत स्कूल के षड्यंत्रकारी ने उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाकर शाला विकास समिति के फंड में से रुपए निकाल लिए हैं और झूठी शिकायत उनके ही विरुद्ध कर रहे हैं। श्रीमती गुप्ता ने इस मामले की शिकायत सीधी पुलिस को भी की है।


    उन्होंने बताया कि उनके स्कूल के हेडमास्टर ने उन्हें और उनके बच्चों को जान से मारने की धमकी दी है। इससे वे बहुत भयभीत हैं और उन्होंने अपने स्वास्थ्य के कारणों की वजह से फिलहाल महीने भर की छुट्टी ले ली है। प्रमुख सचिव महोदया ने शिक्षिका की बात गौर से सुनी और उन्हें हरसंभव मदद दिलाने का आश्वासन देकर विदा कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग को सख्त निर्देश देकर मामले की जांच करवाने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। वहीं सीधी पुलिस तक भी इस मामले की सूचना पहुंच गई है। इससे पुलिस अमला सक्रिय हो गया है। पुलिस ने कथित तौर पर धमकी देने वाले शिक्षक अंजनी गुप्ता को भी सख्त हिदायत दी है कि यदि उनके विरुद्ध शिकायत जांच में सही साबित होती है तो उनके विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया जाएगा।

    स्कूल के एक अन्य शिक्षक धीरज सिंह ने बताया कि शिक्षिका के दयालु स्वभाव की वजह से गांव के लोगों और स्थानीय प्रशासन के बीच उनकी छवि अच्छी है। जबकि उन्होंने जो शिकायतें की हैं वे कागज पर खरी साबित नहीं हो रहीं हैं। ऐसे में प्रशासन ने उन्हें लिखित पत्र देकर अपनी बात प्रमाणित करने का निर्देश दिया है। वे अपना स्पष्टीकरण दे देंगी तो बहुत सी शिकायतों को निदान हो जाएगा।


    अब तक शिक्षा विभाग में इस तरह के मामलों में फाईलों पर धीमी गति से कार्रवाई चलती रही है लेकिन प्रमुख सचिव महोदया की सक्रियता से शिक्षा विभाग की जांच गतिविधियों में पंख लग गए हैं।संकुल चौफाल जिला सीधी म.प्र. के प्रिंसिपल दोमनीक खाखा ने इस मामले में हस्तक्षेप करके प्रधानाध्यापक अंजनी कुमार गुप्ता का पक्ष लेने की कोशिश की है,जिनकी जांच चल रही है।सुदूर ग्रामीण इलाके में शासन की उपस्थिति से सीधी जिले में हड़कंप मचा है। इस समय जब प्रदेश में प्रशासनिक कसावट का दौर चल रहा है तब प्रमुख सचिव की सक्रियता और न्यायप्रियता चर्चा का विषय बन गई है।

  • सतपुड़ा भवन में भीषण आग,एयरकंडीशनर फटे

    सतपुड़ा भवन में भीषण आग,एयरकंडीशनर फटे

    भोपाल, 12 जून( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सतपुड़ा भवन में सोमवार को आग लग गई। तीसरी मंजिल से शुरू हुई यह आग देखते ही देखते छठी मंजिल तक पहुंच गई। देर रात तक आग नहीं बुझाई जा सकी थी। इस आग से बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण दस्तावेज और फर्नीचर जल गया है। 30 से ज्यादा एयर कंडीशनरों में ब्लास्ट होने की बात कही जा रही है। कांग्रेस ने आग लगने की टाइमिंग पर सवाल किए हैं। आरोप लगाया है कि शिवराज सरकार की चला-चली की बेला है। इस वजह से आग लगाकर घोटालों की फाइलें जलाई गई हैं। वहीं सीएम शिवराज ने पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को जानकारी दी है। वायुसेना की मदद मांगी है।
    जानकारी के मुताबिक आग सोमवार को करीब चार बजे लगी। आग की शुरुआत अनुसूचित जनजाति क्षेत्रीय विकास योजना के दफ्तर से हुई। फिर चौथी मंजिल पर स्थित स्वास्थ्य संचालनालय को भी इसने अपनी चपेट में ले लिया। पहले तो कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन वे उस पर काबू नहीं पा सके । एसी में ब्लास्ट हुए, जिससे आग तेजी से फैली। आग की वजह से पूरी इमारत में हड़कम्प मच गया। सीआईएसएफ और एसडीईआरएफ की टीमें भी मौके पर पहुंचीं। आग के कारणों का पता नहीं चल सका है। अधिकारियों का कहना है कि जांच समिति की निगरानी में आग से हुई क्षति का अनुमान लगाया जाएगा। सतपुड़ा भवन में कई विभागों के संचालनालय हैं, जिनमें आईएएस अफसर भी बैठते हैं।
    मुख्यमंत्री चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर चर्चा कर उन्हें सतपुड़ा में दुर्भाग्यपूर्ण आगजनी की घटना की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को आग बुझाने के प्रदेश सरकार के प्रयासों और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों (आर्मी, एयरफोर्स, भेल, सीआईएएसएफ, एयरपोर्ट एवं अन्य) से मिली मदद से भी अवगत कराया। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री को केंद्र से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
    मुख्यमंत्री चौहान ने गृहमंत्री अमित शाह से फोन पर चर्चा कर सतपुड़ा भवन में आग की घटना की जानकारी दी एवं आवश्यक मदद मांगी। सतपुड़ा के जिन मंजिलों में आग लगी है, वहां मूलतः तीन विभाग हैं, आदिम जाति कल्याण विभाग, परिवहन विभाग और स्वास्थ्य विभाग । तीसरी, चौथी, पांचवीं व छठवीं मंजिल में इनमें से किसी भी विभाग का टेंडर, प्रैक्योरमेंट संबंधित कोई भी कार्य नहीं होता है। मूलतः यहां स्थापना संबंधित विभागीय कार्य होते हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को भी सतपुड़ा भेजा और सुरक्षा उपायों की निगरानी करने को कहा है।
    इधर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी बात की। उन्होंने आग बुझाने के लिए एयरफोर्स की मदद मांगी। रक्षा मंत्री ने एयरफोर्स को निर्देशित किया। रक्षा मंत्री के निर्देश पर एएन 32 विमान और एमआई 15 हेलीकॉप्टर भोपाल पहुंचने के निर्देश दिए थे लेकिन आग पर काबू कर लिया गया है। आग दुबारा न भड़क सके और विमानों व हेलीकाप्टरों की आवाजाही सुनिश्चित हो सके इसके लिए एयरपोर्ट को रात भर खुला रखा गया है।
    मुख्यमंत्री चौहान ने आग के प्रारंभिक कारणों को जानने के लिए कमेटी घोषित की है। कमेटी में एसीएस होम राजेश राजौरा, पीएस अर्बन नीरज मंडलोई, पीएस पीडब्ल्यूडी सुखबीर सिंह और एडीजी फायर रहेंगे। कमेटी जांच के प्रारंभिक कारणों का पता कर रिपोर्ट मुख्यमंत्री चौहान को सौंपेगी।
    सूत्रों का दावा है कि स्वास्थ्य विभाग के कई मामलों की शिकायत ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त को हुई थी। इनसे जुड़ी जांच की फाइलों को भी आग से नुकसान पहुंचा है। इसी तरह आदिम जाति विभाग और स्वास्थ्य विभाग के कई अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जले हैं। स्वास्थ्य विभाग में कुछ महीनों पहले रिनोवेशन का काम हुआ था। पुरानी अलमारियों और फर्नीचर को निकाला गया था, जिसे आग ने पूरी तरह नष्ट कर दिया।
    आदिम जाति विभाग के दफ्तर को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। आग तीसरी मंजिल पर ही लगी थी। आग की लपटों की वजह से फर्नीचर पूरी तरह से जल गया। पांचवें और छठी मंजिल पर रखा सामान भी जला है। प्लास्टर टूटकर गिर गया है। पूरी इमारत में मधुमक्खियों के पुराने छत्ते हैं। इस वजह से छत्तों से मधुमक्खियों के उड़ने की दहशत भी थी।
    सतपुड़ा भवन में इससे पहले भी आग लग चुकी है। 25 जून 2012 में भी चौथी मंजिल पर आग लगी थी। तब यहां तकनीकी शिक्षा विभाग का दफ्तर था। यह आग शॉर्ट सर्किट से लगी थी।
    पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता अरुण यादव ने सतपुड़ा भवन में लगी आग पर सवाल उठाया है। उन्होंने ट्वीट किया कि प्रियंका गांधी जी ने जबलपुर में “विजय शंखनाद रैली” में घोटालों को लेकर हमला बोला तो सतपुड़ा भवन में भीषण आग लग गई। इसमें महत्वपूर्ण फाइलें जलकर राख हो गई है। कहीं आग के बहाने घोटालों के दस्तावेज जलाने की साज़िश तो नहीं। यह आग मप्र में बदलाव के संकेत दे रही है। पूर्व मंत्री और विधायक जीतू पटवारी ने कहा कि पचास प्रतिशत कमीशन वाली सरकार ने अपने दस्तावेज जला दिए। सितंबर 2018 में भी सतपुड़ा भवन में भी आग लगी थी। सर्वे कांग्रेस के पक्ष में है। आम लोगों में राय है कि कांग्रेस की सरकार आ रही है। साफ है कि भ्रष्टाचार छिपाने के लिए आग लगी है। मेरा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सीधा सवाल है – यह आग लगी है या लगाई गई है? आम तौर पर माना जाता है कि चुनाव से पहले सबूत मिटाने के लिए सरकार ऐसी ‘हरकत’ करती है! हार रही है भाजपा। अब यह भी बताए कि पुराने ‘अग्निकांड’ में दोषी कौन थे? किसे/कितनी सजा मिली?

  • ग्रेडिंग के आधार पर पुरस्कृत होंगी प्रदेश की पंचायतें

    ग्रेडिंग के आधार पर पुरस्कृत होंगी प्रदेश की पंचायतें

    भोपाल,10 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश की पंचायतों के कार्य की ग्रेडिंग की जायेगी तथा जो पंचायतें अच्छा कार्य कर रही हैं, उन्हें पुरस्कृत किया जायेगा। हर पंचायत की विकास योजना बनाई गई है, उस पर अमल कर ‘स्मार्ट विलेज’ बनाये जायेंगे।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने विभाग द्वारा गाँव-गाँव में कचरा संग्रहण एवं परिवहन के लिये बनाये गये ‘मोबाइल एप’ का लोकार्पण भी किया।

    पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री रामखेलावन पटेल, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, सीईओ मध्यप्रदेश डे राज्य आजीविका मिशन एल.एम. बेलवाल तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में स्व-सहायता समूहों द्वारा 127 “दीदी कैफे” संचालित किये जा रहे हैं। ये स्वल्पाहार केन्द्रों के रूप में सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। आने वाले समय में वल्लभ भवन, विंध्याचल, सतपुड़ा आदि स्थानों पर भी “दीदी कैफे” खोले जायेंगे।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में प्लास्टिक कचरा निपटान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हो रहा है। गाँव-गाँव से प्लास्टिक कचरा संग्रहण की व्यवस्था की गई है, जहाँ से प्लास्टिक कचरा संग्रहण केन्द्रों तक पहुँचेगा और वहीं से इसकी बिक्री होगी। प्रदेश में 28 प्लास्टिक संग्रहण केन्द्र खोले जा रहे हैं, जिनका संचालन स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा किया जायेगा। प्रदेश में लगभग 9 हजार किलोमीटर सड़कों के निर्माण में वेस्ट प्लास्टिक का उपयोग किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में 42 हजार से अधिक पुरानी जल-संरचनाओं के पुनउर्द्वार का कार्य प्रारंभ किया गया है। यह कार्य मनरेगा एवं अन्य योजनाओं से कराया जा रहा है। इससे बड़े क्षेत्र में सिंचाई, मछली-पालन, सिंघाड़ा उत्पादन आदि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में समुदाय आधारित ग्रामीण पर्यटन में “होम-स्टे” योजना सफलता से संचालित की जा रही है। योजना के प्रति पर्यटकों में अच्छा उत्साह दिख रहा है। निवाड़ी जिले के लदपुरा ग्राम तथा पन्ना जिले के मदला ग्रामों में ‘होम-स्टे’ में बड़ी संख्या में पर्यटक रुक रहे हैं। योजना की सफलता के लिये मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सभी संबंधितों को बधाई दी गई।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हर गाँव के इतिहास, गौरव, पहचान, संस्कृति, महापुरुषों आदि को पुन: स्थापित करने के लिये सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है कि प्रत्येक गाँव में हर वर्ष “ग्राम स्थापना दिवस” मनाया जायेगा। उन्होंने आगामी अप्रैल माह से इस संबंध में कार्यवाही के निर्देश दिये।

    हमारे उत्पाद “जैम” और “अमेजन” पर बिकें

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि प्रदेश में महिला स्व-सहायता समूहों एवं अन्य द्वारा तैयार किये गये उत्पाद जैम पोर्टल एवं अमेजन जैसे मार्केटिंग प्लेटफार्म पर बिकें, इसके लिये सघन प्रयास किये जायें।

    समूहों को ऋण स्वीकृति में प्रदेश देश में प्रथम

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि स्व-सहायता समूहों को ऑनलाइन माध्यम से ऋण प्रकरण प्रस्तुत करने तथा ऋण स्वीकृति में मध्यप्रदेश देश में प्रथम रहा है। वर्ष 2021-22 में एक लाख 40 हजार 576 ऋण प्रकरण स्वीकृत किये गये। स्वीकृत प्रकरणों में ऋण वितरण की त्वरित कार्यवाही के लिये मुख्यमंत्री द्वारा निर्देश दिये।

    हर गाँव में हो ग्राम संगठन

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में हर गाँव में ग्राम संगठन बनें। वर्तमान में प्रदेश में 32 हजार 874 ग्राम संगठन हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सभी 45 हजार गाँवों में ग्राम संगठन बनाने के निर्देश दिये।

    74 प्रतिशत प्रधानमंत्री आवास पूर्ण

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना में वर्ष 2024 तक सभी को आवास दिये जाने का लक्ष्य है। योजना में प्रदेश को 30 लाख 39 हजार आवास का लक्ष्य मिला है, जिसके विरुद्ध प्रदेश में 29 लाख 78 हजार (97.3 प्रतिशत) आवास स्वीकृत किये जा चुके हैं तथा 22 लाख 65 हजार (74 प्रतिशत) आवास पूर्ण किये जा चुके हैं। प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों को शासन की 36 प्रकार की योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इनमें राशन प्रदाय, नल-बिजली कनेक्शन, गैस कनेक्शन, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि योजनाएँ शामिल हैं।

    सभी गाँवों को ‘ओडीएफ-प्लस’ बनाना है

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन में वर्ष 2024-25 तक प्रदेश के सभी गाँवों को ‘ओडीएफ-प्लस’ बनाना है। इसमें सभी घरों में शौचालय, 80 प्रतिशत घरों में कम्पोस्ट पिट, 80 प्रतिशत घरों में तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा सभी ग्रामों में प्लास्टिक अपशिष्ट संग्रहण एवं पृथकीकरण कार्य किये जाने हैं। प्रदेश के 1154 गाँव को अभी तक ‘ओडीएफ-प्लस’ बनाया जा चुका है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये हैं कि इस बात का पूरा ध्यान रखा जाये कि नये बनने वाले घर बिना शौचालय के न हो।

    ग्राम सड़क निर्माण में प्रदेश देश में प्रथम

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के क्रियान्वयन एवं गुणवत्तापूर्ण सड़कों के निर्माण में मध्यप्रदेश देश में शीर्ष पर है। योजना से प्रदेश की 17 हजार 541 बसाहटों को जोड़ा जाना था, जिसके विरुद्ध 17 हजार 506 (99.80 प्रतिशत) बसाहटों को सड़क से जोड़ा जा चुका है। प्रदेश के 250 एवं इससे अधिक जनसंख्या के जनजातीय ग्राम तथा 500 एवं अधिक जनसंख्या के अन्य सभी ग्राम प्रधानमंत्री सड़क से जुड़ गये हैं।

    मनरेगा के भुगतान में न हो विलंब

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि मनरेगा में कराये गये कार्यों के भुगतान में विलंब नहीं होना चाहिये। उन्होंने इस संबंध में केन्द्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह से बातचीत कर लंबित भुगतान के लिये बजट की माँग की। केन्द्रीय मंत्री ने अश्वस्त कराया कि शीघ्र ही बजट दिया जायेगा।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मुख्यमंत्री भू-अधिकार योजना, पेसा अधिनियम के क्रियान्वयन, सॉलिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट, देवारण्य योजना के संचालन, पोषण-आहार संयंत्रों के हस्तांतरण आदि के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देश दिये।

  • देश के हर घर को पीने का पानी मिलेगाः प्रहलाद पटेल

    देश के हर घर को पीने का पानी मिलेगाः प्रहलाद पटेल

    भोपाल,18 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि जल जीवन मिशन में जल सम्मेलन आयोजित कर जन-भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा। गाँव-गाँव में पानी का पैसा जमा कराने के लिए लोगों में दायित्व बोध विकसित करने के उद्देश्य से अभियान चलाया जाएगा। मिशन में पन्ना, दमोह क्षेत्र में सिंचाई के लिए केनाल इरिगेशन के क्रियान्वयन का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। लक्ष्य पूरा करने के लिए कार्य में जल्दबाजी नहीं की जाए। जहाँ भूमिगत जल का प्रामाणिक स्रोत हो, वहीं से जल प्रदाय की व्यवस्था मिशन में सुनिश्चित की जाए। बुंदेलखंड क्षेत्र में भूमिगत जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। इस क्षेत्र में समूह योजनाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान मंत्रालय में केन्द्रीय जल-शक्ति एवं खाद्य प्र-संस्करण, उद्योग राज्य मंत्री प्रहलाद पटेल, केन्द्रीय जलशक्ति एवं जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री विश्वेश्वर टुडू तथा प्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी राज्य मंत्री बृजेन्द्र सिंह यादव की उपस्थिति में जल जीवन मिशन और केन-बेतवा लिंक परियोजना संबंधी बैठक को संबोधित कर रहे थे। जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट भी आन लाईन तरीके से शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जल जीवन मिशन में आँगनवाड़ी और स्कूलों को प्राथमिकता के आधार पर नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए। नल से जल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिन बसाहटों में पूर्व से पाइप-लाइन डली हुई हैं, वे पाइप लाइन यदि कमजोर हैं तो योजना के कनेक्शन उन पाइप लाइनों से नहीं किए जाएँ। पुरानी कमजोर पाइप-लाइनों के स्थान पर पूरी नई पाइप-लाइन बिछाई जाए। इससे नई योजना का लाभ बसाहट के सभी लोगों को समान रूप से उपलब्ध हो सकेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जानकारी दी कि पिछली सरकार में जल जीवन मिशन में कोई कार्य नहीं हुआ था। उसके बाद कोरोना की चुनौती से निपटने के परिणाम स्वरूप जल जीवन मिशन का कार्य प्रभावित हुआ है। इन परिस्थितियों के बाद भी राज्य में जल जीवन मिशन की प्रगति संतोषजनक है।

    केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि सभी परियोजनाओं का थर्ड पार्टी मूल्यांकन आवश्यक रूप से कराया जाए। मूल्यांकन का कार्य तकनीकी रूप से दक्ष एवं सक्षम समूहों और व्यक्तियों को ही सौंपा जाए। जल जीवन मिशन में हितग्राहियों को साथ लेकर योजना बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने से अधिक से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा और अधिक बसाहटों में पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने में सफलता मिलेगी। इस संबंध में मालवा और निमाड़ क्षेत्र में हो रहे नवाचारों का अनुसरण राज्य के अन्य भागों में भी किया जाना चाहिए।

    जानकारी दी गई कि केन-बेतवा लिंक परियोजना में मध्यप्रदेश को 8.11 लाख हेक्टेयर वार्षिक सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। प्रदेश के केन-कछार में 18 तहसील और 1376 गाँवों को सिंचाई और पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी। बेतवा-कछार में 10 तहसील और 673 ग्रामों को सिंचाई और पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी। जल जीवन मिशन में समूह नल-जल योजना में मई- 2020 से अब तक 26 लाख 88 हजार परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया गया है। गुणवत्तापूर्ण जल उपलब्ध कराने के लिए सभी जिलों की पेयजल परीक्षण प्रयोगशालाएँ एन.ए.बी.एल प्रमाणित हैं।

    बैठक में मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन श्री एस.एन. मिश्रा, अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री मलय श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री उमाकांत उमराव तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

  • नई शिक्षा नीति 2020 में सार्थक शिक्षा पर जोर बोले राज्यमंत्री इंदर सिंह परमार

    नई शिक्षा नीति 2020 में सार्थक शिक्षा पर जोर बोले राज्यमंत्री इंदर सिंह परमार

    मध्य प्रदेश: नई शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न पहलुओं को प्रभावी तौर पर लागू के निर्देश दे दिए गए हैं- राज्यमंत्री इन्दर सिंह परमार

    भोपाल,7 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। स्कूल शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) और सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के अनुरूप प्रदेश में नई शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाएगा। परमार ने बताया कि मुख्यमंत्री चौहान ने राज्य शासन द्वारा गठित टास्क फोर्स की बैठक में प्रदेश में स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता विकास और नई शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न पहलुओं को प्रभावी तौर पर लागू करने के निर्देश दिए गए है। इसी तारतम्य में मंत्रालय में टास्क फोर्स के सदस्यों को चार समूह में बांटकर नई शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। टास्क फोर्स सदस्यों के मंथन से उपजे सुझावों और मार्गदर्शन संबंधी पहलुओं पर आधारित प्रेजेंटेशन दिया गया।

    परमार ने बताया कि टास्क फोर्स की बैठक में नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों में फंक्शनल लिट्रेसी और नुमरेसी के प्रशिक्षण ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन संचालित किए जाने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समझ विकसित करने के लिए मॉड्यूल द्वारा प्रशिक्षण, प्रदेश में क्षेत्र के हिसाब से क्लस्टर आधारित शिक्षा व्यवस्था बनाने, कक्षा आठवीं में गणित और अंग्रेजी विषय पर कैप्सूल रिच कोर्स, स्थानीय कॉलेज के युवा छात्रों की मैपिंग कर वॉलिंटियर बनाए जाने, राज्य ओपन स्कूल में सेंटर बढ़ाने, मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा, शिक्षा कैलेंडर में सह शैक्षणिक गतिविधियों को शामिल करने, प्रारंभिक- बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण, अनुभव और परिणाम आधारित शिक्षकों का चयन और पदस्थापना सहित भारत सरकार द्वारा प्रौढ़ शिक्षा हेतु चलाए जा रहे ‘पढ़ना लिखना अभियान’ और ‘नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ आदि विभिन्न विषयो पर मंथन किया गया और सदस्य गणों के सुझाव लिए गए। राज्यमंत्री परमार ने कहा कि सदस्यों द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण सुझावों पर राज्य शासन द्वारा गंभीरतापूर्वक विचार कर निर्णय लिया जाएगा।
    सभी के सुझाव के आधार पर नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन से प्रदेश का शैक्षणिक माहौल बदलेगा और प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्य में शामिल होगा।

    राज्यमंत्री परमार की अध्यक्षता में टास्क फोर्स में सदस्य सचिव के रूप में प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा रश्मि अरुण शमी, संचालक सदस्य के रूप में आयुक्त, लोक शिक्षण अभय वर्मा, आयुक्त राज्य शिक्षा केंद्र धनराजू एस, पदेन सदस्य के रूप में सचिव मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल अनिल सुचारी, संचालक राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड और निदेशक,महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान प्रभात राज तिवारी शामिल है। शासकीय क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में उपसचिव, स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय के. के. द्विवेदी,
    अपर संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय धीरेन्द्र चतुर्वेदी,

    उपसंचालक, मप्र राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड संजय पटवा, सहायक निदेशक महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान छत्रवीर सिंह राठौर, सहायक प्राध्यापक शासकीय शिक्षा महाविद्यालय उज्जैन राजीव पांड्या, सहायक संचालक जबलपुर संभाग घनश्याम सोनी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी जिला अलीराजपुर प्रताप सिंह डाबर,
    प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पोलायकला, जिला शाजापुर घनश्याम दीक्षित, प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भरड़ जिला शाजापुर विवेक दुबे l

    प्राचार्य शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उमरिया उदय सिंह उइके, प्राचार्य शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, आगर मालवा रामचंद्र खंदार, प्रधानाध्यापक शासकीय जे ए सिंह माध्यमिक विद्यालय नं 1, ग्वालियर वीरेंद्र भदौरिया, व्याख्याता,जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, सीधी गौतम मणि अग्निहोत्री, व्याख्याता केंद्रीय विद्यालय
    क्र.2 ग्वालियर श्री दिवाकर शर्मा,
    शिक्षक शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पनागर जबलपुर श्री अमृत लाल बारले, उच्च श्रेणी शिक्षक सावित्री बाई फूले शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बुरहानपुर श्री संजय राउत, शिक्षक शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कंदवार जिला सीधी श्री संदीप मिश्रा,
    सहायक शिक्षक शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्र.51 कुलकर्णी भट्टा इंदौर श्री राजेंद्र आचार्य, प्र प्रधानाध्यापक शासकीय प्राथमिक विद्यालय बदीपूरा बेटमा,
    जिला इंदौर श्री अनिल सरसिया शामिल है।

    इसी तरह अशासकीय क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में संस्कृत भाषा विशेषज्ञ,श्री आनंद दीक्षित, शिक्षाविद् श्री शिरोमणि दुबे, श्री राव कुलदीप सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार श्री अखिलेश श्रीवास्तव, शिशु शिक्षा विशेषज्ञ श्री प्रभात सिंह, सेवानिवृत्त प्राचार्य श्री आर पी प्रजापति, प्राचार्य श्रीमती नीतू सरावगी, प्राचार्य श्री विवेक शर्मा, शिक्षाविद् श्री शिवानंद सिन्हा, सेवानिवृत प्राचार्य श्री अशोक कंडेल, सेवानिवृत व्याख्याता श्री श्याम ताहेड, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ शालिनी रातोरिया, शिक्षाविद् श्री जयशंकर शर्मा, प्राचार्य श्रीमती पुनीता नेहरू, प्राचार्य श्री अरुण शुक्ला, शिक्षाविद् श्री देवकीनंदन चौरसिया, डीन डीपीएस श्रीमती मेघा मुक्तिबोध, प्राचार्य डीपीएस डॉ अजय कुमार शर्मा, परियोजना निदेशक डॉ अशोक जनवदे, शिशु शिक्षा विशेषज्ञ श्री सत्यनारायण शर्मा, शिक्षाविद् श्री राघवेन्द्र शुक्ल, सामाजिक कार्यकर्ता श्री मोहन नागर, श्री चंद्रदेव अष्ठाना और शिशु शिक्षा विशेषज्ञ सुश्री रेखा चूड़ासमा शामिल है।

  • अफसरशाही की काली भेड़ें

    अफसरशाही की काली भेड़ें


    पी.नरहरि,सचिव जनसंपर्कः अफसरशाही को लांछन से बचाने का प्रयास

    कोरोना वायरस के हमले ने पूरी दुनिया को भयाक्रांत कर दिया है।एक अदृश्य शत्रु के हमले से चीन से लेकर अमेरिका, इटली, फ्रांस, ब्रिटेन,स्पेन जैसे मुल्क तबाही के दौर में पहुंच गए हैं। कोरोना ने भारत में भी अपने पैर पसार लिए हैं। संकट के इस दौर में कई समाजों,वर्गों और विचारों के लोगों का चरित्र भी उजागर होने लगा है। कहा भी गया है धीरज,धर्म,मित्र अरु नारी आपतकाल परखिए चारी।वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील के बाद पूरा देश लॉक डाऊन से गुजर रहा है। ऐसा पहली बार हुआ है कि हवाई और रेल सेवाएं भी पूरी तरह बंद कर दी गईं हैं। केवल परिवहन के लिए इन संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। देश भर में खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति जारी रहे इसके लिए सरकार युद्ध स्तर पर जुटी हुई है। पूरा देश प्रधानमंत्री के आव्हान पर कोरोना महामारी को परास्त करने के उपाय ढूंढ रहा है और अपने स्तर पर अमल भी कर रहा है।इन हालात में राज्य सरकारें और उनके प्रशासनिक अमले पर काम का दबाव बढ़ता जा रहा है। किसी भी युद्ध में जिस तरह फौजों के सामने जीने और मरने की जद्दोजहद होती है उसी प्रकार इस समय सरकारी अमला भी चुनौतियों से गुजर रहा है। कई बहादुर अफसर अपनी हिकमत अमली से परिस्थितियों को नियंत्रित कर रहे हैं। कोरोना वायरस की कोई वैक्सीन अभी तक ईजाद नहीं हो पाई है। वैज्ञानिक जुटे हैं और यदि किसी देश का कोई दल वैक्सीन ईजाद भी कर लेता है तो वैक्सीन को बाजार में उतारने में लंबा समय लगने का अनुमान है। यही वजह है कि पूरी दुनिया में खौफ का माहौल है, लोगों को लगता है कि इस अदृश्य शत्रु के सामने उनकी बहादुरी टिक नहीं पाएगी। सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों में रहें और संक्रमण फैलाने वाले वाहक न बनें। घरों में सफाई रखी जाए और वायरस के वसा से बने खोल को नष्ट करने के लिए डिटर्जेंट, साबुन, अल्कोहल युक्त हैंडवाश, ब्लीचिंग पाऊडर जैसे क्लोरीनीकरण करने वाले रसायनों, पोटेशियम परमेंगनेट जैसे आक्सीकरण एजेंटों का इस्तेमाल करके सफाई रखें। सरकारी दफ्तरों में भी इन रसायनों का प्रयोग करके सफाई रखी जा रही है। इसके बावजूद कई अफसर कोरोना की चपेट में आ गए हैं। उन्हें कोरोंटाईन करके घरों में और अस्पतालों में रखा जा रहा है उनका उपचार किया जा रहा है। शासन ने उन अफसरों की सैकेन्ड लाईन भी तैयार कर दी है। प्रथम पंक्ति के बीमार होने पर दूसरी पंक्ति जवाबदारी संभालेगी। ये व्यवस्था प्राचीन काल से हर युद्ध की परिस्थिति में अपनाई जाती है। इसके बावजूद पहली बार देखा जा रहा है कि कई अफसरों ने खुद को ड्यूटी से बचाने के लिए खुद को कोरोन्टाईन कर लिया है। वे भयभीत हैं और अपने ही घरों में रहकर जवाबदारी संभालने की बात कह रहे हैं। देश में कई स्थानों से अफसरों के आत्महत्या करने की खबरें भी आ रहीं हैं।अपनी चिट्ठियों में उन्होंने लिखा है कि काम का दबाव अहसनीय है।बेशक ये दौर बड़ा वेदनाभरा है। कोई भरोसा नहीं कि कोई व्यक्ति कब संक्रमण की चपेट में आ जाए और उसकी मौत की वजह बन जाए। संक्रमित व्यक्तियों के ठीक होने की दर भी बहुत अधिक है इसके बावजूद वैज्ञानिक इलाज न मालूम होने के कारण गारंटी नहीं है कि हर संक्रमित व्यक्ति बच ही जाएगा। अब इन हालात में अफसरों का जिम्मेदारियों से भागना कोई अचंभा नहीं है। इसके बावजूद बहाने बनाकर फर्जी सर्टिफिकेट लेकर खुद कोरेंटाईन कर लेना किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं हो सकता। हमारे देश की सरकारें अपने संसाधनों से जो आय अर्जित करती हैं उनका तीन चौथाई से भी अधिक हिस्सा सरकारी अमले को पालने पर खर्च किया जाता है। विकास योजनाओं को पूरा करने के लिए सरकारें कर्ज लेती हैं और जिसका ब्याज जनता को चुकाना पड़ता है। इसलिए जनता के खजाने से वेतन लेने वाले अफसरों की जवाबदारी और भी अधिक बढ़ जाती है। वे घरों में घुसकर इस युद्ध को नहीं जीत सकते। बेशक उन्हें शहादत देनी पड़ सकती है पर इसकी चिंता करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है। आम जनता का पेट काटकर अब तक उन्हें पाला जाता रहा है। न उत्पादकता बढ़ाने का दबाव और न ही धंधे में घाटे का खौफ,दिन भर की अफसरी और शाम को क्लब हाऊसों में मजा मौज इन अफसरों की जिंदगानी रही है। अब जबकि 21 दिनों के लॉक डाऊन में आम जनता मूलभूत जरूरतों के लिए वंचित है तब अफसरों का तंत्र यदि मैदान से रफूचक्कर हो जाएगा तो फिर जन समस्याओं का निवारण कैसे हो पाएगा।प्रदेश के जनसंपर्क सचिव पी.नरहरि ने इस मुद्दे पर चल रहीं खबरों को देखते हुए बाकायदा अपील की है कि अफसरों की बहानेबाजी की खबरें भ्रामक हैं। सभी अफसर अपना काम मुस्तैदी से कर रहे हैं। यदि वे बीमार हो जाते हैं तो इसे उनकी गैरजिम्मेदारी न बताया जाए। उनकी बात सही है अफसरों पर बेवजह लांछन लगाना उचित नहीं है। अब तक केवल सरकारी तंत्र ही तो है जो कानून और व्यवस्था संभाले हुए है। संकट के इस दौर में समस्या को समझना जरूरी है। तभी समाधान खोजा जा सकता है।अब तक सरकारी तंत्र में चापलूसों को जो महत्व दिया जाता रहा है उनकी वजह से ही सरकारी तंत्र पर अंगुलियां उठ रहीं हैं। ये समय कसावट का है। चापलूसों की भीड़ भले ही घरों में छुप जाए पर योद्धा अफसर तो मैदान में डटे ही हैं। इसलिए सिरे से सरकारी व्यवस्था को खारिज करना नाइंसाफी होगी,इसके बावजूद अफसरशाही में घुसी काली भेड़ों की पहचान तो उजागर होनी ही चाहिए।

  • कमलनाथ की कुर्सी बचाने में जुटे गोपाल रेड्डी

    कमलनाथ की कुर्सी बचाने में जुटे गोपाल रेड्डी

    भोपाल,17 मार्च(प्रेस सूचना केन्द्र)। तेज तर्रार आईएएस गोपाल रेड्डी को प्रदेश का प्रशासनिक मुखिया बनाकर मुख्यमंत्री कमलनाथ अपनी सत्ता के विरुद्ध हुई बगावत को काबू में करने का जतन करने में जुट गए हैं।रेड्डी के पद संभालते ही जेल विभाग ने पुरानी जेल के परिसर और भेल दशहरा मैदान को अस्थायी जेल में बदलने का आदेश जारी कर दिया है। ये तैयारी आने वाले दिनों में होने वाले किसी संभावित विद्रोह को देखते हुए की जा रही है। कमलनाथ यदि सुप्रीमकोर्ट और विधानसभा को धता बताते हुए कुर्सी छोड़ने पर राजी नहीं होते हैं तो संभावित जनांदोलनों पर नियंत्रण करने के लिए ये तैयारियां काम आ सकेंगीं।

    जेल विभाग के अवरसचिव अजय नथानियल ने विधानसभा के कार्यकाल के दौरान 13 अप्रैल तक ये नए जेल परिसर मान्य किए हैं। सरकार के खिलाफ होने वाले संभावित आंदोलनों में यदि अधिक लोग शामिल होते हैं तो उन्हें जेल पहुंचाने के बजाए इन परिसरों में ही निरुद्ध किया जा सकेगा। पुलिस और प्रशासन के बीच तालमेल जमाते हुए इस फैसले में प्रभारी पुलिस मुखिया रहे राजेन्द्र कुमार की सलाह की भूमिका मानी जा रही है।

    डीजी प्रशासन अकादमी बनाए गए सुधीरंजन मोहंती का कार्यकाल समाप्त होने के लगभग दो हफ्ते पहले की गई रेड्डी की नियुक्ति की वजह समझने में लोग सफल हो पाएं इससे पहले रेड्डी ने अपनी प्रशासनिक क्षमताओं पर पूरी तरह अमल शुरु कर दिया है।वे अपने त्वरित और दूरगामी फैसलों के लिए जाने जाते रहे हैं।

    सुधीरंजन मोहंती को इस महीने होने वाले रिटायरमेंट के बाद विद्युत नियामक आयोग का चेयरमेन बनना है। मुख्य सचिव पद पर रहते हुए ये नियुक्ति फिलहाल संभव नहीं थी। भले ही मुख्यमंत्री आदेश दे दें पर उसके ऊपर अमल तो मुख्य सचिव को ही करना पड़ता है। सरकार के खिलाफ उठी बगावत और अस्थिरता की स्थिति में यदि कमलनाथ सरकार बर्खास्त कर दी जाती है या सदन में बहुमत खो देती है तो फिर विद्युत नियामक आयोग की नियुक्ति का फैसला लटक सकता था। मुख्य सचिव के लिए ओएसडी बनाए जा चुके गोपाल रेड्डी की नियुक्ति भी नए हालात में खटाई में पड़ सकती थी।

    गोपाल रेड्डी ने पदभार संभालते ही अपने अनुकूल प्रशासनिक कसावट भी शुरु कर दी है। वे 1985 बैच के आईएएस हैं और लंबे समय से प्रदेश की प्रशासनिक जमावट से परिचित रहे हैं। समाज के सभी वर्गों से उनका जुड़ाव रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि कमलनाथ सरकार के खिलाफ उठ रहे असंतोष के स्वरों को वे संतुष्टि की आवाजों में बदल सकेंगे। इसके बावजूद फिलहाल कमलनाथ से नाराजगी के स्वर बहुत तेज हैं और उन्हें काबू में रखने के लिए राजदंड का प्रयोग करने की जरूरत भी पड़ रही है और नए मुखिया ने इस भूमिका पर अमल भी शुरु कर दिया है।

  • पोर्टल से मकान आबंटन सरल बोले प्रमुख सचिव गृह एस.एन.मिश्रा

    पोर्टल से मकान आबंटन सरल बोले प्रमुख सचिव गृह एस.एन.मिश्रा

    भोपाल,14 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। सरकारी कर्मचारियों और अफसरों को आवास आवंटन करने के लिए बनाए गए वेब पोर्टल ई – आवास ने अब जरूरत मंद अमले को सरकारी मकान आबंटित करने की व्यवस्था सरल बना दी है। इस पोर्टल की सुविधाओं के संबंध में आज भोपाल स्थित समस्त डीडीओ को नरोन्हा अकादमी में प्रशिक्षण दिया गया । प्रमुख सचिव गृह एस.एन.मिश्रा और संपदा संचालक आर.आर.भोसले ने भी प्रशिक्षण को संबोधित किया ।

    इस नए वेब पोर्टल से संपदा संचालनालय से शासकीय आवासों का बेहतर प्रबंधन किया जाएगा। शासकीय आवास के लिए अभी कर्मचारियों को 25 से 30 साल तक की प्रतीक्षा करनी पड़ रही है उसके स्थान पर उनको ई -आवास वेब पोर्टल के माध्यम से शासकीय आवासों का बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता के कारण 5 वर्ष में ही शासकीय आवास मिल सकेंगे।

    संपदा संचनालय भोपाल ई-गवर्नेंस पोर्टल www.sampada.mp.gov.in

    एनआईसी भोपाल के सहयोग से विकसित किया गया है। इसमें समस्त आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को शासकीय सेवकों द्वारा आवास आवंटन हेतु ऑनलाइन भरे गए आवेदनों का सत्यापन करने का कार्य किया जाएगा जिसमें अपात्र आवेदनों को अस्थाई रूप से निरस्त करने का भी प्रावधान डीडीओ को दिया गया है इसके साथ ही जो भी आवेदन इसमें ऑनलाइन ही निरस्त किए किए गए होंगे उसकी भी जानकारी सीधे शासकीय सेवक को एवं उसके डीडीओ को भी मिल पाएगी । शासकीय कर्मचारियों को संपदा संचनालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। स्वीकृत आवेदनों की जानकारी एवं वेटिंग लिस्ट की भी जानकारी इस पोर्टल के माध्यम से शासकीय कर्मचारी प्राप्त कर सकेंगे ।

    अगले चरण में नवीन निर्मित किए जा रहे हैं वेब पोर्टल को कोष एवं लेखा संचनालय के आईएफएमएस आई पोर्टल से इंटीग्रेशन का कार्य लगभग पूर्णता की ओर है जिसमें कर्मचारी की वेतन आहरण एवं सेवानिवृत्त के डाटा के आधार पर संपदा संचनालय द्वारा स्थानांतरण सेवानिवृत्त दिवंगत आदि होने की स्थिति में आवास रिक्त कराए जाने की कार्यवाही की जा सकेगी । साथ ही शासकीय आवासों की लाइसेंस फीस की वसूली संबंधी कार्य भी नवीन पोर्टल के आधार पर की जा सकेगी ।

    इस अवसर पर कार्यक्रम में प्रमुख सचिव गृह एस.एन.मिश्रा,संचालक संपदा आर.आर.भोंसले, आवंटन अधिकारी संपदा मुकुल गुप्ता एवं सुनील जैन वरिष्ठ तकनीकी निदेशक भी उपस्थित थे ।

  • जनगणना कार्य में एमपी ने लगाया अड़ंगा

    जनगणना कार्य में एमपी ने लगाया अड़ंगा

    मंत्रि-परिषद के निर्णय

    भोपाल,5 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)।मुख्यमंत्री कमल नाथ की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में ‘मध्यप्रदेश हाइब्रिड नवकरणीय ऊर्जा एवं एनर्जी स्टोरेज नीति’ लागू करने का निर्णय लिया। यह नीति मध्यप्रदेश राज्य में 3 परियोजनाओं के विकास के लिए लागू की जायेगी। इसमें हायब्रिड पॉवर परियोजना (एच.पी.पी.) में एक परियोजना स्थल पर दो या दो से अधिक नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों से विद्युत उत्पादन होगा, जिसमें ऊर्जा भण्डारण भी शामिल हो सकता है।

    मंत्रि-परिषद ने शासकीय संकल्प पारित कर भारत सरकार से नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 को निरसित करने का आग्रह किया तथा ऐसी नयी सूचनाओं, जिन्हें राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) 2020 में अद्यतन करने के लिए चाहा गया है, को वापस लेने एवं उसके पश्चात ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के अधीन गणना करने का कार्य करने का भी आग्रह किया।

    ‘मध्यप्रदेश हाइब्रिड नवकरणीय ऊर्जा एवं एनर्जी स्टोरेज नीति’ के अंतर्गत इसके अलावा, नवकरणीय ऊर्जा के मौजूदा परियोजना स्थलों के सह-स्थित या स्टैंड-अलोन एनर्जी स्टोरेज संयंत्र स्थापित किये जा सकते हैं ताकि नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों का समुचित उपयोग किया जा सके एवं ग्रिड स्थिरता की दिशा में प्रयास किये जा सकें। उपलब्ध अधोसंरचनाओं और नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों की क्षमताओं के दोहन करने के लिए विभिन्न नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों के हायब्रिडाईजेशन और विभिन्न प्रकार के ऊर्जा भण्डारण को बढ़ावा देने के लिए एक प्रगतिशील नीति की आवश्यकता प्रतिपादित की गई।

    मंत्रि-परिषद ने सामाजिक क्षेत्र में नि:शक्त, निर्धनों के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं को पुरस्कार के लिए इन्दिरा गाँधी समाजसेवा पुरस्कार 1992 में संशोधन कर पुरस्कार की राशि को एक लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने का अनुसमर्थन किया।

    मंत्रि-परिषद ने मंत्रियों द्वारा दिये जाने वाले स्वेच्छानुदान की राशि में किसी एक प्रकरण के लिए वर्तमान में निर्धारित सीमा राशि 20 हजार रूपये को बढ़ाकर 40 हजार रूपये करने का निर्णय लिया गया। मंत्रि-परिषद ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग की योजना ‘विधानसभा भवन एवं विधायक विश्राम गृह का विस्तारण ‘ को निरंतर रखने के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति देने की मंजूरी दी।

    मंत्रि-परिषद ने स्कूल शिक्षा विभाग के अन्तर्गत राज्य स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक संवर्ग) शर्तें एवं भर्ती नियम 2018 में परिवीक्षा अवधि, परिवीक्षा अवधि के वेतनमान एवं आरक्षण नियमों में किये गये संशोधन के प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया। इसी प्रकार मध्यप्रदेश जनजातीय एवं अनुसूचित जाति शिक्षण संवर्ग, सेवा एवं भर्ती नियम 2018 में संशोधन करने का निर्णय भी लिया गया।

    मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राज्य सेवा परीक्षा में संबंधित राज्य सेवा परीक्षा नियम 2015 में भर्ती की प्रक्रिया के संबंध में संशोधन करने का निर्णय लिया और यह संशोधन राज्य सेवा परीक्षा 2019 से लागू करने की मंजूरी दी।

    मंत्रि-परिषद ने शासन के विभिन्न विभागों द्वारा क्रियान्वित की जाने वाली योजनाओं एवं परियोजनाओं, सतत विकास के लक्ष्य, आकांक्षी जिलों तथा विकासखण्डों की निरंतर प्रभावी मॉनीटरिंग के लिए राज्य योजना आयोग में क्रियाशील प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग यूनिट का कार्यकाल अगले 5 वर्षों के लिए निरंतर रखने की मंजूरी दी। यूनिट में वर्तमान में कार्यरत सलाहकार एवं कार्यकारी पूर्व में स्वीकृत अवधि 31 मार्च 2020 तक कार्यरत रहेंगे। बैठक में एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2023 तक की अवधि के लिए 31 पदों पर संविदा आधार पर नियुक्ति करने की मंजूरी दी गयी । इसमें प्रिंसिपल कंसलटेंट का एक, सीनियर कंसलटेंट के 10 और कंसलटेंट के 20 पद शामिल हैं। संविदा आधार पर चयन की प्रक्रिया योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा निर्धारित की जायेगी।

    मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी परियोजनाओं के विकास एवं रख-रखाव करने के लिए राज्य स्तर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन मैप-आई.टी. अन्तर्गत गठित सेन्टर ऑफ एक्सिलेंस के लिए बढ़ती चुनौतियों एवं इसके सुदृढ़ीकरण को ध्यान में रखते हुये कुल 16 नये पदों के सृजन की मंजूरी दी । सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा जिन विभागों के लिए कार्य किया जायेगा, उन विभागों से मैप-आई.टी. द्वारा निर्धारित मापदंड अनुसार शुल्क दिये जाने का अनुमोदन किया गया।

  • प्रदेश को आर्थिक शक्ति बनाएं अफसरों से बोले कमलनाथ

    प्रदेश को आर्थिक शक्ति बनाएं अफसरों से बोले कमलनाथ

    तीन दिवसीय आईएएस सर्विस मीट 2020

    भोपाल 17 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि देश में मध्यप्रदेश ही ऐसा प्रदेश है, जो विविधताओं से सम्पन्न है और पूरे विश्व में भारत ही ऐसा देश है, जो विविधताओं से पूर्ण है। इस विविधता को सकारात्मक ऊर्जा में बदलना होगा। उन्होंने कहा कि विविधता में भारत की बराबरी करने वाला देश सिर्फ सोवियत संघ था। आज वह अस्तित्व में नहीं है क्योंकि उसमें भारत जैसी सोच-समझ और सहिष्णुता की संस्कृति नहीं थी। यही भारत की पहचान है। मुख्यमंत्री आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में आईएएस सर्विस मीट 2020 के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि जो आईएएस अधिकारी अपनी सेवा यात्रा के मध्य में हैं और जो सेवा पूरी करने वाले हैं, वे चिंतन करें कि मध्यप्रदेश को वे कहाँ छोड़कर जाना चाहते हैं। जो अधिकारी अपनी सेवा यात्रा की शुरूआत कर रहे हैं, वे सोचें कि मध्यप्रदेश को कहाँ देखना चाहते हैं। श्री कमल नाथ ने प्रशासनिक अधिकारियों को न्याय देने वाला बताते हुए कहा कि संविधान में उल्लेखित स्वतंत्रता और समानता जैसे मूल्यों की सीमाएँ हो सकती हैं लेकिन न्याय की कोई सीमा नहीं है। यह हर समय और परिस्थिति में दिया जा सकता है। दृष्टिकोण में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के पास जो क्षमता और कौशल है, वह सामान्यत: राजनैतिक नेतृत्व के पास नहीं रहता। राजनैतिक नेतृत्व बदलते ही प्रशासनिक तंत्र का भी नया जन्म होता है लेकिन ज्ञान, कला, कौशल नहीं बदलते।

    मुख्यमंत्री ने नए परिवर्तनकारी विचारों (न्यू आइडिया आफ चेंज) के लिए तीन पुरस्कार देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसके लिए पूर्व मुख्य सचिवों की एक ज्यूरी बनाई जाएगी, जो सर्वोत्कृष्ट आईडिया चुनेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हर राज्य की अपना प्रोफाईल होती है। सबको मिलकर मध्यप्रदेश का प्रोफाईल बनाना होगा। वर्तमान प्रोफाईल को बदलना होगा। मध्यप्रदेश की नई पहचान बनानी होगी। इसके लिए जरूरी है कि प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा आर्थिक गतिविधियाँ उत्पन्न हों। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी हर पल बदल रही है। पूरा भारत बदल रहा है। ज्ञान और सूचना के भंडार तक आज जो पहुँच बढ़ी है, वह पहले नहीं थी। उन्होंने कहा कि विश्व में सबसे ज्यादा महत्वाकांक्षी जनसंख्या भारत में है। ये जनसंख्या युवाओं की है। बदलते समय में महत्वाकांक्षाएँ भी बदल रही हैं। अब यह देखना है कि इन्हें कैसे अपनाएं।

    श्री कमल नाथ ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि आधारित अर्थ-व्यवस्था का प्रदेश है। वर्तमान समय में अधिक उत्पादन की चुनौती है। खाद्यान्न की कमी अब चुनौती नहीं रही। उन्होंने कहा कि परिवर्तन तब दिखेगा, जब धोती-पायजामा पहनने वाला किसान आधुनिक खेती करते हुए जींस और शर्ट वाला किसान बन जाये।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती हमारी नई पीढ़ी की है। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में कौशल सम्पन्न युवा तैयार होते हैं। उन्हें रोजगार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रोजगार आर्थिक गतिविधियों का एक घटक है। इसलिए आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ाना चुनौतीपूर्ण काम है। उन्होंने कहा कि हर सरकार की अपनी कार्य-शैली होती है। अपनी अच्छाईयाँ और कमजोरियाँ होती हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की नई पीढ़ी को यह देखना होगा कि मध्यप्रदेश को किस दिशा में जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश एक आर्थिक शक्ति बनने की संभावना रखता है। मध्यप्रदेश के पास लॉजिस्टिक लाभ है। यहाँ का बाजार और व्यापार पूरे देश से जुड़ सकता है। सिर्फ नजरिए में परिवर्तन लाने की देर है। इसके लिए नया सीखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि क्या सीखते हैं, इससे ज्यादा जरूरी है कि कैसे सीखते हैं।

    मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती ने आईएएस मीट के आयोजन की पृष्ठभूमि की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह नई ऊर्जा और अनुभव को एक साथ लाने का अवसर है ताकि यह कार्य-शैली में भी बना रहे और इसका भरपूर लाभ समाज को मिले।

    अपर मुख्य सचिव सर्वश्री एम.गोपाल रेड्डी, मनोज श्रीवास्तव एवं प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव ने अतिथियों को स्मृति-चिन्ह भेंट किये। प्रारंभ में मध्यप्रदेश आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष आई.सी.पी. केशरी ने अपने स्वागत भाषण में मुख्यमंत्री को आधुनिक, उदार, डॉयनामिक और विश्व-दृष्टि से सम्पन्न नेता बताते हुए कहा कि वे 159 देशों का भ्रमण कर चुके हैं । वे किसानों के हित में 19 मंत्रियों के साथ विश्व व्यापार संगठन की बैठक का विरोध करने वाले नेता हैं। उनके नेतृत्व में देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर में क्रांतिकारी परिवर्तन आया।

    इस अवसर पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं प्रख्यात लेखक पवन वर्मा और प्रशासन अकादमी की महानिदेशक सुश्री वीरा राणा उपस्थित थी। 

  • वृक्षारोपण अभियान की जांच करेगा ईओडब्ल्यू

    वृक्षारोपण अभियान की जांच करेगा ईओडब्ल्यू

    भोपाल 11 अक्टूबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। वन मंत्री उमंग सिंघार का कहना है कि मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता बटोरने की ललक के चलते राज्य सरकार के खजाने को 450 करोड़ का नुकसान पहुंचा था। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में अपना नाम दर्ज कराने के चक्कर में शिवराज ने जुलाई 2017 में एक ही दिन में नर्मदा किनारे 7 करोड़ पौधे लगाने का फरमान सुनाया। अधिकारी मना करते रहे, लेकिन मुख्यमंत्री की सनक के सामने किसी की नहीं चली। 30 प्रतिशत पौधे भी नहीं लगे और बजट पूरा निकाल लिया गया। कमलनाथ सरकार ने अब इस पर सख्त कदम उठाते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और तत्कालीन वनमंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार सहित 6 अधिकारियों के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

    प्रदेश के वनमंत्री उमंग सिंघार ने आज पत्रकार वार्ता में शिवराज सरकार पर लगने वाले आरोपों को लेकर आज ये खुलासा किया। उनका कहना है कि अधिकारियों के रोकने के बावजूद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने एक दिन में 7 करोड़ 10 लाख 39 हजार 711 पौधे लगाने का कथित झूठा रिकॉर्ड बनाते रहे। मजेदार बात यह है कि इतने सारे पौधे 20 रुपए से 200 रुपए के दर पर खरीदना दिखाया गया। इनके लिए गड्ढे करना दिखाया गया और इनके रोपण खाद्य और पानी के नाम पर भी करोड़ों रुपए निकाले गए। सरकारी रिकॉर्ड में 1 लाख 21 हजार 275 स्थानों पर 7.10 करोड़ पौधों की घोषणा की गई जबकि गिनीज बुक वल्र्ड ऑफ रिकॉर्ड को बताया गया कि मात्र 5 हजार 540 स्थानों पर 2 करोड़ 22 लाख 28 हजार 954 पौधे ही लगाए गए। यानि 3 गुना भ्रष्टाचार तो पहले ही साफ दिखाई दे रहा है। वनमंत्री का दावा है कि मात्र 5 से 7 प्रतिशत पौधे ही लगे हैं।

    वनमंत्री ने पत्रकार वार्ता में कहा कि शिवराज कार्यकाल में हुए पौधा रोपण कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी वनमंत्री को ही गलत जानकारियां दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि बैतूल के शाहपुर परिक्षेत्र में वृक्षारोपण की जानकारी मांगने पर अधिकारियों ने बताया था कि 2 जुलाई 2017 को 15625 पौधे रोपे गए इनमें से 11 हजार 140 पौधे जीवित हैं। जबकि 27 जून 2019 को स्वयं वनमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौका मुआयना किया तो मौके पर मात्र 2343 पौधे ही जीवित मिले। इस स्थान पर पौधों के लिए गड्ढे भी मात्र 9 हजार 985 ही खोदे गए थे। उन्होनें कहा कि गलत जानकारी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

    इस पूरे मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी एपी श्रीवास्तव की भूमिका को संदिग्ध बताया जा रहा है। जिस समय यह घोटाला हुआ तब वे प्रमुख सचिव वित्त थे। उन्होंने ही इस वृक्षारोपण अभियान के लिए वित्तीय अनुमतियां दीं थीं। वर्तमान में श्रीवास्तव वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं। वनमंत्री ने उन्हें ही नोटशीट लिखकर इस घोटाले की शिकायत ईओडब्ल्यू को करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय में चर्चा है कि जिस अधिकारी ने स्वयं घोटाले की राशि जारी की है वह इसकी शिकायत कैसे कराएगा?

    सूत्रों के मुताबिक केन्द्रीय वन मंत्रालय से प्राप्त पांच सौ करोड़ रुपए की धनराशि को राज्य के अन्य विकास कार्यों पर भी खर्च किया गया था जबकि वृक्षारोपण अभियान वन विभाग के सामान्य बजट और कई निजी संस्थाओं के जन सहयोग से पूरा किया गया था। राज्य में पहली बार नर्मदा नदी के दोनों किनारों पर इतना बड़ा वृक्षारोपण अभियान चलाया गया था। ईओडब्ल्यू की जांच में ये साफ हो जाएगा कि बजट की धनराशि का किसी भी तरह दुरुपयोग नहीं किया गया था। वन विभाग की ही एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार इस अभियान में लगाए गए लगभग साठ फीसदी वृक्ष अभी भी जिंदा हैं और तीस फीसदी वृक्षारोपण हर अभियान में असफल होता ही है। ऐसे में केवल दस फीसदी वृक्षों के आंकड़ों के आधार पर रचा गया ये घोटाले का मायाजाल आगे चलकर कुछ अधिकारियों को निपटाने के साथ ही ठंडा पड़ जाएगा।

  • जनता से छीना प्रथम नागरिक चुनने का अधिकार

    जनता से छीना प्रथम नागरिक चुनने का अधिकार

    भोपाल,26 सितंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। मध्यप्रदेश में आगामी नगरीय निकाय चुनाव में नगर निगम के महापौर सहित नगर पालिका और नगर परिषद में अध्यक्ष का चुनाव अब पार्षद करेंगे। अभी तक जनता को इनके चुनाव करने का अधिकार था, लेकिन बुधवार 26 सितंबर को हुई कैबिनेट बैठक में इस पर मोहर लगा दी है कि अब पार्षद महापौर और अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। नई व्यवस्था लागू करने के लिए मध्यप्रदेश नगर पालिक अधिनियम में संशोधन किया गया है। अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनाव में 20 साल बाद अप्रत्यक्ष तौर पर महापौर और अध्यक्षों का चुनाव होगा। वहीं नगरीय निकाय चुनाव के पहले होने वाले परिसीमन का समय 6 माह से घटाकर सरकार ने 2 माह कर दिया है। अभी तक परिसीमन और चुनाव के बीच का समय 6 महीने होना जरूरी था।

    भाजपा ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। भाजपा को यह आशंका है कि अप्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर और अध्यक्षों के चुनाव हुए तो उसको नुकसान हो सकता है। जबकि कांग्रेस अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव करवाकर प्रदेश की ज्यादा से ज्यादा नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में अपने समर्थकों को महापौर और अध्यक्ष बनाना चाहती है। मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनावों का गणित देखा जाए तो दोनों ही प्रमुख पार्टियों के 40-40 प्रतिशत पार्षद जीतते हैं। वहीं, निर्दलीय और अन्य दलों के पार्षद 20 प्रतिशत पर ही सिमट जाते हैं। कमलनाथ सरकार के इस फैसले के बाद कांग्रेस समर्थित पार्षदों के अलावा निर्दलीय और अन्य दल के पार्षद भी सत्ताधारी दल के साथ आना चाहेंगे। जिसके चलते प्रदेश के ज्यादातर नगरीय निकायों में कांग्रेस समर्थित जनप्रतिनिधियों की जीत होगी।

    कमलनाथ कैबिनेट ने इसके अलावा आपराधिक छवि वाले पार्षदों पर सख्ती करने का प्रस्ताव भी पारित किया है। अब ऐसे पार्षदों के दोषी पाए जाने पर उन्हें 6 माह की सजा और 25 हजार जुर्माने का प्रावधान सरकार ने किया है। कुल मिलाकर देखा जाए तो अभी तक प्रत्यक्ष प्रणाली से नगर निगम महापौर और नगरपालिका तथा नगर परिषद अध्यक्ष को जनता सीधे चुनती थी लेकिन बुधवार को नगरीय निकाय चुनाव को लेकर आए कैबिनेट के नए फैसले के तहत अब जनता सीधेतौर पर महापौर और अध्यक्ष का चुनाव नहीं कर सकेगी, इन्हें अब जनता के चुने हुए पार्षद ही चुनेंगे।

  • बुंदस जैसे अफसरों का सोच आज भी औपनिवेशिक

    बुंदस जैसे अफसरों का सोच आज भी औपनिवेशिक

    (डॉ अजय खेमरिया)
    मप्र में छतरपुर के कलेक्टर कलेक्टर है मोहित बुंदस।सीधी भर्ती के आईएएस अफसर है इन्हें हटाने के लिये जिले की तीन पार्टियों के सभी पांच विधायक मप्र के सीएम से गुहार लगा चुके है।बीजेपी के विधायक राजेश प्रजापति को कलेक्टर महोदय ने पूरे दो घण्टे तक बाहर बिठाए रखा मिलने से पहले।कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे सत्यव्रत चतुर्वेदी के विधायक भाई आलोक चतुर्वेदी भी कुछ इन्ही अनुभवों से बेजार है।जिस सपा विधायक के समर्थन से कमलनाथ सरकार टिकी है वे राजेश शुक्ला भी मुख्यमंत्री से फरियाद कर रहे है कि कलेक्टर को हटाया जाए क्योंकि वे न किसी की सुनते है न फील्ड में जाते।बाबजूद मोहित बुंदस पर मुख्यमंत्री की कृपा बरस रही है।यह पहला मौका नही है जब मप्र में आईएएस अफसरों के सामने इस तरह चुने गए विद्यायको को लाचार और विवश होकर खड़ा होना पड़ा है।असल में मप्र में लगातार अफसरशाही की निरंकुशता बढ़ रही है न केवल कमजोर बहुमत वाली मौजूदा कमलनाथ सरकार में बल्कि मजबूत बहुमत से चलीं बीजेपी की सरकारों में भी अफसरशाही से जनता ही नही सत्ता पक्ष के विधायक और मंत्री तक परेशान रहे है।
    आखिर क्या वजह है कि भारत मे आज भी कलेक्टर का पद इतना ताकतवर होता जा रहा है इस उलटबांसी के की देश मे लोकतंत्र निचले स्तर पर मजबूत हुआ है लोगों में लोकतांत्रिक अधिकार और जागरूकता का व्यापक प्रसार हुआ है।कलेक्टर की ताकत अपरिमित रूप में बढ़ रही है।यह जानते हुए की इस पद का निर्माण गोरी हुकूमत ने औपनिवेशिक साम्राज्य की मैदानी पकड़ मजबूत करने के लिये किया था।कलेक्टर मतलब राजस्व औऱ लगान कलेक्शन करने वाला साहब।अंग्रेजी राज में इसे सूबा साहब भी कहा जाता था।क्योंकि तब आज की तरह जिलों की छोटी इकाइयां नही थी।आईसीएस की भर्ती भी अंग्रेजों के पास थी और शरुआती दौर में परीक्षा भी इंग्लैंड में ही हुआ करती थी।यानी समझ लीजिये ये पद जो बाद में आईसीएस की जगह आईएएस में तब्दील हुआ है उसकी गर्भ नाल उस अंग्रेजी साम्राज्यवाद में छिपी है जो भारतीयों को दोयम दर्जे का इंसान मानती थी।क्या यही मानसिकता इन अफसरों को मैदान में परिचालित करती है?मोहित बुंदस जैसे प्रहसन इसे साबित करने के लिये पर्याप्त आधार प्रदान करते है।सीधी भर्ती के अधिकतर आईएएस अफसर खुद को भारत मे सबसे काबिल और ताकतवर शख्स मानते है वे सोचते है कि यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस संवर्ग हासिल करने के बाद दुनियां में अब कुछ भी ऐसा नही जो उनसे ऊपर हो।अधिकतर आईएएस अधिकारी जब प्रशिक्षण प्राप्त कर मैदानी पदस्थापना पर आते है तो उन्हें इस बात का अहसास रहता है कि देश के सभी नेता अनपढ़ प्रायः है कानून औऱ नियमों का उन्हें कोई ज्ञान नही है।और इस देश मे हर कोई कानून तोड़कर गलत काम करना चाहता है।आईएएस ही कानून के अकेले रक्षक है उन्हें हर हाल में अडिग,सख्त,और अनुदार बने रहना है।वस्तुतः यह भारत की आइएएस बिरादरी का स्थायी चरित्र बन गया है।सवाल यह है कि क्या वाकई यूपीएससी की परीक्षा प्रवीण शख्स दुनिया का सर्वाधिक श्रेष्ठ और प्रतिभाशाली माना जाना चाहिये?पिछले 70 साल से तो यह मान ही लिया जाना चाहिये क्योंकि हर दिन इस बिरादरी की ताकत बढ़ती गई है।जिस अनुपात में सरकारों के काम बढ़े ,राज्य का चेहरा लोककल्याण के नाम पर जीवन के हर क्षेत्र में हस्तक्षेपनीय बना उसी अपरिमित अनुपात में आईएएस बिरादरी की ताकत,रुतबा,और अहं बढ़ता चला गया है।आज का कलेक्टर सही मायनों में अंग्रेज बहादुर से कम नही है औपनिवेशिक सूबों की तरह सूबा साहब को आज चरितार्थ कर रहा है। कलेक्टर दो तीन बीघा के सर्वसुविधायुक्त बंगलों में रहता है उसके पास भारतीय (दोयम)सेवादार है जो घर,रसोई,बगीचों से लेकर दफ्तरों तक हर जगह अर्दली में लगे है।जिसके घर के बिजली, पानी से लेकर खाने पीने तक कि किसी भी सुविधा का कोई ऑडिट नही होता है।जिसकी एक आवाज पर अधीनस्थ अफसरों की फ़ौज आधी रात को शीर्षासन करने पर ततपर रहती है।जिसकी सुरक्षा में 24 घण्टे जवान खड़े रहते है।आप उसकी मर्जी के बगैर उससे मिल नही सकते है।वह आपका फ़ोन उठाये यह उसकी मर्जी पर निर्भर है।वह विकास पुरुष है वह दंडाधिकारी है वह जिले का सुपर बॉस है। वह किसी को भी मुअतिल कर सकता है।वह आज का महाराजा है।उसके काम के घण्टे तय नही है,कोई उससे उसके काम का हिसाब नही मांग सकता है।फिर भी वह सिविल सर्वेंट है।उसका सुपर बॉस राज्य का मुख्य सचिव है जो अपनी बिरादरी का सर्वोच्च सरंक्षणदाता है।मायावती को छोड़कर भारत मे किसी शख्स ने कभी भी इस महाराजा के वर्चस्व को चुनौती नही दी।आईएएस ब्रह्म ज्ञानी है उनकी मेधा स्वयंसिद्ध है वह जिस जगह खड़ा हो जाता है उस क्षेत्र का हुलिया बदल देता है वह कभी कलेक्टर के रूप में विकास के नए आयाम स्थापित करता है जिसकी गवाही नीति आयोग के आभासी जिलों की संख्या दे ही रहे है।आईएसएस कभी बिजली कम्पनी के सीएमडी के रूप में भारत को ऊर्जीकरत कर देता है,कभी वह लोकस्वास्थ्य, कभी मेडिकल एजुकेशन, संचार,उधोग,सिविल एवियेशन,विज्ञान,स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, पीएचई, जल संसाधन ,नगर विकास,जनसम्पर्क से लेकर शासन के हर क्षेत्र को अपनी प्रतिभा से अलंकृत करता रहता है।जब इतनी प्रतिभा किसी एक हाड़मांस में घनीभूत हो तब आपके पास उसकी अद्वितीय श्रेष्ठता को अधिमान्यता देने का कोई अन्य विकल्प शेष ही नही रह जाता है।
    सवाल यह भी है कि एक व्यक्ति के रूप में इस वर्ग के इस अवतार को आखिर विकसित किसने किया है?हमारी व्यवस्था में विधायिका ,कार्यपालिका, और न्यायपालिका का स्पष्ट विभाजन है लेकिन यहां चर्चिल की भविष्यवाणी ने फलित होकर सब कुछ अस्त व्यस्त कर दिया है शक्ति पृथक्करण का राजनीतिक सिद्धान्त तिरोहित हो चुका है कतिपय कमजोर चरित्र के लोगों ने सरकार के तीनों अंगो को अपनी अंतर्निहित भूमिका से भटका दिया है।सत्ता के लिये असुरक्षा की मार से पीड़ित नेताओं ने कभी इस तरफ सोचा ही नही की वह अपने सत्ता सुख को बचाने के लिये किस तरह उस व्यवस्था के दास बनते चले जा रहे है जो उनके सार्वजनिक अनुभवों से अधीनस्थ अमले के रूप में काम करने के लिये प्रावधित है।इस असुरक्षा की ग्रन्थि ने ही आज भारत की लोकशाही को बाबूशाही में बदल दिया है और मोहित बुंदस असल में इसी बाबूशाही के प्रतिनिधि भर है।ऐसा नही है कि इस बिरादरी में सभी एक जैसे है कुछ अफसर अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करने का प्रयास करते है।मप्र में एक मुख्य सचिव के समकक्ष अफसर है जो जिस विभाग में रहते है उसमें ढल कर काम करते है।कुछ कलेक्टर के रूप में भी संवेदनशीलता दिखाते है लेकिन ऐसे अफसरों की संख्या बहुत ही कम है।
    प्रशासन के स्तर पर जिलाधिकारी को इस योग्य माना जाता है कि वह अपने अधीनस्थ अधिकारियों पर नियंत्रण में सक्षम है लेकिन 70 साल के अनुभव बताते है कि जिलों में ऐसा नही हुआ है।मप्र में हर मंगलवार जिला मुख्यालय पर जनसुनवाई होती है वहाँ औसतन दो तीन सौ लोग सुदूर गांवों से अपनी फरियाद लेकर कलेक्टर के पास आते है इसका मतलब अधीनस्थ अमला जनता की सुनवाई नही कर रहा है।अफसरशाही की संवेदनशीलता को खारिज करने के लिये हजारों मामले सामने रखे जा सकते है।जाहिर है देश मे इस वर्ग की उपयोगिता और योगदान पर विचार करने का समय आ गया है।क्या भर्ती के समय सेवा करने का जो जबाब अभ्यर्थियों द्वारा दिया जाता है वह सेवा में आने के बाद किसी औपनिवेशिक विशेषाधिकार को स्थापित कर देता है?अनुभव तो इसकी तस्दीक करते ही है।इसलिये समय आ गया है कि हम इस आईएसएस सिस्टम और इसकी भागीदारी पर खुले मन से पुनर्विचार करें।गांधी जी का एक प्रसंग यहां उदधृत किया जाना चाहिये।अहमदाबाद में अपने एक परिचित के बेटे नानालाल के आईसीएस में सिलेक्ट होने पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि सिविल सेवक भारत का भला नही कर सकते है।यह एक बुराई है।आज गांधी की 150 वी जन्मजयंती बर्ष में उनके विचारों के आलोक में आईएएस सिस्टम पर विचार किया जाना चाहिये।
    मौजूदा केंद्र सरकार ने निजी क्षेत्र के पेशेवर लोगों को लैटरल एंट्री के जरिये सीधे आईएएस के समकक्ष भर्ती का प्रयोग किया है इसे नए भारत मे समय की मांग कहा जा सकता है।
    तब तक सर्वशक्तिमान,सर्वाधिक प्रतिभाशाली, सर्वाधिक बुद्धिमान और कानून के रखवालों के अधीन आनन्द लीजिये।
    यह अलग बात है कि शिवपुरी जिले के एक कलेक्टर साहब को प्रधानमंत्री आवास योजना की बुनियादी गाइडलाइंस नही पता है वे आजकल एक दूसरे जिले में कलेक्टर है। सीधी भर्ती से इनकी पोजिशन भारत बर्ष में अंडर 30 थी।
    मान्यता यही है की कलेक्टर कभी गलती नही करते है उनसे ज्यादा किसी को कुछ नही आता है।इसीलिए मोहित बुंदस सभी विधायकों को घण्टे भर बाहर खड़ा रखते है।भले ही विधायक का स्थान प्रोटोकॉल में मुख्य सचिव से ऊपर है।

  • सब्सिडी के बाद भी बिजली संकट चिंताजनक बोले कमलनाथ

    सब्सिडी के बाद भी बिजली संकट चिंताजनक बोले कमलनाथ

    मुख्यमंत्री की म.प्र. यूनाइटेड फोरम फॉर पावर इंप्लाईज एवं इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि-मंडल से चर्चा 

    भोपाल,25 जून(प्रेस सूचना केन्द्र)। मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि विद्युत उपभोक्ताओं की समस्याओं के समाधान से ही विद्युतकर्मियों की दिक्कतों का हल संभव है। विद्युतकर्मी बिजली उपभोक्ताओं को निरंतर और गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ उपलब्ध करवाएँ। सरकार उनके हितों का पूरा संरक्षण करेगी। श्री नाथ आज मंत्रालय में मध्यप्रदेश यूनाइटेड फोरम फॉर पावर इंप्लाईज एवं इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल से चर्चा कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री श्री नाथ ने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिले, जिससे वे संतुष्ट हों और विद्युत विभाग की खराब छवि में सुधार आए। इसके लिए सभी विद्युत वितरण कंपनी के कर्मचारी समर्पण भावना से काम करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सभी विद्युतकर्मियों को आत्म-चिंतन करने की आवश्यकता है। विद्युत उपभोक्ताओं के हित संरक्षण के साथ विद्युतकर्मियों की परेशानी दूर करने के लिए सरकार हर वह निर्णय लेगी, जो प्रदेश में विद्युत वितरण की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाएगा।

    विद्युत उपभोक्ताओं की संतुष्टि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली की अघोषित कटौती और विद्युत वितरण व्यवस्था सुचारु न होने के कारण सरकार को नागरिकों की सबसे ज्यादा आलोचना का शिकार होना पड़ा है। उन्होंने कहा कि जरूरत इस बात की है कि विद्युत विभाग अपनी छवि सुधारने के लिए काम-काज में व्यापक सुधार लाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी चिंता यह है कि प्रदेश में विद्युत व्यवस्था स्थाई रूप से सुदृढ़ बने। इसके लिए हमें दीर्घकालीन उपायों पर विचार करना होगा। उन्होंने कहा उपभोक्ताओं की संतुष्टि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा।

    उच्च गुणवत्ता के विद्युत उपकरण ही खरीदें

    मुख्यमंत्री श्री नाथ ने कहा कि हमें माँग और आपूर्ति के बीच में सामंजस्य लाना होगा। ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन में हो रहे घाटे को कम करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाने होंगे। विद्युत चोरी पर सख्ती के साथ अंकुश लगाना होगा। श्री नाथ ने कहा कि उच्च गुणवत्ता के उपकरण ही खरीदे जाएँ। इसके लिए निगरानी आधारित व्यवस्था बनानी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सरकार सब्सिडी की बड़ी राशि विद्युत मंडल को दे रही है। उसके बाद भी कृषि और गैर कृषि क्षेत्रों में विद्युत व्यवस्था को लेकर असंतोष है, यह चिंता का विषय है। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा के गैर पारंपरिक स्रोत पर भी विचार करने को कहा। इससे सस्ती बिजली का उत्पादन होगा और सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय भार में भी कमी आएगी।

    मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने एसोसिएशन के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों से कहा कि वे प्रदेश में विद्युत वितरण में सुधार लाने, ट्राँसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन को कम करने और उच्च गुणवत्ता के उपकरण क्रय करने के संबंध में एक समग्र योजना बना कर दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे एसोसिएशन से सतत् संवाद के लिए उपलब्ध है। जब भी आवश्यकता हो, वे उनसे मिल सकते हैं।

    बैठक में मुख्य सचिव श्री एस.आर. मोहंती और अपर मुख्य सचिव ऊर्जा श्री आई.सी.पी. केशरी उपस्थित थे।