Category: भोपाल

  • नाकामी पर पर्दा ढांकने रजिस्ट्रार ने छोटे मंत्री को ढाल बनाया

    नाकामी पर पर्दा ढांकने रजिस्ट्रार ने छोटे मंत्री को ढाल बनाया


    भोपाल, 11 अप्रैल,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल की प्रभारी रजिस्ट्रार माया अवस्थी ने काऊंसिल में चल रही अनियमिताओं पर पर्दा ढांकने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री को इस बार एक टूल की तरह इस्तेमाल किया है। लंबे समय से पंजीयन के लिए भटक रहे फार्मासिस्टों की शिकायतों पर अखबारी खबरों से परेशान प्रभारी रजिस्ट्रार ने इस बार राज्यमंत्री को अपनी ढाल बनाया। छोटे मंत्री के पास काऊंसिल का प्रभार भी नहीं है इसके बावजूद उन्होंने दौरा करके स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन कर डाला है।


    पिछले लंबे समय से प्रदेश के फार्मासिस्टों और केमिस्टों के बीच पंजीयन को लेकर मारामारी चल रही है।प्रदेश के फार्मेसी कालेजों से हर साल लगभग तीस हजार विद्यार्थी डिग्री लेकर निकलते हैं। फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकृत होने के बाद वे देश और दुनिया के विभिन्न फार्मा संस्थानों में नौकरी पा सकते हैं। इस लिहाज से ये पंजीयन उनके जीवन के लिए सुनहरा मोड़ साबित होता है। फार्मासिस्टों की इसी चाहत का फायदा उठाकर काऊंसिल में लंबे समय से हेराफेरी चलती रही है। प्रभारी रजिस्ट्रार माया अवस्थी का कहना है कि फार्मेसी की डिग्री लेकर आवारा किस्म के लोग खुद को फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकृत करवा लेते हैं और अपने पंजीयन प्रमाण पत्र के नाम पर मेडीकल दूकान खोलकर किराए पर दे देते हैं। इसीलिए हमारा प्रयास रहता है कि कम से कम फार्मेसिस्टों का पंजीयन हो ताकि अराजकता न फैले।


    यही तर्क देकर उन्होंने आज छोटे मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल का दौरा काऊंसिल में कराया। यहां मंत्रीजी के निर्देश पर फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन को बुला लिया गया। रजिस्ट्रार ने मंत्रीजी से कहा कि अध्यक्ष महोदय उन पर वाजिब पंजीयन जारी करने का दबाव बनाते हैं। इस पर अध्यक्ष ने मंत्रीजी को बताया कि हजारों विद्यार्थी परेशान घूमते रहते हैं इसीलिए वे रजिस्ट्रार को काऊंसिल में बैठने और प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश देते रहते हैं। फूड एवं ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की रजिस्ट्रार और काऊंसिल की प्रभारी रजिस्ट्रार माया अवस्थी ने शिकायती लहजे में मंत्री जी से कहा कि अध्यक्ष महोदय यहां पदस्थ रजिस्ट्रार कुमारी दिव्या पटेल को भी जांच उपरांत पंजीयन जारी करने का निर्देश देते रहे हैं। कुमारी पटेल इन दिनों मातृत्व अवकाश पर गई हुईं हैं इसलिए मुझे काऊंसिल का प्रभार दिया गया है। मेरे पर इतना समय नहीं है कि मैं यहां बैठकर पंजीयन जारी करूं।


    गौरतलब है कि मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल राज्य सरकार के निर्देश पर पंजीकृत संस्था है। इस संस्था में फार्मा क्षेत्र के चुने हुए जन प्रतिनिधियों को चुनाव के बाद पदस्थ किया जाता है। इसी संस्था के फंड से रजिस्ट्रार और स्टाफ का वेतन दिया जाता है। चुनी हुई काऊंसिल संस्था के फंड प्रबंधन और जनता की सुविधाओं के लिए प्रयास करती है। फंड का प्रबंधन रजिस्ट्रार के हाथ में होता है । राज्य प्रशासनिक सेवा से भेजे गए रजिस्ट्रार की नाकामियों का खमियाजा सरकार और काऊंसिल दोनों को भुगतना पड़ता है।


    फार्मा क्षेत्र को मजबूती देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान के अंतर्गत युवाओं को अवसर दिए जा रहे हैं. इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए ही काऊंसिल की चुनी हुई परिषद रजिस्ट्रार पर युवाओं के हित में जांच उपरांत पजीयन जारी करने के निर्देश देती रहती है। पिछले कुछ सालों से गड़बड़ियों को लेकर शिकायतें सामने आती रहीं हैं लेकिन सरकारी अमला अपना भ्रष्टाचार और नाकामी छुपाने के लिए तरह तरह के बहाने बनाता रहा है।


    विधानसभा चुनावों के पहले इंदौर की विजय नगर पुलिस ने जिस फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह को गिरफ्तार किया था उसमें फार्मेसी काऊंसिल के तीन बाबू संजय तिलकवार, विजय शर्मा और आरएन पांडे भी धरे गए थे। उन्हें तो तभी निलंबित कर दिया गया था पर उन्होंने जिन फर्जी मार्कशीटों पर फार्मासिस्टों का पंजीयन कराया था उन्हें तत्कालीन रजिस्ट्रार शैलेन्द्र हिनोतिया ने मंजूरी दी थी। शैलेन्द्र हिनोतिया को बगैर जांच किए पंजीयन जारी करने का दोषी पाया गया था लेकिन उन्होंने अपनी ऊंची पहुंच का उपयोग करके खुद को गिरफ्तारी से बचा लिया। चुनावों की बेला में सरकारी असफलता की पोल न खुले इसके लिए काऊंसिल के पदाधिकारियों ने पूर्व की परिषद की गलतियों को नजरंदाज करने का अनुरोध करके मीडिया और विपक्षी दलों के लोगों को शांत किया था।


    माया अवस्थी को भी भय है कि वे बाबुओं की नोटशीट पर दस्तखत करके पंजीयन जारी करेंगी तो भविष्य मे उन पर भी घोटाले में शामिल होने के आरोप लग सकते हैं। दिव्या पटेल ने भी अपने कार्यकाल में गिने चुने पंजीयन जारी किए । ये प्रमाण पत्र भी भारी ऊहापोह के बीच बाबुओं की सिफारिश पर जारी किए गए थे। यहां भेजे जाने वाले रजिस्ट्रार असली नकली अभ्यर्थियों की छानबीन नहीं करना चाहते वे तो बाबुओं की नोटशीट को ही आधार बनाते हैं । इसकी वजह से काऊंसिल में लंबे समय से भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है। वर्तमान परिषद फार्मा सेक्टर के प्रतिभाशाली लोगों के बीच से आई है इसलिए रजिस्ट्रार के स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों पर लगाम कसी गई है।


    काऊंसिल की परिषद के सदस्यों का कहना है कि राज्य के फार्मा सेक्टर को बल देने के लिए बड़ा वर्क फोर्स चाहिए। राज्य और केन्द्र सरकार की भी यही मंशा है। पंजीयन जारी करने की प्रक्रिया बड़ी पारदर्शी होती है। कालेजों से डिग्री पाने वाले विद्यार्थी यदि सभी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते हैं तो उन्हें पंजीयन जारी कर दिया जाना चाहिए। शासन को कई बार इसकी सूचना दी जा चुकी है कि फार्मा सेक्टर से जुड़ा पूर्णकालिक रजिस्ट्रार यहां पदस्थ किया जाए ताकि वह आवश्यक जांच उपरांत फार्मासिस्टों को पंजीकृत कर सके। अब सारी प्रक्रिया आनलाईन हो गई है इसलिए इसमें गड़बड़ी की संभावना नहीं है। इसके बावजूद प्रभारी रजिस्ट्रार न तो खुद दस्तावेंजों की जांच करवाने में इच्छुक हैं और न ही वे पंजीयन जारी करने मे रुचि लेती हैं। इससे सरकार को मिलने वाली फीस भी नहीं मिल पाती और युवाओं को चक्कर काटना पड़ते हैं जिससे वे दलालों के चंगुल में फंस जाते हैं। काऊंसिल इन्हीं गड़बड़ियों का निराकरण करने का प्रयास कर रही है।


    माया अवस्थी ने अपनी जवाबदारियों से पल्ला झाड़ने के लिए ही इस बार छोटे मंत्री को सामने ला खड़ा किया है। उनके पास फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन का प्रभार भी है। यहां फूड ड्रग के नमूनों की जांचें भी लंबित पड़ी हैं। ड्रग निर्माण की अनुमतियां जारी करने में भी भारी हेराफेरी की शिकायतें आ रहीं हैं। शायद यही वजह है कि छोटे मंत्रीजी को रजिस्ट्रार का पक्ष लेना न्याय जान पड़ रहा है। आज के दौरे में मंत्रीजी के साथ प्रभारी रजिस्ट्रार श्रीमती माया अवस्थी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी भी उपस्थित थे।

  • भेल संगम गृह निर्माण सहकारी संस्था की आमसभा में कई फैसले

    भेल संगम गृह निर्माण सहकारी संस्था की आमसभा में कई फैसले


    भोपाल,29 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भेल संगम गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित भोपाल के सदस्यों ने आज अपनी वार्षिक आम सभा में शहर को सुंदर बनाने के लिए संस्था की ओर से कई निर्णय पारित किए हैं। सहकारिता अधिनियम के अनुसार संस्था भूखंडों को कलेक्टर गाईडलाईन के अनुसार युक्ति संगत बनाएगी। बेनामी सदस्यों के भूखंडों के आबंटन निरस्त किए जाएंगे ताकि संस्था के क्षेत्राधिकार में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें और राजधानी के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में सहयोग दिया जा सके।


    संस्था के अध्यक्ष सुरेश कर्नाटक की अध्यक्षता में आयोजित वार्षिक आमसभा में संस्था के तमाम सदस्यों ने भाग लिया और फैसलों पर अपनी सहमति की मुहर लगाई। संस्था के वरिष्ठ सदस्य आरएस ठाकुर ने पूर्व में किए गए विकास कार्यों को आगे ले जाने में नए सदस्यों के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी अपने दायित्वों को पूरा करके सहकारिता आंदोलन को मजबूती प्रदान कर रही है।


    संस्था के सदस्य नितिन वर्मा ने बताया कि एम्स अस्पताल परिसर के नजदीक साकेत नगर सामुदायिक भवन में आयोजित इस वार्षिक आमसभा में पारंपरिक तरीकों से हटकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। सभी सदस्यों को नियमानुसार उपस्थित रहने की सूचना दी गई थी। संस्था की सदस्यता सूची के प्रकाशन के लिए सभी सदस्यों से अपने सदस्यता संबंधित दस्तावेज जमा कराने का अनुरोध किया गया था। साफ निर्देश दिया गया कि जो सदस्य अपने दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाएंगे उनकी सदस्यता निरस्त कर दी जाएगी।

    संस्था के निर्देश के बाद सभी रहवासियों ने वार्षिक आमसभा में पहुंचकर नए फैसलों पर सहमति जताई है।


    सहकारिता विभाग के निर्देशानुसार पूरे आयोजन की वीडियोग्राफी कराई गई है। पिछली आडिट रिपोर्टों का अनुमोदन कराया गया है और नए वित्तीय सत्र के लिए अनुमानित बजट का अनुमोदन कराया गया है। संस्था ने फैसला लिया है कि भूखंडों से लगी हुई अतिरिक्त भूमियां कलेक्टर रेट पर युक्ति संगत बनाई जाऐंगी। कालोनी में जिन भूखंडों के सामने सड़क,नल लाईन और नालियों का निर्माण नहीं किया गया था उन लंबित विकास कार्यों को तय समयसीमा में पूरा किया जाएगा। जो भूखंड नगर निगम से मुक्त कराए गए हैं उन पर तय की गई विकास दर पर भवन निर्माण कराए जाने का निर्णय लिया गया है।


    साकेत सामुदायिक भवन सेवा न्यास के उपाध्यक्ष जे.पी. साहू का नाम नए प्रतिनिधि के रूप में अनुमोदन किया गया है।इसके साथ ही अब तक प्रतिनिधि रहे एसपी शुक्ला पद मुक्त हो जाएंगे। श्री शुक्ला के विरुद्ध कई अनियमितताओं की शिकायतें मिलीं थीं जिनकी जांच चल रही है। संस्था ने पूर्व सदस्य रहे नन्नू लाल राज की सदस्यता निरस्त कर करने की घोषणा भी की है।भौतिक सत्यापन के बाद अवैध सदस्यों का निष्कासन होगा और लावारिस संपत्तियों का वैधानिक तौर पर निष्पादन भी किया जाएगा।

  • बारिश में डामरीकरण करके जनधन की बर्बादी

    बारिश में डामरीकरण करके जनधन की बर्बादी


    भोपाल,2 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारी बारिश ने राजधानी की सड़कें क्षतिग्रस्त कर दी हैं पोल खुलने के डर से इंजीनियरों और ठेकेदारों ने मरम्मत का कार्य भी शुरु कर दिया है। कई स्थानों पर भारी बारिश के बीच डामर की सड़कें बनाए जाने का कार्य भी चल रहा है जबकि सड़के उखड़ने की वजह ही बारिश का पानी रहा है।


    ऐसा ही एक दृश्य बिट्टन मार्केट के नजदीक वंदेमातरम चौराहे पर देखा जा सकता है। सड़कों की मरम्मत करने वाली रिकांडो कंपनी ने भारी बारिश से लबालब सड़कों पर भी डामर की मरम्मत जारी रखी है। डामर पानी में पकड़ता ही नहीं इसके बावजूद ठेकेदार धड़ल्ले से अपना काम जारी रखे हुए है।


    सोमवार दो सितंबर को पानी भरी सड़क पर रिकांडो कंपनी के कर्मचारियों ने सड़क पर डामर गिट्टी डालने का कार्य जारी रखा है। जब मौके पर मौजूद रिकांडो कंपनी के सुपरवाईजर आरएस राजपूत से पूछा गया कि वे बारिश में ये कार्य क्यों कर रहे हैं। उसने जबाब दिया कि हमने जब माल तैयार कर लिया है तो क्या हम उसे वापस ले जाएंगे। पीडब्यूडी तो हमेशा से बारिश के बाद ही सड़कों की मरम्मत शुरु करता है। सीमेंट की सड़कें जरूर इस सीजन में बनाई जा सकती हैं।


    लोक निर्माण विभाग के स्थानीय अफसरों ने तो इस मसले पर बात करने से ही इंकार कर दिया। उनका कहना था कि जनता की सुविधा के लिए सड़कों की मरम्मत करना हमारी मजबूरी है।इसके लिए हम बारिश खत्म होने का इंतजार नहीं कर सकते।उनसे पूछा गया कि खराब निर्माण की वजह से सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इस पर विभाग के तमाम अफसरों ने चुप्पी साध ली है।
    गौरतलब है कि राजधानी में डामरीकरण की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। इससे सड़कें ऊंची हो रहीं हैं और मकानों में पानी भरने की शिकायत आ रही है। इसके विपरीत सरकारी अमला ऐसी ही सड़कें बनाता है जो बार बार टूटें और उनके रखरखाव का कार्य बार बार दिया जाता रहे।

    रिकांडो कंपनी के सुपरवाईजर पीएस राजपूत ने बताया कि हम केवल आदेश का पालन कर रहे हैं,
  • नर्मदा को सीवरेज से मुक्त बनाने में सहयोग की अपील

    नर्मदा को सीवरेज से मुक्त बनाने में सहयोग की अपील

    भोपाल19 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी द्वारा नर्मदापुरम में जर्मन बैंक केएफडब्ल्यू की सहायता से सीवरेज परियोजना पर कार्य किया जा रहा है वर्तमान में 144 किलोमीटर में से 25 किलोमीटर सीवरेज लाइन बिछा दी गई है। मलजल के शोधन के लिए नगर में 21 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा रहा है। सीवर लाइन बिछाने के बाद खुदाई उपरांत अस्थाई रोड रेस्टोरेशन कर दिया जाता है। इसके उपरांत मेनहोल निर्माण, हाउस सर्विस चैम्बर निर्माण के उपरांत स्थाई रोड रेस्टोरेशन का कार्य किया जाता है इस पूरी प्रक्रिया में 20-25 दिन का समय लग जाता है। सीवरेज लाइन बिछाने का कार्य सडक के बीचो बीच में से किया जाता है जिसके कारण नल कनेक्शन एवं पाइप लाइन भी क्षतिग्रस्त होती है जिसका समय समय पर सुधार कार्य किया जाता है, ऐसी स्थिति में नागरिकों को भी असुविधा का सामना करना पडता है। मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी सभी सम्मानीय नागरिकों से अपील करती है कि नर्मदापुरम सीवरेज परियोजना का कार्य मॉ नर्मदा की निर्मलता बनाऐं रखने के लिए किया जा रहा है अतः कार्य अवधि में धैर्य रखते हुए सहयोग करें। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा प्रति सप्ताह कार्य की समीक्षा भी की जा रही है।

  • राष्ट्रपति ज्योति मुर्मू का अभिनंदन

    राष्ट्रपति ज्योति मुर्मू का अभिनंदन

    भोपाल, 3 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु को नई दिल्ली वापसी पर राजा भोज विमान तल पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भावभीनी विदाई दी। श्रीमती मुर्मु एक दिवसीय प्रवास पर भोपाल आई थीं।
    राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु को विमानतल पर राज्यपाल श्री पटेल और मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भगवान श्री कृष्ण और राधा की अष्टधातु की प्रतिमा स्मृति-चिन्ह के रूप में भेंट की। महापौर श्रीमती मालती राय, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, पुलिस महानिदेशक श्री सुधीर सक्सेना, पुलिस कमिश्नर श्री हरिनारायण चारी मिश्रा भी उपस्थित थे। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने भारतीय सेना के विमान से लगभग साढ़े 4 बजे दिल्ली के लिए प्रस्थान किया।

  • जनसंवेदना ने सेवा कार्य करके दिखाया:विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम

    जनसंवेदना ने सेवा कार्य करके दिखाया:विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम

    भोपाल,11जुलाई(प्रेस इंफॉर्मेशन सेंटर)जनसंवेदना सामाजिक संस्था के 19 वें स्थापना दिवस पर प्रकाशित मानव सेवा ही माधव सेवा स्मारिका का विमोचन आज विधानसभा परिसर में  विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने किया। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक राधेश्याम अग्रवाल ,उदयवीर सिंह एवं कई अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे ।

     विधानसभा अध्यक्ष श्री गौतम ने कहा कि मानव सेवा ही माधव सेवा के मूल मंत्र से जनसंवेदना अपना सेवा कार्य कर रही है जिससे जरूरतमंदों को सहायता मिल रही है । निराश्रित बेसहारा लावारिस की  मृत्यु हो  जाने पर उसका अंतिम संस्कार का सेवा कार्य गहरे समर्पण और धीरज से ही संभव है।संस्था ने अपनी उपयोगिता साबित की है

     

  • सहकारी आंदोलन को सार्थक करते मुकुंद राव भैंसारे

    सहकारी आंदोलन को सार्थक करते मुकुंद राव भैंसारे

    भोपाल,27जून( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सहकारिता का क्षेत्र भारत के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। विकास की दौड़ में आज सहकारिता अप्रासंगिक होता नजर आ रहा है, इसके बावजूद मध्य प्रदेश का एक छोटा सा अधिकारी आज सहकारिता को सामाजिक बदलाव की कडी बनाए हुए है। राजधानी भोपाल में जिस तरह से सहकारिता को बदलाव की भूमिका में देखा जा रहा है उसके लिए विभाग के एक डिप्टी ऑडिटर मुकुंद राव भैंसारे पर प्रशासन की भी निगाह है।प्रशासन ने उनके कार्य को पुरस्कृत किया है और सहकारिता के मॉडल के रूप में प्रस्तुत भी

              मुकुंदराव भैंसारे को मध्य प्रदेश का सहकारिता विभाग फायर ब्रिगेड की तरह इस्तेमाल करता है । जिस गृह समिति में गड़बड़ियों की शिकायत मिलती है उन्हें वहां प्रशासक के रूप में तैनात कर दिया जाता है । उन्होंने राजधानी के भारत नगर कि जिस तरह से कायापलट की उससे नगर निगम सहकारिता विभाग और प्रशासन का हर तबका अचंभित है ।श्री भैंसारे ने भारत नगर को ना केवल एक साफ-सुथरे मोहल्ले में तब्दील कर दिया है बल्कि उसे आत्मनिर्भर आर्थिक आजादी भी प्रदान की है।इसी के परिणामस्वरूप भारत नगर को स्वच्छता पुरुस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।परिश्रम के इस पुरस्कार ने तीन बार समूचे सहकारिता विभाग की शान बढ़ाई है।

            स्वच्छता के मापदंडों पर खरा उतरने वाले भारत नगर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। भोपाल नगर पालिक निगम क्षेत्र में अव्वल आने वाली ये एकमात्र रहवासी समिति है जिसका संचालन राज्य का सहकारिता विभाग कर रहा है। विभाग की ओर से नियुक्त तत्कालीन प्रशासक मुकुंद राव भैंसारे के आव्हान पर रहवासियों ने विभिन्न चरणों में सफल सामाजिक आयोजन किए थे।

     रोहित नगर के रहवासी लंबे समय से अपने प्लाट पर मकान बनाने के लिए निवर्तमान पूर्व अध्यक्ष घनश्याम सिंह राजपूत के घर के चक्कर काट रहे थे । उन्हें उनकी जमीन ही नहीं मिल रही थी ।समिति के 550 सदस्यों में से 330सदस्य अपना आशियाना आज भी तलाश रहे हैं।श्री भैसारे ने कार्यभार संभालने के बाद खाली पड़ी लगभग ढाई एकड़ जमीन पर प्लाट दर्शाने की कार्यवाही शुरू कर दी।उन्होंने चुनाव कराने की भी प्रक्रिया जारी रखी है। एक स्कूल संचालक जो इस जमीन पर कब्जा जमाना चाहता था उसने अपने राजनीतिक संबंधों का इस्तेमाल करके श्री भैंसारे को हटाने का षड्यंत्र रचा लेकिन उनके कुशल प्रशासन को देखकर आला अफसरों ने रोहित नगर की विकास यात्रा बदस्तूर जारी रखी। इस गृह निर्माण समिति के नागरिकों की दूसरी पीढ़ी अपने हक की लड़ाई लड़ रही है। सहकारिता विभाग के अफसर अपने सामाजिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए आज संकल्पित होकर खड़े हैं।मैदान में उनके बुलंद इरादों को साकार करने की जवाबदारी श्री भैंसारे कुशलता पूर्वक निभा रहे हैं,ये राहत की बात है।

  • भोपाल विलीनीकरण दिवस पर छुट्टी रहेगी-शिवराज सिंह

    भोपाल विलीनीकरण दिवस पर छुट्टी रहेगी-शिवराज सिंह

    भोपाल,1 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अगले वर्ष से गौरव दिवस पर एक जून को भोपाल में अवकाश रहेगा। आने वाली पीढ़ी भोपाल के इतिहास से रू-ब-रू हो सके, इस उद्देश्य से भोपाल के इतिहास पर केंद्रित शोध संस्थान की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भोपाल गौरव दिवस पर भोपाल गेट पहुँच कर सफाई मित्रों का सम्मान किया। उन्होंने भोपाल विलीनीकरण दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि असंख्य लोगों के बलिदान और वीर सपूतों के संघर्ष के परिणामस्वरूप देश की स्वतंत्रता के 2 साल बाद एक जून 1949 को भोपाल, भारत का अभिन्न अंग बना।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने रंग-गुलाल, पुष्प-वर्षा और आतिशबाजी के बीच राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने जन-गण-मन गान के बाद भारत माता को पुष्पांजलि अर्पित की और मशाल जला कर विलीनीकरण के शहीदों का स्मरण किया। शहीदों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भोपाल विलीनीकरण आंदोलन पर केंद्रित चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नई पीढ़ी को यह नहीं मालूम कि 15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतंत्र होने के साथ भोपाल स्वतंत्र नहीं हुआ था। नवाब ने भोपाल के भारत में विलय से इंकार कर दिया था। इस स्थिति में भोपाल में विलीनीकरण आंदोलन आरंभ हुआ। उन्होंने श्रद्धेय उद्धव दास मेहता, बालकृष्ण गुप्ता और डॉ. शंकर दयाल शर्मा के संघर्ष का स्मरण करते हुए बोरास के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने लगभग 100 सफाई मित्रों का शॉल पहना कर सम्मान किया। जानकारी दी गई कि भोपाल के सभी वार्डों में स्वच्छता कर्मियों का सम्मान किया जा रहा है।

    चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा एक जून को भोपाल का गौरव दिवस मनाने की पहल से आने वाली पीढ़ी भोपाल के इतिहास से अवगत होगी। महापौर श्रीमती मालती राय ने भोपालवासियों को गौरव दिवस की शुभकामनाएँ दी। पूर्व महापौर श्री आलोक शर्मा उपस्थित थे।

  • पांच नंबर मार्केट की बेशकीमती जमीनें हड़पने की तैयारी में आशुतोष तिवारी

    पांच नंबर मार्केट की बेशकीमती जमीनें हड़पने की तैयारी में आशुतोष तिवारी


    भोपाल, 14 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश हाऊसिंग एवं इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमेन आशुतोष तिवारी के निर्देश पर पांच नंबर मार्केट की सभी दूकानें गिराकर वहां पांच मंजिला बाजार बनाने की तैयारी की जा रही है। ये दूकानें अगले चुनाव से पहले मंहगे दामों पर बेचने की योजना बनाई गई है। आज इस संबंध में कमिश्नर चंद्रमौली शुक्ला ने स्वयं बाजार स्थल पहुंचकर भाजपा कार्यकर्ताओं से चर्चा की । उन्होंने आश्वासन दिया कि इस बाजार में भाजपा समर्थित आबंटितियों का ध्यान रखा जाएगा।
    अरेरा कालोनी स्थित पांच नंबर मार्केट नए भोपाल की मौके की जगह है और यहां जमीनों का मूल्य सबसे अधिक है। इसे देखते हुए चेयरमेन आशुतोष तिवारी ने यहां नया मार्केट बनाने की लंबित योजना को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं। आज कमिश्नर चंद्रमौली शुक्ला ने स्वयं स्थल निरीक्षण किया और भाजपा समर्थित व्यापारियों की मांगों पर गौर करते हुए उन्हें सहयोग किए जाने का आश्वासन दिया। इस चर्चा को गोपनीय रखा गया और अन्य लोगों को वहां से हटा दिया गया था.

    कमिश्नर चंद्रमौली शुक्ला को बरगलाते हुए तिवारी के गुर्गे


    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा संगठन से करीबी रखने वाले कुछ व्यापारियों ने इस बेशकीमती जमीन को हड़पने के लिए बगैर शोरगुल मचाए बाजार को गिराने की रणनीति बनाई है। सूत्र बताते हैं कि अधिकतर आबंटितियों ने कई सालों से हाऊसिंग बोर्ड को न तो किराया दिया है और न ही दूकानों की रजिस्ट्री कराई है। तयशुदा अनुबंध के मुताबिक अब वे इन दूकानों के मालिक भी नहीं रह गए हैं। कुछ पर इतना अधिक किराया लंबित है कि वे अब न तो किराया जमा कर सकते हैं और न ही रजिस्ट्री करा सकते हैं।
    भाजपा संगठन से करीबी रखने वाले कुछ व्यापारियों की मांग पर गौर करते हुए चेयरमेन आशुतोष तिवारी ने इस पूरी बेशकीमती जमीन को हड़पने की तैयारी कर ली है। भाजपा संगठन से जुड़े व्यापारियों ने अपनी चर्चा को गोपनीय रखने के लिए स्थानीय व्यापारियों को यह कहकर वार्ता स्थल से हटा दिया था कि कमिश्नर शुक्ला ने केवल उनके प्रतिनिधियो से चर्चा के लिए वक्त दिया है।
    व्यापारियों ने कमिश्नर को बताया कि चार इमली जाने वाला मुख्य सड़क मार्ग बहुत चौड़ा है इसलिए बाजार का एफएआर .5 से लगभग डेढ़ प्रतिशत और ज्यादा बढ़ाया जा सकता है। बाजार को लगभग पांच मंजिला तक बनाया जा सकता है। इसे देखते हुए बाजार को शीघ्रातिशीघ्र जमींदोज किया जाए और सघनीकरण योजना को जल्दी शुरु किया जाए। उन्होंने बताया कि बाजार में मूल आबंटिती नहीं बचे हैं इसलिए किसी भी प्रकार का विरोध होने की संभावना नहीं है। जो लोग विरोध के लिए आगे आएंगे उन्हें हम संभाल लेंगे। चर्चा के दौरान हाऊसिंग बोर्ड के अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित थे।

  • गद्दार दोस्त मोहम्मद के जाल से मुक्त हुआ जगदीशपुर

    गद्दार दोस्त मोहम्मद के जाल से मुक्त हुआ जगदीशपुर

    भोपाल,14 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि 308 वर्ष बाद जगदीशपुर को खोई हुई पहचान मिल रही है। इस्लामनगर अब जगदीशपुर के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान जगदीशपुर के चमन महल में गौरव दिवस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने 26 करोड़ 71 लाख 86 हजार रूपए के कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उन्होंने जगदीशपुर नामकरण शिला का अनावरण भी किया।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि ऐतिहासिक दृष्टि से जगदीशपुर देवड़ा राजपूतों का गढ़ था। दोस्त मोहम्मद खान ने जगदीशपुर पर अधिकार कर इसका नाम इस्लामनगर रख दिया। पर्यटन स्थल जगदीशपुर में गोंड महल, रानी महल एवं चमन महल प्रमुख हैं। सांसद सुश्री साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, विधायक श्री विष्णु खत्री, अध्यक्ष एमपी स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कार्पोरेशन श्री शैतान सिंह पाल और श्री केदार सिंह मण्डलोई उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज हम सबका मन आनंद और प्रसन्नता से भरा हुआ है। अफगानी ने 308 साल पहले अन्याय और बर्बरता की थी। उसने धोखा दिया था। जगदीशपुर राजपूतों ने बसाया था। यहाँ के शासक नरसिंह देवड़ा थे। जगदीशपुर का किला अपनी वास्तु-कला के लिए जाना जाता है। दोस्त मोहम्मद खान ने राजा नरसिंह देवड़ा को निमंत्रण दिया था और भोजन करते समय हत्या कर दी गई। रानियों ने जल जौहर कर लिया था। आजादी के 75 साल बाद आज हम फिर से जगदीशपुर नाम कर पाए हैं।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि असंभव को संभव करने का कार्य प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और वर्तमान सरकार कर रही है। पुराने और गौरवशाली नामों को पुर्नस्थापित किया जाना चाहिए। इतिहास की घटनाओं को ध्यान में रखकर नाम बदलने का क्रम चल रहा है। हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति किया गया है। ऐसे कई नामों को बदला जाएगा। जगदीशपुर का वैभव पुन: स्थापित किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि गाँवों का मास्टर प्लान बनाया जाए। जगदीशपुर ऐसा गाँव बने कि लोग देखते रह जाये। उन्होंने कहा कि यहाँ राजाओं का स्मारक बनाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि विकास यात्रा से विकास की नई गंगा बह रही है। उन्होंने कहा कि बेटी को वरदान बनाने के लिए लाड़ली लक्ष्मी योजना बनाई गई। अब तक प्रदेश में 44 लाख लाड़ली लक्ष्मी हो चुकी हैं। इसी तरह मेधावी विद्यार्थी योजना बनाई गई। अब बहनों को सशक्त बनाने के लिए लाड़ली बहना योजना बनाई गई है। इस योजना में गरीब बहनों के खातों में एक-एक हजार रूपए की राशि हर माह दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की ओर से सम्मान निधि दी जा रही है।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि एक के बाद एक योजना बन रही है। जनता की जिंदगी बदलने की कोशिश है। वृद्धावस्था पेंशन राशि 600 से बढ़ा कर 1000 रूपये कर दी जाएगी। आगामी 5 मार्च से मुख्यमंत्री बहना योजना के गाँव-गाँव में शिविर लगा कर कार्य कराए जाएंगे। जून माह से पैसा आना शुरू हो जाएगा। जनता की जिंदगी बदलने का अभियान है। उन्होंने कहा कि हम परिवार की भाँति ध्यान रखने की कोशिश कर रहे हैं। सबका मंगल और कल्याण हो। सब सुखी हों। मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों में जनता का सहयोग भी मांगा।

    सांसद सुश्री प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि जगदीशपुर का जन-जन चाहता था कि इस्लामनगर का नाम पुन: जगदीशपुर हो जाए। उन्होंने कहा कि जब हम परतंत्र थे तब इसका नाम इस्लामनगर था। जगदीशपुर का अपना एक इतिहास है। इसी को ध्यान में रख कर पुन: जगदीशपुर नामकरण किया गया है। जगदीशपुर अपने पुराने वैभव में लौटा है। केन्द्र और प्रदेश सरकार द्वारा विकास के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। सांसद सुश्री ठाकुर ने गाँव में भगवान जगदीश का भव्य मंदिर निर्माण कराने का सुझाव रखा।

    बैरसिया विधायक श्री विष्णु खत्री ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि आज जगदीशपुर में गौरव दिवस मनाने का अवसर मिला है। यह ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा कि 308 वर्ष बाद यह क्षण देखने को मिला है। जब इस्लामनगर का नाम बदल कर पुन: जगदीशपुर कर दिया गया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान की सक्रियता से यह संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि जगदीशपुर को आदर्श पंचायत बनाने के लिए विकास कार्यों की कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। सामाजिक सरोकार और जन-भागीदारी से कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। श्री खत्री ने बाणगंगा के किनारे बलिदानी राजाओं का स्मारक बनाने की मांग रखी।

    प्रारंभ में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मंच पर पहुँच कर साधु-संतों का शाल-श्रीफल से स्वागत और कन्या-पूजन किया। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। वंदे-मातरम का गायन हुआ। ग्रामीणों ने साफा पहना कर अतिथियों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने लाम्बाखेड़ा से जगदीशपुर मार्ग, भदभदा से निपानिया जाट मार्ग मजबूतीकरण, लाम्बाखेड़ा से निपालिया बाजखां मार्ग और ईंटखेड़ी से अचारपुरा मार्ग के चौड़ीकरण, 33:11 केव्ही विद्युत उपकेन्द्र परेवाखेड़ा, ईंटखेड़ी एमआरएफ सेंटर, स्वच्छता परिसर ग्राम पंचायत अचारपुरा, गोलखेड़ी, जगदीशपुर, ईंटखेड़ी सड़क सहित अनेक विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। कार्यक्रम में जन-प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे।

  • नगर निगम के कमर्शियल टैक्स के विरोध में होटल संचालकों ने महापौर को दिया ज्ञापन

    नगर निगम के कमर्शियल टैक्स के विरोध में होटल संचालकों ने महापौर को दिया ज्ञापन


    भोपाल,1 सितंबर। नगर पालिक निगम की ओर से लगाए गए व्यावसायिक कर के विरोध में आज महाराणा प्रताप नगर के होटल संचालकों ने महापौर मालती राय को ज्ञापन दिया। जिसमें उन्होंने इस नए टैक्स को अव्यावहारिक और शोषणकारी बताया है। इस टैक्स को लेकर व्यापारियों ने पहले भी आपत्ति दर्ज कराई थी लेकिन टैक्स भरने की अंतिम समय सीमा 31 अगस्त बीत जाने की वजह से मिलने वाली छूट की समयावधि भी बीत गई है। व्यापारियों ने यह टैक्स हटाकर टैक्स भरने की तिथि एक बार बढ़ाने की मांग भी की है।

    नगर निगम की फिजूलखर्ची और स्मार्ट सिटी के कर्ज का बोझ व्यापारियों पर डालने से वे आंदोलित हैं.


    महापौर श्रीमती मालती राय से मुलाकात करने पहुंचे एमपीनगर भोपाल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने व्यावसायिक लाईसेंस की प्रक्रिया बदलने को असंगत और बोझ बताया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष और होटल आर्च मैन्योर के प्रोप्राईटर एस.एन.माहेश्वरी ने बताया कि इस नए टैक्स से सारे व्यापारी परेशान हैं। कोरोना काल की मंदी की वजह से न तो कारोबार है और न ही व्यापारी अब तक घाटे से उबर पाए हैं। इसके बावजूद निगम ने एक नया टैक्स लाद दिया है। उन्होने महापौर को बताया कि ये टैक्स संपत्तिकर, पानी बिजली और कचरा कर के अलावा वसूला जा रहा है। इस टैक्स में सभी व्यावसायिक संपत्तियों के क्षेत्रफल के आधार पर टैक्स की गणना की गई है। ये अव्यावहारिक है और इतना ज्यादा है कि आम व्यापारी इसे चुकाने में सक्षम नहीं है। ऐसे में इस टैक्स को पूरी तरह हटाया जाए और जो लोग ये टैक्स जमा कर चुके हैं उस राशि को अगले साल के टैक्स में समायोजित किया जाए।
    श्री माहेश्वरी ने बताया कि पहले नगर निगम होटल के कमरों के आधार पर आय की गणना करता था और उस पर कर लगाया जाता था। नई व्यवस्था में होटल के खुले क्षेत्र और बाथरूम, बरामदे आदि को भी टैक्स के दायरे में लिया गया है जबकि इन स्थानों से आय नहीं होती है। व्यापारियों ने इस टैक्स का विरोध तभी से करना शुरु कर दिया था जब नगर निगम के राजस्व अमले ने उन्हें मांग पत्र सौंपे थे। व्यापारियों की आपत्ति पर निगम ने कोई फैसला नहीं लिया और कर भरने की समय सीमा भी निकल गई।
    व्यापारियों ने कहा कि ये टैक्स नगर निगम कमिश्नर श्री वीएस चौधरी कोलसानी ने तब मंजूर कराया था जब नगर निगम की चुनी हुई परिषद भंग की जा चुकी थी। इस फैसले में आम नागरिकों के बीच रायशुमारी नहीं की गई थी। हैदराबाद की तर्ज पर लागू की गई इस व्यवस्था को तब लागू किया गया है जब भीषण मंदी का दौर चल रहा है। ऐसे में चुनी हुई परिषद को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
    ज्ञापन देने वालों में भोपाल
    हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष एमपी नगर कोचिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय तिवारी एवं कई पदाधिकारी शामिल थे।
    महापौर श्रीमती मालती राज ने संघ के पदाधिकारियों को आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों को दो-तीन दिन के अंदर कुछ ना कुछ निराकरण अवश्य करेंगे।
    संघ के कुछ पदाधिकारियों का कहना है कि अगर निर्णय उनके पक्ष में नहीं जाता तो वह उच्च न्यायालय की शरण में जाने के लिए तैयारी कर रहे हैं

  • स्वच्छता में अव्वल भारत नगर के लोगों ने उल्लास से मनाया स्वाधीनता दिवस

    स्वच्छता में अव्वल भारत नगर के लोगों ने उल्लास से मनाया स्वाधीनता दिवस


    भोपाल,15 अगस्त( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान में बढ़ चढ़कर भागीदारी निभाने वाले राजधानी के भारत नगर के वासियों ने स्वाधीनता दिवस उल्लास के साथ मनाया । स्वाधीनता के अमृत महोत्सव पर 13 अगस्त 15 अगस्त तक विभिन्न कार्यक्रमों की श्रंखला चलाई गई। तिरंगा अभियान से ही ये उत्साह परवान चढ़ने लगा था और भारी वर्षा के बीच झंडावंदन करके रहवासियों ने विकसित भारत के लक्ष्य के प्रति अपना संकल्प दुहराया।
    स्वच्छता के मापदंडों पर खरा उतरने वाले भारत नगर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। भोपाल नगर पालिक निगम क्षेत्र में अव्वल आने वाली ये एकमात्र रहवासी समिति है जिसका संचालन राज्य का सहकारिता विभाग कर रहा है। विभाग की ओर से नियुक्त प्रशासक मुकुंद राव भैंसारे के आव्हान पर रहवासियों ने विभिन्न चरणों में स्वाधीनता दिवस के आयोजन किए थे। इस अवसर पर श्री भैंसारे ने ध्वजारोहण करके मुख्य समारोह का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन श्री एम.के.सचदेव ने किया। आजादी की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित रंगारंग कार्यक्रम में अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सभी वक्ताओं ने भारत को प्रगति की नई ऊंचाईयों तक ले जाने का संकल्प दुहराया।

    स्वाधीनता के अमृत महोत्सव में भागीदारी निभाने वाले युवाओं ने झंडावंदन के साथ सांस्कृतिक आयोजन में भी भाग लिया।


    ध्वजारोहण समारोह में भारत नगर के सभी गणमान्य नागरिकों ने भारी वर्षा के बावजूद अपनी भागीदारी निभाई। सर्वश्री सुदर्शन राजपूत, के.सी.शर्मा, श्री नामदेव,श्री जेपी सिंह,श्री शेडगै जी,सुश्री दिव्या अत्री ,सुश्री पल्लवी शर्मा,सुश्री सुनीता विश्वकर्मा, सुश्री सुषमा चौकसे, सुश्री अल्पना ,सुश्री अनुजा मजूमदार,श्री महेन्द्र कोकाटे,श्री गोपेश तारे, श्री अनिल त्यागी, श्री शैलेन्द्र गुजरावत, श्री एस.के.चौकसे, समेत बड़ी संख्या में बच्चे और युवाजन भी उपस्थित थे।

    भारत नगर की मातृशक्ति ने स्वाधीनता दिवस समारोह को सतरंगी आभा से सराबोर कर दिया।


    स्मरण रहे कि भरत नगर सोसायटी को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वच्छता के पैमाने पर द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया है। एक साल में दो बार इस सोसायटी को स्वच्छता की दिशा में उल्लेखनीय योगदान के लिए पुरस्कृत किया गया है।राजधानी में 475 हाउसिंग गृह निर्माण समितियां और 125 रहवासी समितियां हैं। इनके बीच भारत नगर की गृह निर्माण समिति का संचालन कुशलता पूर्वक किया जा रहा है।समिति की ओर से स्वाधीनता दिवस समारोह में लगभग 45 रहवासियों को स्वच्छता प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। समारोह में शामिल युवाओं और बच्चों को मिठाई का वितरण भी किया गया।

  • कोरोना की बूस्टर डोज जरूर लगवाएं बोले स्वास्थ्य मंत्री डॉ.प्रभुराम चौधरी

    कोरोना की बूस्टर डोज जरूर लगवाएं बोले स्वास्थ्य मंत्री डॉ.प्रभुराम चौधरी

    भोपाल, 21 जुलाई( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने कहा कि सभी पात्र व्यक्ति कोविड टीके की प्रिकॉशन (बूस्टर) डोज अवश्य लगवायें। कोविड वैक्सीन अमृत महोत्सव में कोविड-19 प्रिकॉशन डोज 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी पात्र व्यक्तियों को नि:शुल्क लगाया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी आज होटल अशोक लेक व्यू के ओपन थियेटर में ड्राइव इन वैक्सीनेशन का शुभारंभ कर रहे थे।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा कि एम.पी. टूरिज्म, यूनीसेफ और एनएचएम द्वारा ड्राइव इन वैक्सीनेशन का नवाचार किया गया है। इसके लिये अशोक लेक व्यू होटल के ओपन थियेटर परिसर में टीकाकरण केन्द्र बनाया गया है। यहाँ पर कोई भी पात्र व्यक्ति वाहन ड्राइव करते हुए टीकाकरण केन्द्र में पहुँच कर वाहन में बैठे-बैठे कोविड-19 प्रिकॉशन डोज लगवा सकता है। यह सुविधा दिव्यांग और वृद्धजन के लिये आसानी से टीका लगवाने में मददगार है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा कि इस नवाचार से पहले टीकाकरण अभियान में 50 हजार से अधिक व्यक्तियों को कोविड-19 के टीके लगाये गये।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा कि कोविड टीका बहुत महत्वपूर्ण है। टीकाकरण के बाद आई तीसरी लहर में कोविड टीका ने सुरक्षा प्रदान की और जिन्हें कोरोना हुआ, उनमें से बहुत कम को अस्पताल जाना पड़ा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने सभी नागरिकों से अपील की है कि कोरोना की प्रिकॉशन डोज अवश्य लगवायें। डायरेक्टर एनएचएम (टीकाकरण) डॉ. संतोष शुक्ला, जनरल मैनेजर एम.पी. टूरिज्म श्री के.आर. साद, श्री एस.पी. सिंह, संचार विशेषज्ञ यूनिसेफ मध्यप्रदेश श्री अनिल गुलाटी और डॉ. वंदना भाटिया उपस्थित थीं।

  • भाजपा जन स्वास्थ्य बढ़ाने में फेल – यश भारतीय 

    भाजपा जन स्वास्थ्य बढ़ाने में फेल – यश भारतीय 

    भोपाल,19 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) समाजवादी पार्टी मप्र युवजन सभा प्रदेश अध्यक्ष यश भारतीय ने आरोप लगाया है, भाजपा की केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर शासकीय स्वास्थ्य व्यवस्था चौपट करते हुए निजी और महंगी स्वास्थ्य सेवाओं को फायदा पहुंचाया है । भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल(बीएमएचआरसी) को पूरी तरह से बर्बाद किया, एम्स में भी व्यवस्था चौपट है ,राज्य चिकित्सालय के हालत ये है की मुख्यमंत्री एवं उनके मंत्री , बड़े अधिकारी सभी निजी स्वास्थ्य व्यवस्था पर ही विश्वास दिखाते है ।

    पूर्व में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री रहते दौरा कर चुके है एम्स का, जिसमे तमाम कमियां विधार्थियो ने बताई थी लेकिन वह आज भी वैसे की वैसे ही बनी हुई है, नए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मंडाविया जी के आने के बाद भी । एम्स में आज भी पूरी फैकल्टी नही है, न ही मरीजों को पूरा इलाज मिल रहा है और न ही विधार्थियो को सही चिकित्सा शिक्षा प्राप्त हो रही है ऐसे में बीएमएचआरसी को मेडिकल कॉलेज बनाने जैसी बातें साफ तौर पर बेमानी है । 

    राज्य चिकत्सा मंत्री विश्वास सारंग जी भोपाल में रहते हुए इतने लापरवाह है की हमीदिया अस्पताल,जय प्रकाश नारायण अस्पताल, काटजू अस्पताल की व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित  नही करवा पा रहे है । प्रदेश और राजधानी वासियों को अभी भी बच्चों के वार्ड में लगी आग का मंजर अभी भी भूले नहीं भूलता जिसमें न मुख्यमंत्री सक्रिय थे और न ही उनके मंत्री ।

    भाजपा के लोग केवल झूठे बयान,झ्ठे वादों से जनता को भ्रमित कर रहे है, आमजन की धार्मिक भावना उकसा कर सत्ता पर काबिज है। अब जनता इनसे इनकी ही योजना का हिसाब मांग रही है, वो चाहे कृषि कानून हो या अग्निवीर । भाजपा के लोग अपनी योजनाओं को ही सही तरीके से जनता को नही बता पाते क्योंकि तानाशाही तरीके से जनता के ऊपर निर्णय थोप दिए जा रहे है बिना किसी तैयारी के ,बिना किसी विरोधी दलों से चर्चा करते हुए ।

  • सहकारिता से जीती भारत नगर ने स्वच्छता की जंग

    सहकारिता से जीती भारत नगर ने स्वच्छता की जंग

        

    भोपाल,9 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब लाल किले से स्वच्छता का संदेश दिया था तब किसी ने नहीं सोचा था कि हिंदुस्तान के शहर और गांव इस दिशा में नई करवट लेने जा रहे हैं। आज देश के कई शहरों में स्वच्छता को लेकर जो जंग छिड़ी है उसने सड़कों और गलियों की तस्वीर बदलकर रख दी है। राजधानी भोपाल में स्वच्छता को लेकर जो बदलाव हुए हैं उसके लिए किसी तंत्र को बदले बगैर जनता बढ़ चढ़कर भागीदारी कर रही है। शहर की भारत नगर गृह निर्माण सहकारी समिति के प्रशासक मुकुंद राव भैसारे ने जब कालोनी की मूलभूत समस्यायों का समाधान शुरु किया तो लोगों ने आगे आकर स्वच्छता अभियान में अपना योगदान देना आरंभ कर दिया। आज यह गृह निर्माण सहकारी समिति मूलभूत समस्याओं का निराकरण करके पुरस्कार जीत रही है इसके साथ संस्था के खाते में बचत की राशि भी बढ़ती जा रही है।

    यह संस्था कभी बुरे हालात से भी गुजरती रही है। घरों में पानी नहीं आता था,सीवेज की लाईनें चोक थीं, सड़कें बदहाल थीं और जगह जगह कचरे के ढेर नजर आते थे। समिति का प्रबंधन संभालने वालों की सक्रियता न होने की वजह से मनमानी का आलम था और लोग कहीं भी कबाड़ा जमा करते रहते थे। गृह निर्माण समिति के संधारण का शुल्क लोग इसलिए नहीं जमा करते थे क्योंकि आए दिन घोटालों की कहानियां सुनने मिलती थीं। रहवासियों ने जगह जगह शिकायतें कीं लेकिन कोई समाधान नजर नहीं आता था। सहकारिता विभाग के आयुक्त ने कड़ा फैसला लिया और समिति को भंग करके प्रशासक की नियुक्ति कर दी। ये जवाबदारी विभाग के उप अंकेक्षक मुकुंद भैसारे को दी गई।

    सहकारिता विभाग के आयुक्त संजय गुप्ता ने अपने नवाचारों से शुरु किया सहकारिता आंदोलन का नया दौर.

    जब शासन ने मुकुंद भैसारे को भेजा तब रहवासी बहुत परेशान थे और शिकायतें लेकर दर दर भटक रहे थे। 20 जनवरी 2021 को संस्था भंग हो चुकी थी और लोगों को लगता था कि अब उनकी समस्याएं लालफीताशाही के बीच उलझकर रह जाएंगी। श्री भैसारे ने पानी, सफाई, बिजली सप्लाई जैसे मुद्दों को सुलझाने के लिए अपनी प्रशासनिक दक्षता का प्रयोग किया और धीरे धीरे शिकायतें सुलझने लगीं। हर विभाग से जुड़े प्रभारी अधिकारियों को प्रेरित करके उन्होंने कालोनी की काया बदलना शुरु कर दी। समिति के पास केवल एक सफाई कर्मचारी था लेकिन जन सहयोग और भोपाल नगर पालिक निगम की टीम को साथ लेकर उन्होंने सफाई का महासंग्राम शुरु कर दिया। लोगों ने जब अपने गली मोहल्ले में ये सक्रियता देखी तो महिलाओं समेत कई नागरिकों ने इस अभियान में सहयोग शुरु कर दिया। बच्चों की टोलियां काम में हाथ बंटाने लगीं। महिलाओं का समूह सफाई कर्मचारियों की प्रेरणा बन गया।

    श्री भैसारे ने गृह निर्माण समिति के दफ्तर की भी काया पलट कर डाली। पुराने पड़े पाईपों को वेल्डिंग करवाकर उन्होंने तिरंगा फहराने के लिए झंडा स्थल का निर्माण करवाया। समिति के आय व्यय पत्रकों को सिलसिलेबार संजोया। लोगों को प्रेरित किया कि वे यदि लंबित सहयोग राशि का भुगतान कर देते हैं तो कई सुविधाएं बढाई जा सकती हैं। चोक पड़ी पाईपलाईनों को चालू करवाते ही लोगों के घरों में पेयजल की सप्लाई शुरु हो गई। इस पानी ने लोगों में जो उत्साह का संचार किया कि वे आगे बढ़कर अपनी सहयोग राशि जमा करने लगे। जनसहयोग की भागीदारी से  श्री भैसारे ने नगर पालिक निगम की योजनाओं को लागू करवाना शुरु कर दिया। जगह जगह कचरे के डिब्बे रखवाए गए। सार्वजनिक लाईनों का बिजली भुगतान  होते ही कालोनी की सड़कें रात में जगमग होने लगीं।

    भारत नगर सहकारी समिति को स्वच्छता का पुरस्कार देकर प्रसन्न हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान.

    ये ऐसा अवसर था जब देश भर में स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर नगरीय निकाय बढ़ चढ़कर भागीदारी दिखा रहे थे। कोरोना की वजह से लाक डाऊन था और सफाई अमला पूरी तरह मुस्तैद था। इसी समय का लाभ लेकर श्री भैसारे ने गृह निर्माण समिति के कामकाज में जान फूंक दी। नगर पालिक निगम ने स्वच्छता के जो मापदंड तय किए थे उन पर श्री भैसारे ने सिलसिलेबार ढंग से अमल शुरु कर दिया। वर्ष 21-22 के स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत 11 जनवरी 2022 को रहवासी समितियों ने प्रथम द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्राप्त किए। संपूर्ण भोपाल जिले में भारत गृह निर्माण सहकारी समिति को तृतीय पुरस्कार मिल गया।जब भोपाल नगर पालिक निगम के कमिश्नर ने ये पुरस्कार दिया तो कालोनी में हर्ष की लहर फैल गई। लोगों ने बढ़ चढ़कर सहयोग देना शुरु कर दिया।

    इसी श्रंखला में भारत सरकार ने स्मार्ट सिटी जैसी नई प्रोत्साहन योजना शुरु की। मध्यप्रदेश सरकार ने अपनी अन्य कालोनियों की तस्वीर बदलने के लिए अप्रैल 2022 में दुबारा जोन वार पुरस्कार देने की घोषणा की। भोपाल की 38 रहवासी वेलफेयर समितियों के सामने पुरुस्कार पाने का लक्ष्य था। इसके तहत प्रथम पुरस्कार के रूप में पांच लाख रुपए के निर्माण कार्य कराए जाने थे। द्वितीय पुरस्कार के रूप में तीन लाख रुपए के कार्य कराने की घोषणा की गई थी। इसके लिए सर्वेक्षण हुआ और जोन 15 की भारत गृह निर्माण सहकारी समिति को दूसरे पुरुस्कार के रूप में चुना गया। समिति का काम इतना सिलसिलेबार और लयबद्ध था कि प्रशासन ने एक ही वर्ष में उसे दो बार पुरस्कृत किया। इसका सारा श्रेय सहकारिता विभाग की ओर से प्रशासक के रूप में नियुक्त श्री भैसारे को ही जाता है।

    श्री भैसारे ने समिति की आर्थिक स्थिति सुधारी,और सुधारों को जमीन पर क्रियान्वित किया। इससे सहकारिता के माध्यम से रहवासियों की समस्यायों का समाधान करने का नया उदाहरण सामने आया है। ये पहला अवसर है जब किसी सहकारी समिति के प्रशासक ने जन सहयोग से किसी रहवासी क्षेत्र की समस्याओं का समाधान कर दिखाया हो। कई बड़े बिल्डर हजारों रुपए की सहयोग राशि जुटाने के बावजूद ये चमत्कार नहीं दिखा पा रहे थे जबकि श्री भैसारे ने मात्र 350 रुपए की सहयोग राशि के बलबूते कालोनी की तस्वीर बदलकर रख दी।

    भोपाल नगर पालिक निगम ने स्वच्छता पुरस्कार देकर रहवासियों के सफल मॉडल को रेखांकित किया..

    सहकारिता के क्षेत्र में इस बडी उपलब्धि से श्री भैसारे उत्साहित हैं। स्थानीय नागरिकों ने समिति के सफल संचालन के लिए कई बदलाव भी किए हैं। सहकारी समिति ने कालोनी में सड़कें रोशन करने के लिए सोलर लाईटें,बगीचों में पाथ वे का निर्माण और कैमरे लगाने के लिए भी प्रस्ताव तैयार किए हैं। इस लक्ष्य  की पूर्ति के लिए हर रहवासी की ओर से मिलने वाली सहयोग राशि 500 रुपए कर दी गई है और जल्दी ही  जरूरतें भी पूरी हो जाएंगी । इससे स्ट्रीट लाईट का हर महीने आने वाला बिजली का बिल भी शून्य हो जाएगा। साथ ही साथ अतिरिक्त बिजली बेचकर समिति अपने रखरखाव के लिए अतिरिक्त आय कर सकेगी। कैमरों से अपराध नियंत्रण में सहयोग मिलेगा। इस तरह के कई अभियानों के लिए भी लोग मशविरा कर रहे हैं।

    एक रचनात्मक व्यक्ति की उपस्थिति से स्थितियां किस तरह बदल जाती हैं ये भी श्री भैसारे ने साबित कर दिया है। जो लोग लोकतांत्रिक व्यवस्था को कोसते फिरते थे वे आज सहकारिता की शक्ति का अहसास कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में सहकारी आंदोलन को पलीता लगाने की तो कई कहानियां सुनी और सुनाई जाती हैं लेकिन सहकारिता की ये बुलंद तस्वीर केवल भोपाल से निकलकर सामने आई है। इसके लिए श्री भैसारे जैसे अधिकारियों की पहचान और उन्हें जवाबदारी देने की पहल अब सरकार को करनी होगी।

  • भोपाल विलीनीकरण के सेनानियों को पुष्पांजलि

    भोपाल विलीनीकरण के सेनानियों को पुष्पांजलि

    भोपाल,1 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भोपाल विलीनीकरण दिवस एक जून के अवसर पर विलीनीकरण शहीद स्मृति द्वार पर कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। राज्य सभा सांसद श्री जे.पी. नड्डा विशेष रूप से उपस्थित थे। चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास सारंग, सांसद श्री वी.डी. शर्मा, पूर्व महापौर श्री आलोक शर्मा तथा विलीनीकरण आंदोलन के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजन सम्मिलित हुए।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान तथा सांसद श्री नड्डा ने शहीद स्मृति द्वार पर स्थापित रानी कमलापति की प्रतिमा पर नमन किया। साथ ही भोपाल विलीनीकरण आंदोलन के स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में पुष्पांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानियों के परिजन का सम्मान भी किया गया। भोपाल की स्वतंत्रता की 73 वीं वर्षगांठ हर्ष और उल्लास के साथ मनाई गई।

  • एक वैभवशाली राष्ट्र के निर्माण में हम सब अपना योगदान दें : विश्वास सारंग

    एक वैभवशाली राष्ट्र के निर्माण में हम सब अपना योगदान दें : विश्वास सारंग

    • राज्य स्तरीय स्व. भुवन भूषण देवलिया पत्रकारिता पुरस्कार से पत्रकार जयराम शुक्ल सम्मानित
    • पत्रकारिता और राष्ट्रवाद पर विद्वानों ने रखे सारगर्भित विचार

    भोपाल। स्व भुवन भूषण देवलिया स्मृति व्याख्यानमाला समिति की तरफ से रविवार को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विवि के सभा कक्ष में पत्रकारिता और राष्ट्रवाद पर एक विमर्श का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मप्र के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग थे जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा ने की। कार्यक्रम में प्रसार भारती बोर्ड के अध्यक्ष जगदीश उपासने, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश, भारतीय जनसंचार परिषद नई दिल्ली के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, वरिष्ठ पत्रकार राजेश बदल ने प्रमुख वक्ता के रूप में अपने ओजस्वी। विचारों से विषय की गम्भीरता को प्रतिपादित किया। जबकि इस विमर्श में विषय प्रवर्तन का कार्य स्वदेश भोपाल के संपादक शिवकुमार ‘विवेक’ ने किया। इस अवसर पर विंध्य क्षेत्र से नाता रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार जयराम शुक्ल को राज्य स्तरीय स्व. भुवन भूषण देवलिया पत्रकारिता पुरस्कार से प्रदेश के चिकित्सा मंत्री विश्वास सारंग ने सम्मानित किया।
    भुवनभूषण देवलिया पत्रकारिता सम्मान का इस वर्ष ग्यारहवां वर्ष था। प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार श्री शुक्ल को सक्रिय और सार्थक लेखन के लिए सम्मान प्रदान किया गया। पुरस्कार स्वरू श्री शुक्ल को 11 का चेक, शॉल श्रीफल के साथ स्मृति चिन्ह भेंट किये गए।
    इस अवसर पर पत्रकारिता और राष्ट्रवाद पर अपने विचार रखते हुए प्रदेश के चिकित्सा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि जब पत्रकारिता किसी बात को कहती है तो वह नीचे तक जाती है, इसलिए पत्रकार को राष्ट्रवादी होना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर एक वैभवशाली राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे, यह समय की मांग और हमारा राष्ट्र प्रेम भी है। श्री सारंग ने कहा कि कोई भी राष्ट्र सही रूप में तब बनता है जब उसका संघीय ढांचा मजबूत हो। इसे बनाने में आंचलिक पत्रकारिता का बड़ा योगदान है। श्री सारंग ने इस बात पर दुःख जताते हुए कहा कि आजादी के पचहत्तर साल बाद भी हमें यदि राष्ट्रवाद पर चर्चा करनी पड़े तो यह सोचनीय है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद तो कारखाना निर्माण और पुल निर्माण की बात तो होती रही पर व्यक्ति निर्माण पर किसी ने चर्चा नहीं की। उन्होंने इस बात पर संतोष जाहिर करते हुए कहा कि स्व भुवन भूषण देवलिया स्मृति व्याख्यानमाला समिति ने जो आज विषय रखा है वह प्रासंगिक है। समिति निरन्तर यह आयोजन कर रही है जो सराहनीय है। श्री सारंग ने कहा कि उनकी अपने जीवन में कभी देवलिया जी से भेंट नहीं हुई लेकिन उनके शागिर्दों से बहुत तारीफ़ सुनी है। ऐसे योग्य गुरु और काबिल पत्रकार नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करते हैं, श्रेष्ठ कार्य के लिए उनके प्रेरक भी बनते हैं। ऐसी विभूति को नमन करता हूं। श्री सारंग ने शुरुआत में स्व भुवन भूषण देवलिया जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।

    वर्तमान पत्रकारिता में राष्ट्रबोध का संकट : उपासने

    विचार गोष्ठी को ऑनलाइन सम्बोधित करते हुए प्रसार भारती बोर्ड के अध्यक्ष जगदीश उपासने ने कहा कि राष्ट्र के प्रति प्रेम और ईमानदारी का भाव हो तभी पत्रकारिता सार्थक हो सकती है और तभी लोकतांत्रिक व्यवस्था भी सफल रहेगी। श्री उपासने ने कहा कि बहुत से लोगों को लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद राष्ट्रवाद बढ़ गया है, जबकि ऐसा नहीं है। यह राष्ट्रवाद नहीं बल्कि राष्ट्रबोध कहा जा सकता है, जिसका संकट पत्रकारिता में दिख रहा है। किसी भी राष्ट्र के पत्रकार हो या निवासी उनमें राष्ट्रबोध तो होना ही चाहिए। 2013 की एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रबोध नीचे के स्तर से ही नही ऊपर के स्तर से ही गायब है। श्री उपासने ने कहा कि जो लोग समन्वयवादी संस्कृति की बात करते हैं वह कहीं नहीं है, यह बात सिर्फ भारत में होती है जबकि हम समन्वयवादी नहीं हैं पर सब को स्वीकार कर लेते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि सात हजार पुरानी हमारी संस्कृति है तो यह बोध किसको आएगा। श्री उपासने ने जोर देते हुए कहा कि यदि जब तक एक भी व्यक्ति जीवित रहेगा हमारा भारत और हमारी संस्कृति जीवित रहेगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का आनन्द यही है कि आप विरोध तो करें पर किसी का मजाक न बनाएं। पत्रकारिता के पक्षधर होने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रसार भारती बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि जिनका काम ही सही सूचना देना है वह स्वयं ही अज्ञानी हैं। श्री उपासने ने पत्रकारों को सलाह देते हुए कहा कि अपनी विचारधारा को सिर्फ सम्पादकीय पेज पर जगह दें, पर समाज में मतभेद पैदा न करें।

    पत्रकारिता राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत होनी चाहिये : प्रो. सुरेश

    पत्रकारिता और राष्ट्रवाद पर अपने विचार व्यक्त करते हुए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति केजी सुरेश ने कहा कि पत्रकारिता किसी विचारधारा की नहीं होनी चाहिए बल्कि पत्रकारिता राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत होनी चाहिए। बालकोट हमले का जिक्र करते हुए सुरेश प्रोफेसर सुरेश ने कहा कि कुछ ऐसे विषय पर हमें अपनी सरकार पर विश्वास करना ही चाहिए, न कि किसी दूसरे देश की सेना के प्रवक्ता और या दूसरे राष्ट्र के समाचार पत्रों पर, यह हमारा राष्ट्र प्रेम नहीं है । 1971 के युद्ध का जिक्र करते हुए प्रोफेसर सुरेश ने कहा कि उस समय पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े इसलिए कर दिए थे क्योंकि संपूर्ण राष्ट्र उनके साथ था और यही राष्ट्रवाद है। प्रो. सुरेश ने कहा कि राष्ट्रवाद को इतिहास के पन्नों में गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उसे नाजीवाद और फासीवाद की तरह संकुचित तरीके से जनता के सामने प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि भारत के अलग-अलग जगहों, मठ-मंदिरों या अन्य स्थानों में जो विभिन्न प्रकार की संस्कृति दिखाई देती है, वही हमारा राष्ट्रत्व है और वही भारत का राष्ट्रबोध है। यूक्रेन का जिक्र करते हुए विपक्षी दलों के बयान को हास्यास्पद करार देते हुए प्रो. सुरेश ने कहा कि आप इसलिए विरोध कर रहे कि एक व्यक्ति या दल आपको पसंद नहीं है। वहां फंसे भारतीयों को लेने कोई मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नहीं जाएंगे, पर सरकार ने अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए 4 मंत्री भेजे हैं, जो लोगों को सुरक्षित निकालकर ला रहें। उन्होंने कहा कि सरकार की आलोचना राष्ट्र विरोध नहीं है पर वह परिस्थितियों पर निर्भर होनी चाहिए

    75 सालों में हम अपना राष्ट्र चरित्र नहीं बना पाए : बादल

    पत्रकारिता और राष्ट्रवाद विषय पर व्याख्यान माला को सम्बोधित करते हुए राज्यसभा टीवी के पूर्व निदेशक एवं वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने कहा कि मुझे यह कहते हुए अफसोस हो रहा है कि इन 75 सालों में हम अपना राष्ट्र चरित्र नहीं बना पाए। श्री बादल ने कहा कि यदि हम देश के प्रति ईमानदार नहीं हैं तो हम राष्ट्रद्रोही हैं। उन्होंने कहा कि एक हजार साल से हमारा हिंदुत्व खतरे में नहीं था पर इस सियासी पुट का नतीजा है। उन्होंने कहा कि सियासत ने हमें बांट दिया है, कोई भी दल इसमें कम नहीं है। सब अपने-अपने स्वार्थ के लिए इस तरह के प्रपंच रच रहे हैं। श्री बादल ने कहा कि सियासतदानों ने इसे धंधा बना दिया है। स्व भुवन भूषण देवलिया का जिक्र करते हुए श्री बादल ने कहा कि वह राष्ट्रप्रेम करते थे और अन्य सभी में भी राष्ट्रप्रेम जगाते थे। स्व. आज हर पत्रकार के ह्रदय में विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता देश का चौथा स्तम्भ है, यह बड़ी जिम्मेदारी उस समय हमें बुजुर्गों ने दी है, उसे हमें पूरी ईमानदारी से निभाना है।

    यह विभाजनकारी ताकतों को उखाड़ फेंकने का समय : प्रो. द्विवेदी

    पत्रकारिता और राष्ट्रवाद विषय पर व्याख्यान माला में प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। यह समय विभाजन करने वाली ताकतों को पूरी तरह से उखाड़ फेंकने का संकल्प लेने का समय है। उन्होंने कहा कि आजादी के समय हमारे नायको और पत्रकारों की लड़ाई स्वराज की थी। आज देश को जोड़ें रखने वाली शक्ति के सामने यह एक बड़ी चुनौती है। जो स्थान-स्थान पर संघर्षों को हवा दे रहे हैं उनको पहचानने की जरुरत है। प्रो. द्विवेदी ने सवाल उठाते हुए कहा कि हिंदुस्तान में क्या सब कुछ गलत ही हो रहा है। इस षड्यंत्र के कर्ताओं को देखिए किस तरह तिल का ताड बना रहे हैं। मानवता विरोधी विचार हमारे संकट को बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम किसी एक विचार, धर्म या पंत को मानने वाले नहीं है। हम भारत को जाने, उसे बनाएं, छोटी-छोटी बातों पर लड़कर उसे महान नहीं बनाएं बल्कि समाज को तोड़ने की जगह जोड़ने वाले तथ्य को लेकर चलना होगा। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि भारत बोध का जागरण ही एकमात्र मंत्र है। अनादि काल से जो हमारी शक्ति रही है उसे भारत पर विश्वास रहा है। मीडिया को इस देश की एकता व बहुलता को स्थापित करना होगा, यही हमारा राष्ट्रवाद है क्योकि पत्रकारिता समाज से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की पॉलिटिकल लाइन तो होनी चाहिए पर पार्टी लाइन नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन की लोक चेतना ही हमारी मूल चेतना है। मीडिया राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें।

    मीडिया समाज में घोल रहा जाति का जहर : शर्मा

    व्यख्यान माला की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा ने कहा कि आजादी के पहले और बाद की पत्रकारिता में बड़ा अंतर आ गया है। आजादी के समय का एक भी अखबार या पत्रिका आज प्रकाशित नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि 1807 में अंग्रेजों ने देश और समाज को बांटने का जो कार्य किया था आज समाज उसी से जकड़न में पूरी तरह फंस गया है। उन्होंने कहा कि आज पत्रकारिता देश को जाति के नाम पर बांटने का काम कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो अंग्रेजों और मुगलों के प्रिय रहे सिर्फ वही हमारे पाठ्यपुस्तक का हिस्सा क्यों रहे हैं। श्री शर्मा ने कहा कि भारत में जाति प्रथा नहीं थी, बल्कि वर्ण व्यवस्था थी। अंग्रेजों ने हमारी परंपरा को नुकसान पहुंचाने के लिए देश में जातिगत जहर घोलने का काम किया जिसकी शिकार पत्रकारिता भी हो गई। उन्होंने कहा कि वैभव के कारण ही हमारा देश सोने की चिड़िया कहलाता था। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को भीड़ के साथ राष्ट्रवाद को जगाकर चलना होगा।

    पत्रकारिता राष्ट्रबोध की प्रखर अभिव्यक्ति थी : विवेक

    व्याख्यानमाला में विषय प्रवर्तन करते हुए स्वदेश के संपादक शिवकुमार विवेक ने कहा कि यह वास्तव में आंचलिक पत्रकारिता का सम्मान है। उन्होंने कहा कि आंचलिक पत्रकारिता का स्वरूप बढ़ रहा है। उस समय चौपाल ही पत्रकारिता की कक्षा होती थी। श्री विवेक ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन का फलसफा ही राष्ट्रवाद था। पत्रकारिता राष्ट्रबोध की प्रकार अभिव्यक्ति थी। उन्होंने कहा कि अंग्रेज एक साम्राज्यवादी सत्ता के बोधक थे। वह हमारी संस्कृत और व्यवस्था को खराब कर कर रहे थे। आज भी राष्ट्रवाद की जरूरत है। हमारी भाषा पर आज भी अतिक्रमण है, ऐसे में हमारी पत्रकारिता ही परे चले जाए तो सोचने की जरूरत है।
    कार्यक्रम में स्व. देवलिया की धर्मपत्नी श्रीमती कीर्ति देवलिया भी उपस्थित हुईं। कार्यक्रम में सतीश एलिया, आशीष देवलिया, डा अर्पणा और राजीव सोनी ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन आदित्य श्रीवास्तव ने किया। अंत में भुवनभूषण देवलिया स्मृति व्याख्यान माला समिति के सदस्य अशोक मनवानी ने आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम में स्मारिका का विमोचन मंत्री श्री सारंग और अन्य अतिथियों ने किया।

  • सात दशकों बाद साकार हुआ भोपाल विलीनीकरण का स्वप्न

    सात दशकों बाद साकार हुआ भोपाल विलीनीकरण का स्वप्न


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भाजपा सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से देश की तस्वीर बदलने का जो अभियान चलाया है उससे एक नया भारत खड़ा होने लगा है। दंभ से भरी नेहरू सरकार ने आजादी के बाद देश में बड़े कारखाने, बड़े बांध और बड़े वित्तीय संस्थान तैयार करने की नीति अपनाई थी। उस वक्त समझा जाता था कि बड़े प्रतिष्ठानों से रिसकर पूंजी का प्रवाह देश के निचले तबके तक पहुंचेगा। धीमी रफ्तार के इस विकास को गति देने के लिए श्रीमती इंदिरागांधी ने सार्वजनिक उपक्रमों और सरकारी संस्थानों के माध्यम से पंचवर्षीय योजनाएं लागू कीं। जब ये नीति मुंह के बल गिरी और भारी भ्रष्टाचार ने जनता का जीवन दूभर कर दिया तो श्रीमती गांधी के इंस्पेक्टर राज ने छापेमारी करके सुशासन लागू करने का अभियान चलाया। ये भी बुरी तरह असफल हुआ और देश लगभग पचास साल पीछे सरक गया। प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव की सरकार ने नई आर्थिक नीतियां लागू करके नेहरू गांधी परिवार की गलतियों को सुधारने का क्रांतिकारी फैसला लिया। नतीजे अच्छे आए लेकिन डाक्टर मनमोहन सिंह की सरकार उन आर्थिक सुधारों को लागू नहीं कर पाई। इसकी वजह कांग्रेसियों का वो मानस था जो कल्याणकारी राज्य की ठगनीति से इतर कुछ और नहीं देखना चाहता था। अटल बिहारी की सरकार ने देश के गांवों को सड़कों सेजोड़ने का भगीरथ किया। इसके बाद बेरोजगारी की जो तस्वीर सामने आई उसे देखकर सरकारें हिल गईं। मोदी सरकार ने बड़े औद्योगिक घरानों का खजाना भरने के स्थान पर गांव स्तर तक पूंजी का प्रवाह खोलने के कई अभियान चलाए हैं। नए एलईडी मोदी बल्ब से देश को रोशन करने ,गांवों को खुले में शौच से मुक्ति, कचरे वाले को घरों तक पहुंचाने के अभियानों की सफलता के बाद अब प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पूंजी का प्रवाह समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाने का चमक्तारिक प्रयास सफल बनाया है।
    राज्य सरकारों ने मोदी सरकार के इन अभियानों को अपने अपने अंदाज में लागू किया है। मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने लगभग एक लाख हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ देकर शहरों और गांवों में रंग भरने में सफलता पाई है। गांव गांव तक आवास योजना में श्रमिकों को तो काम मिल ही रहा है साथ में लोगों को अपने मकानों को सुविधाजनक बनाने का अवसर भी मिलने लगा है। शिवराज सिंह चौहान सरकार ने इस बदलती तस्वीर को स्थानीय जरूरतों और पहचानों से जोड़कर अभियान की सफलता को नया स्वरूप दिया है। भोपाल की बदलती तस्वीर ने उन अरमानों को साकार किया है जिन्हें विलीनीकरण के बाद से भोपाल के जनमानस ने अपने दिलों में संजोकर रखा था। अंग्रेजों की सरकार ने जब भारत को आजादी देने का मन बनाया तो उसने धर्म के आधार पर फूट के बीज भी बो दिए थे। पाकिस्तान के विभाजन को तत्कालीन शासकों ने न केवल स्वीकार किया बल्कि पाकिस्तान परस्ती की ज़ड़ों में मट्ठा डालने के बजाए उन्हें पालने पोसने की नीति भी अपना ली। पंडित जवाहर लाल नेहरू का ध्वज जिस तरह जिन्ना के सामने झुका रहा उसकी वजह से नेहरू को लगता था कि यदि उन्होंने पाकिस्तान के प्रति प्रेम रखने वाले नवाबों और रिसायतों पर जोर जबर्दस्ती की तो वे विद्रोह भी खडा कर सकते हैं। यही वजह थी कि जब सारा हिंदुस्तान आजादी के गीत गा रहा था तब भोपाल के नवाब खुद को पाकिस्तान के साथ जोड़े जाने की रट लगाए हुए थे। भारत सरकार के पास इस बात की पूरी खबर थी लेकिन सरकार ने वेट एंड वाच की नीति अपनाई। कांग्रेस के नेताओं को कहा गया कि वे स्थानीय शासकों को मनाएं और भारत के साथ रहने के लिए तैयार करें। भौगौलिक तौर पर कुछ रियासतें पश्चिमी पाकिस्तान से दूर भी थीं। इसके बावजूद उन्हें पूर्वी पाकिस्तान की तरह अलग रियासतें बनाकर अपना तख्तो ताज बचाने की उम्मीद थी। कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने विलीनीकरण का आंदोलन चलाया और भारी शहादतें देने के बाद अंततः रानी कमलापति के राज्य को हथियाकर बनाए गए भोपाल को नई पहचान मिल सकी।
    तबसे लेकर अब तक लगभग सात दशकों का लंबा अंतराल बीत चुका है जब भोपाल को उसकी पहचान देने का स्वप्न साकार होता नजर आने लगा है। भोपाल की आजादी के वक्त स्थानीय तरुणाई को अपनी नई राह और नई मंजिल बहुत नजदीक नजर आ रही थी। सरकार के भरोसे विकास की जो इबारत कांग्रेस के शासकों ने लिखी उससे ये मंजिल मीलों दूर खिसक गई। भ्रष्टाचार और गरीबी को संरक्षण देने की इस नीति ने अपनी विरोधी भारतीय जनता पार्टी को व्यापारियों की पार्टी के रूप में खूब बदनाम किया। भाजपा के नेताओं को कांग्रेस के इस दुष्प्रचार से इतना डर लगता था कि जब वीरेन्द्र कुमार सखलेचा की सरकार ने अफसरों की लगाम कसी तो उनके विरोधियों ने तरह तरह के आरोप लगाकर उनकी सरकार गिरवा दी। उसके बाद सुंदरलाल पटवा की सरकार अफसरशाही के सामने झुकी सरकार के रूप में सामने आई। दिग्विजय सिंह की भ्रष्ट सरकार को जब जनता ने धक्के मारकर सत्ता से बाहर भेज दिया तबसे भाजपा की सरकारें अफसरशाही के साथ कदमताल करती रहीं हैं। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों ने देश के सामने नवनिर्माण का वैकल्पिक मार्ग प्रशस्त किया है।
    भ्रष्ट सरकारी तंत्र की वजह से जो धनराशि विभिन्न छेदों से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती थी मौजूदा नीति ने हितग्राही के खाते में सीधे भुगतान पहुंचाकर उस खामी को दूर कर दिया है। आज न तो सरकारी तंत्र और भ्रष्ट राजनेताओं का कमीशनखोरी का नेटवर्क सफल हो पा रहा है और न ही विकास की रफ्तार पर कोई ब्रेक बाकी रहा है। यही वजह है कि भोपाल संभाग और जिलों में हितग्राही मूलक योजनाओं को साकार करना सफल हो पा रहा है। भोपाल के नवाब के हाथों से सत्ता छीनकर जनता के हाथों में देने के बावजूद यहां के लोगों का जीवन रोशन करने का जो लक्ष्य अब तक पूरा नहीं हो पाया उसमें मानों पर लग गए हैं।
    वैसे तो विलीनीकरण के स्वप्न को जमीन पर उतारने के लिए अभी कई पायदान बाकी हैं। लगभग पच्चीस हजार घुसपैठियों ने भोपाल के आम नागरिक के संसाधनों पर डाका डाल दिया है। फुटपाथों गलियों में अतिक्रमण हो गया है। गंदी बस्तियों की तादाद बढ़ गई है। वोट बैंक के लिए कांग्रेस के जिन नेताओं ने झुग्गी माफिया खड़ा किया था वे आज अपने इलाकों में प्रधानमंत्री आवास योजना का प्रचार करने में जुटे हुए हैं। इसकी वजह है कि भले ही उन्हें कमीशन नहीं मिल पा रहा है पर उन्हें लगता है कि उनका वोटर कम से कम इस योजना को उनकी मेहनत का फल ही मान ले तो उनका भविष्य सुरक्षित हो सकता है।
    शहर का मास्टर प्लान अब तक राजधानी की तस्वीर नहीं बदल पाया है। भीड़ भरे इलाकों में अस्पतालों का निर्माण, बीच सड़कों पर पुरानी कारों की बिक्री के बाजार, गैरेज, और धुलाई ने राजधानी को भिखमंगों का शहर बनाकर रख दिया है। सरकारी दफ्तरों के आसपास लगने वाले सब्जी और कपड़ा बाजारों ने यातायात की व्यवस्था चौपट कर रखी है। अवैध निर्माणों की कोई मानीटरिंग नहीं है। यही वजह है कि चौड़ी सड़कें भी संकरी गलियों में तब्दील हो गईँ हैं। कभी बुलडोजर मंत्री के रूप में बाबूलाल गौर ने शहर की इस जरूरत को रेखांकित किया था। बाद की भाजपा सरकारों ने शहर में कई मूलभूत बदलाव किए हैं। फ्लाईओवर और चौराहों के चौड़ीकरण ने हालांकि राहत दी है लेकिन बढ़ते चार पहिया वाहनों की संख्या ने उन सारे सुधारों की हवा निकाल दी है। सार्वजनिक परिवहन का कोई विश्वसनीय और समय का पाबंद नेटवर्क अब तक नहीं तैयार हो सका है। धर्मस्थलों के नाम पर किए जाने वाले अतिक्रमणों ने शहर की खूबसूरती को लील लिया है।यही नहीं धर्म के नाम पर बढ़ रहीं दूकानों ने जनमानस को भी विकास की मुख्यधारा से परे धकेल दिया है।
    नवाबकालीन भवनों की हालत जर्जर हो चुकी है और वे जनता की आज की जरूरतों के लिए भी उपयोगी नहीं रह गए हैं। आज कंप्यूटरीकरण के दौर में न तो उन भवनों में स्थान बाकी है न ही बिजली हवा पानी की मूलभूत जरूरतें पूरी हो पा रहीं हैं। दिग्विजय सिंह सरकार ने पुराने भवनों की मरम्मत कराकर कथित विरासतों को बचाने का पाखंड जरूर किया था लेकिन जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी ये इमारतें खंडहर होती जा रहीं है। अब समय आ गया है कि शहर का अंधाधुंध विस्तार रोकने के लिए पुर्नघनत्वीकरण योजना का सख्ती से पालन किया जाए। इन जर्जर इमारतों को धराशायी करके आज की जरूरतों के अनुसार भवनों का निर्माण कराया जाए। जो लोग विरासतों को सहेजे रखने का शोर मचाकर जनजीवन को दूभर बनाने का षड़यंत्र रच रहे हैं उनके लिए पुराने इतिहास को किताबों में संजोकर रखा जा सकता है।
    शहरों को विकास का इंजन बनाने के लिए नियोजकों ने ग्रीन और ब्लू मास्टर प्लान तैयार किय़े थे। वृक्षारोपण को सफल बनाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को स्वयं एक वृक्ष रोज लगाने के लिए आगे आना पड़ा है। ताल तलैयों की नगरी मानी जाने वाली राजधानी के अधिकांश जलग्रहण क्षेत्र दूषित पड़े हुए हैं। भोपाल तालाब की सफाई के लिए जो भोज वैटलैंड परियोजना चलाई गई थी उसने आम जनता पर कर्ज का पहाड़ तो खड़ा कर दिया लेकिन भोपाल तालाब की नई तस्वीर आज भी अधूरी है। तालाब का पानी सेप्टिक टैंक से भी ज्यादा गंदा बना हुआ है। उसमें आक्सीजन का स्तर नहीं बढ़ पाया है। सरकार और शासन को तय करना होगा कि आखिर वह आम नागरिकों को सम्मान जनक जीवन का माहौल कब तक मुहैया करा पाएगा।

  • पहला स्वतंत्रता संग्राम और भोपाल – सीहोर की शहादत

    पहला स्वतंत्रता संग्राम और भोपाल – सीहोर की शहादत

    राजेश बेन

    आज़ादी के अमृत महोत्सव के इस वर्ष में हम याद कर रहे हैं अपने उन क्रांतिकारियों को जिन्होंने भारत माता को आज़ाद करवाने के लिए पहले-पहल क्रांति की ज्वाला प्रज्जवलित की थी। भोपाल से शुरू हुआ आज़ादी के इस पहले संग्राम ने अंग्रेजों के शासन को जोरदार टक्कर दी। मातृभूमि को स्वतंत्र कराने वाले इन वीरों को देश कभी भी भूल नहीं सकेगा।

    अब से 164 साल पहले यानि 15 जनवरी 1858 को शाम 6 बजे कर्नल हयूरोज ने 149 क्रांतिकारियों को सीहोर कॉन्टिन्जेण्ट में एक लाइन में खड़ा कर गोली मार दी। भोपाल गजेटियर का संदर्भ 149 क्रांतिकारियों को लम्बी लाइन में खड़ा कर गोली मारने की पुष्टिकर्ता है तो सीहोर में जनश्रृति और एक प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र की रिपोर्ट में इस संख्या को 356 बताया गया है।

    भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम की कहानी भी रोंगटे खड़े करने वाली है और आज की तथा आने वाली पीढ़ी के लिये प्रेरणादायी है। 

    प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की कहानी कुछ ऐसी है कि अप्रैल, 1857 में भोपाल बेगम को पत्थर पर लिखकर छपाई गई क्रांति कारियों की (लिथोग्राफ) एक उदघोषणा प्राप्त हुई, जिसमें अंग्रेजों को निकाल बाहर करने और नष्ट करने का आव्हान किया गया था। बेगम ने इस घोषणा में कहीं गई बातें ब्रिटिश एजेन्ट को सूचित कर दी और इस प्रकार अंग्रेजों के प्रति अपनी वफादारी का सबूत दे दिया। 

    जब यह महान क्रांति मई, 1857 में भारत को आन्दोलित करने वाली थी उस समय भोपाल कॉन्टिन्जेन्ट सीहोर मुख्यालय में 60 तोपची,  206 घुड़सवार सैनिक तथा 600 पैदल सैनिक थे,  अर्थात् कुल मिलाकर 866 सैनिक थे, जिनमें सभी भारतीय थे। इस कॉन्टिन्जेन्ट के साथ केवल 6 अंग्रेज थे। इस कॉन्टिन्जेन्ट की एक टुकड़ी बेरछा में तैनात की गई किन्तु वहां कमान संभालने वाला एक भी अंग्रेज नहीं था।

     मेरठ तथा दिल्ली में हुई घटनाओं का समाचार सबसे पहले 13 मई, 1857 को इन्दौर में प्राप्त हुआ। परिणामस्वरूप, विद्रोह के अकस्मात् फैलने की आशंका से कर्नल ड्यूरेन्ड ने 14 मई को सीहोर को भोपाल कान्टिजेन्ट की 2 तोपें,  पैदल सैनिकों की 2 कंपनियां तथा घुड़सवारों के दो सैन्य दल भेजने के लिये अत्यावश्यक संदेश भेजा।

    20 मई को इन्दौर पहुँचने के लिये सैन्य दल भेज दिया गया और भोपाल क्षेत्र पर आसन्न संकट की छाया छाई रही। पड़ोस में और भारत के अन्य भागों में जो कुछ भी हो रहा था, उससे भोपाल रियासत की प्रजा प्रभावित हुये बिना नहीं रह सकी। मध्य भारत के लिये गर्वनर जनरल के एजेन्ट राबर्ट हैमिल्टन ने भारत सरकार के सेकेट्ररी को लिखा कि सामान्यत: दिल्ली, लखनऊ तथा रोहिलखंड में जो कुछ भी हो रहा था, उससे भोपाल के अनेक निवासी प्रभावित थे। भोपाल के मुसलमान लोग मुगल सम्राट बहादुर शाह से सहानुभूति रखते थे और हिन्दु लोग नाना साहब पेशवा से सहानुभूति रखते थे। “

    कैप्टन हुचिन्सन ने यह देखा कि भोपाल के अभिजात लोगों में ईसाई विरोधी तथा अंग्रेज विरोधी भावना बहुत अधिक थी। नियाज मुहम्मद खान, फौजदार मुहम्मद खा, बदी मुहम्मद खान, त्रिभुवन लाल जैसे महतवपूर्ण नेता तथा अनेक अन्य लोग उस समय वर्तमान व्यवस्था से असंतुष्ट थे। वे सिकन्दर बेगम के शासन के इसलिये विरोधी थे क्योंकि वह कम्पनी सरकार के अंगूठे नीचे थी। जब अवसर आया तो ऐसे व्यक्तियों ने विद्रोह में प्रमुखता से भाग लिया। “

    इस बीच 1 जुलाई, 1857 को इन्दौर के सैनिकों ने विद्रोह कर दिया। उन्हें दंडित करने के लिये भोपाल कॉन्टिन्जेन्ट कैवलरी के लगभग पचहत्तर सैनिकों का एक दल बुलाया गया । किन्तु कमांडर ट्रैवर्स को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि पूरे दल में से केवल 6 सैनिकों ने उसकी आज्ञा मानी। अन्तत: अंग्रेजों को इंदौर छोड़कर जाना पड़ा। कर्नल डयूरेन्उ और उस दल के लोग, जिसमें 17 अधिकारी, 8 महिलायें और 2 बच्चे शामिल थे, भोपाल कॉन्टिनेन्ट के कुछ सैनिकों की रक्षा में उसी दिन सीहोर चले गये। वे लोग 3 जुलाई को आष्टा और 4 जुलाई को सीहोर चले गये। सिकंदर बेगम ने उन्हें आश्रय और संरक्षण दिया। सिकंदर बेगम को अनेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। उसकी माँ तथा मामाओं ने उससे आग्रह किया कि वह अंग्रेजों के विरूद्ध धर्मयुद्ध घोषित कर दे। शहर के मौलवी भी जिहाद का उपदेश दे रहे थे और उसके सैनिकों ने भी उसे आतंकित किया। किन्तु सिकन्दर बगेम नहीं मानी। कर्नल ड्यूरेन्ड तथा उसके दल के साथ वह होशंगाबाद गईं, जहां वे 8 जुलाई को सुरक्षित पहुँच गये।

    9 जुलाई को सीहोर के पॉलिटिकल एजेन्ट मेजर रिचर्डस ने 20 यूरोपियों के साथ सीहोर छोड़ दिया। सीहोर छोड़ते समय उसने स्टेशन का प्रभार कुछ समय के लिये सिकंदर बेगम के अधिकारियों को सौंप दिया, किन्तु सभी व्यावहारिक प्रयोजनों उसका प्राधिकार कुछ भी नहीं था। कॉन्टिन्जेण्ट के सैनिकों ने सीहोर कैन्टोनमेण्ट पर कब्जा कर लिया। उन्होंने अंग्रेजों के बंगलों, डाकघर और सीहोर चर्च को लूट लिया। इस अवसर पर विद्रोही नेता शुजात खान पिंडारी ने मुख्य अधिकारी को मार डाला तथा बेरछा स्थित कम्पनी के खजाने को लूट लिया। जब सिकंदर बेगम ने सीहोर के सैनिकों को शुजात खान के विरूद्ध कार्रवाई करने का आदेश दिया तो उन्होंने आदेश मानने से इंकार कर दिया। इसके पहले के बेगम बदला लेतीं, सीहोर कैवलरी के रिसालदार ने 6 अगस्त, 1857 को खुले तौर पर विद्रोह की घोषणा कर दी। सैनिकों ने सीहोर कैन्टोंमेण्ट की 9 पौंडर तोपों तथा एक 24 पौंडर हो‍विट्जर को अपने कब्जे में ले लिया तथा उन्हें कैवलरी लाइन्स में रख दिया। बेगम ने सीहोर के सैनिकों के विद्रोह को कुचलने के लिये भोपाल से एक सैन्य बल भेजा। भोपाल के सैनिक भी उतने ही क्रांतिकारी थे, जितने सीहोर के सैनिक यद्यापि उन्होंने बेगम के पक्ष में सीहोर के खजाने को बचा लिया। तथापि सीहोर के अधिकांश क्रांतिकारी जिन्हें छोड़ दिया गया था, अन्तत: कानपुर जा पहुँचे और उन्होंने नाना साहब के झंडे के नीचे वीरतापूर्वक युद्ध किया।

    जुलाई, 1857 से लेकर नवंबर, 1857 तक सीहोर तथा उसके आसपास के क्षेत्र में इन्हीं क्रांतिकारियों का वर्चस्व रहा। विद्रोह के रोकने के लिये बेगम ने एक मैत्री विभाग की स्थापना की। उन्होंने सभी ओर से भागकर आये अंग्रेजों को सहायता दी और उन्हें सुरक्षा दी। इतना ही नहीं बल्कि अपने राज्य क्षेत्रों के बाहर भी उत्तर में काल्पी तक अनाज और चारा भेजकर और सागर तथा बुन्देलखण्ड में शान्ति स्थापित करने के लिये सैनिक टुकडियां भेजकर अंग्रेजों की भरसक सहायता की। अंबापानी के जागीरदार फाजिल मुहम्मद खान तथा आदिल मुहम्मद खान पर जिन्होंने विद्रोह कर दिया था, बेगम द्वारा तुरन्त हमला किया गया और उनकी संपदायें छीन ली गईं जबकि राहतगढ़ के हठी किलेदार को, जिसने अंग्रेजों को प्रवेश नहीं करने दिया था, पकड़ लिया गया तथा सूली पर चढ़ा दिया गया। इस बीच वह सीहोर में पुन: शांति स्थापित करने में सफल हो गई और अनेक क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर लिया, जिन्हें बाद में फांसी दे दी गई।

    दिसम्बर, 1857 में ह्यूरोज ने विद्रोह को कुचलने के लिये सेना की कमान सम्हाली, 8 जनवरी को इन्दौर से रवाना होकर वह 15 जनवरी, 1858 को सीहोर पहुँचा। जैसा कि पहले कहा जा चुका है, सीहोर में अनेक क्रांतिकारी पहले से बन्द थे और कोर्ट मार्शल की प्रतीक्षा कर रहे थे। उनमें से 149 क्रांतिकारियों को न्यायालयों ने दोषी पाया तथा उन्हें गोली मार देने की सजा सुनाई गई। इस दण्डादेश के क्रियान्वयन का कार्य तीसरे यूरोपियन सैनिकों को सौंपा गया। सूर्यास्त के समय कैदियों को बाहर लाया गया और उन्हें एक लंबी पंक्ति में खड़ा कियागया और संकेत देते ही उन्हें गोली मार दी गई लेकिन उनमें से एक व्यक्ति बच निकला।

    जब मृत्युदंड देने की कार्रवाई पूरी हो गई तो अंधेरा हो गया और 15 जनवरी की उस लंबी, भयानक रात में तीसरे यूरोपियन बिग्रेड का एक अधिकारी और सैनिक क्रांतिकारियों के शवों की पंक्ति पर पहरा देते रहे और बिग्रेड 16 जनवरी को सुबह 3 बजे राहतगढ़ की ओर बढ़ गई।

    हमारे पहले क्रांतिकारियों को नमन

    (लेखक संभागीय जनसम्पर्क कार्यालय में उप संचालक हैं।)

  • इस देश को हिंदुत्व के विचार से चलाईएःपुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ

    इस देश को हिंदुत्व के विचार से चलाईएःपुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ

    भोपाल, 21 दिसंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।भारत की बहुसंख्यक 90 करोड़ की जनता समान नागरिक अधिकारों की भीख मांग रही है और कुछ उन्मादी लोग अपने विशेष नागरिक अधिकारों का आनंद ले रहे हैं, जबकि लोकतंत्र संख्या बल का खेल होता है। आज के समय में लगता है जैसे सबसे अधिक हिन्दू बिकाऊ है, दो रुपये किलो चावल और एक रुपये किलो गेहूं, सस्ती बिजली में दिल्ली की सरकार चुन ली जाती है। सरकारों को चुनते वक्त हमारे मन में क्या रहता है? इतने सस्ते में हम सत्ता ऐसे लोगों को सौंप देते हैं, जिनके अपने निजी एजेण्डे हैं, उन्हें राष्ट्र और राज्य दोनों से कोई मतलब नहीं। याद रखो, सरकारें बदलने से राष्ट्र नहीं बदलते। आपके वर्तमान को देखकर दुनिया भविष्य में आपको याद रखेगी, यह आप पर निर्भर है कि किस प्रकार का आप इतिहास बना रहे हैं। उक्त विचार वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने सोमवार रात राजधानी भोपाल में आयोजित विचार संगोष्ठी ”विश्व पटल पर सनातन संस्कृति की शाश्वतता” पर व्यक्त किए।
    उन्होंने कहा कि पिछले सत्तर सालों से हमें पढ़ाया जा रहा है कि बाबर, औरंगजेब ने क्या किया, क्या इससे पहले भारत नहीं था? दुनिया भर में सरकारें राष्ट्र नहीं चलातीं, वह देश चलाती हैं। हम किसी सरकार का समर्थन या विरोध नहीं करते हैं, हम तो बस इतना जानते हैं कि जब तक संस्कृति है तब तक यह देश और राष्ट्र है। देश को अखंड रखना है तो राष्ट्र को जागृत करना होगा उसके बगैर यह संभव नहीं है। सरकार के साथ ही यह हम सबकी भी जिम्मेदारी है कि आनेवाले वक्त की आहट को पहचानें। उन्होंने वक्फ प्रॉपर्टी एक्ट 2013, सच्चर कमेटी, अल्पसंख्यक आयोग समेत तमाम मुददों पर विस्तार से बोला और कहा कि स्थितियां अराजकता की तरफ बढ़ रही हैं। 90 करोड़ हिन्दुओं को पता ही नहीं चल रहा है कि उनके साथ कौन सा खेल खेला जा रहा है? बहुसंख्यक होने के बाद भी हिन्दू को पता ही नहीं कि सरकारें किस तरह से उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहीं हैं।
    आंध्रप्रदेश के एक जज के हवाले से उन्होंने कहा कि देश में सबसे ज्यादा जमीन रेलवे के पास है। उसके बाद डिफेंस और फिर वक्फ बोर्ड के पास है। आपके इतने मठ, मंदिर हैं, बहुसंख्यक आप हो, लेकिन आपके पास इतनी जमीन नहीं। संकट तो यह है कि यह वक्फ प्रॉपर्टी एक्ट 2013 इसका एक प्रावधान आर्टिकल 40 बेहद खतरनाक है। यह आर्टिकल बोर्ड को यह अधिकार देता है कि वक्फ बोर्ड के दो सदस्यों को देश में अगर कहीं भी यह लगे कि कोई संपत्ति पहले वक्फ की थी तो वह उसे अपने कब्जे में ले सकता है। बीते 10 सालों में इस कानून के चलते देश में सरकारी जमीनों को कब्जाने का अभियान चल रहा है। इसके लिए उन्हें कोई साक्ष्य देने की जरूरत नहीं है। दोनों सदस्य जिला मजिस्ट्रेट या किसी भी जिम्मेदार अधिकारी को 24 से 72 घंटे में उसे खाली करने का आदेश दे सकते हैं। ऐसी सूरत में पूरी मशीनरी को उस आदेश पर अमल कराना होता है। हाई कोर्ट में ऐसे मामलों की सुनवाई नहीं हो सकती।
    उन्होंने इलाहाबाद में चंद्रशेखर आजाद अल्फ्रेड पार्क का हवाला देते हुए कहा कि कोरोनाकाल में पार्क में मस्जिद, मजार और दूसरे कई निर्माण हो गए। मामला जानकारी में आया तो हमारी टीम के एक सदस्य विष्णु शंकर जैन ने हाई कोर्ट में पिटीशन डाली। तब हाई कोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा, लताड़ लगाई गई। तब कहीं जाकर वहां से वे मजारें हटाई गईं। फिर भी वहां एक मजार बनी रह गई थी, जब उसे हटाने के लिए कोर्ट ने तारीख दी तो कम्प्यूटर में उस दिन को ही नहीं चढ़ाया गया, वह तो विष्णु शंकर जैन हैं जो न्यायाधीश के समक्ष पहुंच गए और बोले कि आज आपने सुनवाई के लिए हमारा भी दिन तय किया है। तब कहीं जाकर पता चला कि खेल किस तरह से खेला जा रहा है और एक हम बहुसंख्यक हिन्दू हैं, समूह में यह समझ ही नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस एक्ट के बाद से सरकारी जमीन घेरने का सिलसिला देशभर में चल रहा है।
    वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र ने 2005 में बनी सच्चर कमेटी के अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कमेटी संवैधानिक नहीं है। वास्तविकता यही है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री ने अपनी मर्जी से मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति का परीक्षण करने के लिए समिति नियुक्त करने का निर्देश जारी किया जबकि अनुच्छेद 14 और 15 के आधार पर किसी भी धार्मिक समुदाय के साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता। सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थिति की जाँच के लिए एक आयोग नियुक्त करने की शक्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद-340 के तहत भारत के राष्ट्रपति के पास निहित है, लेकिन इस पर राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर ही नहीं किए हैं। समिति का गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद-77 के उल्लंघन है और 2006 से इसके बहाने हजारों करोड़ रुपये मुसलमानों के अपलिफ्टमेंट के नाम पर खर्च हो रहे हैं।
    अल्पसंख्यक होने के क्राइटेरिया को लेकर सरकार के पास कोई नीति नहीं है। फिर भी इस कमेटी की सिफारिश पर देश में 5000 करोड़ का सालाना बजट हर साल मुसलमानों को दिया जाता है। इस तरह से यह भारतीय संविधान के समानता के अधिकार का उल्लंघन है। जो लोग टैक्स देते हैं उन्हें सरकार से यह पूछना चाहिए कि आखिर हमारे लिए और हमारे बच्चों के लिए कहां क्या सुविधाएं दे रहे हैं। उन्होंने अल्पसंख्यक आयोग पर भी तार्किक रूप से सवाल उठाए तथा उसके दुरुपयोग की बात कही। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के साथ ही राज्यों में भी अल्पसंख्यक आयोग बने हैं। अल्पसंख्यकों को दोनों आयोगों से आर्थिक सहायता दी जा रही है।
    पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि कुछ राज्यों में हिंदुओं की संख्या नगण्य है, इसके बाद भी मुस्लिम ही अल्पसंख्यक हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लक्षद्वीप में दो प्रतिशत, मेघालय में 11 प्रतिशत, नगालैंड में आठ प्रतिशत, मणिपुर में 31 प्रतिशत, अरुणाचल में 29 प्रतिशत, मिजोरम में दो प्रतिशत, जम्मू-कश्मीर में 28 प्रतिशत और पंजाब में 38 प्रतिशत हिंदू हैं। इन राज्यों में वास्तव में हिंदू अल्पसंख्यक हैं, लेकिन इसके बाद भी यहां मुसलमान ही अल्पसंख्यक कहलाते हैं और वे ही सारी अल्पसंख्यक से जुड़ी सुविधाएं लेते हैं। आखिर यह कहां का न्याय है और संविधान के समानता के अधिकार का पालन कहां हो रहा है।
    उन्होंने गंभीरता पूर्वक एक मामला प्राचीन हिन्दू मंदिरों को लेकर भी उठाया और इशारों-इशारों में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से अपील की कि वे कम से कम भोजशाला धार को तो पूरी तरह से हिन्दुओं को साधना के लिए सौंप दें। कुलश्रेष्ठ ने 1991 में बने प्लेसिस ऑफ वरशिप एक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इस कानून के चलते देशभर के 30 हजार मंदिरों से हिन्दुओं का दावा बिना अपना पक्ष रखे खारिज कर दिया गया है। भारत की संसद को इस बात का कोई अधिकार नहीं है कि मेरे बाप-दादाओं के जिन मंदिरों को लुटेरों ने लूट लिया है उसे हम वापस न ले सकें। उन्होंने कहा कि रातोंरात अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए किसी के दबाव में प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट बनाया।
    उन्होंने देश के समक्ष आंतरिक चुनौतियों की जानकारी देने के साथ ही उसके समाधान भी बताए। साथ ही कहा कि लोकतंत्र संख्या बल का खेल होता है। सनातन संस्कृति के साथ शुरू से खिलवाड़ पिछली सरकारें करती रही हैं। यह पहली सरकार है, जो भगवान राम के भव्य मंदिर के लिए आगे आई है। काशी विश्वनाथ कोरिडोर हो या अन्य देव स्थान आपको इस सरकार के काम स्पष्ट दिखाई देंगे। एक पिछला वक्त था जब इसी देश के किसी प्रधानमंत्री ने सेक्युलर देश के नाम पर मूर्ति स्थापना कार्यक्रम के लिए मना कर दिया था, लेकिन आज प्रधानमंत्री मोदी केदारधाम जा रहे हैं। वे गुफा में ध्यान भी कर रहे हैं, इससे समझ जाना चाहिए कि देश की 90 करोड़ हिन्दू जनता को वह क्या संदेश देना चाहते हैं। इसके बाद भी यदि भारत का हिन्दू नहीं जागता है तो फिर कोई कुछ नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ ही यह हम सबकी भी जिम्मेदारी है कि आनेवाले वक्त की आहट को पहचानें।
    कुलश्रेष्ठ ने कहा कि सरकार बहुत छोटी चीज है, देश और राष्ट्र के बीच में जो फर्क नहीं समझते, उनकी दुर्दशा होती है। सच कहने की प्रवृति डालें, समाज सुधरेगा। जब तक विचार नहीं बदला जाएगा, तब तक भारत में परिवर्तन नहीं हो पाएगा। उन्होंने अपने जागरुकता के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 333 खत्म करने के प्रयासों के बारे में भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत जाति प्रधान नहीं, कर्म प्रधान देश है। यहां त्यागी की पूजा होती है, भगवान श्रीराम क्षत्रिय थे, उनकी पूजा होती है। भगवान परशुराम और रावण भी ब्राह्मण थे, दोनों के कर्म में अंतर है। एक को पूजा जाता है और एक को जलाया जाता है।
    पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ ने इस दौरान राजनैतिक भारत के साथ-साथ सांस्कृतिक भारत की व्याख्या की और देश में सांस्कृतिक भारत के उन पहलुओं से परिचित कराया जिसमें तुलसी, पीपल, नदी समेत सभी तरह से पर्यावरणीय संरक्षण को महत्व दिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का नाम लिए बगैर कहा, बहुत वर्षों बाद आपने एक व्यक्ति को सत्ता में बैठाया और आप चाहते हैं कि सबकुछ एक दिन में ठीक हो जाए, सरकार को अपना काम करने के लिए समय भी दीजिए। हम अपने ही आदमी में कमियां और खामियां ढूंढने की कोशिश करते हैं, लेकिन हमने उन्हें चुना है तो उन्हें काम करने का मौका भी तो दो। अगर वे गलत रास्ते पर जाएं तो उन पर दबाव भी बनाएं।
    वरिष्ठ पत्रकार कुलश्रेष्ठ ने कहा, हर बार सनातन बनकर वोट दीजिए। यह मौका पांच साल में एक बार मिलता है। सरकार सिर्फ देश चलाती है, लेकिन हम पूरा समाज राष्ट्र को संचालित करते हैं। देश से बड़ा है राष्ट्र। इसलिए एकजुट होकर सामाजिक शक्ति का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह द्वारा देशहित में पूर्व में लिए गए निर्णयों की सराहना की। उनका कहना यही था कि सब कुछ की चाबी सरकार के पास है, ऐसा हमें नहीं मानना चाहिए। राष्ट्र क्या है यह हम सभी समझें, वह देश से बड़ा होता है। देश आखिर एक जमीन का टुकड़ा है, उस छोटे से जमीन के टुकड़े को सरकार चलाती है, यह किसी ना किसी विधान से चलती है। उसमें मैं, आप कोई हों, उन्हें उस विधान को मानना होता है। इस सबसे अलग होकर होता है राष्ट्र, उसे चलाने की जिम्मेदारी समाज की होती है, राष्ट्र चलता है मेरे और आपके विश्वास से, परम्पराओं, संस्कारों से। इसलिए हम सभी अपने राष्ट्र के स्व को पहचानें और उसके लिए कार्य करें। इसे हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए जो-जो भी करना चाहिए वह सब कुछ करें।
    राजधानी के एमपीनगर जोन-एक प्रेस काम्प्लेक्स के पास रविवार को हिन्दू राष्ट्र शक्ति के प्रदेश कार्यालय का लोकार्पण किया गया। मुख्य अतिथि हिन्दू राष्ट्र शक्ति के संरक्षक व संस्थापक डा सिकंदर रिज्वी, राष्ट्रीय अध्यक्ष मुत्युंजय ने प्रदेश कार्यालय का लोकार्पण किया। पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि पाकिस्तान की आबादी से अधिक उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ संभाल रहे हैं। हमारे आगे पाकिस्तान की कोई औकात नहीं है। हमारे यहां महंगाई बहुत है, हमारे यहां बेरोजगारी बहुत है। हम पिछड़े हुए हैं, लेकिन कभी आपके लोगों ने आपके आत्म विश्वास को ताकत नहीं दी। पूरे विश्व में आपकी क्या हैसियत है।
    आजादी के बाद 1947 के बाद का रिकार्ड निकाल कर देख लीजिए, जो लोग आपको गाली दे रहे हैं, जो हीन भावना भर रहे हैं। उनकी औकात ही नहीं है आपसे बात करने की। 244 साल में अमेरिका दुनिया का बड़ा विकास की पराकष्ठा पर पहुंचने वाला देश है। पूरी दुनिया को ज्ञान दे रहा है। वो अमेरिका हमे और आपको तमीज सिखा रहे हैं। वो अमेरिका हमे बता रहे हैं कि महिलाओं की बराबरी का मतलब क्या है? भारतीयों को जेंडर जस्टिस्ट नहीं आता। जो ताकत हमारे पास है, जो इतिहास हमारे पास हैं, वो किसी के पास नहीं है।
    हम आत्मविश्वास से किसी दूसरे देशों को बता ही नहीं पा रहे हैं। शर्म आती है अपने देश की बात रखने में। अमेरिका में कोई महिला राष्ट्रपति नहीं बनी। हमारे देश में 16 साल तक एक महिला प्रधानमंत्री रही, एक महिला राष्ट्रपति रही। सारे काम प्रधानमंत्री नहीं करेगा। ऐसा नहीं होता। हम सब को अपना आत्म विश्वास बढ़ाने व ऊर्जा जगाने की जरूरत है, तभी हम अपने देश की उन्नति के बारे में दुनिया को बता पाएंगे। कार्यक्रम में राजपूत महापंचायत के अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह तोमर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।