लोकनिर्माण विभाग द्वारा ‘पर्यावरण से समन्वय’ विषय पर कार्यशाला आयोजित
भोपाल 5 जून (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के मुख्यालय में आयोजित कार्यशाला में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि उनका विभाग अब अपने सामाजिक दायित्वों का भी निर्वहन मुस्तैदी से करने जा रहा है। विभाग के पर्यावरण हितैषी नवाचार एवं ग्रीन टेक्नोलॉजीस पर केंद्रित कार्यशाला ‘पर्यावरण से समन्वय’ के आयोजन में उन्होंने कहा कि केवल आंकड़ों का जाल बिछाकर हम जनता की कसौटी पर खरे नहीं उतर सकते।
, भोपाल में आयोजित इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने कहा कि लोक निर्माण विभाग अब केवल भौतिक निर्माणों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल संरक्षण, हरित तकनीकों के उपयोग और पारिस्थितिकी संतुलन को अपनी कार्यप्रणाली में प्राथमिकता के रूप में शामिल करेगा। उन्होंने विभाग की पर्यावरणीय सोच और भविष्य की कार्यनीतियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण में समरसता ही सतत विकास का मार्ग है।
कार्यशाला में सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री भरत यादव एवं तकनीकी सलाहकार श्री आर के मेहरा, प्रमुख अभियंता श्री केपीएस राणा, प्रमुख अभियंता श्री एस आर बघेल, भवन विकास निगम के प्रमुख अभियंता श्री अनिल श्रीवास्तव, सभी मुख्य अभियंता और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से परिक्षेत्र स्तर पर सभी विभागीय इंजीनियर उपस्थित थे। इस प्रकार कार्यशाला में कुल 1141 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
मंत्री श्री सिंह ने कहा कि “लोक निर्माण से लोक कल्याण” केवल एक नारा नहीं बल्कि विभाग की बुनियादी कार्यनीति है, जिसमें अब पर्यावरणीय संतुलन भी स्वाभाविक रूप से शामिल है। उन्होंने कहा कि विकास की गति के साथ-साथ प्रकृति का संरक्षण अब हर अभियंता की जिम्मेदारी है। मंत्री श्री सिंह ने विभाग के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग औपनिवेशिक काल से ही जल संरक्षण और संचयन के कार्यों में अग्रणी रहा है और वर्तमान में भी यह परंपरा नैतिक जिम्मेदारी रूप में आगे बढ़ रही है।
भूजल स्तर में गिरावट को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए मंत्री श्री सिंह ने कहा कि जल संरक्षण की दिशा में विभाग द्वारा कई ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि विभाग सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली मिट्टी का युक्तियुक्त उपयोग कर ‘लोक कल्याण सरोवर’ का निर्माण कर रहा है। इस पहल के अंतर्गत सरोवरों की डिजाइनिंग, सौंदर्यीकरण, वृक्षारोपण, सूचना पटल और जियो-टैगिंग की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि 500 लोक कल्याण सरोवरों के निर्माण का लक्ष्य है।
इंदौर जिले की मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि पीएम गतिशक्ति पोर्टल के माध्यम से 2 किलोमीटर रेडियस में सरकारी जमीन और निचले क्षेत्र चिन्हित कर 200 से अधिक स्थानों की पहचान की गई। शीघ्र ही गांधीनगर स्थित भास्कराचार्य संस्थान के सहयोग से पीएम गतिशक्ति पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जाएगा। मंत्री श्री सिंह ने यह भी बताया कि वे स्वयं 20 सरोवरों का निरीक्षण करेंगे और सभी प्रमुख अभियंता 10-10 सरोवरों का निरीक्षण करेंगे।
मंत्री श्री सिंह ने बताया कि विभाग अब सड़क किनारे रिचार्ज बोर का निर्माण कर रहा है, जिससे वर्षा जल को भूगर्भ में पहुंचाकर ग्राउंड वाटर रिचार्ज किया जा सकेगा। जबलपुर एलिवेटेड कॉरिडोर पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग का प्रावधान किया गया है। वर्तमान और निर्माणाधीन फ्लाईओवर एवं आरओबी में रैनवाटर हार्वेस्टिंग के लिये जरूरी प्रावधान करने के निर्देश जारी कर दिए गए है।
मंत्री श्री सिंह ने जानकारी दी कि विभाग ने ट्री-शिफ्टिंग कार्य को SOR में शामिल किया है, जिससे निर्माण के साथ-साथ पेड़ों का संरक्षण भी संभव हो रहा है। भोजपुर-बंगरसिया मार्ग के 4 लेन चौड़ीकरण कार्य में प्रभावित 450 से अधिक पेड़ों को शिफ्ट किया जाएगा। और इसी प्रकार अब अन्य मार्गों पर भी पेड़ो को काटने के बजाय उन्हें शिफ्ट करने पर जोर दिया जाएगा।
मंत्री श्री सिंह ने प्रधानमंत्री जी द्वारा शुरू किए गए “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि लोक निर्माण विभाग 1 जुलाई 2025 को एक लाख पौधे लगाएगा। यह अभियान स्कूलों में चल रहे ‘एक पेड़ माँ के नाम 2.0’ से भी समन्वित होगा। उन्होंने इंजीनियरों से आग्रह किया कि वृक्षारोपण स्थलों की पहचान करें, प्रजातियों का चयन करें, जिम्मेदारियाँ तय करें और परिवार के साथ वृक्षारोपण कर सोशल मीडिया पर फोटो साझा करें। ठेकेदारों को भी इस अभियान में शामिल कर प्रोत्साहित किया जाएगा।
विभाग द्वारा हरित भवन निर्माण की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि ऊर्जा दक्ष डिज़ाइन, पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री और नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग विभागीय भवनों में अनिवार्य किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लंबी अवधि में परिचालन लागत भी घटेगी।
मंत्री श्री सिंह ने आगामी मानसून को दृष्टिगत रखते हुए 8 से 10 जून तक राज्यव्यापी सड़क निरीक्षण अभियान चलाने की घोषणा की। इसमें सभी अभियंता सड़कों की स्थिति, जलभराव, गड्ढों और रखरखाव की जरूरतों का आंकलन करेंगे। रिपोर्ट 11 जून तक ऑनलाइन पोर्टल पर प्रस्तुत की जाएगी और आवश्यक मरम्मत कार्य 20 जून तक पूर्ण कर लिए जाएंगे।
लोकपथ मोबाइल एप पर प्राप्त शिकायतों के निराकरण की समय सीमा वर्तमान में 7 दिवस निर्धारित की गई है, जो कि विशेष रूप से कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तय की गई है। हालांकि, सामान्य परिस्थितियों में मरम्मत कार्य अधिकतम 3 दिवस (72 घंटे) में पूरा किया जाना अपेक्षित है। उन्होंने कहा कि सड़कें गड्ढामुक्त रहें और मानसून के दौरान परिवहन में कोई बाधा न आए, यह विभाग की प्राथमिकता है।
कार्यशाला के अंत में मंत्री श्री राकेश सिंह ने स्पष्ट किया कि पर्यावरणीय संरक्षण अब विभाग के हर कार्य की अनिवार्य शर्त बन चुका है। उन्होंने जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण को लेकर विभाग के लिए पांच प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए—
– प्रदेश में 500 लोक कल्याण सरोवरों का निर्माण,
– 01 जुलाई 2025 को एक अभियान के रूप में एक लाख वृक्षारोपण,
– सड़क किनारे दस हजार ‘रिचार्ज बोर’ निर्मित करने
– सभी फ्लाई ओवर एवं एलीवेटेड कॉरिडोर्स पर रैन वाटर हार्वेस्टिंग और
– भोजपुर-बंगरसिया मार्ग के 4 लें चौड़ीकरण कार्य में प्रभावित 450 से अधिक पेड़ों की शिफ्टिंग
उन्होंने कहा कि ये आंकड़े मात्र लक्ष्य नहीं, बल्कि “लोक निर्माण से लोक कल्याण” के संकल्प की मूर्त अभिव्यक्ति हैं। आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘कैच द रेन’ अभियान और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी के ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ में लोक निर्माण विभाग भी अपनी सहभागिता दर्ज करने का संकल्प ले रहा है।
मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक भरत यादव ने कहा कि निर्माण कार्यों को अब केवल भौतिक अधोसंरचना तक सीमित न रखते हुए पर्यावरण संरक्षण को उसका अनिवार्य अंग बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में लोक कल्याण सरोवरों का निर्माण, पौधारोपण, जल संरक्षण, ग्रीन बिल्डिंग एवं रेन वॉटर हार्वेस्टिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई । उन्होंने यह भी कहा कि इन कार्यों में समाज की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
एमडी श्री यादव ने जानकारी दी कि इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं में सौर ऊर्जा और पौधारोपण के प्रावधान शामिल किए गए हैं। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्यों की नियमित निरीक्षण प्रणाली में अब पर्यावरणीय बिंदुओं को भी सम्मिलित किया जाएगा ताकि निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण कर सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
सड़क विकास निगम की तकनीकी सलाहकार श्री आर के मेहरा ने अपने प्रस्तुतीकरण में सड़क किनारे वृक्षारोपण के संबंध में इंडियन रोड कांग्रेस के नियम एवं ट्री शिफ्टिंग प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।
प्रमुख अभियंता श्री के.पी.एस. राणा द्वारा पर्यावरणीय दृष्टिकोण से सड़क निर्माण के महत्व पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने सतत विकास की दिशा में सड़क किनारे हरियाली और रिसाइक्लिंग के प्रयासों को रेखांकित किया।
प्रमुख श्री जी.पी. वर्मा द्वारा “एलीवेटेड फ्लाईओवर एवं रेनवॉटर हार्वेस्टिंग” पर प्रस्तुतीकरण किया गया। साथ ही आरएसटीआई के तकनीकी सलाहकार श्री आर.के. मेहरा द्वारा पोथोल्स अभियानों और टी शिफ्टिंग पर विस्तार से जानकारी दी गई।
भवन निर्माण में ग्रीन टेक्नोलॉजी पर प्रमुख अभियंता श्री एस.आर. बघेल, वहीं पूर्व सड़क निरीक्षण अभियानों की कार्ययोजना पर श्री डी.वी. बोरासी ने प्रस्तुति दी।




























